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राहुल गांधी को लेकर जा रही Air India Flight की Landing पहली कोशिश में टली, दूसरी Attempt में सुरक्षित उतरा विमान

लखनऊ, 8 सितंबर 2026: Lok Sabha में Leader of Opposition Rahul Gandhi को Delhi से Lucknow लेकर जा रही Air India flight की landing पहली कोशिश में टल गई। खराब मौसम के कारण aircraft को go-around करना पड़ा, जिसके बाद दूसरी कोशिश में विमान Lucknow के Chaudhary Charan Singh International Airport पर सुरक्षित उतर गया। Air India की Flight AI-1717 में सवार थे Rahul Gandhi Rahul Gandhi Delhi से Lucknow जा रही Air India flight AI-1717 में सवार थे। Lucknow पहुंचने के बाद उन्हें सड़क मार्ग से अपने Lok Sabha constituency Rae Bareli जाना था। पहली Attempt में क्यों नहीं हुई Landing? Aviation sources के मुताबिक Lucknow में उस समय हल्की बारिश और low atmospheric pressure की स्थिति थी। First approach के दौरान pilot ने landing जारी रखने के बजाय safety procedure के तहत aircraft को दोबारा ऊपर ले जाने का फैसला किया। इसे aviation terminology में go-around कहा जाता है और खराब weather या unstable approach जैसी परिस्थितियों में यह सामान्य safety procedure है। करीब 7 मिनट बाद सुरक्षित Landing Flight का scheduled arrival करीब 3:30 PM था, लेकिन aircraft लगभग 3:55 PM पर Lucknow airport पहुंचा। पहली landing attempt के बाद विमान ने go-around किया और करीब 7 मिनट बाद सुरक्षित landing कर ली। सभी passengers सामान्य रूप से aircraft से बाहर निकले। Rahul Gandhi का Rae Bareli दौरा Airport पर Uttar Pradesh Congress President Ajay Rai समेत पार्टी नेताओं ने Rahul Gandhi का स्वागत किया। इसके बाद Rahul Gandhi सड़क मार्ग से Rae Bareli के लिए रवाना हुए, जहां उनका party workers और local residents से मुलाकात करने तथा development works की समीक्षा करने का कार्यक्रम था। कोई Emergency Situation नहीं इस घटना को emergency landing बताना सही नहीं होगा। Aviation sources ने इसे weather conditions के कारण किया गया routine go-around बताया और aircraft की दूसरी कोशिश में normal तथा safe landing हुई। source – PTI / The Economic Times / ABP News जय राष्ट्र न्यूज़

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मोहन यादव का Congress और Gandhi परिवार पर तीखा हमला; बोले—‘समुद्र बीच में न होता तो अरब देशों से चुनाव लड़ते’

आगर मालवा, 14 सितंबर 2026: Madhya Pradesh के Chief Minister Mohan Yadav ने Congress और Nehru-Gandhi परिवार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। Agar Malwa में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने Gandhi परिवार की चुनावी राजनीति पर तंज कसते हुए कहा कि “अगर समुद्र बीच में नहीं आता तो ये अरब देशों से भी चुनाव लड़ते।” उनका बयान Rahul Gandhi के आगामी Madhya Pradesh दौरे से पहले आया है। Rahul Gandhi के Indore कार्यक्रम पर साधा निशाना Rahul Gandhi 19 September को Indore में ‘Chhatron Ki Goonj’ कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले हैं, जहां वे students से education system और उनकी समस्याओं पर बातचीत करेंगे। Mohan Yadav ने इस programme पर तंज कसते हुए इसे “Jhooth Ki Goonj” करार दिया और आरोप लगाया कि Congress युवाओं को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। Gandhi परिवार की Seats को लेकर किया तंज CM Yadav ने Gandhi family के अलग-अलग constituencies से चुनाव लड़ने का जिक्र करते हुए Amethi और Rae Bareli का उदाहरण दिया। इसी दौरान उन्होंने कहा कि अगर भौगोलिक सीमाएं बाधा न होतीं तो Gandhi परिवार दूसरे देशों से भी चुनाव लड़ सकता था। उनके इस बयान को Congress leadership के political constituencies बदलने पर कटाक्ष के तौर पर देखा जा रहा है। Rahul Gandhi को लेकर ‘Pappu’ टिप्पणी Mohan Yadav ने Rahul Gandhi पर व्यक्तिगत तंज भी किया और उन्हें ‘Pappu’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने दावा किया कि Congress leadership सरकार की development policies और technological progress को स्वीकार नहीं करना चाहती। Modi Government की योजनाओं की तारीफ अपने भाषण में CM Yadav ने Centre और Madhya Pradesh की BJP सरकार की योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने housing schemes, student laptops और महिलाओं के लिए Ladli Behna Yojana को सरकार की उपलब्धियों के रूप में पेश किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि India की welfare और technology-based governance की नीतियां अब दूसरे देशों के लिए भी उदाहरण बन रही हैं। Congress ने किया पलटवार Madhya Pradesh Congress ने Mohan Yadav की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। Congress नेता Jitu Patwari ने मुख्यमंत्री से विपक्षी नेताओं के बारे में बोलते समय पद की गरिमा बनाए रखने को कहा। वहीं Congress नेता PC Sharma ने तंज कसते हुए कहा कि जिन्हें BJP पहले ‘Pappu’ कहती थी, अब वही Rahul Gandhi उसके लिए ‘Papa’ बन गए हैं। source – Navbharat Times / Times of India / ANI जय राष्ट्र न्यूज़

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Tamil Nadu Alliance पर Congress की Red Line—Rahul Gandhi ही PM Face, Vijay को लेकर अटकलों के बीच बड़ा बयान

चेन्नई, 7 सितंबर 2026: Tamil Nadu की सत्तारूढ़ गठबंधन राजनीति में 2029 के Prime Minister face को लेकर नई बहस तेज हो गई है। Congress ने स्पष्ट कर दिया है कि अगले Lok Sabha चुनाव में Rahul Gandhi ही पार्टी और विपक्षी नेतृत्व का प्रमुख चेहरा होंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) के कुछ नेता मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay को भविष्य के प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में पेश कर रहे हैं। K.C. Venugopal ने साफ किया Congress का रुख Congress General Secretary K.C. Venugopal ने कहा कि Rahul Gandhi 2029 में INDIA bloc का नेतृत्व करेंगे। Vijay को PM candidate के रूप में पेश किए जाने से जुड़ी चर्चाओं को उन्होंने Congress के आधिकारिक रुख से अलग बताया। Manickam Tagore ने भी दोहराई Rahul Gandhi की दावेदारी Tamil Nadu Congress President Manickam Tagore ने भी कहा कि Rahul Gandhi ही Congress के Prime Ministerial candidate हैं। उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर alliance arrangements और national leadership के सवाल को आपस में नहीं मिलाया जाना चाहिए। TVK में उठ रही ‘Vijay for PM’ की मांग TVK के कुछ वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों ने Vijay को 2029 के लिए संभावित PM candidate के रूप में project करना शुरू किया है। इसी वजह से Congress और TVK के बीच national leadership को लेकर मतभेद की चर्चा तेज हुई है। हालांकि Vijay की ओर से इस पर कोई formal PM candidature announcement नहीं की गई है। 9 सितंबर की Alliance Meeting अहम Vijay ने 9 सितंबर को alliance partners की बैठक बुलाई है। इस meeting में गठबंधन के formal नाम और Common Minimum Programme पर चर्चा होने की उम्मीद है। Congress ने बैठक में शामिल होने की पुष्टि कर दी है। Left Parties ने बनाई दूरी Reports के मुताबिक CPI और CPI(M) ने इस बैठक में शामिल होने को लेकर दूरी बनाई है। इससे alliance के अंदर आगे की राजनीतिक दिशा और 2029 की national strategy पर नए सवाल खड़े हुए हैं। Congress के लिए Rahul Gandhi पर कोई समझौता नहीं Congress का संदेश साफ है कि Tamil Nadu में Vijay के साथ सत्ता साझेदारी होने के बावजूद national level पर party Rahul Gandhi की leadership से पीछे नहीं हटेगी। इसी वजह से इसे Congress की political “red line” के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल Alliance टूटने के संकेत नहीं मतभेद के बावजूद फिलहाल Congress ने TVK-led सरकार या alliance से अलग होने का कोई संकेत नहीं दिया है। दोनों पक्ष 9 सितंबर की meeting से पहले बातचीत जारी रखे हुए हैं। इसलिए मौजूदा विवाद को alliance breakdown की बजाय leadership positioning के रूप में देखना ज्यादा सही होगा। source – The Indian Express / Economic Timesजय राष्ट्र न्यूज़

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राहुल गांधी का पुणे दौरा; ‘छात्रों की गूंज’ में छात्रों से सीधा संवाद

पुणे: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार, 22 अगस्त 2026 को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ (Chhatron Ki Goonj) कार्यक्रम में युवाओं से सीधा संवाद किया। इस बार कार्यक्रम का खास फोकस छात्राओं और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर रहा। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, महिला सुरक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और आदिवासी छात्रों की समस्याओं समेत कई विषय उठे। राहुल गांधी ने पारंपरिक राजनीतिक भाषण देने के बजाय छात्रों की बातें सुनने और उनके सवालों का जवाब देने पर जोर दिया। छात्राओं ने उनके सामने उच्च शिक्षा में आने वाली बाधाओं, परिवार और समाज के दबाव, आर्थिक समस्याओं तथा सुरक्षा से जुड़े अनुभव साझा किए। महिला छात्राओं पर रहा कार्यक्रम का खास फोकस ‘छात्रों की गूंज’ कांग्रेस की छात्र और युवा outreach initiative का हिस्सा है। पुणे में आयोजित इस संस्करण को मुख्य रूप से महिला छात्राओं के संवाद पर केंद्रित किया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत में राहुल गांधी ने कहा कि वह लंबा राजनीतिक भाषण देने के बजाय वहां मौजूद महिलाओं और छात्राओं की समस्याओं को सुनना चाहते हैं। कार्यक्रम में छात्राओं ने sexual harassment, personal safety, शिक्षा जारी रखने में आर्थिक दिक्कत और विवाह तथा घरेलू जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई प्रभावित होने जैसे विषय उठाए। महिलाओं की स्वतंत्र पहचान पर राहुल गांधी का जोर अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्र पहचान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि किसी महिला की पहचान केवल बेटी, बहन, पत्नी या मां के रूप में सीमित नहीं की जानी चाहिए। महिलाओं को अपने फैसले लेने, शिक्षा हासिल करने, रोजगार चुनने और सामाजिक जीवन में अपनी जगह बनाने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उन्होंने महिलाओं को भारत की बड़ी ताकत बताते हुए पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती देने की बात कही। राहुल गांधी ने कार्यक्रम के दौरान Manusmriti का जिक्र करते हुए महिलाओं को पुरुष रिश्तेदारों पर निर्भर मानने वाली सोच की आलोचना भी की। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। MPSC अभ्यर्थी ने राहुल गांधी के सामने रखी समस्या कार्यक्रम में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी MPSC की तैयारी कर रही एक छात्रा ने भी अपनी परेशानी राहुल गांधी के सामने रखी। छात्रा ने हालिया परीक्षा से जुड़े कथित paper leak और दोबारा परीक्षा कराने की मांग का जिक्र किया। उसने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी और कथित अनियमितताओं के कारण महिला अभ्यर्थियों को परिवार और विवाह से जुड़े अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ता है। राहुल गांधी ने MPSC उम्मीदवारों की मांग को समर्थन देने का भरोसा दिया। आदिवासी छात्राओं ने भी उठाए गंभीर मुद्दे पुणे कार्यक्रम में आदिवासी छात्रों से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं। एक आदिवासी छात्रा ने राहुल गांधी को बताया कि पुणे के मांजरी क्षेत्र में छात्र सरकारी आदिवासी हॉस्टलों से जुड़े नियमों और सुविधाओं में सुधार की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं। छात्रा ने सरकारी हॉस्टलों में रहने की age limit बढ़ाने, बेहतर शिक्षा व्यवस्था, पीने के पानी, beds और healthcare facilities जैसे मुद्दे उठाए। उसने आश्रम स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं पर भी सवाल किए। इस पर राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने की बात कही और जरूरत पड़ने पर उनके साथ आंदोलन में शामिल होने की इच्छा जताई। शिक्षा और रोजगार भी चर्चा के केंद्र में कार्यक्रम में केवल राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई। छात्राओं और professional women ने शिक्षा, courses, employment opportunities और financial independence से जुड़े सवाल भी रखे। राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाए जाने चाहिए और सामाजिक दबाव उनके करियर की राह में बाधा नहीं बनना चाहिए। कार्यक्रम में महिला सुरक्षा और सामाजिक भेदभाव भी प्रमुख विषय रहे। कार्यक्रम से पहले 30 शर्तों के साथ मिली थी अनुमति राहुल गांधी के पुणे कार्यक्रम को लेकर आयोजन से पहले भी राजनीतिक हलचल देखने को मिली थी। पुणे पुलिस ने 22 अगस्त के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को 30 शर्तों के साथ अनुमति दी थी। इनमें noise pollution नियमों का पालन, drones के इस्तेमाल पर रोक और आपत्तिजनक banners या सामग्री न लगाने जैसी शर्तें शामिल थीं। कांग्रेस की पुणे इकाई ने दावा किया था कि कार्यक्रम के लिए 30,000 से अधिक छात्रों ने ऑनलाइन registration कराया था। यह संख्या कांग्रेस की ओर से किया गया दावा था। BJP ने कार्यक्रम को लेकर उठाए सवाल राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर BJP और Congress के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिला। महाराष्ट्र BJP ने कार्यक्रम की funding को लेकर सवाल उठाए और कांग्रेस पर आयोजन में लोगों को जुटाने के लिए पैसे खर्च करने के आरोप लगाए। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कार्यक्रम को युवाओं से मजबूत प्रतिक्रिया मिल रही है। कार्यक्रम के एक दिन पहले पुणे की COEP Technological University के hostel के बाहर ABVP और NSUI कार्यकर्ताओं के बीच तनाव और झड़प की घटना भी सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। युवा और महिला मतदाताओं तक पहुंच की कोशिश राजनीतिक दृष्टि से ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को कांग्रेस की युवा और छात्र वर्ग से सीधे जुड़ने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। पुणे के कार्यक्रम में खास तौर पर महिलाओं की शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा और स्वतंत्रता को केंद्र में रखा गया। राहुल गांधी ने छात्राओं के सवालों को सीधे सुनकर उनके जवाब दिए और कुछ आंदोलनों को समर्थन देने का आश्वासन भी दिया। अब इस कार्यक्रम के बाद राहुल गांधी के Manusmriti, महिला अधिकारों और छात्र समस्याओं पर दिए गए बयानों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। BJP नेताओं ने कार्यक्रम और राहुल गांधी के बयानों की आलोचना की है, जबकि कांग्रेस इसे युवाओं की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश बता रही है। फिलहाल 22 अगस्त को पुणे में हुआ ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम छात्राओं के साथ राहुल गांधी के सीधे संवाद, MPSC परीक्षा विवाद और आदिवासी विद्यार्थियों की मांगों के कारण चर्चा में बना हुआ है। स्रोत – पीटीआई, इंडिया टुडे, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, द इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर प्रदर्शन पर फिर सियासत तेज! घायल छात्र के साथ राहुल गांधी दिल्ली पुलिस स्टेशन पहुंचे

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर शुक्रवार, 21 अगस्त 2026, को राजनीतिक विवाद फिर तेज हो गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी घायल छात्र साहिल लोचब को साथ लेकर दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे और मामले में FIR दर्ज करने की मांग की। घायल छात्र को साथ लेकर थाने पहुंचे राहुल गांधी राहुल गांधी शुक्रवार को DCP कार्यालय पहुंचे। उनके साथ साहिल लोचब भी मौजूद थे, जिन्हें 20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट जैसी चोटें लगी थीं। रिपोर्टों के मुताबिक राहुल गांधी ने पुलिस अधिकारियों से मामले की शिकायत दर्ज करने और कथित बल प्रयोग की जांच कराने की मांग की। FIR दर्ज नहीं होने पर धरने पर बैठे राहुल राहुल गांधी ने पुलिस स्टेशन के बाहर धरना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि जब तक शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की जाती, तब तक वह वहां से नहीं हटेंगे। इस दौरान घायल छात्र और उसका परिवार भी उनके साथ मौजूद रहा। राहुल गांधी पहले भी इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और गृह मंत्री से जवाब मांग चुके हैं। पैलेट गन के इस्तेमाल पर आमने-सामने दावे इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर है। कांग्रेस का आरोप है कि छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और कुछ प्रदर्शनकारियों को पैलेट जैसी चोटें आईं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार कर चुकी है और कह चुकी है कि उसके पास ऐसी हथियार प्रणाली मौजूद नहीं है। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक और सीमित बल इस्तेमाल करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट की जांच भी जारी मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की परिस्थितियों और कथित अत्यधिक बल प्रयोग की जांच के लिए हाई-पावर विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। इससे यह मामला सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब न्यायिक निगरानी में भी जांच का विषय बन गया है। जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन को लेकर पुलिस अलर्ट इसी बीच दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर किसी नए विरोध प्रदर्शन या जुलूस की अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस ने लोगों से बिना अनुमति किसी सार्वजनिक सभा में शामिल न होने की अपील की है। इससे राजधानी में प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा और राजनीतिक तनाव दोनों बढ़ गए हैं। राहुल गांधी के कदम से बढ़ी राजनीतिक हलचल घायल छात्र को लेकर सीधे पुलिस स्टेशन पहुंचना राहुल गांधी की ओर से मामले को दोबारा राजनीतिक केंद्र में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस इसे छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती और जवाबदेही का मुद्दा बना रही है, जबकि पुलिस अपने ऊपर लगे पैलेट गन के आरोपों से इनकार कर रही है। अब सबकी नजर FIR, पुलिस जांच और सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट पर है। इन्हीं के जरिए यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान वास्तव में किस तरह के बल का इस्तेमाल हुआ था। स्रोत: Delhi Police, PTI, India Today, Outlook India, Times of India Jai Rashtra News

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“राहुल गांधी किसी भी जन्म में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते!”—साक्षी महाराज का विवादित बयान, सियासत गरमाई

उन्नाव: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लेकर विवादित बयान दिया है। हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने राहुल गांधी की प्रधानमंत्री बनने की संभावना पर सवाल उठाते हुए कहा कि “राहुल गांधी किसी भी जन्म में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राहुल गांधी के PM बनने पर साक्षी महाराज का बड़ा दावा साक्षी महाराज ने राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राहुल गांधी एक बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं और उन्हें बचपन से ही प्रधानमंत्री बनने की बात बताई जाती रही है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी को सत्ता की विरासत मिलने की उम्मीद रही है, लेकिन वह किसी भी जन्म में देश के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। यह बयान अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। राहुल गांधी की राजनीतिक विरासत पर निशाना बीजेपी सांसद ने राहुल गांधी के परिवार और उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ऐसे परिवार में पैदा हुए हैं जहां राजनीति और सत्ता लंबे समय से मौजूद रही है। साक्षी महाराज का यह हमला ऐसे समय आया है जब संसद में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर लगातार टकराव चल रहा है। जंतर-मंतर छात्र आंदोलन पर भी बोले साक्षी महाराज साक्षी महाराज ने सिर्फ राहुल गांधी पर ही हमला नहीं किया, बल्कि जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन में कुछ ऐसे तत्व शामिल थे जिनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्होंने आंदोलन में कथित विदेशी हाथ और फंडिंग की जांच की मांग भी उठाई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। पुलिस कार्रवाई और आंदोलन को लेकर भी बयान छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों पर साक्षी महाराज ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों पर भी पथराव और हमले हुए थे। उन्होंने आंदोलन में शामिल लोगों की भूमिका को लेकर जांच की जरूरत बताई और कहा कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए। सोनम वांगचुक के बयान का भी किया जिक्र साक्षी महाराज ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के एक कथित बयान का उल्लेख करते हुए दावा किया कि आंदोलन में बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल थे जो वास्तविक छात्र नहीं थे। हालांकि, इस संबंध में भी साक्षी महाराज द्वारा किए गए दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए बिना तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा साक्षी महाराज का राहुल गांधी को लेकर दिया गया बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में आया। उनके बयान के वीडियो और छोटे क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किए जा रहे हैं। समर्थक इसे राहुल गांधी पर राजनीतिक तंज बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे व्यक्तिगत और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी बता रहे हैं। संसद में पहले से जारी है राजनीतिक टकराव राहुल गांधी और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव लगातार चर्चा में रहता है। संसद में छात्र प्रदर्शन, परीक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। ऐसे माहौल में साक्षी महाराज की यह टिप्पणी राजनीतिक बयानबाजी को और तेज करने वाली मानी जा रही है। निष्कर्ष बीजेपी सांसद साक्षी महाराज के “राहुल गांधी किसी भी जन्म में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते” वाले बयान ने राजनीतिक बहस को गर्म कर दिया है। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक विरासत और प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं पर तीखा हमला किया है। साथ ही उन्होंने जंतर-मंतर छात्र आंदोलन में कथित विदेशी फंडिंग और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग भी की। हालांकि, विदेशी फंडिंग और आंदोलन में बाहरी तत्वों से जुड़े उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। Source: Navbharat Times / Khabargaon / Latest Political Reports जय राष्ट्र न्यूज़

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राजनीतिक | Shashi Tharoor ने Rahul Gandhi के ‘Chhatron Ki Goonj’ अभियान पर टिप्पणी को लेकर दी सफाई, बोले—मेरी बात को गलत तरीके से पेश किया गया

नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने राहुल गांधी के ‘Chhatron Ki Goonj’ अभियान को लेकर अपनी हालिया टिप्पणी पर सफाई दी है। Tharoor ने कहा कि उनकी बात को कुछ मीडिया रिपोर्टों में गलत तरीके से पेश किया गया और उनकी टिप्पणी का उद्देश्य कांग्रेस नेतृत्व या राहुल गांधी पर व्यक्तिगत हमला करना नहीं था। Tharoor ने स्पष्ट किया कि वह केवल इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि छात्र और युवा किस तरह के राजनीतिक संदेशों और आंदोलनों से अधिक जुड़ाव महसूस कर रहे हैं। उनका कहना था कि राजनीतिक दलों को अगली पीढ़ी के लिए अपने दरवाजे और अधिक खोलने की जरूरत है। ‘Chhatron Ki Goonj’ को लेकर क्या कहा था Tharoor ने? Shashi Tharoor ने राहुल गांधी के छात्र-केंद्रित ‘Chhatron Ki Goonj’ कार्यक्रम और हाल के छात्र आंदोलनों के प्रभाव की तुलना करते हुए सवाल उठाया था कि कांग्रेस का अभियान छात्रों के बीच उतना प्रभाव क्यों नहीं पैदा कर सका। उन्होंने संकेत दिया था कि कुछ अन्य छात्र आंदोलनों को युवाओं के बीच ज्यादा प्रतिक्रिया मिली। Tharoor के मुताबिक, कांग्रेस ने छात्र मुद्दों को पहले भी उठाया था, लेकिन उसके अभियान को उतना व्यापक जनसमर्थन या resonance नहीं मिला। Tharoor बोले—मेरी टिप्पणी को राजनीतिक हमला न माना जाए अपनी नई सफाई में Tharoor ने कहा कि उनकी टिप्पणी को कांग्रेस नेतृत्व पर हमला बताना सही नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि उनका उद्देश्य पार्टी की कमियों पर सार्वजनिक बहस करना और यह समझना था कि युवाओं तक राजनीतिक संदेश प्रभावी तरीके से क्यों नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों को नई पीढ़ी के साथ जुड़ने के नए तरीके खोजने होंगे और युवाओं को पार्टी की decision-making प्रक्रिया में अधिक अवसर देने होंगे। राहुल गांधी का ‘Chhatron Ki Goonj’ कार्यक्रम क्या है? राहुल गांधी का ‘Chhatron Ki Goonj’ अभियान छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाने पर केंद्रित है। इस अभियान के तहत राहुल गांधी ने छात्रों के साथ संवाद किया और शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था तथा युवाओं से जुड़े राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की। हालिया कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्रों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि युवाओं की आवाज को केवल सोशल मीडिया content तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। CJP के छात्र आंदोलन से तुलना क्यों हुई? Tharoor की टिप्पणी उस समय सामने आई जब CJP के नेतृत्व में हुए छात्र विरोध प्रदर्शन को लेकर भी चर्चा तेज थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जिन छात्र मुद्दों को पहले उठाया था, उन्हीं मुद्दों पर बाद में हुए विरोध प्रदर्शन ने युवाओं के बीच ज्यादा प्रभाव पैदा किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों ने युवाओं की चिंताओं को पर्याप्त रूप से समझने और उनके साथ प्रभावी तरीके से संवाद करने में कहीं कमी की। कांग्रेस को आत्ममंथन की जरूरत? Tharoor की टिप्पणी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह था कि राजनीतिक दलों को केवल युवाओं के मुद्दे उठाना ही पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि युवा यह महसूस करें कि उनकी बात वास्तव में सुनी जा रही है। उन्होंने राजनीतिक संगठनों से यह सोचने की जरूरत बताई कि उनकी outreach किस तरह की होनी चाहिए और युवाओं को संगठन के भीतर वास्तविक भूमिका कैसे दी जा सकती है। BJP ने Tharoor की टिप्पणी को बनाया मुद्दा Tharoor की शुरुआती टिप्पणी के बाद BJP नेताओं ने इसे कांग्रेस के भीतर असंतोष और राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति पर सवाल के तौर पर पेश किया। वहीं कांग्रेस की ओर से यह कहा गया कि राहुल गांधी का फोकस केवल तत्काल राजनीतिक प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि systemic reforms और युवाओं से जुड़े मूल मुद्दों पर है। इस तरह Tharoor की टिप्पणी ने कांग्रेस और BJP के बीच राजनीतिक बहस को भी जन्म दे दिया। Tharoor की सफाई के बाद क्या बदला? नई सफाई के बाद Tharoor ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि उनकी टिप्पणी को राहुल गांधी के खिलाफ व्यक्तिगत या संगठनात्मक बगावत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका मुख्य तर्क यह है कि राजनीतिक दलों को युवाओं की बदलती राजनीतिक सोच और उनकी अपेक्षाओं को समझना होगा। इसके लिए केवल campaign आयोजित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवाओं को निर्णय प्रक्रिया और संगठनात्मक ढांचे में भी जगह देनी होगी। कांग्रेस के लिए युवा वोट बैंक क्यों महत्वपूर्ण है? भारत में युवा और छात्र वर्ग राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण मतदाता समूह है। शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दे सीधे युवाओं को प्रभावित करते हैं। ऐसे में कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों के सामने चुनौती है कि वे युवाओं से केवल चुनावी समय में संपर्क न करें, बल्कि लगातार संवाद और संगठनात्मक भागीदारी का रास्ता बनाएं। निष्कर्ष Shashi Tharoor ने Rahul Gandhi के ‘Chhatron Ki Goonj’ अभियान को लेकर अपनी टिप्पणी पर सफाई देते हुए कहा है कि उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया। उनका कहना है कि वह कांग्रेस नेतृत्व पर व्यक्तिगत हमला नहीं कर रहे थे, बल्कि यह सवाल उठा रहे थे कि राजनीतिक दल युवाओं के साथ अधिक प्रभावी संवाद कैसे स्थापित कर सकते हैं। Tharoor की टिप्पणी ने कांग्रेस के युवा outreach और राहुल गांधी की रणनीति को लेकर राजनीतिक बहस जरूर तेज कर दी है। अब देखना होगा कि यह बहस कांग्रेस के भीतर युवाओं की भूमिका और पार्टी की भविष्य की outreach strategy में किस तरह का बदलाव लाती है। Source: Outlook India, Hindustan Times, The Statesman, NDTV, Indian political reports जय राष्ट्र न्यूज़

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NEET मुद्दे पर कांग्रेस का ‘चलो PM हाउस’ प्रदर्शन, राहुल-प्रियंका समेत कई नेता हिरासत में; राजनीतिक विवाद तेज

नई दिल्ली: NEET परीक्षा से जुड़े विवाद और छात्रों की मांगों को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री आवास की ओर ‘चलो PM हाउस’ मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। इस घटनाक्रम के बाद राष्ट्रीय राजनीति में तीखी बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं ले रही है और संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा से बच रही है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने कहा है कि वह NEET से जुड़े सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है और आवश्यक सुधारों पर काम किया जा रहा है। क्या है पूरा मामला? कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकालते हुए NEET परीक्षा से जुड़े कथित अनियमितताओं और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। सुरक्षा कारणों से पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका, जिसके बाद कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। कांग्रेस की मांगें कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि— सरकार का जवाब केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताया। सरकार का कहना है कि NEET से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए वह तैयार है और परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए सुधार किए जा रहे हैं। राजनीतिक प्रतिक्रिया इस घटनाक्रम के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की, जबकि भाजपा ने प्रदर्शन को राजनीतिक कदम बताया। आगे क्या? NEET मुद्दे पर संसद में बहस होने की संभावना बनी हुई है। छात्रों के आंदोलन, विपक्ष के विरोध और सरकार के रुख को देखते हुए आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख विषय बना रह सकता है। निष्कर्ष NEET विवाद को लेकर कांग्रेस के ‘चलो PM हाउस’ प्रदर्शन ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। एक ओर विपक्ष छात्रों के मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि वह संसद में चर्चा और आवश्यक सुधारों के लिए तैयार है। Source: NDTV, Reuters, Times of India एवं आधिकारिक राजनीतिक बयान। जय राष्ट्र न्यूज़

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Telegram बैन को लेकर विपक्ष और सरकार आमने-सामने, राहुल गांधी ने उठाए सवाल

जय राष्ट्र न्यूज़ | नई दिल्ली | 17 जून 2026 मुख्य समाचार NEET-UG 2026 री-एग्जाम से पहले Telegram पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार छात्रों को निशाना बना रही है, जबकि असली कार्रवाई पेपर लीक और परीक्षा घोटालों में शामिल नेटवर्क पर होनी चाहिए। वहीं केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) का कहना है कि यह कदम परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने और फर्जी पेपर लीक गिरोहों पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। क्या है पूरा विवाद? सरकार ने NEET-UG 2026 री-एग्जाम से पहले Telegram की सेवाओं पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने और कुछ सुविधाओं पर रोक लगाने का फैसला किया। अधिकारियों का कहना है कि कई फर्जी चैनल और समूह छात्रों को नकली प्रश्नपत्र, भ्रामक जानकारी और धोखाधड़ी वाले ऑफर भेज रहे थे। सरकार के अनुसार यह कदम केवल परीक्षा सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। राहुल गांधी का सरकार पर हमला राहुल गांधी ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि समस्या Telegram नहीं बल्कि पेपर लीक माफिया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि छात्रों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई करने के बजाय उन लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं जो परीक्षा प्रणाली को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लाखों छात्रों को असुविधा पहुंचाने के बजाय सरकार को परीक्षा सुरक्षा के मूल कारणों को संबोधित करना चाहिए। सरकार का पक्ष केंद्र सरकार और NTA का कहना है कि हाल के दिनों में Telegram का इस्तेमाल कुछ संगठित गिरोहों द्वारा छात्रों को गुमराह करने और कथित पेपर लीक सामग्री बेचने के लिए किया जा रहा था। इसी कारण एहतियात के तौर पर सीमित अवधि के लिए प्रतिबंध लगाया गया। अधिकारियों के अनुसार यह कदम केवल NEET री-एग्जाम की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है और इसका उद्देश्य ईमानदार छात्रों के हितों की रक्षा करना है। सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस Telegram प्रतिबंध के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस देखने को मिल रही है। एक वर्ग का मानना है कि परीक्षा सुरक्षा के लिए कठोर कदम जरूरी हैं, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि किसी एक प्लेटफॉर्म को प्रतिबंधित करने से मूल समस्या का समाधान नहीं होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में परीक्षा सुरक्षा के लिए तकनीकी निगरानी, बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और मजबूत जांच तंत्र अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं। हाई कोर्ट तक पहुंचा मामला इस बीच Telegram ने भी भारत सरकार के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। कंपनी का तर्क है कि पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने से लाखों सामान्य उपयोगकर्ता प्रभावित हो रहे हैं, जबकि कार्रवाई सीधे गलत गतिविधियों में शामिल लोगों पर होनी चाहिए। अब इस मामले पर अदालत की सुनवाई और उसके फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं। शिक्षा जगत की प्रतिक्रिया शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है, लेकिन साथ ही छात्रों को अनावश्यक परेशानी से बचाना भी आवश्यक है। कई विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ समन्वय बढ़ाकर लक्षित कार्रवाई की जा सकती है। निष्कर्ष Telegram बैन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर पहुंच चुका है। एक ओर सरकार परीक्षा सुरक्षा को प्राथमिकता बता रही है, वहीं विपक्ष इसे छात्रों और डिजिटल अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बता रहा है। आने वाले दिनों में हाई कोर्ट की सुनवाई और NEET री-एग्जाम की प्रक्रिया इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है। जय राष्ट्र न्यूज़ के साथ जुड़े रहें राजनीति, शिक्षा और तकनीक जगत की हर बड़ी खबर के लिए।

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