Air India Crash Report Reveals Pilot's

‘फ्यूल बंद क्यों किया…? एक पायलट ने दूसरे से पूछा और फिर…’,Air India विमान हादसे की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

अहमदाबाद से लंदन जा रहे एयर इंडिया-171 विमान की दुर्घटना (Air India-171 Plane Crash) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट आ गई है। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआइबी) द्वारा जारी इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान (Air India-171 Plane Crash) ने जैसे ही टेकऑफ किया, महज 3 सेकंड के भीतर इसके दोनों इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच “कटऑफ” स्थिति में चले गए। इससे दोनों इंजनों को ईंधन मिलना बंद हो गया और वे काम करना बंद कर गए। परिणामस्वरूप, विमान 32 सेकंड के भीतर रनवे से करीब 0.9 नॉटिकल मील दूर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) द्वारा शुक्रवार देर रात जारी किए गए 15 पृष्ठों की इस प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया कि टेकऑफ के तुरंत बाद फ्यूल सप्लाई बाधित हो गई, जिससे विमान का थ्रस्ट (गति) गिरने लगी और विमान नीचे की ओर गिरने लगा। इस रिपोर्ट में पायलटों के बीच बातचीत का भी उल्लेख है। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) में दर्ज बातचीत के अनुसार, एक पायलट ने दूसरे से पूछा – “तुमने फ्यूल क्यों बंद किया?”, जिस पर दूसरे पायलट ने जवाब मिला – “मैंने नहीं किया।” हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह संवाद किस पायलट ने कहा। घटना के समय विमान को को-पायलट चला रहा था।  दोनों इंजन महज तीन सेकंड में बंद जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों इंजन महज तीन सेकंड में बंद हो गए। जिसके बाद रैम एयर टर्बाइन (RAT) (एक इमरजेंसी टर्बाइन) अपने आप सक्रिय हो गई। जिससे हाइड्रोलिक सिस्टम को अस्थायी ऊर्जा मिल सके। पायलटों ने इंजन को दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश की। इंजन-1 आंशिक रूप से ठीक हुआ, जबकि इंजन-2 स्टार्ट नहीं हो सका। विमान सिर्फ 32 सेकंड हवा में रहा और मेडिकल कॉलेज के एक हॉस्टल भवन से टकरा गया। हादसे में 241 यात्रियों की मौत हो गई जबकि एक यात्री चमत्कारिक रूप से बच गया। फ्यूल कंट्रोल स्विच की अहम भूमिका ड्रीमलाइनर 787 (Dreamliner 787 Crash) में मौजूद फ्यूल कंट्रोल स्विच “रन” और “कटऑफ” के बीच काम करते हैं। ये आमतौर पर थ्रॉटल लीवर के नीचे स्थित होते हैं और इन पर ब्रैकेट और लॉकिंग मैकेनिज्म होते हैं जिससे गलती से भी इन्हें छुआ नहीं जा सकता। यदि कोई चालक दल सदस्य इन्हें बदलना चाहे तो पहले एक धातु का लॉक उठाना होता है। रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों फ्यूल कंट्रोल स्विच अपने आप कटऑफ मोड में शिफ्ट हो गए थे। लेकिन यह कैसे हुआ, यह अभी रहस्य बना हुआ है। रिपोर्ट में अन्य जांच बिंदु भी शामिल -ईंधन की गुणवत्ता जांच में किसी प्रकार का संदूषण नहीं पाया गया। -थ्रस्ट लीवर निष्क्रिय स्थिति में पाए गए, लेकिन ब्लैक बॉक्स के अनुसार टेकऑफ थ्रस्ट जारी था। -मौसम पूरी तरह साफ था, हल्की हवाएं थीं, कोई पक्षी टकराव नहीं हुआ। -विमान का वजन और संतुलन सीमा के भीतर था। कोई खतरनाक सामान onboard नहीं था। -दोनों पायलट अनुभवी थे, चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ थे और उनके पास ड्रीमलाइनर उड़ाने का पर्याप्त अनुभव था। इसे भी पढ़ें:- 40 बैंक खातों में 106 करोड़ रुपये, छांगुर बाबा की कुंडली खंगालने में जुटी ईडी फ्यूल कंट्रोल स्विच को लेकर FAA ने दी थी चेतावनी रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि, FAA ने पहले ही फ्यूल कंट्रोल स्विच में संभावित खराबी को लेकर एक चेतावनी जारी की थी, लेकिन एयर इंडिया ने उस विशेष विमान की समय पर जांच नहीं करवाई। विमान में तोड़फोड़ का कोई प्रमाण नहीं मिला, लेकिन तकनीकी चूक की आशंका जरूर जताई गई है। नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू (K. Rammohan Naidu) ने कहा कि सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कर रही है और AAIB स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। अमेरिकी विमानन विशेषज्ञ जान काक्स ने भी रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए कहा कि “फ्यूल स्विच को गलती से कोई भी नहीं हिला सकता, उनके चारों ओर सुरक्षा व्यवस्था होती है।” बता दें कि, इस हादसे ने भारत की विमानन सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच रिपोर्ट की शुरुआती जानकारी बताती है कि यह दुर्घटना मानवीय त्रुटि, तकनीकी खराबी और एयरलाइन की मेंटेनेंस चूक के कारण हो सकती है, हालांकि विस्तृत जांच रिपोर्ट आना अभी बाकी है। जिसमें इस दर्दनाक हादसे के कारणों का पूरा खुलासा हो सकता है।  Latest News in Hindi Today Hindi एएआइबी K. Rammohan Naidu #AirIndiaCrash #PilotConversation #AviationNews #FlightAccident #DGCAReport #FuelCut #AirIndiaTragedY

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Odisha Government Run by Adani

ओडिशा की सरकार अडानी चलाते हैं: राहुल गांधी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Congress Leader Rahul Gandhi) ने शुक्रवार को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में संविधान बचाओ अभियान के तहत एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों पर तीखा हमला बोला, खासकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उद्योगपति अडानी समूह (Adani Group) को लेकर। उन्होंने सामाजिक न्याय, जातीय जनगणना, महिलाओं की सुरक्षा और चुनावी पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर खुलकर बात की और जनता से इन सवालों को लेकर सतर्क रहने की अपील की। ओडिशा सरकार पर सीधा हमला राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने अपने भाषण की शुरुआत ओडिशा की सरकार (Odisha Government) को आड़े हाथों लेते हुए की। उन्होंने आरोप लगाया कि आज राज्य की सत्ता वास्तव में आम जनता के हाथ में नहीं, बल्कि कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के हाथ में है। उन्होंने दावा किया, ओडिशा की सरकार अब अडानी चला रहे हैं। राहुल गांधी ने जगन्नाथ यात्रा (Jagannath Yatra) का उदाहरण देते हुए कहा कि जब लाखों लोग भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने के लिए एकत्र होते हैं, तो उसी दौरान अडानी और उनके परिवार के लिए रथ रोक दिए जाते हैं। उन्होंने इसे जनता के विश्वास के साथ धोखा बताया और कहा कि यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार अब जनहित में नहीं, बल्कि पूंजीपतियों के हित में काम कर रही है। सामाजिक न्याय और जातीय जनगणना की मांग राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने जातीय जनगणना (Caste Census) को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि जब तक देश में हर जाति और वर्ग की सटीक जनसंख्या का आंकलन नहीं होगा, तब तक सामाजिक न्याय केवल एक नारा ही रहेगा। उन्होंने ने कहा कि सबसे पहला काम जातीय जनगणना है, जिससे गरीबों, दलितों, पिछड़ों को अपनी सच्ची शक्ति का अहसास होगा। महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल अपने संबोधन में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने ओडिशा में महिलाओं की स्थिति पर चिंता जाहिर की। उन्होंने दावा किया कि ओडिशा में अब तक 40,000 से अधिक महिलाएं गायब हो चुकी हैं और हर दिन औसतन 15 बलात्कार के मामले सामने आते हैं। उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह इन गंभीर मुद्दों की अनदेखी कर रही है और जनता को केवल चुनावों के समय याद करती है। बिहार चुनाव और वोटर लिस्ट विवाद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने बिहार में आगामी चुनावों को लेकर भी बीजेपी और चुनाव आयोग (Election Commission) पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जैसे महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों (Assembly Election) के दौरान चोरी हुई, वैसे ही बिहार में भी साजिश रची जा रही है। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष संस्था न रहकर बीजेपी की विंग की तरह काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में एक करोड़ नए वोटर लिस्ट (New Voter List) में जुड़ गए जिनकी जानकारी किसी को नहीं है और इसी तरह की प्रक्रिया बिहार में भी अपनाई जा रही है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि हमने चुनाव आयोग से बार-बार वोटर लिस्ट (Voter List) और वीडियोग्राफी की मांग की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। बिहार में अगर कोई चुनाव चोरी करने की कोशिश करेगा, तो INDIA गठबंधन (India Alliance) मिलकर इसका मुकाबला करेगा। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का समर्थन इस मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Congress President Mallikarjun Kharge) भी मौजूद थे। उन्होंने भी केंद्र सरकार (Union Government) पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार देश के संसाधन जल, जंगल और जमीन को चुनिंदा पूंजीपतियों को सौंप रही है। उन्होंने कांग्रेस के 55 वर्षों के शासन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान देश में सैकड़ों सार्वजनिक उपक्रम (PSUs) बनाए गए, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार को मजबूती मिली। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का यह दौरा केवल एक राजनीतिक रैली नहीं था, बल्कि यह एक रणनीतिक संदेश भी था सामाजिक न्याय, पारदर्शी चुनाव और गरीबों-अनुसूचित जाति-जनजाति के अधिकारों के लिए संघर्ष। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी (Congress Party) अब भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) के बाद संविधान बचाओ की मुहिम को अगली दिशा देने को तैयार है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने अपने भाषण में बार-बार यह दोहराया कि अब वक्त आ गया है कि जनता जागरूक हो, संगठित हो और अपने हक के लिए आवाज़ बुलंद करे। Latest News in Hindi Today Hindi news Mallikarjun Kharge #RahulGandhi #Adani #OdishaPolitics #BreakingNews #IndianPolitics #OdishaNews

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Iran Wants to Destroy US , trump

Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path: ईरान अमेरिका को नष्ट करना चाहता है, मगर उसकी राह में इजरायल सबसे बड़ा रोड़ा है- इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू

हाल ही में ईरान और इजरायल के बीच भीषण युद्ध युद्ध हुआ था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल के बाद कई दिनों तक चला भीषण युद्ध समाप्त हुआ था। इसके बाद अब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। दरअसल, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को मौत का पंथ कहते हुए कहा कि “यह अमेरिकी की मौत की बात करता (Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path) है। अमेरिका को ईरान नष्ट करना चाहता है। मगर उसकी राह में इजरायल रोड़ा है। बता दें कि उन्होंने ईरान के साथ युद्ध में मारे गए लोगों के घरों का दौरा किया। वह उन क्षेत्रों में भी गए जहां, ईरानी मिसाइलों से लोगों की मौत हुई थी। इस दौरान नेतन्याहू ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि “यह ईरान पर ऐतिहासिक विजय के बाद ऐतिहासिक दौरे का अंतिम दिन है। मैं और मेरी पत्नी सारा की ओर से, गुश एत्ज़ियों में मारे गए व्यक्ति के परिवार के प्रति दिल से संवेदनाएं प्रकट करता हूं। आतंक के खिलाफ लड़ाई गाज़ा, यहूदा , और सामरिया में और उससे भी आगे सभी मोर्चों पर जारी है।” हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक हमारे सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो (Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path) जाते नेतन्याहू ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि “मैंने जीवित और शहीद दोनों बंधकों के परिवारों से मुलाकात की। मैंने उन्हें स्पष्ट रूप से बताया कि हम सभी को वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मैं एक ऐसे कदम को आगे बढ़ा रहा हूं जो एक महत्वपूर्ण रिहाई की ओर ले जाएगा, लेकिन केवल उन्हीं शर्तों पर जो इज़रायल निर्धारित करता है। हमास को निरस्त्र किया जाए, गाज़ा को सैन्य मुक्त किया (Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path) जाए। अगर यह कूटनीति से संभव नहीं हुआ तो यह बल प्रयोग से किया जाएगा। हम पहले भी ऐसे ही कार्य करते आए हैं और आगे भी ऐसे ही करेंगे। हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक हमारे सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते।” इसके अलावा एक साक्षात्कार के दौरान ​उन्होंने यह भी कहा कि “अब्राहम समझौते में सीरिया को शामिल करने से पहले उन्हें हिज़्बुल्लाह और भयानक तानाशाह हाफ़िज़ अल-असद को हराया था।” अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि “सीरिया तब तक अब्राहम समझौतों में शामिल नहीं हो सकता था, जब तक हिज़्बुल्लाह और हाफ़िज़ असद जैसे तत्वों को पराजित नहीं किया जाता।” यहाँ बता दें कि “हाफ़िज़ असद ने 1973 के अरब-इज़रायल युद्ध में इज़रायल से लड़ाई लड़ी थी और उनका निधन वर्ष 2000 में हो गया था।”  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ कुछ ही दिनों में संभव हो सकती है बंधकों की अगली (Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path) रिहाई- इज़राइली प्रधानमंत्री बड़ी बात यह कि इस बीच इज़राइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने साफ़ संकेत दिया है कि “अगली बंधक रिहाई कुछ ही दिनों में संभव हो सकती है।” उन्होंने उम्मीद जताई है कि इस दौर में वह बचे हुए 50 में से लगभग आधे बंधकों को वापस ला सकते (Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path) हैं। बंधकों की रिहाई पर नेतन्याहू ने कहा कि “हमें उम्मीद है कि हम जल्द ही बड़ी संख्या में अपने लोगों को घर ला सकेंगे।” गौर करने वाली बात यह कि हमास ने भी संकेत दिया है कि “वह 10 बंधकों को रिहा करने के लिए तैयार है। लेकिन शर्त ये है कि पहले समझौते की कुछ शर्तें पूरी की जाएं। ऐसे में कहने की जरूरत नहीं कि हालात तेजी से बदल रहे हैं और दोनों पक्षों के बीच चल रही बातचीत एक नए समझौते की ओर इशारा कर रही है। आने वाले समय में देखना दिलचस्प होगा कि क्या हमास वाकई में बंधकों को सही सलामत रिहा करता है या फिर कोई खेल खेलता है। इस बात में रंच मात्र भी गुंजाईश नहीं है कि हमास ने यदि जरा भी चालाकी की तो इजरायल एक और बड़ा हमला करने से चूकेगा नहीं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Netanyahu: Iran Wants to Destroy US, Israel Blocks Path #Netanyahu #IranThreat #IsraelDefense #USMiddleEast #BenjaminNetanyahu #IranVsUS

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India’s Growing Population

Population Of India: भारत की बढ़ती जनसंख्या और बढ़ती चनौतियां  

भारत की जनसंख्या 2025 (India Population 2025) में 1.46 अरब (146 करोड़) तक पहुँच चुकी है, जिससे भारत दुनिया का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश बन गया है। संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारत की जनसंख्या (India Population) चीन से भी ज्यादा है। यह जनसंख्या वृद्धि भारत के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय ढाँचे पर गहरा प्रभाव डाल रही है। यह स्थिति एक ओर देश को युवा शक्ति के रूप में वैश्विक मंच पर आगे बढ़ने का अवसर देती है, वहीं दूसरी ओर यह कई जटिल चुनौतियाँ भी उत्पन्न करती है। जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारण भारत में जनसंख्या (Population Of India) वृद्धि के पीछे कई कारण हैं। इनमें प्रमुख हैं: अवसर: युवा शक्ति और संभावनाएँ भारत की कुल आबादी (Population of India) में लगभग 65% लोग 35 वर्ष से कम उम्र के हैं। यह डेमोग्राफिक डिविडेंड (Demographic Dividend) भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। यदि इस युवा आबादी को अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार के पर्याप्त अवसर मिलें, तो भारत न केवल आर्थिक रूप से तेज़ी से प्रगति कर सकता है, बल्कि वैश्विक नवाचार और प्रौद्योगिकी में अग्रणी बन सकता है। आईटी, स्टार्टअप और सेवा क्षेत्र ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ भारत की युवा शक्ति ने पहले ही अपना प्रभाव दिखाया है। वैश्विक स्तर पर भारतीय इंजीनियर, डॉक्टर और पेशेवर हर क्षेत्र में बेहतर कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में यदि इस जनशक्ति का सही दिशा में उपयोग किया गया, तो यह भारत को विकसित राष्ट्र की ओर ले जा सकती है। चुनौतियाँ: संसाधनों पर दबाव इसे भी पढ़ें:- 40 बैंक खातों में 106 करोड़ रुपये, छांगुर बाबा की कुंडली खंगालने में जुटी ईडी समाधान की दिशा में प्रयास भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारें जनसंख्या स्थिरीकरण (Population stabilization) और संसाधनों के न्यायपूर्ण वितरण के लिए कई योजनाएँ चला रही हैं। परिवार नियोजन, महिला सशक्तिकरण और शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, नई शिक्षा नीति (NEP) और कौशल विकास योजनाएं भी युवा आबादी को सशक्त बनाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं। टेक्नोलॉजी और नवाचार भी इस संकट को अवसर में बदलने में मदद कर सकते हैं। डिजिटल इंडिया (Digital India), स्टार्टअप इंडिया (Startup India) और मेक इन इंडिया (Make In India) जैसी योजनाएं न केवल रोजगार सृजन में सहायक हैं, बल्कि देश को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर कर रही हैं। भारत की 1.46 अरब की जनसंख्या (Population of India) एक ऐतिहासिक पड़ाव है। यह आँकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि एक संभावनाओं से भरी तस्वीर है। यदि इस विशाल मानव संसाधन का सुनियोजित ढंग से उपयोग किया जाए, तो भारत 21वीं सदी में विश्व की अगुवाई कर सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि नीति निर्माताओं, समाज और हर नागरिक को मिलकर सतत विकास की दिशा में प्रयास करना होगा। Latest News in Hindi Today Hindi Demographic Dividend #IndiaPopulation #PopulationGrowth #OverpopulationIndia #IndiaChallenges #PopulationCrisis

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Changur Baba ED probe

ED Probes Changur Baba Over ₹106 Cr in 40 Bank Accounts: 40 बैंक खातों में 106 करोड़ रुपये, छांगुर बाबा की कुंडली खंगालने में जुटी ईडी

उत्तर प्रदेश में अवैध धर्मांतरण के मामले में पकड़े गए जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले (ED Probes Changur Baba Over ₹106 Cr in 40 Bank Accounts) रही है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक छांगुर बाबा की संपत्तियों, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस), राज्य सरकार के अधिकारियों और कुछ बैंकों को पत्र लिखे हैं। ईडी अब छांगुर बाबा के एक-एक पैसे की जांच ईडी कर रही है। जानकारी के लिए बता दें कि जलालुद्दीन ने अपने और सहयोगियों के नाम लगभग 40 बैंक खातों में करीब 106 करोड़ रुपये जमा किए हैं, जिनमें से अधिकांश राशि पश्चिम एशिया से आई है। इस प्रकरण के संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा था कि “प्रारंभिक जांच से स्पष्ट हुआ है कि जलालुद्दीन की गतिविधियां न केवल समाज के लिए, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए खतरनाक हैं। उन्होंने ऐसे गिरोहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संकल्प जताया है।” योगी ने कहा कि “हमारी सरकार बहन-बेटियों की गरिमा और सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।   जलालुद्दीन ने अपने और सहयोगियों के नाम लगभग 40 बैंक खातों में करीब 106 करोड़ रुपये (ED Probes Changur Baba Over ₹106 Cr in 40 Bank Accounts) जमा किए हैं ईडी की लखनऊ जोनल इकाई ने बुधवार को पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) के तहत एक आपराधिक मामला दर्ज किया था। इस मामले में लखनऊ के गोमती नगर पुलिस थाने में जलालुद्दीन और अन्य के खिलाफ एटीएस की प्राथमिकी को संज्ञान में लिया गया (ED Probes Changur Baba Over ₹106 Cr in 40 Bank Accounts) है। आगे की पूछताछ हेतु जलालुद्दीन, उसके बेटे महबूब, और साथियों नवीन उर्फ जमालुद्दीन तथा नीतू उर्फ नसरीन को एटीएस ने गिरफ्तार कर जेल में रखा हुआ है। जांच एजेंसी जल्द ही अदालत में याचिका दायर कर बलरामपुर जिले के रहने वाले करीमुल्ला शाह से पूछताछ के लिए हिरासत में रिमांड का अनुरोध करेगी। सूत्रों के अनुसार, जलालुद्दीन ने अपने और सहयोगियों के नाम लगभग 40 बैंक खातों में करीब 106 करोड़ रुपये जमा किए हैं, जिनमें से अधिकांश राशि पश्चिम एशिया से आई है।  जलालुद्दीन ने धार्मिक प्रवचनों और अपनी पुस्तक शिजरा-ए-तैय्यबा के प्रकाशन के माध्यम से इस्लाम को बढ़ावा (ED Probes Changur Baba Over ₹106 Cr in 40 Bank Accounts) दिया बताया जा रहा है कि जलालुद्दीन ने एक व्यापक नेटवर्क बनाया था, जो बलरामपुर में स्थित चांद औलिया दरगाह के परिसर से संचालित होता था। ध्यान देने वाली बात यह कि वहाँ वह नियमित रूप से बड़ी सभाएं आयोजित करता (ED Probes Changur Baba Over ₹106 Cr in 40 Bank Accounts) था। उसकी सभाओं में भारतीय और विदेशी दोनों नागरिक शामिल होते थे। जाँच अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि “जलालुद्दीन ने धार्मिक प्रवचनों और अपनी पुस्तक शिजरा-ए-तैय्यबा के प्रकाशन के माध्यम से इस्लाम को बढ़ावा दिया। तो वहीं हिंदू, अनुसूचित जाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को व्यवस्थित रूप से धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित और मजबूर किया गया। फ़िलहाल प्रवर्तन निदेशालय ने इस अपराध से प्राप्त आय की जांच हेतु एटीएस, बलरामपुर जिला प्रशासन और संबंधित बैंकों के धन शोधन निरोधक प्रकोष्ठों को पत्र भेजकर जलालुद्दीन, उसके परिवार और सहयोगियों की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों और वित्तीय स्थिति की पूरी जानकारी मांगी है।  इसे भी पढ़ें:- ठाणे स्कूल में पीरियड्स जांच के नाम पर छात्राओं का अपमान  छांगुर बाबा का बचपन ग़रीबी में (ED Probes Changur Baba Over ₹106 Cr in 40 Bank Accounts) बीता छांगुर बाबा बलरामपुर ज़िले के उतरौला तहसील के अंतर्गत रेहरा माफ़ी गाँव का रहने वाला है। उसका जन्म इसी गाँव में हुआ था। उसके तीन और भाई हैं, जिनमें से तीन अभी भी गाँव में रहते हैं। भाइयों में सबसे बड़े छांगुर बाबा का बचपन ग़रीबी में (ED Probes Changur Baba Over ₹106 Cr in 40 Bank Accounts) बीता। इसके चलते कई साल तक भीख मांगकर जीवन यापन करना पड़ा। छांगुर बाबा साइकिल से नग और अंगूठी बेचने का काम करते थे। छांगुर बाबा दो बार 2005-2010 और 2015-2020 तक अपने गाँव रेहरा माफ़ी के प्रधान भी रहे। कई सालों तक यह काम करने के बाद वे मुंबई चले गए और बाद में अपने आप को पीर घोषित कर दिया। इस बीच उन्होंने कस्बे के चांद औलिया दरगाह के पास अपनी एक बैठक भी बना ली। वहीं पर मुरीदों का आना जाना था। जानकारी के लिए बता दें कि छांगुर बाबा के सहयोगी बब्बू चौधरी ने लगभग साल भर पहले उनके ख़िलाफ़ अवैध धर्मांतरण की शिकायत की थी। इस शिकायत के बाद कई संगठनों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की थी। Latest News in Hindi Today Hindi ED Probes Changur Baba Over ₹106 Cr in 40 Bank Accounts #ChangurBaba #EDProbe #MoneyLaundering #IndianScam #BankAccounts #106Crore #BreakingNews #EnforcementDirectorate #IndiaNews

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vitamin d

विटामिन डी डेफिशिएंसी: इस कमी से बढ़ सकता है इन 5 बीमारियों का जोखिम

विटामिन डी (Vitamin D) एक ऐसा जरूरी न्यूट्रिएंट है, जिसका इस्तेमाल हमारा शरीर कैल्शियम और फोस्फरस को एब्जॉर्ब करने के लिए करता है। अगर बात की जाए कैल्शियम और फोस्फरस की, तो यह हमारी हड्डियों और दांतों को बनाने और मजबूत बनाये रखने में मददगार हैं। इसके साथ ही इनके कई अन्य लाभ भी हैं। विटामिन डी (Vitamin D) का मुख्य स्त्रोत सूरज की रोशनी को माना गया है है। हालांकि, कुछ फूड्स से भी इसे प्राप्त किया जा सकता है। शरीर में विटामिन डी की कमी यानी डेफिशिएंसी होने से कई समस्याएं होने का रिस्क रहता है। आइए जानें विटामिन डी डेफिशिएंसी से होने वाली प्रॉब्लम्स (Problems caused by vitamin D deficiency) के बारे में। विटामिन डी डेफिशिएंसी से होने वाली प्रॉब्लम्स (Problems caused by vitamin D deficiency) क्लेवलैंडक्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार विटामिन डी (Vitamin D) को सूरज की रोशनी, कई फूड्स और सप्लीमेंट्स से प्राप्त किया जा सकता है। इसके बाद भी विटामिन डी डेफिशिएंसी (Vitamin D deficiency) दुनिया भर में सामान्य समस्याओं में से सबसे सामान्य है।  विटामिन डी डेफिशिएंसी से होने वाली प्रॉब्लम्स (Problems caused by vitamin D deficiency) इस प्रकार हैं  रिकेट्स रिकेट्स बच्चों में होने वाली समस्या है, जिसमें उनकी हड्डियां कमजोर और सॉफ्ट हो जाती है। इससे हड्डियों का आकर अलग हो जाता है। ऐसा माना गया है कि इसका मुख्य कारण होता है विटामिन डी (Vitamin D) की कमी। लोग इस समस्या को गरीबी और कुपोषण से जोड़ कर देखते हैं। वयस्कों में इस स्थिति को ऑस्टियोमलेशिया के नाम से जाना जाता है। इसके कारण हड्डियों में दर्द हो सकता है और मसल्स कमजोर हो सकते हैं। यह नहीं इससे फ्रैक्चर का रिस्क भी बढ़ सकता है। ऑस्टियोपोरोसिस शरीर में कैल्शियम के एब्ज़ोर्प्शन के लिए विटामिन डी (Vitamin D) जरूरी है। इसकी कमी के कारण बोन डेंसिटी कम होती है और ऑस्टियोपोरोसिस का रिस्क बढ़ता है। यही नहीं इससे हड्डियों के टूटने का रिस्क भी अधिक हो जाता है। यह समस्या किसी भी व्यक्ति को हो सकती है लेकिन उम्र के बढ़ने के साथ ही इस रोग के विकसित होने की संभावना बढ़ती है। ऑटोइम्यून डिजीज  ऐसा पाया गया है कि विटामिन डी डेफिशिएंसी (Vitamin D deficiency) ऑटोइम्यून डिजीज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ऑटोइम्यून कंडीशन से पीड़ित व्यक्तियों में अक्सर लो विटामिन डी (Vitamin D) लेवल पाया गया है। यह कंडीशंस हैं मल्टीप्ल स्क्लेरोसिस, टाइप 1 डायबिटीज, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज, रूमेटाइड आर्थराइटिस आदि। हालांकि, इसके बारे में अधिक रिसर्च की जानी जरूरी है। कुछ कैंसर विटामिन डी डेफिशिएंसी (Vitamin D deficiency) से कुछ कैंसर होने का रिस्क भी बढ़ता है। कुछ स्टडीज भी इन दोनों के लिंक के बारे में बताती हैं। ऐसा माना गया है कि इस कमी से ब्रेस्ट कैंसर और बाउल कैंसर का रिस्क बढ़ता है। ऐसा भी पाया गया है कि लो विटामिन डी (Vitamin D) लेवल से सम्पूर्ण कैंसर मोर्टेलिटी में बढ़ोतरी होती है। इसके साथ ही यह भी पाया गया है कि इससे प्रोस्टेट और पैंक्रियाटिक कैंसर का रिस्क बढ़ता है। यानी, यह कमी कैंसर की संभावना को बढ़ा सकती है, जो एक गंभीर समस्या का विषय है। इसे भी पढ़ें:-  एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा कार्डियोवैस्कुलर डिजीज विटामिन डी डेफिशिएंसी (Vitamin D deficiency) को कार्डियोवैस्कुलर डिजीज  से भी जोड़ा गया है, जिसमें कई हार्ट डिजीज शामिल हैं।  यह भी पाया गया है कि इससे बुजुर्गों की मसल्स कमजोर हो सकती हैं और उन्हें दर्द हो सकता है। विटामिन डी की कमी से डिप्रेशन और अन्य मेंटल प्रॉब्लम्स भी हो सकती हैं। यह कमी मूड डिसऑर्डर्स का कारण भी बन सकती है।  नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Vitamin D #vitamind #healthtips #bonehealth #immunity #diseaserisk #nutrition #healthawareness

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Radhika Yadav murder

Why Radhika Yadav Was Murdered by Her Own Father?: आखिर पिता ने क्यों किया अपनी टेनिस चैंपियन बेटी राधिका यादव का मर्डर?

पिता पुत्री का रिश्ता बेहद खास होता हैं। लेकिन कभी-कभी इन्हीं रिश्तों में छोटी-छोटी बातों को लेकर ऐसी खटास उत्पन्न हो जाती है कि एक दूसरे के जान के प्यासे हो जाते हैं। कुछ इसी तरह की घटना दिल्ली से सटे गुरुग्राम में घटी है। जानकारी के मुताबिक 25 वर्षीय स्टेट लेवल टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव की हत्या उनके ही पिता दीपक यादव ने गोली मारकर कर (Why Radhika Yadav Was Murdered by Her Own Father?) दी। घटना के समय घर में राधिका, उनके पिता दीपक, मां मंजू और चाचा कुलदीप मौजूद थी। बता दें कि राधिका यादव एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की टेनिस खिलाड़ी थी। उनकी युगल रैंकिंग अंतरराष्ट्रीय टेनिस महासंघ में 113 थी। पुलिस ने आरोपी दीपक यादव को गिरफ्तार कर लिया है और साथ उसकी लाइसेंसी रिवॉल्वर को भी जब्त कर लिया है। आपको बता दें कि राधिका यादव हरियाणा की एक उभरती हुई टेनिस प्लेयर थीं। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुटी है। शुरुआती जांच के बाद पुलिस का कहना है “पिता ने अपनी बेटी की हत्या इसलिए की क्योंकि वह एकेडमी बंद नहीं कर रही थी। दावा तो यह भी किया जा रहा है वो रील बनाया करती थी, जिसे गुस्से पिता ने उसे गोली मार दी। लेकिन पुलिस के बयान के मुताबिक एकेडमी बंद नहीं करने की वजह से ही मर्डर हुआ। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या कोई पिता इतनी छोटी से बात के लिए अपने जिगर के टुकड़े को मौत के घाट उतार देता है? दीपक यादव इस बात से खुश नहीं था कि उसकी बेटी उसकी मर्जी के बैगर ये एकेडमी (Why Radhika Yadav Was Murdered by Her Own Father?) चलाए खैर, पुलिस की माने तो “आरोपी पिता दीपक यादव इस बात से खुश नहीं था कि उसकी बेटी उसकी मर्जी के बैगर ये एकेडमी (Why Radhika Yadav Was Murdered by Her Own Father?) चलाए। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि जिस पिता ने अपनी बेटी को खेल में आगे बढ़ाने के लिए बचपन से ही सपोर्ट किया है। आखिर अचानक क्यों उसे एकेडमी चलाने से मना करेगा? और उससे भी बड़ा सवाल ये कि क्या सिर्फ यही वजह थी? भला कोई इतनी छोटी सी बात के लिए किसी को क्यों मारेगा? और वैसे में हरियाणा का इतिहास ही खेलों के प्रति अपने बच्चों और खासकर बेटियों को आगे बढ़ाने का रहा है। फिर दीपक यादव भला ऐसा क्यों करेगा? और उससे भी बड़ा सवाल यह भी कि जब राधिका यादव अपना ये एकेडमी कई सालों से चला रही थीं तो अचानक एकदम से उनके पिता एकेडमी बंद क्यों कराना चाहते थे? और इतनी ही दिक्क्त थी तो साल भर से चल कैसे रही थी। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या गुरुग्राम पुलिस पहेली को सुलझाए बगैर ही मामले को सुलझाने का प्रयास कर रही है? क्या पुलिस की तरह से दिया गया यह बयान जल्दबाजी नहीं है? सवाल ये भी कि क्या इस मामले में अभी कई राज ऐसे हैं जिनसे अभी भी पर्दा उठना बचा है? खैर, ये वो तमाम सवाल हैं जो इस मामले को सुलझाने के लिए बेहद जरूरी हैं।  इसे भी पढ़ें:- ठाणे स्कूल में पीरियड्स जांच के नाम पर छात्राओं का अपमान  सुबह करीब 10:30 बजे गोली चलने की आवाज सुनकर वह और उनका बेटा पीयूष पहली मंजिल पर पहुंचे तो राधिका रसोई में खून से लथपथ पड़ी (Why Radhika Yadav Was Murdered by Her Own Father?) थी इस पूरे मामले में राधिका के चाचा कुलदीप ने बताया कि “गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे गोली चलने की आवाज सुनकर वह और उनका बेटा पीयूष पहली मंजिल पर पहुंचे तो राधिका रसोई में खून से लथपथ पड़ी (Why Radhika Yadav Was Murdered by Her Own Father?) थी। पुलिस के मुताबिक, “ड्राइंग रूम में दीपक की लाइसेंसी रिवॉल्वर पड़ी थी। उन्होंने राधिका को तुरंत सेक्टर 56 के एशिया मरिंगो अस्पताल पहुंचाया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।” कुलदीप ने बताया कि “घटना के समय घर में दीपक, उनकी पत्नी मंजू और राधिका ही मौजूद थे। मुझे लगता है कि राधिका की हत्या उनके भाई दीपक ने ही की है।” गौरतलब हो कि 23 मार्च 2000 को हरियाणा में जन्मी राधिका यादव हरियाणा की एक उभरती हुई टेनिस प्लेयर थीं। उन्होंने स्टेट लेवल पर कई टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था। अंतर्राष्ट्रीय टेनिस महासंघ में युगल टेनिस खिलाड़ी के रूप में रैंकिंग 113 थी।  Latest News in Hindi Today Hindi Why Radhika Yadav Was Murdered by Her Own Father? #RadhikaYadav #TennisChampion #FatherKilledDaughter #MurderNews #CrimeAlert #JusticeForRadhika

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PM Modi's Foreign Visit Row

पीएम मोदी की विदेश यात्रा पर सीएम मान के तंज से गरमाई सियासत, विदेश मंत्रालय ने बताया गैर-जिम्मेदाराना और अशोभनीय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) अपने विदेश यात्रा से वापस लौट आए हैं, लेकिन अब पीएम मोदी (PM Modi) के इस यात्रा पर राजनीति शुरू हो गई है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने इस हालिया विदेश यात्राओं पर तंज करके देश की राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री मान के विवादित बयान का एक तरफ जहां देश का बुद्धजीवी वर्ग आलोचना कर रहा है, वहीं भारत के विदेश मंत्रालय (Indian Foreign Ministry) ने भी कड़ा जवाब दिया है। विदेश मंत्रलाय के प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री मान का नाम लिए बिना उनके बयान को “गैर-जिम्मेदाराना, खेदजनक और अशोभनीय” करार दिया है। 10,000 की जनसंख्या वाले देशों की यात्राएं करते हैं और वहां उन्हें सबसे बड़ा अवॉर्ड मिल रहा है बता दें कि मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने हाल ही में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) की विदेश यात्राओं पर कटाक्ष करते हुए कहा था, “प्रधानमंत्री 140 करोड़ की आबादी वाले देश में कम रहते हैं, लेकिन वहां रहते नहीं हैं। 10,000 की जनसंख्या वाले देशों की यात्राएं करते हैं और वहां उन्हें सबसे बड़ा अवॉर्ड मिल रहा है। इतने लोग तो हमारे यहां पर जेसीबी से खुदाई देखने के लिए इकट्ठे हो जाते हैं।” उन्होंने यह टिप्पणी पीएम मोदी के ब्राजील, घाना, त्रिनिदाद-टोबैगो, अर्जेंटीना और नामीबिया दौरे के संदर्भ में की थी। सीएम मान (Bhagwant Mann) का यह बयान विपक्षी आलोचना के साथ-साथ राजनीतिक व्यंग्य के तौर पर सामने आया, लेकिन इसकी गूंज अब विदेश नीति के गलियारों तक पहुंच गई है। विदेश मंत्रालय ने दी कड़ी प्रतिक्रिया विदेश मंत्रालय (Indian Foreign Ministry) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से प्रेस ने जब इसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “हमने ग्लोबल साउथ के मित्र देशों के साथ भारत के संबंधों पर राज्य के एक उच्च पदाधिकारी द्वारा की गई कुछ टिप्पणियां देखी हैं। ये टिप्पणियां गैर-जिम्मेदाराना, खेदजनक हैं और राज्य के किसी पदाधिकारी को शोभा नहीं देतीं।” हालांकि इस दौरान रणधीर जायसवाल ने सीधे भगवंत मान का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि वे किसे संबोधित कर रहे हैं। जायसवाल ने कहा कि भारत सरकार खुद को इस तरह के हर उस अनुचित टिप्पणी से अलग करती है, जो दोस्त देशों के साथ हमारे संबंधों को कमजोर कर सकती हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की राजनीतिक बयानबाजी, विशेष रूप से राज्य स्तर के जिम्मेदार नेताओं द्वारा, विदेश नीति के गंभीर मसलों को स्थानीय राजनीति के चश्मे से देखने का प्रयास है, जो दीर्घकालिक रूप से राजनयिक रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकता है। क्योंकि पीएम मोदी की इस यात्रा का उद्देश्य ग्लोबल साउथ देशों के साथ भारत के रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना था। इन दौरों के दौरान ऊर्जा सहयोग, व्यापार, कृषि, डिजिटल इनोवेशन और वैश्विक मंचों पर समर्थन जैसे कई मुद्दों पर बातचीत हुई। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ भाजपा ने किया तगड़ा पलटवार   सीएम मान के बयान के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक बार फिर आमने-सामने आ गई हैं। भाजपा नेताओं ने भगवंत मान (Bhagwant Mann) की टिप्पणी को “राजनीतिक अपरिपक्वता” और “संविधानिक मर्यादा का उल्लंघन” बताया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने सीएम मान पर पलटवार करते हुए इसे शर्मनाक करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, ”प्रधानमंत्री को विदेशों में मिलने वाला सम्मान 140 करोड़ भारतीय के लिए गर्व की बात है। चाहे सम्मान देने वाला कोई भी देश हो, जब भारत के नेतृत्व को वैश्विक मंच पर सम्मान मिलता है तो वो क्षण संपूर्ण भारत की प्रतिष्ठा का प्रतीक बनता है। लेकिन भगवंत मान जैसे कुछ लोग, जिनके लिए केजरीवाल और उनके जूतों की चाटुकारिता के अलावा सब कुछ छोटा है, वो इस सम्मान का मजाक बनाते हैं। सीएम मान के बयान पर विवाद बढ़ता देश आप (AAP) पार्टी के नेता सफाई देना शुरू कर चुके हैं। आप नेताओं का कहना है कि भगवंत मान का मकसद प्रधानमंत्री के विदेश दौरों की उपयोगिता और लागत को लेकर सवाल उठाना था, न कि भारत के कूटनीतिक रिश्तों को कमतर आंकना। Latest News in Hindi Today Hindi news Bhagwant Mann #PMModi #CMMann #ForeignVisit #MEA #Politics2025 #ModiVsMann #IndianPolitics #LatestNews #ModiAbroad #MEAStatement

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Ice Bath Benefits & Risks You Should Know

आइस बाथ- एक लोकप्रिय ट्रेंड जिसके कई हैं फायदे, लेकिन इसके इन स्वास्थ्य जोखिमों से रहें सावधान

पिछले कुछ समय से आइस बाथ (Ice bath) चैलेंज सोशल मीडिया पर बहुत प्रचलित हो रहा है। ऐसा माना गया है कि इसके कई फायदे हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स की मानें तो इससे कुछ समस्याएं भी हो सकती हैं। अगर आप आइस बाथ के बारे में नहीं जानते हैं, तो आपको बता दें कि इसे कायरोथेरेपी भी कहा जाता है। इसमें ठंडे पानी में बर्फ मिला कर नहाया जाता है ताकि सूजन और मांसपेशियों में दर्द को कम किया जा सके। लेकिन, हाल ही में हुई रिसर्च बताती हैं कि आइस बाथ (Ice bath) से कई नुकसान भी हो सकते हैं। आइए जानें आइस बाथ से जुड़े हेल्थ रिस्क्स (Health risks of ice bath) के बारे में। आइस बाथ से जुड़े हेल्थ रिस्क्स (Health risks of ice bath): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार अगर आइस बाथ (Ice bath) को सही से लिया जाए तो यह उन लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, जो स्पोर्ट्स में भाग लेते हैं। लेकिन, इसको आजमाने से पहले एक्सपर्ट की सलाह लें और इसकी सही तकनीक के बारे में जान लें। आइए जानें आइस बाथ से जुड़े हेल्थ रिस्क्स (Health risks of ice bath) के बारे में। हायपोथर्मिया ठंडे पानी में ज्यादा समय रहने से शरीर पर फिजिकल रिएक्शन हो सकता है। 15 डिग्री सेल्सियस  से कम तामपान के पानी में जाना बहुत हानिकारक सिद्ध हो सकता है। इसमें शरीर का तापमान बहुत कम हो सकता है जिसे हायपोथर्मिया कहा जाता है। यह एक एमेर्जेंसी हैं, जिसमें तुरंत डॉक्टर की सलाह की आवश्यकता होती है। यही नहीं, ठंडे पानी से बाहर आने के बाद भी शरीर का टेम्प्रेचर कम हो सकता है और कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। ब्लड प्रेशर पर असर आइस बाथ से जुड़े हेल्थ रिस्क्स (Health risks of Ice bath) ब्लड प्रेशर से भी संबंधित हैं। इससे हार्ट रेट बढ़ जाती और यह अनकण्ट्रोल हो सकती है। इसका प्रभाव ब्लड प्रेशर पर भी पड़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। यही नहीं, अधिक ठंड से एकदम हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ सकता है। उन लोगों के लिए आइस बाथ (Ice bath) खासतौर पर खतरनाक है जिन्हें हार्ट, ब्लड वेसल्स या दिमाग से सम्बन्धित कोई समस्या है। सांस संबंधी समस्याएं आइस बाथ (Ice bath) के दौरान ठंडे पानी में रहने से सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं जैसे रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस। इस पानी में अधिक देर तक रहने से नर्वस और ब्लड वेसल्स को लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकता है। जिससे पैरों और हाथों में दर्द, उनका सुन्न होना या ठंड के प्रति सेंसिटिविटी बढ़ सकती है। यह तो थे आइस बाथ से जुड़े हेल्थ रिस्क्स (Health risks of ice bath)। आइए जानें कि सही मार्गदर्शन और सलाह के बाद आइस बाथ के फायदे (Benefits of ice bath) के बारे में। इसे भी पढ़ें:-  एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा आइस बाथ के फायदे (Benefits of ice bath) आइस बाथ के फायदे (Benefits of Ice bath) इस प्रकार हो सकते हैं: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Ice bath #icebath #coldtherapy #healthtrend #cryotherapy #wellnesstips

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Maharashtra Passes Public Security

विरोध और मतभेद के बीच महाराष्ट्र में पास हुआ ‘लोक सुरक्षा विधेयक’: वामपंथी संगठनों पर शिकंजा, विपक्ष ने जताई शंका

महाराष्ट्र विधानसभा ने राजनीतिक विरोध और वैचारिक मतभेद के बीच बहुप्रतीक्षित ‘महाराष्ट्र लोक सुरक्षा विधेयक, 2025’ (Maharashtra Public Security Bill) को बहुमत से पास कर दिया है। यह विधेयक राज्य में वामपंथी उग्रवाद, माओवादी विचारधारा और सरकार विरोधी चरमपंथी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई के उद्देश्य से लाया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) द्वारा पेश किए गए इस बिल को लेकर जहां सत्ता पक्ष इसे राज्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का नया रास्ता बता रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने विधानसभा में लोक सुरक्षा विधेयक (Maharashtra Public Security Bill) पेश करते हुए कहा कि गडचिरोली और कोकण जैसे जिले शहरी और ग्रामीण नक्सलवाद से प्रभावित हैं, जो राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह विधेयक उन संगठनों पर सख्ती से कार्रवाई करेगा जो गुरिल्ला युद्ध और हिंसक विचारधारा के जरिए सामाजिक अस्थिरता फैलाना चाहते हैं।” सीएम फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने यह भी बताया किया कि यह कानून UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) जैसी केंद्रीय कानूनी व्यवस्थाओं की खामियों को पूरा करेगा, जो केवल आतंकवाद तक सीमित हैं। यह नया विधेयक चरमपंथी संगठनों की वैचारिक और संगठित गतिविधियों पर भी शिकंजा कसने का काम करेगा।  विधेयक में संशोधन के लिए आम जनता से मिले थे 12,500 सुझाव  बता दें कि महाराष्ट्र लोक सुरक्षा विधेयक, 2025′ (Maharashtra Public Security Bill) पहली बार जुलाई 2024 के मानसून सत्र में विधानसभा में प्रस्तुत किया गया था। उस समय विधेयक में ‘व्यक्ति और संगठन’ जैसे शब्दों के कारण यह विवादों में घिर गया था। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि यह विधेयक असहमति जताने वाले आम नागरिकों को भी निशाना बना सकता है। इसी के चलते विधेयक को एक संयुक्त समिति के पास भेजा गया। इस समिति में जयंत पाटिल, नाना पटोले, जितेंद्र आव्हाड, भास्कर जाधव और अंबादास दानवे जैसे वरिष्ठ विपक्षी नेता शामिल थे। समिति को इस विधेयक को लेकर आम जनता से 12,500 सुझाव प्राप्त हुए। समिति की सिफारिशों के आधार पर विधेयक में तीन अहम संशोधन किए गए। पहला- ‘व्यक्ति और संगठन’ शब्द हटाकर केवल ‘चरमपंथी विचारधारा वाले संगठन’ रखा गया। दूसरा- निगरानी के लिए हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय सलाहकार बोर्ड गठित करने का प्रावधान किया गया। तीसरा- जांच की जिम्मेदारी सब-इंस्पेक्टर की जगह अब डीएसपी स्तर के अधिकारियों को दी जाएगी। सरकार ने विधेयक को लेकर पत्रकार संगठनों से भी संवाद कर यह भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि यह कानून मीडिया की स्वतंत्रता या अभिव्यक्ति के अधिकारों को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करेगा। फडणवीस ने कहा कि सरकार किसी भी लोकतांत्रिक विचारधारा या आलोचना को दबाने की मंशा नहीं रखती। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ विपक्ष की आशंकाएं और विरोध बरकरार हालांकि, विपक्षी दलों ने संशोधन के बावजूद इस विधेयक को लेकर अपनी गंभीर शंकाएं और आपत्तियां दर्ज की हैं। एनसीपी विधायक भास्कर जाधव ने विधेयक को लेकर सवाल किया कि अगर यह कानून राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इतना जरूरी है, तो दूसरे भाजपा शासित राज्यों में इसे क्यों नहीं लाया गया? इसे लाने का मतलब सरकार के खिलाफ उठने वाली आवाज को दबाना है। वहीं जयंत पाटिल ने कुछ संशोधनों का स्वागत किया, लेकिन कहा कि “फडणवीस (Devendra Fadnavis) ध्यान रखें, पी चिदंबरम जिस कानून (PMLA) को लाए थे, वही बाद में उनके खिलाफ लागू हुआ।” एनसीपी विधायक नितिन राऊत ने भी विधयेक को लेकर आशंका जताई कि इस कानून का इस्तेमाल भविष्य में लोकतांत्रिक आंदोलनों, धरनों या मोर्चों पर लागू हो सकता है। उन्होंने कहा, “भीमा कोरेगांव मामले में ‘अर्बन नक्सल’ जैसे शब्दों का दुरुपयोग हुआ था। ऐसा न हो कि यह कानून भी राजनीति का हथियार बन जाए।”  राऊत ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि ‘चरमपंथी’ और ‘वामपंथी’ की परिभाषा क्या होगी। उन्होंने कहा कि राज्य का हर जागरूक नागरिक नक्सलवाद के खिलाफ है, लेकिन कानून का दायरा स्पष्ट होना चाहिए। विपक्ष के इन तमाम विरोध के बाद भी महाराष्ट्र लोक सुरक्षा विधेयक अब कानून बन गया है। सरकार इसे राज्य की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक मजबूत हथियार मान रही है। अब आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह कानून वास्तव में शांति स्थापित करता है या असहमति को दबाने का माध्यम बनता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Devendra Fadnavis #Maharashtra #PublicSecurityBill #Opposition #Politics #LeftistGroups #AssemblyNews

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