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सेना प्रमुख बोले- हालिया सैन्य अभियानों से आत्मनिर्भर भारत और नई रक्षा रणनीति को मिली मजबूती

नई दिल्ली, 30 जून। भारतीय सेना प्रमुख ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हालिया सैन्य अभियानों और सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण ने देश की रक्षा क्षमता को नई मजबूती प्रदान की है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के तहत विकसित स्वदेशी रक्षा प्रणालियां, आधुनिक तकनीक और संयुक्त सैन्य रणनीति भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। स्वदेशी रक्षा प्रणालियों पर विशेष जोर सेना प्रमुख ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीकों और उपकरणों के बढ़ते उपयोग से भारत की रणनीतिक क्षमता मजबूत हुई है। स्वदेशी हथियार प्रणालियां, संचार उपकरण, ड्रोन और निगरानी तकनीकों का विस्तार सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता को बढ़ा रहा है। आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियां उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक सैन्य शक्ति के साथ-साथ साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन, अंतरिक्ष आधारित निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसी क्षमताएं भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई हैं। भारतीय सेना इन नई चुनौतियों के अनुरूप अपनी रणनीतियों को लगातार अपडेट कर रही है। संयुक्त सैन्य समन्वय पर बल सेना प्रमुख ने थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर समन्वय को आधुनिक रक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि संयुक्त अभियान, साझा संसाधन और तकनीकी एकीकरण भविष्य की सैन्य तैयारियों को और प्रभावी बनाएंगे। आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिली गति उन्होंने कहा कि सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत रक्षा उत्पादन में निजी उद्योग, स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों की भागीदारी बढ़ रही है। इससे न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि भारत वैश्विक रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में भी अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगा। सैनिकों के प्रशिक्षण और तकनीक पर फोकस सेना प्रमुख ने आधुनिक प्रशिक्षण, सिमुलेशन तकनीक, डिजिटल युद्ध प्रणाली और अत्याधुनिक उपकरणों के उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी रूप से प्रशिक्षित और सक्षम सैनिक भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकते हैं। रक्षा उद्योग के लिए नए अवसर विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलने से घरेलू उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर पैदा होंगे। इससे रोजगार, नवाचार और रक्षा निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। आगे की रणनीति सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचार और परिचालन क्षमता को लगातार मजबूत करती रहेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में उठाए जा रहे कदम देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करेंगे। स्रोत:भारतीय सेना द्वारा जारी आधिकारिक वक्तव्य एवं रक्षा मंत्रालय की उपलब्ध जानकारी। मूल रिपोर्ट:30 जून 2026 को सेना प्रमुख के संबोधन और रक्षा क्षेत्र से संबंधित आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO के लिए DFP-2026 जारी किया, रक्षा अनुसंधान परियोजनाओं को मिलेगी नई गति

नई दिल्ली, 29 जून। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के लिए Delegation of Financial Powers (DFP)-2026 जारी किया। नई वित्तीय शक्तियों का उद्देश्य रक्षा अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं में निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। सरकार का मानना है कि इससे अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों के विकास और स्वदेशीकरण को नई गति मिलेगी। क्या है DFP-2026? DFP-2026 एक संशोधित वित्तीय अधिकार ढांचा है, जिसके तहत DRDO के विभिन्न स्तरों के अधिकारियों को परियोजनाओं की आवश्यकता के अनुसार अधिक वित्तीय अधिकार दिए गए हैं। इससे अनुसंधान परियोजनाओं की मंजूरी, उपकरणों की खरीद और विकास कार्यों में अनावश्यक देरी कम होने की उम्मीद है। रक्षा अनुसंधान को मिलेगी रफ्तार रक्षा मंत्रालय के अनुसार नई व्यवस्था लागू होने के बाद विभिन्न अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं की स्वीकृति पहले की तुलना में अधिक तेजी से मिल सकेगी। इससे मिसाइल प्रणाली, रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन, साइबर सुरक्षा और अन्य आधुनिक रक्षा तकनीकों पर काम तेज होगा। आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का लक्ष्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। उन्होंने कहा कि DRDO और भारतीय रक्षा उद्योग के बीच बेहतर समन्वय से स्वदेशी रक्षा उपकरणों का विकास तेज होगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। उद्योग और स्टार्टअप को मिलेगा लाभ नई वित्तीय व्यवस्था से निजी उद्योग, MSME और रक्षा क्षेत्र के स्टार्टअप के साथ DRDO की साझेदारी भी मजबूत होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नई तकनीकों के विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा। पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर DFP-2026 में वित्तीय निर्णयों को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि नई प्रणाली से परियोजनाओं की निगरानी बेहतर होगी और संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप कदम बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए सरकार आधुनिक तकनीकों पर विशेष ध्यान दे रही है। AI, स्वायत्त प्रणाली, हाइपरसोनिक तकनीक, क्वांटम टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को प्राथमिकता दी जा रही है। DFP-2026 को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है। भविष्य की रणनीति विशेषज्ञों का मानना है कि DFP-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन से DRDO की अनुसंधान क्षमता और मजबूत होगी तथा नई रक्षा परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। इससे भारत की रक्षा तैयारियों, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक रक्षा उद्योग में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। स्रोत:रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार मूल रिपोर्ट:रक्षा मंत्रालय एवं DRDO द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री मोदी ने स्वदेशी रक्षा क्षेत्र की उपलब्धियों और सैन्य आत्मनिर्भरता पर जोर दिया

नई दिल्ली, 28 जून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में देश की रक्षा और सुरक्षा से जुड़ी स्वदेशी उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत “समुद्र से आसमान तक लगातार अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन रहा है।” उन्होंने जून महीने में रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र में हासिल की गई उपलब्धियों को आत्मनिर्भर भारत अभियान की महत्वपूर्ण सफलता बताया। स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म का किया उल्लेख प्रधानमंत्री ने हाल ही में भारतीय नौसेना में शामिल किए गए INS Dunagiri, INS Sanshodhak और INS Agray का उल्लेख करते हुए कहा कि इन प्लेटफॉर्मों का डिजाइन और निर्माण पूरी तरह भारत में हुआ है। उन्होंने इसे देश की बढ़ती रक्षा निर्माण क्षमता और स्वदेशी तकनीक का प्रमाण बताया। मेड-इन-इंडिया C-295 विमान की सराहना अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत में निर्मित C-295 सैन्य परिवहन विमान की पहली सफल उड़ान का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश में ऐसे 40 विमानों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे एयरोस्पेस उद्योग, एमएसएमई क्षेत्र और रोजगार को नई गति मिलेगी। DRDO की मिसाइल उपलब्धि का भी जिक्र प्रधानमंत्री मोदी ने DRDO द्वारा स्वदेशी लॉन्ग-रेंज लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल (LRLACM) के सफल परीक्षण की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में DRDO और भारतीय उद्योगों ने मिलकर काम किया है, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आत्मनिर्भर भारत को मिल रही नई मजबूती प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत नहीं करता, बल्कि उद्योग, नवाचार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करता है। उन्होंने कहा कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम कर स्वदेशी उत्पादन को लगातार बढ़ा रहा है। नागरिकों के योगदान की भी सराहना प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय एकता और जनभागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति केवल सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से संभव होती है। साथ ही उन्होंने अंधविश्वास से दूर रहकर वैज्ञानिक सोच अपनाने का भी संदेश दिया। रक्षा क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक पहचान विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन, आधुनिक सैन्य तकनीक और अनुसंधान में बढ़ते निवेश से भारत की वैश्विक रक्षा क्षमता लगातार मजबूत हो रही है। इससे रक्षा निर्यात बढ़ाने और घरेलू उद्योग को प्रोत्साहन मिलने की भी संभावना है। आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण पर रहेगा फोकस सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में रक्षा उत्पादन, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को और गति देना है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि स्वदेशी तकनीक और भारतीय उद्योगों की भागीदारी से भारत रक्षा क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। स्रोत:प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) मूल रिपोर्ट:प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड और आधिकारिक सरकारी बयानों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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