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Brent Crude $100 के ऊपर, Middle East Tension से Indian Market पर दबाव

मुंबई, 10 सितंबर 2026: Middle East में बढ़ते तनाव और oil shipping पर हमलों के बीच Brent crude लगातार दूसरे दिन $100 प्रति barrel के ऊपर बना हुआ है। गुरुवार को Brent करीब 0.7% नीचे $100.50 प्रति barrel पर कारोबार कर रहा था, जबकि WTI crude करीब $95.58 पर था। Sensex-Nifty में सतर्क कारोबार ऊंचे crude prices के कारण Indian equity market में investor sentiment कमजोर बना हुआ है। सुबह करीब 9:36 बजे Nifty 50 0.01% गिरकर 23,429.25 और Sensex 0.01% नीचे 74,759.54 पर था। दोनों indices पिछले session में तीन महीने के निचले स्तर पर बंद हुए थे और पिछले आठ sessions में से सात में गिरावट दर्ज कर चुके हैं। Middle East Conflict ने बढ़ाई Oil Supply की चिंता Oil market में tension तब और बढ़ी जब Iran ने Strait of Hormuz के पास 10 ships पर हमले का दावा किया। यह कार्रवाई US द्वारा पांच Iranian oil tankers को निशाना बनाए जाने के बाद हुई। इस escalation ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण oil shipping routes में supply disruption का risk बढ़ा दिया है। Strait of Hormuz पर नजर Conflict से पहले Strait of Hormuz से दुनिया के oil और gas trade का करीब 20% हिस्सा गुजरता था। मौजूदा तनाव के कारण इस route से traffic काफी कम हुआ है। Red Sea route पर Houthi attacks ने alternative shipping routes को लेकर भी चिंता बढ़ाई है। India के लिए महंगा Crude क्यों चिंता? India दुनिया के सबसे बड़े crude oil importers में शामिल है। लंबे समय तक oil prices $100 के ऊपर रहने से: Reuters के मुताबिक यही वजह है कि high crude prices Indian market sentiment के लिए बड़ा risk बने हुए हैं। Rupee भी ₹95.30/$ तक कमजोर ऊंचे oil prices का असर rupee पर भी दिखाई दिया। आज Indian rupee करीब 0.2% गिरकर ₹95.30 प्रति dollar तक पहुंचा, जो करीब 10 दिनों का सबसे कमजोर स्तर है। Traders के मुताबिक RBI की ओर से संभावित dollar selling ने currency पर दबाव को कुछ हद तक सीमित किया। ONGC और Oil India में तेजी जहां high crude prices broader market के लिए चिंता हैं, वहीं upstream oil companies को इसका फायदा मिला। ONGC करीब 2% और Oil India करीब 2.4% ऊपर रहे, क्योंकि higher crude prices इनके revenue और margins को support कर सकते हैं। आगे Middle East Developments पर नजर Market की दिशा अब Middle East conflict, Strait of Hormuz shipping, crude oil prices और global inflation data पर निर्भर रहेगी। अगर oil supply disruption और बढ़ता है तो Brent पर फिर upward pressure आ सकता है और इसका असर Indian rupee, inflation और equities पर भी पड़ सकता है। source – Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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RBI की 19 अगस्त को आने वाली MPC मिनट्स पर बाजार की नजर, ब्याज दर और महंगाई के संकेतों का इंतजार

मुंबई: भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार की नजर अब 19 अगस्त 2026 को जारी होने वाली RBI Monetary Policy Committee (MPC) की बैठक की मिनट्स पर है। निवेशक यह समझने की कोशिश करेंगे कि केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में ब्याज दर, महंगाई और मौद्रिक नीति को लेकर किस दिशा में आगे बढ़ सकता है। RBI ने हालिया बैठक में रेपो रेट 5.25% पर रखा RBI की 3 से 5 अगस्त को हुई MPC बैठक में समिति ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया था। MPC ने लगातार चौथी बैठक में दरों में बदलाव नहीं किया और अपना रुख Neutral बनाए रखा। अब बाजार की नजर मिनट्स पर इसलिए है क्योंकि इसमें MPC के छह सदस्यों के विचारों और भविष्य की नीति को लेकर उनके आकलन से आगे की दिशा के संकेत मिल सकते हैं। महंगाई पर भी निवेशकों की नजर जुलाई 2026 में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.45% हो गई, जो RBI के 4% मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर है। हालांकि यह अभी भी RBI की 2-6% सहनशीलता सीमा के भीतर है। खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी ने कुल CPI को ऊपर खींचा है। ऐसे में निवेशक यह देखना चाहेंगे कि MPC सदस्य महंगाई में हालिया तेजी को अस्थायी मानते हैं या आने वाले महीनों के लिए इसे बड़ा जोखिम समझते हैं। अगली ब्याज दर नीति के संकेत मिल सकते हैं हालिया बैठक में RBI ने रेपो रेट में बदलाव नहीं किया था। अब MPC मिनट्स से बाजार को यह संकेत मिलने की उम्मीद है कि मौजूदा परिस्थितियों में आगे दरों में कटौती, लंबे समय तक यथास्थिति या भविष्य में दरों में बढ़ोतरी की संभावना को लेकर सदस्यों की सोच क्या है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां आगे की नीति के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। रुपये और बॉन्ड बाजार पर भी असर MPC मिनट्स का असर केवल ब्याज दरों पर ही नहीं बल्कि रुपये और सरकारी बॉन्ड यील्ड पर भी पड़ सकता है। भारतीय रुपया हाल में डॉलर के मुकाबले दबाव में रहा है। RBI के हस्तक्षेप ने गिरावट को सीमित किया है, जबकि पश्चिम एशिया में तनाव और ऊंची तेल कीमतें रुपये के लिए चुनौती बनी हुई हैं। वहीं बॉन्ड बाजार में निवेशक यह देख रहे हैं कि RBI की नीति आगे चलकर liquidity और ब्याज दरों को किस तरह प्रभावित कर सकती है। अमेरिका-ईरान तनाव भी अहम फैक्टर बाजार के लिए RBI की नीति के साथ-साथ अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतें भी महत्वपूर्ण हैं। तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी भारत के आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव डाल सकती है। इसी वजह से MPC मिनट्स में वैश्विक जोखिमों और महंगाई के बीच RBI के आकलन पर बाजार की खास नजर रहेगी। निवेशकों की नजर इन संकेतों पर 19 अगस्त को जारी होने वाली मिनट्स में बाजार मुख्य रूप से इन बातों पर ध्यान देगा: निष्कर्ष 19 अगस्त की RBI MPC मिनट्स बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत साबित हो सकती हैं। रेपो रेट फिलहाल 5.25% पर है, लेकिन जुलाई की 4.45% महंगाई और पश्चिम एशिया से जुड़े जोखिमों के बीच निवेशक यह जानना चाहते हैं कि RBI आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर कितना सतर्क रहेगा। Source: Reuters, RBI-related reports, NDTV Profit, Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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