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ब्रह्मोस सिर्फ एक झांकी… भारत का लक्ष्य ₹50,000 करोड़ का रक्षा निर्यात, स्वदेशी रक्षा उद्योग को मिलेगी नई उड़ान

नई दिल्ली: भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ा लक्ष्य तय किया है। केंद्र सरकार ने आने वाले वर्षों में ₹50,000 करोड़ (लगभग 6 अरब डॉलर) के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा है। सरकार का मानना है कि ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल की अंतरराष्ट्रीय सफलता केवल शुरुआत है और आने वाले समय में भारत स्वदेशी हथियार प्रणालियों, मिसाइलों, रडार, ड्रोन, नौसैनिक प्लेटफॉर्म और सैन्य तकनीक के निर्यात में दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल होगा। ब्रह्मोस ने खोले नए अवसर भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से विकसित ब्रह्मोस मिसाइल पहले ही कई देशों का ध्यान आकर्षित कर चुकी है। फिलीपींस के साथ हुए रक्षा समझौते के बाद अन्य मित्र देशों ने भी इस मिसाइल प्रणाली में रुचि दिखाई है। सरकार का कहना है कि ब्रह्मोस की सफलता ने भारतीय रक्षा उद्योग की विश्वसनीयता को नई पहचान दी है और अब कई स्वदेशी प्रणालियाँ वैश्विक बाजार में प्रवेश करने के लिए तैयार हैं। ₹50,000 करोड़ निर्यात का रोडमैप रक्षा मंत्रालय के अनुसार लक्ष्य केवल हथियार बेचने तक सीमित नहीं है। सरकार रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (Defence Manufacturing Ecosystem) को मजबूत करने, निजी उद्योग की भागीदारी बढ़ाने और रक्षा स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने पर काम कर रही है। इसके तहत— किन उत्पादों पर रहेगा फोकस? भारत आने वाले वर्षों में जिन रक्षा उत्पादों के निर्यात पर विशेष ध्यान दे रहा है, उनमें शामिल हैं— आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा निर्यात बढ़ने से भारत को केवल विदेशी मुद्रा ही नहीं मिलेगी, बल्कि लाखों रोजगार भी सृजित होंगे। रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और उच्च तकनीकी विनिर्माण को भी नई गति मिलेगी। सरकार का उद्देश्य भारत को केवल रक्षा उपकरणों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक विश्वसनीय रक्षा आपूर्तिकर्ता बनाना है। वैश्विक बाजार में बढ़ती भारतीय मौजूदगी हाल के वर्षों में भारत का रक्षा निर्यात लगातार बढ़ा है। एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और मध्य-पूर्व के कई देशों ने भारतीय रक्षा उत्पादों में रुचि दिखाई है। सरकार का कहना है कि गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धी कीमत और विश्वसनीय तकनीक भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में मजबूत स्थान दिला सकती है। निष्कर्ष ब्रह्मोस मिसाइल की सफलता के बाद भारत अब रक्षा निर्यात के नए युग में प्रवेश कर रहा है। ₹50,000 करोड़ के निर्यात लक्ष्य के साथ सरकार स्वदेशी रक्षा उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाने और भारत को दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्यातकों में शामिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। Source: Ministry of Defence | Defence Production Department जय राष्ट्र न्यूज़

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राष्ट्रीय | जयपुर में करणी सेना का बड़ा ऐलान; समर्थकों से कहा – “BJP को वोट नहीं देंगे”

जयपुर में आयोजित करणी सेना की सभा के दौरान प्रदेश अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने आगामी निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर समर्थकों से बड़ा संकल्प दिलवाया। सभा के दौरान उन्होंने समर्थकों से भारतीय जनता पार्टी (BJP) को वोट न देने की अपील की। यह घोषणा UGC Roll Back और सवर्ण समाज की विभिन्न मांगों के समर्थन में निकाली गई रैली के दौरान की गई। रैली के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी देखने को मिली। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया तथा लाठीचार्ज किए जाने की भी खबरें सामने आईं। हालांकि, इस घटनाक्रम और विभिन्न पक्षों के दावों पर संबंधित प्रशासन एवं भाजपा की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। #KarniSena#MahipalSinghMakrana#Jaipur#Rajasthan#BJP UGCRollBack BreakingNews JayRashtraNews

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महाराष्ट्र | अकोला मनपा की आवारा कुत्तों को पकड़ने की मुहिम पर नगरसेवक फझलू पहलवान ने उठाए सवाल

अकोला महानगरपालिका की हुई बैठक में नगरसेवक फझलू पहलवान ने शहर में चल रही आवारा कुत्तों को पकड़ने की मुहिम पर सवाल उठाए। उन्होंने अपने अलग और बेबाक अंदाज में प्रशासन से पूछा कि अभियान के बावजूद शहर में आक्रामक आवारा कुत्तों की समस्या क्यों बनी हुई है। उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। फझलू पहलवान के इस मुद्दे को उठाने के बाद नगर निगम की बैठक में आवारा कुत्तों की समस्या और अभियान की कार्यप्रणाली पर चर्चा हुई। Video Credit @akolanewsnetwork #अकोला #फजलूपहलवान #नगर निगम #आवारा कुत्ते #महाराष्ट्र ब्रेकिंगन्यूज

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स्वतंत्रता दिवस से पहले देशभर में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियाँ तेज़

नई दिल्ली: आगामी 79वें स्वतंत्रता दिवस के मद्देनज़र देशभर में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ जिला प्रशासन, शैक्षणिक संस्थान और सामाजिक संगठन राष्ट्रीय पर्व को जनभागीदारी के साथ मनाने की तैयारी कर रहे हैं। इस वर्ष ‘हर घर तिरंगा 2026’ अभियान 9 अगस्त से 17 अगस्त तक चलाया जाएगा, जिसके तहत नागरिकों से अपने घरों, कार्यालयों और प्रतिष्ठानों पर तिरंगा फहराने की अपील की गई है। देशभर में विशेष कार्यक्रमों की योजना कई राज्यों ने स्वतंत्रता दिवस सप्ताह के दौरान तिरंगा यात्राएँ, देशभक्ति सांस्कृतिक संध्याएँ, लोकनृत्य प्रस्तुतियाँ, स्कूल प्रतियोगिताएँ, हस्तशिल्प प्रदर्शनियाँ और युवा कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है। पश्चिम बंगाल सरकार ने पहली बार अभियान में व्यापक भागीदारी करते हुए 70 लाख राष्ट्रीय ध्वज वितरित करने और 10 अगस्त को कोलकाता में भव्य तिरंगा रैली आयोजित करने की योजना बनाई है। हर घर तिरंगा अभियान को जनआंदोलन बनाने पर जोर सरकार का उद्देश्य इस अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखकर जनभागीदारी का राष्ट्रीय उत्सव बनाना है। नागरिकों को हर घर तिरंगा पोर्टल पर “Selfie with Tiranga” अपलोड करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। विदेशों में भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों ने भी प्रवासी भारतीयों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है। स्थानीय प्रशासन की तैयारियाँ उत्तर प्रदेश के वाराणसी, कानपुर, गुजरात के गांधीनगर सहित कई शहरों में जिला प्रशासन ने बाज़ारों, सार्वजनिक स्थलों और सरकारी भवनों को तिरंगे से सजाने, सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने और नागरिक भागीदारी बढ़ाने की तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। स्थानीय प्रशासन स्वयंसेवी संगठनों, व्यापारिक संस्थाओं और युवाओं को अभियान से जोड़ने के लिए विशेष बैठकें कर रहा है। स्कूलों और युवाओं की भागीदारी देशभर के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में देशभक्ति गीत, भाषण प्रतियोगिताएँ, निबंध लेखन, चित्रकला, तिरंगा रैलियाँ और वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। शिक्षा विभाग ने संस्थानों से अधिकतम छात्र भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा है ताकि युवाओं में राष्ट्रीय एकता और संविधान के प्रति सम्मान की भावना मजबूत हो। निष्कर्ष स्वतंत्रता दिवस 2026 से पहले देशभर में राष्ट्रभक्ति का माहौल बनने लगा है। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से सरकार नागरिकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करना चाहती है, ताकि राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देश की एकता का संदेश हर घर तक पहुँचे. Source: Ministry of Culture | Ministry of Home Affairs जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत–श्रीलंका टेस्ट सीरीज़ से पहले कोलंबो में अभ्यास मैच शुरू, टीम इंडिया की तैयारियों पर सभी की नज़र

कोलंबो: भारत और श्रीलंका के बीच आगामी दो मैचों की टेस्ट सीरीज़ से पहले भारतीय टीम ने शुक्रवार से कोलंबो के नॉनडिस्क्रिप्ट्स क्रिकेट क्लब (NCC) ग्राउंड पर श्रीलंका क्रिकेट इलेवन (SLC XI) के खिलाफ चार दिवसीय अभ्यास मैच खेलना शुरू कर दिया है। यह मुकाबला भारतीय खिलाड़ियों के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने और अंतिम एकादश तय करने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है. बारिश बनी सबसे बड़ी चुनौती अभ्यास मैच के पहले दिन मौसम ने खिलाड़ियों और आयोजकों की चिंता बढ़ा दी। कोलंबो में लगातार बारिश के कारण मैच प्रभावित होने की आशंका बनी रही। मौसम विभाग ने पूरे अभ्यास मैच के दौरान रुक-रुक कर वर्षा की संभावना जताई है, जिससे टीम इंडिया की तैयारियों पर असर पड़ सकता है. शुभमन गिल चोट के कारण पहले दिन बाहर भारतीय कप्तान शुभमन गिल अभ्यास सत्र के दौरान दाहिने हाथ की उंगली में चोट लगने के कारण पहले दिन मैदान पर नहीं उतरे। उनकी अनुपस्थिति में केएल राहुल ने टीम की कप्तानी संभाली। टीम प्रबंधन के अनुसार गिल की चोट गंभीर नहीं है और उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है. गेंदबाजों के लिए अहम अभ्यास टीम प्रबंधन का मानना है कि यह अभ्यास मैच विशेष रूप से तेज़ और स्पिन गेंदबाजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। श्रीलंका की पिचों पर गेंद की गति और स्पिन दोनों अलग तरह का व्यवहार करती हैं, इसलिए गेंदबाजों को मैच परिस्थितियों में अभ्यास का अवसर मिलेगा। बल्लेबाजों के लिए भी लंबी पारी खेलने और संयम के साथ बल्लेबाज़ी करने की परीक्षा होगी. 15 अगस्त से शुरू होगी टेस्ट सीरीज़ अभ्यास मैच के बाद भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज़ का पहला मुकाबला 15 अगस्त से गाले इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा, जबकि दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो के SSC ग्राउंड में होगा। भारतीय टीम इस सीरीज़ को जीतकर श्रीलंका में अपने मजबूत रिकॉर्ड को आगे बढ़ाना चाहेगी. निष्कर्ष कोलंबो में खेला जा रहा अभ्यास मैच भारतीय टीम के लिए केवल औपचारिक मुकाबला नहीं, बल्कि टेस्ट सीरीज़ से पहले अंतिम तैयारी का महत्वपूर्ण चरण है। बारिश, स्थानीय परिस्थितियाँ और खिलाड़ियों की फिटनेस पर सभी की नज़र बनी हुई है, क्योंकि इन्हीं तैयारियों के आधार पर भारत अपनी टेस्ट चुनौती की शुरुआत करेगा। Source: BCCI | Sri Lanka Cricket जय राष्ट्र न्यूज़

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IMD ने कई राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ की चेतावनी जारी की, उत्तर भारत और पूर्वोत्तर में हाई अलर्ट

नई दिल्ली: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों में सक्रिय मानसून प्रणाली को देखते हुए उत्तर भारत, पूर्वोत्तर और मध्य भारत के अनेक राज्यों के लिए भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार अगले 24–48 घंटों के दौरान दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और त्रिपुरा में तेज़ बारिश, गरज-चमक और तेज़ हवाओं की संभावना है। दिल्ली-NCR में जलभराव और ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका IMD के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रुक-रुक कर तेज़ बारिश हो सकती है। इससे निचले इलाकों में जलभराव, ट्रैफिक जाम और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना है। नगर निगम और प्रशासन को जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त रखने तथा संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन का खतरा उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में लगातार वर्षा के कारण भूस्खलन, चट्टानें गिरने और नदी-नालों के जलस्तर में तेज़ वृद्धि की आशंका जताई गई है। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने तथा मौसम विभाग के अपडेट का पालन करने की अपील की है। पूर्वोत्तर राज्यों में बाढ़ की स्थिति पर निगरानी असम, मेघालय और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में कई नदियों का जलस्तर बढ़ने की संभावना है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला प्रशासन को राहत एवं बचाव दल तैयार रखने, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने और आवश्यक होने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन और राहत एजेंसियाँ अलर्ट पर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें संभावित बाढ़ और आपात स्थितियों से निपटने के लिए तैयार रखी गई हैं। स्थानीय प्रशासन को स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक सेवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। नागरिकों के लिए सलाह IMD ने लोगों से अपील की है कि वे जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें, नदी-नालों के पास जाने से बचें और खराब मौसम के दौरान केवल आवश्यक होने पर ही यात्रा करें। बिजली गिरने की आशंका वाले क्षेत्रों में खुले स्थानों पर न रुकने और आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर नज़र रखने की सलाह भी दी गई है। निष्कर्ष देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है और भारी बारिश का दौर अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकता है। मौसम विभाग ने नागरिकों से सतर्क रहने, प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने की अपील की है। Source: India Meteorological Department (IMD) जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत–चीन ने सीमा मुद्दों पर संवाद जारी रखने पर सहमति दोहराई, कूटनीतिक और सैन्य चैनलों से समाधान की दिशा में प्रयास तेज़

नई दिल्ली: भारत और चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े लंबित सीमा मुद्दों को कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर बातचीत के माध्यम से सुलझाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हाल ही में हुई उच्चस्तरीय वार्ताओं में इस बात पर सहमति बनी कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। दोनों पक्षों ने संवाद की प्रक्रिया जारी रखने और आपसी विश्वास बढ़ाने पर बल दिया। सीमा पर शांति बनाए रखने पर जोर वार्ता के दौरान दोनों देशों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि सीमा पर तनाव कम करने और किसी भी प्रकार की गलतफहमी से बचने के लिए स्थापित कूटनीतिक और सैन्य संवाद तंत्र का प्रभावी उपयोग जारी रखा जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि नियमित बैठकों और संपर्क व्यवस्था के माध्यम से जमीनी स्थिति पर लगातार चर्चा होती रहेगी। कूटनीतिक और सैन्य चैनलों की भूमिका भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर कई दौर की कोर कमांडर स्तर की सैन्य वार्ता और Working Mechanism for Consultation and Coordination (WMCC) की बैठकें पहले भी आयोजित होती रही हैं। दोनों देशों ने माना कि यही तंत्र भविष्य में भी विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और सीमा प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। द्विपक्षीय संबंधों पर सकारात्मक प्रभाव की उम्मीद भारत ने स्पष्ट किया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों की बुनियाद है। व्यापार, निवेश, पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग तभी आगे बढ़ सकता है जब सीमा पर सामान्य स्थिति बनी रहे। चीन ने भी संवाद जारी रखने और मतभेदों को नियंत्रित रखने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की। आर्थिक और क्षेत्रीय सहयोग पर भी चर्चा सूत्रों के अनुसार वार्ता में क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने कहा कि मतभेदों को विवाद में बदलने के बजाय बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशना दोनों देशों के हित में है। विशेषज्ञों की राय रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित कूटनीतिक और सैन्य वार्ता सीमा क्षेत्रों में तनाव कम करने और आकस्मिक घटनाओं की संभावना घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उनका कहना है कि विश्वास बहाली के उपायों और निरंतर संवाद से भविष्य में स्थायी समाधान की दिशा में प्रगति संभव हो सकती है। निष्कर्ष भारत और चीन ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि सीमा विवाद का समाधान शांतिपूर्ण वार्ता, कूटनीतिक प्रयासों और सैन्य संवाद के माध्यम से ही खोजा जाएगा। दोनों देशों ने सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने, विश्वास बढ़ाने और संवाद की प्रक्रिया जारी रखने पर सहमति दोहराई है। Source: Ministry of External Affairs (MEA) जय राष्ट्र न्यूज़

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AI और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की समीक्षा बैठकें तेज़, नई निवेश परियोजनाओं पर फोकस

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल गवर्नेंस से जुड़ी नई परियोजनाओं एवं निवेश प्रस्तावों की समीक्षा तेज़ कर दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर AI आधारित डिजिटल सेवाओं, स्मार्ट प्रशासन और तकनीकी अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में कई प्रस्तावों का मूल्यांकन कर रहा है। सरकार का उद्देश्य AI के माध्यम से नागरिक सेवाओं को अधिक तेज़, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। स्वदेशी AI मॉडल और नए निवेश को मिली गति हाल ही में सरकार ने 20 स्वदेशी AI फाउंडेशन मॉडल विकसित करने के प्रस्तावों को समर्थन देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही AI अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 58 Centres of Excellence को भी मंजूरी दी गई है। सरकार ने इन परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध कराने का भी फैसला किया है, ताकि भारतीय स्टार्टअप, शोध संस्थान और उद्योग वैश्विक स्तर की AI तकनीक विकसित कर सकें। डिजिटल गवर्नेंस पर विशेष जोर MeitY के नेतृत्व में विभिन्न मंत्रालयों से प्राप्त 700 से अधिक AI उपयोग मामलों और 760 से अधिक प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जा रहा है। इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, न्याय, परिवहन, शहरी विकास और प्रशासनिक सेवाओं में AI के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार चाहती है कि डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से सरकारी सेवाएँ अधिक नागरिक-केंद्रित और डेटा-आधारित बनें। डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश AI के बढ़ते उपयोग को देखते हुए देश में डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश भी तेज़ हुआ है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार जून तिमाही में संस्थागत निवेश का बड़ा हिस्सा डेटा सेंटर परियोजनाओं में गया, जिससे स्पष्ट है कि AI आधारित डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक अवसंरचना तेजी से विकसित की जा रही है। AI गवर्नेंस और सुरक्षा पर भी ध्यान सरकार केवल तकनीकी निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि जिम्मेदार AI उपयोग के लिए AI Governance Framework और सुरक्षा मानकों पर भी काम कर रही है। विशेषज्ञ समितियाँ AI से जुड़े नैतिक, गोपनीयता और पारदर्शिता संबंधी मुद्दों की समीक्षा कर रही हैं ताकि नई तकनीकों का उपयोग सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से किया जा सके। निष्कर्ष भारत AI और डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश और नीतिगत सुधारों के माध्यम से वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार का मानना है कि स्वदेशी AI मॉडल, मजबूत डिजिटल अवसंरचना और जिम्मेदार AI गवर्नेंस के संयोजन से देश की प्रशासनिक क्षमता और डिजिटल अर्थव्यवस्था दोनों को नई गति मिलेगी। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | IndiaAI Mission जय राष्ट्र न्यूज़

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लोकसभा ने UPI लेनदेन पर संभावित MDR शुल्क का रास्ता खोलने वाला विधेयक पारित किया, डिजिटल भुगतान क्षेत्र में बड़ी बहस

नई दिल्ली: लोकसभा ने Payment and Settlement Systems (PSS) Act, 2007 में संशोधन से जुड़े प्रावधानों वाला Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पारित कर दिया है। इस संशोधन के बाद केंद्र सरकार को भविष्य में Unified Payments Interface (UPI) सहित अधिसूचित डिजिटल भुगतान माध्यमों पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने की अनुमति देने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा। हालांकि, विधेयक पारित होने का मतलब यह नहीं है कि UPI पर तुरंत शुल्क लग गया है। क्या बदलेगा? अब तक UPI भुगतान पर उपभोक्ताओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाता था और व्यापारियों पर भी MDR लागू नहीं था। नए संशोधन के बाद सरकार आवश्यकता पड़ने पर अधिसूचना जारी करके बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को कुछ श्रेणियों के UPI लेनदेन पर MDR लगाने की अनुमति दे सकती है। यह कदम डिजिटल भुगतान ढांचे को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से उठाया गया बताया जा रहा है। क्या आम उपभोक्ता को भुगतान करना होगा? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित MDR उपभोक्ताओं पर नहीं, बल्कि व्यापारियों (Merchants) पर लागू होगा। उन्होंने कहा कि आम लोग पहले की तरह बिना किसी शुल्क के UPI का उपयोग कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य केवल भुगतान व्यवस्था के संचालन से जुड़े खर्चों के लिए कानूनी ढांचा उपलब्ध कराना है। छोटे लेनदेन पर असर नहीं सरकारी सूत्रों और उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार ₹2,000 तक के अधिकांश छोटे UPI भुगतान पहले की तरह शुल्क-मुक्त रहने की संभावना है। यदि भविष्य में MDR लागू किया भी जाता है, तो उसका दायरा मुख्यतः बड़े व्यापारी लेनदेन तक सीमित हो सकता है। अंतिम निर्णय सरकार द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद ही प्रभावी होगा। डिजिटल भुगतान उद्योग की प्रतिक्रिया बैंकिंग और फिनटेक उद्योग लंबे समय से तर्क दे रहे थे कि पूरी तरह निःशुल्क UPI मॉडल के कारण भुगतान अवसंरचना (Infrastructure) को बनाए रखने की लागत लगातार बढ़ रही है। उनका कहना है कि सीमित MDR व्यवस्था से बैंक, NPCI और भुगतान सेवा प्रदाता तकनीकी निवेश, साइबर सुरक्षा और नई सेवाओं में अधिक निवेश कर सकेंगे। दूसरी ओर कई व्यापारी संगठनों ने आशंका जताई है कि यदि MDR लागू हुआ तो छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है। राजनीतिक बहस विधेयक संसद में विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच पारित हुआ। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस तरह का महत्वपूर्ण कानून पर्याप्त चर्चा के बिना पारित किया गया, जबकि सरकार का कहना है कि यह केवल भविष्य के लिए कानूनी प्रावधान उपलब्ध कराता है और किसी प्रकार का तत्काल शुल्क लागू नहीं करता। निष्कर्ष लोकसभा द्वारा पारित संशोधन ने UPI पर संभावित MDR लागू करने का कानूनी रास्ता अवश्य खोला है, लेकिन फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान पहले की तरह मुफ्त है। भविष्य में किसी भी प्रकार का शुल्क लागू करने के लिए केंद्र सरकार को अलग से अधिसूचना जारी करनी होगी। Source: Ministry of Finance | Lok Sabha Proceedings जय राष्ट्र न्यूज़

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सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया—SC/ST आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ लागू नहीं होगी, संसद और राजनीतिक गलियारों में बहस तेज़

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण पर ‘क्रीमी लेयर’ सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता। सरकार ने अदालत से कहा कि SC/ST समुदायों को मिलने वाला आरक्षण केवल आर्थिक स्थिति पर आधारित नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक और सामाजिक भेदभाव की भरपाई के उद्देश्य से संविधान में दिया गया है। इसलिए आर्थिक रूप से सक्षम होने मात्र से इन वर्गों के लोगों को आरक्षण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। सरकार ने क्या कहा? केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि क्रीमी लेयर का सिद्धांत वर्तमान में केवल अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) पर लागू होता है। SC/ST समुदायों की सामाजिक स्थिति और उनके साथ होने वाला ऐतिहासिक भेदभाव OBC से अलग प्रकृति का है। सरकार का तर्क है कि इन समुदायों के साथ होने वाला सामाजिक भेदभाव आर्थिक उन्नति के बाद भी पूरी तरह समाप्त नहीं होता, इसलिए केवल आय या आर्थिक स्थिति के आधार पर उन्हें आरक्षण से बाहर करना संविधान की भावना के विपरीत होगा। सुप्रीम कोर्ट में क्या मामला है? सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में मांग की गई है कि SC/ST आरक्षण के भीतर भी आर्थिक रूप से सक्षम वर्गों को अलग कर “क्रीमी लेयर” लागू की जाए ताकि आरक्षण का लाभ सबसे अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुँचे। केंद्र सरकार ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि ऐसा कोई भी बड़ा बदलाव न्यायिक आदेश के बजाय विधायी और नीतिगत प्रक्रिया के माध्यम से ही किया जाना चाहिए। राजनीतिक बहस तेज़ सरकार के इस रुख के बाद संसद और राजनीतिक दलों में बहस तेज़ हो गई है। कई दलों ने सरकार के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि SC/ST आरक्षण सामाजिक न्याय का संवैधानिक अधिकार है और इसे आर्थिक आधार से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। वहीं कुछ संगठनों और विशेषज्ञों का मत है कि आरक्षण का लाभ समुदाय के सबसे वंचित वर्गों तक पहुँचाने के लिए आंतरिक सुधारों पर चर्चा होनी चाहिए। संवैधानिक और सामाजिक महत्व विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल आरक्षण नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और समान अवसर की संवैधानिक अवधारणा से भी जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई भविष्य में आरक्षण व्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। फिलहाल केंद्र सरकार ने अपना स्पष्ट रुख रखते हुए SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने से इनकार किया है। निष्कर्ष केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दोहराया है कि SC/ST आरक्षण ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव को ध्यान में रखकर दिया गया संवैधानिक प्रावधान है और इस पर क्रीमी लेयर सिद्धांत लागू नहीं किया जाना चाहिए। अब इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और निर्णय पर देशभर की नज़र बनी हुई है। Source: Ministry of Social Justice & Empowerment | Supreme Court Proceedings जय राष्ट्र न्यूज़

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