सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार नियमों की समीक्षा कर रही है, हालांकि उस समय यह स्पष्ट नहीं किया गया कि अंतिम निर्णय क्या होगा। सुप्रीम कोर्ट ने UGC को इस मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया था।
ऐसे में शेर सिंह राणा और अन्य संगठनों की ओर से नियमों को पूरी तरह वापस लेने की मांग ऐसे समय सामने आई है जब मामला न्यायिक समीक्षा और सरकारी पुनर्विचार—दोनों प्रक्रियाओं से गुजर रहा है।
कई जगह जारी है UGC नियमों का विरोध
UGC Equity Regulations को लेकर विरोध केवल बिजनौर तक सीमित नहीं रहा है। सितंबर 2026 में दिल्ली में भी करणी सेना ने इन नियमों के खिलाफ प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। इसको लेकर मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंचा।
वहीं 20 सितंबर को आगरा में भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी UGC नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे। पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने यमुना एक्सप्रेसवे की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की।
अब आगे क्या?
UGC के 2026 Equity Regulations फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण लागू नहीं हैं और 2012 के नियम प्रभावी बने हुए हैं। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने अदालत में कहा है कि 2026 के नियमों पर पुनर्विचार किया जा रहा है।
ऐसे में अब ध्यान केंद्र सरकार, UGC और सुप्रीम कोर्ट में जारी प्रक्रिया पर रहेगा। शेर सिंह राणा और विरोध कर रहे अन्य संगठनों ने जहां नियमों को वापस लेने की मांग की है, वहीं 2026 के नियमों का मूल उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव की शिकायतों के समाधान और समानता की व्यवस्था को मजबूत करना बताया गया है।

