वाराणसी: उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव में समाजवादी पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की शिक्षक और स्नातक—दोनों MLC सीटें जीतकर भाजपा को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। सपा नेता इस नतीजे को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण संकेत बता रहे हैं, जबकि विपक्षी खेमे में इसे भाजपा के खिलाफ बदलते राजनीतिक माहौल के रूप में पेश किया जा रहा है।
स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा की बड़ी जीत
वाराणसी खंड स्नातक MLC सीट पर समाजवादी पार्टी के आशुतोष सिन्हा ने भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह को 19,932 मतों से हराया। चुनाव अधिकारियों के अनुसार सिन्हा को 55,046 वोट, जबकि भाजपा उम्मीदवार को 35,114 वोट मिले।
शिक्षक सीट भी सपा के खाते में
इससे पहले वाराणसी खंड शिक्षक MLC सीट पर सपा के लाल बिहारी यादव ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार डॉ. प्रमोद मिश्रा को 5,015 मतों से हराया। लाल बिहारी यादव को 11,612 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 6,597 मत प्राप्त हुए।
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में भाजपा को झटका
वाराणसी भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है क्योंकि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र है। ऐसे में विधान परिषद की दोनों सीटों पर सपा की जीत को विपक्ष राजनीतिक संदेश के रूप में पेश कर रहा है। हालांकि MLC चुनाव के मतदाता और विधानसभा चुनाव के मतदाता अलग होते हैं, इसलिए इन नतीजों को सीधे 2027 विधानसभा चुनाव का पूर्वानुमान मानना जल्दबाजी होगी।
2027 को लेकर सपा कार्यकर्ताओं में उत्साह
जीत के बाद सपा कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया और दावा किया कि यह परिणाम 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की वापसी का संकेत है। विजयी उम्मीदवारों ने भी अखिलेश यादव के नेतृत्व और पार्टी की नीतियों पर मतदाताओं के भरोसे को जीत की वजह बताया।
उत्तर प्रदेश में सपा ने जीतीं 5 MLC सीटें
राज्य की 11 विधान परिषद सीटों के चुनाव में भाजपा ने 6 सीटें, जबकि समाजवादी पार्टी ने 5 सीटें जीतीं। वाराणसी की दोनों सीटें सपा के खाते में जाने से पार्टी ने विधान परिषद में अपनी स्थिति मजबूत की है।
NDA को दूसरे राज्यों में मिली बड़ी सफलता
वाराणसी में भाजपा को हार मिली, लेकिन चार राज्यों के विधान परिषद चुनावों की व्यापक तस्वीर में NDA ने मजबूत प्रदर्शन किया और कुल 16 सीटों पर जीत हासिल की। कर्नाटक में भाजपा-JD(S) गठबंधन ने सभी चार सीटें जीत लीं। इसलिए वाराणसी का परिणाम BJP के लिए स्थानीय झटका है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर चुनावी तस्वीर मिश्रित रही।
INDIA गठबंधन के लिए कितना बड़ा संकेत?
सपा INDIA गठबंधन का प्रमुख घटक है, इसलिए वाराणसी की जीत से विपक्षी खेमे को राजनीतिक नैरेटिव बनाने का मौका मिला है। हालांकि कांग्रेस इन MLC चुनावों में कोई सीट नहीं जीत सकी। ऐसे में वाराणसी के नतीजे को पूरे INDIA गठबंधन की संयुक्त चुनावी सफलता के बजाय सपा की मजबूत स्थानीय जीत के रूप में देखना अधिक सटीक होगा।
2027 से पहले भाजपा और सपा दोनों की नजर पूर्वांचल पर
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पूर्वांचल दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। वाराणसी में मिली इस जीत के बाद सपा इसे भाजपा के गढ़ में अपनी बढ़ती पकड़ के प्रमाण के तौर पर पेश करने की कोशिश करेगी, जबकि भाजपा के सामने संगठन और शिक्षक-स्नातक मतदाताओं के बीच अपनी रणनीति की समीक्षा की चुनौती होगी।
स्रोत – हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया, इकोनॉमिक टाइम्स, आज तक, अमर उजाला, दैनिक जागरण
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