प्रमुख खबरें

तिहाड़ जेल से बाहर आते ही आशुतोष रांका ने लगाया ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का नारा, सौरव दास भी हुए रिहा

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026: CJP नेता आशुतोष रांका और सौरव दास सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद तिहाड़ जेल से बाहर आ गए। रिहाई के दौरान आशुतोष रांका ने गाड़ी में बैठते समय “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा लगाया, जबकि सौरव दास ने मीडिया के सामने मुट्ठी उठाकर प्रतिक्रिया दी। दोनों की रिहाई Special Executive Magistrate (SEM) Court के आदेश के बाद हुई। किस शर्त पर मिली रिहाई? SEM Court ने दोनों नेताओं के ₹50,000 के personal और surety bonds स्वीकार किए। साथ ही उन्होंने लिखित undertaking दी कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखेंगे और जब तक Jantar Mantar को protest site के रूप में दोबारा notified नहीं किया जाता, वहां प्रदर्शन का call नहीं देंगे। 7 दिन से थे हिरासत में रांका और दास को Jantar Mantar से जुड़े protest के बाद custody में लिया गया था। पुलिस का आरोप था कि दोनों ने barricades पार किए और पहले दिए गए peace bond की conditions का उल्लंघन किया। दोनों इस कार्रवाई को political dissent से जुड़ा मामला बताते रहे हैं। बाहर आते ही क्या बोले? रिहाई के बाद Ashutosh Ranka ने “Inquilab Zindabad” का नारा लगाया। Saurav Das ने इससे पहले संक्षिप्त प्रतिक्रिया में कहा था कि “सच्चाई की जीत हुई।” Abhijeet Dipke ने जताई खुशी CJP founder Abhijeet Dipke ने दोनों की release के बाद social media पर प्रतिक्रिया दी और उन्हें आंदोलन के बड़े नेताओं में बताया। समर्थकों ने भी जेल के बाहर उनकी रिहाई का स्वागत किया। रिहाई के बाद फिर आया पुलिस का summons मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। रिहाई के कुछ ही घंटों बाद Delhi Police Crime Branch ने Saurav Das, Ashutosh Ranka और Ajinkya Shinde को Jantar Mantar trespassing case में पूछताछ के लिए summon किया है। यानी legal proceedings अभी जारी हैं। Source – Times of India, India Today, The Indian Express, The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

भारत की जेल से 7 ‘अमेरिकी जासूस’ रिहा? जानिए पूरा सच!

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि भारत की जेल से “7 अमेरिकी जासूसों” को रिहा कर दिया गया है। लेकिन यह दावा भ्रामक है। असल में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद सात विदेशी नागरिकों में केवल एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक हैं। उन्हें अदालत ने डिफॉल्ट बेल मिलने के बाद एक महीने के लिए अमेरिका और यूक्रेन जाने की अनुमति दी है। किसी अदालत ने इन सातों को “अमेरिकी जासूस” घोषित नहीं किया है और NIA की जांच अभी जारी है। कौन हैं ये सात विदेशी नागरिक? NIA ने 13 मार्च 2026 को सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। इनमें अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिक—विक्टर कामिन्स्की, पेट्रो हुरबा, तारास स्लिवियाक, इवान सुखमानोव्स्की, मारियन स्टेफानकिव और मैक्सिम होंचारुक—शामिल हैं। मैथ्यू को कोलकाता एयरपोर्ट से, जबकि यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली और लखनऊ एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। NIA ने क्या आरोप लगाए थे? NIA की शुरुआती FIR में सातों पर UAPA की धारा 18 के तहत कथित आतंकी साजिश से जुड़े आरोप लगाए गए थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि ये लोग भारत के रास्ते बिना आवश्यक अनुमति के मिजोरम पहुंचे और वहां से अवैध रूप से म्यांमार गए। एजेंसी के मुताबिक उन्होंने म्यांमार के Ethnic Armed Groups को drone warfare, drone operations, assembly और jamming technology से जुड़ी ट्रेनिंग दी। क्या ये ‘अमेरिकी जासूस’ थे? नहीं, उपलब्ध रिकॉर्ड ऐसा साबित नहीं करते। सात आरोपियों में केवल मैथ्यू वैनडाइक अमेरिकी नागरिक हैं, बाकी छह यूक्रेन के नागरिक हैं। इसके अलावा NIA की चार्जशीट या अदालत के आदेश में सातों को “अमेरिकी जासूस” घोषित नहीं किया गया है। उन पर गंभीर सुरक्षा संबंधी आरोप जरूर लगे हैं, लेकिन आरोपी होना और किसी अदालत द्वारा जासूसी का दोषी ठहराया जाना अलग बातें हैं। इसलिए “भारत ने 7 अमेरिकी जासूस छोड़ दिए” कहना तथ्यात्मक रूप से गलत या भ्रामक है। चार्जशीट में क्यों नहीं लगी UAPA? इस मामले में बड़ा घटनाक्रम 8 सितंबर 2026 को हुआ, जब NIA ने पहली चार्जशीट दाखिल की। इस चार्जशीट में UAPA की धाराएं शामिल नहीं की गईं। इसके बजाय Immigration and Foreigners Act, 2025 से जुड़ी धाराओं के तहत आरोप लगाए गए। NIA ने अदालत को बताया कि UAPA से जुड़े पहलुओं की आगे जांच जारी है और पर्याप्त आधार मिलने पर supplementary chargesheet दाखिल की जा सकती है। India Today ने NIA सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया कि जांच में उस समय तक आरोपियों द्वारा भारत के खिलाफ सीधे गतिविधियां करने का निर्णायक सबूत नहीं मिला था, हालांकि संभावित लिंक की जांच जारी रखी गई। कैसे मिली डिफॉल्ट बेल? UAPA मामले में जांच एजेंसी के पास तय अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का समय होता है। सातों आरोपियों को 13 मार्च को गिरफ्तार किया गया था और 180 दिनों की अवधि 8 सितंबर को पूरी हुई। NIA की उस तारीख की चार्जशीट में UAPA आरोप शामिल नहीं होने के बाद अदालत ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को 18 सितंबर को डिफॉल्ट बेल दी। अदालत ने यह भी कहा कि इसी कानूनी सिद्धांत के आधार पर दूसरे सह-आरोपी भी डिफॉल्ट बेल के पात्र हैं। डिफॉल्ट बेल मिलने का मतलब आरोपी का आरोपों से बरी होना नहीं होता। इसका संबंध जांच और चार्जशीट की वैधानिक समयसीमा से है। विदेश जाने की अनुमति कैसे मिली? 24 सितंबर को दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने सातों विदेशी नागरिकों को एक महीने के लिए अपने-अपने देशों में परिवार से मिलने जाने की अनुमति दी। अदालत ने कहा कि विदेश यात्रा का अधिकार Article 21 से जुड़े व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है और NIA ने भी यह नहीं कहा था कि जांच पूरी करने के लिए निकट भविष्य में सातों की भारत में शारीरिक मौजूदगी जरूरी है। सातों को NIA की जांच में जरूरत पड़ने पर सहयोग करने, अपना पता, फोन नंबर और ईमेल उपलब्ध कराने जैसी शर्तों का पालन करना होगा। क्या केस खत्म हो गया है? नहीं। NIA ने मामले में कोई closure report दाखिल नहीं की है। एजेंसी ने अदालत को स्पष्ट किया है कि UAPA के तहत जांच जारी है और आगे पर्याप्त सबूत मिलने की स्थिति में supplementary chargesheet दाखिल की जा सकती है। इसलिए जेल से रिहाई या एक महीने के लिए विदेश जाने की अनुमति को मामले में “क्लीन चिट” नहीं माना जा सकता। आखिर वायरल दावे का सच क्या है? दावा: भारत ने जेल से 7 अमेरिकी जासूसों को रिहा कर दिया। सच्चाई: सात लोगों में एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक हैं। उन्हें किसी अदालत ने “जासूस” घोषित नहीं किया है। उन्हें डिफॉल्ट बेल मिली है और अदालत ने शर्तों के साथ एक महीने के लिए विदेश जाने की अनुमति दी है। NIA की UAPA जांच अभी जारी है। इसलिए “7 अमेरिकी जासूस रिहा” वाला दावा भ्रामक है, जबकि सात विदेशी आरोपियों को तिहाड़ जेल से कानूनी प्रक्रिया के तहत राहत मिलने की बात सही है। source – The Indian Express / India Today / NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

जंतर-मंतर मामले में स्वतंत्र भारद्वाज तिहाड़ जेल से रिहा; 3 हफ्ते की अंतरिम जमानत

नई दिल्ली, 18 सितंबर 2026: Delhi के Jantar Mantar पर प्रदर्शन के दौरान कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तार social media influencer Swatantra Bhardwaj को Tihar Jail से रिहा कर दिया गया है। Delhi court ने उन्हें तीन सप्ताह की interim bail दी थी, जिसके बाद कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने पर 17 सितंबर की देर रात वह जेल से बाहर आए। 15 September को मिली थी Interim Bail Patiala House Court के Additional Sessions Judge Saurabh Pratap Singh Laler ने 15 September को Bhardwaj को तीन सप्ताह की interim bail दी थी। Court ने ₹50,000 के personal bond और इतनी ही राशि की surety पर उन्हें राहत दी। Regular bail पर आगे विचार करने से पहले court इस अवधि के दौरान उनके conduct को भी देखेगा। Media से दूरी बनाकर निकले Jail से रिहाई के समय Swatantra Bhardwaj media से दूरी बनाते नजर आए। Viral video में वह mask लगाए तेजी से बाहर खड़ी car की ओर जाते दिखाई दिए। Reports के मुताबिक उनके associates उन्हें तुरंत वहां से लेकर चले गए और उन्होंने journalists से कोई बातचीत नहीं की। Court ने लगाईं कई सख्त Conditions Interim bail देते हुए court ने Bhardwaj को case से जुड़े complainant, उनकी बेटी या किसी witness से संपर्क नहीं करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा उन्हें social media, print या electronic media पर इस case, अपने defence या complainant के परिवार से जुड़ी comments या posts करने से भी रोका गया है। Court ने evidence से छेड़छाड़ नहीं करने की शर्त भी लगाई है। क्या है Jantar Mantar Case? मामला 23 June 2026 को Jantar Mantar पर Cockroach Janta Party (CJP) के protest के दौरान हुई कथित मारपीट से जुड़ा है। Bhardwaj पर एक student activist के पिता से कथित assault और caste-related remarks के आरोप लगाए गए हैं। Delhi Police ने मामला दर्ज कर उन्हें 4 September को Bulandshahr से हिरासत में लिया था और बाद में judicial custody में Tihar Jail भेजा गया। आरोपों पर अंतिम फैसला court में trial के बाद होगा। ‘Bail Trophy नहीं’—Court की टिप्पणी Bail देते हुए court ने Bhardwaj को public celebration से बचने की चेतावनी दी और कहा कि bail court के trust की expression है, इसे उपलब्धि की तरह प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए। मामले की अगली proceedings 6 October को होने की जानकारी reports में दी गई है। source – PTI / Aaj Tak / NDTV / Dainik Jagran जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें
Translate »