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नई रिपोर्ट में दावा: इस दशक के अंत तक 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है भारत

नई दिल्ली, 30 जून। भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर जारी एक नई रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि यदि मौजूदा सुधारों की गति और उच्च विकास दर बनी रहती है, तो देश इस दशक के अंत तक 7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति कर सकता है। रिपोर्ट में निवेश, विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे के विकास और घरेलू मांग को विकास के प्रमुख आधार बताया गया है। रिपोर्ट में क्या कहा गया? रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। मजबूत घरेलू खपत, सार्वजनिक निवेश, डिजिटल भुगतान प्रणाली, स्टार्टअप इकोसिस्टम और सेवा क्षेत्र का विस्तार आर्थिक वृद्धि को गति दे रहे हैं। यदि ये रुझान जारी रहते हैं तो आने वाले वर्षों में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) तेजी से बढ़ सकता है। विकास के प्रमुख आधार रिपोर्ट में कई ऐसे क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है जो भारत की आर्थिक वृद्धि को आगे बढ़ा सकते हैं: विनिर्माण और डिजिटल क्षेत्र पर जोर विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मेक इन इंडिया’, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के विस्तार से भारत की उत्पादन क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार हो रहा है। इससे रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वैश्विक चुनौतियां भी बनी हुई हैं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियां भारत की विकास दर को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए आर्थिक सुधारों की निरंतरता और नीति स्थिरता महत्वपूर्ण रहेगी। विशेषज्ञों की राय अर्थशास्त्रियों का कहना है कि 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य महत्वाकांक्षी जरूर है, लेकिन यदि निवेश, उत्पादकता, निर्यात और रोजगार में लगातार सुधार होता है तो भारत इस दिशा में मजबूत स्थिति बना सकता है। इसके लिए राज्यों और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय भी आवश्यक माना गया है। निवेशकों का बढ़ता विश्वास हाल के वर्षों में भारत में घरेलू और विदेशी निवेशकों की रुचि बढ़ी है। वैश्विक कंपनियां विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, हरित ऊर्जा और डिजिटल सेवाओं में निवेश बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दीर्घकालिक आर्थिक विकास को समर्थन मिलेगा। आगे की राह रिपोर्ट के अनुसार भारत के सामने अवसर और चुनौतियां दोनों मौजूद हैं। यदि आर्थिक सुधार, निवेश, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे पर लगातार ध्यान दिया जाता है तो देश आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। हालांकि 7 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य एक पूर्वानुमान है, न कि कोई आधिकारिक सरकारी घोषणा। स्रोत:अंतरराष्ट्रीय आर्थिक विश्लेषण एवं बाजार अनुसंधान रिपोर्ट मूल रिपोर्ट:30 जून 2026 को जारी आर्थिक विश्लेषणों और उपलब्ध बाजार रिपोर्टों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम के बाद कतर में वार्ता की उम्मीद, पश्चिम एशिया पर टिकी वैश्विक बाजारों की नजर

दोहा/वॉशिंगटन/तेहरान, 30 जून। हालिया सैन्य तनाव और संघर्ष विराम के बाद अमेरिका और ईरान के बीच कतर की राजधानी दोहा में नई कूटनीतिक वार्ता की संभावना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। हालांकि दोनों देशों की ओर से वार्ता के स्वरूप और समय को लेकर अलग-अलग बयान सामने आए हैं, लेकिन मध्यस्थ देशों के प्रयास जारी हैं। संघर्ष विराम के बाद कूटनीतिक प्रयास हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ने के बाद संघर्ष विराम लागू हुआ। इसके बाद कतर सहित क्षेत्रीय मध्यस्थों ने संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के प्रयास तेज किए हैं ताकि तनाव दोबारा न बढ़े। वार्ता को लेकर अलग-अलग दावे अमेरिकी प्रशासन की ओर से संकेत दिए गए हैं कि दोहा में बातचीत की संभावना है। वहीं ईरान ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि अमेरिका के साथ प्रत्यक्ष बैठक को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में वार्ता को लेकर अभी आधिकारिक तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। वैश्विक बाजारों की नजर पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रम का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखा जा रहा है। निवेशक इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि वार्ता आगे बढ़ती है या क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ता है। इसी अनिश्चितता के कारण खाड़ी देशों के शेयर बाजारों में सतर्क रुख देखने को मिला। होर्मुज जलडमरूमध्य बना अहम मुद्दा विशेषज्ञों के अनुसार वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य की समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। यह मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। कतर की मध्यस्थ भूमिका कतर लंबे समय से पश्चिम एशिया में विभिन्न कूटनीतिक वार्ताओं का महत्वपूर्ण मंच रहा है। माना जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच संवाद बनाए रखने में उसकी भूमिका आगे भी अहम रह सकती है। आगे क्या? विश्लेषकों का मानना है कि यदि वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो इससे क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है और ऊर्जा बाजारों को स्थिरता मिलने की संभावना बढ़ेगी। वहीं यदि बातचीत में प्रगति नहीं होती है, तो पश्चिम एशिया में अनिश्चितता बनी रह सकती है। फिलहाल दुनिया की नजर दोहा में संभावित कूटनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है। स्रोत:रॉयटर्स, अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक सूत्र मूल रिपोर्ट:30 जून 2026 तक उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर परस्पर विरोधी बयान सामने आए हैं। इसलिए वार्ता की पुष्टि दोनों पक्षों द्वारा आधिकारिक रूप से अभी नहीं की गई है। जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रधानमंत्री मोदी आज शीर्ष अधिकारियों के साथ प्रशासनिक सुधार और Ease of Doing Business की समीक्षा करेंगे

नई दिल्ली, 30 जून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों के साथ एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक सुधार (Deregulation), Ease of Doing Business, Ease of Living तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को गति देने के लिए चल रहे सुधारों की प्रगति की समीक्षा करना है। यह बैठक प्रधानमंत्री की हाल के महीनों में शीर्ष नौकरशाही के साथ दूसरी व्यापक समीक्षा बैठक होगी। प्रशासनिक सुधार रहेगा मुख्य एजेंडा बैठक में विभिन्न मंत्रालयों द्वारा नियमों को सरल बनाने, अनावश्यक प्रक्रियाओं को समाप्त करने और सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा की जाएगी। सरकार का उद्देश्य नागरिकों और उद्योगों के लिए नियामकीय बोझ को कम करना है। Ease of Doing Business पर विशेष जोर प्रधानमंत्री उद्योगों के लिए कारोबारी माहौल को और बेहतर बनाने, निवेश को आकर्षित करने तथा परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया को तेज करने के उपायों की समीक्षा करेंगे। विभिन्न मंत्रालय अपने-अपने क्षेत्रों में किए गए सुधारों और आगामी कार्ययोजना पर प्रस्तुति देंगे। Ease of Living से जुड़े कदमों की भी समीक्षा बैठक में आम नागरिकों को सरकारी सेवाएं तेजी और पारदर्शिता के साथ उपलब्ध कराने के प्रयासों पर भी चर्चा होगी। डिजिटल सेवाओं का विस्तार, प्रक्रियाओं का सरलीकरण और विभागों के बीच बेहतर समन्वय को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। मंत्रालयों के सचिव देंगे प्रस्तुति बैठक के दौरान प्रत्येक मंत्रालय के सचिव अपने विभाग में लागू किए गए सुधारों, नीति क्रियान्वयन और भविष्य की योजनाओं पर संक्षिप्त प्रस्तुति देंगे। प्रधानमंत्री विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति और समयबद्ध कार्यान्वयन की समीक्षा करेंगे। ‘विकसित भारत 2047’ रोडमैप पर चर्चा सूत्रों के अनुसार, बैठक में सरकार के ‘विकसित भारत 2047’ विज़न को ध्यान में रखते हुए अगले चरण के संरचनात्मक सुधारों पर भी विचार किया जाएगा। प्रशासनिक दक्षता, निवेश, नवाचार और डिजिटल शासन को इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। AI और डिजिटल गवर्नेंस पर भी फोकस बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीक आधारित प्रशासनिक सुधारों की प्रगति की भी समीक्षा किए जाने की संभावना है। सरकार सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए तकनीकी समाधानों के व्यापक उपयोग पर जोर दे रही है। निवेशकों और उद्योग जगत की नजर उद्योग जगत और निवेशक इस बैठक पर विशेष नजर बनाए हुए हैं। माना जा रहा है कि यदि बैठक के बाद नए सुधारों या नीतिगत फैसलों की घोषणा होती है, तो इससे निवेश माहौल और कारोबारी सुगमता को नई गति मिल सकती है। हालांकि किसी नए फैसले की आधिकारिक घोषणा बैठक के बाद ही स्पष्ट होगी। स्रोत:प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), केंद्र सरकार के आधिकारिक सूत्र मूल रिपोर्ट:प्रधानमंत्री की 30 जून 2026 को प्रस्तावित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक से संबंधित उपलब्ध आधिकारिक और विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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29 जून को सोने की कीमतों में मामूली गिरावट, 22 कैरेट गोल्ड के दाम में हल्की नरमी

नई दिल्ली, 29 जून। घरेलू सर्राफा बाजार में सोमवार को सोने की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई। 22 कैरेट और 24 कैरेट सोने के दाम में हल्की नरमी देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक संकेतों, अमेरिकी डॉलर की चाल और अंतरराष्ट्रीय बुलियन बाजार में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। प्रमुख शहरों में क्या रहे भाव? 29 जून को दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद सहित कई प्रमुख शहरों में 22 कैरेट सोने की कीमतों में हल्की कमी दर्ज की गई। हालांकि अलग-अलग शहरों में टैक्स, परिवहन और स्थानीय शुल्क के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों की उम्मीदों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से प्रभावित होती हैं। इन वैश्विक कारकों का सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ता है। निवेशकों की बनी हुई है नजर बाजार विश्लेषकों के अनुसार निवेशक फिलहाल अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं। यदि वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ती है तो सोने की कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है। ज्वेलरी बाजार में सामान्य कारोबार सर्राफा कारोबारियों के अनुसार कीमतों में मामूली नरमी के बावजूद बाजार में सामान्य खरीदारी जारी है। आगामी त्योहारों और विवाह सीजन को देखते हुए आने वाले महीनों में मांग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। खरीदारी से पहले रखें इन बातों का ध्यान विशेषज्ञ ग्राहकों को सलाह देते हैं कि सोना खरीदते समय केवल BIS हॉलमार्क वाले आभूषण ही खरीदें। साथ ही बिल अवश्य लें और मेकिंग चार्ज, जीएसटी तथा अन्य शुल्क की जानकारी पहले ही प्राप्त कर लें। आगे कैसा रह सकता है बाजार? विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, केंद्रीय बैंकों के फैसले और निवेशकों की धारणा बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय बाजार के रुझानों पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है। प्रमुख शहरों में 22 कैरेट सोने के अनुमानित भाव (29 जून 2026) शहर 22 कैरेट (10 ग्राम) दिल्ली ₹92,350 मुंबई ₹92,200 चेन्नई ₹92,700 कोलकाता ₹92,200 बेंगलुरु ₹92,250 हैदराबाद ₹92,200 नोट: सोने के दाम शहर, ज्वेलर और स्थानीय करों के अनुसार बदल सकते हैं। खरीदारी से पहले अपने शहर के अधिकृत ज्वेलर से ताजा भाव की पुष्टि अवश्य करें। स्रोत:इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA), प्रमुख सर्राफा बाजार मूल रिपोर्ट:29 जून 2026 के सर्राफा बाजार के उपलब्ध आंकड़ों और बाजार विश्लेषण के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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Summer Fancy Food Show 2026 में भारत की अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी, वैश्विक बाजार में भारतीय खाद्य उत्पादों को बढ़ावा

न्यूयॉर्क, 29 जून। उत्तर अमेरिका के प्रतिष्ठित Summer Fancy Food Show 2026 में भारत ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी दर्ज कराते हुए वैश्विक खाद्य बाजार में मजबूत उपस्थिति का प्रदर्शन किया है। भारतीय पवेलियन में देशभर की दर्जनों कंपनियां और निर्यातक अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य भारतीय खाद्य उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच बढ़ाना और नए निर्यात अवसरों को प्रोत्साहित करना है। भारतीय पवेलियन बना आकर्षण का केंद्र इस वर्ष भारतीय पवेलियन में मसाले, चाय, कॉफी, बासमती चावल, ऑर्गेनिक उत्पाद, रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थ, स्नैक्स, मिलेट आधारित उत्पाद, मिठाइयां और विभिन्न प्रसंस्कृत खाद्य वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। वैश्विक खरीदारों और वितरकों ने भारतीय उत्पादों में विशेष रुचि दिखाई है। निर्यात बढ़ाने पर फोकस विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय व्यापार आयोजनों से भारतीय खाद्य उद्योग को नए बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिलता है। भारत सरकार और निर्यात संवर्धन एजेंसियां खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। इसका उद्देश्य कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है। मिलेट और ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग बढ़ी वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्यवर्धक और प्राकृतिक खाद्य उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच भारतीय मिलेट, ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थ और पारंपरिक सुपरफूड्स विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। कई अंतरराष्ट्रीय खरीदारों ने भारतीय कंपनियों के साथ संभावित व्यापारिक साझेदारी में रुचि दिखाई है। भारतीय कंपनियों को नए अवसर कार्यक्रम में भाग लेने वाली भारतीय कंपनियां विभिन्न देशों के आयातकों, खुदरा विक्रेताओं और वितरकों के साथ व्यापारिक बैठकों में शामिल हो रही हैं। उद्योग जगत का मानना है कि इससे निर्यात ऑर्डर बढ़ने और भारतीय ब्रांडों की वैश्विक पहचान मजबूत होने की संभावना है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को मिलेगा लाभ भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बढ़ती उपस्थिति से इस क्षेत्र में निवेश, तकनीकी सहयोग और नए व्यापारिक अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक मांग के अनुरूप गुणवत्ता और पैकेजिंग पर ध्यान देकर भारतीय कंपनियां अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत कर सकती हैं। सरकार की पहल को मिली मजबूती भारतीय निर्यात संवर्धन एजेंसियों और संबंधित संस्थानों द्वारा आयोजित सामूहिक भागीदारी का उद्देश्य छोटे और मध्यम उद्यमों को भी वैश्विक मंच उपलब्ध कराना है। इससे भारतीय खाद्य उद्योग के विविध उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है। भविष्य की संभावनाएं विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की बढ़ती भागीदारी यह संकेत देती है कि भारतीय खाद्य उत्पादों की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। यदि गुणवत्ता, नवाचार और आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत किया जाए तो आने वाले वर्षों में भारत खाद्य निर्यात के क्षेत्र में और बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है। स्रोत:APEDA, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार मूल रिपोर्ट:Summer Fancy Food Show 2026 में भारतीय भागीदारी से संबंधित आधिकारिक जानकारी और व्यापारिक रिपोर्टों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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खरीफ बुवाई में 22.7% की गिरावट दर्ज, कमजोर मानसून से कई राज्यों में खेती प्रभावित

नई दिल्ली, 29 जून। देश में खरीफ सीजन की बुवाई इस वर्ष शुरुआती चरण में अपेक्षा से धीमी रही है। कृषि मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में खरीफ फसलों की बुवाई में 22.7% की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई क्षेत्रों में कमजोर मानसून और सामान्य से कम वर्षा के कारण किसानों को बुवाई शुरू करने में देरी हुई है। किन फसलों पर सबसे अधिक असर? शुरुआती आंकड़ों के अनुसार धान, दालें, तिलहन, मोटे अनाज और कुछ अन्य खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण कई किसानों ने खेतों की तैयारी और बीज बोने का कार्य फिलहाल टाल दिया है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो बुवाई की रफ्तार तेज हो सकती है। कमजोर मानसून बना प्रमुख कारण मौसम विशेषज्ञों के अनुसार देश के कई कृषि प्रधान क्षेत्रों में मानसून की प्रगति सामान्य से धीमी रही है। कुछ इलाकों में बारिश की कमी के कारण मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई, जिससे किसानों को बुवाई शुरू करने में कठिनाई हुई। हालांकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई हिस्सों में वर्षा बढ़ने की संभावना जताई है। किसानों की बढ़ी चिंता बारिश में देरी का असर किसानों की लागत और उत्पादन दोनों पर पड़ सकता है। समय पर बुवाई न होने से फसलों की वृद्धि अवधि प्रभावित होती है, जिससे उपज कम होने का जोखिम बढ़ जाता है। कई किसान अब अगले मानसूनी दौर का इंतजार कर रहे हैं ताकि बुवाई का कार्य तेजी से पूरा किया जा सके। कृषि मंत्रालय की नजर स्थिति पर कृषि मंत्रालय लगातार राज्यों से बुवाई की प्रगति की जानकारी जुटा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जहां आवश्यक होगा, वहां किसानों को बीज, तकनीकी सलाह और अन्य सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य सरकारों के साथ समन्वय बनाकर मानसून की स्थिति के अनुसार कृषि रणनीति तैयार की जा रही है। खाद्य उत्पादन पर क्या होगा असर? विशेषज्ञों का मानना है कि अभी खाद्यान्न उत्पादन को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। यदि जुलाई के पहले और दूसरे सप्ताह में सामान्य या उससे अधिक वर्षा होती है तो बुवाई में आई शुरुआती कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। इसलिए आने वाले कुछ सप्ताह कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मौसम पूर्वानुमान से बढ़ी उम्मीद भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कई राज्यों में आगामी दिनों में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। यदि पूर्वानुमान के अनुरूप वर्षा होती है तो किसानों को राहत मिलेगी और खरीफ बुवाई की गति में तेजी आने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को स्थानीय मौसम सलाह के अनुसार खेती की योजना बनाने की सलाह दे रहे हैं। आगे की राह सरकार और कृषि विशेषज्ञों की नजर अब मानसून की आगामी गतिविधियों पर टिकी है। समय पर पर्याप्त वर्षा होने पर बुवाई में आई कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। फिलहाल किसानों, कृषि विभाग और मौसम एजेंसियों के बीच समन्वय बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि खरीफ सीजन पर मौसम का प्रभाव न्यूनतम रहे। स्रोत:कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार मूल रिपोर्ट:कृषि मंत्रालय द्वारा जारी खरीफ बुवाई के ताज़ा आंकड़ों एवं मौसम संबंधी आधिकारिक जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत ने EU से स्क्रैप निर्यात प्रतिबंधों में राहत की मांग की, स्टील और एल्युमिनियम उद्योग की चिंताएं बढ़ीं

नई दिल्ली, 29 जून। भारत ने यूरोपीय संघ (EU) से स्क्रैप धातु के निर्यात पर प्रस्तावित प्रतिबंधों में राहत देने का आग्रह किया है। सरकार का कहना है कि यदि इन प्रतिबंधों को लागू किया गया तो भारत के स्टील और एल्युमिनियम उद्योग के लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ने और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर असर पड़ने की आशंका है। क्यों महत्वपूर्ण है स्क्रैप धातु? स्टील और एल्युमिनियम उद्योग में पुनर्चक्रित (रीसाइकिल) स्क्रैप धातु का व्यापक उपयोग किया जाता है। इससे उत्पादन लागत कम होती है, ऊर्जा की बचत होती है और कार्बन उत्सर्जन भी अपेक्षाकृत कम रहता है। भारत अपनी औद्योगिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में स्क्रैप धातु का आयात करता है, जिसमें यूरोपीय संघ एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है। भारत ने EU के समक्ष रखी चिंता वाणिज्य अधिकारियों ने यूरोपीय संघ के समक्ष यह मुद्दा उठाते हुए कहा है कि स्क्रैप निर्यात पर कड़े प्रतिबंध या अतिरिक्त शर्तें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकती हैं। भारत ने सुझाव दिया है कि ऐसे उपाय अपनाए जाएं, जिनसे यूरोपीय उद्योगों की जरूरतें भी पूरी हों और साझेदार देशों को भी पर्याप्त आपूर्ति मिलती रहे। स्टील और एल्युमिनियम उद्योग पर संभावित असर उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्क्रैप की उपलब्धता कम होती है तो स्टील और एल्युमिनियम उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। इसका असर निर्माण, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, बुनियादी ढांचा और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है, जहां इन धातुओं का व्यापक उपयोग होता है। व्यापार वार्ता पर भी नजर यह मुद्दा ऐसे समय सामने आया है जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापक व्यापार और निवेश सहयोग को लेकर बातचीत जारी है। दोनों पक्ष मुक्त व्यापार समझौते (FTA) सहित कई आर्थिक मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। ऐसे में स्क्रैप निर्यात का विषय भी वार्ता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। उद्योग जगत की प्रतिक्रिया भारतीय स्टील और धातु उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि स्थिर और किफायती कच्चे माल की उपलब्धता घरेलू विनिर्माण को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए आवश्यक है। उद्योग ने वैकल्पिक स्रोतों के विकास और घरेलू स्क्रैप संग्रह प्रणाली को भी मजबूत करने पर जोर दिया है। पर्यावरणीय दृष्टि से भी अहम स्क्रैप आधारित धातु उत्पादन को पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है, क्योंकि इससे नई धातु के उत्पादन की तुलना में कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है और कार्बन उत्सर्जन भी घटता है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए स्क्रैप की निर्बाध उपलब्धता महत्वपूर्ण है। आगे क्या? भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस मुद्दे पर आगे भी चर्चा जारी रहने की संभावना है। दोनों पक्ष ऐसा समाधान तलाशने का प्रयास कर रहे हैं जिससे व्यापारिक हितों का संतुलन बना रहे और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। उद्योग जगत की नजर अब आगामी वार्ताओं और यूरोपीय संघ के अंतिम निर्णय पर बनी हुई है। स्रोत:वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार मूल रिपोर्ट:भारत-यूरोपीय संघ व्यापार वार्ता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से संबंधित आधिकारिक जानकारी एवं समाचार एजेंसियों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO के लिए DFP-2026 जारी किया, रक्षा अनुसंधान परियोजनाओं को मिलेगी नई गति

नई दिल्ली, 29 जून। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के लिए Delegation of Financial Powers (DFP)-2026 जारी किया। नई वित्तीय शक्तियों का उद्देश्य रक्षा अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं में निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। सरकार का मानना है कि इससे अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों के विकास और स्वदेशीकरण को नई गति मिलेगी। क्या है DFP-2026? DFP-2026 एक संशोधित वित्तीय अधिकार ढांचा है, जिसके तहत DRDO के विभिन्न स्तरों के अधिकारियों को परियोजनाओं की आवश्यकता के अनुसार अधिक वित्तीय अधिकार दिए गए हैं। इससे अनुसंधान परियोजनाओं की मंजूरी, उपकरणों की खरीद और विकास कार्यों में अनावश्यक देरी कम होने की उम्मीद है। रक्षा अनुसंधान को मिलेगी रफ्तार रक्षा मंत्रालय के अनुसार नई व्यवस्था लागू होने के बाद विभिन्न अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं की स्वीकृति पहले की तुलना में अधिक तेजी से मिल सकेगी। इससे मिसाइल प्रणाली, रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन, साइबर सुरक्षा और अन्य आधुनिक रक्षा तकनीकों पर काम तेज होगा। आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का लक्ष्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। उन्होंने कहा कि DRDO और भारतीय रक्षा उद्योग के बीच बेहतर समन्वय से स्वदेशी रक्षा उपकरणों का विकास तेज होगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। उद्योग और स्टार्टअप को मिलेगा लाभ नई वित्तीय व्यवस्था से निजी उद्योग, MSME और रक्षा क्षेत्र के स्टार्टअप के साथ DRDO की साझेदारी भी मजबूत होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नई तकनीकों के विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा। पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर DFP-2026 में वित्तीय निर्णयों को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि नई प्रणाली से परियोजनाओं की निगरानी बेहतर होगी और संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप कदम बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए सरकार आधुनिक तकनीकों पर विशेष ध्यान दे रही है। AI, स्वायत्त प्रणाली, हाइपरसोनिक तकनीक, क्वांटम टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को प्राथमिकता दी जा रही है। DFP-2026 को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है। भविष्य की रणनीति विशेषज्ञों का मानना है कि DFP-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन से DRDO की अनुसंधान क्षमता और मजबूत होगी तथा नई रक्षा परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। इससे भारत की रक्षा तैयारियों, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक रक्षा उद्योग में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। स्रोत:रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार मूल रिपोर्ट:रक्षा मंत्रालय एवं DRDO द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा पूरी की, ₹1,250 करोड़ की क्रेडिट लाइन और नौ द्विपक्षीय समझौतों पर बनी सहमति

विक्टोरिया (सेशेल्स), 29 जून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी तीन दिवसीय राजकीय यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर भारत लौटने से पहले सेशेल्स के साथ रणनीतिक, आर्थिक और विकास सहयोग को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णयों की घोषणा की। यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच ₹1,250 करोड़ की क्रेडिट लाइन तथा नौ द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों का उद्देश्य डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, कृषि, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा, कानूनी सहयोग और बुनियादी ढांचे के विकास को मजबूत करना है। ₹1,250 करोड़ की क्रेडिट लाइन की घोषणा भारत ने सेशेल्स के विकासात्मक परियोजनाओं के लिए ₹1,250 करोड़ की नई क्रेडिट लाइन उपलब्ध कराने की घोषणा की। इस वित्तीय सहायता का उपयोग आधारभूत ढांचे, सार्वजनिक सेवाओं और अन्य प्राथमिक विकास परियोजनाओं में किया जाएगा। दोनों देशों ने इसे दीर्घकालिक विकास साझेदारी का महत्वपूर्ण कदम बताया। नौ क्षेत्रों में हुए महत्वपूर्ण समझौते यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित समझौतों में UPI डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, जन औषधि, कृषि अनुसंधान, प्रत्यर्पण संधि, समुद्री सहयोग, अंतरिक्ष क्षेत्र, क्षमता निर्माण तथा विकास सहयोग जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। इन समझौतों से दोनों देशों के बीच संस्थागत सहयोग और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है। डिजिटल सहयोग को नई गति भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को सेशेल्स में लागू करने के लिए भी समझौता हुआ। इससे दोनों देशों के बीच डिजिटल भुगतान प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा और पर्यटन, व्यापार तथा वित्तीय लेनदेन अधिक सरल और तेज़ होने की संभावना है। समुद्री सुरक्षा और हिंद महासागर पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और सेशेल्स के लिए हिंद महासागर केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि साझा सुरक्षा, समृद्धि और विकास का आधार है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी, समुद्री संसाधनों के संरक्षण और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए दोनों देशों के सहयोग को और मजबूत बनाने पर बल दिया। राष्ट्रीय दिवस समारोह में बने मुख्य अतिथि यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स के 50वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस अवसर पर भारतीय सेना और नौसेना के दल ने भी परेड में हिस्सा लिया, जिसे दोनों देशों की गहरी मित्रता और रक्षा सहयोग का प्रतीक माना गया। दोनों देशों के संबंधों को मिली नई मजबूती प्रधानमंत्री मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में व्यापार, निवेश, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन और समुद्री सहयोग सहित कई विषयों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने भविष्य में साझेदारी को और व्यापक बनाने पर सहमति व्यक्त की। भविष्य की साझेदारी पर फोकस विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत की ‘पड़ोसी पहले’ और हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग की नीति को और मजबूती देती है। नए समझौतों के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी और विकास सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। स्रोत:भारत का विदेश मंत्रालय (MEA), प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) मूल रिपोर्ट:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा से संबंधित आधिकारिक जानकारी एवं राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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यूरोप में रिकॉर्ड हीटवेव के बीच फ्रांस में चार दिनों में 1,000 मौतों की रिपोर्ट, स्वास्थ्य एजेंसियों ने सतर्क रहने की सलाह दी

पेरिस, 28 जून। यूरोप इन दिनों भीषण हीटवेव की चपेट में है और इसका सबसे अधिक असर फ्रांस सहित कई पश्चिमी एवं दक्षिणी यूरोपीय देशों में देखा जा रहा है। फ्रांसीसी स्वास्थ्य एजेंसियों के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, पिछले चार दिनों में अत्यधिक गर्मी से जुड़ी घटनाओं में लगभग 1,000 लोगों की मौत दर्ज की गई है। लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। कई शहरों में रिकॉर्ड तापमान फ्रांस के कई शहरों में तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया। कुछ क्षेत्रों में पारा 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। मौसम विभाग ने कई इलाकों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है तथा लोगों को दिन के समय घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है। बुजुर्ग और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी का सबसे अधिक खतरा बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को है। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और सांस संबंधी समस्याओं वाले मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। स्वास्थ्य एजेंसियों ने जारी की एडवाइजरी फ्रांस की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियों ने नागरिकों से पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने, धूप के समय बाहर निकलने से बचने और अकेले रहने वाले बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। स्थानीय प्रशासन ने कई शहरों में अस्थायी कूलिंग सेंटर भी खोले हैं। अन्य यूरोपीय देश भी प्रभावित स्पेन, इटली, पुर्तगाल, जर्मनी और बेल्जियम सहित कई अन्य यूरोपीय देशों में भी रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया जा रहा है। कई स्थानों पर जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ी हैं, जबकि बिजली की मांग में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जलवायु परिवर्तन पर फिर बढ़ी चिंता जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ रही चरम मौसम की घटनाएं जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को दर्शाती हैं। उनका मानना है कि भविष्य में ऐसी हीटवेव की आवृत्ति और तीव्रता दोनों बढ़ सकती हैं, इसलिए दीर्घकालिक अनुकूलन रणनीतियों पर तेजी से काम करने की आवश्यकता है। सरकार ने निगरानी बढ़ाई फ्रांस सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं, आपातकालीन सहायता और स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर रखा है। प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमों की संख्या बढ़ाई गई है और लगातार स्थिति की समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से केवल आधिकारिक मौसम और स्वास्थ्य संबंधी सलाह का पालन करने की अपील की है। विशेषज्ञों की सलाह डॉक्टरों का कहना है कि तेज धूप के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना, नियमित रूप से पानी पीना, कैफीन और शराब का सीमित सेवन करना तथा शरीर में गर्मी बढ़ने के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है। हीटवेव के दौरान थोड़ी-सी लापरवाही भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकती है। स्रोत:फ्रांस स्वास्थ्य मंत्रालय, यूरोपीय मौसम एजेंसियां मूल रिपोर्ट:फ्रांस सरकार, यूरोपीय स्वास्थ्य एजेंसियों एवं अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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