President’s rule in West Bengal: क्या सच में पश्चिम बंगाल में लगेगा राष्ट्रपति शासन और होगी अर्धसैनिक बलों की तैनाती? नजरें सुप्रीम कोर्ट पर

President's rule West Bengal

आज मुर्शिदाबाद हिंसा के बाद राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में  सुनवाई होगी। बता दें कि मुर्शिदाबाद हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीआर गवई बेंच आज सुनवाई करेगी। इस संबंध में वकील विष्णु शंकर जैन ने याचिका लगाई है। वकील विष्णु शंकर जैन की याचिका में पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग (President’s rule in West Bengal) की गई है। दरअसल, 13 अप्रैल से मुर्शिदाबाद में हुई झड़पों के बाद से राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग उठ रही है। मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा में तीन लोगों की मौत और 18 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने 13 अप्रैल को हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में केंद्रीय बलों को तैनात करने का आदेश दिया। चौतरफा किरकिरी होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और दावा किया कि “उसने आगजनी और हिंसा के सिलसिले में 118 लोगों को गिरफ्तार किया है।” जानकारी के मुताबिक दायर की गई याचिका में पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन सहित अर्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग की गई है। गौर करने वाली बात यह कि इस मामले पर सुनवाई करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गई है। कहने की जरूरत नहीं, बंगाल में हुई हिंसा ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी सरकार पर वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों से भड़की हिंसा को अनुमति देने के लिए जानकर निशाना साधा है।

अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन की ओर से दायर की गई है (President’s rule in West Bengal) याचिका 

West Bengal Supreme Court case

बता दें कि राष्ट्रपति शासन पर दायर याचिका का उल्लेख अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन की ओर से किया (President’s rule in West Bengal) गया था। जिसे रंजना अग्निहोत्री और अन्य द्वारा दायर एक लंबित याचिका के साथ सुनवाई के लिए रखा गया था। जिन्होंने 2021 में पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा के संदर्भ में राष्ट्रपति शासन की मांग की थी। इस दौरान अधिवक्ता जैन ने कहा कि “साल 2021 के मामले में अदालत पहले ही नोटिस जारी कर चुकी है। इस पर विचार किया जा रहा है। इस आवेदन के माध्यम से हमने हाल ही में हुई हिंसा की घटनाओं का हवाला दिया है। हम सिर्फ संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत राज्य से केंद्र द्वारा रिपोर्ट मांग रहे हैं। दरअसल, अनुच्छेद 355 राज्यों को बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से बचाने के लिए संघ के कर्तव्य से संबंधित है, जो राष्ट्रपति शासन लगाने का आधार है। इस प्रावधान के तहत केंद्र को यह सुनिश्चित करना होता है कि राज्य संविधान के प्रावधानों के अनुसार चलें। 

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याचिका में की गाई है राष्ट्रपति शासन लागू करने की (President’s rule in West Bengal) मांग 

बता दें कि बीते दिन राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग (President’s rule in West Bengal) पर जवाब देते हुए पीठ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “आप चाहते हैं कि हम राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए रिट जारी करें? अभी हमें विधायी और कार्यपालिका के अधिकारों में दखल देने के लिए दोषी ठहराया जा रहा है। गौरतलब हो कि बीते सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की एक अलग पीठ ने मुर्शिदाबाद हिंसा मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली दो याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने दो याचिकाकर्ताओं अधिवक्ता विशाल तिवारी और शशांक शेखर झा को अपनी याचिकाएं वापस लेने की अनुमति दी। ऐसा इसलिए क्योंकि अदालत ने पाया कि याचिकाएं मीडिया रिपोर्टों पर आधारित थीं। 

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