नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026: अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की तत्काल रिहाई की मांग दोहराई है। दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाए जाने के बीच प्रकाश राज ने शांतिपूर्ण राजनीतिक असहमति और विरोध प्रदर्शनों को अपराध की तरह देखे जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए।
प्रेस क्लब में उठी थी रिहाई की मांग
15 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रकाश राज, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने सौरव दास और आशुतोष रांका की तत्काल रिहाई की मांग की थी।
‘पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा’
प्रकाश राज ने एक वीडियो संदेश में दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यदि असहमति की आवाज को रोकने की कोशिश की गई, तो “पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा।” उनका संदेश शांतिपूर्ण विरोध और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा पर केंद्रित था।
दो दिन और बढ़ी न्यायिक हिरासत
19 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो और दिनों के लिए बढ़ा दी। दिल्ली पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया, जबकि दोनों नेताओं के वकीलों ने हिरासत के आधारों को अस्पष्ट बताते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाए।
किस विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है मामला?
दोनों नेताओं को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने बैरिकेड पार किए और पहले दिए गए शांति बनाए रखने संबंधी बांड की शर्तों का उल्लंघन किया। वहीं, CJP इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण विरोध और राजनीतिक असहमति से जुड़ा मामला बता रही है।
ममता बनर्जी ने भी की रिहाई की मांग
20 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी सौरव दास और आशुतोष रांका की तत्काल रिहाई की मांग की। उन्होंने केंद्र सरकार और पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। इस घटनाक्रम के बाद दोनों नेताओं की हिरासत का मुद्दा राजनीतिक चर्चा में और प्रमुखता से सामने आया है।
रिहाई में देरी पर आरोप-प्रत्यारोप
CJP ने आरोप लगाया है कि दोनों नेताओं की रिहाई की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की गई। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने कहा कि जमानतदारों के दस्तावेजों से जुड़ी समस्याओं और आवश्यक प्रक्रियाओं के कारण देरी हुई। फिलहाल, दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है; देरी को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
स्रोत: Reuters, Reuters Connect, ABP Live और Hindustan Times
जय राष्ट्र न्यूज़

