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जम्मू-कश्मीर | बडगाम में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़, शीर्ष लश्कर कमांडर हाशिम मूसा मारा गया

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा का शीर्ष कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा मारा गया। भारतीय सेना के अनुसार यह ऑपरेशन खांसाहिब-यूसमर्ग क्षेत्र में चलाया गया और बाद में उसका शव हथियारों व अन्य सैन्य सामग्री के साथ बरामद किया गया। सुरक्षा एजेंसियां उसे जम्मू-कश्मीर में कई बड़े आतंकी हमलों से जोड़ती रही हैं।

खांसाहिब-यूसमर्ग इलाके में हुआ एनकाउंटर

सेना के मुताबिक खुफिया सूचना मिलने के बाद बडगाम के ऊंचाई वाले इलाके में संयुक्त अभियान शुरू किया गया।

संदिग्ध गतिविधि दिखने पर सुरक्षाबलों ने आतंकियों को चुनौती दी, जिसके बाद गोलीबारी शुरू हो गई। जवाबी कार्रवाई में हाशिम मूसा मारा गया।

सुबह तलाशी में मिला शव

मुठभेड़ के बाद सुबह Palmaidan क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया गया।

सेना की 15 Corps ने बताया कि इसी दौरान हाशिम मूसा का शव बरामद हुआ। मौके से “war-like stores” यानी हथियार और सैन्य सामग्री भी मिली।

कौन था हाशिम मूसा?

हाशिम मूसा का असली नाम मोहम्मद आसिफ बताया गया है। वह Asif Fauji नाम से भी जाना जाता था।

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक वह पाकिस्तान आधारित लश्कर-ए-तैयबा का वरिष्ठ कमांडर था और 2022 के बाद जम्मू-कश्मीर में सक्रिय रहा।

कई हमलों से जुड़ा था नाम

अधिकारियों ने हाशिम मूसा के समूह को Halan, Dehra Ki Gali, Kandi, Shiv Khori, Gagangir, Bootapathri और Baisaran समेत कई हमलों से जोड़ा है।

इन घटनाओं में सुरक्षाकर्मियों और नागरिकों की मौत हुई थी। ये संबंध सुरक्षा एजेंसियों के आरोपों और जांच पर आधारित हैं।

पहलगाम हमले की जांच में भी आया था नाम

सुरक्षा एजेंसियों ने मूसा को 2025 के पहलगाम आतंकी हमले से जुड़े नेटवर्क से भी जोड़ा था।

वह सुलेमान शाह का करीबी सहयोगी बताया गया, जिसे एजेंसियां पहलगाम हमले की साजिश से जोड़ती रही हैं।

चार सदस्यीय LeT समूह का आखिरी सदस्य था

भारतीय सेना के मुताबिक हाशिम मूसा उस चार सदस्यीय लश्कर समूह का अंतिम सक्रिय सदस्य था, जो 2022 से जम्मू-कश्मीर में काम कर रहा था।

समूह के अन्य तीन सदस्य अलग-अलग अभियानों में पहले ही मारे जा चुके थे। सेना ने कहा कि मूसा की मौत के साथ पूरा समूह निष्क्रिय हो गया है।

महीनों से चल रही थी तलाश

रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियां मई 2026 से मूसा को ट्रैक कर रही थीं।

तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए इस लंबे अभियान को कुछ रिपोर्टों में Operation Sheruwali कहा गया है।

पूर्व पाकिस्तानी SSG कमांडो होने का दावा

कुछ सुरक्षा अधिकारियों ने दावा किया कि मूसा पाकिस्तान सेना की Special Services Group यानी SSG में रह चुका था।

यह दावा भारतीय सुरक्षा अधिकारियों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र सार्वजनिक पुष्टि सीमित है।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता

सुरक्षा बलों ने हाशिम मूसा के मारे जाने को लश्कर नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बताया है।

इसके बाद भी आसपास के जंगलों और संवेदनशील इलाकों में तलाशी तथा निगरानी जारी रखी गई ताकि किसी अन्य आतंकी की मौजूदगी की संभावना को खारिज किया जा सके।

जम्मू-कश्मीर में आतंक विरोधी अभियान जारी

बडगाम मुठभेड़ के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि आतंकवादी नेटवर्क और उनके सहयोगियों के खिलाफ intelligence-based operations जारी रहेंगे।

हाशिम मूसा के खिलाफ लगाए गए अलग-अलग मामलों और हमलों से जुड़े आरोप सुरक्षा एजेंसियों के दावों पर आधारित हैं, जबकि अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेंगे।

source – Indian Army / The Indian Express / Hindustan Times / The Times of India

जय राष्ट्र न्यूज़

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