भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली नई परियोजनाओं पर काम तेज़, सरकार की कई निवेश योजनाएँ चर्चा में

नई दिल्ली: भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई नई परियोजनाओं और निवेश योजनाओं पर तेजी से काम शुरू किया है। हाल ही में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) और सेमिकॉन इंडिया 2.0 जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में निवेश का माहौल और मजबूत हुआ है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर हब के रूप में विकसित करना है। केंद्र सरकार के अनुसार नई योजनाओं के माध्यम से घरेलू मूल्य संवर्धन (Value Addition), सप्लाई चेन को मजबूत करने, भारतीय ब्रांड विकसित करने और अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन, निर्यात और रोजगार के नए अवसर बढ़ने की उम्मीद है। इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड से स्टार्टअप्स को मिला बढ़ावा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने जानकारी दी है कि इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) के माध्यम से अब तक 128 कंपनियों और स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा चुका है। यह निवेश आठ वेंचर कैपिटल फंडों के जरिए किया गया है, जिससे डीप-टेक, इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन और उन्नत विनिर्माण क्षेत्र में नवाचार को गति मिली है। मोबाइल और सेमीकंडक्टर सेक्टर पर बड़ा दांव सरकार ने हाल ही में ₹62,500 करोड़ की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) और ₹1,27,500 करोड़ की Semicon India 2.0 योजना को मंजूरी दी है। इन योजनाओं का उद्देश्य भारत में मोबाइल निर्माण, चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करना है। रोजगार और निवेश को मिलेगा लाभ विशेषज्ञों का मानना है कि इन योजनाओं से आने वाले वर्षों में अरबों रुपये का निवेश आकर्षित होगा और हजारों प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सरकार का लक्ष्य इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को अगले कुछ वर्षों में कई गुना बढ़ाना और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करना है। आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा देने वाली ये परियोजनाएँ Make in India, Digital India और Atmanirbhar Bharat अभियान को नई गति देंगी। सरकार का मानना है कि मजबूत घरेलू विनिर्माण क्षमता से आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। निष्कर्ष नई इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल विनिर्माण परियोजनाएँ भारत के तकनीकी और औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। सरकार की निवेश योजनाएँ, स्टार्टअप समर्थन और सेमीकंडक्टर मिशन मिलकर भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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