अस्ताना/नई दिल्ली: भारतीय पहलवान मनीषा भानवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के 59 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में ऐसा मुकाबला जीता, जिसे भारतीय खेल इतिहास लंबे समय तक याद रखेगा। फाइनल में एक समय 0-6 से पिछड़ने के बाद मनीषा ने शानदार वापसी करते हुए अमेरिका की अबीगैल नेटे को 8-6 से हराया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ वह सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गईं।
शुरुआत में 0-6 से पिछड़ीं मनीषा
फाइनल मुकाबले की शुरुआत मनीषा के लिए बेहद मुश्किल रही। अमेरिकी पहलवान अबीगैल नेटे ने शुरुआती दौर में चार अंक हासिल किए। भारतीय खेमे की चुनौती असफल होने पर नेटे को एक अतिरिक्त अंक मिला और मनीषा पर लगी चेतावनी के बाद स्कोर 6-0 हो गया।
पहले दौर से पहले खोला खाता
मनीषा ने हिम्मत नहीं छोड़ी और पहले दौर के खत्म होने से पहले प्रतिद्वंद्वी को बाहर धकेलकर अपना पहला अंक हासिल किया। इसके बाद स्कोर 6-1 हो गया और भारतीय पहलवान ने मुकाबले में वापसी की नींव रख दी।
दूसरे दौर में बदला पूरा मुकाबला
दूसरे दौर में मनीषा ने आक्रामक खेल दिखाया। उन्होंने नेटे को नीचे गिराकर अंक हासिल किए। अमेरिकी टीम ने इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन चुनौती असफल रही और मनीषा को एक अतिरिक्त अंक भी मिला। इसके बाद उन्होंने लगातार दबाव बनाते हुए स्कोर को 6-6 तक पहुंचा दिया।
आखिरी मिनट में निर्णायक दांव
मुकाबले के अंतिम चरण में नेटे थकने लगीं। मनीषा के कोच ने पहले ही उनकी मुकाबले की शैली का अध्ययन किया था और अनुमान लगाया था कि अमेरिकी पहलवान पांचवें मिनट के बाद थकती हैं। मनीषा ने सही समय का इंतजार किया और आखिरी मिनट में निर्णायक दांव लगाकर दो अंक हासिल किए। इसके साथ ही स्कोर 8-6 हो गया।
आखिरी सेकंड तक बचाई बढ़त
8-6 की बढ़त बनाने के बाद मनीषा ने आखिरी सेकंड तक मजबूत रक्षा की और प्रतिद्वंद्वी को वापसी का मौका नहीं दिया। अंतिम सीटी बजते ही मनीषा विश्व चैंपियन बन चुकी थीं।
पहली भारतीय महिला विश्व चैंपियन
इस जीत के साथ मनीषा ने भारतीय महिला कुश्ती के इतिहास में नया अध्याय लिखा। वह विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
भारत को इससे पहले पुरुष वर्ग में सुशील कुमार ने 2010 में विश्व चैंपियन बनाया था। मनीषा की जीत ने भारत का 16 साल का विश्व खिताब का इंतजार भी समाप्त कर दिया।
16 साल की उम्र में शुरू की थी कुश्ती
मनीषा का सफर पारंपरिक नहीं रहा। उन्होंने करीब 16 साल की उम्र में कुश्ती शुरू की, जो कई शीर्ष पहलवानों की तुलना में काफी देर मानी जाती है। जूनियर स्तर पर भी उन्हें कोई बड़ा पदक नहीं मिला, लेकिन लगातार अभ्यास और मेहनत के बल पर उन्होंने सीनियर स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
चार अलग-अलग भार वर्गों में खेल चुकी हैं
सीनियर स्तर पर मनीषा ने चार अलग-अलग भार वर्गों में प्रतिस्पर्धा की है। वह 62 और 65 किलोग्राम वर्ग में भी खेल चुकी हैं और अब 59 किलोग्राम में विश्व विजेता बनीं। आने वाले टूर्नामेंटों में उनका लक्ष्य 57 किलोग्राम ओलंपिक भार वर्ग में उतरने का है।
पिता का सपना किया पूरा
विश्व खिताब जीतने के बाद मनीषा ने अपने दिवंगत पिता सुरेश भानवाला की तस्वीर वाली टी-शर्ट उठाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनके पिता ने ही करीब 13 साल पहले उन्हें कुश्ती अपनाने के लिए प्रेरित किया था और सपना देखा था कि उनकी बेटी एक दिन भारत के लिए विश्व स्वर्ण जीतेगी।
सुरेश भानवाला का 2022 में निधन हो गया था। चार साल बाद मनीषा ने उनका सपना पूरा किया।
मानसिक मजबूती बनी जीत की सबसे बड़ी ताकत
मनीषा के कोचों के अनुसार उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका मानसिक दृढ़ता और आखिरी क्षण तक मुकाबला करने की क्षमता है। पहले उनके आक्रामक खेल के कारण सहनशक्ति प्रभावित होती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस कमजोरी पर खास काम किया गया।
विश्व चैंपियनशिप का फाइनल इसका सबसे बड़ा उदाहरण बना, जहां छह अंक से पीछे होने के बावजूद उन्होंने मुकाबला नहीं छोड़ा।
अब 2028 ओलंपिक पर नजर
विश्व चैंपियन बनने के बाद मनीषा की नजर अब लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 पर है। इसके लिए वह 57 किलोग्राम ओलंपिक भार वर्ग में उतरने की तैयारी करेंगी।
मनीषा का कहना है कि वह चाहती हैं कि आने वाली भारतीय महिला पहलवान उनके रिकॉर्ड को भी तोड़ें और भारत के लिए ज्यादा विश्व और ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतें।
भारतीय महिला कुश्ती के लिए ऐतिहासिक क्षण
0-6 से पिछड़कर 8-6 से जीत हासिल करना केवल एक फाइनल मुकाबले की वापसी नहीं थी। इस जीत ने भारतीय महिला कुश्ती को उसका पहला विश्व चैंपियन दिया और आने वाली पीढ़ी के लिए नया मानक स्थापित किया।
स्रोत – यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग, रॉयटर्स, इंडियन एक्सप्रेस
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