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RBI की 19 अगस्त को आने वाली MPC मिनट्स पर बाजार की नजर, ब्याज दर और महंगाई के संकेतों का इंतजार

मुंबई: भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार की नजर अब 19 अगस्त 2026 को जारी होने वाली RBI Monetary Policy Committee (MPC) की बैठक की मिनट्स पर है। निवेशक यह समझने की कोशिश करेंगे कि केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में ब्याज दर, महंगाई और मौद्रिक नीति को लेकर किस दिशा में आगे बढ़ सकता है। RBI ने हालिया बैठक में रेपो रेट 5.25% पर रखा RBI की 3 से 5 अगस्त को हुई MPC बैठक में समिति ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया था। MPC ने लगातार चौथी बैठक में दरों में बदलाव नहीं किया और अपना रुख Neutral बनाए रखा। अब बाजार की नजर मिनट्स पर इसलिए है क्योंकि इसमें MPC के छह सदस्यों के विचारों और भविष्य की नीति को लेकर उनके आकलन से आगे की दिशा के संकेत मिल सकते हैं। महंगाई पर भी निवेशकों की नजर जुलाई 2026 में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.45% हो गई, जो RBI के 4% मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर है। हालांकि यह अभी भी RBI की 2-6% सहनशीलता सीमा के भीतर है। खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी ने कुल CPI को ऊपर खींचा है। ऐसे में निवेशक यह देखना चाहेंगे कि MPC सदस्य महंगाई में हालिया तेजी को अस्थायी मानते हैं या आने वाले महीनों के लिए इसे बड़ा जोखिम समझते हैं। अगली ब्याज दर नीति के संकेत मिल सकते हैं हालिया बैठक में RBI ने रेपो रेट में बदलाव नहीं किया था। अब MPC मिनट्स से बाजार को यह संकेत मिलने की उम्मीद है कि मौजूदा परिस्थितियों में आगे दरों में कटौती, लंबे समय तक यथास्थिति या भविष्य में दरों में बढ़ोतरी की संभावना को लेकर सदस्यों की सोच क्या है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां आगे की नीति के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। रुपये और बॉन्ड बाजार पर भी असर MPC मिनट्स का असर केवल ब्याज दरों पर ही नहीं बल्कि रुपये और सरकारी बॉन्ड यील्ड पर भी पड़ सकता है। भारतीय रुपया हाल में डॉलर के मुकाबले दबाव में रहा है। RBI के हस्तक्षेप ने गिरावट को सीमित किया है, जबकि पश्चिम एशिया में तनाव और ऊंची तेल कीमतें रुपये के लिए चुनौती बनी हुई हैं। वहीं बॉन्ड बाजार में निवेशक यह देख रहे हैं कि RBI की नीति आगे चलकर liquidity और ब्याज दरों को किस तरह प्रभावित कर सकती है। अमेरिका-ईरान तनाव भी अहम फैक्टर बाजार के लिए RBI की नीति के साथ-साथ अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतें भी महत्वपूर्ण हैं। तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी भारत के आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव डाल सकती है। इसी वजह से MPC मिनट्स में वैश्विक जोखिमों और महंगाई के बीच RBI के आकलन पर बाजार की खास नजर रहेगी। निवेशकों की नजर इन संकेतों पर 19 अगस्त को जारी होने वाली मिनट्स में बाजार मुख्य रूप से इन बातों पर ध्यान देगा: निष्कर्ष 19 अगस्त की RBI MPC मिनट्स बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत साबित हो सकती हैं। रेपो रेट फिलहाल 5.25% पर है, लेकिन जुलाई की 4.45% महंगाई और पश्चिम एशिया से जुड़े जोखिमों के बीच निवेशक यह जानना चाहते हैं कि RBI आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर कितना सतर्क रहेगा। Source: Reuters, RBI-related reports, NDTV Profit, Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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AI और टेक सेक्टर में बड़ा बदलाव, भारतीय IT कंपनियों के AI निवेश और रणनीति पर बाजार की नजर

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच भारतीय टेक और IT सेक्टर में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि भारतीय कंपनियां AI, डेटा सेंटर, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में कितना निवेश कर रही हैं और इन निवेशों से भविष्य में कमाई कितनी बढ़ सकती है। AI अब IT कंपनियों की रणनीति का अहम हिस्सा भारतीय IT कंपनियां पारंपरिक IT सेवाओं से आगे बढ़कर AI आधारित समाधान, ऑटोमेशन और नए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोर दे रही हैं। बाजार में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि AI कंपनियों के काम करने के तरीके और कर्मचारियों की जरूरतों को बदल रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में कंपनियों के प्रदर्शन को केवल कर्मचारियों की संख्या या बिल योग्य घंटों से मापना पर्याप्त नहीं होगा। AI से होने वाली आय, AI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल और recurring revenue जैसे नए संकेतक ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकते हैं। TCS, Infosys और HCLTech पर खास नजर देश की प्रमुख IT कंपनियों TCS, Infosys और HCLTech की AI रणनीति निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इन कंपनियों में bench strength कम करने और कर्मचारियों को अधिक specialised तथा AI-केंद्रित कामों में लगाने की दिशा में बदलाव देखने को मिल रहा है। इसका संकेत यह है कि IT कंपनियां अब केवल ज्यादा कर्मचारियों के सहारे विकास करने के बजाय AI और automation के जरिए productivity बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। AI Data Centre बन रहे हैं अगला बड़ा निवेश क्षेत्र AI के विस्तार के साथ data centre infrastructure की मांग भी बढ़ रही है। भारतीय कंपनियां AI workloads को संभालने के लिए बड़े स्तर पर computing और data-centre क्षमता विकसित करने पर ध्यान दे रही हैं। इसी दिशा में Yotta Data Services ने AI infrastructure expansion को बढ़ावा देने के लिए करीब ₹8,000 करोड़ तक के IPO की योजना बनाई है। कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल AI infrastructure को मजबूत करने के लिए करना चाहती है। वहीं HCLTech की ओर से भी AI data-centre capacity में निवेश की योजनाओं ने इस क्षेत्र को बाजार की निगाह में ला दिया है। भारत में AI Infrastructure की दौड़ तेज भारत में global technology कंपनियां भी AI infrastructure पर बड़ा फोकस कर रही हैं। Microsoft ने हाल ही में भारत में अपना नया data-centre region शुरू किया है, जिससे देश में cloud और AI workloads के लिए infrastructure capacity बढ़ी है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए AI applications, cloud services और enterprise solutions के क्षेत्र में नए अवसर बनने की उम्मीद है। निवेशकों के लिए AI Opportunity और Risk दोनों AI सेक्टर में बढ़ते निवेश के बावजूद बाजार के सामने चुनौतियां भी हैं। AI से productivity बढ़ने की संभावना है, लेकिन इससे traditional IT services के पुराने business models पर दबाव भी पड़ सकता है। Reuters की हालिया analysis के मुताबिक, AI के दौर में IT कंपनियों के लिए headcount और billable hours जैसे पुराने valuation metrics की अहमियत कम हो रही है, जबकि AI revenue और software-like recurring revenue जैसे नए मॉडल महत्वपूर्ण बन रहे हैं। भारतीय IT सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव AI के कारण भारतीय IT industry अब केवल outsourcing और manpower-based services तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनियां AI platforms, automation, cloud, cybersecurity और enterprise AI solutions की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। बाजार की नजर अब इस बात पर होगी कि कौन-सी कंपनी AI को सिर्फ technology investment के रूप में इस्तेमाल करती है और कौन उसे सीधे revenue और profit growth में बदलने में सफल होती है। निष्कर्ष भारत में AI और टेक सेक्टर का अगला दौर investment, infrastructure और innovation पर केंद्रित दिखाई दे रहा है। TCS, Infosys और HCLTech जैसी IT कंपनियों की AI रणनीति से लेकर Yotta जैसी कंपनियों के data-centre expansion तक, AI अब भारतीय technology ecosystem में बड़ा business driver बनता जा रहा है। Source: Reuters, India Today, Moneycontrol, Microsoft, Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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FIH हॉकी वर्ल्ड कप में भारत की शानदार शुरुआत, Wales पर 3-1 की जीत के बाद अगले मुकाबले पर नजर

नई दिल्ली: भारत ने FIH Hockey World Cup 2026 में शानदार शुरुआत करते हुए Wales को 3-1 से हरा दिया। शुरुआती मुकाबले में जीत के बाद भारतीय टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है और अब उसकी नजर अगले मैच में बेहतर प्रदर्शन के साथ टूर्नामेंट में अपनी स्थिति मजबूत करने पर है। भारत ने Wales को 3-1 से हराया भारत ने मुकाबले में आक्रामक शुरुआत की और लगातार Wales के डिफेंस पर दबाव बनाए रखा। कप्तान Harmanpreet Singh ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो गोल दागे, जबकि भारत की ओर से एक और गोल ने टीम को 3-1 की जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। Wales ने भी मुकाबले में वापसी की कोशिश की, लेकिन भारतीय डिफेंस ने दबाव के बावजूद अपनी बढ़त बनाए रखी। Harmanpreet Singh का शानदार प्रदर्शन भारतीय कप्तान Harmanpreet Singh एक बार फिर टीम के लिए महत्वपूर्ण साबित हुए। उनके दो गोलों ने भारत को मुकाबले में निर्णायक बढ़त दिलाई। उनकी ड्रैग-फ्लिक और पेनल्टी कॉर्नर को भारतीय टीम की सबसे बड़ी ताकतों में माना जा रहा है। टूर्नामेंट के आगे बढ़ने के साथ भारत को उनसे इसी तरह के प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी। जीत के बावजूद टीम के लिए सुधार की गुंजाइश Wales के खिलाफ जीत भारत के लिए सकारात्मक शुरुआत रही, लेकिन टीम को अगले मुकाबलों से पहले कुछ क्षेत्रों में सुधार करने की जरूरत होगी। खासकर फिनिशिंग, पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलने की क्षमता और गेंद पर कब्जा बनाए रखने पर टीम का फोकस रहेगा। World Cup जैसे बड़े टूर्नामेंट में मजबूत टीमों के खिलाफ छोटी गलतियां भी भारी पड़ सकती हैं। अगले मुकाबले की तैयारी तेज पहले मैच में जीत हासिल करने के बाद भारतीय टीम का ध्यान अब अगले मुकाबले पर है। टीम मैनेजमेंट खिलाड़ियों की फिटनेस, रणनीति और विपक्षी टीम की कमजोरी का विश्लेषण कर रहा है। भारत की कोशिश होगी कि शुरुआती जीत की लय को बरकरार रखते हुए अगले मैच में भी तीन अंक हासिल किए जाएं। World Cup में भारत की उम्मीदें घरेलू परिस्थितियों और हाल के प्रदर्शन को देखते हुए भारतीय टीम से इस World Cup में काफी उम्मीदें हैं। टीम का लक्ष्य केवल शुरुआती मुकाबले जीतना नहीं बल्कि टूर्नामेंट के अंतिम चरण तक पहुंचकर खिताब की मजबूत दावेदारी पेश करना होगा। Wales के खिलाफ जीत ने भारत को अच्छी शुरुआत दी है, लेकिन असली चुनौती टूर्नामेंट के अगले दौर में मजबूत विपक्षियों के खिलाफ होगी। निष्कर्ष भारत ने FIH Hockey World Cup 2026 में Wales को 3-1 से हराकर शानदार आगाज किया है। Harmanpreet Singh के दो गोलों ने जीत में अहम भूमिका निभाई। अब भारतीय टीम की नजर अगले मुकाबले पर है, जहां वह जीत की लय बरकरार रखते हुए World Cup अभियान को और मजबूत करना चाहेगी। Source: FIH, Hockey India जय राष्ट्र न्यूज़

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इंडोनेशिया में फिर कांपी धरती, 5.7 तीव्रता के भूकंप से दहशत; कुछ दिन पहले आए 7.7 के झटकों के बाद फिर आफ्टरशॉक

जकार्ता: इंडोनेशिया में सोमवार को एक बार फिर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। 5.7 तीव्रता का भूकंप देश के पूर्वी हिस्से में एंडे के उत्तर-उत्तर-पश्चिम में दर्ज किया गया। यह झटका उस शक्तिशाली 7.7 तीव्रता के भूकंप के कुछ ही दिन बाद आया है, जिसने पूर्वी इंडोनेशिया में भारी तबाही मचाई थी। लगातार महसूस हो रहे हैं भूकंप के झटके 15 अगस्त को पूर्वी इंडोनेशिया में आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद क्षेत्र में लगातार आफ्टरशॉक्स दर्ज किए जा रहे हैं। Reuters के अनुसार सोमवार तक करीब 1,600 आफ्टरशॉक्स रिकॉर्ड किए जा चुके थे, जिनमें से एक झटका 5.6 तीव्रता का भी था। ऐसे में सोमवार का 5.7 तीव्रता का नया भूकंप प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ाने वाला है। फिलहाल नई बड़ी तबाही की सूचना नहीं ताजा 5.7 तीव्रता के भूकंप के बाद तत्काल किसी नई बड़ी क्षति या अतिरिक्त मौत की रिपोर्ट सामने नहीं आई है। हालांकि, पहले से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी होने के कारण प्रशासन और स्थानीय लोग अतिरिक्त झटकों को लेकर सतर्क हैं। 7.7 तीव्रता के भूकंप में भारी नुकसान 15 अगस्त को आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने पूर्वी इंडोनेशिया के East Nusa Tenggara क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया था। भूकंप के कारण घरों और अन्य इमारतों को नुकसान पहुंचा, भूस्खलन हुए और कई सड़कें बाधित हो गईं। Reuters के मुताबिक, इस आपदा में कम से कम 53 लोगों की मौत और 130 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। हजारों लोग अब भी राहत शिविरों में भूकंप प्रभावित इलाकों में हजारों लोग अपने घरों से बाहर रहने को मजबूर हैं। कई परिवार स्कूलों, सरकारी इमारतों और अस्थायी शिविरों में शरण लिए हुए हैं। लगातार आफ्टरशॉक्स के कारण लोग क्षतिग्रस्त घरों में वापस जाने से भी डर रहे हैं। राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों तक जरूरी सामान और चिकित्सा सहायता पहुंचाने में जुटी हैं। भूकंप के बाद भी खतरा बरकरार इंडोनेशिया Pacific Ring of Fire पर स्थित है, जिसके कारण यहां भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां सामान्य हैं। मौजूदा स्थिति में लगातार आफ्टरशॉक्स ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। निष्कर्ष इंडोनेशिया में 5.7 तीव्रता का नया भूकंप ऐसे समय आया है जब देश अभी 7.7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप से उबर रहा है। फिलहाल नए झटके से किसी बड़ी अतिरिक्त क्षति की सूचना नहीं है, लेकिन लगातार आफ्टरशॉक्स के कारण प्रभावित इलाकों में दहशत और सावधानी दोनों बनी हुई हैं। Source: Reuters, The Times of India, LiveMint जय राष्ट्र न्यूज़

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तारिक रहमान की भारत यात्रा पर बांग्लादेश की शर्त, शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर ढाका का दबाव

नई दिल्ली/ढाका: भारत और बांग्लादेश के बीच प्रस्तावित उच्चस्तरीय बैठक से पहले दोनों देशों के रिश्तों में नया तनाव सामने आया है। बांग्लादेश ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा के लिए अनुकूल राजनीतिक माहौल बनाने की जरूरत बताई है और इसी संदर्भ में भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग दोहराई है। ढाका ने क्या कहा? बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता AKM शाहिदुल करीम ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के अधिकारी पिछले कई सप्ताह से तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा को लेकर संपर्क में हैं। हालांकि, ढाका का कहना है कि यात्रा के लिए एक “अनुकूल माहौल” तैयार किया जाना जरूरी है। बांग्लादेश ने भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण संबंधी अपने अनुरोध पर जल्द कार्रवाई करने को कहा है। इसके अलावा ढाका ने भारत में मौजूद अन्य कथित फरार आरोपियों को भी सौंपने की मांग की है। शेख हसीना का मुद्दा क्यों बना अहम? शेख हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए बड़े राजनीतिक उथल-पुथल के बाद भारत आ गई थीं। इसके बाद बांग्लादेश की नई सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की और भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग की। भारत को बांग्लादेश की ओर से प्रत्यर्पण अनुरोध मिल चुका है और भारतीय पक्ष ने कहा है कि मामले की कानूनी प्रक्रियाओं के तहत समीक्षा की जा रही है। तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा तारिक रहमान की भारत यात्रा अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच संभावित दौरे को लेकर बातचीत चल रही है और यह यात्रा भारत-बांग्लादेश संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है। इस दौरे में शेख हसीना के प्रत्यर्पण के अलावा द्विपक्षीय व्यापार, सीमा प्रबंधन और जल बंटवारे जैसे मुद्दे भी चर्चा में आ सकते हैं। भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर असर शेख हसीना का मुद्दा दोनों देशों के संबंधों में सबसे संवेदनशील विषयों में से एक बन चुका है। ढाका लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है, जबकि भारत इस मामले को अपनी कानूनी प्रक्रिया के अनुसार देख रहा है। तारिक रहमान की संभावित यात्रा को दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन प्रत्यर्पण की मांग ने इस यात्रा को राजनयिक रूप से और संवेदनशील बना दिया है। निष्कर्ष बांग्लादेश ने तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा से पहले शेख हसीना के प्रत्यर्पण के मुद्दे को प्रमुखता से उठा दिया है। ढाका चाहता है कि नई दिल्ली उसके प्रत्यर्पण अनुरोध पर तेजी से कार्रवाई करे और यात्रा के लिए अनुकूल माहौल तैयार हो। अब नजर भारत की प्रतिक्रिया और दोनों देशों के बीच आगामी राजनयिक बातचीत पर है। Source: Reuters, NDTV, Hindustan Times, Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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रुपये पर दबाव जारी, ₹95-₹95.50 प्रति डॉलर के दायरे में रहने का अनुमान; RBI और पश्चिम एशिया संकट पर बाजार की नजर

मुंबई: भारतीय रुपया इस सप्ताह भी डॉलर के मुकाबले दबाव में रह सकता है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि रुपया ₹95 से ₹95.50 प्रति डॉलर के सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। RBI का हस्तक्षेप, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिका-ईरान तनाव आने वाले दिनों में रुपये की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे। RBI की नजर रुपये की चाल पर भारतीय रिजर्व बैंक रुपये में तेज गिरावट को रोकने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने पिछले सप्ताह सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर की बिक्री की, जिससे रुपया ₹95.50 प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे बना रहा। बाजार में यह माना जा रहा है कि RBI रुपये में अचानक और तेज कमजोरी को रोकने के लिए आगे भी हस्तक्षेप कर सकता है। अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान तनाव रुपये के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है और भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। भारत अपनी तेल जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में महंगा कच्चा तेल डॉलर की मांग बढ़ाकर रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। RBI की नीति और बाजार की नजर RBI की अगस्त मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा गया था। अब बाजार की नजर 19 अगस्त को जारी होने वाली MPC बैठक की मिनट्स पर है। निवेशक इससे RBI की आगे की ब्याज दर नीति और महंगाई को लेकर सोच का संकेत तलाशेंगे। NRI डिपॉजिट स्कीम भी चर्चा में RBI ने FCNR(B) डिपॉजिट से जुड़े डिस्काउंटेड फॉरेक्स स्वैप सुविधा की समयसीमा को 30 सितंबर से घटाकर 31 अगस्त कर दिया है। इस योजना के जरिए 50 अरब डॉलर से अधिक का प्रवाह आने के बाद RBI ने समयसीमा पहले खत्म करने का फैसला किया। हालांकि, इस बदलाव से निकट अवधि में रुपये के लिए कुछ दबाव पैदा होने की आशंका भी बाजार विशेषज्ञ जता रहे हैं। विदेशी मुद्रा भंडार से RBI को मजबूती भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 707 अरब डॉलर के चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इससे RBI को रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने के लिए पर्याप्त गुंजाइश मिलती है। आगे क्या देखेंगे निवेशक? आने वाले दिनों में बाजार की नजर मुख्य रूप से इन संकेतकों पर रहेगी: निष्कर्ष फिलहाल रुपये के लिए तस्वीर मिश्रित है। RBI का हस्तक्षेप और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार तेज गिरावट को रोकने में मदद कर रहे हैं, लेकिन महंगा तेल और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव रुपये पर दबाव बनाए हुए हैं। Reuters के अनुसार इस सप्ताह रुपया ₹95-₹95.50 प्रति डॉलर के दायरे में रह सकता है। Source: Reuters, Economic Times, RBI-related market reports जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-श्रीलंका टेस्ट में बारिश बनी विलेन, भारत 460/9 पर मजबूत; तीसरे दिन मौसम पर टिकी निगाहें

गॉल: भारत और श्रीलंका के बीच गॉल में खेले जा रहे पहले टेस्ट में बारिश लगातार खेल का मजा किरकिरा कर रही है। दूसरे दिन बारिश के कारण लंबे समय तक खेल रुका, लेकिन सीमित समय में भारतीय टीम ने 460/9 का मजबूत स्कोर खड़ा कर लिया। अब तीसरे दिन भी बारिश की आशंका के चलते मैच के नतीजे पर मौसम का बड़ा असर पड़ सकता है। भारत 460/9 पर दूसरे दिन भारत ने बारिश से प्रभावित खेल में 43 ओवर बल्लेबाजी की और 172 रन जोड़े। दिन का खेल खत्म होने तक भारत 460 रन पर 9 विकेट गंवा चुका था। क्रीज पर कुलदीप यादव 12 और प्रसिद्ध कृष्णा 1** रन बनाकर मौजूद थे। भारत की पारी की सबसे बड़ी खासियत देवदत्त पडिक्कल की 167 रन की शानदार पारी रही। उन्होंने अपने करियर का बेहतरीन टेस्ट प्रदर्शन करते हुए भारतीय पारी को मजबूत आधार दिया। श्रीलंकाई स्पिनरों ने कराई वापसी भारत एक समय बेहद मजबूत स्थिति में था, लेकिन श्रीलंका के स्पिन गेंदबाजों ने बाद में जोरदार वापसी की। प्रभात जयसूर्या ने 4 विकेट लिए, जबकि डेब्यू कर रहे केशरा नुवान्था ने 3 विकेट हासिल किए। दोनों ने मिलकर भारत के अंतिम सात विकेटों में अहम भूमिका निभाई। ऋषभ पंत 39 रन बनाकर आउट हुए, जबकि ध्रुव जुरेल ने 51 रन की उपयोगी पारी खेलकर भारत को 460 तक पहुंचाने में मदद की। तीसरे दिन बारिश सबसे बड़ी चुनौती तीसरे दिन भी गॉल में बारिश का खतरा बना हुआ है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार सोमवार को बारिश की संभावना 83% तक बताई गई है। दिन के कई घंटों में बारिश की संभावना 40% से अधिक रहने का अनुमान है। ऐसे में मुकाबला बार-बार रुक सकता है और भारत के लिए श्रीलंका को आउट करने तथा मैच में निर्णायक बढ़त बनाने के लिए उपलब्ध समय कम हो सकता है। भारत के सामने बड़ा फैसला भारत के पास फिलहाल सिर्फ एक विकेट बाकी है। टीम के सामने यह रणनीतिक सवाल है कि आखिरी विकेट के साथ कितने रन जोड़े जाएं या जल्दी पारी घोषित करके श्रीलंका को बल्लेबाजी के लिए उतारा जाए। अगर बारिश लगातार खेल में बाधा डालती रही, तो भारत की बड़ी पहली पारी भी मैच को जीत में बदलने के लिए पर्याप्त समय नहीं दे पाएगी। मैच का समीकरण भारत ने पहली पारी में 460/9 तक पहुंचकर मजबूत आधार बना लिया है। अब भारतीय गेंदबाजों की कोशिश होगी कि श्रीलंका की पारी को जल्दी समेटकर मैच पर दबाव बनाया जाए। लेकिन बारिश भारत की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। ज्यादा समय खेल नहीं हो पाया तो मुकाबला ड्रॉ की ओर भी बढ़ सकता है। निष्कर्ष भारत ने बारिश से बाधित गॉल टेस्ट में 460/9 का मजबूत स्कोर बनाकर अपनी स्थिति मजबूत रखी है। देवदत्त पडिक्कल की 167 रन की पारी और ध्रुव जुरेल के अर्धशतक ने भारत को बड़ा स्कोर दिलाया। अब तीसरे दिन भारतीय टीम की नजर श्रीलंका के विकेटों पर होगी, लेकिन बारिश मैच के नतीजे की सबसे बड़ी बाधा बन सकती है। Source: Reuters, India Today, NDTV, ESPNcricinfo जय राष्ट्र न्यूज़

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दिमागी नक्सल’ बयान पर सियासी घमासान, पी. चिदंबरम के पलटवार पर किरेन रिजिजू का जवाब

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर BJP और विपक्ष के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने पीएम मोदी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है। इसके बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सफाई देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं को ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा था। लाल किले से पीएम मोदी ने क्या कहा? 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि देश ने हथियारबंद नक्सलवाद को काफी हद तक खत्म किया है, लेकिन ऐसी विचारधाराओं से जुड़े लोग अब भी अवसर तलाश रहे हैं। उन्होंने देश को ऐसे ‘दिमागी नक्सलियों’ से सावधान रहने की बात कही। पीएम के इस बयान के बाद विपक्ष ने सवाल उठाया कि क्या यह टिप्पणी सरकार की आलोचना करने वाले विपक्षी नेताओं और असहमति की आवाजों को निशाना बनाने के लिए की गई थी। चिदंबरम का तीखा पलटवार कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर पीएम मोदी के बयान का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है। उनके बयान के बाद कांग्रेस और BJP के बीच राजनीतिक बहस और तेज हो गई। कांग्रेस नेताओं ने इस शब्दावली को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करने वालों को इस तरह के लेबल से जोड़ना कितना उचित है। रिजिजू ने दी सफाई केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी नेताओं को ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा था। रिजिजू के मुताबिक, इस शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया गया जो माओवादियों का समर्थन करते हैं, संविधान को नहीं मानते या अलगाववादी विचारों तथा अनुच्छेद 370 जैसी पुरानी व्यवस्था के समर्थन में खड़े होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री का निशाना राजनीतिक विरोधी नहीं, बल्कि ऐसी विचारधाराएं हैं जिन्हें सरकार देश की संवैधानिक व्यवस्था और राष्ट्रीय एकता के लिए चुनौती मानती है। विवाद सोशल मीडिया तक पहुंचा चिदंबरम के बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर बहस तेज हो गई। BJP समर्थकों ने चिदंबरम के बयान को पीएम मोदी की बात को अपने ऊपर लेने के रूप में पेश किया, जबकि विपक्षी नेताओं ने इसे सरकार की आलोचना और असहमति को दबाने वाली भाषा बताया। इसी बीच PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी रिजिजू की सफाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह अनुच्छेद 370 का समर्थन करती हैं और इसी संदर्भ में उन्होंने खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहा। BJP बनाम कांग्रेस: बढ़ा राजनीतिक तापमान इस पूरे विवाद ने स्वतंत्रता दिवस के बाद BJP और कांग्रेस के बीच पहले से जारी राजनीतिक टकराव को और बढ़ा दिया है। एक ओर BJP प्रधानमंत्री के बयान को नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ वैचारिक लड़ाई के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक असहमति को निशाना बनाने वाली भाषा बता रहा है। निष्कर्ष ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पी. चिदंबरम के पलटवार और किरेन रिजिजू की सफाई के बाद और तेज हो गया है। फिलहाल राजनीतिक बहस का मुख्य सवाल यही है कि पीएम मोदी की टिप्पणी का वास्तविक निशाना कौन था और इस शब्द की राजनीतिक व्याख्या किस तरह की जाए। Source: India Today, NDTV, ABP News, PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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बिहार के अशोक धाम मंदिर में भगदड़ जैसी स्थिति, कम से कम 6 श्रद्धालुओं की मौत; कई घायल

लखीसराय: बिहार के लखीसराय जिले के अशोक धाम मंदिर में सोमवार सुबह श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। शुरुआती आधिकारिक जानकारी के अनुसार कम से कम 6 श्रद्धालुओं की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद मंदिर परिसर में अफरा-तफरी मच गई। श्रावण के तीसरे सोमवार पर उमड़ी थी भारी भीड़ बताया जा रहा है कि श्रावण के तीसरे सोमवार के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव को जल चढ़ाने के लिए अशोक धाम मंदिर पहुंचे थे। इसी दौरान मंदिर परिसर में भीड़ अचानक बढ़ गई और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। बैरिकेडिंग टूटने की भी बात सामने आई लखीसराय के जिलाधिकारी के अनुसार सुबह करीब 6:30 से 6:45 बजे के बीच भीड़ काफी बढ़ गई थी। शुरुआती जानकारी में मंदिर की एक तरफ की बैरिकेडिंग टूटने के बाद कई लोगों के एक-दूसरे पर गिरने की बात सामने आई है। प्रशासन ने तत्काल मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस अधिकारी ने यह भी कहा कि बिजली का खंभा गिरने और करंट लगने की बात सामने आई है, लेकिन घटना की सही वजह की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। प्रशासन ने शुरू किया राहत और बचाव कार्य घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मंदिर पहुंचीं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा है और मौके पर भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना पर दुख जताते हुए घायलों के समुचित और त्वरित इलाज के लिए प्रशासन को निर्देश दिए हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका घटना अभी विकासशील स्थिति में है। शुरुआती रिपोर्टों में 6 मौतों की पुष्टि हुई थी, जबकि बाद की कुछ रिपोर्टों में 7 मौतों का भी उल्लेख आया है। इसलिए फिलहाल मृतकों की संख्या को लेकर आधिकारिक अपडेट का इंतजार किया जा रहा है। निष्कर्ष लखीसराय के अशोक धाम मंदिर में श्रावण सोमवार के दौरान भारी भीड़ के बीच हुई इस त्रासदी ने मंदिरों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भगदड़ जैसी स्थिति की वास्तविक वजह क्या थी। Source: PTI, The New Indian Express, The Indian Express, Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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बाबा रामदेव का सरकार पर निशाना? सरकारी नौकरियों में ‘90-99% घोटाले’ का दावा, बोले—सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन करना पड़ेगा

हरिद्वार: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर योग गुरु बाबा रामदेव ने सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया, शिक्षा व्यवस्था और देश में कथित भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सरकारी नौकरी के इंटरव्यू में बड़े स्तर पर गड़बड़ी का दावा करते हुए कहा कि अगर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो देश में बड़े आंदोलन की स्थिति बन सकती है। सरकारी नौकरी के इंटरव्यू पर गंभीर आरोप रामदेव ने दावा किया कि सरकारी नौकरियों के इंटरव्यू में 90 से 99 प्रतिशत तक घोटाला होता है। उनके मुताबिक, कई मामलों में पहले से तय कर लिया जाता है कि किस उम्मीदवार को नौकरी देनी है और बाद में चयन प्रक्रिया उसी के अनुसार आगे बढ़ती है। उन्होंने पैसे लेकर भर्ती और पक्षपात के भी आरोप लगाए। हालांकि, 90-99 प्रतिशत के इस आंकड़े के समर्थन में रामदेव ने कोई आधिकारिक आंकड़ा या दस्तावेज पेश नहीं किया है। इसलिए इसे उनके द्वारा लगाया गया आरोप/दावा ही माना जाना चाहिए। जाति और विचारधारा को लेकर भी सवाल रामदेव ने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर भर्ती में योग्यता के बजाय संगठन, विचारधारा, जाति और वर्ग जैसे कारकों का प्रभाव पड़ता है। उन्होंने ऐसी व्यवस्था को युवाओं के साथ अन्याय बताते हुए भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की जरूरत पर जोर दिया। ‘नहीं सुधरे तो आंदोलन करना पड़ेगा’ रामदेव ने व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताते हुए आंदोलन की चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि वह अराजकता या हिंसक आंदोलन के समर्थक नहीं हैं, लेकिन अगर कथित गड़बड़ियों को दूर नहीं किया गया तो लोगों और युवाओं में असंतोष बढ़ सकता है और उन्हें दोबारा आंदोलन के लिए उतरना पड़ सकता है। शिक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल रामदेव ने सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की व्यवस्थाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बुनियादी सुविधाओं जैसे शिक्षक, पानी, बिजली, शौचालय और किताबों की उपलब्धता को लेकर शिकायतों का जिक्र किया। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किए बिना युवाओं के भविष्य को बेहतर नहीं बनाया जा सकता। राजनीति में संवाद की अपील रामदेव ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से राजनीतिक मतभेदों को दुश्मनी में नहीं बदलने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की अपनी जिम्मेदारी है और देशहित में आपसी संवाद तथा सम्मान जरूरी है। क्या यह सीधे मोदी सरकार पर हमला था? रामदेव के बयान में सरकारी व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया पर तीखे सवाल जरूर उठाए गए, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उनका मुख्य फोकस सरकारी नौकरी, इंटरव्यू, शिक्षा व्यवस्था और कथित भ्रष्टाचार पर था। इसलिए इसे सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यक्तिगत हमला बताने के बजाय सरकारी व्यवस्था पर रामदेव की आलोचना के रूप में देखना ज्यादा सटीक होगा। निष्कर्ष स्वतंत्रता दिवस पर बाबा रामदेव के बयान ने सरकारी भर्ती और शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। 90-99% घोटाले के उनके दावे और आंदोलन की चेतावनी ने राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को तेज कर दिया है। हालांकि, उनके लगाए गए प्रतिशत संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या आधिकारिक आंकड़ों से पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। Source: ABP News, NewsTak, Peoples Update जय राष्ट्र न्यूज़

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