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प्रकाश राज ने सौरव दास और आशुतोष रांका की तत्काल रिहाई की मांग की, कहा—विरोध की आवाज दबाना ठीक नहीं

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026: अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की तत्काल रिहाई की मांग दोहराई है। दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाए जाने के बीच प्रकाश राज ने शांतिपूर्ण राजनीतिक असहमति और विरोध प्रदर्शनों को अपराध की तरह देखे जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए। प्रेस क्लब में उठी थी रिहाई की मांग 15 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रकाश राज, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने सौरव दास और आशुतोष रांका की तत्काल रिहाई की मांग की थी। ‘पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा’ प्रकाश राज ने एक वीडियो संदेश में दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यदि असहमति की आवाज को रोकने की कोशिश की गई, तो “पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा।” उनका संदेश शांतिपूर्ण विरोध और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा पर केंद्रित था। दो दिन और बढ़ी न्यायिक हिरासत 19 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो और दिनों के लिए बढ़ा दी। दिल्ली पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया, जबकि दोनों नेताओं के वकीलों ने हिरासत के आधारों को अस्पष्ट बताते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाए। किस विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है मामला? दोनों नेताओं को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने बैरिकेड पार किए और पहले दिए गए शांति बनाए रखने संबंधी बांड की शर्तों का उल्लंघन किया। वहीं, CJP इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण विरोध और राजनीतिक असहमति से जुड़ा मामला बता रही है। ममता बनर्जी ने भी की रिहाई की मांग 20 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी सौरव दास और आशुतोष रांका की तत्काल रिहाई की मांग की। उन्होंने केंद्र सरकार और पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। इस घटनाक्रम के बाद दोनों नेताओं की हिरासत का मुद्दा राजनीतिक चर्चा में और प्रमुखता से सामने आया है। रिहाई में देरी पर आरोप-प्रत्यारोप CJP ने आरोप लगाया है कि दोनों नेताओं की रिहाई की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की गई। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने कहा कि जमानतदारों के दस्तावेजों से जुड़ी समस्याओं और आवश्यक प्रक्रियाओं के कारण देरी हुई। फिलहाल, दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है; देरी को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। स्रोत: Reuters, Reuters Connect, ABP Live और Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP ने Ashutosh Ranka और Saurav Das की रिहाई में जानबूझकर देरी का लगाया आरोप, दिल्ली पुलिस ने किया इनकार

नई दिल्ली, 19 अक्टूबर 2026: Cockroach Janta Party (CJP) ने अपने नेताओं Ashutosh Ranka और Saurav Das की रिहाई में जानबूझकर प्रक्रियात्मक देरी किए जाने का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि कई जमानतदारों के दस्तावेज और श्योरिटी बॉन्ड जमा करने के बावजूद दोनों की रिहाई की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। वहीं, दिल्ली पुलिस ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। CJP ने क्या आरोप लगाए? CJP की कानूनी टीम के मुताबिक, रिहाई की प्रक्रिया के दौरान बार-बार नई प्रक्रियात्मक आपत्तियां उठाई गईं। पार्टी ने आरोप लगाया कि कई श्योरिटी को बिना स्पष्ट कारण स्वीकार नहीं किया गया और जरूरी दस्तावेजों को आगे बढ़ाने में भी देरी हुई। पार्टी का कहना है कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद दोनों नेताओं की रिहाई में बाधाएं बनी रहीं। दिल्ली पुलिस ने क्या सफाई दी? दिल्ली पुलिस ने जानबूझकर देरी किए जाने के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस के मुताबिक, जमा किए गए श्योरिटी बॉन्ड में कुछ समस्याएं थीं और संबंधित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक था। इस तरह, रिहाई में देरी को लेकर CJP और पुलिस के दावों में विरोधाभास बना हुआ है। मजिस्ट्रेट को कथित धमकियों का मामला मामले में उस समय एक और घटनाक्रम सामने आया, जब स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने कथित तौर पर जान से मारने की धमकियां मिलने की शिकायत की। इस शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। हालांकि, धमकियों के पीछे कौन लोग हैं और उनका इस मामले से क्या संबंध है, यह जांच का विषय है। जमानत और रिहाई की सुनवाई भी टली रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को दोनों नेताओं की जमानत या रिहाई से संबंधित सुनवाई टल गई। इसके बाद संबंधित मजिस्ट्रेट के मामले से अलग होने की खबर सामने आई। बताया गया कि उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। इन घटनाक्रमों के कारण रिहाई की प्रक्रिया और लंबी हो गई। जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा है मामला Ashutosh Ranka और Saurav Das को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने पहले दिए गए शांति बनाए रखने संबंधी बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया। दूसरी ओर, CJP इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण विरोध और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा मामला बता रही है। 19 अक्टूबर को रिहाई पर नजर 19 अक्टूबर को दोनों नेताओं की हिरासत की अवधि समाप्त होने के करीब होने के बीच उनकी रिहाई को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग कर सकती है, जबकि CJP दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई पर जोर दे रही है। फिलहाल, रिहाई में देरी को लेकर पार्टी और पुलिस के अलग-अलग दावे सामने हैं। मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों के निर्णय से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। Source: The Indian Express, Hindustan Times, India Today, The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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Jantar Mantar को लेकर टकराव जारी, CJP बोली—“Protest site Jantar Mantar ही रहेगा”; police restrictions के बावजूद प्रदर्शन

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026: Delhi के Jantar Mantar को protest site के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर Cockroach Janta Party (CJP) और Delhi Police के बीच टकराव जारी है। Delhi Police द्वारा Jantar Mantar को designated protest venue की सूची से हटाए जाने के बावजूद CJP नेताओं ने साफ कहा है कि उनका protest site Jantar Mantar ही रहेगा। मंगलवार को कई activists ने restrictions के बीच वहां पहुंचने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने कई नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। CJP leaders Jantar Mantar पहुंचे, police ने हिरासत में लिया CJP के वरिष्ठ नेता Ashutosh Ranka, Saurav Das और Ajinkya Shinde मंगलवार को Jantar Mantar परिसर में पहुंचने की कोशिश करते हुए हिरासत में लिए गए। प्रदर्शनकारी Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगा रहे थे। Jantar Mantar का protest-site status हटाया गया Delhi Police ने हाल ही में Jantar Mantar को designated protest venue के तौर पर de-notify कर दिया है। इसके स्थान पर Ramlila Maidan, Burari Ground और CBD Ground को protests के लिए विकल्प के तौर पर चिन्हित किया गया है। यह बदलाव CJP के लगातार Jantar Mantar पर प्रदर्शन करने के प्रयासों के बीच हुआ है। CJP ने कहा—जगह बदलने को तैयार नहीं CJP ने 12 अक्टूबर को Delhi Police को पत्र देकर Jantar Mantar पर protest के लिए तारीख तय करने की मांग की थी। संगठन ने पुलिस को जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय दिया था। CJP leadership का कहना है कि वह प्रशासन द्वारा सुझाए गए दूसरे venues पर अपना आंदोलन shift नहीं करना चाहती। पांच या उससे ज्यादा लोगों के जुटने पर detention की चेतावनी Delhi Police ने New Delhi district में protest-related restrictions जारी रखी हैं। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ संवेदनशील इलाकों में पांच या उससे ज्यादा लोगों के समूह में इकट्ठा होने पर detention की कार्रवाई की जा सकती है। Police का कहना है कि restrictions public order बनाए रखने के लिए जरूरी हैं। 10 अक्टूबर को Jantar Mantar बना था fortress CJP ने इससे पहले 10 अक्टूबर को Jantar Mantar पर बड़े protest का ऐलान किया था, लेकिन heavy barricading, security deployment और mass detentions के कारण प्रदर्शनकारी वहां नहीं पहुंच सके। इसके बाद छोटे समूहों ने Dilli Haat, Connaught Place, Raj Ghat और अन्य इलाकों में flash demonstrations किए थे। CEC के इस्तीफे और voter-roll revision को लेकर विरोध CJP का आंदोलन Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे और electoral rolls की Special Intensive Revision को लेकर है। विपक्षी दलों और activists ने voter deletions पर सवाल उठाए हैं, जबकि Election Commission और BJP ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। source – Reuters, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल सील, CJP कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन के बीच 13 अक्टूबर को कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के कई कार्यकर्ता भारी बैरिकेडिंग के बावजूद जंतर-मंतर के प्रदर्शन क्षेत्र तक पहुंच गए। दिल्ली पुलिस ने CJP नेताओं सौरव दास, आशुतोष रंका और अजिंक्य शिंदे समेत करीब 20 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की ओर से जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने और वहां प्रवेश पर प्रतिबंध कड़े किए जाने के एक दिन बाद हुई। इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने को लेकर बहस तेज कर दी है। बैरिकेडिंग पार कर प्रदर्शन क्षेत्र में पहुंचे कार्यकर्ता 13 अक्टूबर की सुबह CJP के कुछ कार्यकर्ता बैरिकेडिंग और प्रतिबंधित प्रवेश व्यवस्था के बावजूद जंतर-मंतर के प्रदर्शन क्षेत्र तक पहुंचने में सफल रहे। वहां उन्होंने तिरंगा लहराया और “भारत माता की जय” तथा “इंकलाब जिंदाबाद” जैसे नारे लगाए। इसके बाद पुलिस ने कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। घटना के दौरान इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। सौरव दास और आशुतोष रंका समेत करीब 20 लोग हिरासत में पुलिस ने CJP के प्रमुख नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को हिरासत में लिया। अजिंक्य शिंदे समेत अन्य कार्यकर्ताओं को भी पुलिस वाहनों में ले जाया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, इस कार्रवाई में करीब 20 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब CJP पहले से ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति और स्थल पर लागू प्रतिबंधों का विरोध कर रही थी। हिरासत में पुलिस बस से सौरव दास ने साझा किया वीडियो हिरासत में लिए जाने के बाद सौरव दास ने पुलिस बस के अंदर से एक वीडियो साझा किया। वीडियो में उन्होंने दावा किया कि CJP के कार्यकर्ता पहले जंतर-मंतर के भीतर पहुंचने में सफल हुए और इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। यह विवरण दास के दावे पर आधारित है। घटना के पूरे क्रम की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है। जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को घोषणा की थी कि जंतर-मंतर को अब आधिकारिक रूप से निर्धारित प्रदर्शन स्थल के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसके विकल्प के रूप में रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड जैसे स्थानों का उल्लेख किया गया है। पुलिस की ओर से इस बदलाव को प्रदर्शन प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा कदम बताया गया है। हालांकि, जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण स्थान मानने वाले संगठनों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। CJP का जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल बनाने का ऐलान CJP ने पुलिस के फैसले का विरोध करते हुए जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल के रूप में स्थापित करने की बात कही है। संगठन का तर्क है कि इस ऐतिहासिक स्थान को प्रशासनिक आदेश के जरिए विरोध और असहमति के लिए बंद नहीं किया जाना चाहिए। CJP इसे नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक विरोध से जुड़ा मुद्दा बता रही है। दूसरी ओर, प्रशासन सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत पर जोर दे रहा है। अभिजीत दीपके ने सरकार की कार्रवाई की आलोचना की CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कार्यकर्ताओं की हिरासत और जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार विरोध की आवाज को रोक नहीं सकती और किसी स्थान को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने से असहमति समाप्त नहीं हो जाती। दीपके की प्रतिक्रिया CJP के राजनीतिक रुख को दर्शाती है। इस मामले में पुलिस और संगठन के बीच मुख्य मतभेद प्रदर्शन के लिए स्थान और वहां लागू प्रतिबंधों को लेकर है। भारी सुरक्षा के बीच सीमित रहा प्रवेश जंतर-मंतर और आसपास के इलाके में पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग और निगरानी बढ़ाई गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, मध्य दिल्ली के इस हिस्से में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहने के कारण जंतर-मंतर तक सामान्य पहुंच भी सीमित रही। पुलिस की ओर से उठाए गए कदमों का उद्देश्य प्रतिबंधित क्षेत्र में भीड़ जुटने से रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना बताया गया। 10 अक्टूबर को भी प्रदर्शनकारियों को रोका गया था 10 अक्टूबर को CJP ने जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की योजना बनाई थी, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां पहुंचने से रोक दिया था। इसके बाद कुछ समूहों ने INA और अन्य स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए। 13 अक्टूबर की घटना ने इस विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। CJP का कहना है कि वह अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेगी, जबकि पुलिस निर्धारित नियमों और प्रतिबंधों के पालन पर जोर दे रही है। CJP की मुख्य मांग क्या है? CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े आरोपों की जांच की मांग कर रही है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए। वहीं, निर्वाचन आयोग ने पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि पात्र मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के जरिए अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं। मतदाता सूची से जुड़े आरोप और उनके जवाब इस राजनीतिक विवाद का प्रमुख हिस्सा बने हुए हैं। पुलिस का पक्ष: प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के पीछे प्रमुख आधार यह बताया गया कि जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं है और कार्यकर्ता प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर वहां जुटे थे। पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों को हटाया और कई नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर अलग-अलग पक्षों के तर्क सामने आए हैं। हिरासत में लिए गए सभी लोगों के खिलाफ आगे की कानूनी स्थिति का विवरण उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है। वायरल वीडियो को लेकर भी फैक्ट-चेक आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर जंतर-मंतर पर हजारों लोगों की भीड़ दिखाने वाले कुछ वीडियो भी प्रसारित हुए। फैक्ट-चेक रिपोर्टों के अनुसार, कुछ वीडियो पुराने या असंबंधित घटनाक्रमों से जुड़े थे, जिनमें फिलीपींस के एक उत्सव और 2021 के किसान आंदोलन के दृश्य भी शामिल बताए गए। इसलिए सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे वीडियो को मौजूदा प्रदर्शन…

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CJP प्रदर्शन से पहले दिल्ली में बड़ा सुरक्षा अभियान, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका हिरासत में

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के विरोध में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले दिल्ली में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए। इस दौरान CJP के प्रमुख नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। वहीं, मध्य दिल्ली के कई इलाकों में मेट्रो सेवाओं तक पहुंच, यातायात और मोबाइल इंटरनेट पर भी प्रतिबंध लगाए गए। दिल्ली पहुंचते ही हिरासत में लिए गए CJP नेता रिपोर्टों के मुताबिक, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान उतरने के बाद हिरासत में लिया गया। CJP नेताओं ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आए थे। इस कार्रवाई के बाद प्रस्तावित प्रदर्शन और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई। कई अन्य प्रदर्शनकारी भी हिरासत में दिल्ली पुलिस ने CJP समर्थकों के अलावा अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में अनधिकृत जमावड़े को रोकने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई थी। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से किया इनकार दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के लिए आवेदन निर्धारित 10 दिन की समयसीमा के बजाय केवल तीन दिन पहले दिया गया था। अधिकारियों ने पिछले प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़ी कथित समस्याओं का भी हवाला दिया। इसके बाद प्रदर्शन की अनुमति और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठे। 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद सुरक्षा संबंधी निर्देशों के बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने की घोषणा की थी। यह प्रतिबंध 9 अक्टूबर रात 9 बजे से 10 अक्टूबर शाम 6 बजे तक लागू रखने की जानकारी दी गई थी। हालांकि, प्रभावित स्टेशनों में से अधिकांश पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रहने की बात कही गई। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य संवेदनशील इलाकों में लोगों की आवाजाही नियंत्रित करना बताया गया। पहले 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध की योजना शुरुआत में 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाने की योजना सामने आई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में इस व्यवस्था को चुनौती दी गई और व्यापक परिवहन प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई गई। रिपोर्टों के अनुसार, बाद में प्रतिबंधित स्टेशनों की संख्या घटाकर 45 कर दी गई। इस घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्था और आम यात्रियों की सुविधा के बीच संतुलन का सवाल खड़ा किया। मध्य दिल्ली में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित प्रदर्शन से पहले जनपथ-कर्तव्य पथ चौराहे के आसपास करीब चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 24 घंटे के लिए निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। यह प्रतिबंध 9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक लागू रखने की घोषणा की गई थी। अधिकारियों ने इस कदम को सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के संदर्भ में बताया। मध्य दिल्ली में यातायात पर भी प्रतिबंध दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने मध्य दिल्ली के करीब 30 स्थानों पर यातायात डायवर्जन और आवाजाही संबंधी प्रतिबंधों की व्यवस्था की थी। धौला कुआं से मंडी हाउस तक कई प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त जांच और बैरिकेडिंग की गई। यात्रियों को संभावित जाम और असुविधा को देखते हुए गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह भी दी गई थी। हजारों सुरक्षाकर्मी किए गए तैनात जंतर-मंतर, संसद मार्ग और निर्वाचन आयोग के मुख्यालय के आसपास पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों की व्यापक तैनाती की गई। मीडिया रिपोर्टों में सुरक्षा बलों की संख्या करीब 25,000 तक बताई गई। नई दिल्ली जिले को अलग-अलग सुरक्षा क्षेत्रों में बांटकर निगरानी और आवाजाही नियंत्रण की व्यवस्था की गई थी। BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध संवेदनशील इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू किए जाने की भी खबरें सामने आईं। इस प्रावधान के तहत निर्धारित परिस्थितियों में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए जा सकते हैं। इन आदेशों का उल्लंघन करने पर लागू कानून के अनुसार कार्रवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक प्रतिबंधों पर जताई चिंता सुप्रीम कोर्ट में मेट्रो और रेल सेवाओं पर व्यापक प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान चिंता जताई गई। अदालत ने सुरक्षा संबंधी जरूरतों और आम लोगों की आवाजाही के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। सुनवाई में यह सवाल भी उठा कि संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए परिवहन सेवाओं को बड़े पैमाने पर प्रभावित करना कितना आवश्यक और आनुपातिक है। CJP की प्रमुख मांग क्या है? CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर विरोध कर रही है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिससे चुनावी निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। वहीं, निर्वाचन आयोग और भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में मतदाता सूची में बदलाव और उसकी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। अभिजीत दीपके ने आंदोलन जारी रखने की बात कही रिपोर्टों के मुताबिक, हिरासत से पहले अभिजीत दीपके ने कहा था कि प्रतिबंधों और गिरफ्तारियों के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने की अपील भी की थी। CJP के नेताओं का रुख है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को सार्वजनिक रूप से उठाया जाना चाहिए। सुरक्षा कार्रवाई पर नागरिक अधिकारों की बहस तेज CJP प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए जाने, मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध, मोबाइल इंटरनेट सेवाओं के निलंबन और व्यापक सुरक्षा तैनाती ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन पर बहस तेज कर दी है। प्रशासन इन कदमों को सुरक्षा संबंधी एहतियाती कार्रवाई के रूप में देख रहा है, जबकि CJP और उसके समर्थक इन्हें लोकतांत्रिक असहमति पर जरूरत से ज्यादा प्रतिबंध बता रहे हैं। इस विवाद में प्रतिबंधों की आवश्यकता, उनका दायरा और आम…

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जंतर-मंतर पर धारा 163 लागू, अब 10 अक्टूबर के प्रदर्शन का क्या होगा? पुलिस ने साफ किया रुख

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर CJP, AISA और अन्य छात्र संगठनों के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 लागू है। इसके तहत बिना पूर्व लिखित अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने, प्रदर्शन करने, धरना देने और पिकेटिंग पर रोक लगाई जा सकती है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी गई है। ऐसे में बिना अनुमति सभा आयोजित करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। 10 अक्टूबर का प्रदर्शन अभी आधिकारिक रूप से मंजूर नहीं CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने Parliament Street Police Station में प्रस्तावित प्रदर्शन की औपचारिक सूचना दी थी। हालांकि, उन्होंने कहा था कि उन्होंने अनुमति नहीं मांगी, बल्कि केवल पुलिस को सूचना दी है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि धारा 163 लागू होने के कारण केवल सूचना देना पर्याप्त नहीं है और प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति जरूरी है। Section 163 में क्या-क्या प्रतिबंधित है? धारा 163 के तहत जारी आदेश के अनुसार, बिना लिखित अनुमति निम्न गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है: इन प्रतिबंधों का सटीक दायरा संबंधित आदेश की शर्तों पर निर्भर करता है। प्रदर्शन होने पर पुलिस रोक सकती है जमावड़ा अगर आयोजक 10 अक्टूबर को अनुमति के बिना जंतर-मंतर पहुंचते हैं, तो दिल्ली पुलिस उन्हें वहां एकत्र होने से रोक सकती है। स्थिति के अनुसार पुलिस बैरिकेडिंग, लोगों को हिरासत में लेने और भीड़ को तितर-बितर करने जैसी कार्रवाई कर सकती है। इससे पहले भी प्रदर्शनों के दौरान प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन को लेकर FIR दर्ज होने की खबरें सामने आई हैं। 40 Metro stations तक बंद करने की तैयारी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान जरूरत पड़ने पर 40 मेट्रो स्टेशनों तक अस्थायी रूप से बंद करने पर विचार किया जा सकता है। इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में ऐप आधारित कैब की आवाजाही पर प्रतिबंध, ट्रैफिक डायवर्जन और भीड़ नियंत्रण के उपाय भी लागू किए जा सकते हैं। इन व्यवस्थाओं का वास्तविक क्रियान्वयन प्रशासन के फैसलों पर निर्भर करेगा। 10 detention centres तैयार संभावित बड़े जमावड़े और हिरासत की स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस ने 10 डिटेंशन सेंटर तैयार किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्रीय सुरक्षा बलों को भी तैनाती के लिए तैयार रखा गया है। पुलिस को आशंका है कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी दिल्ली पहुंच सकते हैं। दिल्ली के प्रवेश मार्गों पर निगरानी पुलिस उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से दिल्ली आने वाले मार्गों पर भी नजर रख रही है। बड़े समूहों की आवाजाही को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों में बैरिकेडिंग और जांच बढ़ाई जा सकती है। CJP का दावा—प्रदर्शन होकर रहेगा CJP ने कहा है कि वह 10 अक्टूबर के कार्यक्रम को वापस नहीं ले रहा है। अभिजीत दिपके ने दावा किया है कि हिरासत और पुलिस कार्रवाई के बावजूद समर्थक दिल्ली पहुंचेंगे। संगठन ने देशभर में बड़ी संख्या में समर्थकों को हिरासत में लिए जाने का भी दावा किया है, हालांकि इन सभी आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नेहा बोरा और सौरव दास ने क्या कहा? नेहा बोरा और सौरव दास ने कहा है कि आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR पर रोक और चुनावी सुधारों की मांग को लेकर जारी रहेगा। आयोजकों का कहना है कि जंतर-मंतर निर्धारित प्रदर्शन स्थलों में शामिल है और लोगों को शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है। हालांकि, प्रदर्शन के लिए लागू प्रशासनिक आदेशों और अनुमति संबंधी शर्तों का पालन करना भी जरूरी है। मामला Delhi High Court भी पहुंचा Indian Youth Congress ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन संबंधी प्रतिबंधों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है। इस मामले में होने वाली सुनवाई और आदेश प्रदर्शन की अनुमति से जुड़े घटनाक्रम को प्रभावित कर सकते हैं। अगर Court या Police से अनुमति मिली तो? अगर 10 अक्टूबर से पहले अदालत या दिल्ली पुलिस प्रदर्शन को सीमित अनुमति देती है, तो कार्यक्रम निर्धारित शर्तों के साथ आयोजित किया जा सकता है। इन शर्तों में भीड़ की सीमा, निश्चित समय, निर्धारित स्थान और मार्च निकालने पर रोक जैसी व्यवस्थाएं शामिल हो सकती हैं। हालांकि, वास्तविक शर्तें संबंधित आदेश में स्पष्ट होंगी। अनुमति नहीं मिली तो क्या होगा? अगर प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं मिलती और कोई न्यायिक राहत भी नहीं मिलती, तो आयोजकों के लिए जंतर-मंतर पर सभा करना कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसी स्थिति में पुलिस लोगों को निर्धारित स्थल तक पहुंचने से रोक सकती है, उन्हें हिरासत में ले सकती है और लागू आदेशों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई कर सकती है। 10 अक्टूबर पर टिकी नजर फिलहाल स्थिति यह है कि आयोजकों ने प्रदर्शन वापस लेने की घोषणा नहीं की है, लेकिन पुलिस की ओर से अनुमति नहीं मिलने की बात सामने आई है। इसलिए 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर क्या स्थिति बनेगी, यह पुलिस की कार्रवाई, अदालत के संभावित आदेश और आयोजकों के अगले कदम पर निर्भर करेगा। Source – The Indian Express, The New Indian Express, Reuters, The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की तैयारी, नेहा बोरा और सौरव दास ने दी जानकारी

नई दिल्ली: Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, Special Intensive Revision (SIR) पर रोक और Election Commission की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर 10 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की तैयारी तेज हो गई है। CJP के co-convener सौरव दास और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदर्शन की जानकारी दी और देशभर के युवाओं, छात्र संगठनों तथा नागरिक समूहों से दिल्ली पहुंचने की अपील की। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन CJP, AISA, AISF, SFI और अन्य छात्र संगठनों ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर संयुक्त प्रदर्शन का आह्वान किया है। आयोजकों का कहना है कि यह प्रदर्शन केवल CEC के इस्तीफे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें व्यापक चुनावी सुधारों की मांग भी उठाई जाएगी। Delhi Police को दी गई औपचारिक सूचना सौरव दास ने Parliament Street Police Station जाकर प्रस्तावित प्रदर्शन की औपचारिक सूचना Delhi Police को दी। उन्होंने कहा कि आयोजकों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ी आवश्यक अंडरटेकिंग भी जमा की हैं और पुलिस से सहयोग की उम्मीद है। नेहा बोरा ने युवाओं से की अपील प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेहा बोरा ने छात्रों और युवाओं से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने इस आंदोलन को मतदान के अधिकार, संवैधानिक संस्थाओं और चुनावी जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा बताया। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग प्रदर्शन की प्रमुख मांग Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। CJP और उससे जुड़े संगठनों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताएं हुई हैं। Election Commission और BJP इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। SIR पर रोक लगाने की भी मांग आयोजक Special Intensive Revision प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक मतदाता सूची में संशोधन को लेकर उठे सवालों का समाधान नहीं होता, तब तक इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। ‘लंबी लड़ाई’ के लिए तैयार रहने की अपील सौरव दास ने समर्थकों से कहा कि वे केवल एक दिन के प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि लंबे आंदोलन के लिए तैयार रहें। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के बाद भी चुनावी सुधारों की मांग जारी रहेगी। कई छात्र संगठन साथ आए AISA, AISF, SFI और AAP की छात्र इकाई ASAP समेत कई संगठनों ने प्रदर्शन में भाग लेने की घोषणा की है। इससे 10 अक्टूबर का कार्यक्रम बड़े छात्र जुटाव में बदल सकता है। BKU ने भी भाग लेने का ऐलान किया 9 अक्टूबर को भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने भी घोषणा की कि संगठन 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में शामिल होगा। इससे आंदोलन में किसान संगठनों की भागीदारी भी जुड़ गई है। Delhi Police ने अनुमति के नियमों का दिया हवाला Delhi Police का कहना है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक है। पुलिस ने यह भी कहा है कि निर्धारित भीड़ सीमा और कानून-व्यवस्था से जुड़े दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। भारी सुरक्षा की तैयारी 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को देखते हुए Delhi Police और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने सुरक्षा तैयारियां बढ़ा दी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, मेट्रो स्टेशनों, कैब की आवाजाही, हिरासत केंद्रों और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्थाओं को लेकर आकस्मिक योजनाएं तैयार की गई हैं। हिरासत में लिए जाने को लेकर आरोप 9 अक्टूबर को CJP ने दावा किया कि देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आने वाले कई समर्थकों और छात्रों को हिरासत में लिया गया। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन ने बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया है, हालांकि सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। 10 अक्टूबर के प्रदर्शन पर टिकी नजर अब सभी की नजर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन पर है। एक तरफ आयोजक इसे राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन का अगला चरण बता रहे हैं, वहीं Delhi Police कानून-व्यवस्था और अनुमति से जुड़ी शर्तों के पालन पर जोर दे रही है। Source – The Indian Express, Reuters, Hindustan Times, The New Indian Express, The Quint, Navbharat Times जय राष्ट्र न्यूज़

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PM CARES Fund पर CJP प्रवक्ता Saurav Das ने उठाए सवाल; Audit और Fund Utilisation में Transparency की मांग

नई दिल्ली, 19 अगस्त 2026: Cockroach Janta Party (CJP) के प्रवक्ता Saurav Das ने PM CARES Fund में जमा राशि और उसके utilisation को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने करीब ₹8,452 करोड़ के corpus का हवाला देते हुए पूछा कि इसका बड़ा हिस्सा fixed deposits में क्यों रखा गया है और इसे सरकारी schools के infrastructure सुधारने में इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा। करीब 93% Corpus Fixed Deposits में FY 2024-25 के audited accounts पर आधारित reports के मुताबिक PM CARES Fund का closing corpus करीब ₹8,452.06 करोड़ था। इसमें लगभग ₹7,846.65 करोड़, यानी करीब 93%, scheduled banks के fixed deposits में रखा गया था। Schools पर Fund खर्च करने की मांग Saurav Das ने अपने ‘School Thik Karo’ campaign का जिक्र करते हुए कहा कि सरकारी schools में infrastructure की कमियां सामने आ रही हैं और PM CARES के उपलब्ध resources को school development के लिए इस्तेमाल करने पर विचार होना चाहिए। यह CJP की मांग है; PM CARES के trustees को fund के objectives के तहत disbursal criteria तय करने का अधिकार है। PM CARES Audit को लेकर भी उठाया था सवाल इससे पहले 5 अगस्त को Das ने PM CARES Fund और Prime Minister’s National Relief Fund से जुड़ी financial transparency पर सवाल उठाते हुए अधिक disclosure और audit की मांग की थी। उन्होंने BJP की political funding के sources पर भी सवाल उठाए और कहा था कि CJP अपनी funding disclose करने को तैयार है, बशर्ते ruling party भी इसी तरह transparency दिखाए। ये CJP के राजनीतिक दावे और मांगें हैं। Official Website क्या कहती है? PM CARES की official website के मुताबिक fund एक public charitable trust है, जिसका उद्देश्य public-health emergencies, natural या man-made disasters और अन्य distress situations में assistance देना है। Website यह भी कहती है कि fund को budgetary support नहीं मिलता और contributions voluntary हैं। Accounts का audit independent auditor KKC & Associates LLP द्वारा किया जाता है। FY 2024-25 में Limited Spending Published financial accounts पर आधारित reports के मुताबिक FY 2024-25 में PM CARES से करीब ₹87.85 लाख खर्च हुए, जबकि corpus ₹8,452 करोड़ से अधिक था। इसी gap को लेकर CJP ने सवाल उठाया है कि accumulated funds का इस्तेमाल education infrastructure और अन्य public needs में किस सीमा तक किया जा सकता है। Fund के उद्देश्य में Emergency और Distress प्रमुख PM CARES की stated objectives में emergency, calamity या distress की स्थिति में सहायता, healthcare infrastructure, research और affected population को financial assistance शामिल है। Schools पर सामान्य infrastructure spending इन objectives के तहत कैसे या कब fit होगी, इसका निर्णय trustees और applicable rules पर निर्भर करेगा। source – PM CARES / LiveMint / ABP Live / CJP Statements जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर विवाद पर CJP प्रवक्ता सौरव दास ने दिल्ली पुलिस से कार्रवाई की मांग की

नई दिल्ली, 6 सितंबर 2026: जंतर-मंतर पर हुए कथित मारपीट मामले को लेकर Cockroach Janta Party (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने Delhi Police की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। मामला CJP के प्रदर्शन से जुड़े संजय कुमार पर कथित हमले से संबंधित है। सौरव दास ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल सौरव दास ने आरोप लगाया कि संजय कुमार को गंभीर चोट लगने के बावजूद शुरुआत में मामले में पर्याप्त सख्त धाराएं नहीं लगाई गईं। उन्होंने पुलिस से मामले की दोबारा गंभीरता से जांच करने और सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की। स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग लेकर पहुंची CJP 4 सितंबर को सौरव दास, CJP के co-convenor Ashutosh Ranka और अन्य समर्थक Patel Chowk से Parliament Street Police Station पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी और FIR में गंभीर धाराएं जोड़ने की मांग की। Viral Video के बाद बढ़ा विवाद मामला उस समय फिर चर्चा में आया जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक कथित podcast/video clip सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। CJP का आरोप था कि वीडियो में कथित हमले को लेकर किए गए दावों के बाद पुलिस को आरोपी के खिलाफ अधिक कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। Delhi Police ने आरोपों को किया था खारिज Delhi Police ने CJP के कुछ आरोपों से असहमति जताई। पुलिस के मुताबिक RML Hospital की medical examination में संजय कुमार की चोट को simple injury बताया गया और skull fracture के दावे को MLC से मेल न खाने वाला बताया गया। पुलिस ने यह भी कहा कि किसी राजनीतिक दबाव या अनुचित हस्तक्षेप का आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत है। बाद में FIR में जोड़ा गया SC/ST Act CJP के विरोध और पुलिस अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद संबंधित FIR में Scheduled Castes and Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act की धाराएं जोड़ी गईं। इसके अलावा नाबालिग को कथित धमकियों से जुड़े मामले में अलग POCSO case दर्ज किया गया। निष्पक्ष जांच की मांग सौरव दास और CJP नेताओं का कहना है कि मामले में केवल एक व्यक्ति ही नहीं, बल्कि घटना में कथित रूप से शामिल अन्य लोगों और उसके बाद सोशल मीडिया पर दी गई धमकियों की भी जांच होनी चाहिए। मामला अब पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। source – The Indian Express / NDTVजय राष्ट्र न्यूज़

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