बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान उनके पैरों में नजर आई सुनहरे रंग की खड़ाऊ को लेकर दावा किया जाने लगा कि वह सोने की बनी हुई है। वायरल तस्वीरों और वीडियो के बाद अब खुद धीरेंद्र शास्त्री ने इस दावे पर सफाई देते हुए बताया है कि उनकी खड़ाऊ सोने की नहीं, बल्कि लकड़ी की है, जिस पर गोल्डन रंग किया गया है।
सोशल मीडिया पर किसी तस्वीर या वीडियो के आधार पर किए गए दावे अक्सर तेजी से वायरल हो जाते हैं। ऐसा ही मामला अब बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की खड़ाऊ को लेकर सामने आया है।
सितंबर 2026 में मुंबई दौरे के दौरान धीरेंद्र शास्त्री की कुछ तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। उनके पैरों में सुनहरे रंग की पारंपरिक खड़ाऊ दिखाई दी। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे ‘सोने की खड़ाऊ’ बताते हुए सवाल उठाने शुरू कर दिए।
कहां से शुरू हुई ‘सोने की खड़ाऊ’ की चर्चा?
यह मामला मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया में आयोजित गणेश उत्सव से जुड़ा है। कार्यक्रम में पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री कैमरों के सामने दिखाई दिए तो उनकी सुनहरे रंग की खड़ाऊ ने लोगों का ध्यान खींचा।
तस्वीरों में खड़ाऊ चमकीले गोल्डन रंग में दिखाई दे रही थी। इसी के बाद सोशल मीडिया पर यह दावा फैलने लगा कि बागेश्वर बाबा सोने की खड़ाऊ पहनते हैं।
हालांकि, तस्वीर में किसी वस्तु का सुनहरे रंग का दिखाई देना अपने आप में उसके सोने का बना होने का प्रमाण नहीं है।
क्या सच में सोने की थी खड़ाऊ?
अब तक सामने आई विश्वसनीय रिपोर्टों में खड़ाऊ के असली सोने से बने होने की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इसके उलट धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने स्वयं कहा है कि खड़ाऊ लकड़ी से बनी हुई है और उस पर सुनहरे रंग का पेंट किया गया है। कुछ रिपोर्टों में भी इसे लकड़ी की पारंपरिक खड़ाऊ बताया गया है।
इसलिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर सोशल मीडिया पर चल रहा ‘सोने की खड़ाऊ’ वाला दावा प्रमाणित नहीं होता।
धीरेंद्र शास्त्री ने क्या सफाई दी?
विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने अपने अंदाज में इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने बताया कि वे मुकेश अंबानी के घर गणेश उत्सव में शामिल होने गए थे, लेकिन कार्यक्रम से ज्यादा चर्चा उनकी खड़ाऊ की होने लगी।
शास्त्री के अनुसार, उनकी खड़ाऊ सामान्य लकड़ी की है और किसी ने उस पर गोल्डन पेंट कर दिया था। उसी रंग के कारण लोगों ने उसे सोने की खड़ाऊ मान लिया।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इतना ज्ञान है कि सोना पैरों में नहीं पहना जाता।
‘अगली बार डायमंड की बुक करूंगा’
इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने मजाकिया अंदाज भी अपनाया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने कहा कि अब अगर लोग उनकी खड़ाऊ को लेकर इतनी चर्चा कर रहे हैं तो अगली बार डायमंड की खड़ाऊ बनवाने की सोचेंगे। उनका यह बयान व्यंग्यात्मक अंदाज में दिया गया था।
इसके साथ ही उन्होंने आलोचकों और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं का भी जवाब दिया।
तस्वीरों में क्यों लगी सोने की?
वायरल वीडियो और तस्वीरों में खड़ाऊ पर चमकदार सुनहरी फिनिश दिखाई देती है। यही कारण माना जा रहा है कि सोशल मीडिया पर लोगों ने बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के उसे सोने का समझ लिया।
16 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी उपलब्ध तस्वीरों और संबंधित लोगों से मिली जानकारी के आधार पर खड़ाऊ को लकड़ी का बताया गया था, जिस पर गोल्डन फिनिश थी।
ऐसे में सिर्फ तस्वीरों के आधार पर खड़ाऊ के वास्तविक पदार्थ या उसकी कीमत के बारे में निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
क्या है वायरल दावे की सच्चाई?
दावा: धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सोने की खड़ाऊ पहनकर एंटीलिया पहुंचे थे।
उपलब्ध तथ्य: वायरल खड़ाऊ के सोने से बने होने का कोई स्वतंत्र या आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है। धीरेंद्र शास्त्री का कहना है कि वह लकड़ी की खड़ाऊ है जिस पर सुनहरे रंग का पेंट किया गया है।
इसलिए मौजूदा उपलब्ध जानकारी के आधार पर ‘धीरेंद्र शास्त्री ने सोने की खड़ाऊ पहनी थी’ वाला दावा पुष्ट नहीं है।
पूरे विवाद की शुरुआत खड़ाऊ के सुनहरे रंग से हुई और बाद में सोशल मीडिया पर इसे असली सोने से जोड़कर पेश किया जाने लगा। धीरेंद्र शास्त्री की सफाई के बाद फिलहाल यही सामने आता है कि खड़ाऊ लकड़ी की थी, जिस पर गोल्डन पेंट या फिनिश किया गया था।

