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‘वोट चोरी’ के आरोपों के खिलाफ लंदन में भारतीयों का प्रदर्शन, ध्रुव राठी भी हुए शामिल

लंदन, 18 अक्टूबर 2026: भारत की चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) को लेकर उठे कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों के विरोध में लंदन में प्रदर्शन हुआ। शनिवार को संसद स्क्वायर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास भारतीय छात्रों और प्रवासी भारतीयों ने जुटकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। इस प्रदर्शन में यूट्यूबर ध्रुव राठी भी शामिल हुए। ‘Stop Vote Chori’ के नाम से आयोजित हुआ प्रदर्शन प्रदर्शन का आयोजन इंडियन ओवरसीज कांग्रेस की यूथ विंग और ब्रिटेन में सक्रिय भारतीय छात्र संगठनों ने किया। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI)-UK सहित अन्य प्रवासी भारतीय संगठनों के सदस्यों ने भी इसमें भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया और चुनावी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए। ध्रुव राठी भी प्रदर्शन में हुए शामिल यूट्यूबर और एक्टिविस्ट ध्रुव राठी ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी विदेशी हस्तक्षेप की मांग करना नहीं, बल्कि भारतीयों और प्रवासी भारतीयों के बीच कथित चुनावी अनियमितताओं के मुद्दे को उठाना है। मोदी समर्थकों ने किया विरोध प्रदर्शन इसी स्थान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के समर्थकों का एक समूह भी पहुंचा। इस दौरान समर्थकों ने ‘मोदी, मोदी’ के नारे लगाए। लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने दोनों समूहों को अलग रखा। हालांकि, कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर जवाबदेही की मांग की। भारत में भी इस मुद्दे पर विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों की ओर से विरोध दर्ज कराया गया है। वहीं, निर्वाचन आयोग और भाजपा इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। ऐसे में ‘वोट चोरी’ से जुड़े दावों और उनके जवाबों को राजनीतिक आरोपों के रूप में देखा जाना चाहिए; इनकी पुष्टि के लिए संबंधित तथ्यों और साक्ष्यों का स्वतंत्र मूल्यांकन जरूरी है। लंदन में प्रदर्शन से मुद्दे को मिली अंतरराष्ट्रीय चर्चा लंदन में हुए प्रदर्शन ने भारत की चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर चल रही बहस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में ला दिया है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके समर्थन में प्रस्तुत साक्ष्यों का आकलन अलग-अलग किया जाना आवश्यक है। स्रोत: PTI, ThePrint, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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ग्लोबल इक्विटी फंड्स में लगातार चौथे सप्ताह निवेश, 20.01 अरब डॉलर का इनफ्लो; टेक फंड्स से निकला पैसा

17 अक्टूबर 2026: वैश्विक शेयर बाजारों में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, 14 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में ग्लोबल इक्विटी फंड्स में 20.01 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया। यह लगातार चौथा सप्ताह रहा, जब इन फंड्स में नेट इनफ्लो देखने को मिला। हालांकि, टेक्नोलॉजी आधारित फंड्स से निकासी ने संकेत दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक शेयरों के ऊंचे मूल्यांकन को लेकर निवेशक सतर्कता बरत रहे हैं। अमेरिकी इक्विटी फंड्स में सबसे ज्यादा निवेश क्षेत्रीय आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी इक्विटी फंड्स में करीब 16.68 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश आया। वहीं, यूरोपीय इक्विटी फंड्स में लगभग 2.35 अरब डॉलर का इनफ्लो दर्ज किया गया। एशियाई इक्विटी फंड्स में भी शुद्ध खरीदारी देखने को मिली। अमेरिकी फंड्स में बड़े पैमाने पर निवेश से संकेत मिलता है कि वैश्विक निवेशक फिलहाल शेयर बाजारों में अपनी भागीदारी बनाए हुए हैं। टेक्नोलॉजी फंड्स से 1.21 अरब डॉलर की निकासी ग्लोबल इक्विटी फंड्स में कुल निवेश मजबूत रहने के बावजूद टेक्नोलॉजी सेक्टर के फंड्स से करीब 1.21 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी हुई। हालिया तेजी और ऊंचे मूल्यांकन के बाद कुछ निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली करने या जोखिम कम करने की कोशिश इसकी संभावित वजह हो सकती है। AI से जुड़ी कंपनियों में निवेश को लेकर भी बाजार में सतर्कता बनी हुई है। हालांकि, फंड्स से निकासी के आंकड़े अकेले यह साबित नहीं करते कि निवेशकों का टेक्नोलॉजी सेक्टर से भरोसा पूरी तरह कमजोर हो गया है। फाइनेंशियल सेक्टर फंड्स में बढ़ी मांग टेक्नोलॉजी फंड्स के विपरीत, फाइनेंशियल सेक्टर के फंड्स में करीब 1.73 अरब डॉलर का निवेश आया। ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बने रहने की संभावना कुछ बैंकों और वित्तीय कंपनियों की कमाई को समर्थन दे सकती है। हालांकि, ऊंची दरों का असर सभी वित्तीय संस्थानों पर एक जैसा नहीं होता। कर्ज की मांग, फंडिंग लागत और ऋण चूक जैसे कारक भी इस क्षेत्र के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं। बॉन्ड फंड्स में भी 22.65 अरब डॉलर का निवेश सप्ताह के दौरान ग्लोबल बॉन्ड फंड्स में करीब 22.65 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया। शॉर्ट-टर्म बॉन्ड और सरकारी ऋण से जुड़े उत्पादों में निवेशकों की दिलचस्पी देखने को मिली। बॉन्ड फंड्स में बढ़ता निवेश ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब वैश्विक बाजार ब्याज दरों के भविष्य और महंगाई की दिशा का आकलन कर रहे हैं। निवेशक अपने पोर्टफोलियो में जोखिम और संभावित रिटर्न के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। गोल्ड और कीमती धातुओं में भी निवेश भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई को लेकर अनिश्चितता के बीच कीमती धातुओं से जुड़े फंड्स में भी निवेश जारी रहा। इससे संकेत मिलता है कि कुछ निवेशक शेयर बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखते हुए पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए रक्षात्मक परिसंपत्तियों का सहारा ले रहे हैं। बाजार के लिए क्या हैं संकेत? ग्लोबल इक्विटी फंड्स में लगातार चार सप्ताह तक इनफ्लो यह दर्शाता है कि वैश्विक शेयर बाजारों में निवेश की रुचि बनी हुई है। वहीं, टेक्नोलॉजी फंड्स से निकासी संकेत देती है कि निवेशक ऊंचे मूल्यांकन वाले AI और टेक शेयरों में जोखिम का दोबारा आकलन कर सकते हैं। फाइनेंशियल सेक्टर और बॉन्ड फंड्स में निवेश से यह भी पता चलता है कि निवेशक अलग-अलग परिसंपत्ति वर्गों में अवसर तलाश रहे हैं। हालांकि, आगे निवेश का रुख केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीति, महंगाई, कंपनियों की कमाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। स्रोत: Reuters, LSEG जय राष्ट्र न्यूज़

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Trump बोले—ईरान में अमेरिकी जमीनी सैनिक भेजने की संभावना कम, परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से भी किया इनकार

वॉशिंगटन, 16 अक्टूबर 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान के खिलाफ जारी संघर्ष में अमेरिकी जमीनी सैनिकों को तैनात करने की संभावना बेहद कम है। Newsmax को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री सुरक्षा को लेकर तनाव बना हुआ है। Trump ने क्या कहा? ट्रंप ने कहा कि उन्हें ईरान में अमेरिकी सैनिकों को जमीन पर उतारने की जरूरत नजर नहीं आती। उन्होंने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना को भी खारिज कर दिया। इन टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि फिलहाल अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान में सीधे जमीनी सैन्य अभियान और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से दूरी बनाए रखने की बात कर रहे हैं। हालांकि, इससे संघर्ष के अन्य सैन्य विकल्पों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती। बयान क्यों अहम है? ट्रंप का बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के संभावित अगले कदमों को लेकर चर्चा जारी है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अमेरिकी सैन्य योजनाकार ईरान के खिलाफ GBU-43/B ‘Mother of All Bombs’ (MOAB) जैसे शक्तिशाली गैर-परमाणु हथियार के संभावित इस्तेमाल पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, इस रिपोर्ट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी। MOAB एक पारंपरिक गैर-परमाणु बम है। इसके संभावित इस्तेमाल की चर्चा परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से अलग मुद्दा है। Strait of Hormuz में समुद्री खतरा बरकरार ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना ने क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरे को गंभीर बताया है। जहाजों पर संभावित हमलों और समुद्री परिवहन में व्यवधान ने वैश्विक व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल परिवहन के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां लंबे समय तक व्यवधान रहने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकते हैं। तेल की कीमतों पर भी असर मध्य पूर्व में तनाव और तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच कच्चे तेल की कीमतों पर बाजार की नजर बनी हुई है। 16 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 105.45 डॉलर प्रति बैरल था। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही सामान्य स्तर से नीचे रहने की खबरों ने आपूर्ति संबंधी चिंताओं को बढ़ाया है। हालांकि, तेल की कीमतें केवल भू-राजनीतिक तनाव से नहीं, बल्कि वैश्विक मांग, उत्पादन और अन्य बाजार परिस्थितियों से भी प्रभावित होती हैं। ईरान से जुड़े लोगों और संस्थाओं पर नई पाबंदियां अमेरिकी प्रशासन ने 15 अक्टूबर को ईरान से जुड़े 16 व्यक्तियों और 10 संस्थाओं पर नई प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखना है। इससे संकेत मिलता है कि जमीनी सैन्य कार्रवाई और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से इनकार के बावजूद वॉशिंगटन ईरान के खिलाफ आर्थिक तथा अन्य रणनीतिक दबाव के विकल्पों का इस्तेमाल जारी रखे हुए है। संघर्ष खत्म होने के संकेत अभी स्पष्ट नहीं ट्रंप की टिप्पणियों से ईरान में अमेरिकी जमीनी सैनिकों की तैनाती और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर उनकी मौजूदा स्थिति सामने आई है। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि संघर्ष जल्द समाप्त हो जाएगा। हवाई हमले, आर्थिक प्रतिबंध और समुद्री सुरक्षा से जुड़े कदम आगे की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा बने रह सकते हैं। क्षेत्र में हालात किस दिशा में जाएंगे, यह दोनों देशों के अगले फैसलों और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा स्थिति पर निर्भर करेगा। स्रोत – The Indian Express, Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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अल्बानिया में छात्रों का उग्र प्रदर्शन, सरकारी इमारतों पर पथराव; शिक्षा मंत्रालय में लगी आग

तिराना, 16 अक्टूबर 2026: अल्बानिया की राजधानी तिराना में सरकार विरोधी छात्र प्रदर्शनों ने लगातार तीसरे दिन हिंसक रूप ले लिया। छात्रों और युवा प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों पर पथराव किया, सुरक्षा बैरिकेड तोड़े और कई स्थानों पर आगजनी की। इससे एक दिन पहले शिक्षा मंत्रालय की इमारत में आग लगने की खबर सामने आई थी। आसपास स्थित बैंक शाखाओं को भी नुकसान पहुंचा। आखिर क्यों हो रहा है प्रदर्शन? छात्र विश्वविद्यालयों की स्थिति, शिक्षा पर बढ़ते खर्च, आर्थिक सहायता की कमी और पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के सीमित अवसरों को लेकर नाराज हैं। प्रदर्शनों में सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप और प्रधानमंत्री Edi Rama के इस्तीफे की मांग भी प्रमुखता से उठाई जा रही है। शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों के साथ राजनीतिक असंतोष ने भी आंदोलन को व्यापक रूप दिया है। शिक्षा मंत्रालय पर पथराव, इमारत में लगी आग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्रालय की ओर ईंटें फेंकीं, धातु के बैरिकेड तोड़े और सड़कों पर अवरोध खड़े किए। इसी दौरान मंत्रालय की इमारत में आग लग गई। पास स्थित एक Raiffeisen Bank शाखा में भी आग लगने की खबर सामने आई। इन घटनाओं के बाद सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दंगा-रोधी पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, विरोध प्रदर्शन तिराना से आगे दूसरे शहरों तक भी फैल गए हैं। झड़पों के दौरान पुलिसकर्मियों और नागरिकों के घायल होने तथा कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, घायलों और हिरासत में लिए गए लोगों की सटीक संख्या की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। प्रधानमंत्री Edi Rama ने इस्तीफे से किया इनकार प्रधानमंत्री Edi Rama ने प्रदर्शनकारियों की इस्तीफे की मांग खारिज कर दी है। उनका कहना है कि सरकार बदलने का रास्ता चुनाव है, न कि हिंसक प्रदर्शन। सरकार ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को स्वीकार करते हुए सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और तोड़फोड़ की निंदा की है। इससे सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बना हुआ है। यूरोपीय संघ ने जताई चिंता बढ़ती हिंसा के बीच यूरोपीय संघ (EU) ने चिंता जताई है और अधिकारियों तथा प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। EU ने पुलिस द्वारा कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किए जाने की शिकायतों की उचित जांच पर भी जोर दिया है। अल्बानिया में बढ़ते राजनीतिक तनाव पर नजर छात्रों की शिक्षा संबंधी मांगों से शुरू हुआ आंदोलन अब सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध का रूप लेता दिखाई दे रहा है। भ्रष्टाचार के आरोप, प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग और पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया, प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत और सुरक्षा बलों की कार्रवाई इस आंदोलन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। स्रोत – Reuters, AP, Al Jazeera जय राष्ट्र न्यूज़

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ट्रंप बोले—चीन और रूस ईरान की मदद नहीं कर रहे; अमेरिकी खुफिया आकलन से अलग बयान

वॉशिंगटन, 14 अक्टूबर 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि चीन और रूस ईरान के साथ जारी युद्ध में किसी महत्वपूर्ण तरीके से उसकी मदद कर रहे हैं। उनका यह बयान अमेरिकी खुफिया आकलनों से अलग है, जिनमें बीजिंग और मॉस्को की ओर से ईरान को सैन्य सहायता दिए जाने की बात कही गई है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका, चीन और रूस के बीच ईरान को लेकर कूटनीतिक तनाव बना हुआ है और क्षेत्र में जारी संघर्ष के अंतरराष्ट्रीय प्रभावों पर नजर रखी जा रही है। ट्रंप ने क्या कहा? ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि उन्हें नहीं लगता कि चीन या रूस ईरान की किसी महत्वपूर्ण तरीके से मदद कर रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि ऐसी सहायता दी जा रही होती, तो अमेरिकी प्रशासन को इसकी जानकारी मिल जाती। ट्रंप का यह बयान दोनों देशों की भूमिका को लेकर उनके सार्वजनिक आकलन को दर्शाता है। हालांकि, इससे यह स्वतंत्र रूप से साबित नहीं होता कि ईरान को किसी भी प्रकार की बाहरी सहायता नहीं मिल रही है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में क्या दावा किया गया? रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया ब्रीफिंग में चीन और रूस की ओर से ईरान को सहायता मिलने की बात सामने आई है। रिपोर्टों में कथित तौर पर उपग्रह तस्वीरों, हथियारों के कलपुर्जों और अन्य सैन्य सहायता का उल्लेख किया गया है। इस तरह ट्रंप के सार्वजनिक बयान और रिपोर्ट किए गए खुफिया आकलनों के बीच अंतर दिखाई देता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर सहायता की पूरी मात्रा, स्वरूप और दोनों देशों की प्रत्यक्ष भूमिका के सभी विवरण स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं किए जा सकते। शी जिनपिंग से बातचीत का भी किया गया था जिक्र ट्रंप पहले भी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत के दौरान ईरान को चीन की संभावित सहायता का मुद्दा उठा चुके हैं। सितंबर में अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि ट्रंप ने चीन की ओर से ईरान की मदद किए जाने पर आपत्ति जताई थी। अमेरिकी पक्ष के अनुसार, इस बातचीत में ईरान को समर्थन देने के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। हालांकि, किसी कूटनीतिक आश्वासन और जमीन पर वास्तविक गतिविधियों के बीच अंतर हो सकता है। चीन और रूस का अलग-अलग रुख चीन ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन के रूप में प्रस्तुत किया है। वहीं, रूस ने मध्य पूर्व में जारी युद्ध के व्यापक सुरक्षा प्रभावों को लेकर चिंता जताई है और चेतावनी दी है कि क्षेत्रीय संघर्ष परमाणु हथियारों की प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे सकता है। ट्रंप इससे पहले भी शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को ईरान संघर्ष के संदर्भ में तटस्थ बताया चुके हैं। दोनों देशों के सार्वजनिक बयानों और उनकी कथित सहायता से जुड़े खुफिया आकलनों को अलग-अलग संदर्भों में देखना जरूरी है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच बयान के मायने ईरान से जुड़े संघर्ष के बीच चीन और रूस की भूमिका अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का अहम मुद्दा बनी हुई है। वॉशिंगटन के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि तेहरान को बाहरी सैन्य या तकनीकी सहायता किस स्तर पर मिल रही है, जबकि बीजिंग और मॉस्को इस संकट को लेकर अपने-अपने कूटनीतिक रुख रखते हैं। ट्रंप के ताजा बयान और अमेरिकी खुफिया आकलनों के बीच अंतर इस बात को रेखांकित करता है कि संघर्ष में बाहरी देशों की भूमिका को लेकर सार्वजनिक बयानों और सुरक्षा एजेंसियों के आकलनों में भिन्नता हो सकती है। फिलहाल, चीन और रूस की ओर से ईरान को कथित सहायता के दावों तथा इस संबंध में अमेरिकी आकलनों पर अंतरराष्ट्रीय नजर बनी हुई है। Source: Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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US-Iran War: ट्रंप बोले—ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाने में अमेरिका शायद “बहुत आगे” निकल गया, Gulf में उड़ानें प्रभावित

वॉशिंगटन, 13 अक्टूबर 2026: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के नेतृत्व को निशाना बनाने की अमेरिकी रणनीति शायद जरूरत से ज्यादा आगे बढ़ गई। उनके मुताबिक, कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के मारे जाने के बाद संभावित शांति वार्ता के लिए यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि तेहरान में किससे बातचीत की जाए और किसके पास फैसले लेने का अधिकार है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के बीच कूटनीतिक प्रयास अनिश्चित बने हुए हैं। वहीं, खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं के कारण हवाई और समुद्री परिवहन पर भी असर पड़ रहा है। ट्रंप बोले—ईरान में किससे बातचीत करें, यह स्पष्ट नहीं ओहायो के यंग्सटाउन में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाने के मामले में अमेरिका शायद “बहुत आगे” चला गया है। उन्होंने संकेत दिया कि वरिष्ठ अधिकारियों के मारे जाने से संभावित वार्ता के लिए उपयुक्त प्रतिनिधियों की पहचान करना कठिन हो सकता है। ट्रंप की टिप्पणी से संकेत मिलता है कि सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ बातचीत के लिए ईरान में प्रभावी नेतृत्व और निर्णय लेने वाले अधिकारियों की पहचान भी अमेरिकी प्रशासन के सामने एक चुनौती हो सकती है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन जुलाई 2024 से पद पर हैं। हालांकि, ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व की मौजूदा स्थिति और संभावित वार्ताकारों को लेकर अनिश्चितता जताई। ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर ट्रंप के दावे ट्रंप ने रैली के दौरान दावा किया कि युद्ध में ईरान की वायुसेना और नौसैनिक क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने ईरान के सभी 159 नौसैनिक जहाजों के नष्ट होने का भी दावा किया। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। इसलिए इन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। खाड़ी क्षेत्र में विमान सेवाओं पर असर ईरान युद्ध और क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों का असर खाड़ी क्षेत्र की हवाई सेवाओं पर भी पड़ रहा है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास हमलों की खबरों के बाद कई एयरलाइंस ने सऊदी अरब जाने वाली उड़ानें रद्द या अस्थायी रूप से निलंबित की हैं। रिपोर्टों के अनुसार, एयर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर, एतिहाद और कतर एयरवेज समेत कई विमानन कंपनियों की सेवाएं प्रभावित हुई हैं। यात्रियों को उड़ानों की स्थिति और संभावित बदलावों के लिए संबंधित एयरलाइन की आधिकारिक सूचना देखने की सलाह दी जाती है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ी समुद्री सुरक्षा की चिंता फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास वाणिज्यिक जहाजों से जुड़ी सुरक्षा घटनाओं ने समुद्री परिवहन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस क्षेत्र से वैश्विक ऊर्जा व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह का व्यवधान तेल आपूर्ति, माल ढुलाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है। समुद्री सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं और जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंधों या जोखिमों का असर केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी पड़ सकता है। शांति वार्ता पर अनिश्चितता बरकरार अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे कूटनीतिक प्रयासों के केंद्र में बने हुए हैं। ट्रंप की ताजा टिप्पणी सैन्य कार्रवाई और कूटनीति के बीच संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत है। हालांकि, इससे किसी औपचारिक वार्ता की शुरुआत या समझौते की संभावना की पुष्टि नहीं होती। फिलहाल, संघर्ष का आगे का रुख दोनों देशों के फैसलों, क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति और कूटनीतिक संपर्कों पर निर्भर करेगा। खाड़ी क्षेत्र में उड़ानों और समुद्री परिवहन पर पड़ रहे असर के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर हालात पर बनी हुई है। Source: Reuters / Al Jazeera / The Indian Express / The Business Standard जय राष्ट्र न्यूज़

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रियाद एयरपोर्ट पर मिसाइल हमले से मचा हड़कंप, 12 की मौत और 309 घायल होने का दावा; हूती समूह पर आरोप

रियाद: सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 10 अक्टूबर को हुए कथित मिसाइल हमले को लेकर भारी तनाव की खबरें सामने आईं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, हमले में शुरुआती तौर पर 12 लोगों की मौत और 309 लोगों के घायल होने का दावा किया गया। सऊदी अधिकारियों ने हमले के लिए यमन के ईरान समर्थित हूती समूह को जिम्मेदार ठहराया। घटना के बाद हवाई अड्डे के संचालन और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ने की खबरें भी सामने आईं। एयरपोर्ट पर लगातार तीसरे हमले की रिपोर्ट रिपोर्टों में दावा किया गया कि उसी सप्ताह रियाद एयरपोर्ट पर यह तीसरा बड़ा हमला था। इससे पहले भी हवाई अड्डे और आसपास के विमानन ढांचे को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई थीं। हालांकि, इन घटनाओं और उनकी जिम्मेदारी से संबंधित दावों की आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण होगी। 12 लोगों की मौत और 309 के घायल होने का दावा प्रस्तुत रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के हवाले से हमले में 12 लोगों की मौत और 309 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई। घायलों में कई की हालत गंभीर होने और उन्हें रियाद के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराने की बात भी कही गई। कई देशों के नागरिकों के प्रभावित होने की खबर रिपोर्ट में मृतकों में सऊदी अरब के अलावा बांग्लादेश, अमेरिका, जॉर्डन, फिलिस्तीन, सीरिया, सूडान और मिस्र के नागरिकों के शामिल होने का दावा किया गया। बाद की एक रिपोर्ट में एक भारतीय नागरिक की भी घायल होने के बाद मौत होने की बात कही गई, जिससे मृतकों की संख्या 13 होने का उल्लेख किया गया। इन आंकड़ों में अंतर के कारण अंतिम मृतक संख्या की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। हवाई अड्डे का संचालन प्रभावित होने की खबर हमले के बाद किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का संचालन अस्थायी रूप से रोकने की खबर सामने आई। कुछ उड़ानों को दूसरे हवाई अड्डों की ओर मोड़े जाने और कई उड़ानों के रद्द होने का दावा किया गया। अधिकारियों द्वारा रनवे और टर्मिनल सहित विमानन ढांचे को हुए संभावित नुकसान का आकलन किए जाने की भी जानकारी दी गई। हूती समूह पर हमले की जिम्मेदारी का आरोप रिपोर्ट में यमन के हूती समूह द्वारा हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया। समूह की कथित चेतावनी के अनुसार, सऊदी विमानन ढांचे को उसके सैन्य लक्ष्यों में शामिल किया जा सकता है। ऐसे दावों की पुष्टि संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों से की जानी चाहिए। सऊदी गठबंधन ने हमले को बताया युद्ध अपराध सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कथित हमले की निंदा करते हुए इसे युद्ध अपराध करार दिया। गठबंधन के प्रवक्ता ने सऊदी अरब की ओर से निर्णायक जवाब दिए जाने की बात भी कही। यह गठबंधन की प्रतिक्रिया थी; किसी घटना को कानूनी रूप से युद्ध अपराध घोषित करने के लिए संबंधित तथ्यों और लागू अंतरराष्ट्रीय कानून का आकलन जरूरी होता है। अमेरिकी राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया का दावा रिपोर्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हमले को गंभीर बताते हुए प्रतिक्रिया दिए जाने का उल्लेख है। इसमें यह संकेत भी बताया गया कि अमेरिका हूती समूह के खिलाफ संभावित सऊदी सैन्य कार्रवाई में शामिल होने के विकल्प पर विचार कर सकता है। इस संबंध में किसी आधिकारिक बयान की पुष्टि आवश्यक है। भारतीय दूतावास ने घायलों पर नजर रखी हमले के बाद रियाद स्थित भारतीय दूतावास द्वारा सऊदी अरब के अस्पतालों में भर्ती भारतीय नागरिकों की स्थिति पर नजर रखने की खबर सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, दूतावास के अधिकारियों ने घायलों से संपर्क किया और जरूरत पड़ने पर कांसुलर सहायता उपलब्ध कराने की बात कही। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर सुरक्षा चिंताओं के बीच कई अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों की उड़ानों पर प्रतिबंध, रद्दीकरण या परिचालन संबंधी बदलाव होने की खबरें आईं। रिपोर्ट में एयर इंडिया और इंडिगो सहित कुछ कंपनियों के रियाद परिचालन पर पाबंदियों का भी उल्लेख किया गया। यात्रियों के लिए उड़ानों की स्थिति की पुष्टि संबंधित एयरलाइन की आधिकारिक सूचना से करना जरूरी है। ऊर्जा क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों पर असर रियाद में सुरक्षा स्थिति को लेकर बढ़ती चिंताओं का असर बड़े कारोबारी और ऊर्जा क्षेत्र के आयोजनों पर पड़ने की भी रिपोर्ट सामने आई। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, BP, Shell, ExxonMobil और TotalEnergies जैसी कंपनियों के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने वर्ल्ड पेट्रोलियम कांग्रेस में भागीदारी से दूरी बनाई या उसे रद्द किया। सऊदी एयर डिफेंस पर उठे सवाल लगातार मिसाइल हमलों की खबरों के बाद सऊदी अरब की वायु रक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए जाने का दावा किया गया। यह जांच का विषय है कि यदि हमला हुआ, तो संबंधित मिसाइल या प्रोजेक्टाइल को रोकने में क्या चुनौतियां आईं और नागरिक विमानन ढांचे की सुरक्षा के लिए कौन-से कदम उठाए गए। अगले दिन फिर हमले की रिपोर्ट 11 अक्टूबर को रियाद एयरपोर्ट पर एक और प्रोजेक्टाइल हमले की खबर सामने आई। डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कथित हमले में एक पाकिस्तानी निवासी की मौत और 11 लोगों के घायल होने का दावा किया गया। यदि इसकी पुष्टि होती है, तो यह क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को और गंभीर बना सकता है। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका रियाद एयरपोर्ट पर कथित हमलों की खबरों ने यमन संघर्ष और व्यापक मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। विमानन सेवाओं, नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा बाजारों पर संभावित असर के बीच घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित सरकारों के आधिकारिक बयानों पर नजर रखना महत्वपूर्ण है। स्रोत: रॉयटर्स, एसोसिएटेड प्रेस, अल जज़ीरा, सऊदी जनरल अथॉरिटी ऑफ सिविल एविएशन जय राष्ट्र न्यूज़

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Manchester City के Financial Rules Verdict के बाद Liverpool मुकाबले पर बढ़ा तनाव, Premier League की बड़ी Rivalry फिर चर्चा में

लिवरपूल: Manchester City के खिलाफ Premier League के वित्तीय नियमों के 100 से अधिक कथित उल्लंघनों पर आए फैसले के बाद फुटबॉल जगत की नजर अब 11 अक्टूबर 2026 को Anfield में होने वाले Liverpool और Manchester City के मुकाबले पर है। एक स्वतंत्र आयोग ने City को कई वित्तीय नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया है। हालांकि, क्लब ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अपील की है और संभावित सजा पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। इस विवाद के बीच Manchester City का अगला Premier League मुकाबला Liverpool के खिलाफ होना इस मैच को और अहम बना रहा है। पिछले कई वर्षों में दोनों क्लबों के बीच खिताब के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली है। अब मैदान पर होने वाली भिड़ंत के साथ वित्तीय नियमों और खेल की निष्पक्षता को लेकर बहस भी चर्चा में है। 100 से अधिक वित्तीय उल्लंघनों में दोषी पाया गया City स्वतंत्र आयोग ने Manchester City को 2009-10 से 2017-18 के बीच Premier League के वित्तीय नियमों के 100 से अधिक उल्लंघनों का दोषी पाया है। आयोग ने जांच के दौरान सहयोग से जुड़े एक अलग आरोप पर भी क्लब के खिलाफ निष्कर्ष दिया। हालांकि, Manchester City इन निष्कर्षों को स्वीकार नहीं करता और फैसले के खिलाफ अपील कर चुका है। इसलिए मामले का अंतिम परिणाम अपील प्रक्रिया और आगे होने वाले निर्णयों पर निर्भर करेगा। संभावित सजा पर अभी अंतिम फैसला नहीं Manchester City को दोषी ठहराए जाने के बाद संभावित कार्रवाई को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। पॉइंट्स में कटौती, आर्थिक जुर्माना और अन्य खेल संबंधी प्रतिबंध संभावित विकल्पों के तौर पर चर्चा में हैं। हालांकि, किसी भी संभावित सजा को अंतिम नहीं माना जा सकता, क्योंकि अपील की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। आगे आने वाला फैसला क्लब और Premier League की प्रतिस्पर्धा पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। फैसले के बाद पहला लीग मुकाबला Liverpool से वित्तीय विवाद के बीच Manchester City का अगला Premier League मुकाबला Liverpool से होना खास महत्व रखता है। दोनों टीमें 11 अक्टूबर को Anfield में आमने-सामने होंगी। यह मुकाबला पहले से ही Premier League के प्रमुख मैचों में गिना जाता है। लेकिन वित्तीय फैसले और उसके बाद उठे सवालों ने इस बार मैच के इर्द-गिर्द चर्चा को और बढ़ा दिया है। Liverpool और Manchester City की प्रतिद्वंद्विता क्यों है खास? Pep Guardiola और Jurgen Klopp के दौर में Liverpool और Manchester City के बीच Premier League खिताब के लिए कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। दोनों टीमों ने कई सीजन में शानदार प्रदर्शन किया और अंक तालिका में बेहद कम अंतर से खिताब का फैसला हुआ। Liverpool ने कुछ सीजन में 90 से अधिक अंक हासिल किए, लेकिन इसके बावजूद खिताब की दौड़ में Manchester City से पीछे रह गया। इसी इतिहास के कारण मौजूदा वित्तीय विवाद के बाद पुराने सीजन और दोनों क्लबों की उपलब्धियां एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई हैं। Guardiola के दौर में Liverpool ने दी कड़ी चुनौती Manchester City के मजबूत दौर में Liverpool उन टीमों में शामिल रहा जिसने उसे लगातार कड़ी टक्कर दी। दोनों क्लबों के बीच प्रतिस्पर्धा Premier League तक सीमित नहीं रही, बल्कि घरेलू कप प्रतियोगिताओं और यूरोपीय मुकाबलों में भी दोनों टीमें आमने-सामने आईं। यही वजह है कि दोनों क्लबों के बीच होने वाले मुकाबले को केवल तीन अंकों की लड़ाई के रूप में नहीं देखा जाता। प्रशंसकों के लिए यह मैच लंबे समय से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता का भी प्रतीक है। Enzo Maresca ने क्लब का किया बचाव Manchester City के मैनेजर Enzo Maresca ने फैसले के बाद क्लब के नेतृत्व पर भरोसा जताया। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने City के पुराने खिताबों को विवादित मानने से इनकार किया और कहा कि खिलाड़ियों ने मैदान पर प्रदर्शन के दम पर उपलब्धियां हासिल कीं। क्लब की ओर से यह रुख ऐसे समय में सामने आया है, जब वित्तीय नियमों के उल्लंघन से जुड़े निष्कर्षों के बाद उसकी उपलब्धियों पर बहस तेज हो गई है। Erling Haaland ने प्रशंसकों से एकजुट रहने की अपील की Manchester City के स्टार स्ट्राइकर Erling Haaland ने भी फैसले के बाद समर्थकों को संदेश दिया। उन्होंने प्रशंसकों से सकारात्मक बने रहने और क्लब के साथ एकजुटता बनाए रखने की अपील की। अपील और संभावित कार्रवाई पर अंतिम निर्णय आने तक क्लब के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है। ऐसे में टीम और उसके समर्थकों की नजर अब मैदान पर प्रदर्शन के साथ मामले की कानूनी प्रक्रिया पर भी रहेगी। Liverpool को Isak और Gakpo की चोट से झटका मुकाबले से पहले Liverpool को Alexander Isak और Cody Gakpo की चोटों के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों खिलाड़ी Manchester City के खिलाफ मुकाबले में उपलब्ध नहीं होंगे। इन खिलाड़ियों की अनुपस्थिति से Liverpool के आक्रमण के विकल्प प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में टीम को अपनी रणनीति और शुरुआती एकादश में बदलाव करने पड़ सकते हैं। Haaland मुकाबले के लिए उपलब्ध Manchester City के लिए राहत की बात यह है कि Erling Haaland के Anfield मुकाबले के लिए फिट होने की खबर है। उनकी मौजूदगी टीम के आक्रमण को मजबूती दे सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, मुकाबले से पहले City लीग में अपराजित थी और Liverpool से छह अंक आगे चल रही थी। ऐसे में यह मैच अंक तालिका के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Anfield में तीखे माहौल की संभावना वित्तीय विवाद के बाद Anfield में Manchester City को प्रशंसकों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। Liverpool और City के समर्थकों के बीच पहले से ही कड़ी प्रतिद्वंद्विता रही है। हालांकि, स्टेडियम का वास्तविक माहौल मैच के दौरान ही स्पष्ट होगा। इतना तय है कि वित्तीय नियमों से जुड़ा विवाद इस मुकाबले की चर्चा में अहम भूमिका निभाएगा। पुराने खिताबों और उपलब्धियों पर फिर बहस आयोग के फैसले के बाद Manchester City के पुराने खिताबों और उपलब्धियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में ट्रॉफियां वापस लेने या पुराने लीग परिणामों को बदलने का कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। क्लब की अपील का परिणाम आगे की…

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Riyadh Airport पर Houthi हमले के बाद Air India, IndiGo और Akasa Air ने उड़ानें रोकीं

रियाध: सऊदी अरब की राजधानी रियाध के King Khalid International Airport पर Houthi मिसाइल हमलों के बाद कई अंतरराष्ट्रीय और भारतीय एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं। Air India, Air India Express, IndiGo और Akasa Air ने रियाध आने-जाने वाली सेवाओं पर रोक लगाई है। वहीं, Lufthansa Group ने भी सुरक्षा चिंताओं के चलते अपनी उड़ानें स्थगित करने का फैसला किया है। Houthi समूह ने हमले की जिम्मेदारी ली यमन के ईरान समर्थित Houthi समूह ने रियाध एयरपोर्ट पर बैलिस्टिक मिसाइल हमला करने का दावा किया। रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब की सुरक्षा एजेंसियों ने कुछ मिसाइलों को रोकने की कार्रवाई की, लेकिन एयरपोर्ट परिसर में खड़े एक विमान को गंभीर नुकसान पहुंचा। इस घटना के बाद क्षेत्र में विमानन सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। Saudia Airlines के विमान को भारी नुकसान रिपोर्टों के अनुसार, इंटरसेप्ट की गई मिसाइल या प्रोजेक्टाइल का मलबा एयरपोर्ट टर्मिनल के पास खड़े Saudia Airlines के विमान पर गिरा। इसके बाद विमान में आग लग गई और उसे काफी नुकसान पहुंचा। उपलब्ध रिपोर्टों में उस समय विमान में यात्रियों की मौजूदगी की पुष्टि नहीं की गई है। Air India ने 10 अक्टूबर तक उड़ानें रद्द कीं Air India ने सुरक्षा स्थिति को देखते हुए रियाध के लिए अपनी उड़ानें 10 अक्टूबर तक रद्द करने की घोषणा की। दिल्ली से रियाध जा रही Air India की फ्लाइट AI2243 को भी बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा। विमान दिल्ली में सुरक्षित उतर गया। एयरलाइन ने प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था और टिकट संबंधी विकल्प उपलब्ध कराने की जानकारी दी है। Air India Express की सेवाएं भी प्रभावित Air India Express ने भी रियाध से जुड़ी अपनी उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इससे सऊदी अरब और भारत के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों की योजनाएं प्रभावित हुई हैं। एयरलाइन प्रभावित यात्रियों को मुफ्त रीशेड्यूलिंग या पूर्ण रिफंड जैसे विकल्प दे रही है। IndiGo ने 9 अक्टूबर तक उड़ानें रद्द कीं IndiGo ने रियाध आने-जाने वाली उड़ानों को 9 अक्टूबर तक रद्द करने का फैसला किया। एयरलाइन ने यात्रियों को एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का मौजूदा स्टेटस जांचने की सलाह दी है। सुरक्षा स्थिति के आधार पर उड़ानों के संचालन में आगे भी बदलाव हो सकता है। Akasa Air ने भी सेवाएं रोकीं Akasa Air ने भी रियाध में अपने उड़ान संचालन पर अस्थायी रोक लगा दी है। Kochi-Riyadh मार्ग की उड़ानें भी इस फैसले से प्रभावित हुई हैं। एयरलाइन स्थिति पर नजर रख रही है और यात्रियों को अपनी यात्रा से जुड़ी जानकारी आधिकारिक माध्यमों से जांचने की सलाह दी गई है। Lufthansa ने 16 अक्टूबर तक बढ़ाया निलंबन जर्मन एयरलाइन समूह Lufthansa ने रियाध के लिए अपनी उड़ानें 16 अक्टूबर तक निलंबित करने की घोषणा की है। कंपनी ने मध्य पूर्व में सुरक्षा से जुड़े हालिया घटनाक्रम को इस फैसले की वजह बताया है। अलग-अलग एयरलाइंस की ओर से घोषित निलंबन की अवधि अलग है, इसलिए यात्रियों को अपनी संबंधित उड़ान की जानकारी अलग से जांचनी चाहिए। बड़ी संख्या में उड़ानें प्रभावित रियाध एयरपोर्ट पर हमले और उसके बाद लागू सुरक्षा उपायों के कारण कई उड़ानें प्रभावित हुईं। रिपोर्टों के मुताबिक, गुरुवार को निर्धारित आगमन और प्रस्थान सेवाओं के बड़े हिस्से पर असर पड़ा। कुछ समय के लिए एयरपोर्ट संचालन भी बाधित हुआ। इस व्यवधान से अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के साथ-साथ भारत और सऊदी अरब के बीच यात्रा करने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। सऊदी अरब के अन्य एयरपोर्ट भी निशाने पर रियाध के अलावा सऊदी अरब के अन्य हवाई अड्डों पर भी हाल के दिनों में हमलों की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस सप्ताह एयरपोर्ट से जुड़ी घटनाओं में तीन लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए। लगातार हो रही घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा और नागरिक विमानन सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारत ने हमलों की निंदा की भारत ने सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर हुए हमलों की निंदा करते हुए उन्हें अस्वीकार्य बताया है। भारत सरकार ने नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई और सऊदी अरब की सुरक्षा तथा संप्रभुता के प्रति समर्थन दोहराया। भारतीय दूतावास ने जारी की एडवाइजरी रियाध स्थित भारतीय दूतावास ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे एयरपोर्ट जाने से पहले संबंधित एयरलाइन से अपनी उड़ान की स्थिति की पुष्टि करें। जिन यात्रियों की यात्रा आने वाले दिनों में रियाध से जुड़ी है, उन्हें एयरलाइन की सूचनाओं और एयरपोर्ट के आधिकारिक अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है। यमन संघर्ष से बढ़ा क्षेत्रीय तनाव यमन में जारी संघर्ष और Houthi समूह की ओर से सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने क्षेत्रीय तनाव बढ़ा दिया है। इसका असर विमानन सेवाओं के साथ-साथ व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। यात्रियों के लिए जरूरी सलाह रियाध की यात्रा करने वाले यात्रियों को एयरपोर्ट रवाना होने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर जांचना चाहिए। उड़ान रद्द होने या समय में बदलाव की स्थिति में संबंधित एयरलाइन से रिफंड, रीशेड्यूलिंग और वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था की जानकारी लें। सुरक्षा स्थिति के आधार पर उड़ानों के निलंबन की अवधि बढ़ाई जा सकती है, इसलिए यात्रा से पहले नवीनतम आधिकारिक अपडेट देखना जरूरी है। स्रोत: Reuters, The Indian Express और भारतीय दूतावास, रियाध जय राष्ट्र न्यूज़

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आने वाले महीनों में बड़ा खाद्य संकट? जयशंकर ने जताई चिंता, fertiliser shortage और El Niño को बताया खतरा

न्यूयॉर्क: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि आने वाले महीनों में दुनिया बड़े खाद्य संकट का सामना कर सकती है। उन्होंने Ukraine war, Iran-Gulf conflict, प्रमुख अनाज निर्यातक देशों की बाधित आपूर्ति, उर्वरकों की कमी और Super El Niño को इसके प्रमुख कारणों में गिनाया। जयशंकर ने कहा कि इन संकटों का सबसे ज्यादा असर Global South की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। प्रमुख अनाज निर्यातक देशों की आपूर्ति पर खतरा जयशंकर ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक संघर्षों के कारण कुछ बड़े अनाज निर्यातक देश अपनी नियमित खेप भेजने में सक्षम नहीं हो सकते। इससे अंतरराष्ट्रीय खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ सकता है और आयात पर निर्भर देशों में खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं। Fertiliser shortage भी बड़ी चिंता उन्होंने वैश्विक उर्वरक संकट को भी गंभीर समस्या बताया। उर्वरकों की कमी सीधे कृषि उत्पादकता को प्रभावित कर सकती है। इससे आने वाली फसल चक्रों में उत्पादन घटने और खाद्य महंगाई बढ़ने का जोखिम पैदा हो सकता है। Super El Niño से बढ़ सकता है संकट जयशंकर ने Super El Niño का भी उल्लेख किया। अत्यधिक मौसमी बदलाव, बारिश के पैटर्न में परिवर्तन और सूखे जैसी स्थितियां फसलों की पैदावार तथा खाद्य उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में भू-राजनीतिक व्यवधान और जलवायु संबंधी दबाव मिलकर खाद्य सुरक्षा के लिए दोहरी चुनौती पैदा कर सकते हैं। Ukraine conflict का असर अब भी जारी रूस-यूक्रेन संघर्ष ने वैश्विक अनाज और उर्वरक बाजारों को पहले ही प्रभावित किया है। यूक्रेन और रूस दोनों गेहूं, मक्का तथा उर्वरकों की वैश्विक आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए संघर्ष के कारण निर्यात और परिवहन में आने वाली बाधाओं का असर दुनिया के कई देशों पर पड़ सकता है। Iran-Gulf conflict से ऊर्जा संकट भी गहरा जयशंकर ने कहा कि खाद्य संकट को ऊर्जा संकट से अलग करके नहीं देखा जा सकता। तेल बाजार में आपूर्ति संबंधी दबाव और भू-राजनीतिक तनाव कीमतों को बढ़ा सकते हैं। इससे परिवहन, कृषि मशीनरी और खेती में इस्तेमाल होने वाले अन्य संसाधनों की लागत भी बढ़ सकती है। Global South पर सबसे ज्यादा असर विदेश मंत्री ने कहा कि यूक्रेन और ईरान-खाड़ी क्षेत्र के संघर्षों का विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा है। कम आय वाले देशों के लिए महंगे ईंधन, उर्वरक और आयातित खाद्य पदार्थों की लागत एक साथ संभालना मुश्किल हो सकता है। इससे उनकी अर्थव्यवस्था और आम लोगों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। Energy और food का दोहरा संकट जयशंकर ने मौजूदा स्थिति को ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा दोहरा संकट बताया। एक ओर ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर दबाव है, तो दूसरी ओर अनाज निर्यात और उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित होने का खतरा है। दोनों संकट मिलकर महंगाई और गरीबी बढ़ा सकते हैं। India पर कितना असर? भारत के लिए स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर मानी जा रही है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत में फिलहाल बड़े खाद्य या उर्वरक संकट की आशंका कम बताई गई है। घरेलू भंडार और आपूर्ति प्रबंधन इसमें मददगार हो सकते हैं। हालांकि, वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी का असर आयात लागत और महंगाई के जरिए भारत पर भी पड़ सकता है। Food inflation का खतरा अगर उर्वरकों की लागत, कच्चे तेल और अनाज की कीमतें एक साथ बढ़ती हैं, तो खाद्य महंगाई पर इसका असर दिखाई दे सकता है। गरीब और कम आय वाले परिवार इससे अधिक प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि उनके कुल खर्च का बड़ा हिस्सा भोजन और ऊर्जा पर जाता है। IMF ने भी जीवन-यापन की लागत से जुड़े बार-बार पैदा होने वाले संकटों को गरीबी और महंगाई की उम्मीदों के लिए गंभीर चुनौती बताया है। Global cooperation पर जोर जयशंकर ने इस संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि यदि देश ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति को भू-राजनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं, तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और बढ़ सकती है। आने वाले महीने अहम अब वैश्विक अनाज निर्यात, उर्वरकों की उपलब्धता, El Niño की परिस्थितियों और मध्य पूर्व के ऊर्जा बाजारों पर नजर रहेगी। यदि इन मोर्चों पर हालात बिगड़ते हैं, तो आने वाले महीनों में खाद्य सुरक्षा दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती बन सकती है। जयशंकर की चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब वैश्विक संघर्षों और जलवायु संबंधी जोखिमों के कारण खाद्य आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। Source – The Indian Express, The Times of India, NDTV, IMF जय राष्ट्र न्यूज़

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