पटना: बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा और उसके साथी के साथ कथित बदसलूकी और छेड़छाड़ के मामले में मुख्य आरोपी नंदन यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के दौरान हुई मुठभेड़ में नंदन के पैर में गोली लगी, जबकि उसका साथी हरेराम यादव भागने की कोशिश में घायल हुआ। हालांकि अब इस मुठभेड़ की परिस्थितियों को लेकर आरोपी के परिवार और ABVP ने सवाल उठाए हैं और पारदर्शी जांच की मांग की है।
19 सितंबर की घटना के बाद वायरल हुआ था वीडियो
मामला 19 सितंबर 2026 का है। पुलिस के मुताबिक जमुई में दो नाबालिग छात्र-छात्रा को कुछ युवकों ने रास्ते में रोककर उनके साथ मारपीट और कथित छेड़छाड़ की थी।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने स्वत: संज्ञान लिया और आरोपियों की पहचान शुरू की। मामले की जांच के लिए महिला अधिकारी के नेतृत्व में SIT भी गठित की गई।
नंदन यादव के पैर में लगी गोली
22 सितंबर को पुलिस ने मुख्य आरोपी बताए जा रहे नंदन यादव और हरेराम यादव को गिरफ्तार किया।
मुंगेर रेंज के DIG राकेश कुमार के मुताबिक नंदन यादव के पैर में गोली लगी, जबकि हरेराम यादव भागने की कोशिश के दौरान घायल हुआ। दोनों को इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया।
पुलिस ने क्या बताई मुठभेड़ की कहानी?
पुलिस के अनुसार नंदन यादव को पकड़ने के दौरान उसने कथित तौर पर भागने की कोशिश की और पुलिस पर फायरिंग की। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें उसके पैर में गोली लगी।
हालांकि मुठभेड़ के घटनाक्रम और बरामद हथियार को लेकर बाद में सवाल उठने शुरू हो गए।
ABVP ने पूछा- हथियार कहां है?
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने पुलिस की मुठभेड़ की कहानी पर कई सवाल उठाए हैं।
ABVP नेताओं ने पूछा कि यदि वास्तव में आरोपी और पुलिस के बीच गोलीबारी हुई थी तो घटनास्थल से हथियार की आधिकारिक बरामदगी क्यों नहीं दिखाई गई। संगठन ने घटनास्थल की बैरिकेडिंग, साक्ष्यों के संरक्षण और गिरफ्तारी की पूरी प्रक्रिया को लेकर भी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
हरेराम की चोट को लेकर भी उठे सवाल
ABVP ने हरेराम यादव की चोट को लेकर भी पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा।
कुछ शुरुआती रिपोर्टों में उसके पैर में गंभीर चोट या फ्रैक्चर होने की बात सामने आई थी। बाद में उसकी अदालत में पेशी से जुड़े वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठे कि यदि चोट इतनी गंभीर थी तो वह अगले दिन सामान्य रूप से कैसे चल रहा था।
हालांकि Amar Ujala की पड़ताल के मुताबिक सोशल मीडिया पर नंदन और हरेराम की चोटों को लेकर भ्रम भी फैला। पुलिस का कहना है कि गोली नंदन यादव को लगी थी, जबकि हरेराम को भागते समय चोट आई थी और उसके पैर टूटने की बात सही नहीं थी।
आरोपी की मां ने लगाया ‘फर्जी एनकाउंटर’ का आरोप
नंदन यादव की मां ने बेटे की घटना में भूमिका को गलत बताते हुए नहीं बचाया, लेकिन पुलिस मुठभेड़ पर सवाल जरूर उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने नंदन को पकड़ने के बाद उसके पैर में गोली मारी और इसे मुठभेड़ बताया। यह परिवार का आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस अपने बयान में इसे गिरफ्तारी के दौरान हुई मुठभेड़ बता रही है।
अस्पताल में रखने के तरीके पर भी विवाद
26 सितंबर को यह सवाल भी उठा कि नंदन यादव को अस्पताल के सामान्य कैदी वार्ड के बजाय एक अलग आइसोलेशन वार्ड में क्यों रखा गया।
अस्पताल प्रशासन की ओर से कहा गया कि नंदन फिलहाल मरीज के रूप में भर्ती है और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कैदी वार्ड से जुड़ी व्यवस्था लागू होगी।
कई आरोपी हिरासत में
पुलिस ने मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया है, जिनमें नाबालिग भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो, वाहन नंबर और डिजिटल सबूतों के जरिए आरोपियों की पहचान की गई।
इसके साथ ही पीड़ित नाबालिगों की पहचान उजागर करने वाला वीडियो शेयर करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की गई है।
मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच की मांग
जमुई की मूल घटना को लेकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग व्यापक रही है, लेकिन इसके साथ पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता पर भी बहस शुरू हो गई है।
एक तरफ पुलिस का दावा है कि आरोपी ने भागने और फायरिंग की कोशिश की, जबकि दूसरी ओर परिवार और ABVP मुठभेड़ की परिस्थितियों पर सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल इन सवालों से पुलिस मुठभेड़ के फर्जी होने की पुष्टि नहीं होती और अंतिम निष्कर्ष किसी स्वतंत्र या आधिकारिक जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
source – Hindustan Times / Dainik Jagran / Times Now Navbharat / Amar Ujala / NDTV
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