Rahul Aharwar

Summer Fancy Food Show 2026 में भारत की अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी, वैश्विक बाजार में भारतीय खाद्य उत्पादों को बढ़ावा

न्यूयॉर्क, 29 जून। उत्तर अमेरिका के प्रतिष्ठित Summer Fancy Food Show 2026 में भारत ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी दर्ज कराते हुए वैश्विक खाद्य बाजार में मजबूत उपस्थिति का प्रदर्शन किया है। भारतीय पवेलियन में देशभर की दर्जनों कंपनियां और निर्यातक अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य भारतीय खाद्य उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच बढ़ाना और नए निर्यात अवसरों को प्रोत्साहित करना है। भारतीय पवेलियन बना आकर्षण का केंद्र इस वर्ष भारतीय पवेलियन में मसाले, चाय, कॉफी, बासमती चावल, ऑर्गेनिक उत्पाद, रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थ, स्नैक्स, मिलेट आधारित उत्पाद, मिठाइयां और विभिन्न प्रसंस्कृत खाद्य वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। वैश्विक खरीदारों और वितरकों ने भारतीय उत्पादों में विशेष रुचि दिखाई है। निर्यात बढ़ाने पर फोकस विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय व्यापार आयोजनों से भारतीय खाद्य उद्योग को नए बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिलता है। भारत सरकार और निर्यात संवर्धन एजेंसियां खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। इसका उद्देश्य कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है। मिलेट और ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग बढ़ी वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्यवर्धक और प्राकृतिक खाद्य उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच भारतीय मिलेट, ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थ और पारंपरिक सुपरफूड्स विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। कई अंतरराष्ट्रीय खरीदारों ने भारतीय कंपनियों के साथ संभावित व्यापारिक साझेदारी में रुचि दिखाई है। भारतीय कंपनियों को नए अवसर कार्यक्रम में भाग लेने वाली भारतीय कंपनियां विभिन्न देशों के आयातकों, खुदरा विक्रेताओं और वितरकों के साथ व्यापारिक बैठकों में शामिल हो रही हैं। उद्योग जगत का मानना है कि इससे निर्यात ऑर्डर बढ़ने और भारतीय ब्रांडों की वैश्विक पहचान मजबूत होने की संभावना है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को मिलेगा लाभ भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बढ़ती उपस्थिति से इस क्षेत्र में निवेश, तकनीकी सहयोग और नए व्यापारिक अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक मांग के अनुरूप गुणवत्ता और पैकेजिंग पर ध्यान देकर भारतीय कंपनियां अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत कर सकती हैं। सरकार की पहल को मिली मजबूती भारतीय निर्यात संवर्धन एजेंसियों और संबंधित संस्थानों द्वारा आयोजित सामूहिक भागीदारी का उद्देश्य छोटे और मध्यम उद्यमों को भी वैश्विक मंच उपलब्ध कराना है। इससे भारतीय खाद्य उद्योग के विविध उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है। भविष्य की संभावनाएं विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की बढ़ती भागीदारी यह संकेत देती है कि भारतीय खाद्य उत्पादों की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। यदि गुणवत्ता, नवाचार और आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत किया जाए तो आने वाले वर्षों में भारत खाद्य निर्यात के क्षेत्र में और बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है। स्रोत:APEDA, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार मूल रिपोर्ट:Summer Fancy Food Show 2026 में भारतीय भागीदारी से संबंधित आधिकारिक जानकारी और व्यापारिक रिपोर्टों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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खरीफ बुवाई में 22.7% की गिरावट दर्ज, कमजोर मानसून से कई राज्यों में खेती प्रभावित

नई दिल्ली, 29 जून। देश में खरीफ सीजन की बुवाई इस वर्ष शुरुआती चरण में अपेक्षा से धीमी रही है। कृषि मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में खरीफ फसलों की बुवाई में 22.7% की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई क्षेत्रों में कमजोर मानसून और सामान्य से कम वर्षा के कारण किसानों को बुवाई शुरू करने में देरी हुई है। किन फसलों पर सबसे अधिक असर? शुरुआती आंकड़ों के अनुसार धान, दालें, तिलहन, मोटे अनाज और कुछ अन्य खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण कई किसानों ने खेतों की तैयारी और बीज बोने का कार्य फिलहाल टाल दिया है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो बुवाई की रफ्तार तेज हो सकती है। कमजोर मानसून बना प्रमुख कारण मौसम विशेषज्ञों के अनुसार देश के कई कृषि प्रधान क्षेत्रों में मानसून की प्रगति सामान्य से धीमी रही है। कुछ इलाकों में बारिश की कमी के कारण मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई, जिससे किसानों को बुवाई शुरू करने में कठिनाई हुई। हालांकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई हिस्सों में वर्षा बढ़ने की संभावना जताई है। किसानों की बढ़ी चिंता बारिश में देरी का असर किसानों की लागत और उत्पादन दोनों पर पड़ सकता है। समय पर बुवाई न होने से फसलों की वृद्धि अवधि प्रभावित होती है, जिससे उपज कम होने का जोखिम बढ़ जाता है। कई किसान अब अगले मानसूनी दौर का इंतजार कर रहे हैं ताकि बुवाई का कार्य तेजी से पूरा किया जा सके। कृषि मंत्रालय की नजर स्थिति पर कृषि मंत्रालय लगातार राज्यों से बुवाई की प्रगति की जानकारी जुटा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जहां आवश्यक होगा, वहां किसानों को बीज, तकनीकी सलाह और अन्य सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य सरकारों के साथ समन्वय बनाकर मानसून की स्थिति के अनुसार कृषि रणनीति तैयार की जा रही है। खाद्य उत्पादन पर क्या होगा असर? विशेषज्ञों का मानना है कि अभी खाद्यान्न उत्पादन को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। यदि जुलाई के पहले और दूसरे सप्ताह में सामान्य या उससे अधिक वर्षा होती है तो बुवाई में आई शुरुआती कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। इसलिए आने वाले कुछ सप्ताह कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मौसम पूर्वानुमान से बढ़ी उम्मीद भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कई राज्यों में आगामी दिनों में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। यदि पूर्वानुमान के अनुरूप वर्षा होती है तो किसानों को राहत मिलेगी और खरीफ बुवाई की गति में तेजी आने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को स्थानीय मौसम सलाह के अनुसार खेती की योजना बनाने की सलाह दे रहे हैं। आगे की राह सरकार और कृषि विशेषज्ञों की नजर अब मानसून की आगामी गतिविधियों पर टिकी है। समय पर पर्याप्त वर्षा होने पर बुवाई में आई कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। फिलहाल किसानों, कृषि विभाग और मौसम एजेंसियों के बीच समन्वय बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि खरीफ सीजन पर मौसम का प्रभाव न्यूनतम रहे। स्रोत:कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार मूल रिपोर्ट:कृषि मंत्रालय द्वारा जारी खरीफ बुवाई के ताज़ा आंकड़ों एवं मौसम संबंधी आधिकारिक जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत ने EU से स्क्रैप निर्यात प्रतिबंधों में राहत की मांग की, स्टील और एल्युमिनियम उद्योग की चिंताएं बढ़ीं

नई दिल्ली, 29 जून। भारत ने यूरोपीय संघ (EU) से स्क्रैप धातु के निर्यात पर प्रस्तावित प्रतिबंधों में राहत देने का आग्रह किया है। सरकार का कहना है कि यदि इन प्रतिबंधों को लागू किया गया तो भारत के स्टील और एल्युमिनियम उद्योग के लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ने और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर असर पड़ने की आशंका है। क्यों महत्वपूर्ण है स्क्रैप धातु? स्टील और एल्युमिनियम उद्योग में पुनर्चक्रित (रीसाइकिल) स्क्रैप धातु का व्यापक उपयोग किया जाता है। इससे उत्पादन लागत कम होती है, ऊर्जा की बचत होती है और कार्बन उत्सर्जन भी अपेक्षाकृत कम रहता है। भारत अपनी औद्योगिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में स्क्रैप धातु का आयात करता है, जिसमें यूरोपीय संघ एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है। भारत ने EU के समक्ष रखी चिंता वाणिज्य अधिकारियों ने यूरोपीय संघ के समक्ष यह मुद्दा उठाते हुए कहा है कि स्क्रैप निर्यात पर कड़े प्रतिबंध या अतिरिक्त शर्तें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकती हैं। भारत ने सुझाव दिया है कि ऐसे उपाय अपनाए जाएं, जिनसे यूरोपीय उद्योगों की जरूरतें भी पूरी हों और साझेदार देशों को भी पर्याप्त आपूर्ति मिलती रहे। स्टील और एल्युमिनियम उद्योग पर संभावित असर उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्क्रैप की उपलब्धता कम होती है तो स्टील और एल्युमिनियम उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। इसका असर निर्माण, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, बुनियादी ढांचा और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है, जहां इन धातुओं का व्यापक उपयोग होता है। व्यापार वार्ता पर भी नजर यह मुद्दा ऐसे समय सामने आया है जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापक व्यापार और निवेश सहयोग को लेकर बातचीत जारी है। दोनों पक्ष मुक्त व्यापार समझौते (FTA) सहित कई आर्थिक मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। ऐसे में स्क्रैप निर्यात का विषय भी वार्ता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। उद्योग जगत की प्रतिक्रिया भारतीय स्टील और धातु उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि स्थिर और किफायती कच्चे माल की उपलब्धता घरेलू विनिर्माण को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए आवश्यक है। उद्योग ने वैकल्पिक स्रोतों के विकास और घरेलू स्क्रैप संग्रह प्रणाली को भी मजबूत करने पर जोर दिया है। पर्यावरणीय दृष्टि से भी अहम स्क्रैप आधारित धातु उत्पादन को पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है, क्योंकि इससे नई धातु के उत्पादन की तुलना में कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है और कार्बन उत्सर्जन भी घटता है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए स्क्रैप की निर्बाध उपलब्धता महत्वपूर्ण है। आगे क्या? भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस मुद्दे पर आगे भी चर्चा जारी रहने की संभावना है। दोनों पक्ष ऐसा समाधान तलाशने का प्रयास कर रहे हैं जिससे व्यापारिक हितों का संतुलन बना रहे और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। उद्योग जगत की नजर अब आगामी वार्ताओं और यूरोपीय संघ के अंतिम निर्णय पर बनी हुई है। स्रोत:वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार मूल रिपोर्ट:भारत-यूरोपीय संघ व्यापार वार्ता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से संबंधित आधिकारिक जानकारी एवं समाचार एजेंसियों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO के लिए DFP-2026 जारी किया, रक्षा अनुसंधान परियोजनाओं को मिलेगी नई गति

नई दिल्ली, 29 जून। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के लिए Delegation of Financial Powers (DFP)-2026 जारी किया। नई वित्तीय शक्तियों का उद्देश्य रक्षा अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं में निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। सरकार का मानना है कि इससे अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों के विकास और स्वदेशीकरण को नई गति मिलेगी। क्या है DFP-2026? DFP-2026 एक संशोधित वित्तीय अधिकार ढांचा है, जिसके तहत DRDO के विभिन्न स्तरों के अधिकारियों को परियोजनाओं की आवश्यकता के अनुसार अधिक वित्तीय अधिकार दिए गए हैं। इससे अनुसंधान परियोजनाओं की मंजूरी, उपकरणों की खरीद और विकास कार्यों में अनावश्यक देरी कम होने की उम्मीद है। रक्षा अनुसंधान को मिलेगी रफ्तार रक्षा मंत्रालय के अनुसार नई व्यवस्था लागू होने के बाद विभिन्न अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं की स्वीकृति पहले की तुलना में अधिक तेजी से मिल सकेगी। इससे मिसाइल प्रणाली, रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन, साइबर सुरक्षा और अन्य आधुनिक रक्षा तकनीकों पर काम तेज होगा। आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का लक्ष्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। उन्होंने कहा कि DRDO और भारतीय रक्षा उद्योग के बीच बेहतर समन्वय से स्वदेशी रक्षा उपकरणों का विकास तेज होगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। उद्योग और स्टार्टअप को मिलेगा लाभ नई वित्तीय व्यवस्था से निजी उद्योग, MSME और रक्षा क्षेत्र के स्टार्टअप के साथ DRDO की साझेदारी भी मजबूत होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नई तकनीकों के विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा। पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर DFP-2026 में वित्तीय निर्णयों को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि नई प्रणाली से परियोजनाओं की निगरानी बेहतर होगी और संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप कदम बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए सरकार आधुनिक तकनीकों पर विशेष ध्यान दे रही है। AI, स्वायत्त प्रणाली, हाइपरसोनिक तकनीक, क्वांटम टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को प्राथमिकता दी जा रही है। DFP-2026 को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है। भविष्य की रणनीति विशेषज्ञों का मानना है कि DFP-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन से DRDO की अनुसंधान क्षमता और मजबूत होगी तथा नई रक्षा परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। इससे भारत की रक्षा तैयारियों, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक रक्षा उद्योग में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। स्रोत:रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार मूल रिपोर्ट:रक्षा मंत्रालय एवं DRDO द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा पूरी की, ₹1,250 करोड़ की क्रेडिट लाइन और नौ द्विपक्षीय समझौतों पर बनी सहमति

विक्टोरिया (सेशेल्स), 29 जून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी तीन दिवसीय राजकीय यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर भारत लौटने से पहले सेशेल्स के साथ रणनीतिक, आर्थिक और विकास सहयोग को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णयों की घोषणा की। यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच ₹1,250 करोड़ की क्रेडिट लाइन तथा नौ द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों का उद्देश्य डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, कृषि, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा, कानूनी सहयोग और बुनियादी ढांचे के विकास को मजबूत करना है। ₹1,250 करोड़ की क्रेडिट लाइन की घोषणा भारत ने सेशेल्स के विकासात्मक परियोजनाओं के लिए ₹1,250 करोड़ की नई क्रेडिट लाइन उपलब्ध कराने की घोषणा की। इस वित्तीय सहायता का उपयोग आधारभूत ढांचे, सार्वजनिक सेवाओं और अन्य प्राथमिक विकास परियोजनाओं में किया जाएगा। दोनों देशों ने इसे दीर्घकालिक विकास साझेदारी का महत्वपूर्ण कदम बताया। नौ क्षेत्रों में हुए महत्वपूर्ण समझौते यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित समझौतों में UPI डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, जन औषधि, कृषि अनुसंधान, प्रत्यर्पण संधि, समुद्री सहयोग, अंतरिक्ष क्षेत्र, क्षमता निर्माण तथा विकास सहयोग जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। इन समझौतों से दोनों देशों के बीच संस्थागत सहयोग और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है। डिजिटल सहयोग को नई गति भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को सेशेल्स में लागू करने के लिए भी समझौता हुआ। इससे दोनों देशों के बीच डिजिटल भुगतान प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा और पर्यटन, व्यापार तथा वित्तीय लेनदेन अधिक सरल और तेज़ होने की संभावना है। समुद्री सुरक्षा और हिंद महासागर पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और सेशेल्स के लिए हिंद महासागर केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि साझा सुरक्षा, समृद्धि और विकास का आधार है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी, समुद्री संसाधनों के संरक्षण और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए दोनों देशों के सहयोग को और मजबूत बनाने पर बल दिया। राष्ट्रीय दिवस समारोह में बने मुख्य अतिथि यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स के 50वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस अवसर पर भारतीय सेना और नौसेना के दल ने भी परेड में हिस्सा लिया, जिसे दोनों देशों की गहरी मित्रता और रक्षा सहयोग का प्रतीक माना गया। दोनों देशों के संबंधों को मिली नई मजबूती प्रधानमंत्री मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में व्यापार, निवेश, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन और समुद्री सहयोग सहित कई विषयों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने भविष्य में साझेदारी को और व्यापक बनाने पर सहमति व्यक्त की। भविष्य की साझेदारी पर फोकस विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत की ‘पड़ोसी पहले’ और हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग की नीति को और मजबूती देती है। नए समझौतों के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी और विकास सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। स्रोत:भारत का विदेश मंत्रालय (MEA), प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) मूल रिपोर्ट:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा से संबंधित आधिकारिक जानकारी एवं राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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क्या आप जानते हैं?

भारत का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान में स्थित है। यह पश्चिम बंगाल के दक्षिणी भाग में गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदियों के विशाल डेल्टा क्षेत्र में फैला हुआ है। सुंदरबन केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन क्षेत्र माना जाता है। सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान को वर्ष 1987 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) का दर्जा मिला। यह क्षेत्र अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है और यहां पाए जाने वाले रॉयल बंगाल टाइगर इसकी सबसे बड़ी पहचान हैं। इसके अलावा खारे पानी के मगरमच्छ, चीतल, डॉल्फ़िन, समुद्री कछुए और सैकड़ों प्रजातियों के पक्षी भी यहां पाए जाते हैं। मैंग्रोव वन तटीय क्षेत्रों को समुद्री तूफानों, चक्रवातों और तटीय कटाव से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये बड़ी मात्रा में कार्बन का भंडारण भी करते हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। आज सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान न केवल एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के संरक्षण का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। रोचक तथ्य जय राष्ट्र न्यूज़

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जलवायु परिवर्तन के दौर में चरम मौसम की घटनाएं: क्या भारत का आपदा प्रबंधन तंत्र पर्याप्त रूप से तैयार है?

संपादकीय | 28 जून।पिछले कुछ वर्षों में भारत ने मौसम के बदलते स्वरूप को करीब से महसूस किया है। कहीं कुछ घंटों की बारिश से शहर जलमग्न हो जाते हैं, कहीं लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव जनजीवन को प्रभावित करती है, तो कहीं चक्रवात और भूस्खलन बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाते हैं। वैज्ञानिक लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी चरम मौसमीय घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता दोनों बढ़ सकती हैं। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या भारत का आपदा प्रबंधन तंत्र इन नई चुनौतियों का सामना करने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार है? बदलता मौसम, बढ़ती चुनौतियां मानसून का अनिश्चित व्यवहार, अत्यधिक वर्षा, लंबे सूखे, हीटवेव और अचानक आने वाली बाढ़ अब अपवाद नहीं रह गए हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, परिवहन और शहरी जीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। इससे केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन और आजीविका पर भी असर पड़ रहा है। भारत ने कई क्षेत्रों में की है प्रगति पिछले एक दशक में भारत ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। मौसम पूर्वानुमान प्रणाली पहले की तुलना में अधिक सटीक हुई है। राष्ट्रीय और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF और SDRF) की क्षमता बढ़ाई गई है। चक्रवातों के दौरान समय पर निकासी और बेहतर समन्वय के कारण जनहानि में उल्लेखनीय कमी आई है। यह दर्शाता है कि सही योजना और तकनीक के उपयोग से आपदाओं के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। लेकिन चुनौतियां अभी भी बाकी हैं इसके बावजूद कई समस्याएं अब भी सामने हैं। शहरी क्षेत्रों में अनियोजित विकास, जल निकासी व्यवस्था की कमी, पहाड़ी इलाकों में अतिक्रमण, नदियों के बाढ़ क्षेत्र में निर्माण और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी कई बार प्राकृतिक आपदाओं को और गंभीर बना देती है। केवल राहत और बचाव पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है; जोखिम को पहले से कम करना भी उतना ही आवश्यक है। तकनीक और स्थानीय तैयारी की जरूरत आधुनिक तकनीक—जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), उपग्रह निगरानी, ड्रोन और रियल-टाइम डेटा विश्लेषण—आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना सकती है। साथ ही ग्राम पंचायतों, नगर निकायों और स्थानीय समुदायों को प्रशिक्षण देकर उन्हें आपदा से पहले और बाद की स्थिति से निपटने के लिए सक्षम बनाना भी जरूरी है। जलवायु अनुकूल विकास की दिशा में कदम विशेषज्ञों का मानना है कि अब विकास योजनाओं में जलवायु जोखिम को शामिल करना अनिवार्य हो गया है। मजबूत बुनियादी ढांचा, वर्षा जल प्रबंधन, हरित शहरीकरण, जल संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण भविष्य में आपदाओं के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जनजागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण आपदा प्रबंधन केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है। नागरिकों की जागरूकता, समय पर चेतावनियों का पालन, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का सम्मान और सामुदायिक सहयोग किसी भी आपदा के दौरान नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं। निष्कर्ष भारत ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन जलवायु परिवर्तन की बदलती चुनौतियां लगातार नई तैयारियों की मांग कर रही हैं। भविष्य की रणनीति केवल आपदा आने के बाद राहत पहुंचाने तक सीमित नहीं रह सकती। जोखिम कम करना, जलवायु अनुकूल विकास को बढ़ावा देना, आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग और स्थानीय स्तर पर मजबूत तैयारी ही भारत को आने वाली प्राकृतिक चुनौतियों के प्रति अधिक सक्षम बना सकती है। अस्वीकरण (Editorial Note):यह एक संपादकीय लेख है। इसमें व्यक्त विचार उपलब्ध तथ्यों, विशेषज्ञों के विश्लेषण और समसामयिक परिस्थितियों पर आधारित हैं। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या सरकार के पक्ष या विपक्ष में मत व्यक्त करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक विमर्श को प्रोत्साहित करना है। जय राष्ट्र न्यूज़

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‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री मोदी ने स्वदेशी रक्षा क्षेत्र की उपलब्धियों और सैन्य आत्मनिर्भरता पर जोर दिया

नई दिल्ली, 28 जून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में देश की रक्षा और सुरक्षा से जुड़ी स्वदेशी उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत “समुद्र से आसमान तक लगातार अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन रहा है।” उन्होंने जून महीने में रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र में हासिल की गई उपलब्धियों को आत्मनिर्भर भारत अभियान की महत्वपूर्ण सफलता बताया। स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म का किया उल्लेख प्रधानमंत्री ने हाल ही में भारतीय नौसेना में शामिल किए गए INS Dunagiri, INS Sanshodhak और INS Agray का उल्लेख करते हुए कहा कि इन प्लेटफॉर्मों का डिजाइन और निर्माण पूरी तरह भारत में हुआ है। उन्होंने इसे देश की बढ़ती रक्षा निर्माण क्षमता और स्वदेशी तकनीक का प्रमाण बताया। मेड-इन-इंडिया C-295 विमान की सराहना अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत में निर्मित C-295 सैन्य परिवहन विमान की पहली सफल उड़ान का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश में ऐसे 40 विमानों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे एयरोस्पेस उद्योग, एमएसएमई क्षेत्र और रोजगार को नई गति मिलेगी। DRDO की मिसाइल उपलब्धि का भी जिक्र प्रधानमंत्री मोदी ने DRDO द्वारा स्वदेशी लॉन्ग-रेंज लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल (LRLACM) के सफल परीक्षण की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में DRDO और भारतीय उद्योगों ने मिलकर काम किया है, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आत्मनिर्भर भारत को मिल रही नई मजबूती प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत नहीं करता, बल्कि उद्योग, नवाचार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करता है। उन्होंने कहा कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम कर स्वदेशी उत्पादन को लगातार बढ़ा रहा है। नागरिकों के योगदान की भी सराहना प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय एकता और जनभागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति केवल सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से संभव होती है। साथ ही उन्होंने अंधविश्वास से दूर रहकर वैज्ञानिक सोच अपनाने का भी संदेश दिया। रक्षा क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक पहचान विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन, आधुनिक सैन्य तकनीक और अनुसंधान में बढ़ते निवेश से भारत की वैश्विक रक्षा क्षमता लगातार मजबूत हो रही है। इससे रक्षा निर्यात बढ़ाने और घरेलू उद्योग को प्रोत्साहन मिलने की भी संभावना है। आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण पर रहेगा फोकस सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में रक्षा उत्पादन, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को और गति देना है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि स्वदेशी तकनीक और भारतीय उद्योगों की भागीदारी से भारत रक्षा क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। स्रोत:प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) मूल रिपोर्ट:प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड और आधिकारिक सरकारी बयानों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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अमरनाथ यात्रा 2026 की तैयारियां अंतिम चरण में, सुरक्षा व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा

श्रीनगर, 28 जून। वार्षिक अमरनाथ यात्रा 2026 के शुभारंभ से पहले प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। यात्रा मार्गों, बेस कैंपों और प्रमुख पड़ावों पर सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की गई है। अधिकारियों के अनुसार तीर्थयात्रियों की सुरक्षित और सुचारु यात्रा सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा प्रबंधन लागू किया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर यात्रा के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य एजेंसियों की संयुक्त तैनाती की जा रही है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी, ड्रोन सर्विलांस और नियमित गश्त की व्यवस्था की गई है। यात्रा मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था की लगातार समीक्षा की जा रही है। स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं की तैयारी तीर्थयात्रियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए यात्रा मार्ग पर अस्थायी अस्पताल, मेडिकल कैंप, एम्बुलेंस और आपातकालीन चिकित्सा दल तैनात किए जा रहे हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन, दवाइयों और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। यात्रा मार्गों का निरीक्षण प्रशासन ने बालटाल और पहलगाम दोनों पारंपरिक मार्गों का निरीक्षण किया है। सड़क, पुल, पेयजल, बिजली, संचार और विश्राम स्थलों की तैयारियों की समीक्षा की गई है। संबंधित विभागों को सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। मौसम पर रहेगी विशेष नजर मौसम विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर यात्रा अवधि के दौरान मौसम की नियमित निगरानी की जाएगी। भारी बारिश, भूस्खलन या अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों की स्थिति में तीर्थयात्रियों को समय पर सूचना देने की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सलाह प्रशासन ने यात्रियों से केवल आधिकारिक पंजीकरण के बाद ही यात्रा करने, स्वास्थ्य प्रमाणपत्र साथ रखने और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यात्रा के दौरान पर्याप्त पानी पीने, मौसम के अनुरूप कपड़े पहनने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने की भी सलाह दी गई है। स्थानीय प्रशासन और एजेंसियों का समन्वय यात्रा को सफल बनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है। पुलिस, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, परिवहन, बिजली, जलापूर्ति और संचार विभाग संयुक्त रूप से तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष यात्रा के दौरान सुरक्षा के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधा और स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रशासन ने विश्वास जताया है कि सभी तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएंगी और यात्रा शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न होगी। स्रोत:श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB), जम्मू-कश्मीर प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियां मूल रिपोर्ट:आधिकारिक प्रशासनिक ब्रीफिंग, श्राइन बोर्ड और राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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यूरोप में रिकॉर्ड हीटवेव के बीच फ्रांस में चार दिनों में 1,000 मौतों की रिपोर्ट, स्वास्थ्य एजेंसियों ने सतर्क रहने की सलाह दी

पेरिस, 28 जून। यूरोप इन दिनों भीषण हीटवेव की चपेट में है और इसका सबसे अधिक असर फ्रांस सहित कई पश्चिमी एवं दक्षिणी यूरोपीय देशों में देखा जा रहा है। फ्रांसीसी स्वास्थ्य एजेंसियों के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, पिछले चार दिनों में अत्यधिक गर्मी से जुड़ी घटनाओं में लगभग 1,000 लोगों की मौत दर्ज की गई है। लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। कई शहरों में रिकॉर्ड तापमान फ्रांस के कई शहरों में तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया। कुछ क्षेत्रों में पारा 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। मौसम विभाग ने कई इलाकों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है तथा लोगों को दिन के समय घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है। बुजुर्ग और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी का सबसे अधिक खतरा बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को है। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और सांस संबंधी समस्याओं वाले मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। स्वास्थ्य एजेंसियों ने जारी की एडवाइजरी फ्रांस की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियों ने नागरिकों से पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने, धूप के समय बाहर निकलने से बचने और अकेले रहने वाले बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। स्थानीय प्रशासन ने कई शहरों में अस्थायी कूलिंग सेंटर भी खोले हैं। अन्य यूरोपीय देश भी प्रभावित स्पेन, इटली, पुर्तगाल, जर्मनी और बेल्जियम सहित कई अन्य यूरोपीय देशों में भी रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया जा रहा है। कई स्थानों पर जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ी हैं, जबकि बिजली की मांग में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जलवायु परिवर्तन पर फिर बढ़ी चिंता जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ रही चरम मौसम की घटनाएं जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को दर्शाती हैं। उनका मानना है कि भविष्य में ऐसी हीटवेव की आवृत्ति और तीव्रता दोनों बढ़ सकती हैं, इसलिए दीर्घकालिक अनुकूलन रणनीतियों पर तेजी से काम करने की आवश्यकता है। सरकार ने निगरानी बढ़ाई फ्रांस सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं, आपातकालीन सहायता और स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर रखा है। प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमों की संख्या बढ़ाई गई है और लगातार स्थिति की समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से केवल आधिकारिक मौसम और स्वास्थ्य संबंधी सलाह का पालन करने की अपील की है। विशेषज्ञों की सलाह डॉक्टरों का कहना है कि तेज धूप के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना, नियमित रूप से पानी पीना, कैफीन और शराब का सीमित सेवन करना तथा शरीर में गर्मी बढ़ने के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है। हीटवेव के दौरान थोड़ी-सी लापरवाही भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकती है। स्रोत:फ्रांस स्वास्थ्य मंत्रालय, यूरोपीय मौसम एजेंसियां मूल रिपोर्ट:फ्रांस सरकार, यूरोपीय स्वास्थ्य एजेंसियों एवं अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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