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आज Infantry Day—27 अक्टूबर 1947 को भारतीय सेना की पहली टुकड़ी श्रीनगर पहुंची थी

नई दिल्ली: भारत में आज, 27 अक्टूबर 2026, Infantry Day मनाया जा रहा है। यह दिन भारतीय सेना की उस ऐतिहासिक कार्रवाई की याद में मनाया जाता है, जब 27 अक्टूबर 1947 को भारतीय सेना की पहली infantry troops को हवाई मार्ग से श्रीनगर पहुंचाया गया था। इस सैन्य अभियान ने जम्मू-कश्मीर की रक्षा में निर्णायक भूमिका निभाई थी। 27 अक्टूबर 1947 को क्या हुआ था? 1947 में जम्मू-कश्मीर पर कबायली हमलावरों और पाकिस्तान समर्थित बलों के दबाव के बीच महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ Instrument of Accession पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद भारतीय सेना को तुरंत श्रीनगर भेजा गया ताकि घाटी और एयरफील्ड की सुरक्षा की जा सके। पहली टुकड़ी श्रीनगर एयरफील्ड पर उतरी भारतीय सेना की 1 Sikh Battalion की टुकड़ी 27 अक्टूबर 1947 की सुबह श्रीनगर एयरफील्ड पहुंची। इस deployment को स्वतंत्र भारत के शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में गिना जाता है। भारतीय सैनिकों ने एयरफील्ड को सुरक्षित किया और आगे बढ़ रहे हमलावरों का मुकाबला शुरू किया। Infantry Day क्यों मनाया जाता है? Infantry Day का उद्देश्य उन सैनिकों के साहस और बलिदान को याद करना है जिन्होंने 1947 में जम्मू-कश्मीर की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी। यह दिन भारतीय सेना की infantry units की भूमिका, readiness और sacrifice को सम्मान देने का अवसर भी है। श्रीनगर की रक्षा क्यों थी इतनी अहम? अगर श्रीनगर एयरफील्ड पर हमलावर कब्जा कर लेते, तो भारतीय सेना के लिए घाटी में तेजी से reinforcement पहुंचाना बेहद मुश्किल हो जाता। इसी वजह से 27 अक्टूबर की troop airlift को पूरे अभियान का turning point माना जाता है। भारतीय सेना ने दी श्रद्धांजलि हर साल Infantry Day पर सेना के वरिष्ठ अधिकारी और पूर्व सैनिक युद्ध स्मारकों पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते हैं। इस मौके पर 1947 की सैन्य कार्रवाई और infantry के योगदान को याद किया जाता है। 79 साल बाद भी क्यों खास है यह दिन? 2026 में इस ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई को 79 वर्ष पूरे हो रहे हैं। भारतीय सेना के लिए यह दिन केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि duty, courage और rapid response की परंपरा का प्रतीक भी है। स्रोत – Indian Army, Press Information Bureau, Ministry of Defence जय राष्ट्र न्यूज़

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जम्मू-कश्मीर | बडगाम में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़, शीर्ष लश्कर कमांडर हाशिम मूसा मारा गया

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा का शीर्ष कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा मारा गया। भारतीय सेना के अनुसार यह ऑपरेशन खांसाहिब-यूसमर्ग क्षेत्र में चलाया गया और बाद में उसका शव हथियारों व अन्य सैन्य सामग्री के साथ बरामद किया गया। सुरक्षा एजेंसियां उसे जम्मू-कश्मीर में कई बड़े आतंकी हमलों से जोड़ती रही हैं। खांसाहिब-यूसमर्ग इलाके में हुआ एनकाउंटर सेना के मुताबिक खुफिया सूचना मिलने के बाद बडगाम के ऊंचाई वाले इलाके में संयुक्त अभियान शुरू किया गया। संदिग्ध गतिविधि दिखने पर सुरक्षाबलों ने आतंकियों को चुनौती दी, जिसके बाद गोलीबारी शुरू हो गई। जवाबी कार्रवाई में हाशिम मूसा मारा गया। सुबह तलाशी में मिला शव मुठभेड़ के बाद सुबह Palmaidan क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया गया। सेना की 15 Corps ने बताया कि इसी दौरान हाशिम मूसा का शव बरामद हुआ। मौके से “war-like stores” यानी हथियार और सैन्य सामग्री भी मिली। कौन था हाशिम मूसा? हाशिम मूसा का असली नाम मोहम्मद आसिफ बताया गया है। वह Asif Fauji नाम से भी जाना जाता था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक वह पाकिस्तान आधारित लश्कर-ए-तैयबा का वरिष्ठ कमांडर था और 2022 के बाद जम्मू-कश्मीर में सक्रिय रहा। कई हमलों से जुड़ा था नाम अधिकारियों ने हाशिम मूसा के समूह को Halan, Dehra Ki Gali, Kandi, Shiv Khori, Gagangir, Bootapathri और Baisaran समेत कई हमलों से जोड़ा है। इन घटनाओं में सुरक्षाकर्मियों और नागरिकों की मौत हुई थी। ये संबंध सुरक्षा एजेंसियों के आरोपों और जांच पर आधारित हैं। पहलगाम हमले की जांच में भी आया था नाम सुरक्षा एजेंसियों ने मूसा को 2025 के पहलगाम आतंकी हमले से जुड़े नेटवर्क से भी जोड़ा था। वह सुलेमान शाह का करीबी सहयोगी बताया गया, जिसे एजेंसियां पहलगाम हमले की साजिश से जोड़ती रही हैं। चार सदस्यीय LeT समूह का आखिरी सदस्य था भारतीय सेना के मुताबिक हाशिम मूसा उस चार सदस्यीय लश्कर समूह का अंतिम सक्रिय सदस्य था, जो 2022 से जम्मू-कश्मीर में काम कर रहा था। समूह के अन्य तीन सदस्य अलग-अलग अभियानों में पहले ही मारे जा चुके थे। सेना ने कहा कि मूसा की मौत के साथ पूरा समूह निष्क्रिय हो गया है। महीनों से चल रही थी तलाश रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियां मई 2026 से मूसा को ट्रैक कर रही थीं। तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए इस लंबे अभियान को कुछ रिपोर्टों में Operation Sheruwali कहा गया है। पूर्व पाकिस्तानी SSG कमांडो होने का दावा कुछ सुरक्षा अधिकारियों ने दावा किया कि मूसा पाकिस्तान सेना की Special Services Group यानी SSG में रह चुका था। यह दावा भारतीय सुरक्षा अधिकारियों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र सार्वजनिक पुष्टि सीमित है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता सुरक्षा बलों ने हाशिम मूसा के मारे जाने को लश्कर नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बताया है। इसके बाद भी आसपास के जंगलों और संवेदनशील इलाकों में तलाशी तथा निगरानी जारी रखी गई ताकि किसी अन्य आतंकी की मौजूदगी की संभावना को खारिज किया जा सके। जम्मू-कश्मीर में आतंक विरोधी अभियान जारी बडगाम मुठभेड़ के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि आतंकवादी नेटवर्क और उनके सहयोगियों के खिलाफ intelligence-based operations जारी रहेंगे। हाशिम मूसा के खिलाफ लगाए गए अलग-अलग मामलों और हमलों से जुड़े आरोप सुरक्षा एजेंसियों के दावों पर आधारित हैं, जबकि अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेंगे। source – Indian Army / The Indian Express / Hindustan Times / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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जम्मू-कश्मीर के बडगाम में मुठभेड़, सेना के अनुसार शीर्ष लश्कर कमांडर Hashim Musa मारा गया

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा का वरिष्ठ कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा मारा गया। भारतीय सेना के अनुसार यह ऑपरेशन खांसाहिब-यूसमर्ग क्षेत्र में चलाया गया और मुठभेड़ के बाद उसका शव हथियारों तथा अन्य सामग्री के साथ बरामद किया गया। सुरक्षा एजेंसियां उसे जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों में हुए कई बड़े आतंकी हमलों से जोड़ती रही हैं। खांसाहिब इलाके में हुआ एनकाउंटर सेना के अनुसार विशेष खुफिया जानकारी मिलने के बाद बडगाम के ऊंचाई वाले इलाके में संयुक्त अभियान शुरू किया गया। ऑपरेशन के दौरान आतंकियों की ओर से गोलीबारी हुई, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की। मुठभेड़ में हाशिम मूसा मारा गया और इलाके में तलाशी अभियान चलाया गया। कौन था हाशिम मूसा? हाशिम मूसा का वास्तविक नाम मोहम्मद आसिफ बताया गया है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा एक वरिष्ठ पाकिस्तानी आतंकी था। कुछ आधिकारिक सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वह पाकिस्तान की Special Services Group यानी SSG में रह चुका था। इन दावों की स्वतंत्र सार्वजनिक पुष्टि सीमित है, लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने उसे अत्यधिक प्रशिक्षित आतंकी बताया है। कई आतंकी हमलों से जोड़ती रही हैं एजेंसियां भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार हाशिम मूसा उस चार सदस्यीय लश्कर समूह का हिस्सा था जो 2022 के बाद जम्मू-कश्मीर में कई बड़े हमलों में कथित तौर पर शामिल रहा। इस समूह को कुलगाम के हलान, पुंछ के देहरा की गली, रियासी में शिव खोरी तीर्थयात्रियों की बस पर हमले, गगनगीर और अन्य घटनाओं से जोड़ा गया है। पहलगाम हमले से भी जुड़ा था नाम सुरक्षा एजेंसियों ने मूसा का नाम 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की जांच में भी संदिग्ध के तौर पर जोड़ा था। उस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार मूसा, सुलेमान शाह का करीबी सहयोगी था, जिसे एजेंसियां पहलगाम हमले की साजिश से जोड़ती रही हैं। चार सदस्यीय समूह का आखिरी सक्रिय सदस्य था सेना के अनुसार हाशिम मूसा उस चार सदस्यीय LeT समूह का आखिरी सक्रिय सदस्य था। इस समूह के अन्य सदस्य जुनैद भट, सुलेमान शाह और यासिर अलग-अलग सुरक्षा अभियानों में पहले ही मारे जा चुके थे। सेना का कहना है कि मूसा के मारे जाने के बाद यह पूरा समूह निष्क्रिय हो गया है। Operation Sheruwali के तहत महीनों से चल रही थी तलाश रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा बल मई 2026 से हाशिम मूसा की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। इसी लंबे intelligence-led अभियान को Operation Sheruwali नाम दिया गया था। तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी के आधार पर उसकी गतिविधियों को ट्रैक किया गया और अंततः बडगाम में ऑपरेशन चलाया गया। घटनास्थल से हथियार और सैन्य सामग्री बरामद मुठभेड़ के बाद सेना ने मूसा का शव बरामद किया। साथ ही घटनास्थल से हथियार और ऐसी सामग्री भी मिली जिसे सेना ने “war-like stores” बताया है। इसके बाद आसपास के जंगल और ऊंचाई वाले इलाकों में तलाशी अभियान जारी रखा गया। सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी कार्रवाई भारतीय सेना का कहना है कि हाशिम मूसा के मारे जाने से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय लश्कर नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। हालांकि उसके खिलाफ लगाए गए विभिन्न आतंकी मामलों और भूमिकाओं से जुड़े आरोप सुरक्षा एजेंसियों के दावों पर आधारित हैं। संबंधित मामलों में अंतिम कानूनी निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करते हैं। source – Indian Army / The Indian Express / Hindustan Times / The Times of India / NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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‘बालाकोट से ऑपरेशन सिंदूर तक आतंक को मिला करारा जवाब’—PM मोदी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 138वें एपिसोड में आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक भारत ने यह संदेश दिया है कि देश के खिलाफ आतंकी कार्रवाई होने पर उसका जवाब दिया जाएगा। प्रधानमंत्री ने यह टिप्पणी 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर की। सर्जिकल स्ट्राइक के 10 साल पूरे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 28-29 सितंबर 2016 की रात भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा पार कर आतंकवादी लॉन्च पैड्स पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। उन्होंने इसे भारत की आतंकवाद विरोधी नीति में महत्वपूर्ण बदलाव बताते हुए कहा कि उस कार्रवाई ने दुनिया के सामने भारत की नई counter-terrorism approach का उदाहरण पेश किया। बालाकोट से ऑपरेशन सिंदूर तक का किया जिक्र प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बीते एक दशक में बालाकोट एयर स्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक भारत ने आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की नीति को सामने रखा है। उन्होंने कहा कि अगर आतंकवादी भारत की तरफ आंख उठाते हैं तो उन्हें “करारा जवाब” दिया जाएगा। यह बयान भारत की मौजूदा आतंकवाद विरोधी नीति के संदर्भ में दिया गया। 2019 में हुई थी बालाकोट एयर स्ट्राइक फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में कार्रवाई की थी। भारत ने उस समय कहा था कि इस कार्रवाई में आतंकी प्रशिक्षण केंद्रों को निशाना बनाया गया। प्रधानमंत्री ने अपने हालिया संबोधन में बालाकोट का उल्लेख सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के साथ किया। ऑपरेशन सिंदूर को बताया नई नीति का हिस्सा प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति में एक नया मानक बता चुके हैं। उनके मुताबिक भारत पर आतंकी हमला होने की स्थिति में जवाब भारत अपनी शर्तों और अपने समय के अनुसार देगा। उन्होंने आतंकवाद और उसे समर्थन देने वाले ढांचे के खिलाफ सख्त रुख की बात भी दोहराई। आतंकवाद पर Zero-Tolerance Policy की बात ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान भारत आतंकवाद के खिलाफ Zero-Tolerance Policy के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को अधिक स्पष्ट और जवाबी कार्रवाई केंद्रित बनाया है। दिल्ली और मुंबई आतंकी हमलों को भी किया याद प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में 13 सितंबर 2008 के दिल्ली सीरियल ब्लास्ट और उसी वर्ष हुए 26/11 मुंबई आतंकी हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय तक आतंकवादी हमलों का सामना करता रहा है और इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने पिछले वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति मजबूत की है। सेना के साहस की की सराहना प्रधानमंत्री ने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक को याद करते हुए भारतीय सेना के जवानों के साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों ने नियंत्रण रेखा पार कर आतंकवादी ठिकानों पर कार्रवाई की और मिशन के बाद सुरक्षित वापस लौटे। ऑपरेशन सिंदूर पर पहले भी दे चुके हैं बयान ऑपरेशन सिंदूर को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पहले भी कई बार बयान दे चुके हैं। उन्होंने इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक कार्रवाई और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता से जोड़ा है। उन्होंने पहलगाम हमले के बाद की कार्रवाई के संदर्भ में भी कहा था कि आतंकवाद से जुड़े ठिकानों के खिलाफ भारत सख्त कार्रवाई करेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा पर सरकार का संदेश प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक के दस वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर को जोड़ते हुए सरकार की आतंकवाद विरोधी नीति को दोहराया और कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ Zero-Tolerance के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। source – Prime Minister of India / Press Information Bureau जय राष्ट्र न्यूज़

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Indian Army ने बनाया पहला ‘Baaz Battalion’, drones से surveillance से लेकर deep strike तक बढ़ेगी ताकत

नई दिल्ली: भारतीय सेना ने आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों को देखते हुए अपना पहला विशेष ‘Baaz Battalion’ operationalise कर दिया है। यह dedicated drone unit पंजाब में सेना की 11 Corps यानी Vajra Corps के तहत बनाई गई है। इसका उद्देश्य सीमा पर लगातार निगरानी, battlefield intelligence और जरूरत पड़ने पर लंबी दूरी के drone operations की क्षमता को मजबूत करना है। ‘Baaz’ का अर्थ बाज यानी hawk है। सेना की यह नई पहल unmanned aerial systems को एक dedicated formation के तहत लाकर surveillance से लेकर future battlefield operations तक उनकी भूमिका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। Punjab में बनी पहली Baaz Battalion 22 अगस्त 2026 को सामने आई जानकारी के मुताबिक भारतीय सेना की Vajra Corps या 11 Corps पहली formation बन गई है जिसने Baaz Battalion को operationalise किया है। 11 Corps का मुख्यालय जालंधर में है और इसकी operational responsibility पश्चिमी मोर्चे से जुड़ी हुई है। आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार नई battalion का उद्देश्य भारतीय सेना की aerial agility, responsiveness और battlefield reach बढ़ाना है। सेना इसे भविष्य के battlefield में ‘eyes in the sky’ की भूमिका देने की तैयारी कर रही है, जहां drones वास्तविक समय में दुश्मन की गतिविधियों, terrain और battlefield developments की जानकारी दे सकेंगे। Surveillance से Deep Strike तक क्या होगी भूमिका? Baaz Battalions को केवल सीमित दूरी की निगरानी के लिए नहीं बनाया गया है। इस योजना की घोषणा जून 2026 में करते हुए भारतीय सेना ने संकेत दिया था कि ये specialised units long-range surveillance, intelligence gathering, reconnaissance, targeting और strike-related drone missions को संभालने में सक्षम होंगी। ऐसी units का उद्देश्य frontline commanders को battlefield की ज्यादा स्पष्ट और लगातार जानकारी उपलब्ध कराना है। लंबी दूरी वाले unmanned systems की मदद से सेना सीमा के पार गहराई तक surveillance कर सकती है और operational requirement के अनुसार targets की पहचान तथा अन्य battlefield systems के साथ coordination बेहतर हो सकता है। Operation Sindoor के बाद तेज हुआ बदलाव Baaz Battalion की योजना भारतीय सेना के व्यापक transformation programme का हिस्सा है। रिपोर्ट्स के अनुसार इसके पीछे हाल के सैन्य अनुभवों, चीन के साथ Line of Actual Control पर लंबे गतिरोध और Operation Sindoor के दौरान drone और loitering-munition systems से मिले lessons की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आधुनिक युद्ध में drones का इस्तेमाल केवल निगरानी तक सीमित नहीं है। Russia-Ukraine war से लेकर कई हालिया संघर्षों में surveillance drones, kamikaze drones और loitering munitions ने battlefield tactics को तेजी से बदला है। भारतीय सेना भी इसी बदलाव को देखते हुए unmanned systems को अपने operational structure में ज्यादा गहराई से शामिल कर रही है। Army Aviation Corps के तहत होंगी specialised units जून में Baaz Battalions की योजना सामने आने के समय बताया गया था कि ये units Army Aviation Corps के तहत काम करेंगी। इनमें drone systems को operate करने, maintain करने और उनसे आने वाले बड़े पैमाने के intelligence data को analyse करने के लिए specialised personnel का pool तैयार किया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि अलग-अलग drone platforms के training, maintenance, deployment और battlefield integration को एक dedicated structure में manage किया जा सकेगा। Ashini Drone Platoons से कैसे अलग है Baaz Battalion? भारतीय सेना में अलग-अलग स्तर पर drones के इस्तेमाल के लिए अलग formations तैयार की जा रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार infantry battalions में Ashini drone platoons tactical और नजदीकी surveillance के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इनके विपरीत Baaz Battalion का focus अधिक दूरी और बड़े operational area में surveillance तथा drone operations पर होगा। इसके अलावा Artillery की Divyastra batteries loitering ammunition और one-way attack drones से जुड़ी भूमिका निभाती हैं। इस प्रकार Baaz Battalion को सेना के long-range drone ecosystem के एक centralized operational hub के रूप में देखा जा रहा है। किन drones का हो सकता है इस्तेमाल? Baaz Battalion में इस्तेमाल होने वाले exact platforms की पूरी operational जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि पहले सामने आई रिपोर्ट्स में संकेत दिया गया था कि future Baaz formations long-range UAV fleets के साथ काम कर सकती हैं। भारतीय सेना के पास पहले से Israeli-origin Heron जैसे UAV platforms मौजूद हैं और देश अपनी indigenous drone capabilities भी तेजी से बढ़ा रहा है। भारत अमेरिका से MQ-9B remotely piloted aircraft भी हासिल करने की प्रक्रिया में है, जबकि Indian private sector में कई कंपनियां surveillance और combat drone technologies पर काम कर रही हैं। Drone और Counter-Drone Systems पर भी बढ़ रहा निवेश भारतीय सेना केवल offensive और surveillance drones पर ही नहीं बल्कि counter-drone capabilities पर भी निवेश बढ़ा रही है। जुलाई 2026 में Defence Acquisition Council ने करीब ₹52,000 करोड़ के विभिन्न defence procurement proposals को Acceptance of Necessity प्रदान किया था। इनमें भारतीय सेना के लिए AKASH TARANG Anti-UAV Electronic Warfare System और Jet Based Kamikaze Drone System जैसे प्रस्ताव भी शामिल थे। यह बताता है कि भविष्य के युद्ध में drone और counter-drone warfare दोनों सेना की modernisation strategy का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। भविष्य के युद्ध के लिए Army की नई तैयारी Baaz Battalion का गठन भारतीय सेना की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें manpower और traditional weapons के साथ-साथ technology-driven warfare पर तेजी से जोर दिया जा रहा है। Vajra Corps के General Officer Commanding ने battalion के raising day पर Baaz aviators और personnel से बातचीत करते हुए technology, innovation और operational excellence को भविष्य के battlefield के लिए महत्वपूर्ण बताया। पहली Baaz Battalion के operational होने के बाद अब आने वाले समय में सेना अन्य formations में भी ऐसी dedicated drone units का विस्तार कर सकती है। नई unit के साथ भारतीय सेना का लक्ष्य साफ है—सीमा पर ज्यादा बेहतर निगरानी, तेजी से intelligence जुटाना और जरूरत पड़ने पर drone-based long-range operations के जरिए battlefield पर technological edge हासिल करना। स्रोत – आकाशवाणी न्यूज़, टाइम्स ऑफ इंडिया, द ट्रिब्यून, बिजनेस स्टैंडर्ड जय राष्ट्र न्यूज़

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लद्दाख का वायरल VIDEO: सुरक्षा बलों से बहस करने वाली Gen-Z महिला ने भारतीय सेना से मांगी माफी

लद्दाख: लद्दाख के मिनामर्ग चेकपोस्ट पर सुरक्षा बलों के साथ बहस करते हुए वायरल हुई 25 वर्षीय महिला पर्यटक ने अब भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और लद्दाख पुलिस से माफी मांगी है। महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें वह सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताते हुए खुद को “Gen Z” बताते हुए सुरक्षाकर्मियों से बहस करती दिखाई दी थी। छह घंटे इंतजार के बाद हुआ था विवाद महिला के मुताबिक, घटना 26 जुलाई को मिनामर्ग चेकपोस्ट के पास हुई थी। उस समय सुरक्षा कारणों से सड़क को अस्थायी रूप से बंद किया गया था और वह तथा उसके साथ यात्रा कर रहे लोग कई घंटों तक इंतजार करते रहे। महिला ने NDTV से बातचीत में बताया कि करीब छह घंटे तक इंतजार और स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने के कारण वह अपना आपा खो बैठी। उसने माना कि गुस्से में उसके द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा गलत थी। “We are Gen Z” वाला VIDEO हुआ वायरल घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद महिला की टिप्पणी “We are Gen Z” काफी चर्चा में रही। वीडियो में वह सुरक्षा कर्मियों के साथ तीखी बहस करती नजर आई। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर उसे लेकर काफी आलोचना हुई। सेना के पूर्व अधिकारियों और कई यूजर्स ने संवेदनशील सीमा क्षेत्र में सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर इस तरह के व्यवहार पर सवाल उठाए। महिला ने सेना से मांगी माफी विवाद बढ़ने के बाद महिला ने अब सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। उसने कहा कि उसका उद्देश्य भारतीय सेना या पुलिस का अपमान करना नहीं था और वह सेना का सम्मान करती है। उसने भारतीय सेना के साथ-साथ J&K Police और Ladakh Police से भी माफी मांगी और कहा कि उसकी टिप्पणी उस समय की निराशा और गुस्से का परिणाम थी। महिला ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए यह भी कहा कि उसे अपने व्यवहार पर पछतावा है और वह इस घटना के कारण मिले ध्यान के लिए ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहती थी। संवेदनशील इलाके में सुरक्षा व्यवस्था का मामला यह विवाद ऐसे इलाके में हुआ जहां सुरक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है। लद्दाख का यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से संवेदनशील है और सैन्य गतिविधियों के कारण कई बार आम नागरिकों की आवाजाही अस्थायी रूप से प्रतिबंधित की जाती है। महिला ने अपने पक्ष में कहा कि अगर उन्हें सड़क बंद होने और इंतजार की वजह के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल जाती, तो शायद स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े नियमों का पालन करना भी यात्रियों की जिम्मेदारी है। सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस वीडियो के वायरल होने के बाद यह मामला केवल एक स्थानीय विवाद नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर Gen Z, नागरिक जिम्मेदारी और सेना के प्रति सम्मान को लेकर बहस शुरू हो गई। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी पहले महिला के व्यवहार पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ऐसी मानसिकता से जोड़ा था जिसमें लोग अपने प्रभाव या पहचान के आधार पर नियमों से ऊपर होने का भाव रखते हैं। माफी के बाद विवाद में नया मोड़ अब महिला की माफी के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। वायरल वीडियो में दिखाई गई घटना को लेकर आलोचना के बाद उसने स्पष्ट किया कि उसके शब्द गलत थे और उसने सेना तथा पुलिस का अपमान करने का इरादा नहीं रखा था। इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा निर्देशों का पालन और यात्रियों को स्पष्ट जानकारी देना दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। स्रोत: NDTV, Indian Express, Times of India, PTI Jai Rashtra News

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जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में प्रवासी मजदूरों पर आतंकी हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा सर्च ऑपरेशन, पूरे इलाके में हाई अलर्ट

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में प्रवासी मजदूरों पर हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र में व्यापक सर्च एंड कॉर्डन ऑपरेशन (CASO) शुरू कर दिया है। हमले में छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की मौत के बाद सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने आतंकियों की तलाश के लिए कई इलाकों में घेराबंदी कर तलाशी अभियान तेज कर दिया है। प्रारंभिक जांच के अनुसार हमलावर ने मजदूरों से बातचीत के दौरान उनकी पहचान और व्यक्तिगत जानकारी पूछी, जिसके बाद उन पर गोलीबारी की गई। सुरक्षा एजेंसियाँ इस घटना को लक्षित आतंकी हमला (Targeted Terror Attack) मानकर जांच कर रही हैं और हमले में शामिल आतंकियों के नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं। पूरे दक्षिण कश्मीर में बढ़ाई गई सुरक्षा घटना के बाद कुलगाम, अनंतनाग और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। प्रवेश और निकास मार्गों पर सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है तथा संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों ने स्थानीय लोगों से भी सहयोग की अपील की है। प्रवासी मजदूरों में भय का माहौल हमले के बाद दक्षिण कश्मीर के ईंट-भट्ठों और निर्माण स्थलों पर काम करने वाले प्रवासी मजदूरों में डर का माहौल है। कई मजदूरों ने काम बंद कर दिया है और अपने गृह राज्यों लौटने पर विचार कर रहे हैं। प्रशासन ने उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिया है और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। सरकार ने सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने कहा है कि दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा एजेंसियाँ तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी के आधार पर आतंकियों की तलाश में लगातार अभियान चला रही हैं। निष्कर्ष कुलगाम आतंकी हमले के बाद घाटी में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन और सुरक्षा बल लगातार कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि हमले में शामिल आतंकियों की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन जारी है. Source: Jammu & Kashmir Police | Ministry of Home Affairs | Indian Army जय राष्ट्र न्यूज़

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कारगिल विजय दिवस पर देशभर में वीर शहीदों को श्रद्धांजलि, सेना ने शौर्य और बलिदान को किया नमन

नई दिल्ली/द्रास: 27वाँ कारगिल विजय दिवस पूरे देश में श्रद्धा, गर्व और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री, तीनों सेनाओं के प्रमुखों तथा देशभर के नागरिकों ने 1999 के कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक सहित देश के विभिन्न युद्ध स्मारकों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहाँ शहीदों की याद में पुष्पचक्र अर्पित किए गए और दो मिनट का मौन रखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि कारगिल के वीरों का साहस, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने कहा कि भारत अपने सैनिकों के बलिदान को कभी नहीं भूलेगा और राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। द्रास युद्ध स्मारक पर विशेष समारोह कारगिल युद्ध स्मारक पर भारतीय सेना द्वारा आयोजित मुख्य समारोह में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, शहीदों के परिजनों, पूर्व सैनिकों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया। इस दौरान— 1999 के कारगिल युद्ध की याद कारगिल युद्ध मई से जुलाई 1999 के बीच लड़ा गया था, जब भारतीय सेना ने कठिन परिस्थितियों में दुश्मन के कब्जे वाले रणनीतिक इलाकों को वापस हासिल किया था। 26 जुलाई 1999 को भारत ने ऑपरेशन विजय की सफलता की आधिकारिक घोषणा की थी। इस युद्ध में भारतीय सेना के 527 से अधिक वीर जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। देशभर में आयोजित हुए कार्यक्रम कारगिल विजय दिवस के अवसर पर— युवाओं के लिए प्रेरणा रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कारगिल विजय दिवस केवल एक ऐतिहासिक जीत का स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, साहस और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक भी है। यह दिवस युवाओं को देश सेवा और राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रेरित करता है। निष्कर्ष कारगिल विजय दिवस भारत के वीर सैनिकों के अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक है। देश आज भी उन वीर शहीदों का ऋणी है जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। Source: Ministry of Defence | Indian Army | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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कारगिल विजय दिवस: राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य आधुनिकीकरण और नई चुनौतियों पर नए भारत की रणनीति

कारगिल विजय दिवस केवल 1999 के युद्ध में भारत की ऐतिहासिक जीत का स्मरण नहीं है, बल्कि यह देश की राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य तैयारी और भविष्य की रक्षा रणनीति पर गंभीर चिंतन का भी अवसर है। कारगिल युद्ध ने यह स्पष्ट कर दिया था कि बदलती युद्ध परिस्थितियों में केवल सैनिकों का साहस ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक, सटीक खुफिया तंत्र और तेज़ निर्णय क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आज, 26 जुलाई को जब पूरा देश कारगिल के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है, तब यह भी आवश्यक है कि भारत भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अपनी रक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत बनाए। कारगिल युद्ध से मिले महत्वपूर्ण सबक कारगिल संघर्ष ने भारतीय सुरक्षा तंत्र को कई महत्वपूर्ण सीख दी— इन्हीं अनुभवों के आधार पर पिछले वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में तेज़ कदम आज भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहा है। सरकार का फोकस निम्न क्षेत्रों पर है— इन पहलों का उद्देश्य भारतीय सेनाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए अधिक सक्षम बनाना है। नई सुरक्षा चुनौतियां आज की सुरक्षा चुनौतियां 1999 से कहीं अधिक जटिल हैं। पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ अब— जैसी नई चुनौतियां भी सामने हैं। इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा का दायरा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। आत्मनिर्भर भारत और रक्षा क्षेत्र ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और भारतीय उद्योगों तथा स्टार्टअप्स को रक्षा क्षेत्र में नई भूमिका देना है। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होने के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती है। कारगिल के वीरों से प्रेरणा कारगिल के सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में अदम्य साहस, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का परिचय दिया। उनका बलिदान आज भी भारतीय सशस्त्र बलों और देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी साझा जिम्मेदारी है। निष्कर्ष कारगिल विजय दिवस हमें अतीत की वीरता को याद करने के साथ-साथ भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के प्रति सजग रहने का संदेश देता है। आधुनिक तकनीक, आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन, मजबूत सुरक्षा ढांचा और प्रशिक्षित सेनाएं ही भारत को बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में अधिक सक्षम बनाएंगी। कारगिल के वीरों का सर्वोच्च बलिदान हमें हमेशा यह याद दिलाता रहेगा कि राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है। Source: Ministry of Defence | Indian Army | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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कारगिल विजय दिवस पर देशभर के युद्ध स्मारकों में विशेष कार्यक्रम, वीर शहीदों को राष्ट्र ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली: 26 जुलाई को मनाए जा रहे कारगिल विजय दिवस के अवसर पर देशभर के युद्ध स्मारकों, शहीद स्थलों और सैन्य प्रतिष्ठानों में विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर भारतीय सेना, पूर्व सैनिकों, शहीद परिवारों, जनप्रतिनिधियों और हजारों नागरिकों ने कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर आयोजित मुख्य समारोह में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को नमन किया। देश के विभिन्न राज्यों में भी जिला और राज्य स्तर पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम, मौन धारण, तिरंगा यात्रा और सांस्कृतिक आयोजन आयोजित किए गए। कारगिल के वीरों को किया गया याद कार्यक्रमों में वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान अदम्य साहस दिखाने वाले सैनिकों के बलिदान को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय सेना ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में दुश्मन को परास्त कर देश की सीमाओं और सम्मान की रक्षा की थी। शहीद परिवारों का किया गया सम्मान कई राज्यों में शहीद सैनिकों के परिजनों को सम्मानित किया गया। स्थानीय प्रशासन और पूर्व सैनिक संगठनों ने उनके योगदान को याद करते हुए सम्मान समारोह आयोजित किए। विद्यालयों और महाविद्यालयों में भी विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीत, भाषण और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से कारगिल के वीरों को श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री और रक्षा नेतृत्व ने दी श्रद्धांजलि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने कारगिल के शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि राष्ट्र उनके साहस, त्याग और समर्पण को सदैव याद रखेगा। उन्होंने देशवासियों से सैनिकों के बलिदान से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। देशभर में देशभक्ति का माहौल कारगिल विजय दिवस के अवसर पर— का आयोजन किया गया। कारगिल विजय दिवस का महत्व 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत कारगिल क्षेत्र से घुसपैठियों को पूरी तरह खदेड़कर विजय प्राप्त की थी। इस युद्ध में 527 भारतीय सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके सम्मान में हर वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। निष्कर्ष कारगिल विजय दिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोहों ने एक बार फिर देश को अपने वीर सैनिकों के अदम्य साहस और बलिदान की याद दिलाई। पूरे देश ने एक स्वर में उन शहीदों को नमन किया जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। Source: Ministry of Defence | Indian Army | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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