श्योपुर/मुरैना: मध्य प्रदेश में 19 महीने के भारतीय मूल के चीते KNG-22 की गोली लगने से मौत के मामले में विशेष जांच दल ने दो भाइयों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भगवान सिंह और प्रीतम सिंह के रूप में हुई है। दोनों मुरैना जिले के रहने वाले हैं। जांच एजेंसी ने वह लाइसेंसी दो नाली बंदूक भी बरामद करने का दावा किया है, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर चीते पर गोली चलाने में किया गया था।
24 अक्टूबर को शिकार के लिए जंगल जाने का आरोप
विशेष जांच दल के अनुसार दोनों आरोपी 24 अक्टूबर को विजयपुर क्षेत्र के नितनवास गांव के पास जंगल में शिकार के लिए गए थे।
पूछताछ में भगवान सिंह ने कथित तौर पर बताया कि जंगल में एक चीता दिखाई देने पर उसने अपनी लाइसेंसी दो नाली बंदूक से गोली चला दी और इसके बाद दोनों मौके से भाग गए। यह जांच एजेंसी का दावा है और आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होगी।
25 अक्टूबर को घायल मिला था KNG-22
KNG-22 को 25 अक्टूबर को श्योपुर वन मंडल के कम्पार्टमेंट नंबर 748 में गंभीर रूप से घायल हालत में पाया गया था।
निगरानी दल ने उसे बचाकर पहले कूनो राष्ट्रीय उद्यान पहुंचाया। हालत गंभीर होने पर उसे आगे के उपचार के लिए जबलपुर स्थित पशु चिकित्सा संस्थान ले जाया गया।
शरीर से निकले पांच छर्रे
इलाज के दौरान डॉक्टरों को उसके शरीर में गोली के छर्रे मिले।
आपातकालीन सर्जरी के दौरान पांच छर्रे निकाले गए। सीटी स्कैन में उसके आंतरिक अंगों, मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र को गंभीर नुकसान होने की जानकारी सामने आई।
27 अक्टूबर को हुई मौत
दो दिन तक इलाज चलने के बावजूद KNG-22 को बचाया नहीं जा सका और 27 अक्टूबर की सुबह उसकी मौत हो गई।
केंद्र सरकार ने घटना को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय टीम जांच के लिए मध्य प्रदेश भेजी थी।
कौन था KNG-22?
KNG-22 एक 19 महीने का नर चीता था, जिसका जन्म भारत में हुआ था।
वह मादा चीता निर्वा की दूसरी संतति का दूसरा शावक था। निर्वा को फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लाया गया था, जबकि उसके पिता गौरव को नामीबिया से भारत लाया गया था।
पहले आरोपी को 31 अक्टूबर को पकड़ा गया
जांच के दौरान पुलिस और वन विभाग ने आसपास के इलाकों में कई लोगों से पूछताछ की।
इसके बाद भगवान सिंह को 31 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के बाद उसके भाई प्रीतम सिंह को भी हिरासत में लिया गया।
जंगल से बरामद हुई बंदूक
जांच दल दोनों आरोपियों को कथित घटनास्थल पर लेकर गया।
इसके बाद मुरैना वन क्षेत्र से लाइसेंसी दो नाली मजल-लोडिंग बंदूक बरामद की गई, जिसके बारे में जांच एजेंसी का दावा है कि इसी हथियार से चीते पर गोली चलाई गई थी। अब हथियार की बैलिस्टिक जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत मामला
दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 9 और 51 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
धारा 9 संरक्षित वन्यजीवों के शिकार पर रोक से जुड़ी है, जबकि धारा 51 उल्लंघन के लिए दंड का प्रावधान करती है।
क्या चीते को तेंदुआ समझकर मारी गई गोली?
कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि आरोपियों ने चीते को तेंदुआ समझ लिया था।
हालांकि जांच एजेंसी की आधिकारिक जानकारी में फिलहाल यह स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं हुआ है कि पहचान की गलती ही गोली चलाने की वजह थी। इसलिए इस दावे को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।
जंगली सूअर का शिकार करने निकले थे आरोपी?
एक अन्य रिपोर्ट में जांच अधिकारी के हवाले से कहा गया कि दोनों आरोपी कथित तौर पर जंगली सूअर का शिकार करने जंगल गए थे।
इसी दौरान उनका सामना KNG-22 से हुआ और गोली चलाई गई। यह भी जांच एजेंसी के सामने दिया गया कथित बयान है।
संगठित वन्यजीव तस्करी का सबूत नहीं
विशेष जांच दल ने कहा है कि अभी तक की जांच में इस घटना का किसी संगठित वन्यजीव तस्करी गिरोह या अवैध वन्यजीव व्यापार नेटवर्क से संबंध नहीं मिला है।
इससे फिलहाल मामला व्यक्तिगत अवैध शिकार की घटना के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि जांच जारी है।
कूनो से बाहर निकले चीतों की सुरक्षा पर सवाल
KNG-22 की मौत ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान की सीमाओं से बाहर निकलने वाले चीतों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।
प्रोजेक्ट चीता के तहत कई जानवर खुले जंगलों में लंबी दूरी तय करते हैं। ऐसे में संरक्षित क्षेत्र से बाहर शिकार, मानव-वन्यजीव संघर्ष और निगरानी व्यवस्था बड़े मुद्दे बन सकते हैं।
केंद्र ने भी बनाई उच्चस्तरीय जांच टीम
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इस घटना के बाद तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम भेजी।
इसमें राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। टीम को घटना की परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों और कूनो से बाहर घूमने वाले चीतों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने का काम दिया गया है।
भारत में चीता पुनर्वास कार्यक्रम के लिए गंभीर घटना
भारत में चीतों को फिर से बसाने की परियोजना के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाया गया था।
KNG-22 की कथित गोलीबारी से हुई मौत इस परियोजना के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती मानी जा रही है, क्योंकि यह भारत में जन्मे चीते से जुड़ी पहली ऐसी हत्या बताई जा रही है।
आगे बैलिस्टिक और फॉरेंसिक जांच अहम
अब जांच एजेंसी बरामद बंदूक, चीते के शरीर से निकले छर्रों और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्यों का मिलान करेगी।
इन साक्ष्यों के आधार पर ही अदालत में यह तय होगा कि कथित गोलीबारी में बरामद हथियार और गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका किस हद तक साबित होती है।
स्रोत – मध्य प्रदेश वन विभाग, विशेष जांच दल, पर्यावरण मंत्रालय, पीटीआई, इंडियन एक्सप्रेस
जय राष्ट्र न्यूज़

