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रुपये को संभालने के लिए RBI की रणनीति में बदलाव, डॉलर की बिक्री के साथ ब्याज दरों पर भी जोर

मुंबई, 17 अक्टूबर 2026: भारतीय रुपये पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब केवल डॉलर की बिक्री और विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप पर निर्भर नहीं दिख रहा है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक परिस्थितियों को सावधानीपूर्वक सख्त करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसमें ब्याज दरों में बढ़ोतरी, बाजार में उपलब्ध नकदी कम करना और बॉन्ड की बिक्री जैसे उपाय शामिल हैं। इसका उद्देश्य महंगाई पर नियंत्रण के साथ-साथ पूंजी के बाहर जाने और रुपये की कमजोरी को सीमित करना है।

चार साल बाद बढ़ाई गई ब्याज दर

अक्टूबर में RBI ने नीतिगत ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की। यह चार साल में पहली दर वृद्धि बताई गई है। इसके अलावा, बैंकिंग प्रणाली में उपलब्ध नकदी कम करने के लिए बॉन्ड बिक्री और रिजर्व से जुड़े उपाय भी अपनाए गए हैं। इन कदमों से वित्तीय परिस्थितियों को सख्त करने और रुपये को समर्थन देने की कोशिश की जा रही है।

2026 में करीब 6% कमजोर हुआ रुपया

इस साल भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 6% कमजोर हुआ है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी और डॉलर की बढ़ती मांग ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है। हालांकि, RBI के हालिया कदमों के बाद रुपया अपने निचले स्तर से करीब 2% उबरने में कामयाब रहा है।

केवल डॉलर बेचने से नहीं बनेगी बात?

रुपये की गिरावट को थामने के लिए RBI विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ाता रहा है। हालांकि, लगातार हस्तक्षेप से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ सकता है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल विभिन्न विदेशी मुद्रा उपायों के तहत RBI करीब 150 अरब डॉलर तक का इस्तेमाल कर चुका है।

ऐसे में ब्याज दरों और नकदी प्रबंधन से जुड़े उपाय रुपये को समर्थन देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं।

दिसंबर में फिर बढ़ सकती हैं ब्याज दरें?

सितंबर में महंगाई दर 5.54% तक पहुंचने के बाद दिसंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी को लेकर बाजार में चर्चा तेज हुई है। कुछ विश्लेषक 50 बेसिस पॉइंट तक की सख्ती की संभावना जता रहे हैं। हालांकि, RBI ने दिसंबर में ऐसी किसी बढ़ोतरी की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से निकाले 33 अरब डॉलर

रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से करीब 33 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। घरेलू ब्याज दरें और यील्ड बढ़ने से रुपये में निवेश की आकर्षकता बढ़ सकती है। इससे पूंजी की निकासी पर अंकुश लगाने में मदद मिलने की संभावना है, हालांकि निवेशकों के फैसले वैश्विक परिस्थितियों और बाजार की धारणा पर भी निर्भर करेंगे।

ज्यादा सख्ती से अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर

ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी रुपये को सहारा दे सकती है, लेकिन इसके साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं। कर्ज महंगा होने से कारोबार, आवास ऋण लेने वालों और छोटे कर्जदारों पर दबाव बढ़ सकता है। इससे आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है।

इसी वजह से RBI के सामने रुपये को स्थिर रखने, महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने और आर्थिक विकास को समर्थन देने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक फिलहाल 2013 जैसी अचानक और तीखी आपातकालीन सख्ती के बजाय सावधानीपूर्वक कदम उठाने की रणनीति अपनाता दिख रहा है।

स्रोत: Reuters

जय राष्ट्र न्यूज़

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