जयराष्ट्र न्यूज़ विशेष रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश पुलिस ने 10 महीने पहले दफनाए गए कंकाल को खोदा, सामने आया प्रेम संबंध का खौफनाक अपराध!

नमस्कार, जयराष्ट्र न्यूज़ के दर्शकों!आज हम आपको ले चलते हैं उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के तिकवापुर गांव में, जहां एक ऐसी घटना घटी है जिसने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। रात के करीब 11 बजे, जब पूरा कानपुर सोने की तैयारी में था, तब पुलिस की एक टीम ने ठंडी हवाओं और टॉर्च की रोशनी में जमीन खोदना शुरू किया। सात फीट गहरे गड्ढे में दफन था एक कंकाल, जो लगभग 10 महीने पुराना था। यह कंकाल किसी साधारण व्यक्ति का नहीं, बल्कि 45 वर्षीय रेशमा का था – एक मां, जो सात बच्चों की मां थी। पुलिस ने इस खौफनाक खोज के साथ एक दिल दहला देने वाले प्रेम संबंध और विश्वासघात की कहानी उजागर कर दी है। घटना की शुरुआत: एक विधवा मां का प्रेम प्रसंग रेशमा का पति रामबाबू संखवार तीन साल पहले ही गुजर चुके थे। उसके बाद रेशमा ने अपने गांव के पड़ोसी गोरेलाल से प्रेम संबंध बना लिया। गोरेलाल और रेशमा का रिश्ता काफी गहरा हो गया था। शुरुआत में दोनों के बीच प्यार और लगाव था, लेकिन समय के साथ रिश्ते में दरार आने लगी। पुलिस जांच में पता चला कि अप्रैल 2025 के आसपास दोनों के बीच गंभीर विवाद हुआ। रेशमा गोरेलाल के साथ पूरे तौर पर रहना चाहती थीं, जबकि गोरेलाल इस रिश्ते से पीछा छुड़ाना चाहता था। रेशमा बार-बार जिद करतीं, फोन पर बातें करतीं, मिलने की मांग करतीं, लेकिन गोरेलाल अब इस संबंध से परेशान हो चुका था। 10 महीने का गायब होना और बेटे की शंका रेशमा अप्रैल 2025 में अचानक गायब हो गईं। उनके सात बच्चों में सबसे बड़ा बेटा बबलू था, जो मां की तलाश में परेशान था। बबलू ने गांव में पूछताछ शुरू की और जब गोरेलाल से मां के बारे में पूछा, तो गोरेलाल ने ठंडे लहजे में जवाब दिया – “तुम्हारी मां अब वापस नहीं आएगी।” बबलू को शुरू में लगा कि शायद गोरेलाल मजाक कर रहा है, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते गए, उसकी शंका बढ़ती गई। रेशमा का फोन बंद था, कोई पता नहीं चल रहा था। आखिरकार, बबलू ने पुलिस से शिकायत की और मामला बिधनू थाने पहुंचा। पुलिस की तहकीकात और आरोपी का कबूलनामा पुलिस ने गोरेलाल को हिरासत में लिया और उससे गहन पूछताछ की। शुरू में गोरेलाल ने कुछ नहीं बोला, लेकिन सबूतों के दबाव में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि एक झगड़े के दौरान उसने गुस्से में रेशमा का गला घोंट दिया और उसे मार डाला। हत्या के बाद वह घबरा गया। उसने रेशमा की लाश को गांव में ही एक टावर के पास ले जाकर सात फीट गहरा गड्ढा खोदा और उसे दफना दिया। कंकाल को बैठी हुई स्थिति में दफनाया गया था, जो हत्या की क्रूरता को और भी उजागर करता है। पुलिस की टीम ने गोरेलाल की निशानदेही पर रात के अंधेरे में खुदाई शुरू की। पुलिस वाहनों की लाइटें और ग्रामीणों की टॉर्चों की रोशनी में जमीन खोदी गई। करीब 10 महीने बाद रेशमा का कंकाल बरामद हुआ। फॉरेंसिक टीम ने इसे जांच के लिए भेज दिया है, लेकिन हड्डियों की स्थिति से स्पष्ट है कि मौत गला घोंटने से हुई थी। परिवार का दर्द और गांव में हड़कंप रेशमा के सात बच्चे अब अनाथ हो चुके हैं। सबसे बड़ा बबलू अपने भाई-बहनों की जिम्मेदारी उठा रहा है। गांव वाले इस घटना से स्तब्ध हैं। एक तरफ जहां रिश्तों में विश्वासघात की बात हो रही है, वहीं दूसरी तरफ सात मासूम बच्चों का भविष्य अंधकार में डूब गया है। ग्रामीणों का कहना है कि रेशमा एक मेहनती महिला थीं, जो अपने बच्चों के लिए दिन-रात काम करती थीं। गोरेलाल के साथ संबंध बनाने के बाद भी वह परिवार की देखभाल करती थीं। यह मामला प्रेम, जुनून, घृणा और विश्वासघात की एक ऐसी कहानी है जो समाज के सामने कई सवाल खड़े करती है। क्या प्रेम इतना अंधा हो सकता है कि इंसान किसी की जान ले ले? क्या परिवार और समाज ऐसे संबंधों पर पहले से नजर नहीं रखता? उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले को सुलझाकर एक बड़ा अपराध उजागर किया है। पुलिस अधिकारी का बयान बिधनू थाने के पुलिस अधिकारी ने बताया, “यह एक बेहद संवेदनशील और क्रूर मामला था। आरोपी गोरेलाल ने हत्या के बाद लाश को दफनाकर सबूत मिटाने की कोशिश की थी, लेकिन बेटे की लगातार तलाश और पुलिस की सतर्क जांच से सच सामने आ गया। हमने आरोपी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। जांच जारी है और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है।” समाज के लिए सबक यह घटना हमें याद दिलाती है कि रिश्ते कितने भी गहरे क्यों न हों, लेकिन जब उनमें जबरदस्ती या जुनून शामिल हो जाए, तो वे खतरनाक हो सकते हैं। सात बच्चों की मां का यह दर्दनाक अंत हर किसी को सोचने पर मजबूर करता है। जयराष्ट्र न्यूज़ आपके लिए ऐसी हर खबर लाता रहेगा जो समाज को जागरूक करे और न्याय सुनिश्चित करे। अगर आपके पास कोई जानकारी है या आप इस मामले पर अपनी राय देना चाहते हैं, तो हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। जयराष्ट्र न्यूज़ के साथ बने रहिए, क्योंकि हम सच को सामने लाते हैं, चाहे वह कितना भी खौफनाक क्यों न हो। जय हिंद! जयराष्ट्र न्यूज़।

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फरीदाबाद गैंगरेप पीड़िता एक सप्ताह बाद अस्पताल से डिस्चार्ज, घर लौटीं: न्याय की उम्मीद में परिवार

जय राष्ट्र न्यूज रिपोर्टरद्वारा: विशेष संवाददातादिनांक: 07 जनवरी, 2026फरीदाबाद, हरियाणा: फरीदाबाद में हुए दिल दहला देने वाले गैंगरेप मामले में पीड़िता को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। एक सप्ताह तक अस्पताल में इलाज कराने के बाद वह अब घर लौट आई हैं। यह घटना दिसंबर 30, 2025 को हुई थी, जब दो आरोपियों ने एक 25 वर्षीय महिला को लिफ्ट देने के बहाने अपनी गाड़ी में बिठाया, उसका गैंगरेप किया और फिर चलती गाड़ी से फेंक दिया। पीड़िता तीन बच्चों की मां हैं और इस घटना ने पूरे देश में महिला सुरक्षा पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना का पूरा विवरण यह दर्दनाक घटना फरीदाबाद के मेट्रो चौक के पास शुरू हुई। पीड़िता अपने पति से झगड़े के बाद मायके में रह रही थीं। घटना वाले दिन, वह अपनी मां से बहस के बाद घर से निकलीं और सेक्टर 23 में एक दोस्त के घर गईं। देर रात होने पर वह घर लौटने के लिए सार्वजनिक परिवहन की तलाश में थीं, लेकिन कोई बस या ऑटो नहीं मिला। ठंड और कोहरे के कारण सड़कें सूनी थीं। तभी एक सफेद मारुति सुजुकी ईको वैन (जो कुछ रिपोर्ट्स में एम्बुलेंस के रूप में बताई गई है) में सवार दो युवकों ने उन्हें लिफ्ट ऑफर की। पीड़िता ने सोचा कि यह सुरक्षित होगा, लेकिन यह उनकी सबसे बड़ी गलती साबित हुई। आरोपी उन्हें गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड पर एक सुनसान जगह ले गए, जहां उन्होंने बारी-बारी से लगभग 2-3 घंटे तक उनका गैंगरेप किया। एक आरोपी अंदर अपराध कर रहा था, जबकि दूसरा बाहर पहरा दे रहा था। अपराध के बाद, उन्होंने पीड़िता को राजा चौक के पास संजय गांधी मेमोरियल नगर में 90 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलती गाड़ी से फेंक दिया। गिरने से पीड़िता को गंभीर चोटें आईं और वह खून से लथपथ हो गईं। कोहरे के कारण कोई मदद नहीं मिली, लेकिन उन्होंने किसी तरह अपनी बहन को फोन किया। बहन ने उन्हें उठाया और पहले बादशाह खान सिविल अस्पताल ले गईं, जहां से गंभीर हालत देखते हुए उन्हें फरीदाबाद के एक प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट किया गया। पीड़िता की चोटें और अस्पताल में इलाज डॉक्टरों के अनुसार, पीड़िता की हालत बेहद गंभीर थी। उनकी दाहिनी आंख की सॉकेट फ्रैक्चर हो गई थी, कंधा फ्रैक्चर और डिस्लोकेट हो गया था। चेहरे पर दो गहरे कट लगे थे, जिनमें 20 से ज्यादा टांके लगाए गए। सूजन और खून बहने के कारण वह आईसीयू में भर्ती रहीं। इलाज करने वाले डॉक्टर अमित यादव ने बताया कि चोटें अपराध के दौरान विरोध करने और गाड़ी से फेंके जाने से लगीं। कंधे की सर्जरी की योजना थी, लेकिन पीड़िता की हालत स्थिर होने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। अस्पताल में एक सप्ताह तक रहने के दौरान पीड़िता का परिवार उनके साथ था। बहन ने मीडिया को बताया कि यह घटना उनके परिवार के लिए सदमा थी, लेकिन पीड़िता की हिम्मत ने उन्हें मजबूती दी। डॉक्टरों ने कहा कि पीड़िता अब खतरे से बाहर हैं, लेकिन पूरी तरह ठीक होने में समय लगेगा। मानसिक सदमे से उबरने के लिए काउंसलिंग की सलाह दी गई है। अस्पताल से डिस्चार्ज और घर वापसी 7 जनवरी, 2026 को पीड़िता को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया, जो घटना के ठीक एक सप्ताह बाद था। घर लौटने पर परिवार ने राहत की सांस ली। हालांकि, सुरक्षा के कारण उनका घर बदल दिया गया है और पुलिस सुरक्षा प्रदान कर रही है। पीड़िता की बहन ने कहा, “वह अब घर पर हैं, लेकिन डर अभी भी है। हम न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।” यह घर वापसी पीड़िता के लिए नई शुरुआत है, लेकिन न्याय की लड़ाई अभी बाकी है। आरोपियों की पहचान और पुलिस कार्रवाई डिस्चार्ज होने के अगले दिन, 8 जनवरी को पीड़िता ने टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड में दोनों आरोपियों को पहचान लिया। परेड ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हुई। आरोपी उत्तर प्रदेश के मथुरा और झांसी के रहने वाले हैं, जो एक प्राइवेट अस्पताल की एम्बुलेंस में ड्राइवर और हेल्पर के रूप में काम करते थे। पुलिस ने उन्हें घटना के दिन ही गिरफ्तार कर लिया था और कोर्ट में पेश कर ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया। कोतवाली पुलिस स्टेशन में गैंगरेप, हमला और अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस पीआरओ यशपाल यादव ने कहा कि गाड़ी बरामद कर ली गई है और फॉरेंसिक सैंपल लिए गए हैं। आरोपियों के ब्लड सैंपल से नशे की जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज से भी सबूत मिले हैं। पुलिस जल्द चार्जशीट दाखिल करने की योजना बना रही है। महिला सुरक्षा पर बड़ा सवाल यह घटना भारत में महिलाओं की सुरक्षा पर फिर से सवाल उठाती है। हरियाणा जैसे राज्य में जहां महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर ऊंची है, ऐसी घटनाएं आम हो गई हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, 2024 में भारत में 31,000 से ज्यादा रेप केस दर्ज हुए, जिनमें से कई गैंगरेप थे। निर्भया मामले के बाद 2013 में कानून सख्त किए गए, जिसमें गैंगरेप के लिए उम्रकैद या मौत की सजा का प्रावधान है। लेकिन अमल में कमी दिखती है। महिला अधिकार कार्यकर्ता सुनीता शर्मा कहती हैं, “ऐसी घटनाओं में पीड़िता को न्याय मिलना चाहिए, लेकिन समाज का रवैया बदलना जरूरी है। पुलिस को रात में गश्त बढ़ानी चाहिए और महिलाओं के लिए सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करना चाहिए।” फरीदाबाद में इस घटना के खिलाफ प्रदर्शन हुए, जहां लोग न्याय की मांग कर रहे हैं। परिवार की प्रतिक्रिया और समाज का समर्थन पीड़िता का परिवार अब न्याय की लड़ाई लड़ रहा है। बहन ने बताया कि घटना के बाद पूरे परिवार को सदमा लगा, लेकिन पीड़िता की हिम्मत ने उन्हें संभाला। “वह बच्चों के लिए जीना चाहती हैं,” बहन ने कहा। स्थानीय एनजीओ ने पीड़िता को कानूनी और आर्थिक मदद देने का वादा किया है। सोशल मीडिया पर #JusticeForFaridabadVictim ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग समर्थन जता रहे हैं। निष्कर्ष: न्याय की राह फरीदाबाद गैंगरेप पीड़िता की घर वापसी एक सकारात्मक कदम है, लेकिन यह अंत नहीं है। न्यायपालिका पर अब दबाव है कि आरोपियों को सख्त सजा मिले। यह घटना हमें याद दिलाती है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम… Read More

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दिल्ली: 14 साल की दिव्या ने कराटे की ताकत से चेन स्नैचर को दौड़ाकर पकड़ा, मां को धक्का देकर भाग रहा था चोर

14 साल की दिव्या ने कराटे की ताकत से चेन स्नैचर को दौड़ाकर पकड़ा

नई दिल्ली, 01 जनवरी 2026: दिल्ली के उत्तम नगर में एक 14 साल की लड़की ने अपनी बहादुरी और कराटे की ट्रेनिंग से सभी को चौंका दिया। उसने अपनी मां से चेन छीनकर उन्हें धक्का देने वाले चोर का करीब आधा किलोमीटर तक पीछा किया और आखिरकार उसे पकड़कर गिरा दिया। यह घटना उत्तम नगर के ओम विहार फेज-5 इलाके में हुई। केरल मूल की साठी अपनी बेटी दिव्या के साथ ट्यूशन से घर लौट रही थीं। रात लगभग 8 बजे घर के पास पहुंचते ही एक व्यक्ति ने साठी को धक्का देकर उनकी सोने की चेन छीन ली और तेजी से भागने लगा। चेन में लगा लॉकेट करीब एक सोवरिन का था। दिव्या ने बिल्कुल भी घबराए बिना तुरंत चोर का पीछा शुरू कर दिया। व्यस्त सड़क पर वाहनों के बीच दौड़ते हुए उसने करीब आधा किलोमीटर तक चोर को खदेड़ा। फिर अपनी पांच साल की कराटे ट्रेनिंग का इस्तेमाल कर उसे पकड़ लिया और जमीन पर पटक दिया। आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन चेन वापस मिल जाने के कारण साठी ने चोर के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराई। हालांकि चेन का लॉकेट गायब था। दिव्या नवादा स्थित पंजाजन्यम भारतम कल्चरल सेंटर में शीलू जोसेफ से कराटे सीख रही हैं। वह विकसित पुरी के केरल स्कूल में कक्षा 9 की छात्रा हैं। मां साठी ने कहा, “चेन से ज्यादा बेटी की सुरक्षा की चिंता थी।” यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि लड़कियों के लिए सेल्फ-डिफेंस ट्रेनिंग कितनी जरूरी है। दिव्या की बहादुरी की सोशल मीडिया पर खूब प्रशंसा हो रही है। (जय राष्ट्र न्यूज़ ब्यूरो)

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‘चीनी’ कहकर पुकारा, भारतीय होने का प्रमाण मांगा: सिर्फ दिखने में अलग होने की कीमत चुकानी पड़ी एंजेल चकमा को – यह खबर नहीं, राष्ट्रीय शर्म है

जयराष्ट्र न्यूज, देहरादून/अगरतला, 31 दिसंबर 2025 एक युवा की जिंदगी सिर्फ इसलिए छीन ली गई क्योंकि वह ‘दिखने में अलग’ था। त्रिपुरा के 24 वर्षीय एमबीए छात्र एंजेल चकमा को देहरादून में 9 दिसंबर को कुछ नशे में धुत युवकों ने ‘चीनी’, ‘चिंकी’ और ‘मोमो’ जैसे नस्लीय अपमानजनक शब्दों से पुकारा। जब एंजेल और उनके छोटे भाई माइकल ने इसका विरोध किया और कहा कि “हम भारतीय हैं, हम चीनी नहीं हैं”, तो बात हिंसा पर उतर आई। एंजेल को चाकू से कई बार वार किया गया – गर्दन, पीठ और पेट पर। 17 दिनों तक जीवन के लिए संघर्ष करने के बाद 26 दिसंबर को उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया। यह कोई साधारण झगड़ा नहीं था। यह नस्लवाद की उस गहरी जड़ का प्रमाण है जो उत्तर-पूर्वी भारतीयों को ‘अन्य’ मानकर उन्हें रोजाना अपमान और खतरे का शिकार बनाती है। एंजेल के आखिरी शब्द थे – “हम भारतीय हैं। हमें कौन सा प्रमाण-पत्र दिखाना पड़ेगा?” यह सवाल आज पूरे देश से पूछा जा रहा है। क्या उत्तर-पूर्व के लोग भारतीय होने का प्रमाण रोजाना देना पड़ेंगे? घटना देहरादून के सेलाकुई इलाके में हुई, जब अंजेल और माइकल किराने की दुकान से सामान खरीद रहे थे। आरोपी छह युवक एक बच्चे के जन्मदिन का जश्न मना रहे थे। हंसते-बोलते उन्होंने भाइयों पर नस्लीय टिप्पणियां कीं। विरोध करने पर हमला हुआ। माइकल के सिर पर लोहे की कड़ा से वार किया गया, जबकि एंजेल पर फल के ठेले से चाकू उठाकर वार किए गए। हमले के बाद आरोपी शराब खरीदकर पार्टी करते रहे। एंजेल के पिता तरुण प्रसाद चकमा बीएसएफ के हेड कांस्टेबल हैं। वे मणिपुर में तैनात हैं। परिवार का कहना है कि पुलिस ने शुरू में एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया, इसे ‘छोटी बात’ बताया। दबाव के बाद 12 दिसंबर को केस दर्ज हुआ। अब तक पांच आरोपी गिरफ्तार हैं, दो नाबालिग सुधार गृह में हैं। मुख्य आरोपी यज्ञ अवस्थी नेपाल भाग गया है, पुलिस टीम वहां भेजी गई है। यह घटना कोई अकेली नहीं है। उत्तर-पूर्व के लोग दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई जैसे शहरों में रोजाना ऐसे अपमान झेलते हैं। कोविड काल में उन्हें ‘कोरोना वाहक’ कहा गया। निडो तनियम की 2014 में हत्या के बाद बेजबरुआ कमिटी बनी, लेकिन सिफारिशें धूल फांक रही हैं। अब फिर मांग उठ रही है – नस्लवाद विरोधी कानून की। त्रिपुरा में गुस्सा फूट पड़ा है। छात्र संगठन सड़कों पर हैं। मेघालय के सीएम कोनराड संगमा, नागालैंड के मंत्री टेमजेन इमना अलॉंग और अन्य नेताओं ने इसे ‘अस्वीकार्य’ बताया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल केंद्र से कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। एंजेल प्लेसमेंट पा चुके थे। वे पिता को वीआरएस लेने को कह रहे थे ताकि परिवार की जिम्मेदारी उठा सकें। लेकिन एक नस्लीय हमले ने सब छीन लिया। यह खबर नहीं है। यह राष्ट्रीय शर्म है। हम रोजाना ऐसे हमलों को होने देते हैं। कब तक उत्तर-पूर्व के लोग ‘भारतीय’ साबित करते रहेंगे? कब तक हम चुप रहेंगे? जयराष्ट्र न्यूज की अपील: नस्लवाद के खिलाफ आवाज उठाएं। एंजेल चकमा को न्याय दो। उत्तर-पूर्व भारत का अभिन्न अंग है – उन्हें ‘चीनी’ कहना बंद करो।

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जय राष्ट्र न्यूज़ स्पेशल: ‘धुरंधर’ का 26/11 सीन – रोंगटे खड़े कर देने वाला सच, सर्वाइवर का दिल दहला!

रणवीर सिंह अभिनीत फिल्म धुरंधर (5 दिसंबर 2025 को रिलीज) ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया है। 400 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर चुकी इस धुरंधर स्पाई थ्रिलर के एक सीन ने पूरे देश को झकझोर दिया है – वो रेड स्क्रीन वाला 26/11 मुंबई आतंकी हमले का दृश्य! फिल्म में स्क्रीन खून-लाल हो जाती है और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों व पाकिस्तानी हैंडलर्स की असली इंटरसेप्टेड वॉइस रिकॉर्डिंग्स बजने लगती हैं। हैंडलर्स ठंडे खून से निर्देश देते हैं – बंधकों को बेरहमी से मारो, ज्यादा से ज्यादा तबाही मचाओ। ये वो कड़वा सच है जो 2008 की उस भयानक रात को फिर से जिंदा कर देता है। सिनेमाघरों में सन्नाटा छा जाता है, दर्शक गुस्से, दर्द और बेबसी से भर जाते हैं। ताज होटल सर्वाइवर रजिता बग्गा का इमोशनल रिएक्शन: 26/11 की रात ताज होटल में अपने पति अजय बग्गा के साथ फंसी रहीं रजिता (श्री श्री यूनिवर्सिटी की प्रेसिडेंट) ने एक्स पर लिखा, “मेरे लिए सबसे बोने-चिलिंग सीन रेड स्क्रीन वाला था। 17 साल बीत गए, लेकिन हैंडलर्स की आवाजें सुनकर शरीर में सिहरन दौड़ गई। कितना क्रूर, अमानवीय और घिनौना! धुरंधर टीम को सलाम, जिन्होंने 2-3 मिनट में नई पीढ़ी को 26/11 का पूरा सच बता दिया। रणवीर का वो लुक पूरी जनरेशन को सताएगा।” निर्देशक आदित्य धर ने जवाब दिया, “आपके शब्द याद दिलाते हैं कि ये कहानी क्यों बतानी जरूरी थी। ये सीन सच्चाई दिखाने के लिए बनाया गया। अगर ये निशान छोड़ता है, तो एकजुट होकर ऐसी अंधेरी रात कभी न लौटे। सर्वाइव करने, बोलने के लिए धन्यवाद।” अर्जुन रामपाल व टीम का खुलासा: अर्जुन (मेजर इकबाल) ने इसे करियर का सबसे मुश्किल सीन बताया। सेट पर 45 मिनट की रियल रिकॉर्डिंग सुनकर रणवीर, अक्षय खन्ना, सबकी आंखें नम हो गईं। रणवीर का किरदार हमजा (RAW एजेंट) पाकिस्तान में घुसा है, 26/11 देखकर अंदर से टूट जाता है – आंखों में दर्द, गुस्सा, बेबसी। एक्टर दानिश पंडोर बोले, “ये सीन आम आदमी को सोचने पर मजबूर कर देता है – अगर आप वहां होते तो?” क्यों खास है ये सीन? कंधार हाईजैक, संसद हमला से प्रेरित फिल्म में 26/11 को रियल ऑडियो से जोड़ा गया। दर्शक X पर लिख रहे – “रोंगटे खड़े हो गए”, “गुस्सा आ गया”, “नई जनरेशन को याद दिलाया”। कुछ नेगेटिव कैंपेन भी चले, लेकिन सच ने जीत ली। जय राष्ट्र न्यूज़ अपील: ऐसी फिल्में राष्ट्रहित में हैं। धुरंधर देखें, शेयर करें। भारत माता की जय!

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बिहार सीएम नीतीश कुमार हिजाब विवाद

बिहार सीएम नीतीश कुमार हिजाब विवाद: पटना कार्यक्रम में मुस्लिम महिला डॉक्टर का नकाब हटाने पर भारी बवाल

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। पटना में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार ने नव नियुक्त आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन का हिजाब (नकाब) खींच दिया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस घटना ने देशभर में आक्रोश पैदा कर दिया है और महिलाओं की गरिमा तथा धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। नीतीश कुमार हिजाब घटना के विवरण यह घटना 15 दिसंबर 2025 को पटना के मुख्यमंत्री सचिवालय ‘संवाद’ में हुई, जहां 1,283 से अधिक आयुष डॉक्टरों (आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी) को नियुक्ति पत्र वितरित किए जा रहे थे। मंच पर डॉक्टर नुसरत परवीन नियुक्ति पत्र लेने आईं, जो चेहरे पर नकाब पहने हुई थीं। वीडियो में दिख रहा है कि नीतीश कुमार ने पहले पत्र सौंपा, फिर नकाब की ओर इशारा करते हुए “ये क्या है?” कहा और खुद इसे नीचे खींच दिया। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन कुछ अधिकारी हंसते नजर आए। डॉक्टर नुसरत इस घटना से इतनी आहत हुईं कि उन्होंने बिहार छोड़ दिया और कोलकाता अपने परिवार के पास चली गईं। उनके परिवार ने कहा कि वे अब सरकारी नौकरी जॉइन नहीं करेंगी। यह घटना महिलाओं की निजता, सहमति और धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन मानी जा रही है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और बिहार मुख्यमंत्री विवाद विपक्षी दलों ने नीतीश कुमार की कड़ी निंदा की है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने वीडियो शेयर कर पूछा, “नीतीश जी को क्या हो गया? उनकी मानसिक स्थिति अब दयनीय हो गई है या नीतीश बाबू अब 100% संघी हो गए?” कांग्रेस ने इसे “घृणित कृत्य” बताते हुए नीतीश का तत्काल इस्तीफा मांगा। कश्मीर की पार्टियों ने भी निंदा की। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि नीतीश को पद छोड़ देना चाहिए। उमर अब्दुल्लाह ने इसे गलत बताया। पूर्व अभिनेत्री जायरा वसीम ने बिना शर्त माफी की मांग की। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे महिला की गरिमा पर हमला बताया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने इसे “शर्मनाक” कहा। जावेद अख्तर ने भी नीतीश से माफी मांगने को कहा। नीतीश की पार्टी जदयू और सहयोगी भाजपा का बचाव: अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान ने कहा कि नीतीश ने “पिता जैसा स्नेह” दिखाया, ताकि अल्पसंख्यक समुदाय की बेटी की सफलता दुनिया देखे। सोशल मीडिया बैकलैश और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश है। कई सेलेब्रिटी और एक्टिविस्ट्स ने इसे महिलाओं की गरिमा पर हमला बताया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान और मानवाधिकार संगठनों ने निंदा की। कुछ जगहों पर प्रदर्शन भी हुए। नीतीश कुमार और भाजपा गठबंधन का राजनीतिक संदर्भ नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से अधिकतर बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भाजपा के प्रमुख सहयोगी हैं। हालिया विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत हुई। बिहार में 18% मुस्लिम आबादी है, इसलिए ऐसे मुद्दे संवेदनशील हैं। भाजपा का हिजाब पर पहले से विवादित रुख रहा है, जैसे कर्नाटक में बैन। फिलहाल नीतीश कुमार ने कोई माफी या बयान नहीं दिया है। जांच और प्रतिक्रियाएं जारी हैं। यह नीतीश कुमार मुस्लिम महिला डॉक्टर नकाब घटना भारत में धार्मिक पोशाक और महिलाओं के अधिकारों पर चल रही बहस को और गहरा कर रही है। जय राष्ट्र न्यूज पर इस विकासशील कहानी और अन्य ट्रेंडिंग भारतीय समाचारों के लिए बने रहें।

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कर्नाटक तट पर सीगल पक्षी पर मिला चीनी GPS ट्रैकर: जासूसी की आशंका, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

कर्नाटक तट पर सीगल पक्षी पर मिला चीनी GPS ट्रैकर भारत में सुरक्षा को लेकर एक नई चिंता सामने आई है। कर्नाटक के कारवार तट पर एक सीगल पक्षी पकड़ा गया, जिसकी पीठ पर हाई-टेक चीनी GPS ट्रैकर लगा हुआ मिला। यह घटना दिसंबर 2025 में सामने आई है और इससे जासूसी की आशंका गहरा गई है। सुरक्षा एजेंसियां इस मामले की गहन जांच कर रही हैं। चीनी GPS ट्रैकर वाली सीगल की घटना के विवरण यह सीगल पक्षी कारवार क्षेत्र में पकड़ा गया। पक्षी पर लगा ट्रैकर अत्याधुनिक तकनीक वाला है, जो चीन से जुड़ा बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे ट्रैकर पक्षियों के माध्यम से सीमा क्षेत्रों की निगरानी या डेटा संग्रह के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। यह पहली बार नहीं है जब भारत में चीनी जासूसी उपकरणों की खबरें आई हैं, लेकिन पक्षी पर ट्रैकर मिलना एक नया और चौंकाने वाला मामला है।यह घटना भारत-चीन सीमा तनाव और समुद्री क्षेत्रों में निगरानी के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। भारतीय नौसेना और खुफिया एजेंसियां पहले से ही दक्षिण चीन सागर और भारतीय महासागर में चीनी गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया और जांच भारतीय खुफिया एजेंसियों ने तुरंत इस ट्रैकर को जब्त कर लिया है और इसकी तकनीकी जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञ यह पता लगा रहे हैं कि यह ट्रैकर कितने समय से सक्रिय था और क्या कोई संवेदनशील डेटा भेजा गया। केंद्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और संबंधित मंत्रालयों को अलर्ट जारी किया गया है।पिछले कुछ वर्षों में भारत में चीनी ड्रोनों और जासूसी उपकरणों की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे सीमा सुरक्षा को और मजबूत किया गया है। यह घटना भी उसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है। सामाजिक मीडिया और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस खबर के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा हो रही है। कई यूजर्स ने इसे चीनी जासूसी का सबूत बताया, जबकि कुछ ने पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के मुद्दे को भी उठाया। विपक्षी दलों ने सरकार से संसद में इस पर स्पष्टीकरण मांगा है।सरकार की ओर से कहा गया है कि भारत की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत है और किसी भी खतरे से निपटने के लिए तैयार है। भारत-चीन संबंधों का संदर्भ यह घटना ऐसे समय में आई है जब भारत और चीन के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध सामान्य की दिशा में हैं, लेकिन सीमा विवाद और सुरक्षा मुद्दे अभी भी बने हुए हैं। 2025 में दोनों देशों के बीच कई उच्चस्तरीय बैठकें हुई हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।कर्नाटक तट भारतीय नौसेना के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, जहां कई आधार हैं। इस घटना से समुद्री सुरक्षा पर फिर से बहस छिड़ गई है।फिलहाल, जांच जारी है और जल्द ही अधिक जानकारी सामने आएगी। जय राष्ट्र न्यूज इस घटना पर नजर बनाए हुए है और आगे के अपडेट्स लाता रहेगा।यह चीनी GPS ट्रैकर सीगल पक्षी मामला भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। अन्य ट्रेंडिंग भारतीय समाचारों के लिए जय राष्ट्र न्यूज पर बने रहें।

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रहमान डकैत: कराची के ल्यारी इलाके का क्रूर अपराधी साम्राज्य

परिचयसर्दार अब्दुल रहमान बलोच, जिन्हें दुनिया रहमान डकैत के नाम से जानती है, पाकिस्तान के सबसे कुख्यात गैंगस्टरों में से एक थे। 1975 में कराची के ल्यारी इलाके में जन्मे रहमान ने अपराध की दुनिया में कम उम्र से ही कदम रखा और जल्द ही ल्यारी को अपने खौफनाक साम्राज्य का केंद्र बना लिया। ल्यारी, जो कराची का एक घनी आबादी वाला बलोच बहुल इलाका है, गरीबी, बेरोजगारी और राज्य की लापरवाही के कारण अपराध का गढ़ बन चुका था। रहमान ने यहां के गैंग वॉर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, जहां हत्याएं, जबरन वसूली और ड्रग तस्करी आम बात हो गई। उनकी कहानी न केवल हिंसा की है, बल्कि राजनीतिक संरक्षण और जनता के बीच एक छवि बनाने की भी है। हाल ही में बॉलीवुड फिल्म ‘धुरंधर’ में अक्षय खन्ना द्वारा निभाए गए उनके किरदार ने दुनिया भर में उनकी क्रूरता को फिर से चर्चा में ला दिया है। View this post on Instagram A post shared by Ranveer Singh (@ranveersingh) प्रारंभिक जीवन और अपराध में प्रवेशरहमान का जन्म 1975 में ल्यारी में एक अपराधी परिवार में हुआ। उनके पिता अबू मुहम्मद (जिन्हें दादल के नाम से भी जाना जाता था) और चाचा शेरू 1964 से ड्रग तस्करी में लिप्त थे। परिवार की इस पृष्ठभूमि ने रहमान को बचपन से ही अपराध की दुनिया से जोड़ दिया। मात्र 13 साल की उम्र में उन्होंने अपनी पहली हिंसक घटना को अंजाम दिया, जब उन्होंने किसी व्यक्ति को चाकू मार दिया। किशोरावस्था में ही वे ड्रग्स बेचने लगे और ल्यारी की गलियों में अपनी पहचान बनाने लगे। उनके पिता की हत्या के बाद परिवार का बदला लेने की आग ने रहमान को और उग्र बना दिया। 1990 के दशक में अरशद पप्पू के पिता द्वारा उनके पिता की हत्या और कब्र की बेइज्जती ने एक लंबे गैंग वॉर को जन्म दिया, जो वर्षों तक चला। 19 साल की उम्र में रहमान ने एक ऐसी घटना की, जो उनकी क्रूरता का प्रतीक बन गई—उन्होंने अपनी मां खदीजा बीबी को गला घोंटकर मार डाला। कथित तौर पर, उनकी मां का किसी अन्य गैंगस्टर इकबाल से संबंध था, जिसने उनके पिता की हत्या की थी। इस घटना के बाद रहमान ने अपनी मां का शव पंखे से लटका दिया, जो उनकी बेरहम छवि को अमर कर गई। गैंग लीडर के रूप में उदय1990 के अंत में रहमान हाजी लालू के गैंग में शामिल हुए, जो ल्यारी का प्रमुख ड्रग लॉर्ड था। 2001 में लालू की गिरफ्तारी के बाद रहमान ने गैंग की कमान संभाली। उन्होंने अपने चचेरे भाई उजैर बलोच और सहयोगी बाबा लाडला के साथ मिलकर ल्यारी को अपना किला बना लिया। 2001 से 2009 तक का दौर रहमान के साम्राज्य का स्वर्णिम काल था। वे जबरन वसूली, अपहरण, ड्रग तस्करी, अवैध हथियारों की बिक्री और हत्या जैसे अपराधों में लिप्त रहे। रहमान ने ‘पीपुल्स अमन कमिटी’ (पीएसी) नामक संगठन की स्थापना की, जो सतह पर शांति का प्रतीक था, लेकिन वास्तव में उनका अपराधी साम्राज्य था। वे ल्यारी में एक फ्यूडल लॉर्ड की तरह शासन करते थे—राजनीतिक संरक्षण के साथ। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) से उनके गहरे संबंध थे। कथित तौर पर, उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की जान कई बार बचाई, खासकर 2007 के हमलों के दौरान। जब बेनजीर का काफिला क्लिफ्टन में विस्फोटों से घिर गया, तो रहमान के आदमियों ने उन्हें सुरक्षित निकाला। बदले में, पीपीपी ने उन्हें राजनीतिक छत्रछाया दी। उनकी क्रूरता की मिसालें कांपने वाली हैं। गैंग वॉर के दौरान वे दुश्मनों के सिर काटकर फुटबॉल की तरह खेलते थे। अरशद पप्पू के साथ उनके संघर्ष में सैकड़ों मौतें हुईं, जिनमें सिर काटना, कब्रें खोदना और सार्वजनिक हिंसा शामिल थी। 2012 के ल्यारी गैंग वॉर में 800 से अधिक मौतें हुईं, जो रहमान के दौर की देन थीं। राजनीतिक संबंध और जनता की छविरहमान केवल अपराधी नहीं थे; वे एक चतुर रणनीतिकार भी थे। वे खुद को ‘सर्दार अब्दुल रहमान बलोच’ कहलवाते थे, जो उनकी बलोच पहचान को मजबूत करता था। ल्यारी में वे रोबिन हुड की तरह देखे जाते थे—गरीबों की मदद करते, लेकिन बदले में वफादारी मांगते। उनके अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल हुए, जो उनकी लोकप्रियता दर्शाता है। हालांकि, पाकिस्तानी पुलिस के अनुसार, वे केवल ल्यारी तक सीमित थे और शहर के अन्य हिस्सों में उतने प्रभावशाली नहीं थे। उनके राजनीतिक संबंधों ने उन्हें लंबे समय तक बचाए रखा। बेनजीर भुट्टो के अलावा, वे अन्य पीपीपी नेताओं से जुड़े थे। लेकिन यह संरक्षण उनके पतन का कारण भी बना। मौत और विरासत9 अगस्त 2009 को कराची पुलिस के साथ मुठभेड़ में रहमान की मौत हो गई। यह ऑपरेशन कराची के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एसएसपी चौधरी असलम खान के नेतृत्व में किया गया था, जो पाकिस्तान के ‘सुपर कॉप’ के रूप में जाने जाते थे। पुलिस का दावा था कि यह एक वैध गोलीबारी थी, जिसमें रहमान और उनके दो सहयोगियों को मार गिराया गया। हालांकि, कई विवादास्पद रिपोर्ट्स में इसे ‘फर्जी एनकाउंटर’ करार दिया गया, क्योंकि रहमान को करीब से गोली मारी गई थी। पूर्व गृह मंत्री जुल्फिकार मिर्जा ने दावा किया कि उन्होंने खुद रहमान को मारा था, लेकिन बाद में पछतावा जताया। कुछ स्रोतों के अनुसार, रहमान कथित रूप से बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को हथियार बेचने में लिप्त थे, जिसके कारण उनकी हत्या एक सौदे के खराब होने का नतीजा हो सकती है। हालांकि, भारतीय जासूसों के शामिल होने का कोई पुष्ट साक्ष्य नहीं मिला। फिल्म ‘धुरंधर’ में रणवीर सिंह द्वारा निभाए गए भारतीय जासूस ‘हामजा’ के किरदार ने काल्पनिक रूप से रहमान के गिरोह में घुसकर उनकी कमजोरी उजागर की और अप्रत्यक्ष रूप से उनके पतन में भूमिका निभाई, लेकिन वास्तविकता में यह पूरी तरह काल्पनिक है। रहमान की मौत के बाद उजैर बलोच ने कमान संभाली, लेकिन 2016 में उनकी गिरफ्तारी के साथ पीएसी कमजोर पड़ गया। रहमान की विरासत ल्यारी के गैंग वॉर और अपराध संस्कृति में बसी है, जो आज भी पाकिस्तान की शहरी समस्याओं को दर्शाती है। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘धुरंधर’ में अक्षय खन्ना ने रहमान डकैत का किरदार निभाया है, जो उनकी क्रूरता को स्क्रीन पर जीवंत करता है। फिल्म ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया (पहले वीकेंड में… Read More

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छतरपुर में तीन युवकों की हवस की शिकार हुई युवति

छतरपुर में तीन युवकों ने कट्टे की नोक पर युवती से किया दुष्कर्म, पुलिस पर लापरवाही का आरोप

छतरपुर (मध्यप्रदेश)। मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। नौगांव थाना क्षेत्र की एक युवती ने आरोप लगाया है कि तीन युवकों ने कट्टे की नोक पर उसके साथ दुष्कर्म किया और उसके भाइयों के साथ मारपीट भी की। पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर शिकायत की है और आरोप लगाया है कि पुलिस ने उसकी रिपोर्ट उसके बताए अनुसार दर्ज नहीं की। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने महिला थाने को जांच के निर्देश दिए हैं। जंगल में ले जाकर किया दुष्कर्मपीड़िता के मुताबिक, 1 अक्टूबर को वह बैंक जा रही थी, तभी नरेश, चंदन और मनीष अहिरवार नामक तीन युवक उसे रास्ते में मिले। युवती का आरोप है कि तीनों ने उसे कट्टा दिखाकर जबरन दौरिया के जंगल में ले जाकर दुष्कर्म किया।घटना के बाद आरोपी युवती को बापू कॉलेज के पास छोड़कर फरार हो गए। उसी समय युवती के भाइयों ने उसे देखा और जब उन्होंने विरोध किया तो आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट की। मारपीट का वीडियो भी आया सामनेघटना के बाद 1 अक्टूबर को बापू डिग्री कॉलेज के पास हुई इस मारपीट का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था। शिकायत के बाद पुलिस ने तीन युवकों के खिलाफ केवल मारपीट की धाराओं में मामला दर्ज किया और एक आरोपी को हिरासत में लिया था। “सरपंच दे रहा है धमकी”पीड़िता का कहना है कि पुलिस ने उसकी दुष्कर्म की शिकायत उसके बताए अनुसार दर्ज नहीं की। उसका यह भी आरोप है कि गांव का सरपंच राजेश अब उसे धमकी दे रहा है। “सरपंच राजेश मेरे घर आकर कट्टा दिखाकर कह रहा है कि अगर मैंने शिकायत की तो मुझे जान से मार देगा।” — पीड़िता थाना प्रभारी बोले – शिकायत के अनुसार ही दर्ज की गई रिपोर्ट नौगांव थाना प्रभारी बाल्मीकि चौबे ने बताया कि युवती की पहली शिकायत के अनुसार ही कार्रवाई की गई थी। उन्होंने कहा कि उस समय केवल मारपीट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। एसडीओपी बोले – महिला थाने को दिए जांच के निर्देश इस मामले पर एसडीओपी अमित मेश्राम ने कहा, “युवती की नई शिकायत पर महिला थाने को जांच के निर्देश दिए गए हैं। मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।”  फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।पीड़िता ने न्याय की मांग करते हुए पुलिस प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है।

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अवैध शराब माफिया पर बड़ी कार्रवाई

अवैध शराब माफिया पर बड़ी कार्रवाई

बुरहानपुर ब्रेकिंग: अवैध शराब माफिया पर बड़ी कार्रवाई, 2500 लीटर महुआ लहान नष्ट – 120 लीटर कच्ची शराब जब्त बुरहानपुर। मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले में पुलिस और प्रशासन द्वारा अवैध शराब माफिया पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है। इसी कड़ी में शनिवार सुबह शिकारपुरा थाना पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने बलवा टेकड़ी इलाके में बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान टीम ने 2500 लीटर महुआ लहान को मौके पर ही नष्ट कर दिया और 120 लीटर कच्ची देशी महुआ शराब जब्त की। जब्त की गई शराब की कीमत लगभग 2 लाख 68 हजार रुपये आंकी गई है। कार्रवाई में पुलिस ने मौके से दो आरोपियों – शामराव गाढ़े और अखिल खान – को गिरफ्तार किया है। दोनों के खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और पूछताछ जारी है। यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पाटीदार और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंतर सिंह कनेश के निर्देशन में की गई। दबिश का पूरा घटनाक्रम शनिवार की सुबह शिकारपुरा थाना पुलिस को बलवा टेकड़ी क्षेत्र में अवैध शराब निर्माण की सूचना मिली। सूचना के आधार पर तुरंत आबकारी विभाग के साथ संयुक्त टीम बनाई गई। पुलिस बल और विभागीय अधिकारियों की टीम ने छापामार कार्रवाई करते हुए शराब बनाने की जगह पर पहुंचकर दबिश दी। मौके पर भारी मात्रा में महुआ लहान और शराब बनाने का सामान मिला। टीम ने करीब 2500 लीटर लहान को नष्ट कर दिया। साथ ही तैयार की गई 120 लीटर देशी महुआ शराब जब्त कर थाने लाया गया। यह शराब यदि बाजार में बिकती, तो इसकी कीमत करीब 2.68 लाख रुपये तक होती। आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस ने मौके से दो व्यक्तियों को दबोचा, जिनकी पहचान शामराव गाढ़े और अखिल खान के रूप में हुई। दोनों आरोपी लंबे समय से इस अवैध धंधे में सक्रिय बताए जा रहे हैं। पुलिस ने इन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है ताकि पता लगाया जा सके कि इनके नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है। जांच अधिकारी का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद इस धंधे से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी। आबकारी एक्ट की धाराओं के तहत दोनों के खिलाफ केस दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस और प्रशासन की सख्ती पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पाटीदार ने स्पष्ट कहा कि जिले में अवैध शराब और उससे जुड़ी हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई पुलिस और आबकारी विभाग के तालमेल से की गई है और आगे भी इस तरह की संयुक्त कार्यवाहियां जारी रहेंगी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंतर सिंह कनेश ने कहा कि अवैध शराब का धंधा न केवल कानूनन अपराध है बल्कि यह लोगों की जान और सेहत के लिए भी खतरा है। इस तरह की गतिविधियों से समाज में नशाखोरी बढ़ती है और अपराध का ग्राफ भी ऊपर जाता है। इसलिए पुलिस और प्रशासन इस धंधे को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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