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सोनम वांगचुक का गंभीर आरोप, अमित शाह के इस्तीफे की मांग

लेह: पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा और पुलिस फायरिंग को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफे की मांग की है। घटना की पहली बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में वांगचुक ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर बिना उचित आदेश के गोली चलाई गई थी। उन्होंने इस मामले की न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की। ये आरोप वांगचुक के हैं; पुलिस ने कार्यक्रम से जुड़े कुछ आरोपों को “झूठा और भ्रामक” बताया है। 24 सितंबर की बरसी पर उठाई इस्तीफे की मांग वांगचुक ने 24 सितंबर 2026 को लेह में आयोजित स्मृति कार्यक्रम में कहा कि पिछले साल हुई हिंसा में चार लोगों की मौत के लिए राजनीतिक जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह को इस घटना की जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ना चाहिए। यह उनकी राजनीतिक मांग है; किसी न्यायिक संस्था ने शाह की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय नहीं की है। पुलिस फायरिंग को लेकर लगाए गंभीर आरोप सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया कि 2025 की हिंसा के दौरान सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया और गोलियां लोगों के शरीर के ऊपरी हिस्सों में लगीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि फायरिंग के लिए स्पष्ट आदेश नहीं था। इन दावों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, क्योंकि जांच रिपोर्ट अब तक जारी नहीं की गई है। न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग 24 सितंबर 2025 की घटना के बाद केंद्र सरकार ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस बीएस चौहान की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित किया था। लद्दाख प्रशासन के आधिकारिक नोटिस के मुताबिक आयोग को हिंसा की परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई और चार लोगों की मौत की जांच का जिम्मा दिया गया था। आयोग ने अक्टूबर 2025 में कार्यवाही शुरू की थी। वांगचुक का कहना है कि एक साल बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने से लोगों में अविश्वास बढ़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रिपोर्ट जारी नहीं की गई तो स्वतंत्र “People’s Tribunal” बनाने पर विचार किया जाएगा। अपनी सुरक्षा को लेकर भी जताई आशंका वांगचुक ने कार्यक्रम में अपनी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर आशंका जताई। उन्होंने दावा किया कि उन्हें ऐसे संदेश मिल रहे हैं कि उनका “एनकाउंटर” हो सकता है। इस आशंका के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसे वांगचुक द्वारा व्यक्त की गई चिंता के रूप में ही देखा जाना चाहिए। पिछले साल चार लोगों की हुई थी मौत 24 सितंबर 2025 को लद्दाख में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग को लेकर चल रहा प्रदर्शन हिंसक हो गया था। पुलिस कार्रवाई में चार लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। इसके बाद 26 सितंबर 2025 को सोनम वांगचुक को National Security Act के तहत हिरासत में लिया गया था। केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में उनकी हिरासत समाप्त कर दी थी। लद्दाख पुलिस ने कुछ आरोप किए खारिज स्मृति कार्यक्रम के दौरान वांगचुक ने आरोप लगाया कि भारी सुरक्षा और बैरिकेडिंग के कारण लोग कार्यक्रम में नहीं पहुंच सके। लद्दाख पुलिस ने इन आरोपों को “false, baseless and misleading” बताया। पुलिस का कहना था कि किसी व्यक्ति को कार्यक्रम में शामिल होने से नहीं रोका गया और बैरिकेडिंग केवल यातायात तथा भीड़ प्रबंधन के लिए की गई थी। लद्दाख की मांगों को लेकर जारी है गतिरोध लद्दाख के कई संगठन लंबे समय से पूर्ण राज्य का दर्जा, स्थानीय भूमि और रोजगार की सुरक्षा तथा संवैधानिक संरक्षण की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन प्रमुख मांगों पर अंतिम समाधान अभी सामने नहीं आया है। वांगचुक का ताजा बयान इसी व्यापक राजनीतिक और संवैधानिक विवाद के बीच आया है। source – India Today / Moneycontrol / Ladakh Administration / PIB / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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लद्दाख का वायरल VIDEO: सुरक्षा बलों से बहस करने वाली Gen-Z महिला ने भारतीय सेना से मांगी माफी

लद्दाख: लद्दाख के मिनामर्ग चेकपोस्ट पर सुरक्षा बलों के साथ बहस करते हुए वायरल हुई 25 वर्षीय महिला पर्यटक ने अब भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और लद्दाख पुलिस से माफी मांगी है। महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें वह सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताते हुए खुद को “Gen Z” बताते हुए सुरक्षाकर्मियों से बहस करती दिखाई दी थी। छह घंटे इंतजार के बाद हुआ था विवाद महिला के मुताबिक, घटना 26 जुलाई को मिनामर्ग चेकपोस्ट के पास हुई थी। उस समय सुरक्षा कारणों से सड़क को अस्थायी रूप से बंद किया गया था और वह तथा उसके साथ यात्रा कर रहे लोग कई घंटों तक इंतजार करते रहे। महिला ने NDTV से बातचीत में बताया कि करीब छह घंटे तक इंतजार और स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने के कारण वह अपना आपा खो बैठी। उसने माना कि गुस्से में उसके द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा गलत थी। “We are Gen Z” वाला VIDEO हुआ वायरल घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद महिला की टिप्पणी “We are Gen Z” काफी चर्चा में रही। वीडियो में वह सुरक्षा कर्मियों के साथ तीखी बहस करती नजर आई। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर उसे लेकर काफी आलोचना हुई। सेना के पूर्व अधिकारियों और कई यूजर्स ने संवेदनशील सीमा क्षेत्र में सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर इस तरह के व्यवहार पर सवाल उठाए। महिला ने सेना से मांगी माफी विवाद बढ़ने के बाद महिला ने अब सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। उसने कहा कि उसका उद्देश्य भारतीय सेना या पुलिस का अपमान करना नहीं था और वह सेना का सम्मान करती है। उसने भारतीय सेना के साथ-साथ J&K Police और Ladakh Police से भी माफी मांगी और कहा कि उसकी टिप्पणी उस समय की निराशा और गुस्से का परिणाम थी। महिला ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए यह भी कहा कि उसे अपने व्यवहार पर पछतावा है और वह इस घटना के कारण मिले ध्यान के लिए ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहती थी। संवेदनशील इलाके में सुरक्षा व्यवस्था का मामला यह विवाद ऐसे इलाके में हुआ जहां सुरक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है। लद्दाख का यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से संवेदनशील है और सैन्य गतिविधियों के कारण कई बार आम नागरिकों की आवाजाही अस्थायी रूप से प्रतिबंधित की जाती है। महिला ने अपने पक्ष में कहा कि अगर उन्हें सड़क बंद होने और इंतजार की वजह के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल जाती, तो शायद स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े नियमों का पालन करना भी यात्रियों की जिम्मेदारी है। सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस वीडियो के वायरल होने के बाद यह मामला केवल एक स्थानीय विवाद नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर Gen Z, नागरिक जिम्मेदारी और सेना के प्रति सम्मान को लेकर बहस शुरू हो गई। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी पहले महिला के व्यवहार पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ऐसी मानसिकता से जोड़ा था जिसमें लोग अपने प्रभाव या पहचान के आधार पर नियमों से ऊपर होने का भाव रखते हैं। माफी के बाद विवाद में नया मोड़ अब महिला की माफी के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। वायरल वीडियो में दिखाई गई घटना को लेकर आलोचना के बाद उसने स्पष्ट किया कि उसके शब्द गलत थे और उसने सेना तथा पुलिस का अपमान करने का इरादा नहीं रखा था। इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा निर्देशों का पालन और यात्रियों को स्पष्ट जानकारी देना दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। स्रोत: NDTV, Indian Express, Times of India, PTI Jai Rashtra News

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सोनम वांगचुक का सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप, बोले—“तस्वीरें सार्वजनिक न करने का वादा तोड़ा”

नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के कुछ मंत्रियों पर वादा तोड़ने और उनका भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया है। वांगचुक के मुताबिक, 26 दिन के अनशन को खत्म करने के दौरान हुई बातचीत में यह सहमति बनी थी कि उनके अनशन समाप्त करने की तस्वीरें तब तक सार्वजनिक नहीं की जाएंगी, जब तक पूरे घटनाक्रम में विपक्ष और छात्र प्रतिनिधियों की भागीदारी को भी शामिल नहीं किया जाता। उनका आरोप है कि इसके बावजूद तस्वीरें सार्वजनिक कर दी गईं। 26 दिन के अनशन के बाद खत्म हुआ आंदोलन सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चले अनशन के बाद अपना अनशन समाप्त किया था। रिपोर्टों के मुताबिक, यह घटनाक्रम गुरुग्राम के एक अस्पताल में हुआ, जहां केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ उनकी बातचीत हुई थी। वांगचुक का कहना है कि अनशन खत्म करने का फैसला बातचीत और सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के बाद लिया गया था। तस्वीरें सार्वजनिक करने को लेकर विवाद वांगचुक ने दावा किया कि बैठक के दौरान इस बात पर स्पष्ट सहमति बनी थी कि उनके अनशन खत्म करने या मंत्रियों के साथ हुई बैठक की तस्वीरें तुरंत सार्वजनिक नहीं की जाएंगी। उनके अनुसार, तस्वीरें तभी जारी की जानी थीं जब इस पूरे घटनाक्रम को केवल सरकार की उपलब्धि के तौर पर पेश करने के बजाय विपक्षी नेताओं और छात्र प्रतिनिधियों की भागीदारी भी दिखाई जाए। लेकिन वांगचुक का आरोप है कि तस्वीरें इससे पहले ही जारी कर दी गईं। “भरोसा टूट गया” वांगचुक ने इस घटनाक्रम पर निराशा जताते हुए कहा कि इस तरह तस्वीरें जारी किए जाने से उनका सरकार और राजनीतिक नेतृत्व पर भरोसा प्रभावित हुआ है। उन्होंने इसे सिर्फ तस्वीरों का मामला नहीं, बल्कि आपसी सहमति और विश्वास का सवाल बताया। उनके मुताबिक, यदि किसी बातचीत में कोई शर्त तय होती है तो दोनों पक्षों को उसका सम्मान करना चाहिए। सरकार, विपक्ष और छात्रों की भागीदारी चाहते थे वांगचुक वांगचुक के अनुसार, लद्दाख में जब सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों को स्वीकार करती है, तो आमतौर पर सरकारी प्रतिनिधि प्रदर्शनकारी को जूस या सूप पिलाकर अनशन समाप्त करवाते हैं। उनका कहना है कि इस बार भी प्रक्रिया ऐसी हो सकती थी, लेकिन इसे केवल सत्तारूढ़ पक्ष की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय सभी पक्षों की भागीदारी दिखाई जानी चाहिए थी। सरकार से लिखित आश्वासन पूरा करने की मांग वांगचुक इससे पहले भी सरकार से उन लिखित आश्वासनों को पूरा करने की मांग कर चुके हैं, जिनके बाद उन्होंने अपना आंदोलन समाप्त किया था। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने के आश्वासन को भी पूरा करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग भी उठाई थी। मुद्दा अब राजनीतिक बहस में भी पहुंचा तस्वीरों को लेकर वांगचुक के आरोप के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया है। जहां वांगचुक इसे भरोसे और वादे का मुद्दा बता रहे हैं, वहीं पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार की ओर से सामने आने वाली आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में तस्वीरें जारी किए जाने और वांगचुक के आरोप का विवरण सामने आया है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग या लिखित सहमति का विस्तृत सार्वजनिक विवरण सामने नहीं आया है। निष्कर्ष सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के मंत्रियों पर वादाखिलाफी और भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि 26 दिन का अनशन खत्म करने के दौरान तस्वीरें सार्वजनिक न करने पर सहमति बनी थी, लेकिन इसके बावजूद तस्वीरें जारी कर दी गईं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इस आरोप पर क्या आधिकारिक जवाब देती है और वांगचुक द्वारा उठाए गए अन्य आश्वासनों पर आगे क्या कार्रवाई होती है। Source: India Today / The Lallantop / Prabhat Khabar / ANI reports जय राष्ट्र न्यूज़

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