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उत्तराखंड के लिए IMD का रेड अलर्ट, कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी; प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील

नई दिल्ली/देहरादून: भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मानसून की सक्रियता को देखते हुए उत्तराखंड के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि राज्य के कई पर्वतीय क्षेत्रों में अत्यधिक से बहुत भारी वर्षा, तेज गर्जना, आकाशीय बिजली और अचानक जलभराव तथा भूस्खलन जैसी घटनाएं हो सकती हैं। इसके साथ ही बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, मेघालय और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। उत्तराखंड में रेड अलर्ट क्यों? IMD के अनुसार, उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में अगले 24 घंटों के दौरान अत्यधिक बारिश होने की संभावना है। भारी वर्षा के कारण नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ सकता है, जबकि संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा भी बना हुआ है। मौसम विभाग ने स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। किन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट? मौसम विभाग के अनुसार उत्तराखंड के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। कई स्थानों पर गरज-चमक, तेज हवाएं और बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है। चारधाम यात्रा और पहाड़ी इलाकों में विशेष सतर्कता लगातार हो रही बारिश को देखते हुए चारधाम यात्रा मार्गों और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने यात्रियों से मौसम की ताज़ा जानकारी लेकर ही यात्रा करने को कहा है। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। प्रशासन अलर्ट मोड पर उत्तराखंड सहित कई राज्यों में जिला प्रशासन, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और अन्य एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है तथा आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की गई है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन का पालन करने की अपील की है। लोगों के लिए IMD की सलाह मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान नदी-नालों के किनारे जाने से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही न करने और बिजली चमकने के समय खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी है। पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही किसानों और यात्रियों से भी मौसम अपडेट पर लगातार नजर रखने को कहा गया है। अन्य राज्यों में भी असर दिल्ली-एनसीआर में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे तापमान में गिरावट और उमस से राहत मिल सकती है। हालांकि कुछ स्थानों पर जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका भी व्यक्त की गई है। वहीं पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसून की गतिविधियां अधिक सक्रिय रहने का अनुमान है। निष्कर्ष मानसून के सक्रिय दौर को देखते हुए भारतीय मौसम विभाग ने उत्तराखंड के लिए रेड अलर्ट जारी करते हुए लोगों से अत्यधिक सतर्क रहने की अपील की है। कई अन्य राज्यों में भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। ऐसे में नागरिकों को मौसम विभाग की आधिकारिक सलाह का पालन करना चाहिए और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए। Source: भारतीय मौसम विभाग (IMD) एवं संबंधित राज्य प्रशासन। Original Report: IMD के आधिकारिक मौसम बुलेटिन और विश्वसनीय समाचार रिपोर्टों के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

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यूरोप में हीटवेव का कहर जारी, कई देशों में रेड अलर्ट

पेरिस, 24 जून 2026। यूरोप के कई देशों में भीषण गर्मी का दौर लगातार जारी है। फ्रांस, स्पेन, इटली, पुर्तगाल और अन्य यूरोपीय देशों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन ने रेड अलर्ट जारी कर लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। मौसम एजेंसियों के अनुसार कई क्षेत्रों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब या उससे अधिक दर्ज किया जा रहा है। अत्यधिक गर्मी के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा है और स्वास्थ्य विभागों ने बुजुर्गों, बच्चों तथा गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। फ्रांस और स्पेन के कई शहरों में गर्मी के कारण सार्वजनिक स्थानों पर विशेष राहत केंद्र स्थापित किए गए हैं। वहीं इटली में स्वास्थ्य अधिकारियों ने नागरिकों को दिन के समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। कई क्षेत्रों में जंगलों में आग लगने की घटनाओं को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के कारण यूरोप में हीटवेव की घटनाएं अधिक गंभीर होती जा रही हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले वर्षों में ऐसे मौसम संबंधी संकट और अधिक देखने को मिल सकते हैं। ऊर्जा क्षेत्र पर भी इस भीषण गर्मी का असर दिखाई दे रहा है। एयर कंडीशनर और कूलिंग सिस्टम के बढ़ते उपयोग के कारण बिजली की मांग में तेजी आई है। कई देशों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा रहे हैं। पर्यटन उद्योग पर भी गर्मी का असर पड़ा है। कई लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में कमी दर्ज की गई है, जबकि कुछ स्थानों पर प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से गतिविधियों पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए हैं। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में भी यूरोप के कई हिस्सों में गर्मी का असर बना रह सकता है। प्रशासन ने लोगों से पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, धूप से बचने और स्वास्थ्य संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। स्रोत:यूरोपीय मौसम एजेंसियां एवं अंतरराष्ट्रीय मौसम रिपोर्ट मूल रिपोर्ट:अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों और मौसम विशेषज्ञों से प्राप्त जानकारी के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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