कोलकाता: सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) में एक कार्यक्रम के दौरान छात्रों और अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (ABGP) के सदस्यों के बीच हुई झड़प के बाद विवाद बढ़ गया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमला, तोड़फोड़ और अभद्रता के आरोप लगा रहे हैं। हालांकि वायरल दावों के उलट, उपलब्ध पुलिस शिकायत में छात्रों पर “anti-religious slogans” लगाने का आरोप है, जबकि छात्रों का कहना है कि कार्यक्रम से जुड़े लोगों ने उन्हें “anti-national”, “urban Naxal” और “terrorist” कहा। इन आरोपों की पुलिस जांच जारी है।
ABGP के कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ विवाद
27 सितंबर को SRFTI के मुख्य ऑडिटोरियम में ABGP का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। संगठन ने दावा किया कि उसने कार्यक्रम स्थल के लिए करीब ₹32,700 का भुगतान किया था और कार्यक्रम में लगभग 250 लोग मौजूद थे।
छात्रों के एक समूह ने कैंपस में लगाए गए पोस्टर और बैनरों पर आपत्ति जताई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हुई और मामला हाथापाई तक पहुंच गया।
छात्रों पर कार्यक्रम बाधित करने का आरोप
ABGP ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि कार्यक्रम शुरू होने के करीब 10 मिनट बाद 30 से 40 लोग छात्र संघ के बैनर लेकर हॉल में पहुंचे और कार्यक्रम बाधित किया।
शिकायत में दावा किया गया कि प्रदर्शनकारियों ने “Resist Hindutva Fascism” लिखा बैनर लगाया और नारेबाजी की।
Bharat Mata और Vivekananda की तस्वीरों को नुकसान पहुंचाने का दावा
ABGP ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान भारत माता, स्वामी विवेकानंद और मां दुर्गा से जुड़ी तस्वीरों, वस्तुओं और स्मृति चिह्नों को नुकसान पहुंचाया गया।
संगठन का दावा है कि उसके बैनर को भी फाड़ा गया और कार्यक्रम में मौजूद लोगों के साथ मारपीट हुई। ये आरोप जांच के अधीन हैं और पुलिस CCTV फुटेज की पड़ताल कर रही है।
छात्रों ने लगाया बाहरी लोगों के हमले का आरोप
दूसरी ओर SRFTI Students’ Union ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध के दौरान छात्रों पर हमला किया गया।
छात्रों का दावा है कि उन पर पत्थर और ईंटें फेंकी गईं, उन्हें कैंपस में दौड़ाया गया और महिला छात्रों के साथ भी बदसलूकी हुई। कुछ faculty members और staff के साथ मारपीट के आरोप भी लगाए गए हैं।
‘Anti-National’ शब्द को लेकर क्या है सच?
इस पूरे विवाद में “anti-national slogans” को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।
उपलब्ध शिकायत के अनुसार ABGP ने छात्रों पर anti-religious slogans लगाने का आरोप लगाया है। वहीं छात्र संघ का दावा है कि कार्यक्रम से जुड़े लोगों ने प्रदर्शनकारी छात्रों को “anti-national”, “urban Naxal” और “terrorist” कहकर संबोधित किया।
इसलिए “छात्रों ने anti-national नारे लगाए” को अभी स्थापित तथ्य के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
पुलिस ने दर्ज की कई FIR
घटना के बाद पुलिस ने अलग-अलग शिकायतों के आधार पर कई FIR दर्ज की हैं।
एक मामले में अज्ञात छात्रों पर पुलिसकर्मियों को रोकने, सरकारी काम में बाधा डालने और पुलिस वाहन को नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं। दूसरी शिकायत ABGP की ओर से की गई है, जबकि SRFTI प्रशासन की शिकायत में छात्रों और faculty members पर कथित हमले का मामला शामिल है। अलग-अलग रिपोर्टों में FIR की संख्या तीन से चार बताई गई है।
CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस
पुलिस ने कैंपस और आसपास के CCTV फुटेज जुटाए हैं और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
अब तक सामने आए आरोपों में किसी एक पक्ष के पूरे दावे को पुलिस ने अंतिम रूप से सही घोषित नहीं किया है।
कैंपस में छात्रों का Silent Protest
घटना के बाद छात्रों ने कैंपस में silent protest भी किया। छात्रों ने हिंसा की निष्पक्ष जांच और कैंपस में बाहरी संगठनों के कार्यक्रमों को लेकर स्पष्ट नियम बनाने की मांग की।
SRFTI Alumni Association के कुछ सदस्यों ने भी छात्रों के समर्थन में बयान जारी कर घटना की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
ABVP ने घटना से बनाई दूरी
घटना के बाद ABVP का नाम भी सोशल मीडिया पर चर्चा में आया, लेकिन संगठन की राज्य इकाई ने कहा कि उसका इस कार्यक्रम या झड़प से कोई संबंध नहीं है।
विवाद का मुख्य केंद्र ABGP का कार्यक्रम और उसका विरोध करने वाले SRFTI छात्र रहे।
जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक तरफ ABGP कार्यक्रम में तोड़फोड़ और धार्मिक-राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान का दावा कर रहा है, जबकि दूसरी ओर छात्र अपने ऊपर बाहरी लोगों के हमले और अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगा रहे हैं।
पुलिस की जांच, CCTV फुटेज और दर्ज शिकायतों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि हिंसा की शुरुआत कैसे हुई और किन लोगों की भूमिका रही।
source – The Indian Express / Times of India / India Today / ANI
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