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Mood boosting superfoods

खुश रहने के लिए खाएं ये सुपरफूड्स: मूड बूस्टर के बारे में पूरी जानकारी

हम दिन में चाहे कितने भी चैलेंजेस का सामना करें, लेकिन अगर हमारा मनोबल हाई है, तो पूरी दुनिया का सामना करना आसान हो जाता है। जब हम भूखे होते हैं या हमारे शरीर में न्यूट्रिएंट्स की कमी होती है, तो हमारा मूड भी सही नहीं रहता। हमारा भोजन हमारे शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। हमारा भोजन हमारे मूड को कैसे प्रभावित करता है, यह एक इक्वेशन पर आधारित है। भोजन में परिवर्तन हमारे ब्रेन स्ट्रचर, केमिस्ट्री और फिजिओलॉजी आदि को भी प्रभावित करता है। स्टडीज यह भी बताती हैं कि कुछ फूड्स हमारे मूड को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकते हैं। आइए जानें मूड बूस्ट करने वाले सुपरफूड्स (Mood boosting superfoods) के बारे में।  मूड बूस्ट करने वाले सुपरफूड्स (Mood boosting superfoods): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार कुछ खास फूड्स में ऐसे कंपाउंड्स होते हैं, जो न्यूरोट्रांस्मीटर्स डोपामाइन, सेरोटोनिन आदि पर असर ड़ाल सकते हैं और जो मूड को बेहतर बनाते हैं। मूड बूस्ट करने वाले सुपरफूड्स (Mood boosting superfoods) की लिस्ट बहुत लम्बी है। आइए जानें कुछ फूड्स के बारे में:  डार्क चॉकलेट (Dark Chocolate) डार्क चॉकलेट (Dark Chocolate) में फ्लवोनोइड्स होते हैं, जिन्हें सेरोटोनिन लेवल को बढ़ाने के साथ लिंक किया जाता है। यह डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकते हैं। आप डार्क चॉकलेट (Dark Chocolate) को सुबह ओटमील में डालें, कॉफी में पीएं या डिनर के बाद इसके एक टुकड़े का मजा लें। इससे आपका मूड सही रह सकता है लेकिन, इसे कम मात्रा में ही खाएं। केला (Banana) मूड बूस्ट करने वाले सुपरफूड्स (Mood boosting superfoods) में केला भी शामिल है। यह पीला फल ट्रिप्टोफैन (Tryptophan) से भरपूर होता है, जो एक एमिनो एसिड है। यह सेरोटोनिन का अच्छा स्त्रोत है। यही नहीं, यह विटामिन बी 6 से भी भरे होते हैं, जो मूड को सही रखने में मददगार हैं। ये नाश्ते के रूप में एकदम बेहतरीन हैं, इन्हें काटकर, स्मूदी में मिलाकर या मफिन में पकाकर भी खाया जा सकता है। बेरीज (Berries) स्ट्रॉबेरीज, ब्लूबेरीज, और रेस्बेरीज एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जो ऑक्सीडेटिव तनाव से लड़ने मददगार होते हैं हैं। ऑक्सीडेटिव तनाव को मूड डिसऑर्डर से जोड़ा गया है। इन फलों को आप पेनकेक्स या दही में मिला कर खा सकते हैं या ऐसे भी इनका सेवन किया जा सकता है। ऑयली फिश (Oily fish) अगर आप मच्छली के शौकीन हैं, तो आपके लिए यह अच्छी खबर हो सकती है। क्योंकि ऑयली फिश जैसे सालमोन, मैकेरल आदि में ओमेगा -3 फटी एसिड्स होता है, जिसमें एंटी- इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज होती हैं जिन्हें डिप्रेशन से लड़ने में फायदेमंद पाया गया है।  नट्स और सीड्स (Nuts and seeds) अखरोट, चिया सीड्स और फ्लेक्ससीड्स आदि ओमेगा-3 का बेहतरीन स्त्रोत है। इसके साथ ही इन्हें किसी भी डिश के साथ खाया जा सकता है। आप अपने सलाद को अख़रोट या अन्य सीड्स के साथ खा सकते हैं। चिया सीड्स को स्मूदीज में ड़ाल कर भी आप अच्छा स्वाद और न्यूट्रिएंट्स पा सकते हैं।  ओट्स (Oats) ओट्स (Oats) एक अच्छा ब्रेकफास्ट है। ओट्स (Oats) एनर्जी को धीरे-धीरे रिलीज करता है, जिससे शुगर का एकदम से बढ़ना कम हो सकता है और मूड सुधरने में मदद मिल सकती है। ओट्स (Oats) को कुक करने की जगह आप रात भर इन्हें भिगोएं और सुबह फल व नट्स के साथ खाएं।  पालक (Spinach) मूड बूस्ट करने वाले सुपरफूड्स (Mood boosting superfoods) में पालक (Spinach) को भी शामिल किया जा सकता है। यह सब्जी फोलेट, बी विटामिन से भरपूर होती है, जो मूड रेगुलेटिंग न्यूरोट्रांसमिटर्स, सेरोटोनिन और डोपामिन आदि को बनाने में मदद कर सकती है। आप स्मूदीज में या ऑमलेट में पालक का इस्तेमाल कर सकते हैं। पालक  (Spinach) की सब्जी भी आपको भरपूर न्यूट्रिएंट्स प्रदान कर सकते हैं।  इसे भी पढ़ें: Health issues in summer: गर्मी में होने वाली 5 सामान्य स्वास्थ्य समस्याएं और उनसे सुरक्षित रहने के टिप्स एवोकाडो (Avocado) एवोकाडो न केवल खाने में स्वादिष्ट या क्रीमी होता है, बल्कि इसमें बी विटामिन्स (Vitamin B) और मोनोअनसेचुरेटेड फैट्स होते हैं जो न्यूरोट्रांसमीटर और ब्रेन हेल्थ के लिए फायदेमंद हैं। आप एवोकाडो का टोस्ट बना कर खास सकते हैं या इसका सलाद भी बना सकते हैं। इसके साथ ही इसका मिल्कशेक भी बनाया जा सकता है। इनके अलावा मूड बूस्ट करने वाले सुपरफूड्स (Mood boosting superfoods) में बीन्स, ग्रीन टी, शकरकंदी आदि को भी शामिल किया जा सकता है। नोट:– यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi Mood boosting superfoods #Spinach #Oats #DarkChocolate #Moodboostingsuperfoods #superfoods

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AAPCON 2025 'Ayurveda Parv'

मुंबई में आयोजित होगा AAPCON 2025 ‘Ayurveda Parv’: पहली बार अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन

आयुर्वेद पर्व (Ayurveda Parv) एक ऐसा फेस्टिवल या इवेंट है, जो अधिकतर एक मल्टी-डे एक्सिबिशन होता है। इसका उपद्देश्य आयुर्वेद को बढ़ावा देना है। इसका आयोजन कुछ संगठनों द्वारा किया जाता है जैसे मिनिस्ट्री ऑफ आयुष (Ministry of AYUSH) या द एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (ASSOCHAM)। अन्य शब्दों में कहा जाए तो आयुर्वेद पर्व (Ayurveda Parv) एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जिसमें आयुर्वेद की समृद्ध विरासत और इसके फायदों के बारे में लोगों को जागरूक किया जाता है। इस बार एएपीकॉन 2025 “आयुर्वेद पर्व” सम्मेलन और प्रदर्शनी पहली बार मुंबई में आयुर्वेदिक प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन (एएपी) द्वारा आयोजित की जाएगी। आइए जानें इसके बारे में विस्तार से। क्या है आयुर्वेद पर्व (Ayurveda Parv)?  जैसा की पहले ही बताया गया है कि यह एक प्लेटफॉर्म है, जिसमें आयुर्वेद के बारे में लोगों को बताया और जागरूक किया जाता है। इसमें प्रदर्शनी, साइंटिफिक सेशन, मेडिकल चेक-अप कैंप आदि का आयोजन किया जाता है। द एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (ASSOCHAM) के अनुसार हर व्यक्ति के लिए क्वालिटी हेल्थकेयर सुनिश्चित करने के लिए एक सक्षम एकोसिस्टम बनाना आवश्यक है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए, द एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (ASSOCHAM) मिनिस्ट्री ऑफ आयुष (Ministry of AYUSH) के साथ मिलकर आयुर्वेद पर्व (Ayurveda Parv) का आयोजन करता है। कहां मनाया जा रहा है इस साल आयुर्वेद पर्व (Ayurveda Parv)?  इस साल पांचवां अंतर्राष्ट्रीय आयुर्वेद सम्मेलन होटल ताज लैंड्स 5 से 7 अप्रैल तक आयोजित किया जाएगा। इसमें कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा जैसे आयुर्वेद से जुडी एक्सीबिशंस, फ्री हेल्थ चेकअप और सेमीनार आदि। यह कॉसेप्ट ‘आयुर्वेद जगत सेतु’ पर बेस्ड है जिसका अर्थ है कि आर्युवेद ग्लोबल हेल्थ का ब्रिज है। इस एनुअल कॉनफेरेन्स को मिनिस्ट्री ऑफ आयुष (Ministry of AYUSH) के साथ सहयोग के साथ मनाया जा रहा है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि इस सम्मेलन में दुनिया भर के प्रसिद्ध आयुर्वेद विशेषज्ञ, चिकित्सक और शोधकर्ता शामिल होंगे। यानी, आयुर्वेद से जुड़े कई लोग इस सम्मेलन में शामिल होंगे और भारतीय आयुर्वेद सिस्टम को एक प्लेटफार्म प्रदान करेंगे।  इसे भी पढ़ें: 50 slaps for glow: क्या सच में 50 थप्पड़ खाने से आता है चेहरे पर निखार? आयुर्वेद पर्व कॉन्फ्रेंस (Ayurveda Parv Conference) की डिटेल यह कॉन्फ्रेंस तीन दिन की रहेगी और इस दौरान हेल्थ (Health) से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की डिटेल इस प्रकार है: इसके साथ ही इसमें आयुर्वेद पर्व (Ayurveda Parv) में समुद्र मंथन फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग की जाएगी। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट्स के साथ लिवर वर्कशॉप्स और स्पेशल सेशन होंगे। यही नहीं, डिजिटल हेल्थ मार्केटिंग, कॉर्पोरेट हॉस्पिटल पार्टनरशिप और आयुर्वेद प्रोफेशनल के लिए अवसरों पर भी चर्चा होगी।  Latest News in Hindi Today Hindi Ayurveda Parv #AyurvedaParvconference #Ayurvedafestivalconference #MinistryofAYUSH #ASSOCHAM #AyurvedaParv #Ayurveda #AAPCON

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Does Face Slapping Really Enhance Skin?

50 slaps for glow: क्या सच में 50 थप्पड़ खाने से आता है चेहरे पर निखार?

लोगबाग खूबसूरत और दमकती त्वचा पाने के लिए क्या नहीं करते। कुछ ज़माने भर की क्रीम लगाते हैं, तो कुछ हेल्दी डाइट को फॉलो करते हैं, तो वहीं कुछ कई तरह के घरेलु नुस्खों का पालन करते हैं। जिसके नुकसान और फायदे दोनों संभावित होते हैं। ऐसे में यदि आपसे कहा जाये कि एक फार्मूला ऐसा भी है जिससे आप बिना एक भी पैसा खर्च किये अपने चेहरे पर निखार ला सकते हैं? तो निश्चित ही आप उस फॉर्मूले को जानना चाहेंगे। यह तो ठीक, लेकिन यदि आपसे यह कहा जाये कि उस फॉर्मूले के तहत आपको अपना गाल लाल करना होगा। यानि कि आपको रोज एक-दो नहीं बल्कि 50 थप्पड़ खाने (50 slaps for glow) होंगे। हां, सही समझें। थप्पड़। आप कहेंगे कि क्या मजाक है? दरअसल यह मजाक नहीं बल्कि ये सच है। रोजाना थप्पड़ खाने से चेहरे पर निखार आ जाता है। अमूमन लोग थप्पड़ खाने से डरते हैं, परंतु यही थप्पड़ आप को सुंदर और निखरी हुई त्वचा दे सकता है।  थप्पड़ मारने से (50 slaps for glow) बढ़ जाता है ब्लड सरकुलेशन ये बात खासतौर पर उन लोगों को जान लेनी चाहिए जो खूबसूरत और चमकदार त्वचा के लिए तमाम तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट का यूज करते हैं। बड़ी बात यह कि जवां दिखने के लिए फेशियल ब्लीच से लेकर कई तरह के ट्रीटमेंट करवाने वाले लोग थप्पड़ वाली थेरेपी से अपने चेहरे को बिना पैसे खर्च किए ही सुंदर बना सकते हैं। इसे थप्पड़ थेरेपी कहते हैं। निश्चित ही आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये थप्पड़ थेरेपी है क्या? तो आपको बता दें कि इस थेरेपी में चेहरे की त्वचा पर हल्के हाथों से थप्पड़ मारना (50 slaps for glow) होता है। ऐसा करने से ब्लड सरकुलेशन बढ़ जाता है और त्वचा जवां और स्वस्थ होती है। अच्छी बात यह कि ये थेरेपी महिलाएं और पुरुष दोनों ही कर सकते हैं। इस थेरेपी से त्वचा में छिद्रों को सिकुड़ने में मदद मिलती है। बता दें की इस थेरेपी में आपको अपने दोनों हाथों से गालों को तेज-तेज थपथपाना होता है। इसके अलावा फाइन लाइंस से छुटकारा पाने के लिए चेहरे को थप्पड़ मारना पिंच और स्ट्रोक करना शामिल होता है।  इसे भी पढ़ें: पानी पीना ही काफी नहीं, हीटवेव्स में हाइड्रेशन से बचाव के लिए अपनाएं ये टिप्स कोरियन महिलाएं प्रतिदिन खुद को 50 थप्पड़ (50 slaps for glow) मारकर अपनी सुंदरता को रखती हैं बरकरार  दरअसल, साउथ कोरियन लोगों का मानना है कि थप्पड़ मारने से चेहरे के हर हिस्से में ब्लड का सरकुलेशन तेज हो जाता है। जिससे स्किन साफ होती है और चेहरा ग्लो करने लगता है। कारण यही जो वहां की महिलाएं प्रतिदिन खुद को 50 थप्पड़ (50 slaps for glow) मारकर अपनी सुंदरता को बरकरार रखती हैं। इसके अलावा अमेरिकन का मानना है कि थप्पड़ मारने से त्वचा के खुले छिद्रों को सिकुड़ने में मदद मिलती है। यही नहीं, इससे त्वचा को क्रीम तेल को बेहतर तरीके से ऑबजर्ब करने में मदद मिलती है। ख़ास बात यह कि यह त्वचा को चिकना बनाता है, झुर्रियों को कम करता है। Latest News in Hindi Today Hindi 50 slaps for glow #50SlapsForGlow #FaceGlowHack #BeautyMyths #SkincareRoutine #FacialMassage #NaturalGlow #GlowUp #SkinCareTips #BeautyTrends #HealthySkin

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bidi smoking effects

Bidi vs cigarette health risk: सेहत के लिए बीड़ी पीना अधिक खतरनाक या सिगरेट, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट? 

देश में ऐसे करोड़ों लोग हैं जो रोजाना बेख़ौफ़ होकर सिगरेट और बीड़ी पीते हैं। वो इस बात को जानते भी हैं कि इसे पीने से कैंसर जैसी जानलेवा घातक बीमारी हो सकती है। कमाल की बात यह कि यह जानते-बुझते हुए भी कि इससे जान जा सकती है, फिर भी धड़ल्ले से लोग सुट्टा मरते हैं। सुबह आँख खुलने से लेकर रात को सोने से पहले तक लोग सिगरेट पीते हैं। वो तो भला हो नींद का, जो 6-7 घंटे के लिए आ जाती है, जिसके चलते कम से कम वो समय बच जाता है। अन्यथा लोगों की सिगरेट के प्रति दीवानगी इस कदर है कि वो सोते-सोते भी पिएं। खैर, कहने की जरूरत नहीं कि वो चाहे बीड़ी हो या सिगरेट, दोनों का सेवन करने से जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। खैर, अक्सर इस बात को लेकर बड़ी चर्चा होती है कि बीड़ी ज्यादा खतरनाक होती है या सिगरेट (Bidi vs cigarette health risk)? बीड़ी पीने वाले सिगरेट को अधिक नुकसानदायक मानते हैं और सिगरेट पीने वाले बीड़ी को अधिक खतरनाक मानते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि बीड़ी और सिगरेट में से कौन सी चीज शरीर के लिए अधिक नुकसानदायक हो सकती है?  बीड़ी और सिगरेट दोनों का इस्तेमाल हर हाल में सेहत के लिए नुकसानदायक (Bidi vs cigarette health risk) होता है स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक बीड़ी और सिगरेट दोनों का इस्तेमाल हर हाल में सेहत के लिए नुकसानदायक (Bidi vs cigarette health risk) होता है। बात करें सिगरेट और बीड़ी के अंतर की, तो बीड़ी का धुआं सिगरेट के धुएं की तुलना में कहीं ज्यादा जहरीला और नुकसानदायक होता है। ऐसा इसलिए कि बीड़ी में मौजूद तंबाकू और अन्य हानिकारक तत्व जलते ही धुएं में घुलमिल जाते हैं। इसके चलते शरीर में कार्सिनोजिक यानी कैंसर पैदा करने वाले तत्वों की मात्रा अधिक हो जाती है। और फिर लगातार सेवन के चलते मुंह,फेफड़ों और गले के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अब इसका अर्थ यह नहीं ही है कि सिगरेट पीने से कुछ नहीं होता। एक्सपर्ट की मानें तो सिगरेट के धुएं में भी ऐसे हानिकारक रसायन होते हैं जो कैंसर, दिल की बीमारियों और फेफड़ों की समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। एक्सपर्ट की मानें तो सिगरेट के धुएं में निकोटीन नामक पदार्थ होता है। इसी निकोटीन की वजह से लोगों को सिगरेट पीने की लत लग जाती है। बता दें कि इसमें कार्बन मोनोऑक्साइड और टार जैसी हानिकारक सामग्री भी होती है, जो फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं।  इसे भी पढ़ें: पानी पीना ही काफी नहीं, हीटवेव्स में हाइड्रेशन से बचाव के लिए अपनाएं ये टिप्स बीड़ी और सिगरेट का लगातार सेवन करना होता है सेहत के लिए बेहद खतरनाक (Bidi vs cigarette health risk)  कुल-मिलाकर बीड़ी और सिगरेट दोनों में ही निकोटीन की मात्रा बहुत होती है। दोनों के सेवन से फेफड़ों में खतरनाक तत्व जमा होते जाते हैं। आग चलकर इसका परिणाम यह होता है कि सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं। नलियां सिकुड़ने से ऑब्सट्रक्टिव डिजीज और कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। बीड़ी और सिगरेट के सेवन से फेफड़े कमजोर हो जाते हैं और श्वसन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। यही नहीं, कई रिसर्च में तो 1 बीड़ी को 2 सिगरेट के बराबर खतरनाक बताया गया है। ऐसे में बीड़ी और सिगरेट का लगातार सेवन करना सेहत के लिए बेहद खतरनाक (Bidi vs cigarette health risk) होता है। इन दोनों का सेवन करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं। विशेषकर फेफड़ों के लिए इन चीजों को ज्यादा घातक माना जाता है। आपको बता दें कि बीड़ी पत्तियों से बनाई जाती है। इस दौरान इसमें तंबाकू और कुछ अन्य पदार्थ भरे जाते हैं। रही बात सिगरेट की तो सिगरेट में तंबाकू को कागज की परत में लपेटा जाता है। तंबाकू के साथ-साथ इसमें कई अन्य रसायन और प्रिजर्वेटिव्स भी होते हैं। ध्यान देने वाली बात यह कि सिगरेट को मशीन से तैयार किया जाता है, जबकि बीड़ी को हाथों से तैयार किया जाता है। दोनों ही उत्पादों में तंबाकू और अन्य खतरनाक तत्व होते हैं। और यही खतरनाक तत्व स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi Bidi vs cigarette health risk #BidiVsCigarette #SmokingRisks #HealthHazards #TobaccoDangers #LungHealth #QuitSmoking #BidiSmoke #CigaretteAddiction #ExpertOpinion #HealthyLiving

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Health issues in summer

Health issues in summer: गर्मी में होने वाली 5 सामान्य स्वास्थ्य समस्याएं और उनसे सुरक्षित रहने के टिप्स

गर्मी का महीना अपने साथ कड़कती धूप, लंबे दिन और छोटी रातें ले कर आता है। इन दिनों कई हेल्थ रिस्क्स का जोखिम भी रहता है। अधिक तापमान और ह्यूमिडिटी के कारण लोग कई बीमारियों का अनुभव कर सकते हैं। इनकी वजह से आंख, स्किन, बाल, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और न्यूलोजिकल प्रोब्लेम्स हो सकती हैं। इन हेल्थ प्रॉब्लम्स से बचाव के लिए इनके बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है। आइए जानें गर्मी में हेल्थ इशूज के बारे में और यह भी जानकारी पाएं कि इस दौरान कैसे सुरक्षित रहा जा सकता है? सबसे पहले गर्मी में हेल्थ इशूज (Health issues in summer) के बारे में जान लेते हैं। गर्मी में हेल्थ इशूज (Health issues in summer): पाएं जानकारी वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (World health Organisation) के अनुसार हीट स्ट्रेस मौसम संबंधी डेथस का प्रमुख कारण है और यह डायबिटीज, मानसिक स्वास्थ्य, अस्थमा जैसी अंडरलायिंग डिजीज को बढ़ा सकता है और कुछ संक्रामक रोगों के ट्रांसमिटेड के जोखिम को भी बढ़ा सकता है। गर्मी से संबंधित बीमारी एक मेडिकल एमर्जेन्सी है। गर्मी में हेल्थ इशूज (Health issues in summer) इस प्रकार हैं:  हीट स्ट्रोक (Heat stroke) हीट स्ट्रोक (Heat stroke) ऐसी ऐसी बीमारी है, जो अधिक गर्म टेम्प्रेचर की वजह से होती है। हाई टेम्प्रेचर के कारण इसे हाइपरथर्मिया भी कहा जाता है। इसके लक्षणों में सिरदर्द, जी मिचलाना और कमजोरी आदि शामिल हैं। यही नहीं, गंभीर मामलों में यह ऑर्गन फेलियर, बेहोशी और मृत्यु का कारण बन सकती है। बचाव के तरीके: अगर आपको गर्मी में हीट स्ट्रोक (Heat stroke) से बचना है तो दोपहर को घर से बाहर जाने से बचें। हल्के रंग और कॉटन के कपडे पहनें। बाहर जाते हुए छाते और हैट का इस्तेमाल करें। अगर आपको इसके लक्षण नजर आते हैं तो ठंडे स्थान पर और हाइड्रेट रहें। डॉक्टर की सलाह भी लें।  फूड पोइजनिंग (Food Poisoning) फूड पोइजनिंग गर्मियों में सबसे अधिक होने वाली बीमारियों में से एक है और यह समस्या दूषित फूड्स को खाने से होती है। गर्मियों में फूड पॉइजनिंग होने का कारण यह है कि गर्मी के महीने में ह्यूमिड मौसम बैक्टीरियल ग्रोथ आसानी से होती है। यह समस्या बैक्टेरिया, वायरस, केमिकल या टॉक्सिन्स के कारण फैलती है और इसके कारण डिस्कम्फर्ट, जी मिचलाना, उलटी आना और डायरिया जैसी समस्या हो सकती है। बचाव के तरीके: अपने आहार का खास ध्यान रखें। फलों और सब्जियों को खाने से पहले धोना जरूरी है। स्ट्रीट फूड और बासी खाने को खाने से बचें। पानी को भी अच्छे से फिल्टर करके या उबाल के पीएं। डिहाइड्रेशन (Dehydration) गर्मी में हेल्थ इशूज (Health issues in summer) में डिहाइड्रेशन (Dehydration) भी सामान्य है। इस रोग का कारण भी गर्म और ह्यूमिड कंडीशंस हैं। गर्मी में शरीर से पानी और नमक पसीने के माध्यम से बाहर निकल जाता है। इसके लक्षण हैं मुंह और जीभ का सुखना, थकावट, भूख न लगना, डार्क यूरिन और बहुत अधिक प्यास लगना आदि।  बचाव के तरीके: पानी और अन्य फ्लुइड्स को पर्याप्त मात्रा में पीएं, ताकि डिहाइड्रेशन (Dehydration) से बच सके। इसके साथ ही इसके लक्षणों को नजरअंदाज न करें।  इन्फेक्शंस (Infections) मच्छरो और टिक के कारण होने वाले इन्फेक्शन, अमीबिक मेनिंगोएन्सेफेलाइटिस और समर वायरस ऐसे संक्रमण हैं, जो गर्मियों में होते हैं। कई बीमारियां मल, ओरल और सांस के द्वारा बीमार लोगों से फैलती हैं।  बचाव के तरीके:  इस रोग से बचाव के लिए बार -बार हाथ धोएं खासतौर पर खाना खाने से पहले। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने से बचें और साफ-सफाई का खास ध्यान रखें।  इसे भी पढ़ें: पानी पीना ही काफी नहीं, हीटवेव्स में हाइड्रेशन से बचाव के लिए अपनाएं ये टिप्स सनबर्न और स्किन रैशेज (Sunburn and skin rashes) बहुत अधिक पसीना आने के कारण हीट रैशेज हो सकते हैं।  इसके साथ ही अधिक समय तक धुप में रहने के कारण सनबर्न हो सकता है। इसके कारण स्किन में रेडनेस और अन्य समस्याएं हो सकती हैंl बचाव के तरीके: गर्मी में हेल्थ इशूज (Health issues in summer) में इस समस्या से बचाव के लिए कॉटन के कपडे पहनें ताकि यह पसीने को आसानी से सोख सके। इसके साथ ही घर से बाहर निकलते हुए SPF 30+ सनस्क्रीन को अप्लाई करें। अपनी त्वचा को फ्रेश और बैक्टीरिया फ्री रखने के लिए प्रतिदिन दो बार स्नान करें। नोट:– यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi Health issues in summer #Dehydration #FoodPoisoning #healthissuesinsummer #Heatstroke

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Heatwaves and dehydration

पानी पीना ही काफी नहीं, हीटवेव्स में हाइड्रेशन से बचाव के लिए अपनाएं ये टिप्स

गर्मी का मौसम अपने साथ कई समस्याओं को लेकर आता है। बढ़ते तापमान के कारण स्टमक इंफेक्शन, गर्मी से थकावट, जोड़ों में दर्द और मांसपेशियों में ऐंठन जैसी परेशानियों में बढ़ोतरी होती है। पिछले कुछ सालों से ग्लोबल वार्मिंग और कई अन्य कारणों से भारत के कई हिस्सों में बहुत अधिक गर्मी पड़ रही है। यह हीटवेव्स (Heatwaves) डिहाइड्रेशन (Dehydration) का कारण भी बन सकती हैं। शरीर को इस और कई अन्य समस्याओं से बचाने के लिए जरूरी है शरीर का डाइड्रेट रहना। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि शरीर को हाइड्रेट बनाए रखने के लिए केवल पानी ही पर्याप्त नहीं है? आइए पाएं हीटवेव्स और डिहाइड्रेशन (Heatwaves and dehydration) के बारे में पूरी जानकारी। हीटवेव्स और डिहाइड्रेशन (Heatwaves and dehydration): पाएं जानकारी यूनिसेफ (UNICEF) के अनुसार हीटवेव्स (Heatwaves) में बहुत अधिक गर्मी और ह्यूमिडिटी न केवल परेशान करने वालो हो सकती है, बल्कि इससे कई हेल्थ रिस्क भी हैं खासतौर पर बच्चों, बुजर्गों और गर्भवती महिलाओं को। अगर सावधानी न बरती जाए, तो अधिक हीट, हीट स्ट्रोक या कई अन्य घातक प्रॉब्लेम्स का कारण बन सकती है। अगर बात की जाए हीटवेव्स (Heatwaves) की, तो इसे बहुत अधिक गर्मी के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। यह असामान्य रूप से गर्म मौसम का वो समय है, जो कई दिनों तक परेशान कर सकता है। हीटवेव का शरीर पर क्या प्रभाव हो सकता है? हीटवेव्स (Heatwaves) के दौरान हमारा शरीर तापमान को रेगुलेट करने के लिए संघर्ष करता है जिससे हीट से सम्बन्धित बीमारियां हो सकती हैं जैसे डिहाइड्रेशन (Dehydration)। गंभीर मामलों में यह हीटस्ट्रोक का कारण भी बन सकती है, जो जानलेवा है। डिहाइड्रेशन (Dehydration) में त्वचा सूख जाती है, होंठ फट जाते हैं, और रोगी को थकान महसूस होती है। यह तो थी हीटवेव्स और डिहाइड्रेशन (Heatwaves and dehydration) के बीच में सम्बन्ध के बारे में जानकारी। अब जाने डिहाइड्रेशन के बारे में। डिहाइड्रेशन और उसके लक्षण डिहाइड्रेशन (Dehydration) की समस्या तब होती है जब हमारा शरीर जितना फ्लूइड ग्रहण किया है, उससे अधिक खो या इस्तेमाल कर लेता है। इससे शरीर में पर्याप्त पानी या अन्य फ्लूइड नहीं होते जो शरीर के सामान्य कामों के लिए जरूरी हैं। अगर इन फ्लुइड्स का सेवन नहीं किया जाता है, तो डिहाइड्रेशन (Dehydration) की समस्या हो सकती है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं:  वयस्कों में डिहाइड्रेशन के लक्षण इस प्रकार हैं: इसे भी पढ़ें: कॉफी पीने वालों का बढ़ सकता है कोलेस्ट्रॉल, लेकिन क्यों? छोटे बच्चों में इसके लक्षण इस प्रकार हैं: डिहाइड्रेशन (Dehydration) की समस्या हलकी हो सकती है या यह गंभीर भी हो सकती है। हीटवेव्स (Heatwaves) के दौरान इस समस्या से बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा फ्लूइड लेना आवश्यक है। लेकिन, इससे बचाव के लिए केवल पानी ही पर्याप्त नहीं होता। जानिए इससे बचाव के तरीकों के बारे में।  डिहाइड्रेशन से कैसे बचें? डिहाइड्रेशन (Dehydration) से बचने के लिए केवल पानी ही नहीं बल्कि इलेक्ट्रोलाइट्स का इस्तेमाल करना भी जरूरी है। इन तरीकों से आप इससे बच सकते हैं:  नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi Heat waves and dehydration #Heatwaves #dehydration #Heatwavesanddehydration #Heatwave

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coffee and cholesterol

कॉफी पीने वालों का बढ़ सकता है कोलेस्ट्रॉल, लेकिन क्यों?

कॉफी (Coffee) एक ऐसा पेय पदार्थ है, जो अधिकतर लोगों को सुबह उठते ही चाहिए होता है। कॉफी को फोकस और एनर्जी लेवल को बूस्ट करने के लिए जाना जाता है। यही कारण है कि अधिकतर लोग इस पर निर्भर रहते है। ज्यादा मात्रा में इसका सेवन करना हेल्थ के लिए हानिकारक हो सकता है, लेकिन अगर इसे सही मात्रा में पीया जाए तो इसके कुछ फायदे भी हैं। कुछ मामलों में ऐसा पाया गया है कि कॉफी (Coffee) पीने से टाइप 2 डायबिटीज का रिस्क कम होता है और लोगों को वजन कम करने में मदद मिलती है। अगर आप भी कॉफी (Coffee) के शौकीन हैं, तो आपके लिए यह जानना भी जरूरी है कि इससे कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) भी बढ़ सकता है। इसके लिए ऑफिस या अन्य स्थानों में मौजूद कॉफी मशीन (Coffee machine) को जिम्मेदार पाया गया है। यह बात एक स्टडी से साबित हुई है। आइए जानें कॉफी और कोलेस्ट्रॉल के बीच के बारे में की गयी स्टडी (Study on relationship between coffee and cholesterol) के बारे में। कॉफी और कोलेस्ट्रॉल के बीच के बारे में की गयी स्टडी (Study on relationship between coffee and cholesterol): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार कॉफी (Coffee) सिर्फ एनर्जी को ही बूस्ट नहीं करती है, बल्कि इससे वजन सही रहता है, डिप्रेशन कम होता है और डायबिटीज का रिस्क भी कम रहता है। लेकिन, कुछ लोगों को इसका सेवन करने से बचना चाहिए जैसे गर्भवती और ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं को।  एक स्टडी में ऐसा पाया गया है कि ऑफिस में पायी जाने वाली कॉफी मशीन (Coffee machine) में बनी कॉफी में कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) बढ़ाने वाला पदार्थ का लेवल अधिक होता है। यानी, ऑफिस में कॉफी (Coffee) पीने से कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ सकता है। इसके लिए कई कॉफी मशीनों (Coffee machine) पर स्टडी की गयी और पाया गया कि इस मशीनों में बनी कॉफी (Coffee) में कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने वाले पदार्थ का लेवल ज्यादा होता है। लेकिन, अगर रेगुलर रूप से ड्रिप-फिल्टर कॉफी मेकर में पेपर फ़िल्टर का इस्तेमाल किया जाए तो यह हानिकारक पदार्थ फ़िल्टर हो सकते हैं और इससे इसके नुकसान से बचा जा सकता है। यह तो थी कॉफी और कोलेस्ट्रॉल के बीच के बारे में की गयी स्टडी (Study on relationship between coffee and cholesterol) । जानिए कि इससे बचाव के लिए क्या किया जा सकता है? क्या है उपाय?  अधिकतर लोग ऑफिस में कॉफी मशीन (Coffee machine) का इस्तेमाल करते हैं। इससे उनकी कैफीन की जरूरत पूरी होती है। लेकिन, अगर आप इससे कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) की बढ़ती समस्या से बचना चाहते हैं तो इसका सरल उपाय या है कि पेपर फिल्टर वाले कॉफी मेकर का इस्तेमाल किया जाए। शोधकर्ताओं के अनुसार जो लोग कॉफी के शौकीन है उनके लिए ड्रिप-फिल्टर कॉफी (Coffee) या अन्य अच्छी तरह से फिल्टर की गई कॉफी पीना एक बेहतर उपाय है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कोलेस्ट्रॉल के लेवल पर इस कॉफी (Coffee) के प्रभावों के बारे में और अधिक रिसर्च करना जरूरी है। कॉफी के और साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं, यह भी जानिए। इसे भी पढ़ें: मां बनने की उम्र का लग सकता है अंदाजा: अब एक टेस्ट से पता चलेगा महिला के शरीर में कितने एग बचे हैं? कॉफी के और साइड इफेक्ट्स  हालांकि, कॉफी (Coffee) पीने के कुछ लाभ हो सकते हैं. लेकिन अगर बहुत अधिक मात्रा में पीया जाए तो इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हैं। इसके कुछ साइड इफेक्ट्स इस प्रकार हैं:  नोट:– यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi Study on link between coffee and cholesterol #Studyonlinkbetweencoffeeandcholesterol #coffee #cholesterol #coffeemachine #coffeeandcholesterol

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Breast Cancer

नैनोटेक्नोलॉजी का कैंसर पर हमला! ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में नई उम्मीद

ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancer) एक ऐसी बीमारी है, जिसमें असमान्य ब्रेस्ट सेल्स अनियंत्रित रूप से ग्रो होते हैं और ट्यूमर का रूप ले लेते हैं। अगर इसकी सही जांच न हो पाए ,तो यह ट्यूमर पूरे शरीर में फैल जाता है और घातक हो सकता है। ब्रेस्ट कैंसर सेल्स की शुरुआत मिल्क डक्ट्स के मिल्क प्रोड्यूसिंग लोब्यूल्स के अंदर होती हैं।  ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancer) के इलाज के कई विकल्प हैं और यह मरीज की उम्र, हेल्थ, कैंसर टाइप आदि पर निर्भर करते हैं। हाल ही में हुई एक स्टडी यह बताती है कि नैनोटेक्नोलॉजी में एक महत्वपूर्ण सफलता ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (Triple-Negative Breast Cancer) के इलाज में सुधार कर सकती है। आइए जानें नैनोटेक्नोलॉजी और ब्रेस्ट कैंसर के बारे में स्टडी (Study on nanotechnology and breast cancer) के बारे में। नैनोटेक्नोलॉजी और ब्रेस्ट कैंसर: पाएं जानकारी मायोक्लिनिक (Mayoclinic) के अनुसार स्किन कैंसर के बाद ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancer) महिलाओं में होने वाला सामान्य कैंसर है। लेकिन ब्रेस्ट कैंसर सिर्फ महिलाओं को नहीं होता बल्कि यह समस्या पुरुषों को भी हो सकती है। हर कोई कुछ ब्रेस्ट टिश्यूज के साथ पैदा होता है इसलिए यह समस्या किसी को भी हो सकती है। यह एक गंभीर समस्या है। जैसा कि पहले ही बताया गया है ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancer) एक गंभीर समस्या है और इसके उपचार के कई विकल्प मौजूद हैं। इसके लिए शोधकर्ता ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (Triple-Negative Breast Cancer) के अभी मौजूद ट्रीटमेंट को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नेक्स्ट जनरेशन नैनोपार्टिकल्स को डेवलेप कर रहे हैं। ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (Triple-Negative Breast Cancer) इस रोग का सबसे घातक रूप है। अब जानिए नैनोटेक्नोलॉजी और ब्रेस्ट कैंसर के बारे में स्टडी (Study on nanotechnology and breast cancer) के बारे में। नैनोटेक्नोलॉजी और ब्रेस्ट कैंसर के बारे में स्टडी (Study on nanotechnology and breast cancer) ऑस्ट्रेलिया में वैज्ञानिक एक नए और एडवांस तरीके से ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (Triple-Negative Breast Cancer) के इलाज के लिए काम कर रहे हैं। उनका उद्देश्य इस खतरनाक बीमारी के खिलाफ शरीर की इम्युनिटी को मजबूत करने के लिए नए नैनोपार्टिकल्स बनाना है। ये नैनोपार्टिकल्स बहुत छोटे हैं। इन नैनोपार्टिकल्स को शरीर की इम्युनिटी को मजबूत करने और कैंसर सेल्स को पहचानने और हमला करने में मदद करने के लिए बनाया किया गया है। इस शोध को 3 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के ग्रांट से सपोर्ट मिला है और यह ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (Triple-Negative Breast Cancer) के अलावा अन्य मुश्किल इलाज योग्य कैंसर के इलाज में भी मदद कर सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह रिसर्च ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (Triple-Negative Breast Cancer) के इलाज में बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि वे इस खतरनाक बीमारी का जल्दी प्रभावी इलाज विकसित कर सकते हैं। यह इलाज उन महिलाओं के लिए आशा की किरण हो सकता है, जो इस बीमारी का सामना कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: मां बनने की उम्र का लग सकता है अंदाजा: अब एक टेस्ट से पता चलेगा महिला के शरीर में कितने एग बचे हैं? क्या ब्रेस्ट कैंसर से बचाव संभव है? हालांकि, ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancer) से बचाव संभव नहीं है, लेकिन इसके डेवलेप होने के रिस्क को कम किया जा सकता है। इसके लिए नियमित जांच और मैमोग्राम्स जरुरी है ताकि ब्रेस्ट कैंसर का जल्दी निदान हो सके। लेकिन, कुछ अन्य तरीकों से इसके रिस्क को कम किया जा सकता है: कुछ महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancer) का जोखिम इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि उनके परिवार के सदस्यों को यह बीमारी है या इसका कारण जेनेटिक म्युटेशन है। अगर आपकी स्थिति भी ऐसी ही है, तो आपको निम्नलिखित बातों पर विचार करना चाहिए: अगर आपको ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancer) का अधिक खतरा है, तो अपने डॉक्टर से इसके बारे में बात करें ताकि जल्दी निदान या बचाव की संभावनाओं को बढ़ाया जा सके।  नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi Breast Cancer #Studyonnanotechnologyandbreastcancer #Triple-NegativeBreastCancer #breastcancer #cancer

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AMH Test

मां बनने की उम्र का लग सकता है अंदाजा: अब एक टेस्ट से पता चलेगा महिला के शरीर में कितने एग बचे हैं?

आजकल के जमाने के जिंदगी एक दौड़ की तरह हो कर रह गयी है, जिसमें हर कोई पहले नंबर पर आना चाहता है। पहले पढ़ाई, फिर कैरियर उसके बाद नौकरी और इसी में पूरी जिंदगी निकल जाती है। इसी दौड़ में लोग आजकल अधिक उम्र के होने पर शादी के बारे में सोच रहे हैं और इससे उनके परिवार की शुरुआत भी देरी से होती है। इसका सीधा असर होता है महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर।  ऐसे में एक ऐसा टेस्ट है, जिससे यह पता चल सकता है कि महिला के शरीर में कितने एग बचे हैं और वो कितने समय तक हेल्दी रहेंगे? इसके साथ ही अगर उनके अंडाशय में कोई समस्या है, तो उसका पता भी इससे चल सकता है। इस टेस्ट का नाम है एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) या एएमएच टेस्ट (AMH test)। आइए जानें इसके बारे में विस्तार से। क्या है एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test)?  क्लीवलैंड क्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) यानी एएमएच टेस्ट (AMH test) से खून में एंटी मुलेरियन हार्मोन (Anti mullerian hormone) की मात्रा को मापा जाता है। सभी लोगों में इन हॉर्मोन्स का उत्पादन होता है, लेकिन डॉक्टर महिलाओं में इस टेस्ट का उपयोग करते हैं। एंटी मुलेरियन हार्मोन (Anti mullerian hormone) गर्भाशय में भ्रूण के सेक्स ऑर्गन्स के विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह हॉर्मोन लेवल मेल फीटस में अधिक होते हैं, है क्योंकि यह उन्हें महिला प्रजनन अंगों के विकास से रोकता है। फीमेल फिट्स को अपने विकास के लिए कम मात्रा में इन हॉर्मोन्स की जरूरत होती है। एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) को कब कराया जाता है? डॉक्टर यह जानने के लिए एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) की सलाह दे सकते हैं कि ओवेरियन मास कहीं ग्रैनुलोसा सेल ट्यूमर तो नहीं है। इसके साथ ही इसका का उपयोग इन चीजों को जांचने के लिए भी किया जा सकता है: एंटी मुलेरियन टेस्ट से क्या पता चलता है? एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) से पता चलता है कि महिला में कितने एग बचे हैं और यह कब तक हेल्दी रह सकते हैं? इससे पता चल सकता है कि महिला के पास गर्भवती होने के लिए कम समय है या नहीं। इस टेस्ट से यह भी पता चल सकता है कि इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) की तैयारी के लिए ओवरीज को कई अंडों को फर्टिलाइज करने के लिए स्टिमुलेट करने वाले इंजेक्टेबल फर्टिलिटी ड्रग्स के प्रति महिला कितने अच्छे से रिस्पॉन्ड कर सकती है या नहीं। एंटी मुलेरियन टेस्ट से क्या पता नहीं चलता है? एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) यानी एएमएच टेस्ट (AMH test) को एग काउंट से कनेक्ट किया जाता है। इससे फर्टिलिटी (उपचार के साथ या बिना) या मेनोपॉज से गुजरने के समय का पता नहीं लगता है। इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि एंटी मुलेरियन हॉर्मोन (Anti mullerian hormone) लेवल सामान्य सीमा में होनी चाहिए। कुछ अन्य फैक्टर भी गर्भधारण करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं, जैसे: उम्र के अनुसार कितना एंटी मुलेरियन हॉर्मोन लेवल अच्छा है? एंटी मुलेरियन हॉर्मोन (Anti mullerian hormone) लेवल एक उम्र के बाद कम हो सकता है, इसलिए 30, 40 और 50 की उम्र में ओवेरियन रिजर्व क्षमता में कमी आना सामान्य बात है। इन हॉर्मोन्स का लेवल इस प्रकार होना अच्छा माना गया है: इसे भी पढ़ें: सिंगल पेरेंटिंग नहीं है आसान: सिंगल पैरेंट को करना पड़ता है इन 5 चुनौतियों का सामना यह भी ध्यान रखना चाहिएअधिक एंटी मुलेरियन हॉर्मोन (Anti mullerian hormone) लेवल हमेशा अच्छी बात नहीं होती। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) के रोगियों में में यह लेवल अधिक हो सकता है। यह एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) आसानी से घर पर किया जा सकता है। हालांकि, घर पर किए जाने वाले टेस्ट सुविधाजनक होते हैं, लेकिन इसके बाद सलाह के लिए डॉक्टर से बात करें। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi AMH Test #Hormone #AMHtest #AntiMullerianTest, #AntiMullerianHormone

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World Tuberculosis Day

वर्ल्ड ट्यूबरक्लोसिस डे: जानिए क्या हैं टीबी के कारण, लक्षण और किस तरह से करें इससे बचाव?

हर साल 24 मार्च को वर्ल्ड ट्यूबरक्लोसिस डे (World Tuberculosis Day) या वर्ल्ड टीबी डे के रूप में मनाया जाता है। ट्यूबरक्लोसिस (Tuberculosis) सबसे ज्यादा संक्रामक बीमारियों में से एक है। वर्ल्ड ट्यूबरक्लोसिस डे (World Tuberculosis Day) को लोगों को इस रोग के प्रति जागरूक करने के लिए सेलेब्रेट किया जाता है। इस दिन आम लोगों को टीबी (TB) के लक्षणों, कारणों और बचाव के तरीकों के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है। यही नहीं, इस दिन मेडिकल इंस्टीट्यूट्स, डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ आदि कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन भी करते हैं। हर व्यक्यि के लिए इस रोग के बारे में पूरी जानकारी होना जरूरी है। आइए जानें कि यह रोग क्या है और इससे बचाव किस तरह से संभव है। ट्यूबरक्लोसिस यानी टीबी क्या है? मायोक्लिनिक (Mayoclinic) के अनुसार ट्यूबरक्लोसिस (Tuberculosis) एक गंभीर बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। इस बीमारी का कारण बनने वाले जर्म्स एक तरह के बैक्टीरिया है। यह बीमारी संक्रमित व्यक्तियों से अन्य लोगों तक फैल सकती है। छींक, खांसी आदि इसके फैलने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इससे हवा में जर्म्स वाले छोटे ड्रॉपलेट फैल सकते हैं। जब अन्य लोग इन ड्रॉप्लेट्स को सांस के माध्यम से अंदर ले जाते हैं और यह जर्म्स फेफड़ों में जा सकते है। एचआईवी/एड्स से पीड़ित लोगों और कमजोर इम्युनिटी वाले अन्य लोगों में सामान्य इम्युनिटी वाले लोगों की तुलना में ट्यूबरक्लोसिस (Tuberculosis) होने का जोखिम अधिक होता है। इस वर्ल्ड ट्यूबरक्लोसिस डे (World Tuberculosis Day) जानिए क्या हैं इसके कारण। लेकिन, पहले ट्यूबरक्लोसिस के लक्षण (Symptoms of Tuberculosis) क्या हैं, यह जान लेते हैं। ट्यूबरक्लोसिस के लक्षण (Symptoms of Tuberculosis) इनएक्टिव ट्यूबरक्लोसिस से पीड़ित व्यक्ति में इस रोग से सम्बन्धित कोई भी लक्षण देखने को नहीं मिलता है। लेकिन, बिना उपचार के उनमें यह एक्टिव ट्यूबरक्लोसिस (Tuberculosis) की समस्या हो सकती है और वो बीमार हो सकता है। एक्टिव ट्यूबरक्लोसिस के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि शरीर में कहां टीबी (TB) के जर्म्स ग्रो हो रहे हैं। फेफड़ों में टीबी (TB) जर्म्स के विकसित होने पर ट्यूबरक्लोसिस के लक्षण (Symptoms of Tuberculosis) इस प्रकार हो सकते हैं: इसके अलावा एक्टिव टीबी के लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं ट्यूबरक्लोसिस के कारण ट्यूबरक्लोसिस (Tuberculosis)का सबसे सामान्य प्रकार है पल्मोनरी ट्यूबरक्लोसिस, लेकिन बैक्टीरियम शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है। आपने माइलरी ट्यूबरकुलोसिस के बारे में भी सुना होगा, जो हमारे पूरे शरीर में फैल सकता है और इसके कारण हो सकते हैं, जो इस प्रकार हैं” ट्यूबरक्लोसिस का उपचार एक्टिव और इनएक्टिव ट्यूबरक्लोसिस (Tuberculosis) दोनों का खास तरह की एंटीबायोटिक के साथ उपचार किया जाता है। इन दवाईयों के कॉम्बिनेशन से इंफेक्शन से आराम मिल सकता है। इन दवाईयों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेना चाहिए। निम्नलिखित दवाईयों की सलाह रोगी को दी जा सकती है: इसे भी पढ़ें: सिंगल पेरेंटिंग नहीं है आसान: सिंगल पैरेंट को करना पड़ता है इन 5 चुनौतियों का सामना ट्यूबरक्लोसिस से बचाव निम्नलिखित तरीकों से ट्यूबरक्लोसिस (Tuberculosis) के संक्रमण और उसके स्प्रेड होने के रिस्क को कम किया का सक्ता है: इस वर्ल्ड ट्यूबरक्लोसिस डे (World Tuberculosis Day) आप इस रोग के बारे में जानें और अन्य लोगों को भी इसके बारे में जागरूक करें ताकि इससे बचा जा सके। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi  Symptoms of Tuberculosis #SymptomsofTuberculosis #WorldTuberculosisDay #Tuberculosis #TB

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