जय राष्ट्र न्यूज

दिल्ली: 14 साल की दिव्या ने कराटे की ताकत से चेन स्नैचर को दौड़ाकर पकड़ा, मां को धक्का देकर भाग रहा था चोर

14 साल की दिव्या ने कराटे की ताकत से चेन स्नैचर को दौड़ाकर पकड़ा

नई दिल्ली, 01 जनवरी 2026: दिल्ली के उत्तम नगर में एक 14 साल की लड़की ने अपनी बहादुरी और कराटे की ट्रेनिंग से सभी को चौंका दिया। उसने अपनी मां से चेन छीनकर उन्हें धक्का देने वाले चोर का करीब आधा किलोमीटर तक पीछा किया और आखिरकार उसे पकड़कर गिरा दिया। यह घटना उत्तम नगर के ओम विहार फेज-5 इलाके में हुई। केरल मूल की साठी अपनी बेटी दिव्या के साथ ट्यूशन से घर लौट रही थीं। रात लगभग 8 बजे घर के पास पहुंचते ही एक व्यक्ति ने साठी को धक्का देकर उनकी सोने की चेन छीन ली और तेजी से भागने लगा। चेन में लगा लॉकेट करीब एक सोवरिन का था। दिव्या ने बिल्कुल भी घबराए बिना तुरंत चोर का पीछा शुरू कर दिया। व्यस्त सड़क पर वाहनों के बीच दौड़ते हुए उसने करीब आधा किलोमीटर तक चोर को खदेड़ा। फिर अपनी पांच साल की कराटे ट्रेनिंग का इस्तेमाल कर उसे पकड़ लिया और जमीन पर पटक दिया। आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन चेन वापस मिल जाने के कारण साठी ने चोर के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराई। हालांकि चेन का लॉकेट गायब था। दिव्या नवादा स्थित पंजाजन्यम भारतम कल्चरल सेंटर में शीलू जोसेफ से कराटे सीख रही हैं। वह विकसित पुरी के केरल स्कूल में कक्षा 9 की छात्रा हैं। मां साठी ने कहा, “चेन से ज्यादा बेटी की सुरक्षा की चिंता थी।” यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि लड़कियों के लिए सेल्फ-डिफेंस ट्रेनिंग कितनी जरूरी है। दिव्या की बहादुरी की सोशल मीडिया पर खूब प्रशंसा हो रही है। (जय राष्ट्र न्यूज़ ब्यूरो)

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‘चीनी’ कहकर पुकारा, भारतीय होने का प्रमाण मांगा: सिर्फ दिखने में अलग होने की कीमत चुकानी पड़ी एंजेल चकमा को – यह खबर नहीं, राष्ट्रीय शर्म है

जयराष्ट्र न्यूज, देहरादून/अगरतला, 31 दिसंबर 2025 एक युवा की जिंदगी सिर्फ इसलिए छीन ली गई क्योंकि वह ‘दिखने में अलग’ था। त्रिपुरा के 24 वर्षीय एमबीए छात्र एंजेल चकमा को देहरादून में 9 दिसंबर को कुछ नशे में धुत युवकों ने ‘चीनी’, ‘चिंकी’ और ‘मोमो’ जैसे नस्लीय अपमानजनक शब्दों से पुकारा। जब एंजेल और उनके छोटे भाई माइकल ने इसका विरोध किया और कहा कि “हम भारतीय हैं, हम चीनी नहीं हैं”, तो बात हिंसा पर उतर आई। एंजेल को चाकू से कई बार वार किया गया – गर्दन, पीठ और पेट पर। 17 दिनों तक जीवन के लिए संघर्ष करने के बाद 26 दिसंबर को उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया। यह कोई साधारण झगड़ा नहीं था। यह नस्लवाद की उस गहरी जड़ का प्रमाण है जो उत्तर-पूर्वी भारतीयों को ‘अन्य’ मानकर उन्हें रोजाना अपमान और खतरे का शिकार बनाती है। एंजेल के आखिरी शब्द थे – “हम भारतीय हैं। हमें कौन सा प्रमाण-पत्र दिखाना पड़ेगा?” यह सवाल आज पूरे देश से पूछा जा रहा है। क्या उत्तर-पूर्व के लोग भारतीय होने का प्रमाण रोजाना देना पड़ेंगे? घटना देहरादून के सेलाकुई इलाके में हुई, जब अंजेल और माइकल किराने की दुकान से सामान खरीद रहे थे। आरोपी छह युवक एक बच्चे के जन्मदिन का जश्न मना रहे थे। हंसते-बोलते उन्होंने भाइयों पर नस्लीय टिप्पणियां कीं। विरोध करने पर हमला हुआ। माइकल के सिर पर लोहे की कड़ा से वार किया गया, जबकि एंजेल पर फल के ठेले से चाकू उठाकर वार किए गए। हमले के बाद आरोपी शराब खरीदकर पार्टी करते रहे। एंजेल के पिता तरुण प्रसाद चकमा बीएसएफ के हेड कांस्टेबल हैं। वे मणिपुर में तैनात हैं। परिवार का कहना है कि पुलिस ने शुरू में एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया, इसे ‘छोटी बात’ बताया। दबाव के बाद 12 दिसंबर को केस दर्ज हुआ। अब तक पांच आरोपी गिरफ्तार हैं, दो नाबालिग सुधार गृह में हैं। मुख्य आरोपी यज्ञ अवस्थी नेपाल भाग गया है, पुलिस टीम वहां भेजी गई है। यह घटना कोई अकेली नहीं है। उत्तर-पूर्व के लोग दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई जैसे शहरों में रोजाना ऐसे अपमान झेलते हैं। कोविड काल में उन्हें ‘कोरोना वाहक’ कहा गया। निडो तनियम की 2014 में हत्या के बाद बेजबरुआ कमिटी बनी, लेकिन सिफारिशें धूल फांक रही हैं। अब फिर मांग उठ रही है – नस्लवाद विरोधी कानून की। त्रिपुरा में गुस्सा फूट पड़ा है। छात्र संगठन सड़कों पर हैं। मेघालय के सीएम कोनराड संगमा, नागालैंड के मंत्री टेमजेन इमना अलॉंग और अन्य नेताओं ने इसे ‘अस्वीकार्य’ बताया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल केंद्र से कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। एंजेल प्लेसमेंट पा चुके थे। वे पिता को वीआरएस लेने को कह रहे थे ताकि परिवार की जिम्मेदारी उठा सकें। लेकिन एक नस्लीय हमले ने सब छीन लिया। यह खबर नहीं है। यह राष्ट्रीय शर्म है। हम रोजाना ऐसे हमलों को होने देते हैं। कब तक उत्तर-पूर्व के लोग ‘भारतीय’ साबित करते रहेंगे? कब तक हम चुप रहेंगे? जयराष्ट्र न्यूज की अपील: नस्लवाद के खिलाफ आवाज उठाएं। एंजेल चकमा को न्याय दो। उत्तर-पूर्व भारत का अभिन्न अंग है – उन्हें ‘चीनी’ कहना बंद करो।

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जय राष्ट्र न्यूज़ पर ताजा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय अपडेट

जय राष्ट्र न्यूज़ पर ताजा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय अपडेट

दिनांक: 31 दिसंबर 2025 मुख्य समाचार दुनिया भर में नए साल 2026 का स्वागत: आतिशबाजी और उत्साह के साथ विदाई 2025 को नई दिल्ली: दुनिया भर में आज रात नए साल 2026 का जोर-शोर से स्वागत किया जा रहा है। सिडनी में आतिशबाजी के शानदार प्रदर्शन के साथ नए साल की शुरुआत हुई, जहां बॉन्डी बीच हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी गई। न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में लाखों लोग जमा होकर बॉल ड्रॉप का इंतजार कर रहे हैं। लंदन, पेरिस, टोक्यो और दुबई में भी भव्य आतिशबाजी हो रही है। भारत में दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों में लोग पार्टियों और परिवार के साथ नए साल का जश्न मना रहे हैं। ठंड के बावजूद उत्साह कम नहीं है। ईरान में बड़े प्रदर्शन: महंगाई के खिलाफ सड़कों पर लोग तेहरान: ईरान में मुद्रास्फीति की भयंकर मार से जनता आक्रोशित है। रियाल की कीमत गिरने से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं, जो अब विश्वविद्यालयों तक फैल गए हैं। सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। यूक्रेन-रूस युद्ध: रूसी ड्रोन हमले, ओडेसा बंदरगाह प्रभावित कीव: रूस ने यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह पर रात भर ड्रोन हमले किए। यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा कि शांति वार्ता में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की संभावना शामिल है। युद्ध अब चौथे साल में प्रवेश कर चुका है। इज़राइल-गाज़ा: सहायता एजेंसियों पर प्रतिबंध, यमन पर सऊदी हमले यरुशलम: इज़राइल ने गाज़ा में 24 से अधिक सहायता एजेंसियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं, सऊदी अरब ने यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर हमले किए। मध्य पूर्व में तनाव बना हुआ है। अमेरिका: ट्रंप प्रशासन की सख्त नीतियां, फ्लू का कहर वाशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दूसरी पारी में कड़ी आव्रजन और व्यापार नीतियां जारी हैं। इस साल फ्लू से 81,000 अस्पताल में भर्ती और 3,100 मौतें हुई हैं। नए साल में शांति की उम्मीद जताई जा रही है। राष्ट्रीय समाचार प्रधानमंत्री मोदी का संदेश: 2026 में नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ें नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित कर कहा कि भारत 2026 में नई उम्मीदों और उद्देश्यों के साथ आगे बढ़ने को तैयार है। युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन जैसी पहलों का जिक्र किया। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण चरम पर: कई जगहों पर ‘गंभीर’ स्तर नई दिल्ली: दिसंबर में दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण बेहद खराब हो गया है। कई स्टेशन ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किए गए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बाहर निकलते समय सावधानी बरतें। इंडिगो संकट के बाद उड़ानें सामान्य: DGCA की सख्ती मुंबई: दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो की हजारों उड़ानें रद्द होने के बाद अब स्थिति सामान्य हो रही है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइन पर कार्रवाई की थी। खेल: ओसमान डेम्बेले बने फीफा प्लेयर ऑफ द ईयर पेरिस: फ्रेंच फुटबॉलर ओसमान डेम्बेले को 2025 का फीफा मेंस प्लेयर ऑफ द ईयर चुना गया। मौसम: उत्तर भारत में ठंड का कहर, कोहरा और शीतलहर नई दिल्ली: नए साल की पूर्व संध्या पर उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। कोहरे से ट्रेन और उड़ानें प्रभावित। जय राष्ट्र न्यूज़ की ओर से सभी दर्शकों को नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं! नया साल खुशियां और सफलता लाए।

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रशियन महिला केसेनिया ने भारत के 6 बड़े मिथकों को तोड़ा: कार में सैंडविच खाते हुए वायरल वीडियो ने मचाया धूम!

रशियन महिला केसेनिया ने भारत के 6 बड़े मिथकों को तोड़ा: कार में सैंडविच खाते हुए वायरल वीडियो ने मचाया धूम!

भारतीय संस्कृति रियल रिव्यू गुरुग्राम: सोशल मीडिया पर इन दिनों रशियन महिला केसेनिया शकीरजियानोवा (@vegkseniia) का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। केसेनिया पिछले तीन साल से भारत में रह रही हैं और गुरुग्राम में बस चुकी हैं। कार में सैंडविच खाते हुए रिकॉर्ड किए गए इस कैजुअल वीडियो में उन्होंने भारत को लेकर विदेशियों की छह बड़ी गलतफहमियों को बेबाकी से खारिज किया है। वीडियो की शुरुआत में केसेनिया मुस्कुराते हुए कहती हैं, “मैं भारत में लगभग तीन साल से रह रही हूं, और आज कुछ मिथकों को क्लियर करती हूं।” उनका यह ईमानदार और सहज अंदाज लोगों को इतना पसंद आ रहा है कि वीडियो को लाखों व्यूज मिल चुके हैं। केसेनिया ने तोड़े ये 6 मिथक: केसेनिया का मुख्य संदेश है कि भारत ने उन्हें नहीं बदला, बल्कि भारत को लेकर बनी रूढ़िवादी सोच को उन्होंने चुनौती दी है। वे कहती हैं कि भारत का जीवन विदेशियों की कल्पना से कहीं ज्यादा आधुनिक, विविध और सामान्य है। इस वीडियो पर यूजर्स की प्रतिक्रियाएं कमाल की हैं। एक यूजर ने लिखा, “आपकी ईमानदारी के लिए थैंक यू, भारत की सच्ची इमेज दिखाने के लिए!” दूसरे ने कहा, “ये वीडियो हर विदेशी को दिखाना चाहिए।” कई लोगों ने इसे भारत की पॉजिटिव इमेज बनाने वाला बताया। केसेनिया का यह वीडियो न सिर्फ मनोरंजक है, बल्कि यह दुनिया को भारत की असली तस्वीर दिखा रहा है। अगर आप भी विदेशी नजर से भारत का रियल रिव्यू देखना चाहते हैं, तो इंस्टाग्राम पर @vegkseniia जरूर चेक करें! रशियन महिला केसेनिया का भारत प्रेम: पहले वीडियो ने भी मचाया था तहलका, हैदराबाद को बताया दुबई से बेहतर! केसेनिया शकीरजियानोवा हैदराबाद वीडियो | रशियन टूरिस्ट इंडिया रिव्यू | भारत मॉडर्न सिटी रशियन नजर केसेनिया शकीरजियानोवा सिर्फ मिथक तोड़ने तक सीमित नहीं हैं। इससे पहले उनका एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें उन्होंने हैदराबाद की हाइटेक सिटी को देखकर कहा था, “हबीबी, ये दुबई नहीं, हैदराबाद है!” सनसेट व्यू और मॉडर्न आर्किटेक्चर देखकर वे हैरान रह गई थीं। यह वीडियो भी लाखों लोगों ने देखा और भारतीयों ने गर्व महसूस किया। केसेनिया जैसे विदेशी भारत की तेज विकास और विविधता की तारीफ कर दुनिया को नई नजर से देखने पर मजबूर कर रहे हैं।

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अरावली पहाड़ियां है खतरे में

अरावली पहाड़ियां: सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले से पर्यावरण पर खतरा, विरोध प्रदर्शन तेज

जय राष्ट्र न्यूज़, 24 दिसंबर 2025 – अरावली पहाड़ियां, जो दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक हैं, इन दिनों एक बड़े पर्यावरणीय और राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने अरावली की परिभाषा को बदल दिया है, जिससे खनन और निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। पर्यावरण कार्यकर्ता और स्थानीय निवासी इस फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं, जबकि सरकार का कहना है कि अरावली की सुरक्षा में कोई ढील नहीं दी गई है। जय राष्ट्र न्यूज़ आपको इस मुद्दे की पूरी जानकारी दे रहा है। अरावली पहाड़ियों का महत्व और वर्तमान स्थिति अरावली पहाड़ियां राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात में फैली हुई हैं, जो लगभग 692 किलोमीटर लंबी हैं। ये पहाड़ियां न केवल जैव विविधता का खजाना हैं, बल्कि उत्तरी भारत में रेगिस्तानी फैलाव को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, अरावली जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद करती हैं और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण को नियंत्रित रखती हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में अवैध खनन और निर्माण ने इन पहाड़ियों को नुकसान पहुंचाया है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें अरावली की परिभाषा को एक समान बनाया गया। अब केवल 100 मीटर से ऊंची पहाड़ियां ही ‘अरावली’ मानी जाएंगी और उन्हें कानूनी संरक्षण मिलेगा। इससे पहले, कोई स्पष्ट ऊंचाई सीमा नहीं थी, जिससे संरक्षण में असमंजस था। सुप्रीम कोर्ट का ‘100 मीटर नियम’ क्या है? सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों और रेंज की एकरूप परिभाषा तय की है। इस नियम के तहत: पर्यावरण मंत्री ने स्पष्ट किया है कि अरावली में खनन पर कोई छूट नहीं दी गई है, लेकिन एनसीआर के निकटवर्ती इलाकों में कुछ हिस्सों पर प्रभाव पड़ सकता है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने भी सफाई दी है कि कोई अध्ययन यह नहीं कहता कि केवल 9% अरावली 100 मीटर से ऊपर है। कुल 2,43,000 वर्ग किलोमीटर में से लगभग 1,23,000 वर्ग किलोमीटर स्थायी रूप से संरक्षित हैं, जिसमें शहर जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं। विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस फैसले के बाद उत्तरी भारत में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, कार्यकर्ता और स्थानीय लोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पर्यावरण के लिए खतरा मान रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह अरावली की परिभाषा बदलकर खनन को बढ़ावा दे रही है। वहीं, सरकार ने इन आरोपों को निराधार बताया है। सोशल मीडिया पर #SaveAravalli हैशटैग ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग इस मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर कर रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, यह फैसला खनन से परे भी प्रभाव डाल सकता है, जैसे कि निर्माण और रियल एस्टेट पर। फ्रंटलाइन मैगजीन ने इसे ‘पारिस्थितिक अंधापन’ करार दिया है, क्योंकि इससे जैव विविधता को नुकसान पहुंच सकता है। पर्यावरणीय प्रभाव और भविष्य की चिंताएं पर्यावरण विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि 100 मीटर नियम से अरावली के निचले हिस्सों में खनन बढ़ सकता है, जिससे मिट्टी का कटाव, जल संकट और वन्यजीवों का विनाश हो सकता है। दिल्ली-एनसीआर में पहले से ही प्रदूषण की समस्या है, और अरावली का क्षरण इसे और गंभीर बना सकता है। जय राष्ट्र न्यूज़ का मानना है कि अरावली को बचाना राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए। सरकार को संरक्षण नीतियों को मजबूत करने और अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। निष्कर्ष अरावली पहाड़ियां भारत की प्राकृतिक धरोहर हैं, और इनका संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक ओर स्पष्टता लाता है, लेकिन दूसरी ओर पर्यावरणीय जोखिम बढ़ाता है। जय राष्ट्र न्यूज़ आपको ऐसी महत्वपूर्ण खबरों से अपडेट रखेगा। अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट पर विजिट करें।

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ज्योति याराजी ने एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में स्वर्ण पदक जीता: खाली स्टेडियम में रचा इतिहास

जय राष्ट्र न्यूज़, 23 दिसंबर 2025: भारतीय एथलेटिक्स की स्टार हर्डलर ज्योति याराजी ने एक बार फिर देश का नाम रोशन किया है। दक्षिण कोरिया के गुमी शहर में 29 मई 2025 को आयोजित एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में ज्योति याराजी ने महिलाओं की 100 मीटर हर्डल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर नया चैंपियनशिप रिकॉर्ड बनाया। ज्योति याराजी लेटेस्ट न्यूज़ में यह उपलब्धि सुर्खियां बटोर रही है, जहां उन्होंने 12.96 सेकंड का समय निकालकर अपना लगातार दूसरा स्वर्ण पदक हासिल किया। ज्योति याराजी की जीत का भावुक पल: बारिश और सन्नाटे में तिरंगा फहराया एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 के दौरान भारी बारिश के कारण स्टेडियम लगभग खाली था। न कोई जयकारा, न तालियों की गूंज – सिर्फ ज्योति याराजी का जज्बा और देशभक्ति। स्वर्ण पदक जीतने के बाद ज्योति स्टेडियम में ही भावुक होकर बैठ गईं, और उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ज्योति याराजी समाचार में यह बताया जा रहा है कि उन्होंने न सिर्फ पदक जीता, बल्कि एशियाई स्तर पर भारत की धाक जमाई। ज्योति याराजी की यह जीत भारतीय एथलीट्स के लिए प्रेरणा स्रोत बनी है। ज्योति याराजी का सफर: राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक से एशियाई चैंपियन तक ज्योति याराजी भारत की सबसे तेज महिला हर्डलर हैं, जो 100 मीटर हर्डल में राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक हैं। एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में उनकी यह जीत भारत के लिए गौरव का क्षण है, जहां भारतीय टीम ने कुल 3 स्वर्ण पदक जीते। ज्योति याराजी न्यूज़ इन हिंदी में उनके संघर्ष और सफलता की कहानी लाखों युवाओं को मोटिवेट कर रही है। ज्योति याराजी की यह उपलब्धि ओलंपिक 2028 की तैयारी में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। ज्योति याराजी लेटेस्ट अपडेट के लिए जय राष्ट्र न्यूज़ से जुड़े रहें। अधिक जानकारी के लिए कमेंट करें या शेयर करें।

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जय राष्ट्र न्यूज़ स्पेशल: ‘धुरंधर’ का 26/11 सीन – रोंगटे खड़े कर देने वाला सच, सर्वाइवर का दिल दहला!

रणवीर सिंह अभिनीत फिल्म धुरंधर (5 दिसंबर 2025 को रिलीज) ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया है। 400 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर चुकी इस धुरंधर स्पाई थ्रिलर के एक सीन ने पूरे देश को झकझोर दिया है – वो रेड स्क्रीन वाला 26/11 मुंबई आतंकी हमले का दृश्य! फिल्म में स्क्रीन खून-लाल हो जाती है और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों व पाकिस्तानी हैंडलर्स की असली इंटरसेप्टेड वॉइस रिकॉर्डिंग्स बजने लगती हैं। हैंडलर्स ठंडे खून से निर्देश देते हैं – बंधकों को बेरहमी से मारो, ज्यादा से ज्यादा तबाही मचाओ। ये वो कड़वा सच है जो 2008 की उस भयानक रात को फिर से जिंदा कर देता है। सिनेमाघरों में सन्नाटा छा जाता है, दर्शक गुस्से, दर्द और बेबसी से भर जाते हैं। ताज होटल सर्वाइवर रजिता बग्गा का इमोशनल रिएक्शन: 26/11 की रात ताज होटल में अपने पति अजय बग्गा के साथ फंसी रहीं रजिता (श्री श्री यूनिवर्सिटी की प्रेसिडेंट) ने एक्स पर लिखा, “मेरे लिए सबसे बोने-चिलिंग सीन रेड स्क्रीन वाला था। 17 साल बीत गए, लेकिन हैंडलर्स की आवाजें सुनकर शरीर में सिहरन दौड़ गई। कितना क्रूर, अमानवीय और घिनौना! धुरंधर टीम को सलाम, जिन्होंने 2-3 मिनट में नई पीढ़ी को 26/11 का पूरा सच बता दिया। रणवीर का वो लुक पूरी जनरेशन को सताएगा।” निर्देशक आदित्य धर ने जवाब दिया, “आपके शब्द याद दिलाते हैं कि ये कहानी क्यों बतानी जरूरी थी। ये सीन सच्चाई दिखाने के लिए बनाया गया। अगर ये निशान छोड़ता है, तो एकजुट होकर ऐसी अंधेरी रात कभी न लौटे। सर्वाइव करने, बोलने के लिए धन्यवाद।” अर्जुन रामपाल व टीम का खुलासा: अर्जुन (मेजर इकबाल) ने इसे करियर का सबसे मुश्किल सीन बताया। सेट पर 45 मिनट की रियल रिकॉर्डिंग सुनकर रणवीर, अक्षय खन्ना, सबकी आंखें नम हो गईं। रणवीर का किरदार हमजा (RAW एजेंट) पाकिस्तान में घुसा है, 26/11 देखकर अंदर से टूट जाता है – आंखों में दर्द, गुस्सा, बेबसी। एक्टर दानिश पंडोर बोले, “ये सीन आम आदमी को सोचने पर मजबूर कर देता है – अगर आप वहां होते तो?” क्यों खास है ये सीन? कंधार हाईजैक, संसद हमला से प्रेरित फिल्म में 26/11 को रियल ऑडियो से जोड़ा गया। दर्शक X पर लिख रहे – “रोंगटे खड़े हो गए”, “गुस्सा आ गया”, “नई जनरेशन को याद दिलाया”। कुछ नेगेटिव कैंपेन भी चले, लेकिन सच ने जीत ली। जय राष्ट्र न्यूज़ अपील: ऐसी फिल्में राष्ट्रहित में हैं। धुरंधर देखें, शेयर करें। भारत माता की जय!

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बिहार सीएम नीतीश कुमार हिजाब विवाद

बिहार सीएम नीतीश कुमार हिजाब विवाद: पटना कार्यक्रम में मुस्लिम महिला डॉक्टर का नकाब हटाने पर भारी बवाल

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। पटना में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार ने नव नियुक्त आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन का हिजाब (नकाब) खींच दिया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस घटना ने देशभर में आक्रोश पैदा कर दिया है और महिलाओं की गरिमा तथा धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। नीतीश कुमार हिजाब घटना के विवरण यह घटना 15 दिसंबर 2025 को पटना के मुख्यमंत्री सचिवालय ‘संवाद’ में हुई, जहां 1,283 से अधिक आयुष डॉक्टरों (आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी) को नियुक्ति पत्र वितरित किए जा रहे थे। मंच पर डॉक्टर नुसरत परवीन नियुक्ति पत्र लेने आईं, जो चेहरे पर नकाब पहने हुई थीं। वीडियो में दिख रहा है कि नीतीश कुमार ने पहले पत्र सौंपा, फिर नकाब की ओर इशारा करते हुए “ये क्या है?” कहा और खुद इसे नीचे खींच दिया। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन कुछ अधिकारी हंसते नजर आए। डॉक्टर नुसरत इस घटना से इतनी आहत हुईं कि उन्होंने बिहार छोड़ दिया और कोलकाता अपने परिवार के पास चली गईं। उनके परिवार ने कहा कि वे अब सरकारी नौकरी जॉइन नहीं करेंगी। यह घटना महिलाओं की निजता, सहमति और धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन मानी जा रही है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और बिहार मुख्यमंत्री विवाद विपक्षी दलों ने नीतीश कुमार की कड़ी निंदा की है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने वीडियो शेयर कर पूछा, “नीतीश जी को क्या हो गया? उनकी मानसिक स्थिति अब दयनीय हो गई है या नीतीश बाबू अब 100% संघी हो गए?” कांग्रेस ने इसे “घृणित कृत्य” बताते हुए नीतीश का तत्काल इस्तीफा मांगा। कश्मीर की पार्टियों ने भी निंदा की। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि नीतीश को पद छोड़ देना चाहिए। उमर अब्दुल्लाह ने इसे गलत बताया। पूर्व अभिनेत्री जायरा वसीम ने बिना शर्त माफी की मांग की। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे महिला की गरिमा पर हमला बताया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने इसे “शर्मनाक” कहा। जावेद अख्तर ने भी नीतीश से माफी मांगने को कहा। नीतीश की पार्टी जदयू और सहयोगी भाजपा का बचाव: अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान ने कहा कि नीतीश ने “पिता जैसा स्नेह” दिखाया, ताकि अल्पसंख्यक समुदाय की बेटी की सफलता दुनिया देखे। सोशल मीडिया बैकलैश और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश है। कई सेलेब्रिटी और एक्टिविस्ट्स ने इसे महिलाओं की गरिमा पर हमला बताया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान और मानवाधिकार संगठनों ने निंदा की। कुछ जगहों पर प्रदर्शन भी हुए। नीतीश कुमार और भाजपा गठबंधन का राजनीतिक संदर्भ नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से अधिकतर बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भाजपा के प्रमुख सहयोगी हैं। हालिया विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत हुई। बिहार में 18% मुस्लिम आबादी है, इसलिए ऐसे मुद्दे संवेदनशील हैं। भाजपा का हिजाब पर पहले से विवादित रुख रहा है, जैसे कर्नाटक में बैन। फिलहाल नीतीश कुमार ने कोई माफी या बयान नहीं दिया है। जांच और प्रतिक्रियाएं जारी हैं। यह नीतीश कुमार मुस्लिम महिला डॉक्टर नकाब घटना भारत में धार्मिक पोशाक और महिलाओं के अधिकारों पर चल रही बहस को और गहरा कर रही है। जय राष्ट्र न्यूज पर इस विकासशील कहानी और अन्य ट्रेंडिंग भारतीय समाचारों के लिए बने रहें।

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कर्नाटक तट पर सीगल पक्षी पर मिला चीनी GPS ट्रैकर: जासूसी की आशंका, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

कर्नाटक तट पर सीगल पक्षी पर मिला चीनी GPS ट्रैकर भारत में सुरक्षा को लेकर एक नई चिंता सामने आई है। कर्नाटक के कारवार तट पर एक सीगल पक्षी पकड़ा गया, जिसकी पीठ पर हाई-टेक चीनी GPS ट्रैकर लगा हुआ मिला। यह घटना दिसंबर 2025 में सामने आई है और इससे जासूसी की आशंका गहरा गई है। सुरक्षा एजेंसियां इस मामले की गहन जांच कर रही हैं। चीनी GPS ट्रैकर वाली सीगल की घटना के विवरण यह सीगल पक्षी कारवार क्षेत्र में पकड़ा गया। पक्षी पर लगा ट्रैकर अत्याधुनिक तकनीक वाला है, जो चीन से जुड़ा बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे ट्रैकर पक्षियों के माध्यम से सीमा क्षेत्रों की निगरानी या डेटा संग्रह के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। यह पहली बार नहीं है जब भारत में चीनी जासूसी उपकरणों की खबरें आई हैं, लेकिन पक्षी पर ट्रैकर मिलना एक नया और चौंकाने वाला मामला है।यह घटना भारत-चीन सीमा तनाव और समुद्री क्षेत्रों में निगरानी के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। भारतीय नौसेना और खुफिया एजेंसियां पहले से ही दक्षिण चीन सागर और भारतीय महासागर में चीनी गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया और जांच भारतीय खुफिया एजेंसियों ने तुरंत इस ट्रैकर को जब्त कर लिया है और इसकी तकनीकी जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञ यह पता लगा रहे हैं कि यह ट्रैकर कितने समय से सक्रिय था और क्या कोई संवेदनशील डेटा भेजा गया। केंद्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और संबंधित मंत्रालयों को अलर्ट जारी किया गया है।पिछले कुछ वर्षों में भारत में चीनी ड्रोनों और जासूसी उपकरणों की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे सीमा सुरक्षा को और मजबूत किया गया है। यह घटना भी उसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है। सामाजिक मीडिया और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस खबर के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा हो रही है। कई यूजर्स ने इसे चीनी जासूसी का सबूत बताया, जबकि कुछ ने पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के मुद्दे को भी उठाया। विपक्षी दलों ने सरकार से संसद में इस पर स्पष्टीकरण मांगा है।सरकार की ओर से कहा गया है कि भारत की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत है और किसी भी खतरे से निपटने के लिए तैयार है। भारत-चीन संबंधों का संदर्भ यह घटना ऐसे समय में आई है जब भारत और चीन के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध सामान्य की दिशा में हैं, लेकिन सीमा विवाद और सुरक्षा मुद्दे अभी भी बने हुए हैं। 2025 में दोनों देशों के बीच कई उच्चस्तरीय बैठकें हुई हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।कर्नाटक तट भारतीय नौसेना के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, जहां कई आधार हैं। इस घटना से समुद्री सुरक्षा पर फिर से बहस छिड़ गई है।फिलहाल, जांच जारी है और जल्द ही अधिक जानकारी सामने आएगी। जय राष्ट्र न्यूज इस घटना पर नजर बनाए हुए है और आगे के अपडेट्स लाता रहेगा।यह चीनी GPS ट्रैकर सीगल पक्षी मामला भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। अन्य ट्रेंडिंग भारतीय समाचारों के लिए जय राष्ट्र न्यूज पर बने रहें।

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रहमान डकैत: कराची के ल्यारी इलाके का क्रूर अपराधी साम्राज्य

परिचयसर्दार अब्दुल रहमान बलोच, जिन्हें दुनिया रहमान डकैत के नाम से जानती है, पाकिस्तान के सबसे कुख्यात गैंगस्टरों में से एक थे। 1975 में कराची के ल्यारी इलाके में जन्मे रहमान ने अपराध की दुनिया में कम उम्र से ही कदम रखा और जल्द ही ल्यारी को अपने खौफनाक साम्राज्य का केंद्र बना लिया। ल्यारी, जो कराची का एक घनी आबादी वाला बलोच बहुल इलाका है, गरीबी, बेरोजगारी और राज्य की लापरवाही के कारण अपराध का गढ़ बन चुका था। रहमान ने यहां के गैंग वॉर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, जहां हत्याएं, जबरन वसूली और ड्रग तस्करी आम बात हो गई। उनकी कहानी न केवल हिंसा की है, बल्कि राजनीतिक संरक्षण और जनता के बीच एक छवि बनाने की भी है। हाल ही में बॉलीवुड फिल्म ‘धुरंधर’ में अक्षय खन्ना द्वारा निभाए गए उनके किरदार ने दुनिया भर में उनकी क्रूरता को फिर से चर्चा में ला दिया है। View this post on Instagram A post shared by Ranveer Singh (@ranveersingh) प्रारंभिक जीवन और अपराध में प्रवेशरहमान का जन्म 1975 में ल्यारी में एक अपराधी परिवार में हुआ। उनके पिता अबू मुहम्मद (जिन्हें दादल के नाम से भी जाना जाता था) और चाचा शेरू 1964 से ड्रग तस्करी में लिप्त थे। परिवार की इस पृष्ठभूमि ने रहमान को बचपन से ही अपराध की दुनिया से जोड़ दिया। मात्र 13 साल की उम्र में उन्होंने अपनी पहली हिंसक घटना को अंजाम दिया, जब उन्होंने किसी व्यक्ति को चाकू मार दिया। किशोरावस्था में ही वे ड्रग्स बेचने लगे और ल्यारी की गलियों में अपनी पहचान बनाने लगे। उनके पिता की हत्या के बाद परिवार का बदला लेने की आग ने रहमान को और उग्र बना दिया। 1990 के दशक में अरशद पप्पू के पिता द्वारा उनके पिता की हत्या और कब्र की बेइज्जती ने एक लंबे गैंग वॉर को जन्म दिया, जो वर्षों तक चला। 19 साल की उम्र में रहमान ने एक ऐसी घटना की, जो उनकी क्रूरता का प्रतीक बन गई—उन्होंने अपनी मां खदीजा बीबी को गला घोंटकर मार डाला। कथित तौर पर, उनकी मां का किसी अन्य गैंगस्टर इकबाल से संबंध था, जिसने उनके पिता की हत्या की थी। इस घटना के बाद रहमान ने अपनी मां का शव पंखे से लटका दिया, जो उनकी बेरहम छवि को अमर कर गई। गैंग लीडर के रूप में उदय1990 के अंत में रहमान हाजी लालू के गैंग में शामिल हुए, जो ल्यारी का प्रमुख ड्रग लॉर्ड था। 2001 में लालू की गिरफ्तारी के बाद रहमान ने गैंग की कमान संभाली। उन्होंने अपने चचेरे भाई उजैर बलोच और सहयोगी बाबा लाडला के साथ मिलकर ल्यारी को अपना किला बना लिया। 2001 से 2009 तक का दौर रहमान के साम्राज्य का स्वर्णिम काल था। वे जबरन वसूली, अपहरण, ड्रग तस्करी, अवैध हथियारों की बिक्री और हत्या जैसे अपराधों में लिप्त रहे। रहमान ने ‘पीपुल्स अमन कमिटी’ (पीएसी) नामक संगठन की स्थापना की, जो सतह पर शांति का प्रतीक था, लेकिन वास्तव में उनका अपराधी साम्राज्य था। वे ल्यारी में एक फ्यूडल लॉर्ड की तरह शासन करते थे—राजनीतिक संरक्षण के साथ। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) से उनके गहरे संबंध थे। कथित तौर पर, उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की जान कई बार बचाई, खासकर 2007 के हमलों के दौरान। जब बेनजीर का काफिला क्लिफ्टन में विस्फोटों से घिर गया, तो रहमान के आदमियों ने उन्हें सुरक्षित निकाला। बदले में, पीपीपी ने उन्हें राजनीतिक छत्रछाया दी। उनकी क्रूरता की मिसालें कांपने वाली हैं। गैंग वॉर के दौरान वे दुश्मनों के सिर काटकर फुटबॉल की तरह खेलते थे। अरशद पप्पू के साथ उनके संघर्ष में सैकड़ों मौतें हुईं, जिनमें सिर काटना, कब्रें खोदना और सार्वजनिक हिंसा शामिल थी। 2012 के ल्यारी गैंग वॉर में 800 से अधिक मौतें हुईं, जो रहमान के दौर की देन थीं। राजनीतिक संबंध और जनता की छविरहमान केवल अपराधी नहीं थे; वे एक चतुर रणनीतिकार भी थे। वे खुद को ‘सर्दार अब्दुल रहमान बलोच’ कहलवाते थे, जो उनकी बलोच पहचान को मजबूत करता था। ल्यारी में वे रोबिन हुड की तरह देखे जाते थे—गरीबों की मदद करते, लेकिन बदले में वफादारी मांगते। उनके अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल हुए, जो उनकी लोकप्रियता दर्शाता है। हालांकि, पाकिस्तानी पुलिस के अनुसार, वे केवल ल्यारी तक सीमित थे और शहर के अन्य हिस्सों में उतने प्रभावशाली नहीं थे। उनके राजनीतिक संबंधों ने उन्हें लंबे समय तक बचाए रखा। बेनजीर भुट्टो के अलावा, वे अन्य पीपीपी नेताओं से जुड़े थे। लेकिन यह संरक्षण उनके पतन का कारण भी बना। मौत और विरासत9 अगस्त 2009 को कराची पुलिस के साथ मुठभेड़ में रहमान की मौत हो गई। यह ऑपरेशन कराची के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एसएसपी चौधरी असलम खान के नेतृत्व में किया गया था, जो पाकिस्तान के ‘सुपर कॉप’ के रूप में जाने जाते थे। पुलिस का दावा था कि यह एक वैध गोलीबारी थी, जिसमें रहमान और उनके दो सहयोगियों को मार गिराया गया। हालांकि, कई विवादास्पद रिपोर्ट्स में इसे ‘फर्जी एनकाउंटर’ करार दिया गया, क्योंकि रहमान को करीब से गोली मारी गई थी। पूर्व गृह मंत्री जुल्फिकार मिर्जा ने दावा किया कि उन्होंने खुद रहमान को मारा था, लेकिन बाद में पछतावा जताया। कुछ स्रोतों के अनुसार, रहमान कथित रूप से बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को हथियार बेचने में लिप्त थे, जिसके कारण उनकी हत्या एक सौदे के खराब होने का नतीजा हो सकती है। हालांकि, भारतीय जासूसों के शामिल होने का कोई पुष्ट साक्ष्य नहीं मिला। फिल्म ‘धुरंधर’ में रणवीर सिंह द्वारा निभाए गए भारतीय जासूस ‘हामजा’ के किरदार ने काल्पनिक रूप से रहमान के गिरोह में घुसकर उनकी कमजोरी उजागर की और अप्रत्यक्ष रूप से उनके पतन में भूमिका निभाई, लेकिन वास्तविकता में यह पूरी तरह काल्पनिक है। रहमान की मौत के बाद उजैर बलोच ने कमान संभाली, लेकिन 2016 में उनकी गिरफ्तारी के साथ पीएसी कमजोर पड़ गया। रहमान की विरासत ल्यारी के गैंग वॉर और अपराध संस्कृति में बसी है, जो आज भी पाकिस्तान की शहरी समस्याओं को दर्शाती है। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘धुरंधर’ में अक्षय खन्ना ने रहमान डकैत का किरदार निभाया है, जो उनकी क्रूरता को स्क्रीन पर जीवंत करता है। फिल्म ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया (पहले वीकेंड में…

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