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पुणे में भी CJP आंदोलन पर पुलिस की कार्रवाई, 80 से 85 प्रदर्शनकारी हिरासत में

पुणे | 12 अक्टूबर: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के विरोध में चल रहे CJP आंदोलन पर पुणे में भी पुलिस ने कार्रवाई की। रविवार को फर्ग्यूसन कॉलेज रोड स्थित कलाकार कट्टा और गुड लक चौक के पास प्रदर्शन के लिए जुटे करीब 80 से 85 कार्यकर्ताओं और समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कार्रवाई की गई।

बिना अनुमति जुटे प्रदर्शनकारी

CJP ने पुणे में SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका के विरोध में प्रदर्शन का आह्वान किया था। आयोजकों ने डेक्कन पुलिस स्टेशन में प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, लेकिन पुलिस ने कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया।

इसके बावजूद रविवार शाम करीब 4:30 बजे प्रदर्शनकारी कलाकार कट्टा के आसपास एकत्र होने लगे। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए लोगों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया।

80 से 85 लोगों को हिरासत में लिया गया

पुणे पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान करीब 80 से 85 लोगों को हिरासत में लिया। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में 85 लोगों का उल्लेख है, जबकि द इंडियन एक्सप्रेस ने लगभग 80 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी है।

शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन ले जाए गए प्रदर्शनकारी

हिरासत में लिए गए लोगों को पुलिस वैन से शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। पुलिस उपायुक्त कृषिकेश रावले के अनुसार, आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद प्रदर्शनकारियों को उसी रात करीब 8 बजे रिहा कर दिया गया।

लगातार दूसरे दिन पुलिस की कार्रवाई

पुणे में CJP समर्थकों के खिलाफ यह लगातार दूसरे दिन पुलिस की कार्रवाई थी। इससे पहले शनिवार को शानिवारवाड़ा से पुणे कलेक्टर कार्यालय तक मार्च निकालने की कोशिश के दौरान भी 80 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था।

पुलिस ने उस मार्च को भी अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी जुटे, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर लश्कर पुलिस स्टेशन ले जाया गया और बाद में छोड़ दिया गया।

गुड लक चौक के पास कुछ देर तनाव

रविवार को प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए पास के गुड लक होटल में भी चले गए, जिससे वहां कुछ समय के लिए गतिविधियां प्रभावित हुईं।

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

CJP कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर रोक बताया। संगठन से जुड़े हर्षल लोणकर ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों को एकत्र होने के कुछ ही समय बाद हिरासत में ले लिया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि रिहाई के बाद कुछ समर्थकों ने फर्ग्यूसन कॉलेज के मुख्य द्वार तक मार्च किया।

पुलिस ने एहतियाती कार्रवाई बताया

पुणे पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद लोगों के एकत्र होने और यातायात तथा सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका के चलते कार्रवाई की गई।

रिपोर्टों के अनुसार, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को आवश्यक प्रक्रिया के बाद रिहा कर दिया गया। इस कार्रवाई को लेकर पुलिस और आंदोलन से जुड़े लोगों के बीच मतभेद सामने आए हैं।

CEC के इस्तीफे और SIR रोकने की मांग

पुणे में प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया रोकने की मांग उठाई। आंदोलन से जुड़े समूहों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल किए हैं।

वहीं, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों से इनकार किया है। आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना और उसमें मौजूद त्रुटियों को दूर करना है।

मुंबई और पुणे में भी प्रदर्शन

CEC और SIR के विरोध में महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे समेत विभिन्न शहरों में प्रदर्शन हुए हैं। इन घटनाओं के बीच आंदोलन का दायरा दिल्ली से बाहर भी चर्चा में आया है।

दिल्ली में हुए प्रदर्शनों और हिरासत की घटनाओं के बाद विभिन्न शहरों में आंदोलन जारी रहने से चुनावी सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर बहस तेज हुई है।

स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स, द इंडियन एक्सप्रेस, रॉयटर्स, द टाइम्स ऑफ इंडिया

जय राष्ट्र न्यूज़

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