भारत-यूके व्यापार समझौता लागू, शुल्क कटौती से निर्यात को बढ़ावा और कारोबार में नए अवसर

नई दिल्ली: भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (Comprehensive Economic and Trade Agreement – CETA) आज से प्रभावी हो गया है। इस ऐतिहासिक समझौते के लागू होने के साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग के नए अवसर खुल गए हैं। सरकार का कहना है कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), किसानों और सेवा क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा, जबकि कई उत्पादों पर शुल्क में कमी आने से द्विपक्षीय व्यापार को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात को मिलेगा शुल्क-मुक्त प्रवेश सरकार के अनुसार, समझौते के तहत ब्रिटेन भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात उत्पादों पर सीमा शुल्क समाप्त करेगा। इससे वस्त्र एवं परिधान, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, समुद्री उत्पाद, कृषि उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और रसायन उद्योग को बड़ा फायदा मिलने की संभावना है। भारतीय उत्पाद अब ब्रिटिश बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हो सकेंगे। भारतीय उद्योगों को मिलेगा बड़ा लाभ विशेषज्ञों का मानना है कि शुल्क में कमी से भारतीय उद्योगों की लागत कम होगी और निर्यात बढ़ेगा। इससे विशेष रूप से MSME क्षेत्र को लाभ मिलेगा, क्योंकि छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए ब्रिटेन जैसे बड़े बाजार तक पहुंच आसान होगी। सरकार का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। सेवा क्षेत्र के लिए भी खुलेंगे नए अवसर व्यापार समझौते का लाभ केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं रहेगा। सूचना प्रौद्योगिकी (IT), वित्तीय सेवाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानूनी परामर्श और अन्य पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र में भी भारतीय कंपनियों और विशेषज्ञों को ब्रिटेन में बेहतर अवसर मिलेंगे। सामाजिक सुरक्षा अंशदान (Social Security Contribution) से जुड़े प्रावधानों में भी राहत मिलने से भारतीय पेशेवरों को लाभ होगा। उपभोक्ताओं को भी होगा फायदा समझौते के तहत भारत चरणबद्ध तरीके से ब्रिटेन से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर शुल्क कम करेगा। इससे भविष्य में प्रीमियम कारें, औद्योगिक मशीनें, चिकित्सा उपकरण और कुछ अन्य ब्रिटिश उत्पाद अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं। हालांकि सरकार ने संवेदनशील घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रावधान भी बनाए हैं। निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार समझौते से दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में वृद्धि होगी। नई कंपनियों के निवेश से विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और लॉजिस्टिक्स में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इससे भारत के वैश्विक व्यापार नेटवर्क को भी मजबूती मिलेगी। सरकार ने बताया ऐतिहासिक कदम वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने इसे भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। सरकार का कहना है कि यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव अर्थशास्त्रियों के अनुसार, इस समझौते से भारत के निर्यात में वृद्धि, विदेशी निवेश में तेजी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भागीदारी मजबूत होगी। साथ ही कई क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से गुणवत्ता सुधार और नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा। निष्कर्ष भारत-यूके व्यापार समझौते का लागू होना दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। शुल्क कटौती, बाजार तक आसान पहुंच और निवेश के नए अवसरों से भारतीय उद्योगों, निर्यातकों और उपभोक्ताओं को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को और मजबूत करेगा। Source: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार एवं भारत-यूके आधिकारिक व्यापार दस्तावेज। Original Report: भारत सरकार और यूनाइटेड किंगडम सरकार द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-यूके CETA आज से लागू, व्यापार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

नई दिल्ली: भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (Comprehensive Economic and Trade Agreement – CETA) आज 15 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गया। लगभग तीन वर्षों की बातचीत और औपचारिक प्रक्रियाओं के बाद लागू हुआ यह समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों, एमएसएमई, किसानों, स्टार्टअप्स और सेवा क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा, जबकि दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात को मिलेगा शुल्क-मुक्त प्रवेश CETA के लागू होने के साथ ही भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में शून्य सीमा शुल्क (Zero Duty) के साथ प्रवेश मिलेगा। इससे कपड़ा उद्योग, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, समुद्री उत्पाद, कृषि उत्पाद और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। सरकार का मानना है कि इससे भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। सेवा क्षेत्र और पेशेवरों को भी होगा फायदा समझौते के तहत भारत के आईटी, आईटीईएस, शिक्षा, वित्तीय सेवाओं, परामर्श और अन्य पेशेवर सेवा क्षेत्रों को ब्रिटेन में बेहतर बाजार पहुंच मिलेगी। साथ ही Double Contribution Convention (DCC) लागू होने से भारत और ब्रिटेन में कार्यरत योग्य पेशेवरों को सामाजिक सुरक्षा अंशदान (Social Security Contribution) दोहरी बार जमा नहीं करना पड़ेगा। इसकी अवधि भी तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है। ब्रिटिश उत्पादों पर भी मिलेगा लाभ समझौते के तहत भारत चरणबद्ध तरीके से ब्रिटेन से आने वाले कई उत्पादों पर आयात शुल्क कम करेगा। इससे भविष्य में प्रीमियम कारों, कुछ मशीनरी, औद्योगिक उपकरणों और ब्रिटिश व्हिस्की जैसे उत्पाद अपेक्षाकृत सस्ते हो सकते हैं। हालांकि सरकार ने संवेदनशील क्षेत्रों के लिए सुरक्षा प्रावधान भी बनाए हैं ताकि घरेलू उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। व्यापार और निवेश को मिलेगा नया प्रोत्साहन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, CETA केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश, डिजिटल व्यापार, बौद्धिक संपदा, सरकारी खरीद और नियामकीय सहयोग जैसे क्षेत्रों को भी मजबूत करेगा। इससे दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ने और नई रोजगार संभावनाएं पैदा होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया ऐतिहासिक कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को भारत-यूके संबंधों के लिए “ऐतिहासिक मील का पत्थर” बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता किसानों, श्रमिकों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नवाचार क्षेत्र के लिए नए अवसर खोलेगा तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को गति देगा। अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर? अर्थशास्त्रियों का मानना है कि CETA के लागू होने से भारत के निर्यात में तेज़ी आएगी, विदेशी निवेश आकर्षित होगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका मजबूत होगी। वहीं भारतीय उपभोक्ताओं को भी कुछ आयातित उत्पाद प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह समझौता भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। निष्कर्ष भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) का आज से लागू होना दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत है। इससे व्यापार, निवेश, सेवा क्षेत्र और रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है। सरकार का विश्वास है कि यह समझौता भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को और मजबूत करेगा तथा भारतीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करेगा। Source: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार एवं भारत-यूके आधिकारिक घोषणा। Original Report: भारत सरकार, यूके सरकार और आधिकारिक व्यापार संबंधी दस्तावेजों के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

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