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“Gen Z की सोच अलग है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे गलत हैं”: पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे

पुणे, 25 अक्टूबर 2026: भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (सेवानिवृत्त) ने Gen Z को लेकर चल रही राजनीतिक और सामाजिक बहस के बीच कहा है कि नई पीढ़ी का सोचने का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन सिर्फ इसी वजह से उन्हें गलत नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने युवाओं की बात सुनने, उनकी समस्याओं को समझने और संवाद के जरिए समाधान खोजने पर जोर दिया।

“नई पीढ़ी का नजरिया अलग है”

नरवणे ने कहा कि हर पीढ़ी अपने समय और परिस्थितियों के हिसाब से अलग सोच विकसित करती है। नई पीढ़ी भी चीजों को अपने तरीके से देखती है और यह जरूरी नहीं कि उसका नजरिया पुरानी पीढ़ी से पूरी तरह मेल खाए। उनके मुताबिक, अलग सोच का मतलब गलत सोच नहीं है।

युवाओं को समझना जरूरी

पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि युवाओं को सिर्फ डांटने या उनकी बात खारिज करने से समस्या हल नहीं होगी। पहले यह समझना जरूरी है कि उन्हें क्या परेशान कर रहा है, उनकी क्या मुश्किलें हैं और वे किस बदलाव की मांग कर रहे हैं।

“वे देश का नुकसान नहीं चाहते”

नरवणे ने कहा कि युवाओं की मंशा देश को नुकसान पहुंचाने की नहीं होती। वे भी मानते हैं कि जो मुद्दे वे उठा रहे हैं या जिन बदलावों की मांग कर रहे हैं, वे देश की बेहतरी के लिए हैं। उन्होंने युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाने की जरूरत बताई।

‘Regime Change’ बहस के बीच आया बयान

नरवणे की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर युवाओं के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा “regime change” जैसे शब्द इस्तेमाल किए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हुआ था।

राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर लगाए थे आरोप

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर आरोप लगाया था कि वे युवाओं के विरोध प्रदर्शनों का इस्तेमाल अराजकता फैलाने और बांग्लादेश जैसे सत्ता परिवर्तन की स्थिति पैदा करने के लिए कर रहे हैं। दूसरी ओर विपक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विरोध का उद्देश्य निष्पक्ष चुनाव और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

संवाद को बताया सबसे जरूरी रास्ता

नरवणे ने कहा कि पीढ़ियों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन समाधान का रास्ता बातचीत से ही निकलता है। उन्होंने समाज और संस्थाओं से युवाओं के नजरिए को समझने और उनकी बात सुनने की अपील की।

जय राष्ट्र न्यूज़

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