नासिक: महाराष्ट्र के नासिक में नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ 2027 का धार्मिक और सांस्कृतिक शुभारंभ भव्य समारोह के साथ हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 31 अक्टूबर को ध्वज स्तंभ पूजन, ध्वजा पूजन और धर्मध्वजारोहण में भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच आयोजित इस समारोह ने आने वाले सिंहस्थ महाकुंभ की औपचारिक शुरुआत का संकेत दिया।
रामतीर्थ पर फहराया गया धर्मध्वज
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नासिक के रामतीर्थ क्षेत्र में धर्मध्वज फहराया। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार यह कार्यक्रम दोपहर करीब 12 बजकर 2 मिनट पर हुआ और इसमें संत-महात्माओं, राजनीतिक प्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
बृहस्पति के सिंह राशि में प्रवेश के साथ शुभारंभ
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि इसी दिन बृहस्पति के सिंह राशि में प्रवेश के शुभ अवसर पर सिंहस्थ महाकुंभ से जुड़े धर्मध्वजारोहण और अन्य पवित्र अनुष्ठानों में शामिल होने का उन्हें अवसर मिला। नासिक-त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ परंपरा ज्योतिषीय स्थिति से गहराई से जुड़ी मानी जाती है।
गोदावरी तट पर पूजा-अर्चना
ध्वजारोहण से पहले राष्ट्रपति ने गोदावरी तट पर पूजा-अर्चना की और रामकुंड क्षेत्र में धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। आकाशवाणी के मुताबिक नासिक में मुख्य ध्वजारोहण राष्ट्रपति ने किया, जबकि त्र्यंबकेश्वर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कुशावर्त तीर्थ पर धर्मध्वज फहराया।
राष्ट्रपति बोलीं—कुंभ भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि कुंभ मेलों में असंख्य श्रद्धालुओं का एकत्र होना भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता तथा परंपराओं की निरंतरता का जीवंत प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में सदियों से आयोजित होते आ रहे कुंभ भारत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं की शक्ति को दर्शाते हैं।
2027 का सिंहस्थ बनेगा विरासत और आधुनिकता के बीच सेतु
राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ 2027 भारत की प्राचीन विरासत और आधुनिक समय के बीच सेतु का काम करेगा।
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को देश की सांस्कृतिक परंपराओं और जीवन मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर
राष्ट्रपति ने महाकुंभ की तैयारियों में स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि प्रशासन और जनता की भागीदारी से नासिक महाकुंभ स्वच्छता तथा अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में एक उदाहरण स्थापित कर सकता है।
सूखे और किसानों की स्थिति का भी किया जिक्र
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में सूखे और चरम मौसम की घटनाओं से प्रभावित किसानों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें किसानों तथा प्रभावित नागरिकों की सहायता के लिए प्रयास कर रही हैं।
नासिक और त्र्यंबकेश्वर दोनों हैं सिंहस्थ के प्रमुख केंद्र
सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन नासिक में गोदावरी नदी के तट और त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र में किया जाता है। रामकुंड और कुशावर्त तीर्थ दोनों धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
आने वाले महीनों में प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं के लिए सड़क, यातायात, सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल और आवास समेत बड़े स्तर पर व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी।
जुलाई 2028 तक चलेगा महाकुंभ से जुड़ा आयोजन क्रम
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक ध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन क्रम 2027 से आगे जुलाई 2028 तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों और पर्व स्नानों के साथ जारी रहेगा।
हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी
धर्मध्वजारोहण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत, साधु और श्रद्धालु पहुंचे। वैदिक मंत्रों, शंखनाद और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच नासिक का रामतीर्थ क्षेत्र पूरी तरह आध्यात्मिक वातावरण में रंगा नजर आया।
सिंहस्थ 2027 की तैयारियों को मिली औपचारिक गति
धर्मध्वजारोहण के साथ अब सिंहस्थ महाकुंभ 2027 की प्रशासनिक और धार्मिक तैयारियों को औपचारिक गति मिल गई है। आने वाले समय में लाखों श्रद्धालुओं और साधु-संतों के नासिक तथा त्र्यंबकेश्वर पहुंचने की संभावना को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था पर काम कर रही है।
स्रोत – राष्ट्रपति सचिवालय, प्रेस सूचना ब्यूरो, आकाशवाणी समाचार, इंडियन एक्सप्रेस
जय राष्ट्र न्यूज़

