झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी में एक जीवित चूहे को रस्सी से बांधकर उस पर ज्वलनशील पदार्थ डालने और आग लगाने का कथित वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने चार युवकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि चौथे की तलाश जारी है। मामला शहर कोतवाली क्षेत्र से जुड़ा है।
47 सेकंड का वीडियो हुआ वायरल
सोशल मीडिया पर करीब 47 सेकंड का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक चूहे को लोहे के गेट या रस्सी से बांधकर उस पर ज्वलनशील पदार्थ डालने और आग लगाने का दृश्य दिखाई देता है। वीडियो वायरल होने के बाद पशु प्रेमियों और स्थानीय लोगों ने कार्रवाई की मांग की।
चार युवकों के खिलाफ मामला दर्ज
पुलिस के अनुसार मामले में जुनैद कुरैशी, जीशान कुरैशी, आशिक कुरैशी और शफीक को नामजद किया गया है। शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 लगी
चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह धारा किसी पशु को मारने, जहर देने या गंभीर नुकसान पहुंचाने जैसे अपराधों से संबंधित है। दोष सिद्ध होने पर पांच वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान हो सकता है।
तीन आरोपी गिरफ्तार
आज सामने आई रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। चौथे आरोपी की तलाश की जा रही है। हालांकि गिरफ्तार होना किसी व्यक्ति के दोषी सिद्ध होने के बराबर नहीं है और अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
वीडियो के आधार पर शुरू हुई कार्रवाई
झांसी की क्षेत्राधिकारी नगर प्रिया सिंह के मुताबिक पुलिस को यह वीडियो सोशल मीडिया के माध्यम से मिला था। वीडियो का संज्ञान लेने के बाद शहर कोतवाली में मामला दर्ज किया गया और आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू की गई।
कार्रवाई को लेकर क्यों उठे सवाल?
मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। एक वर्ग ने जानवर के साथ कथित क्रूरता पर सख्त कार्रवाई का समर्थन किया, जबकि कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि एक चूहे की मौत के मामले में एफआईआर और गिरफ्तारी कितनी उचित है।
कानूनी दृष्टि से यह बहस चूहे की प्रजाति पर नहीं, बल्कि किसी जीव को जानबूझकर क्रूर तरीके से नुकसान पहुंचाने के आरोप पर केंद्रित है।
पशु क्रूरता पर फिर छिड़ी बहस
इस घटना ने पशुओं के प्रति व्यवहार और ऐसे वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करने की प्रवृत्ति को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
किसी वायरल वीडियो को अपने आप में दोष सिद्ध करने वाला अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता, लेकिन पुलिस ऐसे वीडियो को जांच के शुरुआती आधार के रूप में इस्तेमाल कर सकती है।
पुलिस जांच जारी
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध वीडियो तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मामले में अंतिम आरोपपत्र कब दाखिल होगा और अदालत में आरोप किस रूप में तय किए जाएंगे।
स्रोत – झांसी पुलिस, आज तक, एनडीटीवी, टाइम्स ऑफ इंडिया
जय राष्ट्र न्यूज़

