राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की तैयारियाँ तेज़, देशभर में बुनकरों और हस्तशिल्प प्रदर्शनियों का होगा आयोजन

नई दिल्ली: 7 अगस्त को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (National Handloom Day) को लेकर देशभर में तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय, राज्य सरकारें, हथकरघा विकास निगम और विभिन्न हस्तशिल्प संस्थाएँ बुनकरों को सम्मानित करने, पारंपरिक वस्त्रों को बढ़ावा देने और भारतीय हथकरघा उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं। कई राज्यों में हैंडलूम एवं हैंडीक्राफ्ट प्रदर्शनियों, सांस्कृतिक आयोजनों, फैशन शो, खरीदार–विक्रेता मिलन कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों की घोषणा की गई है। देशभर में होंगे विशेष आयोजन राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, तेलंगाना और ओडिशा सहित कई राज्यों में विशेष प्रदर्शनियाँ आयोजित की जाएँगी। इन आयोजनों में स्थानीय बुनकर अपनी पारंपरिक साड़ियाँ, शॉल, दुपट्टे, खादी, सिल्क और अन्य हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे। कई स्थानों पर लाइव बुनाई (Live Weaving Demonstration) और पारंपरिक शिल्प कार्यशालाएँ भी आयोजित की जाएँगी। बुनकरों को मिलेगा प्रोत्साहन केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का उद्देश्य देश के लाखों बुनकरों और कारीगरों के योगदान को सम्मान देना तथा उन्हें नए बाजार उपलब्ध कराना है। इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले बुनकरों को सम्मानित किया जाएगा और युवाओं को हथकरघा क्षेत्र से जोड़ने के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएँगे। ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा सरकार का कहना है कि भारतीय हथकरघा उद्योग न केवल सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है बल्कि लाखों लोगों की आजीविका का भी प्रमुख स्रोत है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के माध्यम से ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती मिलेगी। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से भारतीय हैंडलूम उत्पादों को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक आयोजनों से स्थानीय पर्यटन, छोटे व्यापारियों और कारीगरों को आर्थिक लाभ मिलेगा। त्योहारों के सीज़न से पहले हैंडलूम उत्पादों की मांग बढ़ने की भी संभावना है, जिससे बुनकर समुदाय की आय में वृद्धि हो सकती है। निष्कर्ष राष्ट्रीय हथकरघा दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय बुनकरों की कला, परंपरा और मेहनत को सम्मान देने का अवसर है। देशभर में आयोजित होने वाले कार्यक्रम भारतीय हथकरघा उद्योग को नई पहचान देने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करेंगे. Source: Ministry of Textiles | Development Commissioner (Handlooms) जय राष्ट्र न्यूज़

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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की तैयारियाँ तेज़, देशभर में विशेष कार्यक्रमों के जरिए भारतीय बुनकरों और पारंपरिक वस्त्रों को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली: आगामी 7 अगस्त को मनाए जाने वाले 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (National Handloom Day) की तैयारियाँ देशभर में तेज़ हो गई हैं। इस अवसर पर वस्त्र मंत्रालय (Ministry of Textiles) और विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय द्वारा देशभर में प्रदर्शनी, हस्तकरघा मेले, सांस्कृतिक कार्यक्रम, डिज़ाइन प्रदर्शन, बुनकर सम्मान समारोह और जागरूकता अभियानों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य भारतीय हथकरघा विरासत को बढ़ावा देना और बुनकरों को अधिक बाज़ार उपलब्ध कराना है। ‘Weaves of India’ महोत्सव बना मुख्य आकर्षण राष्ट्रीय हथकरघा दिवस से पहले 24 जुलाई से 7 अगस्त तक नई दिल्ली के सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज़ एम्पोरियम (Janpath) में ‘Weaves of India Festival’ आयोजित किया जा रहा है। इस प्रदर्शनी में देशभर की 116 पारंपरिक हथकरघा बुनाई शैलियों को प्रदर्शित किया गया है। इसमें बनारसी, जामदानी, कांजीवरम सिल्क, संभलपुरी इकट, कानी पश्मीना, पैठणी, बावन बूटी, कोटपाड़ और अन्य प्रसिद्ध भारतीय वस्त्र शामिल हैं। हैंडलूम हैकाथॉन और नवाचार को बढ़ावा राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के उपलक्ष्य में Handloom Hackathon 2026 – “Weaving Innovation” का भी आयोजन किया गया है। इसका उद्देश्य तकनीक, डिज़ाइन और नवाचार के माध्यम से भारतीय हथकरघा क्षेत्र को आधुनिक बनाना और युवा उद्यमियों तथा छात्रों को इस क्षेत्र से जोड़ना है। बुनकरों को मिलेगा सीधा लाभ सरकार का कहना है कि इन आयोजनों से देशभर के बुनकरों, कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुँचाने का अवसर मिलेगा। साथ ही लोगों को ‘Vocal for Local’ और भारतीय हस्तनिर्मित वस्त्रों को अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। भारतीय संस्कृति और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस केवल एक उत्सव नहीं बल्कि भारत की समृद्ध वस्त्र परंपरा, स्थानीय कारीगरों और सतत (Sustainable) उत्पादन प्रणाली को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इससे भारतीय हथकरघा उत्पादों की वैश्विक पहचान और निर्यात को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। निष्कर्ष राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम भारतीय बुनकरों की कला, कौशल और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने के साथ-साथ स्थानीय उद्योग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे। Source: Ministry of Textiles | Office of Development Commissioner (Handlooms) | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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