ब्रह्मोस सिर्फ एक झांकी… भारत का लक्ष्य ₹50,000 करोड़ का रक्षा निर्यात, स्वदेशी रक्षा उद्योग को मिलेगी नई उड़ान
नई दिल्ली: भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ा लक्ष्य तय किया है। केंद्र सरकार ने आने वाले वर्षों में ₹50,000 करोड़ (लगभग 6 अरब डॉलर) के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा है। सरकार का मानना है कि ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल की अंतरराष्ट्रीय सफलता केवल शुरुआत है और आने वाले समय में भारत स्वदेशी हथियार प्रणालियों, मिसाइलों, रडार, ड्रोन, नौसैनिक प्लेटफॉर्म और सैन्य तकनीक के निर्यात में दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल होगा। ब्रह्मोस ने खोले नए अवसर भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से विकसित ब्रह्मोस मिसाइल पहले ही कई देशों का ध्यान आकर्षित कर चुकी है। फिलीपींस के साथ हुए रक्षा समझौते के बाद अन्य मित्र देशों ने भी इस मिसाइल प्रणाली में रुचि दिखाई है। सरकार का कहना है कि ब्रह्मोस की सफलता ने भारतीय रक्षा उद्योग की विश्वसनीयता को नई पहचान दी है और अब कई स्वदेशी प्रणालियाँ वैश्विक बाजार में प्रवेश करने के लिए तैयार हैं। ₹50,000 करोड़ निर्यात का रोडमैप रक्षा मंत्रालय के अनुसार लक्ष्य केवल हथियार बेचने तक सीमित नहीं है। सरकार रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (Defence Manufacturing Ecosystem) को मजबूत करने, निजी उद्योग की भागीदारी बढ़ाने और रक्षा स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने पर काम कर रही है। इसके तहत— किन उत्पादों पर रहेगा फोकस? भारत आने वाले वर्षों में जिन रक्षा उत्पादों के निर्यात पर विशेष ध्यान दे रहा है, उनमें शामिल हैं— आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा निर्यात बढ़ने से भारत को केवल विदेशी मुद्रा ही नहीं मिलेगी, बल्कि लाखों रोजगार भी सृजित होंगे। रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और उच्च तकनीकी विनिर्माण को भी नई गति मिलेगी। सरकार का उद्देश्य भारत को केवल रक्षा उपकरणों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक विश्वसनीय रक्षा आपूर्तिकर्ता बनाना है। वैश्विक बाजार में बढ़ती भारतीय मौजूदगी हाल के वर्षों में भारत का रक्षा निर्यात लगातार बढ़ा है। एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और मध्य-पूर्व के कई देशों ने भारतीय रक्षा उत्पादों में रुचि दिखाई है। सरकार का कहना है कि गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धी कीमत और विश्वसनीय तकनीक भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में मजबूत स्थान दिला सकती है। निष्कर्ष ब्रह्मोस मिसाइल की सफलता के बाद भारत अब रक्षा निर्यात के नए युग में प्रवेश कर रहा है। ₹50,000 करोड़ के निर्यात लक्ष्य के साथ सरकार स्वदेशी रक्षा उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाने और भारत को दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्यातकों में शामिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। Source: Ministry of Defence | Defence Production Department जय राष्ट्र न्यूज़
