Mohan Bhagwat

Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation: क्या सच में मोहन भागवत ने पीएम मोदी को दिए रिटायरमेंट के संकेत?

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत अक्सर अपने बयानों से चर्चा में रहते हैं। इस बार फिर उन्होंने अपने बयान से खलबली मचा दी है। दरअसल, बुधवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में मोरोपंत पिंगले: द आर्किटेक्ट ऑफ हिंदू रिसर्जेंस पुस्तक के विमोचन पर एक सार्वजनिक सभा को संबोधित किया (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) था। इस सभा के दौरान उन्होंने मोरोपंत पिंगले की कही 75 साल में रिटायर होने की बात की थी। उन्होंने यह बात छेड़कर एक नई बहस शुरू कर दी है। इस बीच मजे की बात यह कि नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मोहन भागवत के इस बयान पर  शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने अपनी प्रतिक्रिया दी। संजय राउत ने उनके बयान पर कहा कि “यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर इशारा है।” इस साल सितंबर में 75 साल के होने जा रहे (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) हैं पीएम नरेंद्र मोदी  जानकारी के लिए बता दें कि “इस बयान को लेकर शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने कहा है कि “संघ प्रमुख मोहन भागवत यह संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दे रहे हैं।” इस बीच दिलचस्प बात यह कि पीएम नरेंद्र मोदी इस साल सितंबर में 75 साल के होने जा रहे (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) हैं। बता दें कि संघ प्रमुख भागवत ने अपने बयान में कहा था कि “जब आपको कोई 75 साल का होने पर बधाई देता है, तो इसका अर्थ है कि अब आपको रुक जाना चाहिए और दूसरों को काम करने का मौका देना चाहिए।” अब उनके इस बयान के बाद राउत की प्रतिक्रिया सामने आई। राउत कहा कि “संघ प्रमुख पीएम मोदी को यह संदेश दे रहे हैं।” राउत ने अपनी बात रखते हुए कहा कि “पीएम मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी, जसवंत सिंह, मुरली मनोहर जोशी आदि जैसे नेताओं को जबरन रिटायरमेंट दिलाया, क्योंकि वह 75 साल के हो गए थे। अब देखते हैं कि क्या मोदी इसका पालन खुद भी करेंगे।” संजय राऊत इससे पहले भी मार्च के महीने में प्रधानमंत्री मोदी के रिटायरमेंट को लेकर दावे कर चुके (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) हैं यह कोई पहली बार नहीं हैं जब संजय राऊत ने पीएम मोदी के रिटायरमेंट पर कटाक्ष न किया हो। इससे पहले भी मार्च के महीने में वो प्रधानमंत्री मोदी के रिटायरमेंट को लेकर दावे कर चुके (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) हैं। गौरतलब हो कि जब प्रधानमंत्री संघ मुख्यालय के दौरे पर नागपुर आए थे, तब उन्होंने कहा था कि “पीएम मोदी अपने रिटायरमेंट का ऐलान करने के लिए आरएसएस के नागपुर मुख्यालय गए।” दरअसल, संजय राउत का मानना था कि पीएम मोदी बीते 10-11 सालों में आरएसएस मुख्यालय नहीं गए, संभवतः इसलिए यह दौरा उनके आगामी राजनीतिक भविष्य के लिए अहम था। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 साल का होने के बाद भी सक्रिय राजनीति से रिटायर नहीं (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) होंगे- अमित शाह  बता दें कि पिछले वर्ष मई में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया था कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 साल का होने के बाद भी सक्रिय राजनीति से रिटायर नहीं (Mohan Bhagwat Comments on PM Modi’s Retirement Speculation) होंगे।” शाह ने कहा था कि “मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि भाजपा के संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। मोदी 2029 तक देश की अगुवाई करेंगे और मोदी आने वाले चुनावों में भी नेतृत्व करेंगे।” विपक्षी गठबंधन पर तंज कसते हुए गृहमंत्री ने कहा कि “इंडिया गठबंधन के लिए कोई खुशखबरी नहीं है। वो झूठ फैलाकर चुनाव नहीं जीत सकते।” Latest News in Hindi Today Hindi news Mohan Bhagwat #MohanBhagwat #PMModi #RetirementHint #RSS #ModiNews #IndianPolitics #2025Buzz

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India Women vs England

Indian Women Cricket Team ने इंग्लैंड को हराकर रचा इतिहास, T20 सीरीज 3-1 से की अपने नाम

भारतीय महिला क्रिकेट टीम  (Indian Women Cricket Team) ने 2025 की पांच मैचों की टी20 सीरीज (T20 Series) में एक यादगार जीत दर्ज करते हुए इंग्लैंड को चौथे मुकाबले में 6 विकेट से हराकर सीरीज में 3-1 की बढ़त हासिल कर ली है। यह मैच बुधवार को मैनचेस्टर के प्रतिष्ठित ओल्ड ट्रैफर्ड स्टेडियम में खेला गया, जिसमें भारतीय महिला क्रिकेट टीम  (Indian Women Cricket Team) ने न सिर्फ इंग्लैंड को उनके घर में शिकस्त दी, बल्कि अपनी विदेशी धरती पर बहु-मैच द्विपक्षीय T20 सीरीज (Multi-match bilateral T20 series) में पहली बार जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया। पुराने आंकड़े तोड़े, नया इतिहास बनाया इससे पहले भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ कभी भी विदेशी सरजमीं पर बहु-मैच वाली T20 सीरीज (Multi-match bilateral T20 Series) नहीं जीती थी। भारत और इंग्लैंड (India vs England) के बीच पहला टी20 मुकाबला 2006 में डर्बी में हुआ था, जिसमें भारत को जीत मिली थी, लेकिन इसके बाद से अब तक भारत को सभी विदेशी T20 सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही भारत ने लंबे समय से चले आ रहे हार के सिलसिले को तोड़ा है। मैच का संक्षिप्त हाल मैच की शुरुआत इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने के फैसले के साथ हुई। मेज़बान टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में सात विकेट खोकर 126 रन बनाए। भारत की ओर से एन चारिणी और राधा यादव ने शानदार गेंदबाजी की और दो-दो विकेट चटकाए, जबकि अमनजोत कौर और दीप्ति शर्मा को एक-एक सफलता मिली। इंग्लैंड के लिए सोफिया डंकली ने सबसे ज्यादा 22 रन बनाए। एलिस कैप्सी ने 18, टैमसिन ब्यूमॉन्ट ने 20 और पेज स्कोलफील्ड ने 16 रनों की छोटी लेकिन अहम पारियां खेलीं। अंतिम ओवरों में सोफी एक्लेस्टोन  ने 16 और इसी वोंग  ने 11 ररन तेजी से बनाये, जिससे इंग्लैंड की टीम (England Team) 126 के स्कोर तक पहुंच सकी। भारतीय बल्लेबाज़ों का दमदार प्रदर्शन 127 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय महिला टीम (Indian Women Cricket Team) की शुरुआत धमाकेदार रही। सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा ने आक्रामक अंदाज़ में रन बनाना शुरू किया और पहले विकेट के लिए 56 रनों की साझेदारी की। शेफाली ने मात्र 19 गेंदों में 31 रन बनाए, जिसमें छह चौके शामिल थे। मंधाना ने भी 31 गेंदों में 32 रन बनाकर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। जेमिमा रोड्रिग्स और कप्तान हरमनप्रीत कौर (Captain Harmanpreet Kaur) ने तीसरे विकेट के लिए 48 रनों की साझेदारी कर इंग्लैंड की वापसी की सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। हरमनप्रीत 25 रन बनाकर आउट हुईं, लेकिन जेमिमा ने नाबाद रहते हुए टीम (T20 Series) को लक्ष्य तक पहुंचा दिया। उन्होंने 22 गेंदों में 24 रन बनाए, जबकि ऋचा घोष सात रन बनाकर नाबाद रहीं। सीरीज का अंतिम मुकाबला यह जीत भारत के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक रही, लेकिन अब सभी की निगाहें 12 जुलाई को बर्मिंघम में होने वाले पांचवें और अंतिम मुकाबले पर टिकी हैं। भले ही भारत सीरीज पहले ही अपने नाम कर चुका हो, लेकिन क्लीन स्वीप के इरादे से टीम पूरी ताकत झोंकने को तैयार है। वहीं, इंग्लैंड की टीम सम्मान बचाने के लिए उतरेगी। टीम इंडिया की रणनीति की जीत इस मुकाबले में भारत की जीत का श्रेय उनके संतुलित प्रदर्शन को जाता है। गेंदबाजी में जहां स्पिनर्स ने दबाव बनाया, वहीं बल्लेबाजी में संयम और आक्रामकता का अच्छा संतुलन देखने को मिला। कोचिंग स्टाफ और सपोर्ट टीम की रणनीति और खिलाड़ियों की फॉर्म ने मिलकर टीम को ऐतिहासिक सफलता दिलाई। इसे भी पढ़ें:- IPL का पहला खिताब जीतने के बाद विराट कोहली और विजय माल्या ने कही यह बात महिला क्रिकेट को मिली नई पहचान इस जीत के साथ भारतीय महिला क्रिकेट (Indian Women Cricket Team) ने यह भी साबित किया है कि वे अब विश्व स्तर पर किसी भी टीम को चुनौती देने में सक्षम हैं। लगातार बेहतर प्रदर्शन से न केवल महिला खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि भारत में महिला क्रिकेट (Women’s Cricket) की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ रही है। यह जीत सिर्फ एक मैच की नहीं, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम के उभरते आत्मबल और क्षमता की कहानी है। यह संकेत है कि अब वक्त आ गया है, जब महिला क्रिकेट (Women’s Cricket) को पुरुषों के बराबर सम्मान और समर्थन मिलना चाहिए। Latest News in Hindi Today Hindi news T20 Series #IndiaWomen #T20Series #HistoricWin #CricketNews #INDvsENG

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married woman murder

Lover Kills Married Girlfriend to Escape Marriage Trouble: शादी में बाधा बन रही थी विवाहिता प्रेमिका, शराब पिलाकर प्रेमी ने किया कत्ल, इस तरह खुला राज़

प्रेमी और प्रेमिका एक दूसरे से प्रेम तो करते हैं, लेकिन कहीं न कहीं उनके प्रेम में कहीं न कहीं खोट जरूर होता है। और यही खोट आगे चलकर एक दूसरे की जान की आफत बन जाता है। कुछ इसी तरह का मामला है यूपी के कौशांबी जिले का, जहाँ एक प्रेम कहानी का दुखद अंत हो गया। दरअसल, एक प्रेमी ने शादी में बाधा बन रही विवाहिता प्रेमिका की बेरहमी से हत्या कर (Lover Kills Married Girlfriend to Escape Marriage Trouble) दी। और हत्या कर शव को यमुना में फेंक दिया। घटना मोहब्बत पुर स्थित पइंसा थाना क्षेत्र की है। इस पूरे मामले पर पुलिस ने बताया कि “मोबाइल कॉल रिकॉर्डिंग से मामले का इस पूरे हत्याकांड का खुलासा हुआ। खुलासे के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। गांव के ही रहने वाले अविवाहित भूप सिंह यादव से थे (Lover Kills Married Girlfriend to Escape Marriage Trouble) अनीता के अवैध संबंध  इस घटना पर पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने बताया कि “पइंसा थाना क्षेत्र के खूजा गांव की रहने वाली अनीता का पति रामराज निर्मल, मुंबई में काम करता है। पति के दूर रहने के कारण गांव के ही रहने वाले अविवाहित भूप सिंह यादव से उसके अवैध संबंध (Lover Kills Married Girlfriend to Escape Marriage Trouble) थे। भूप सिंह अक्सर अनीता को जमीन, ट्रैक्टर और ट्यूबेल अनीता के नाम पर करने का लालच दिया करता था। वो सिर्फ उसे प्रेम के नाम पर धोखा दे रहा था। इस तरह दिन बीतते गए। इस बीच दोनों के रिश्ते ने नया मोड़ तब लिया, जब भूप सिंह की शादी की बात चली और अनीता उसकी शादी का विरोध करने लगी। विरोध करना जायज़ ही था। वो अनीता को शादी का झांसा जो दे रहा था। इसी कड़ी में अनीता से शादी को किनारा करने के लिए ही भूप सिंह ने नवंबर, 2024 में उसे फतेहपुर में किराए का कमरा दिलवा दिया। अब वहां वो बतौर पति उसके साथ वहां रहने लगा। अनीता उसके साथ यहाँ 11 दिसंबर, 2025 तक वहां रही। फिर एक दिन अचानक अनीता का मोबाइल अचानक बंद हो गया।  उसे शक था कि अनीता देवी का दूसरे पुरुषों से भी था (Lover Kills Married Girlfriend to Escape Marriage Trouble) संबंध  इस तरह अचानक मोबाइल बंद होने से अनीता के पति रामराज निर्मल ने 18 जून, 2025 को थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया गया कि “भूप सिंह ने उसकी पत्नी अनीता को कहीं छुपा दिया है।” स्थानीय पुलिस ने बीएनएस की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर एक टीम गठित कर दी। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि “बुधवार को मुखबिर की सूचना पर आरोपी भूप सिंह को गिरफ्तार (Lover Kills Married Girlfriend to Escape Marriage Trouble) किया। शुरुआत में तो उसने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन पुलिसिया धमक के आगे वो जल्द ही टूट गया। पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि “उसे शक था कि अनीता देवी का दूसरे पुरुषों से भी संबंध था।” पूछताछ में उसने ये भी बताया कि “उसे अपनी जाति बिरादरी में शादी करनी थी, जिसमें अनीता बाधक बन रही थी।” उसके अनुसार उसने अनीता को रास्ते से हटाने के लिए दिसंबर, 2024 को पहले तो उसे खुद शराब पिलाई। शराब पिलाने के बाद उसकी हत्या कर दी। और हत्या करने के बाद शव को यमुना में फेंक दिया। पुलिस के अनुसार भूप सिंह ने बताया कि अनीता उससे जबरन शादी चाहती थी।  इसे भी पढ़ें:- ठाणे स्कूल में पीरियड्स जांच के नाम पर छात्राओं का अपमान  महिला के शव की तलाश की जा रही (Lover Kills Married Girlfriend to Escape Marriage Trouble) है पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने बताया कि युवक किसी और से शादी करना चाहता (Lover Kills Married Girlfriend to Escape Marriage Trouble) था। जब यह बात उसने अपने प्रेमिका से बताई, तो उसने शादी नहीं करने के एवज में ट्यूबवेल, जमीन और ट्रैक्टर की मांग की। इसे लेकर युवक ने महिला की हत्या की साजिश रचनी शुरू कर दी। इस सिलसिले में उसने पहले उसे शराब पिलाई और फिर महेवाघाट इलाके में ले जाकर उसकी हत्या कर दी। और लाश को यमुना नदी में फेंक दिया। खैर, गिरफ्तारी के बाद आरोपी भूप सिंह यादव ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पुलिस ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। महिला के शव की तलाश की जा रही है।  Latest News in Hindi Today Hindi Lover Kills Married Girlfriend to Escape Marriage Trouble #loverkills #marriedgirlfriend #relationshipcrime #murdernews #trendingcrime #crimeupdate #breakingnews #indiacrime #lovetriangle #murdercase

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Thane School Girls Humiliated Over Periods Check

ठाणे स्कूल में पीरियड्स जांच के नाम पर छात्राओं का अपमान 

ठाणे के शाहपुर इलाके में एक स्कूल में जो कुछ हुआ, उसने समाज की सोच और स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल प्रशासन ने केवल एक खून के धब्बे के आधार पर दस से अधिक छात्राओं के कपड़े उतरवाकर यह जांचने की कोशिश की कि कौन सी लड़की पीरियड्स (Menstrual Cycle) में है। इस घटना के बाद छात्रों के माता-पिता में भारी आक्रोश फैल गया, जिसके चलते पुलिस ने स्कूल की प्रिंसिपल, एक आया, चार शिक्षकों और दो ट्रस्टियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जांच की जा रही है। बाथरूम में खून के धब्बे से शुरू हुआ मामला मामला मंगलवार का है जब स्कूल के बाथरूम में खून के धब्बे दिखाई दिए। इसके बाद यह बात टीचरों तक पहुंची। हैरानी की बात यह रही कि छात्राओं के पीरियड्स (Menstrual Cycle) की जानकारी पूछ कर ली जा सकती थी, लेकिन जिस तरह से स्कूल की प्रिंसिपल (School Principal) समेत अन्य स्टाफ की मानसिक सोच अमानवीय और असंवेदनशील है। स्कूल की प्रिंसिपल समेत अन्य स्टाफ ने क्लास 5 से 10 तक की सभी लड़कियों को एक बड़े हॉल में बुलाया, जहां एक बड़ी स्क्रीन पर बाथरूम में मिले खून के धब्बे दिखाए गए। इसके बाद लड़कियों से पूछा गया कि कौन-कौन पीरियड्स (Menstrual Cycle) में है। जिन्होंने हाथ उठाया, उनके नाम लिख लिए गए। लेकिन जिन लड़कियों ने हाथ नहीं उठाया, उन्हें एक-एक कर बाथरूम में ले जाया गया और आया द्वारा उनकी जबरन जांच कराई गई। इस दौरान कई छात्राओं को न केवल मानसिक तनाव (Mental Stress) से गुजरना पड़ा, बल्कि उनके आत्मसम्मान को भी गहरी चोट पहुंची। एक छात्रा की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उनकी बेटी से प्रिंसिपल ने जबरदस्ती पूछताछ की कि वह पीरियड्स में नहीं होते हुए पैड क्यों पहन रही है। जब छात्रा ने जवाब देने की कोशिश की, तो प्रिंसिपल ने उसे झूठा ठहराया और जबरन उसका अंगूठा लेकर एक कथित बयान पर निशान भी लिया। माता-पिता का गुस्सा फूटा घटना के बाद जब छात्राएं घर पहुंचीं तो कई लड़कियां रोते हुए अपने माता-पिता से मिलीं और पूरा वाकया बताया। बुधवार को गुस्साए अभिभावकों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है। पुलिस की ओर से बताया गया है कि सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा। इसके साथ ही पुलिस छात्राओं की गवाही ली जा रही है और आगे की जांच जारी है। इसे भी पढ़ें:- आरसीबी के तेज गेंदबाज यश दयाल पर यौन शोषण का केस दर्ज स्कूल की लापरवाही  यह घटना केवल एक स्कूल की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है कि किशोरियों के यौन स्वास्थ्य और निजता को लेकर कितनी असंवेदनशीलता अब भी मौजूद है। मासिक धर्म (Menstrual Cycle) कोई अपराध नहीं है और इसे लेकर शर्म या अपमान की भावना पैदा करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि एक शैक्षणिक संस्थान जो बच्चों के भविष्य की नींव रखता है, वह बच्चों की गरिमा को इस हद तक कुचल सकता है। बच्चों की मानसिक स्थिति, आत्मसम्मान और विश्वास को झकझोरने वाला यह मामला कहीं न कहीं स्कूल प्रशासन की विफलता और सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करता है। अब ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या शिक्षा मंत्रालय को ऐसे मामलों पर तुरंत हस्तक्षेप कर एक गाइडलाइन जारी नहीं करनी चाहिए?   Latest News in Hindi Today Hindi Menstrual Cycle #ThaneSchool #PeriodsCheck #GirlsRights #SchoolControversy #StudentAbuse

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Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid

Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension: 50 फीसदी टैरिफ लगाने पर ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने ट्रंप दी यह चेतावनी 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिरवैश्विक व्यापार पर कड़ा कदम उठाते हुए एक साथ कई देशों पर भारी टैरिफ लगाने का ऐलान किया। सबसे पहले उन्होंने लीबिया, अल्जीरिया, इराक, श्रीलंका (30%), ब्रुनेई, मोल्दोवा (25%) और फिलीपींस (20%) पर आयात शुल्क लगाने की घोषणा की। इसके बाद उन्होंने ब्राजील पर भी 50 प्रतिशत का सीधा टैरिफ थोप (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) दिया। जानकारी के लिए बता दें कि ये सभी शुल्क 1 अगस्त से लागू होंगे। इस बीच ट्रंप की घोषणा के चंद घंटों बाद ही ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आँख दिखाते हुए अमेरिका को आर्थिक जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। गुस्से से लाल सिल्वा ने दो टूक कहा कि “यदि अमेरिका ने ब्राजील पर एकतरफा तौर पर टैरिफ बढ़ाया तो ब्राजील भी उसी स्तर पर जवाबी कदम उठाएगा। गौरतलब हो कि ट्रंप ने यह फैसला ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के साथ हो रहे व्यवहार के संदर्भ में लिया बताया। बता दें कि बोलसोनारो इस समय तख्तापलट की साजिश रचने के आरोपों में मुकदमे का सामना कर रहे हैं।  अगर कोई देश एकतरफा रूप से टैरिफ बढ़ाता है तो ब्राजील उसकी प्रतिक्रिया आर्थिक पारस्परिकता कानून के तहत (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) देगा इस बीच ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा के ऑफिस ने अमेरिकी टैरिफ के जवाब में सख्त रुख अपनाते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया। अपनी राय रखते हुए उन्होंने कहा कि “अगर कोई देश एकतरफा रूप से टैरिफ बढ़ाता है तो ब्राजील उसकी प्रतिक्रिया आर्थिक पारस्परिकता कानून के तहत (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) देगा।” कहने की जरूरत नहीं, उनके इस बयान के बाद अमेरिका और ब्राजील के बीच संभावित व्यापार युद्ध की आशंका और गहरा गई है। दरअसल, ट्रंप का आरोप है कि ब्राजील, अमेरिका के साथ निष्पक्ष व्यापार नहीं कर रहा। बता दें कि ट्रंप की घोषणा के बाद ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दो टूक कहा कि “ब्राजील एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है, जो किसी भी तरह की बाहरी दखलअंदाजी को स्वीकार नहीं करेगा।” लूला ने यह भी लिखा कि “ब्राजील एक संप्रभु राष्ट्र है, जिसकी अपनी स्वतंत्र संस्थाएं हैं। हम किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को मान्यता नहीं देंगे।” देश में काम कर रही सभी कंपनियों, चाहे वे घरेलू हों या विदेशी, सभी को ब्राजील के कानूनों का पूरी तरह पालन करना (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) होगा इस बीच राष्ट्रपति लूला ने यह भी स्पष्ट किया कि “पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह ब्राजील की न्यायपालिका के अधीन है और इस पर कोई बाहरी दबाव असर नहीं (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) डालेगा। उन्होंने कहा कि “तख्तापलट की साजिश में शामिल लोगों पर चल रहे मुकदमे हमारे न्याय तंत्र के अधिकार क्षेत्र में हैं। इन्हें किसी धमकी या बाहरी हस्तक्षेप से प्रभावित नहीं किया जा सकता।” इस दौरान उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी अपना रुख साफ करते हुए कहा कि “ब्राजील में स्वतंत्रता का मतलब नफरत, हिंसा या अपमानजनक भाषा फैलाने की छूट नहीं है। राष्ट्रपति ने ब्राजील के कानूनों पर जोर देते हुए कहा कि “सरकार किसी भी प्रकार की ऑनलाइन हेट स्पीच, नस्लवाद, बाल शोषण या अन्य अपराधों को बर्दाश्त नहीं करेगी। देश में काम कर रही सभी कंपनियों, चाहे वे घरेलू हों या विदेशी, सभी को ब्राजील के कानूनों का पूरी तरह पालन करना होगा।” इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ डोनाल्ड ट्रंप ने ब्राजील पर टैरिफ लगाने के अपने फैसले को (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) ठहराया जायज  डोनाल्ड ट्रंप ने ब्राजील पर टैरिफ लगाने के अपने फैसले को जायज (Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension) ठहराया। न सिर्फ जायज ठहराया बल्कि उलटे ब्राजील पर आरोप लगाया कि “ब्राजील ने अमेरिकी चुनावों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला किया है।” जवाब में ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने ट्रंप के आरोपों को निराधार और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने वाला बताते हुए कहा कि “पिछले 15 सालों में अमेरिका और ब्राजील के बीच व्यापार संतुलन अमेरिका के पक्ष में रहा है। अमेरिका को इस दौरान कुल 410 अरब डॉलर का लाभ हुआ है और यह कोई दावा नहीं, बल्कि खुद अमेरिकी सरकारी आंकड़े बताते हैं।” Latest News in Hindi Today Hindi news Lula Warns Trump Over 50% Tariff Amid Trade Tension #LulaDaSilva #TrumpTariff #TradeTensions #BrazilUSRelations #GlobalTrade

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Delhi Bumper Recruitment 2025

दिल्ली में बंपर भर्ती: जेल वार्डर समेत 2000 से अधिक पोस्ट्स के लिए कर सकते हैं अप्लाई

दिल्ली में सरकारी नौकरी पाने का सपना देखने वाले लोगों के लिए अब एक बेहतरीन अवसर है। दिल्ली सबऑर्डिनेट सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (Delhi Subordinate Service Selection Board) यानी डीएसएसएसबी (DSSSB) ने एक नई नोटिफिकेशन जारी की है। इस नोटिफिकेशन के अनुसार डीएसएसएसबी (DSSSB) ने 2000 से भी अधिक पोस्ट्स निकाली हैं। यह पोस्ट्स मलेरिया इंस्पेक्टर, पीजीटी, जेल वार्डर आदि की हैं। अगर आप इसके लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो ध्यान रखें कि 8 जुलाई से इसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अगर आप इसके बारे में अधिक जानना चाहते हैं तो दिल्ली सबऑर्डिनेट सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (Delhi Subordinate Service Selection Board) की ऑफिशियल वेबसाइट पर जा सकते हैं। इसके साथ ही आप इसके माध्यम से ऑनलाइन अप्लाई भी कर सकते हैं। आइए जानें इसके बारे में। डीएसएसएसबी द्वारा निकाली पोस्ट्स (Posts by DSSSB) के बारे में पाएं जानकारी दिल्ली सबऑर्डिनेट सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (Delhi Subordinate Service Selection Board) ने लगभग 2119 पोस्ट्स निकाली हैं और यह बात जानना आपके लिए जरूरी है कि इसके लिए अप्लाई आप केवल 7 अगस्त तक कर सकते हैं। उसके बाद यह प्रोसेस बंद हो जायेगी और इसके लिए आपको अप्लाई करने का मौका नहीं मिलेगा।  डीएसएसएसबी द्वारा निकाली पोस्ट्स (Posts by DSSSB) की डिटेल्स डीएसएसएसबी द्वारा निकाली पोस्ट्स (Posts by DSSSB) के लिए विभिन्न पोस्ट्स के लिए कैंडिडेट को आवश्यक योग्यता और अनुभव की जरूरत होगी। इन 2119 पोस्ट्स की डिटेल इस प्रकार है: इनके बारे में अधिक जानकारी आपको दिल्ली सबऑर्डिनेट सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (Delhi Subordinate Service Selection Board) की ऑफिशियल वेबसाइट पर मिल जाएगी। कैसे करें अप्लाई? डीएसएसएसबी (DSSSB) द्वारा निकाली पोस्ट्स (Posts by DSSSB) के लिए अप्लाई करने से पहले यह जानना भी आपके लिए जरूरी है कि जनरल और अन्य कुछ केटेगरी के कैंडिडेट्स के लिए इसकी एप्लीकेशन फीस केवल 100 रुपए है। जबकि, अन्य कुछ वर्गों और महिलाओं के लिए यह पूरी तरह से फ्री है। यानी, उन्हें इन पोस्ट्स के लिए अप्लाई करने के लिए कुछ भी पे नहीं करना होगा। इसके लिए आप इस तरह से अप्लाई कर सकते हैं: इसे भी पढ़ें:- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट कैसे बनें? डीएसएसएसबी (DSSSB) की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं। इसका लिंक आपको गूगल पर सर्च करने पर भी मिल जाएगा। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi news DSSSB #DelhiJobs #GovtJobs2025 #JailWarderRecruitment #SarkariNaukri #JobAlert #ApplyNow

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Chirag Paswan's Dual Strategy

बिहार में एनडीए के साथ भी और खिलाफ भी… चिराग पासवान आखिर किस तरह की राजनीति कर रहे?

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) इस साल अक्टूबर-नवंबर माह में हो सकती है। चुनाव से पहले एनडीए (NDA) और महागठबंधन, दोनों अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटी हैं। लेकिन इन सबके बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान (Chirag Paswan) के बदले-बदले तेवरों ने सियासी हलकों में खलबली मचा दी है। एक तरफ जहां विपक्षी महागठबंधन के दल और वाम दल एकजुट होकर वोटर लिस्ट के गहन पुनरीक्षण के विरोध में सड़कों पर उतर एकजुटता का प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं एनडीए (NDA) के अंदर चिराग पासवान (Chirag Paswan) की बयानबाजी जेडीयू (JDU) के लिए सिरदर्द बनती जा रही हैं। चिराग पासवान (Chirag Paswan) लगातार यह दोहरा रहे हैं कि उनकी पार्टी राज्य की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। आरा से लेकर सारण तक अपनी रैलियों में वह यही संदेश दे रहे हैं कि उनका गठबंधन बिहार की जनता से है, न कि किसी दल विशेष से। वहीं गोपाल खेमका हत्याकांड को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कानून-व्यवस्था पर भी सरकार को घेरा। चिराग पासवान यह बयानबाजी ऐसे समय में कर रहे हैं, जब वे भाजपा (BJP) के गढ़ माने जाने वाले इलाकों में अपनी पार्टी का विस्तार कर रहे हैं। आरा और सारण जैसे इलाकों में अभी एलजेपी (रामविलास) का कोई राजनीतिक आधार नहीं है। राजनीति में दबाव की रणनीति अपना रहे चिराग चिराग पासवान के इस आक्रामक रुख को राजनीतिक जानकार सीट शेयरिंग से पहले की दबाव बनाने वाली राजनीति के रूप में देख रहे हैं। चिराग पासवान विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) के लिए 40 से 60 सीटें मांग रहे हैं, लेकिन एनडीए (NDA) उन्हें 33 से 35 सीटें ही देना चाहती है। ऐसे में चिराग पासवान अब अपनी ही सहयोगी पार्टियों को घेरने में जुट गए हैं। राजनीतिक जानकारों यह सवाल जरूर कर रहे है कि विधानसभा में जहां पार्टी का कोई भी प्रतिनिधि नहीं है, वहां उसे इतनी सीटें एनडीए किस आधार पर दे दे मिलें? हलांकि यह बात जरूर है कि पिछले लोकसभा चुनाव में एलजेपीआर को पांच में से पांच सीटों पर जीत मिली थी, जो उनके संगठन और वोट बैंक को कुछ हद तक वैधता देती है। लेकिन विधानसभा चुनाव की प्रकृति और गणित अलग होती है। नीतीश कुमार के लिए बड़ी चुनौती  चिराग पासवान (Chirag Paswan) अपनी सभाओं में भाजपा (BJP) की आलोचना के बजाय जेडीयू की आलोचना कर रहे हैं। चिराग की यह कोई नई रणनीति नहीं है। 2020 के विधानसभा चुनाव में भी जब चिराग एनडीए से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ रहे थे, तब वो पीएम मोदी की खुलकर तारीफ करते हुए खुद को उनका “हनुमान” बताते थे, लेकिन नीतीश कुमार को निशाने पर रखते थे। इस बार भी चिराग के 243 सीटों पर चुनाव लड़ने के दावे को जेडीयू पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में चिराग की पार्टी ने अकेले लड़ते हुए जेडीयू को 33 सीटों पर नुकसान पहुंचाया था। ऐसे में जेडीयू के लिए यह एक राजनीतिक चुनौती भी है और चेतावनी भी। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ भाजपा के गढ़ में जनाधार बढ़ाने में जुटे चिराग  चिराग पासवान (Chirag Paswan) की सबसे ज्यादा सक्रियता भोजपुरी बेल्ट में दिखाई दे रही है, जहां भाजपा का परंपरागत जनाधार रहा है। लेकिन इन जिलों में भाजपा का प्रदर्शन पिछले चुनावों में कुछ कमजोर रहा। मसलन, भोजपुर की सात में से केवल दो सीटों पर ही भाजपा जीत पाई थी। इस स्थिति को चिराग एक अवसर के रूप में देख रहे हैं और यहां पर अपनी पार्टी के जनाधार का विस्तार करने में जुटे हैं। यह सक्रियता केवल मौजूदा विधानसभा चुनाव की रणनीति नहीं है, बल्कि इसका संबंध चिराग के दीर्घकालिक राजनीतिक भविष्य से भी है। बीजेपी के साथ रहकर वह केंद्र की सत्ता में हिस्सेदार बने रहना चाहते हैं, लेकिन बिहार में अपनी स्वतंत्र पहचान और महत्व भी बनाना चाहते हैं। चिराग पासवान की वर्तमान राजनीति को जानकार ‘दो नावों की सवारी’ की तरह देख रहे हैं। वे एनडीए में बने रहकर केंद्र में ताकतवर भूमिका निभा रहे हैं, वहीं बिहार में स्वतंत्र और आक्रामक राजनीति कर अपनी सौदेबाज़ी की ताकत बढ़ा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि चिराग की यह चाल एनडीए को मजबूती देती है या अंदर से कमजोर करती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Chirag Paswan #ChiragPaswan #BiharPolitics #NDA #LJP #BiharNews #IndianPolitics #RamVilasPaswan

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Aadhaar fraud exposed in Bihar's Muslim-majority districts;

Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed: बिहार में गजब का खेल, मुस्लिम बहुल जिलों में 100 लोगों पर बने 120 आधार

साल के अंत में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव के मद्देनजर सभी राजनीतिक दलों ने अभी से सही कमर कसनी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए (एसआईआर) शुरू किया है। आधार कार्ड को नागरिकता के सबूत के रूप में स्वीकार नहीं किया जा रहा। दरअसल, हाल ही में बिहार में सामने आए आधार कार्ड सैचुरेशन के आंकड़ों ने सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। ऐसा इसलिए राज्य का औसत आधार सैचुरेशन 94% है। तो वहीं मुस्लिम बहुल जिलों में यह आंकड़ा हैरान करने वाला (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) है। किशनगंज में 68 फीसदी मुस्लिम आबादी है। यहां आधार सैचुरेशन 126 फीसदी है। यानी, हर 100 लोगों पर 120 से अधिक आधार कार्ड। सामान्य तौर पर आधार कार्ड एक व्यक्ति-एक कार्ड की नीति पर आधारित है। लेकिन ये आंकड़े बताते हैं कि जनसंख्या से अधिक आधार कार्ड मौजूद हैं, तो यह संकेत देता है कि या तो डुप्लिकेट आधार कार्ड बनाए गए हैं या फिर गैर-नागरिकों को भी आधार कार्ड जारी किए गए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या अतिरिक्त आधार कार्डों का इस्तेमाल गैर-कानूनी मतदाताओं को शामिल करने के लिए किया गया है? सीमांचल में अधिकांश लोगों के पास आधार के अलावा अन्य दस्तावेज जैसे जन्म (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) प्रमाणपत्र या डोमिसाइल सर्टिफिकेट नहीं हैं और उससे भी बड़ा सवाल यह कि ये अतिरिक्त आधार कार्ड किसके लिए और क्यों बनाए गए हैं? इस मुद्दे ने न सिर्फ बिहार बल्कि पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में भी चर्चा को तेज कर दिया है। दरअसल, ममता बनर्जी सरकार की पहले से ही आधार कार्ड डिएक्टिवेशन जैसे मुद्दों पर केंद्र से तनातनी चल (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) रही है। ऐसे सोचनीय बात यह कि क्या यह विपक्ष और वामपंथी लॉबी द्वारा आधार को नागरिकता का सबूत बनाने की कोशिश का हिस्सा है? महत्वपूर्ण बात यह कि सीमांचल में अधिकांश लोगों के पास आधार के अलावा अन्य दस्तावेज जैसे जन्म प्रमाणपत्र या डोमिसाइल सर्टिफिकेट नहीं हैं। जिससे मतदाता सूची से नाम हटने का खतरा बढ़ गया है। कहने की जरूरत नहीं यह स्थिति गरीब समुदायों विशेषकर मुस्लिम आबादी को सबसे अधिक प्रभावित कर सकती है।  आधार सैचुरेशन का 100 फीसदी से अधिक होना कई प्रश्न निर्माण करता (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) है गौरतलब हो कि बिहार के सीमांचल क्षेत्र-किशनगंज, पूर्णिया कटिहार और अररिया में मुस्लिम आबादी 38 फीसदी से 68 फीसदी तक है। ऐसे में इन जिलों में आधार सैचुरेशन का 100 फीसदी से अधिक होना कई प्रश्न निर्माण करता (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) है। ऐसे में कहने की जरूरत नहीं, सीमांचल क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति इसे और संवेदनशील बनाती है। दरअसल, ये जिले पश्चिम बंगाल और नेपाल की सीमा से सटे हैं। बड़ी बात यह कि बांग्लादेश भी इससे ज्यादा दूर नहीं है। और तो और इस क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया गया है कि इन जिलों में आधार कार्ड की अधिकता की सबसे बड़ी वजह बांग्लादेशी घुसपैठिए हो सकते हैं। जिन्हें स्थानीय नेताओं और कट्टरपंथी समूहों के सहयोग से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ  विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ बिहार बंद का आह्वान किया, जिसमें आधार को वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार न करने की बात कही (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) गई चुनावी सरगर्मी के बीच राजद नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ बिहार बंद का आह्वान किया, जिसमें आधार को वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार न करने की बात कही (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) गई। दूसरी ओर कुछ लोग तर्क देते हैं कि विपक्ष आधार को नागरिकता का सबूत बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि अवैध आप्रवासियों को मतदाता सूची में शामिल किया जा सके। महत्वपूर्ण बात यह कि विपक्ष खासकर राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस ने आधार कार्ड को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए जोर दिया है। लेकिन इसे नागरिकता का सबूत मानने के खिलाफ भी आवाज उठाई है। यही नहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आधार कार्ड डिएक्टिवेशन के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने साल 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आधार डिएक्टिवेशन को एसी, एसटी और ओबीसी समुदायों के खिलाफ साजिश करार दिया था। ममता ने यह भी घोषणा की थी कि उनकी सरकार वैकल्पिक आधार कार्ड जारी करेगी, जिसे केंद्र ने गैर-कानूनी बताया।  Latest News in Hindi Today Hindi news Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed #aadhaar #biharnews #scamalert #identityfraud #breakingnews #aadhaarscam #fraudinindia #newsupdate #muslimdistricts #dataleak

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Air Pollution May Trigger Anxiety and Depression

डब्ल्यूएचओ की चेतावनी: एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा

एयर पॉल्यूशन (Air pollution) गंभीर समस्याओं में से एक है। हमारे देश में यह समस्या बेहद गंभीर हो चुकी है। इस परेशानी का मुख्य कारण माना जाता जाता है गाड़ियों और इंडस्ट्रीज से निकले धुएं को। इस धुएं से कई हानिकारक गैसें निकलती हैं जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड, ओजोन, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड आदि। इनडोर और आउटडोर पॉल्यूशन सांस संबंधी और कई रोगों का कारण बन सकता है। लेकिन, हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार इसका प्रभाव मेंटल हेल्थ पर भी पड़ सकता है। डब्ल्यूएचओ ने एंग्जायटी और डिप्रेशन को पुअर एयर क्वालिटी (Poor air quality) के साथ लिंक किया है। आइए जानें पुअर एयर क्वालिटी और डिप्रेशन में कनेक्शन (Connection between poor air quality and depression) के बारे में। पुअर एयर क्वालिटी और डिप्रेशन में कनेक्शन (Connection between poor air quality and depression) डब्ल्यूएचओ (WHO) के डाटा के अनुसार लगभग पूरी दुनिया की अधिकतम आबादी ऐसी हवा में सांस लेती है, जो डब्ल्यूएचओ गाइडलाइन लिमिट्स से अधिक है तथा जिसमें प्रदूषकों का स्तर बहुत अधिक है। डब्ल्यूएचओ ने हाल ही में एक हैरान करने वाली जानकारी दी है। उनके अनुसार एयर पॉल्यूशन (Air pollution) मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स जैसे एंग्जायटी और डिप्रेशन का एक मुख्य कारण हो सकता है। एयर पॉल्यूशन (Air pollution) में मौजूद  हानिकारक पार्टिकल्स और गैसेस से हमारे दिमाग और शरीर दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं। यह सब हमारी ब्लडस्ट्रीम पर पहुंच कर दिमाग में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा कर सकते हैं। इससे मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स को बढ़ावा मिलता है। यह तो थी पुअर एयर क्वालिटी और डिप्रेशन में कनेक्शन (Connection between poor air quality and depression) के बारे में जानकारी। अब जानते हैं एयर पॉल्यूशन के अन्य प्रभावों के बारे में।  एयर पॉल्यूशन के दिमाग पर इफेक्ट  जैसा की पहले ही बताया गया है कि एयर पॉल्यूशन (Air pollution) से मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क बढ़ता है। इससे एंग्जायटी, डिप्रेशन और अन्य समस्याएं हो सकती हैं। इसके साथ ही इससे मेंटल हेल्थ की क्वालिटी कम होती है जिससे नींद में भी समस्या आ सकती है और अन्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।  बच्चों और पहले से ही मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स के रोगी पुअर एयर क्वालिटी (Poor air quality) के प्रति अधिक सेंसिटिव हो सकते हैं।  हालांकि, पुअर एयर क्वालिटी और डिप्रेशन में कनेक्शन (Connection between poor air quality and depression) के बारे में अभी अधिक स्टडी की जानी जरूरी है। यही नहीं, लोगों को एयर पॉल्यूशन (Air pollution) के सम्पर्क में आने से भी बचना चाहिए, ताकि कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं से बचा जा सके।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ एयर पॉल्यूशन को कम करने और इससे बचने के उपाय? एयर पॉल्यूशन को कम करने और इससे बचने  के कुछ तरीके इस प्रकार हैं: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Air pollution #airpollution #WHOwarning #mentalhealth #anxiety #depression #toxicair #healthalert

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Sanjay Raut announces Uddhav and Raj Thackeray's

महाराष्ट्र निकाय चुनाव साथ मिलकर लड़ेंगे उद्धव और राज ठाकरे, संजय राउत का बड़ा ऐलान, कहा- कांग्रेस अकेले अपने दम पर लड़े

महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। कहा जा रहा था कि महाराष्ट्र निकाय चुनाव से पहले इंडिया (INDIA) गठबंधन टूट जाएगा। इस बात पर अब शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत (Sanjay Raut) ने मुहर लगा दी है। राउत ने कहा है कि  BMC समेत सभी स्थानीय निकाय चुनाव शिवसेना (UBT) अब INDIA गठबंधन के साथ नहीं लड़ेगी। उनकी पार्टी यह महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के साथ लड़ेगी। कांग्रेस को यह चुनाव अपने दम पर लड़ना होगा। संजय राउत (Sanjay Raut) ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) करीब 20 साल बाद एक साथ आए हैं। दोनों भाईयों के बीच पिछले छह महीने से पर्दे के पीछे बातचीत चल रही थी। अब जब महाराष्ट्र में मराठी अस्मिता और हिंदी भाषा को जबरन थोपे जाने का मुद्दा गरमा गया है, तो दोनों पार्टियों ने इस मोर्चे पर साथ मिलकर लड़ने का निर्णय लिया है। राउत ने कहा, “भाजपा सरकार जिस तरह मराठी भाषा और संस्कृति की अनदेखी कर रही है, उसके खिलाफ उद्धव और राज ठाकरे एकजुट हैं। इससे जनता का भी जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। इसलिए अब जनता खुद चाहती है कि शिवसेना (UBT) और MNS मिलकर निकाय चुनाव लड़ें।” दोनों भाईयों का मिलन कांग्रेस के लिए बड़ा झटका पत्रकारों ने जब संजय राउत (Sanjay Raut) से पूछा कि महाराष्ट्र में INDIA गठबंधन (जिसमें कांग्रेस, एनसीपी (SCP) और शिवसेना UBT शामिल हैं) का स्थानीय चुनावों में क्या रोल होगा, तो उन्होंने स्पष्ट कहा, “INDIA गठबंधन केवल लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए था। स्थानीय चुनावों की परिस्थितियां और रणनीति अलग होती हैं।” संजय राउत ने यह भी याद दिलाया कि 2017 के BMC चुनाव में भी शिवसेना ने भाजपा के साथ गठबंधन होते हुए भी अलग चुनाव लड़ा था और उसी चुनाव के नतीजों ने 2019 में शिवसेना-भाजपा गठबंधन को तोड़ने की नींव रखी थी। उन्होंने कहा कि स्थानीय चुनावों की परिस्थिति अलग होती है और पार्टियां अलग-अलग निर्णय लेती हैं। राउत के इस बयान से साफ है कि कांग्रेस को मुंबई और अन्य निकाय चुनावों में अपने दम पर उतरना होगा। कांग्रेस पहले ही संकेत दे चुकी है कि वह गठबंधन के मुद्दे पर कोई टकराव नहीं चाहती, लेकिन अंदरखाने उसे इस फैसले से झटका जरूर लगा है। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ BMC सहित सभी नगर निगमों में साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी संजय राउत ने यह भी बताया कि उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे की पार्टियां सिर्फ बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में ही नहीं, बल्कि ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली, नासिक, उल्हासनगर और संभाजीनगर (औरंगाबाद) जैसे नगर निगमों में भी मिलकर चुनाव लड़ सकती हैं। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि शिवसेना परिवार ‘मराठी मानुष’ की राजनीति पर दोबारा केंद्रित हो रहा है। दोनों भाईयों का यह कदम बालासाहेब ठाकरे की उस राजनीति को वापसी लाने के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें क्षेत्रीय अस्मिता, हिंदुत्व और सड़कों पर आंदोलन का अनूठा मिश्रण होता था। माना जा रहा है कि उद्धव और राज ठाकरे इस शैली को फिर से अपनाकर भाजपा को निकाय चुनाव में चुनौती देना चाहते हैं। शिवसेना (UBT) और MNS ने हाल ही में महाराष्ट्र में हिंदी भाषा की अनिवार्यता के खिलाफ आंदोलन शुरू किया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार हिंदी को जबरन महाराष्ट्र पर थोपने की कोशिश कर रही है, जिससे मराठी पहचान खतरे में पड़ गया है। यह आंदोलन उत्तर भारतीय राजनीति में भी हलचल मचा रहा है, क्योंकि बिहार में भी इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में आरजेडी और कांग्रेस गठबंधन हिंदी अस्मिता को लेकर संवेदनशील है। Latest News in Hindi Today Hindi news Uddhav Thackeray #UddhavThackeray #RajThackeray #MaharashtraPolls #SanjayRaut #Congress #ShivSena #MNS #MaharashtraPolitics

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