दिल्ली दवा घोटाला मामले में ACB ने कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया

नई दिल्ली, 28 जून। दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने कथित बहु-करोड़ रुपये के दवा, सर्जिकल सामग्री और मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले की जांच में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में पूर्व स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (DGHS) डॉ. वत्सला अग्रवाल और इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए अधिकारी डॉ. विजय कुमार रंगा से जुड़े जांच बिंदु शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार मामले में खरीद प्रक्रिया में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की जा रही है। करोड़ों रुपये की खरीद में अनियमितताओं का आरोप ACB के अनुसार यह मामला सरकारी अस्पतालों के लिए दवाओं, सर्जिकल सामग्री और मेडिकल उपकरणों की खरीद से जुड़ा है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि खरीद प्रक्रिया के दौरान नियमों का उल्लंघन किया गया और कुछ कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। मामले की जांच सतर्कता विभाग की रिपोर्ट के बाद शुरू की गई थी। ACB की कार्रवाई तेज जांच एजेंसी ने पिछले कुछ दिनों में कई दस्तावेजों, फाइलों और खरीद रिकॉर्ड की जांच की है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में वित्तीय लेनदेन, निविदा प्रक्रिया और अनुमोदन से जुड़े पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ का दायरा और बढ़ाया गया है। पहले भी हुई थी गिरफ्तारी इस मामले में ACB पहले ही डॉ. विजय कुमार रंगा को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसी का दावा है कि खरीद प्रक्रिया से जुड़े कई अहम दस्तावेज और रिकॉर्ड उसके कब्जे में हैं, जिनकी फोरेंसिक और वित्तीय जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की खरीद प्रक्रिया पर सवाल मामले के सामने आने के बाद सरकारी अस्पतालों में दवा और उपकरण खरीद प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच ACB ने संकेत दिए हैं कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में अन्य अधिकारियों एवं संबंधित पक्षों से भी पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसी खरीद प्रक्रिया से जुड़े सभी निर्णयों और अनुमोदनों की समीक्षा कर रही है। आगे क्या? अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर आगे की पूछताछ के लिए रिमांड मांगा जा सकता है। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। स्रोत:दिल्ली एंटी करप्शन ब्रांच (ACB), सतर्कता विभाग मूल रिपोर्ट:PTI, Indian Express, Times of India एवं अन्य राष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा स्थगित, जांच शुरू

मुंबई, 27 जून। महाराष्ट्र में आयोजित होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) 2026 को पेपर लीक की आशंका के बाद स्थगित कर दिया गया है। महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद (MSCE) ने यह निर्णय परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया। यह परीक्षा 28 जून को राज्यभर के 1,028 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित होनी थी, लेकिन परीक्षा से एक दिन पहले सामने आए घटनाक्रम के बाद इसे टाल दिया गया। भिवंडी में पुलिस छापे के बाद हुआ खुलासा अधिकारियों के अनुसार पुलिस को गोपनीय सूचना मिली थी कि ठाणे जिले के भिवंडी क्षेत्र में कुछ लोगों के पास परीक्षा से जुड़े प्रश्न मौजूद हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने छापा मारा, जहां से बरामद सामग्री की जांच के लिए महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद के अधिकारियों को बुलाया गया। प्रारंभिक जांच में बरामद प्रश्नों का मिलान वास्तविक प्रश्नपत्र से होने की आशंका सामने आई। इसके बाद तुरंत आपराधिक मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई। परीक्षा स्थगित करने का फैसला MSCE ने आधिकारिक बयान में कहा कि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए 28 जून को प्रस्तावित परीक्षा को स्थगित किया गया है ताकि विस्तृत जांच पूरी की जा सके। परिषद ने स्पष्ट किया कि नई परीक्षा तिथि जल्द आधिकारिक वेबसाइट पर घोषित की जाएगी। अभ्यर्थियों को दोबारा आवेदन की आवश्यकता नहीं परीक्षा परिषद ने उम्मीदवारों को आश्वस्त किया है कि उन्हें दोबारा आवेदन करने या अतिरिक्त शुल्क जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। जिन अभ्यर्थियों ने पहले से पंजीकरण कराया है, उनका आवेदन नई परीक्षा तिथि के लिए स्वतः मान्य रहेगा। परिषद ने उम्मीदवारों से केवल आधिकारिक वेबसाइट पर जारी सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। तीन संदिग्धों पर कार्रवाई, जांच जारी पुलिस ने मामले में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रश्नपत्र कैसे लीक हुआ और इसके पीछे कोई संगठित गिरोह तो सक्रिय नहीं था। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विपक्ष ने सरकार को घेरा घटना के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि लगातार परीक्षा संबंधी अनियमितताओं से युवाओं का भरोसा प्रभावित हो रहा है। वहीं सरकार ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और पूरी जांच निष्पक्ष ढंग से होगी। अभ्यर्थियों से धैर्य रखने की अपील महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने सभी अभ्यर्थियों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचना का इंतजार करने की अपील की है। परिषद का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद नई परीक्षा तिथि घोषित की जाएगी तथा परीक्षा को पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित किया जाएगा। स्रोत:महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद (MSCE), ठाणे पुलिस एवं शिक्षा विभाग मूल रिपोर्ट:PTI, MSCE की आधिकारिक जानकारी तथा विभिन्न राष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में 8 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज

अयोध्या, 26 जून। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और बहुमूल्य वस्तुओं के कथित गबन मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामले की जांच तेज कर दी गई है और सभी नामजद आरोपियों को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। एसआईटी रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई जानकारी के अनुसार, तीन सदस्यीय एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी। रिपोर्ट में मंदिर में प्राप्त दान राशि और बहुमूल्य वस्तुओं के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया। इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े सदस्य की शिकायत पर रामजन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज की गई। आठ लोगों को बनाया गया आरोपी पुलिस ने इस मामले में आठ लोगों को नामजद किया है। इनमें दान राशि की गिनती और प्रबंधन से जुड़े कर्मचारी एवं अन्य संबंधित व्यक्ति शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और मामले से जुड़े दस्तावेजों तथा सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है। दान राशि और बहुमूल्य वस्तुओं की जांच जांच एजेंसियां मंदिर में प्राप्त नकद दान, सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के रिकॉर्ड का मिलान कर रही हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित गबन किस प्रकार किया गया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। पुलिस ने जांच तेज की उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच के दौरान सभी वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ट्रस्ट और प्रशासन की नजर मामले के सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन और संबंधित ट्रस्ट ने भी जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था और दान व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। जांच जारी, आगे और खुलासे संभव पुलिस और एसआईटी दोनों इस मामले की विस्तृत जांच कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और आधिकारिक रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। स्रोत:उत्तर प्रदेश पुलिस, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एवं एसआईटी जांच से संबंधित सार्वजनिक जानकारी मूल रिपोर्ट:एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट, पुलिस एफआईआर तथा विभिन्न राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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गृह मंत्रालय ने टेक्नोलॉजी आधारित अपराध जांच प्रणाली पर दिया जोर

नई दिल्ली, 24 जून 2026। देश में अपराध जांच व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तेज बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तकनीक आधारित जांच प्रणाली को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। मंत्रालय का मानना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से अपराधों की जांच में तेजी आएगी और दोषियों तक पहुंचना आसान होगा। हाल ही में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अपराध जांच एजेंसियों को डिजिटल तकनीकों का अधिक उपयोग करने के निर्देश दिए गए। बैठक में फॉरेंसिक विज्ञान, डिजिटल साक्ष्य, राष्ट्रीय फिंगरप्रिंट डेटाबेस और साइबर अपराध निगरानी प्रणाली को और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई। गृह मंत्रालय के अनुसार देशभर में अपराध रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। इससे विभिन्न राज्यों की पुलिस और जांच एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान अधिक प्रभावी हो सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि डेटा आधारित जांच से अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया में सुधार आएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी और संगठित अपराध जैसे मामलों में आधुनिक तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल फॉरेंसिक जैसे उपकरण जांच एजेंसियों को महत्वपूर्ण सुराग उपलब्ध करा सकते हैं। गृह मंत्रालय ने राज्यों को भी तकनीकी संसाधनों और प्रशिक्षण सुविधाओं को बढ़ाने की सलाह दी है। पुलिस कर्मियों को नई जांच तकनीकों और डिजिटल उपकरणों के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे बदलते अपराध स्वरूपों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें। अधिकारियों के अनुसार आने वाले समय में तकनीक आधारित अपराध जांच प्रणाली देश की कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे न केवल जांच प्रक्रिया तेज होगी बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को भी बेहतर समर्थन मिलेगा। स्रोत:केंद्रीय गृह मंत्रालय एवं आधिकारिक समीक्षा बैठक की जानकारी मूल रिपोर्ट:विभिन्न समाचार एजेंसियों और सरकारी स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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NEET सुरक्षा ऑपरेशन के बाद पेपर लीक नेटवर्क की जांच जारी

जय राष्ट्र न्यूज़ | क्राइम डेस्क | 22 जून 2026 मुख्य समाचार NEET-UG 2026 री-एग्जाम के सफल आयोजन के बाद अब जांच एजेंसियों का फोकस कथित पेपर लीक नेटवर्क की पड़ताल पर बना हुआ है। परीक्षा से पहले और दौरान चलाए गए व्यापक सुरक्षा अभियान के बाद विभिन्न एजेंसियां उन व्यक्तियों और समूहों की जांच कर रही हैं जिन पर परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने का संदेह है। अधिकारियों के अनुसार परीक्षा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रही, लेकिन कथित अनियमितताओं से जुड़े पुराने मामलों और संदिग्ध नेटवर्क की जांच अभी भी जारी है। बहुस्तरीय जांच अभियान जांच एजेंसियां विभिन्न राज्यों में मिले इनपुट्स, डिजिटल रिकॉर्ड और संदिग्ध संपर्कों की जांच कर रही हैं। कई मामलों में साइबर विशेषज्ञों की सहायता भी ली जा रही है ताकि ऑनलाइन माध्यमों से फैलाए गए कथित प्रश्नपत्र और संदेशों की सत्यता का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जांच का उद्देश्य केवल दोषियों की पहचान करना ही नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना भी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म की निगरानी जांच का एक बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और अन्य डिजिटल माध्यमों पर केंद्रित है। एजेंसियां उन समूहों और चैनलों की गतिविधियों की समीक्षा कर रही हैं जहां परीक्षा से संबंधित सामग्री साझा किए जाने के दावे सामने आए थे। साइबर विशेषज्ञ संदिग्ध डिजिटल ट्रेल और संचार नेटवर्क का विश्लेषण कर रहे हैं। राज्यों के बीच समन्वय कई राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां मिलकर जानकारी साझा कर रही हैं। जांच में अंतरराज्यीय नेटवर्क की संभावित भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार विभिन्न राज्यों से प्राप्त सूचनाओं को एकीकृत कर व्यापक जांच की जा रही है। परीक्षा सुरक्षा पर बढ़ा फोकस NEET री-एग्जाम के दौरान लागू की गई कड़ी सुरक्षा व्यवस्था को जांच एजेंसियां एक महत्वपूर्ण कदम मान रही हैं। CCTV निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन, विशेष नियंत्रण कक्ष और अतिरिक्त पुलिस बल जैसी व्यवस्थाओं ने परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने में मदद की। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की राष्ट्रीय परीक्षाओं में भी ऐसे सुरक्षा उपायों का विस्तार किया जा सकता है। छात्रों और अभिभावकों की अपेक्षाएं लाखों छात्रों और अभिभावकों ने मांग की है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि निष्पक्ष जांच परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने के लिए आवश्यक है। भविष्य के लिए सबक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता को दर्शाता है। तकनीकी निगरानी, साइबर इंटेलिजेंस और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कई विशेषज्ञ परीक्षा सुरक्षा के लिए उन्नत डिजिटल तंत्र अपनाने की वकालत कर रहे हैं। निष्कर्ष NEET-UG 2026 री-एग्जाम के बाद कथित पेपर लीक नेटवर्क की जांच जारी है और विभिन्न एजेंसियां मामले के हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं। जांच का उद्देश्य न केवल संभावित दोषियों तक पहुंचना है बल्कि भविष्य में परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना भी है। आने वाले दिनों में जांच से जुड़े नए तथ्य सामने आ सकते हैं। स्रोत: National Testing Agency (NTA) मूल रिपोर्ट:https://nta.ac.in जय राष्ट्र न्यूज़

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NEET Re-Exam से पहले फर्जी पेपर लीक नेटवर्क पर कार्रवाई तेज, जांच एजेंसियां सक्रिय

जय राष्ट्र न्यूज़ | नई दिल्ली | 17 जून 2026 मुख्य समाचार NEET Re-Exam 2026 से पहले परीक्षा सुरक्षा को लेकर देशभर में सतर्कता बढ़ा दी गई है। विभिन्न केंद्रीय और राज्य स्तरीय जांच एजेंसियां कथित पेपर लीक नेटवर्क, फर्जी प्रश्नपत्र बेचने वाले गिरोहों और ऑनलाइन धोखाधड़ी में शामिल तत्वों के खिलाफ अभियान चला रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता और लाखों छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, सोशल मीडिया समूहों और संदिग्ध चैनलों की निगरानी भी बढ़ा दी गई है। कई राज्यों में जांच तेज सूत्रों के अनुसार कई राज्यों में पुलिस और विशेष जांच इकाइयों ने परीक्षा से जुड़े संदिग्ध नेटवर्क की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी है। ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है जो छात्रों को फर्जी पेपर, उत्तर कुंजी या परीक्षा में सफलता के झूठे दावे करके ठगने का प्रयास कर रहे हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि अधिकांश मामलों में छात्रों को आर्थिक रूप से ठगने के लिए नकली पेपर लीक का सहारा लिया जाता है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर विशेष निगरानी परीक्षा से पहले विभिन्न मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया चैनलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। साइबर विशेषज्ञों की टीम भी ऑनलाइन नेटवर्क का विश्लेषण कर रही है ताकि किसी संभावित धोखाधड़ी को समय रहते रोका जा सके। छात्रों को जारी की गई चेतावनी राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और विभिन्न शिक्षा विभागों ने छात्रों को सलाह दी है कि वे किसी भी अनधिकृत स्रोत से प्रश्नपत्र या परीक्षा सामग्री खरीदने का प्रयास न करें। विशेषज्ञों ने कहा है कि फर्जी पेपर लीक के अधिकांश दावे भ्रामक होते हैं और ऐसे मामलों में छात्र आर्थिक नुकसान के साथ कानूनी परेशानियों में भी फंस सकते हैं। सुरक्षा व्यवस्था को किया गया मजबूत NEET Re-Exam के लिए बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। परीक्षा केंद्रों पर निगरानी, प्रश्नपत्रों की सुरक्षित ढुलाई और डिजिटल ट्रैकिंग जैसे उपायों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार इस बार परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए अतिरिक्त संसाधन लगाए गए हैं। अभिभावकों और छात्रों की बढ़ी चिंता पिछले विवादों के बाद कई छात्रों और अभिभावकों की नजर परीक्षा की निष्पक्षता पर बनी हुई है। हालांकि अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि परीक्षा को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से आयोजित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों को अफवाहों से दूर रहकर केवल अपनी तैयारी पर ध्यान देना चाहिए। विशेषज्ञों की राय विशेषज्ञों के अनुसार परीक्षा प्रणाली में विश्वास बनाए रखने के लिए तकनीकी निगरानी, सख्त कानूनी कार्रवाई और जागरूकता अभियान आवश्यक हैं। उनका मानना है कि फर्जी पेपर लीक नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई से भविष्य में ऐसी घटनाओं को कम किया जा सकता है। निष्कर्ष NEET Re-Exam 2026 से पहले फर्जी पेपर लीक नेटवर्क और ऑनलाइन धोखाधड़ी के खिलाफ कार्रवाई तेज होने से परीक्षा सुरक्षा को लेकर प्रशासन की गंभीरता स्पष्ट दिखाई दे रही है। जांच एजेंसियां सक्रिय हैं और छात्रों को केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की सलाह दी गई है। आने वाले दिनों में परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण विषय बनी रहेगी। जय राष्ट्र न्यूज़ के साथ जुड़े रहें शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए।

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साइबर ठगी के नए तरीके सामने आए, UPI यूजर्स के लिए चेतावनी

जय राष्ट्र न्यूज़ पर ताजा अपराध अपडेट दिनांक: 12 जून 2026 नई दिल्ली: देश में डिजिटल भुगतान और UPI लेनदेन का दायरा तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामले भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। साइबर अपराधी अब लोगों को ठगने के लिए नए और अधिक परिष्कृत तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों और बैंकिंग विशेषज्ञों ने UPI उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार फर्जी कस्टमर केयर कॉल, नकली बैंक मैसेज, QR कोड स्कैम और स्क्रीन-शेयरिंग ऐप्स के जरिए लोगों के बैंक खातों को निशाना बनाया जा रहा है। QR कोड स्कैम बना बड़ा खतरा नई दिल्ली: साइबर अपराधी अब भुगतान प्राप्त करने के नाम पर लोगों को QR कोड भेज रहे हैं। कई लोग बिना जांच-पड़ताल के इन कोड को स्कैन कर लेते हैं, जिसके बाद उनके खाते से पैसे निकल जाते हैं। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि पैसा प्राप्त करने के लिए QR कोड स्कैन करने की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे मामलों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। फर्जी कस्टमर केयर कॉल से रहें सावधान नई दिल्ली: साइबर ठग खुद को बैंक अधिकारी, UPI सेवा प्रदाता या कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताकर लोगों को कॉल कर रहे हैं। वे OTP, PIN या बैंकिंग जानकारी मांगकर खातों तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। बैंकों ने दोहराया है कि कोई भी अधिकृत संस्था फोन पर OTP, UPI PIN या पासवर्ड नहीं मांगती। स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स का बढ़ रहा दुरुपयोग नई दिल्ली: कई मामलों में ठग तकनीकी सहायता देने के बहाने लोगों को स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करने के लिए कहते हैं। एक बार स्क्रीन एक्सेस मिलने के बाद वे बैंकिंग जानकारी और भुगतान विवरण देख सकते हैं। साइबर विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल न करें। UPI यूजर्स के लिए सुरक्षा सुझाव नई दिल्ली: साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने डिजिटल भुगतान करने वालों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए हैं: डिजिटल भुगतान का बढ़ता दायरा नई दिल्ली: भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल भुगतान बाजारों में शामिल हो चुका है। UPI के जरिए प्रतिदिन करोड़ों लेनदेन किए जा रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा और जागरूकता पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के साथ सतर्कता भी जरूरी है ताकि लोग डिजिटल सुविधाओं का सुरक्षित रूप से लाभ उठा सकें। निष्कर्ष नई दिल्ली: साइबर ठगी के नए तरीकों ने डिजिटल भुगतान करने वाले लोगों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। हालांकि सही जानकारी, सतर्कता और सुरक्षा नियमों का पालन करके अधिकांश ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचा जा सकता है। विशेषज्ञों ने लोगों से किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या संदेश से सावधान रहने की अपील की है। जय राष्ट्र न्यूज़ के साथ जुड़े रहें अपराध, साइबर सुरक्षा और देश-दुनिया की हर बड़ी खबर के लिए।

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ऑनलाइन भुगतान और साइबर ठगी से सावधान रहने का प्रतीकात्मक चित्र

साइबर ठगी के मामलों में बढ़ोतरी, डिजिटल भुगतान करने वालों के लिए नई चेतावनी

जय राष्ट्र न्यूज़ नई दिल्ली: देशभर में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर ठगी के मामलों में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। साइबर सुरक्षा एजेंसियों और बैंकिंग विशेषज्ञों ने लोगों को ऑनलाइन लेनदेन के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार ठग अब फर्जी कॉल, नकली वेबसाइट, QR कोड स्कैम, UPI फ्रॉड और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को निशाना बना रहे हैं। कई मामलों में लोगों के बैंक खातों से लाखों रुपये की ठगी की घटनाएं सामने आई हैं। UPI और डिजिटल भुगतान बने साइबर अपराधियों का निशाना नई दिल्ली: डिजिटल भुगतान के तेजी से बढ़ते चलन के कारण साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं। फर्जी ग्राहक सेवा कॉल, नकली बैंक अधिकारी और फर्जी इनाम योजनाओं के जरिए लोगों से बैंकिंग जानकारी हासिल की जा रही है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करना या OTP साझा करना गंभीर वित्तीय नुकसान का कारण बन सकता है। QR कोड स्कैम के मामले बढ़े नई दिल्ली: हाल के महीनों में QR कोड से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। कई लोग भुगतान प्राप्त करने के नाम पर भेजे गए फर्जी QR कोड को स्कैन कर देते हैं, जिसके बाद उनके खाते से रकम निकल जाती है। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजे गए QR कोड को बिना सत्यापन स्कैन न करें। बैंक और साइबर एजेंसियां कर रहीं जागरूक नई दिल्ली: विभिन्न बैंक और साइबर सुरक्षा एजेंसियां लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चला रही हैं। ग्राहकों को लगातार यह बताया जा रहा है कि बैंक कभी भी फोन या संदेश के माध्यम से OTP, PIN या पासवर्ड नहीं मांगते। इसके अलावा साइबर हेल्पलाइन और शिकायत पोर्टल के माध्यम से लोगों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। कैसे रहें सुरक्षित? नई दिल्ली: साइबर विशेषज्ञों ने डिजिटल भुगतान करने वालों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए हैं: आम लोगों पर क्या असर? नई दिल्ली: डिजिटल लेनदेन आज आम जीवन का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता बेहद जरूरी हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सतर्कता और सही जानकारी के माध्यम से अधिकांश साइबर ठगी की घटनाओं से बचा जा सकता है। सरकार और बैंकिंग संस्थान भी डिजिटल भुगतान को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार नई तकनीकों और सुरक्षा उपायों पर काम कर रहे हैं। जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रोफेसर मर्डर केस में बड़ा खुलासा, पश्चिम बंगाल से दंपति गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जांच एजेंसियों ने पश्चिम बंगाल से एक दंपति को गिरफ्तार किया है, जिन पर हत्या में शामिल होने का आरोप है। इस गिरफ्तारी के बाद मामले में कई नए खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है। क्या है पूरा मामला? दिल्ली यूनिवर्सिटी से जुड़े प्रोफेसर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। शुरुआती जांच में कई पहलुओं पर संदेह जताया गया था। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड और अन्य सुरागों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिसके आधार पर पश्चिम बंगाल में कार्रवाई की गई। पश्चिम बंगाल से हुई गिरफ्तारी पुलिस टीम ने विशेष अभियान चलाकर पश्चिम बंगाल से एक दंपति को हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। पुलिस की जांच जारी जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हत्या के पीछे की असली वजह क्या थी। पुलिस विभिन्न कोणों से मामले की जांच कर रही है, जिसमें व्यक्तिगत संबंध, आर्थिक लेन-देन और अन्य संभावित कारण शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की पुष्टि होने के बाद ही विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। विश्वविद्यालय समुदाय में चिंता घटना के बाद विश्वविद्यालय समुदाय में चिंता का माहौल है। छात्रों और शिक्षकों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। कई लोगों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना के बाद राजधानी में शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों की गहन जांच और सुरक्षा उपायों को मजबूत करना आवश्यक है। आगे क्या? गिरफ्तार दंपति से पूछताछ जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आएंगे। अदालत में पेशी के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। निष्कर्ष दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रोफेसर हत्याकांड में हुई गिरफ्तारी को जांच की बड़ी सफलता माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पूछताछ में कौन-कौन से नए खुलासे सामने आते हैं और पुलिस इस मामले को किस दिशा में आगे बढ़ाती है। jairashtranews

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नागपुर में 522 किलो गांजा जब्त | अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़

नागपुर: डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने महाराष्ट्र के नागपुर में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 522.554 किलोग्राम गांजा जब्त किया है। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई एक अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा थी। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जानकारी के अनुसार डीआरआई की नागपुर इकाई को ओडिशा-आंध्र प्रदेश सीमा से महाराष्ट्र की ओर बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों की तस्करी किए जाने की सूचना मिली थी। खुफिया जानकारी के आधार पर अधिकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-53 पर मौदा के पास माथनी टोल प्लाजा पर एक भारी मालवाहक ट्रक को रोका और उसकी तलाशी ली। तलाशी के दौरान ट्रक में विशेष रूप से बनाए गए गुप्त खानों से गांजा बरामद किया गया। अधिकारियों ने बताया कि मादक पदार्थ को ड्राइवर की सीट के पीछे, केबिन के ऊपरी हिस्से और अन्य छिपे हुए स्थानों में रखा गया था ताकि जांच एजेंसियों की नजर से बचा जा सके। बरामद गांजा 247 पैकेटों में पैक किया गया था। डीआरआई के अनुसार जब्त किए गए गांजे की अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 2.61 करोड़ रुपये है। इसके अलावा जिस ट्रक का उपयोग तस्करी के लिए किया जा रहा था, उसे भी जब्त कर लिया गया है। आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (NDPS) एक्ट, 1985 के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह केवल एक बड़ी तस्करी श्रृंखला का हिस्सा हो सकता है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क के अन्य सदस्यों, सप्लायरों और संभावित खरीदारों की जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस कार्रवाई से पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। डीआरआई ने बताया कि इससे पहले भी वर्ष 2026 में इसी नेटवर्क से जुड़े मामलों में 1,250 किलोग्राम से अधिक गांजा जब्त किया जा चुका है और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। लगातार हो रही कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि जांच एजेंसियां संगठित मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ सख्त अभियान चला रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मादक पदार्थों की तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह युवाओं और समाज के लिए भी गंभीर खतरा है। ऐसे में तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई और जन-जागरूकता दोनों आवश्यक हैं। मुख्य बिंदु • नागपुर में डीआरआई की बड़ी कार्रवाई • 522.554 किलोग्राम गांजा बरामद • अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट का खुलासा • दो आरोपी गिरफ्तार • गांजे की अनुमानित कीमत 2.61 करोड़ रुपये • NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज निष्कर्ष नागपुर में हुई यह कार्रवाई मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एजेंसियों की बड़ी सफलता मानी जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी होने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य और देश में नशे के कारोबार को रोकने के लिए ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे।

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