Black plastic kitchen tools

ब्लैक प्लास्टिक किचन टूल्स का इस्तेमाल करने से पहले जान लें इनसे जुड़े खतरों के बारे में

किचन हमारे घर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है, जिसमें खाना बनाने में हमारा अधिकतर समय बीतता है। किचन यूटेंसिल्स यानी रसोई इस्तेमाल होने वाले बर्तनों का प्रयोग खाना बनाने जैसे काटने, गर्म करने, मिक्स करने आदि में होता है। अलग-अलग कामों के लिए अलग बर्तनों की जरूरत होती है। ऐसे में यह एक डिस्कशन का विषय है कि खाना पकाने के लिए कौन से बर्तनों का इस्तेमाल करना चाहिए और किन बर्तनों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए? बाजार में तरह-तरह के बर्तन मौजूद हैं। लेकिन, एक स्टडी के अनुसार काले रंग के प्लास्टिक किचन उपकरणों (Kitchen appliances) या टूल्स का इस्तेमाल सेहत के लिए बहुत अधिक हानिकारक है। आइए जानें कि ब्लैक प्लास्टिक किचन टूल्स (Black plastic kitchen tools) के बारे में क्या कहती है स्टडी? ब्लैक प्लास्टिक किचन टूल्स (Black plastic kitchen tools): क्या कहती है स्टडी?  हाइजीन फूड सेफ्टी (Hygiene food safety) के अनुसार लकड़ी के बर्तनों और उपकरणों के उपयोग को लेकर लम्बे समय से हाइजीन और फूड सेफ्टी इंडस्ट्री में बहस का विषय रहा है। इसके बारे में ऐसा लगता है कि हर व्यक्ति की अपनी वैध राय है। लेकिन, इनके भी अपने लाभ और हानियां हैं। ऐसे ही किचन में कौन से बर्तनों का इस्तेमाल करना चाहिए, इसके बारे में भी लोगों की राय अलग-अलग हो सकती है। हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार काले रंग के प्लास्टिक में हानिकारक केमिकल हो सकते हैं। इनका नाम है फ्लेम रिटार्डेंट (Flame Retardant), जिनका इस्तेमाल आग से बचाव के लिए किया जा सकता है। आग से बचाव में यह फायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन हेल्थ के लिए यह हानिकारक हैं। ऐसा पाया गया है कि इन केमिकल्स का लेवल कुछ प्रोडक्ट्स में बहुत अधिक था जैसे काले रंग के प्लास्टिक से बने खिलौने, बर्तनों, डब्बों आदि में। अगर आपके घर में भी ऐसे उत्पाद हैं, तो आपको तुरंत उन्हें फैंक देना चाहिए। यह तो थी जानकारी ब्लैक प्लास्टिक किचन टूल्स (Black plastic kitchen tools) के बारे में स्टडी के बारे में। अब यह जानते हैं कि इनसे क्या समस्याएं हो सकती हैं? ब्लैक प्लास्टिक किचन टूल्स (Black plastic kitchen tools) के इस्तेमाल से क्या समस्याएं हो सकती हैं?  स्टडी में यह पाया गया है कि इसमें मौजूद फ्लेम रिटार्डेंट (Flame Retardant) कैंसर और थायराइड जैसे रोगों का कारण बन सकते हैं। इसके साथ ही इनसे अन्य रोगों का रिस्क भी बढ़ सकता है। इसलिए, एक्सपर्ट्स और वैज्ञानिकों की मानें, तो इनके इस्तेमाल से बचना चाहिए। अपने बच्चों को भी इनके इस्तेमाल से बचाना चाहिए। क्योंकि, यह केमिकल भ्रूण और बाल विकास और न्यूरोबिहेवियरल फंक्शन और प्रजनन और प्रतिरक्षा प्रणाली विषाक्तता से भी सम्बन्धित हैं। अपने घर में इस्तेमाल होने वाले किचन उत्पादों की जांच करें और यह भी सुनिश्चित करें कि वो हमारे लिए सुरक्षित हैं या नहीं। अपने दोस्तों और परिवार को भी इसके बारे में बताएं ताकि वो भी सेफ रहें। इसे भी पढ़ें: ब्लैक कॉफी पीने के 8 अद्भुत फायदे: इसे पीकर करें सुबह की शुरुआत इस समस्या से बचाव के लिए क्या करें?  एक्सपर्ट्स के अनुसार फ्लेम रिटार्डेंट (Flame Retardant) युक्त इन ब्लैक प्लास्टिक किचन टूल्स (Black plastic kitchen tools) का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। प्लास्टिक से बने इस किचन उपकरणों (Kitchen appliances) की जगह स्टेनलेस स्टील के उपकरणों का इस्तेमाल करें। आप ऐसे नॉन-प्लास्टिक टूल्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं जो हेल्थ के लिए हानिकारक न हो। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के अनुसार एल्यूमीनियम के बर्तन में खाना बनाना भी सेहत के लिए हानिकारक है। इसके अलावा, नॉन-स्टिक बर्तनों का भी अधिक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। वहीं, पीतल के बर्तन में अधिक तापमान पर नमक और खट्टी चीजें बनाने से बचना चाहिए। प्लास्टिक के खाना पकाने के बर्तन और कटिंग बोर्ड से भी बचें क्योंकि यह BPA जैसे हानिकारक केमिकल रिलीज कर सकते हैं। । ऐसा भी माना जाता है कि किचन उपकरणों (Kitchen appliances) में मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल करना भी भोजन में मौजूद पोषक तत्व वैसे ही मौजूद रहते हैं। यानी स्टेनलेस स्टील और मिट्टी के बर्तनों को सुरक्षित माना गया है। इसके अलावा अपने घर को साफ और सुरक्षित रखने के लिए उचित स्टेप्स का पालन करें। इससे फ्लेम रिटार्डेंट (Flame Retardant) के जोखिम को कम किया जा सकता है और हेल्दी रहने में मदद मिल सकती है। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें।  Latest News in Hindi Today Hindi Black plastic kitchen tools #Blackplastickitchentools #Kitchenappliances #Flame Retardant 

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Colors of Holi

बिना स्किन को नुकसान पहुंचाए होली के रंगों को हटाने के लिए आसान टिप्स

होली (Holi) यानि रंगों का त्यौहार, जिसे हमारे देश में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्यौहार बुराई पर अच्छी की जीत का भी प्रतीक माना जाता है। सर्दियों के अंत और वसंत के आने पर इसका मजा दोगुना हो जाता है। इसमें लोग एक दूसरे को रंग लगते हैं, मिठाईयां खाते हैं और कुछ धार्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि रंगों से खेलना मौज-मस्ती से भरा और आनंददायी होता है। लेकिन, इसके बाद रंग को रिमूव करना एक मुश्किल काम है। कई बार यह होली के रंग (Colors of Holi) और रंगों को छुड़ाने का तरीका स्किन के लिए हानिकारक हो सकता है। आइए जानें कि बिना स्किन को नुकसान पहुंचाए होली के रंग छुड़ाने के तरीके (Ways to remove Holi colours without harming skin) कौन से हैं? बिना स्किन को नुकसान पहुंचाए होली के रंग छुड़ाने के तरीके (Ways to remove Holi colours without harming skin): पाएं जानकारी द योगा इंस्टिट्यूट (The yoga institute) के अनुसार होली (Holi) का उल्लास खत्म होने के बाद रंगों के निशान भयभीत करने वाले होते हैं। यही नहीं, कुछ रंग त्वचा में जलन को दाग का कारण बन सकते हैं। ऐसे में बिना स्किन को नुकसान पहुंचाए होली के रंग छुड़ाने के तरीके (Ways to remove Holi colours without harming skin) कौन से हैं, इस बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है। आइए जानें इसके बारे में विस्तार से।  स्किन को साफ करें रेगुलर टिश्यू कि जगह स्किन से होली (Holi) के रंग को रिमूव करने के लिए सबसे पहले वाइप्स का इस्तेमाल करें। इसके लिए वेट वाइप्स का प्रयोग करना एक बेहतरीन विकल्प है। इसके लिए ऐसे वाइप्स का इस्तेमाल करें जिसमें नेचुरल और स्किन के लिए लाभदायक इंग्रेडिएंट्स मौजूद हों। इसके लिए आप नेचुरल ऑयल्स का भी प्रयोग कर सकते हैं जैसे कोकोनट ऑयल, ओलिव ऑयल और बेबी ऑयल आदि। कुछ फैसपैक्स आ सकते हैं काम कुछ घर पर बनाए नेचुरल फेस मास्क न केवल स्किन से रंगों को निकाल सकते ,हैं बल्कि स्किन और शांत और नरिश भी कर सकते हैं। इन फेस पैक्स को आप आसानी से बना सकते हैं। बेसन और दही, मुल्तानी मिटटी और रोज वॉटर या एलोवेरा और शहद का फेसपैक आपकी स्किन के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इनसे स्किन को पोषण मिलेगा। स्क्रब का इस्तेमाल  होम मेड स्क्रब से भी होली के रंग (Colors of Holi) को छुड़ाया जा सकता है। इसके लिए बेसन दही और हल्दी का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे डेड स्किन के साथ-साथ होली (Holi) के जिद्दी रंगों को स्किन से निकालने में मदद मिलती है। स्किन पर इस स्क्रब लगाएं, आराम से मालिश करें और फिर धो लें। इसके साथ ही निम्बू के रस और शहद का मिश्रण भी इसमें लाभदायक हो सकता है। निम्बू की ब्लीचिंग प्रॉपर्टीज रंग को कम करने में मदद कर सकती हैं। आर्गेनिक साबुन का इस्तेमाल  बिना स्किन को नुकसान पहुंचाए होली के रंग छुड़ाने के तरीके (Ways to remove Holi colours without harming skin) में आर्गेनिक साबुन के इस्तेमाल शामिल है। बाजार में कुछ ऐसे ऑर्गनिक साबुन मौजूद हैं, जिनके इस्तेमाल से होली के रंग (Colors of Holi) छुड़ाए जा सकते हैं। ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल करें, जिनमे हार्श केमिकल और आर्टिफिशियल फ्रेग्नेंस न हों। इससे स्किन से रंग आसानी से निकल जाते हैं और त्वचा नरिश व मॉइस्चराइज होती है। यह तो थे होली के रंग (Colors of Holi) छुड़ाने के कुछ तरीके। अब जानिए कि त्वचा को कोई नुकसान न हो इसके लिए होली (Holi) से पहले आप क्या कर सकते हैं?  इसे भी पढ़ें: ब्लैक कॉफी पीने के 8 अद्भुत फायदे: इसे पीकर करें सुबह की शुरुआत होली से पहले रखें इन बातों का ध्यान होली (Holi) खेलने से पहले भी आप कुछ बातों का ध्यान रख कर अपनी स्किन को नुकसान से बचा सकते हैं। यह तरीके इस प्रकार हैं: नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi Ways to remove Holi colours #ColorsofHoli #Holi #WaystoremoveHolicolourswithoutharmingskin #harmfulcolors

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Holi Special Recipe

Holi Special 5 Recipe: त्योहार के स्वाद में लाएं खास मिठास

होली का त्योहार सिर्फ रंगों का नहीं, बल्कि स्वादिष्ट पकवानों का भी होता है। इस होली के मौके पर घर-घर में तरह-तरह की पारंपरिक रेसिपी (Holi Special Recipe) बनाई जाती हैं, जो इस त्योहार के उत्साह को दोगुना कर देती हैं। अगर आप भी इस होली पर अपने मेहमानों और परिवार वालों को लज़ीज़ व्यंजनों का स्वाद चखाना चाहते हैं, तो ये 5 खास रेसिपी जरूर ट्राई करें। होली स्पेशल रेसिपी (Holi Special Recipe) गुजिया होली की सबसे खास और पारंपरिक मिठाई (Holi Special Recipe) है। इसकी मीठी खुशबू और स्वाद हर किसी को लुभा लेती है। सामग्री:• 2 कप मैदा• 1/2 कप घी• 1 कप खोया (मावा)• 1/2 कप चीनी• 1/4 कप सूखे मेवे (काजू, बादाम, किशमिश)• 1/2 चम्मच इलायची पाउडर• तलने के लिए तेल विधि:1. सबसे पहले मैदा में घी डालकर अच्छी तरह मिक्स करें और थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए सख्त आटा गूंध लें।2. मावा को कड़ाही में भूनें और उसमें चीनी, सूखे मेवे और इलायची पाउडर मिला लें।3. अब आटे की लोई बनाकर उसे बेल लें और उसके बीच में तैयार मावा मिश्रण रखें।4. किनारों को मोड़ते हुए गुजिया का आकार दें और तलने के लिए गर्म तेल में सुनहरा होने तक फ्राई करें।5. ठंडा होने के बाद परोसें। होली पर ठंडाई का आनंद लिए बिना त्योहार अधूरा लगता है। ये पेय शरीर को ठंडक देने के साथ ही स्वाद में भी बेमिसाल होता है और होली पर इस रेसिपी (Holi Special Recipe) को जरूर बनाया जाता है। सामग्री:• 1 लीटर दूध• 1/2 कप बादाम• 1/4 कप सौंफ• 2 चम्मच खसखस• 1/4 कप गुलाब की पंखुड़ियां• 1/2 कप चीनी• 1/2 चम्मच काली मिर्च• केसर और पिस्ता सजावट के लिए विधि:1. बादाम, सौंफ, खसखस और गुलाब की पंखुड़ियों को 2 घंटे के लिए भिगो दें।2. इसे मिक्सी में पीसकर पेस्ट बना लें।3. अब दूध में यह पेस्ट और चीनी डालकर उबालें।4. जब दूध अच्छी तरह पक जाए, तो ठंडा करके सर्व करें।5. केसर और पिस्ता से गार्निश करना न भूलें। होली के मौके पर दही भल्ला खाने का मजा ही अलग होता है। इसकी खट्टी-मीठी चटनी का स्वाद सभी को पसंद आता है। सामग्री:• 1 कप उड़द दाल• 1/2 कप मूंग दाल• 2 कप दही• 1/2 चम्मच जीरा पाउडर• 1/2 चम्मच लाल मिर्च पाउडर• मीठी चटनी और हरी चटनी• स्वादानुसार नमक विधि:1. उड़द और मूंग दाल को 4-5 घंटे के लिए भिगो दें।2. दाल को पीसकर उसका गाढ़ा घोल तैयार करें।3. गर्म तेल में छोटे-छोटे भल्ले डालकर सुनहरा होने तक तल लें।4. भल्लों को गुनगुने पानी में डालें और फिर हल्का निचोड़कर प्लेट में रखें।5. ऊपर से फेंटी हुई दही, मीठी चटनी, हरी चटनी, जीरा पाउडर और लाल मिर्च पाउडर डालकर परोसें। होली पर कुरकुरी मठरी का स्वाद हर किसी को पसंद आता है। इसे मीठी या नमकीन दोनों तरीकों से बनाया जा सकता है। सामग्री:• 2 कप मैदा• 1/2 कप सूजी• 1/2 चम्मच अजवाइन• 1/2 चम्मच काली मिर्च पाउडर• 4 चम्मच घी• स्वादानुसार नमक• तलने के लिए तेल विधि:1. मैदा, सूजी, अजवाइन, काली मिर्च पाउडर और नमक को अच्छे से मिलाएं।2. इसमें घी डालकर मोयन करें और गाढ़ा आटा गूंध लें।3. आटे को छोटी-छोटी लोइयों में बेलकर कांटे से छेद करें ताकि तलते समय मठरी फूले नहीं।4. गरम तेल में धीमी आंच पर सुनहरा होने तक तलें। इसे भी पढ़ें: ब्लैक कॉफी पीने के 8 अद्भुत फायदे: इसे पीकर करें सुबह की शुरुआत मीठे में हल्की-फुल्की स्नैक के रूप में शक्करपारे होली पर खूब पसंद किए जाते हैं। सामग्री:• 2 कप मैदा• 1 कप चीनी• 1/4 कप घी• 1/2 कप पानी• तलने के लिए तेल विधि:1. मैदा में घी डालकर मोयन करें और गाढ़ा आटा गूंध लें।2. आटे को बेलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।3. गर्म तेल में कुरकुरा होने तक तल लें।4. एक पैन में चीनी और पानी को मिलाकर चाशनी तैयार करें।5. तले हुए शक्करपारों को इस चाशनी में डालकर अच्छे से मिलाएं और ठंडा करके परोसें। होली का त्योहार रंगों और उमंग का प्रतीक है, और इन स्वादिष्ट व्यंजनों (Holi Special Recipe) के बिना इसका मजा अधूरा है। गुजिया से लेकर ठंडाई तक ये पारंपरिक रेसिपी (Holi Special Recipe) हर किसी को पसंद आती हैं। इस बार होली पर इन खास रेसिपीज़ को जरूर आजमाएं और अपने त्योहार को और भी यादगार बनाएं। Latest News in Hindi Today Hindi Holi Special Recipe #HoliSpecialRecipe #HoliFestival #Holi #Holi2025 #HappyHoli

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Benefits of clove water

लौंग के पानी के फायदे: वजन कम करने से लेकर इम्यूनिटी बढ़ाने तक

लौंग को अंग्रेजी में क्लोव कहा जाता है और यह एक ऐसा सामान्य मसाला है, जो लगभग सभी रसोईघरों में पाया जाता है। यह मसाला हर व्यंजन की खुशबु और स्वाद को बढ़ाने के लिए जाना जाता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि इसमें कई मेडिसिनल प्रॉपर्टीज होती हैं? यह मसाला कई जरूरी पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है और इसमें मौजूद कंपाउंड कुछ हेल्थ कंडीशंस में फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इस मसाले के ही नहीं बल्कि लौंग का पानी (Clove water) पीने के भी कई फायदे हैं। आइए पाएं जानकारी लौंग के पानी के फायदे (Benefits of clove water) के बारे में विस्तार से। लौंग के पानी के फायदे (Benefits of clove water): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार लौंग एक बेहतरीन मसाला है, जो स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है। यह मसाला एंटीऑक्सीडेंट्स (Antioxidants) से भरपूर होता है और इसमें ब्लड शुगर को रेगुलेट करने और बैक्टीरिया को नष्ट करने आदि के गुण होते हैं। लौंग के पानी के फायदे (Benefits of clove water) इस प्रकार हैं:  एंटीऑक्सीडेंट्स (Antioxidants) से भरपूर लौंग का पानी (Clove water) अपनी एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज के लिए जानी जाती है। आयुर्वेदा के अनुसार खाली पेट इस पानी को पीने से कई हानिकारक फौरन एजेंट्स से शरीर को लड़ने में मदद मिलती है। इससे कई समस्याओं से छुटकारा पाने में सहायत मिल सकती है।  डाइजेशन को सही रखने में मददगार लौंग के पानी के फायदे (Benefits of clove water) पेट से भी जुड़े होते हैं। खाली पेट इस पानी को पीने से डाइजेशन बूस्ट करने में मदद मिलती है। इससे डाइजेशन सिस्टम सुधरता है। लौंग अपने वायुनाशक गुणों के लिए जाना जाता है, जो गैस और सूजन से राहत दिलाने में मदद करता है। इम्युनिटी को मजबूत करे लौंग का पानी (Clove water) इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण शरीर को इन्फेक्शन्स से लड़ने में मदद करते हैं। लौंग के पानी को नियमित रूप से पीने से कई बीमारियों का जोखिम कम होता है जैसे फ्लू सीजन। यह सम्पूर्ण स्वास्थ्य को सही रखने और सामान्य सर्दी-जुकाम से बचाव के लिए जरूरी है। लिवर फंक्शन को सुधारे लौंग का पानी (Clove water) लिवर हेल्थ के लिए बेहतरीन हैं। यह लिवर शरीर को डिटॉक्सीफाई करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लौंग में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स (Antioxidants) टॉक्सिन्स और फ्री रेडिकल्स के कारण लिवर को होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। इसका नियमित रूप से सेवन करने से लिवर फंक्शन सही रहने में मदद मिलती है। वजन को रखे सही लौंग के पानी के फायदे (Benefits of clove water) में वजन को सही रखना भी शामिल है। अगर आप वजन कम करना चाहते हैं या अपने वजन को सही बनाए रखना चाहते हैं, तो अपनी रूटीन में इस पानी को शामिल करना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इसमें मौजूद कंपाउंड्स से ब्लड शुगर को रेगुलेट रखने और क्रेविंग को कम करने में मदद मिलती है। सुबह खाली पेट इसे पीने से मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है, जिससे आसानी से वजन कम हो सकता है। एनर्जी लेवल को बढ़ाये अपने दिन की शुरुआत लौंग के पानी से करने से प्राकृतिक रूप से एनर्जी बूस्ट होती है। लौंग ब्लड सर्कुलेशन और ऑक्सीजन डिलीवरी को सुधारता है। जिससे पूरा दिन एनर्जी बनी रहती है। ओरल हेल्थ को सुधारे  लौंग का पानी (Clove water) ओरल हेल्थ पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। लौंग में प्रकृति एंटीसेप्टीक गुण होते हैं, जिससे सांस की बदबू को ओरल इंफेक्शंस को कम करने में सहायता होती है। लौंग का पानी (Clove water) दांत के दर्द और मसूड़ों की परेशानी को कम करने में भी फायदेमंद है। यानी, यह सम्पूर्ण दांतों के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।  इसे भी पढ़ें: ब्लैक कॉफी पीने के 8 अद्भुत फायदे: इसे पीकर करें सुबह की शुरुआत कैसे बनाएं लौंग का पानी? लौंग का पानी (Clove water) बनाने के लिए एक गिलास पानी को थोड़ा गर्म कर लें और उसमें तीन से चार लौंग ड़ाल दें। इस पानी को रात भर ऐसे ही रहने दें। सुबह इस पानी को लगभग दस मिनटों तक उबाल लें। इस पानी को ठंडा होने दें और सुबह खाली पेट इसे पीएं। इस पानी को पीने से आपको कई हेल्थ बेनेफिट्स मिलेंगे। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi   #Clovewater #Benefitsofclovewater #clove #antioxidants

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World kidney day

क्या युवाओं में बढ़ रहा है किडनी कैंसर का रिस्क? जानिए कैसे बचा जा सकता है इस समस्या से?

वर्ल्ड किडनी डे (World kidney day) को हर साल मार्च महीने के दूसरे गुरूवार को मनाया जाता है। इस साल इसे 13 मार्च को सेलेब्रेट किया जा रहा है। वर्ल्ड किडनी डे (World kidney day) को किडनी और किडनी हेल्थ के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है, ताकि किडनी डिजीज और इससे जुडी समस्याओं के बढ़ते प्रभावों को कम किया जा सके। किडनी कैंसर (Kidney cancer) की समस्या अब केवल बुजुर्गों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह समस्या युवाओं में भी बढ़ रही है। यह हेल्थ सिस्टम, रोगियों और सोसाइटी के लिए एक नई चुनौती बनता जा रहा है। आइए जानें युवाओं में बढ़ती किडनी कैंसर की समस्या (Problem of kidney cancer is increasing among youth) के बारे में। युवाओं में बढ़ती किडनी कैंसर की समस्या (Problem of kidney cancer is increasing among youth) : पाएं इसके बारे में जानकारी नेशनल किडनी फाउंडेशन (National Kidney Foundation) के अनुसार किडनी कैंसर (Kidney cancer) का सबसे सामान्य ट्रीटमेंट है सर्जरी, जिससे किडनी का पूरा या आंशिक भाग रिमूव कर दिया जाता है। हालांकि, इसका उपचार रोग की स्टेज, रोगी की उम्र, हेल्थ और अन्य फैक्टर्स पर निर्भर करता है। किडनी कैंसर (Kidney cancer) रीनल सेल कार्सिनोमा बाकी सब कैंसरों का लगभग 2-3% हिस्सा है। कुछ समय पहले तक यह मामले केवल 60 साल की उम्र से अधिक बुजुर्गों में ही देखे जाते थे। लेकिन, पिछले कुछ दशकों में 30 और चालीस साल के लोगों में भी इसके मामलों में वृद्धि हुई है। इस बात को नेशनल कैंसर रजिस्ट्री में भी इसे नोटिस किया है कि 50 साल से कम उम्र के लोगों में 15-20% बढ़ोतरी हुई है। इसके लिए बहुत से फैक्टर्स जिम्मेदार हैं जैसे जीवनशैली में बदलाव या एनवायर्नमेंटल एक्सपोजर आदि। युवाओं में मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) और स्मोकिंग जैसे रिस्क फैक्टर्स भी किडनी कैंसर (Kidney cancer) का कारण बन सकते हैं। इसके लिए लोगों का जागरूक होना बेहद जरूरी है, ताकि वो अपनी जीवनशैली को हेल्दी बनाए रखें। इसके अलावा जेनेटिक प्रेडिस्पोसिशन्स (Genetic predispositions) भी कम उम्र के लोगों में किडनी कैंसर का कारण बन सकते हैं। जिन लोगों को इस रोग का अधिक रिस्क होता है, उन्हें जेनेटिक टेस्टिंग की सलाह दी जाती है। यह तो थी जानकारी युवाओं में बढ़ती किडनी कैंसर की समस्या (Problem of kidney cancer is increasing among youth) के बारे में। अब जानिए इसके उपचार और बचाव के बारे में। किडनी कैंसर का उपचार किडनी कैंसर (Kidney cancer) का उपचार कई फैक्टर्स पर निर्भर होता है। इसके उपचार के तरीके इस प्रकार हैं:  अन्य उपचार इसे भी पढ़ें: तुलसी का पानी: जानें क्या हैं रोजाना सुबह इसे पीने के 6 आश्चर्यकारी फायदे किडनी कैंसर से बचाव किडनी कैंसर (Kidney cancer) से बचाव के सामान्य तरीके इस प्रकार हैं: इस वर्ल्ड किडनी डे (World kidney day) किडनी हेल्थ के महत्व के प्रति जागरूक रहने पर अपना ध्यान फोकस करना करें। हेल्दी लाइफस्टाइल का पालन करें, नियमित हेल्थ स्क्रीनिंग कराएं और किडनी कैंसर (Kidney cancer) के जल्दी निदान और ट्रीटमेंट के बारे में जानें। किडनी हेल्थ पर ध्यान देने से हम युवाओं में किडनी कैंसर की समस्या को कम कर सकते हैं जिसका उपचार न केवल संभव है बल्कि इससे बचा भी जा सकता है। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi kidney cancer #kidneycancer #Kidneyhealth #worldkidneyday #Problemofkidneycancerisincreasingamongyouth

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Benefits of drinking Tulsi water

तुलसी का पानी: जानें क्या हैं रोजाना सुबह इसे पीने के 6 आश्चर्यकारी फायदे

भारतीय रसोईघर में ऐसी कई हर्ब्स पाई जाती हैं, जिनके बहुत से हेल्थ बेनेफिट्स हैं। तुलसी (Tulsi) उन्हीं में से एक है, जिसे बेजिल के नाम से भी जाना जाता है। यह हिन्दू संस्कृति के अनुसार एक पवित्र पौधा है और इसकी हर घर में पूजा की जाती है। इसे आयुर्वेदा की गोल्डन रेमेडी और हर्ब्स की क्वीन भी कहा जाता है। तुलसी (Tulsi) की चाय या पानी पीने के कई फायदे हैं। यह हर्ब शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी बहुत लाभदायक मानी गई है। आइए जानें कि रोजाना सुबह तुलसी का पानी पीने के बेनेफिट्स (Benefits of drinking Tulsi water every morning) क्या हो सकते हैं?    रोजाना सुबह तुलसी का पानी पीने के बेनेफिट्स (Benefits of drinking Tulsi water every morning): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार तुलसी (Tulsi) के फाइबर, मिनरल्स से भरपूर होती है और इसके साथ ही इसमें प्लांट बेस्ड ओमेगा-3 फैट भी होता है। आप इन्हें पेय पदार्थों में भिगो कर खा सकते हैं और इससे बने बेवरेजेज भी बहुत प्रचलित हैं। रोजाना सुबह तुलसी का पानी पीने के बेनेफिट्स (Benefits of drinking Tulsi water every morning) इस प्रकार हैं:  स्ट्रेस से दिलाए आराम तुलसी के पत्तों में एडाप्टोजेन्स होते हैं, जो शरीर में तनाव के लेवल को कम करने में उपयोगी होते हैं। रोजाना तुलसी (Tulsi) के पत्तों का सेवन करने या इसका पानी पीने से स्ट्रेस और प्रेशर से आराम मिल सकता है। यही नहीं, इससे नसें शांत रहती हैं और काम करने की कैपेसिटी भी बढ़ती है। यह नर्वस सिस्टम के कई कामों के लिए फायदेमंद है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन सुधरने में भी मदद मिलती है। डाइजेशन में सुधार सुबह तुलसी का पानी (Tulsi water) पीने से डाइजेशन सिस्टम में भी सुधार होता है। इससे इंटेस्टाइन से जुड़े मसल्स के कार्यो में बढ़ोतरी होती है, जिससे बाउल मूवमेंट्स में मदद मिलती है। तुलसी (Tulsi) शरीर के एसिड रिफ्लेक्स को बैलेंस बनाए रखती है, जिससे शरीर में pH लेवल भी बना रहता है। यानी, रोजाना तुलसी का पानी (Tulsi water) पीने से पेट से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं। शरीर के ब्लड शुगर लेवल को रखे सही रोजाना सुबह तुलसी का पानी पीने के बेनेफिट्स (Benefits of drinking Tulsi water every morning) पैंक्रिएटिक सेल्स से भी सम्बन्धित हैं। तुलसी (Tulsi) में ऐसे कंपोनेंट्स होते हैं, जो शरीर में इंसुलिन को नियंत्रित करने में सहायता करते हैं। जब इंसुलिन का स्तर नियंत्रित रहता है, तो यह शरीर में ब्लड शुगर लेवल को कम करता है। सुबह इसे खाना या इसके पानी को पीने से ब्लड शुद्ध रहता है और ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग होता है, जिससे खराब मेटाबॉलिज्म के कारण होने वाली समस्याओं से बचा जा सकता है। जिन लोगों को डायबिटीज है या हाई ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) अधिक है उन्हें सुबह ही इस पानी को पीने से लाभ मिल सकता है। सर्दी-जुकाम में फायदेमंद तुलसी (Tulsi) में एंटी-वायरल प्रॉपर्टीज होती हैं, जो वायरल इंफेक्शंस से बचाव में फायदेमंद साबित हो सकती हैं। यही नहीं, सामान्य सर्दी जुकाम जैसी समस्याओं के इलाज में भी यह हर्ब काम आ सकती है।  सांस की बदबू से बचाये सांस की बदबू एक बड़ी परेशानी है, जिससे आप इस सिंपल नुस्के से राहत पा सकते हैं। सांस की बदबू न केवल सेहत के लिए नुकसानदायक है बल्कि लोगों के सामने भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में सुबह तुलसी के पत्तों को चबाना या इसका पानी पीने से यह समस्या कुछ हद तक दूर हो सकती है। तुलसी (Tulsi) में एंटी-बैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होती हैं, जिसके कारण जो माइक्रोबैक्टीरिया जो सांस की बदबू का कारण बनते हैं, वो नष्ट हो जाते हैं।  इसे भी पढ़ें: ब्लैक कॉफी पीने के 8 अद्भुत फायदे: इसे पीकर करें सुबह की शुरुआत इम्युनिटी बूस्ट करे तुलसी एंटी-ऑक्सीडेंट्स (Antioxidant) से भरपूर होती है। इसी वजह से इसका इस्तेमाल चाय में किया जाता है। यह इम्युनिटी को बूस्ट करने का बेहतरीन प्राकृतिक तरीका है। तुलसी (Tulsi) में विटामिन ए,बी और सी होते हैं, जो शरीर को प्रभावी रूप से हानिकारक बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करते हैं। सुबह तुलसी का पानी (Tulsi water) पीने से हेल्दी इम्यून सेल्स को बनाने को बूस्ट करते हैं और इससे कई वायरल डिजीज से बचाव में मदद मिलती है।   नोट:– यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi  Benefits of drinking Tulsi water #BenefitsofdrinkingTulsiwatereverymorning #Tulsi #Tulsiwater #Benefitsoftulsiwater

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Tomato fever

Tomato Flu: जानें टोमेटो फ्लू के लक्षण और कारण

टोमेटो फ्लू (Tomato flu) वायरस को सबसे पहले 6 मई 2022 को भारत के केरला राज्य में पाया गया था। इसके बाद यह अन्य राज्यों जैसे हरियाणा, ओडिशा और तमिलनाडु में फैल गया। इस फ्लू को हैंड, फुट और माउथ डिजीज का दूसरा प्रकार भी कहा जा सकता है और इसे टोमेटो फीवर (Tomato fever) नाम से भी जाना जाता है। इस रोग को वयस्कों की तुलना में बच्चों में अधिक पाया गया है। इस रोग में स्किन पर टमाटर जैसे छाले हो जाते हैं, इसीलिए इसका नाम टोमेटो फ्लू (Tomato flu) या टोमेटो फीवर (Tomato fever) पड़ा। यह छाले गोल, फ्लूइड से भरे और दर्दनाक होते हैं। हालांकि, यह कंडीशन घातक नहीं है लेकिन बहुत ज्यादा संक्रामक है। आइए जानें इस समस्या के बारे में और अधिक। टोमेटो फ्लू (Tomato flu): पाएं पूरी जानकारी नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (National Library of Medicine) के अनुसार टोमेटो फीवर (Tomato fever) को हैंड फुट और माउथ डिजीज का क्लीनिकल वेरिएंट माना जाता है और यह समस्या एंटरोवायरस समूह के कॉक्ससैकीवायरस ए-6 और ए-16 के कारण होती है। जानिए टोमेटो फ्लू के लक्षण (tomato flu symptoms) क्या हो सकते हैं?  टोमेटो फ्लू के लक्षण (Tomato flu symptoms) बड़े लाल रैशेज, जोड़ों में दर्द और बुखार इस डिजीज के कुछ प्राइमरी लक्षण हैं। इसके अलावा इसके अन्य लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं: यह तो थे टोमेटो फ्लू के लक्षण (Tomato flu symptoms)। इनके अलावा भी रोगी को कुछ अन्य समस्याएं हो सकती हैं। अब जानिए क्या हैं टोमेटो फ्लू के कारण? टोमेटो फलू के कारण शुरुआत में इस बीमारी के कारणों के बारे में जानकारी नहीं थी। कई स्त्रोतों ने मच्छरों द्वारा कैरी किए जाने वाले वायरस को इसका कारण पाया। लेकिन, बाद में की गई स्टडीज से यह पता चला कि यह बीमारी टोमेटो फ्लू (Tomato flu) एंटरोवायरस समूह के कॉक्ससैकीवायरस ए-6 और ए-16 के कारण होती है। इसके अलावा, यह भी पाया गया कि चिकनगुनिया और डेंगू वायरस के अधिक प्रभाव ने कमजोर इम्यून सिस्टम के कारण भारतीय बच्चों को इस रोग के प्रति अधिक संवेदनशील बना दिया है। टोमेटो फ्लू का उपचार टोमेटो फ्लू (Tomato flu) का कोई खास उपचार नहीं है लेकिन इसके लक्षणों से रोगी को राहत पहुंचाने और जटिलताओं से बचाव के लिए कई उपाय किए जा सकते हैं, जैसे: इसे भी पढ़ें: ब्लैक कॉफी पीने के 8 अद्भुत फायदे: इसे पीकर करें सुबह की शुरुआत टोमेटो फ्लू से बचाव  टोमेटो फ्लू (Tomato flu) या टोमेटो फीवर (Tomato fever) से बचाव के लिए कुछ सावधानियों को बरतना जरूरी है। इसके लिए इन बातों का ध्यान रखें:  नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें।  Latest News in Hindi Today Hindi Tomato Fever #Tomatoflu #tomatoflusymptoms #tomatofever

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Benefits of cardamom

रात में इलायची खाने के 9 अद्भुत फायदे: जानें कैसे यह आपकी सेहत को बना सकती है बेहतर

इलायची (Cardamom) को अपने तीखे और मीठे फ्लेवर के लिए जाना जाता है और इसे कई तरीके से खाया जाता है जैसे साबुत, पाउडर या एसेंशियल आयल के रूप में। यह मसाला विटामिन, मिनरल्स और फाइबर से भरपूर होता है। मीठी और नमकीन दोनों तरह के व्यजनों में इलायची (Cardamom) का उपयोग किया जा सकता है। यह मसाला न केवल डिश के स्वाद और खशबू को बेहतर बनाता है, बल्कि हेल्थ के लिए भी इसे फायदेमंद माना गया है। ऐसा भी पाया गया है कि इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंस दिमाग के लिए लाभदायक होते हैं। अगर आप रात को सोते हुए एक इलायची (Cardamom) खाते हैं, तो इससे सेहत को कई फायदे मिलते हैं। आइए जानें इलायची के बेनेफिट्स (Benefits of cardamom) के बारे में।  इलायची के बेनेफिट्स (Benefits of cardamom): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार इलायची (Cardamom) एक प्राचीन रेमेडी है, जिसमें कई मेडिसिनल प्रॉपर्टीज हैं। इस ब्लड प्रेशर को कम कर सकती है, ब्रीदिंग को सुधार सकती है और वजन को कम करने में भी यह फायदेमंद है। इलायची के बेनेफिट्स (Benefits of cardamom)  इस प्रकार हैं:  डाइजेशन को रखे सही इलायची (Cardamom) उन एंजाइमस के सेक्रेशन को बढ़ावा देने के लिए जानी जाती है जो सामान्य पाचन सम्बन्धित समस्याओं जैसे ब्लोटिंग, गैस और पेट में क्रैम्प्स आदि को दूर करने में मदद करते हैं। इसलिए रात को एक इलायची (Cardamom) खाने से आपका पेट सही रह सकता है और इससे जुड़ी समस्याएं कम हो सकती हैं। सांस की बदबू से छुटकारा इलायची (Cardamom) एक बेहतरीन माउथ फ्रेशनर है, जो प्राकृतिक रूप से ब्रीद को फ्रेश बनाये रखने में मदद करता है। इससे सांस की बदबू दूर होती है और ओरल हेल्थ में सुधार होने में मदद मिलती है। एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण (Anti-inflammatory properties) इलायची के बेनेफिट्स (Benefits of cardamom) इससे एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण (Anti-inflammatory properties) से सम्बन्धित हैं। इसमें मौजूद एक्टिव कंपाउंड्स में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण (Anti-inflammatory properties)होती हैं। जो सूजन को कम करने और गठिया और इसके जैसी अन्य समस्याओं से राहत पाने में मदद कर सकती हैं। इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते हैं जो कुछ खास इंफेशन के विरुद्ध मददगार हो सकते हैं। एंटीऑक्सीडेंट्स गुणों से भरपूर इलायची (Cardamom) में एंटीऑक्सीडेंट्स (Antioxidants) का हाई लेवल होता है, जो सेल्स को फ्री रेडिकल्स के कारण होने वाले नुकसान से बचाते हैं। इससे क्रोनिक डिजीज जैसे कैंसर के जोखिम कम होने में मदद मिलती है और एजिंग प्रोसेस भी स्लो होती है।  ब्लड सर्कुलेशन को सुधारे इलायची के बेनेफिट्स (Benefits of cardamom) में ब्लड सर्कुलेशन में सुधार भी शामिल है। यह एक नेचुरल ब्लड थिनर है और ब्लड फ्लो और सर्कुलेशन को सुधारता है। इससे ब्लड क्लॉट्स से बचाव होता है, हार्ट डिजीज का रिस्क कम होता है और सम्पूर्ण कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ में भी सुधार होता है। डेटोक्सिफिकेशन  इलायची (Cardamom) डाइयूरेटिक की तरह कार्य करता है। जिससे यूरिन फ्लो बढ़ता है और शरीर से हानिकारक तत्वों और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद मिलती है। इससे किडनी को सही से काम करने में मदद मिलती है। यानी, किडनी हेल्थ को सुधारने में भी यह बेनेफिशियल है। ब्लड प्रेशर रहे सही इलायची (Cardamom) को नियमित रूप से खाने से ब्लड प्रेशर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह बात स्टडीज से भी प्रूव हो चुकी हैं। इससे हाइपरटेंशन और इससे जुडी कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का जोखिम भी कम होता है। दिमाग के लिए फायदेमंद इस मसाले का इस्तेमाल ट्रेडिशनल दवाइयों में मेंटल क्लैरिटी को सुधारने और स्ट्रेस से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। ऐसा माना जाता है कि इसका सेवन करने से दिमाग शांत रहता है और मूड सही रहता है। इसे साथ एंग्जायटी को कम करने में भी मदद मिलती है। इसे भी पढ़ें: ब्लैक कॉफी पीने के 8 अद्भुत फायदे: इसे पीकर करें सुबह की शुरुआत इम्यून सिस्टम को बनाए मजबूत ऐसा पाया गया है कि इलायची (Cardamom) के इस्तेमाल से सामान्य सर्दी-जुकाम और फ्लू से राहत मिलती है। इससे गले में समस्या से भी राहत मिलती है। यह इम्युनिटी को बूस्ट करने का अच्छा तरीका है। रोजाना रात को एक इलायची चबाने या इसकी चाय पीने से अच्छे परिणाम मिलते हैं। नोट:– यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi Benefits of cardamom #Antiinflammatoryproperties #Cardamom #Benefitsofcardamom

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Yogasana beneficial for women's health

 International Women’s Day पर जानिए महिलाओं के लिए फायदेमंद 4 योगासनों के बारे में

मेंटल और फिजिकल हेल्थ दोनों को मैंटेन रखने के लिए एक्सरसाइज व योगा करना बहुत जरूरी है। महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए भी योगा को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। इससे महिलाओं को विभिन्न चिंताओं, जैसे मासिक धर्म में ऐंठन, तनाव, हार्मोनल इंबैलेंस और गर्भावस्था के बाद की चुनौतियों से निपटने में मदद मिलती है। यही नहीं इससे फ्लेक्सिबिलिटी, स्ट्रेंथ में भी बढ़ोतरी होती है। हर साल 8 मार्च को इंटरनेशनल वीमेन’स डे के रूप में मनाया जाता है। इंटरनेशनल वीमेन’स डे महिलाओं की उपलब्धियों को मान्यता देने, जेंडर इनक्वॉलिटी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और समान अधिकारों के बारे में जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। इस वीमेन’स डे आइए जानें उन योगासनों के बारे में, जो महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद योगासन (Yogasana beneficial for women’s health) इस प्रकार हैं। महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद योगासन (Yogasana beneficial for women’s health): पाएं जानकारी क्लीवलैंडक्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार रोजाना की स्ट्रेस हमारी एनर्जी और मूड दोनों को प्रभावित कर सकती है। अगर आपको घर,नौकरी, पैसा आदि से सम्बन्धित चिंता है, तो इसे दूर करने में योगा आपकी मदद कर सकता है। महिलाओं को भी कुछ समय निकाल कर योगा करना चाहिए। महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद योगासन (Yogasana beneficial for women’s health)  इस प्रकार हैं:   1. भुजंगासना (Bhujangasana) भुजंगासना (Bhujangasana) यानी कोबरा पोज पीठ और रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने में फायदेमंद है। इसके साथ ही इससे पोस्चर में भी सुधर होता है। यह योगासन (Yogasana) पेट के अंगों को स्टिमुलेट करता है और पीरियड्स में होने वाली परेशानियों से भी रहत दिलाता है।  ऐसे करें इस आसन को: 2. धनुरासन (Dhanurasana) धनुरासन (Dhanurasana) पीठ और कोर को मजबूत बनती है और बेहतर पाचन के लिए फायदेमंद है। महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद योगासन (Yogasana beneficial for women’s health) में यह आसान फ्लेक्सिबिलिटी में भी मदद करता है। ऐसे करें इस योगासन (Yogasana) को: 3. मार्जरीआसना (Marjariasana) मार्जरीआसना (Marjariasana) को कैट स्ट्रेच पोज भी कहा जाता है और इसके कई फिजिकल और मेंटल बेनिफिट्स हैं। महिलाओं के लिए यह योगासन (Yogasana) बेहद फायदेमद है। ऐसे करें इस आसन को: इसे भी पढ़ें: अगर आप बीयर पीने के शौकीन हैं, तो हो जाएं सतर्क 4. मलासना (Malasana) मलासना (Malasana) पाचन को सुधारने और पेल्विक फ्लोर मसल्स को मजबूत बनाने में फायदेमंद है। यह गर्भवती महिलाओं के लिए भी इस आसान को फायदेमंद माना गया है। ऐसे करें इस आसन को: यह तो थे महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद योगासन (Yogasana beneficial for women’s health) के बारे में जानकारी। कुछ अन्य योगासन (Yogasana) भी महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं जैसे शवासन, अधोमुख श्वानासन, मत्स्यासन, जानु शीर्षासन आदि।  नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi Yogasana beneficial for women’s health #Marjariasana #Beneficialforwomenshealth #Bhujangasana #Dhanurasana

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Lab report regarding anemia in female

महिलाओं की सेहत पर एनीमिया का हमला: रेडक्लिफ लैब्स की रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य

एनीमिया (Anemia) उस समस्या को कहा जाता है, जब शरीर में हेल्दी रेड ब्लड सेल्स (Red blood cells) या हीमोग्लोबिन की कमी हो। हीमोग्लोबिन ब्लड सेल्स में मौजूद मुख्य प्रोटीन होता है, जो ऑक्सीजन को कैरी करता है और शरीर में डिलीवर करता है। एनीमिया के कारण रोगी थकावट, कमजोरी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्या का सामना कर सकते हैं। एनीमिया (Anemia) हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकता है और यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। एक लैब रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि भारत में पांच में से तीन महिलाओं को एनीमिया होने का रिस्क है। आइए जानें एनीमिया (Anemia) के बारे में लैब रिपोर्ट (Lab report regarding anemia) के बारे में और एनीमिया से बचाव के बारे में भी जानें। एनीमिया के बारे में लैब रिपोर्ट (Lab report regarding anemia): पाएं जानकारी मायोक्लिनिक (Mayoclinic) के अनुसार एनीमिया (Anemia)के कई प्रकार हो सकते हैं और इस हर प्रकार के अपने कारण हैं। इस बीमारी के उपचार में सप्लीमेंट लेना और अन्य मेडिकल प्रोसिजर्स शामिल हैं। हेल्दी डायट से भी कुछ तरह के एनीमिया का उपचार हो सकता है। रेडक्लिफ लेप्स के द्वारा की गयी स्टडी में यह बात सामने आई है कि भारत में महिलाओं में लाइफस्टाइल से जुड़े डिसऑर्डर्स जैसे थायराइड (Thyroid), मोटापा आदि  लगातार बढ़ रहे हैं। इस स्टडी में यह भी पता चला है कि हमारे देश में पांच में से तीन महिलाओं को एनीमिया (Anemia) का रिस्क है। यह स्टडी लगभग दो साल तक दस लाख महिलाओं पर की गयी है। इसमें यह भी पाया गया है कि एनीमिया और थायराइड (Thyroid) महिलाओं में पाए जाने वाले सबसे सामान्य डिसऑर्डर हैं। यही नहीं, इस स्टडी में यह भी पाया गया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में एनीमिया का रिस्क तीन गुना ज्यादा है। इसके अलावा इस स्टडी के अनुसार पांच में से एक महिला थायराइड (Thyroid) डिसऑर्डर्स के जोखिम में है। इससे हार्मोनल इंबैलेंस, मेटाबोलिक प्रॉब्लम्स (Metabolic problems) आदि का खतरा बढ़ सकता है। अगर एनीमिया (Anemia) का सही इलाज न किया जाए, तो इम्युनिटी कमजोर हो सकती है। जीवनशैली फैक्टर्स से जुड़े रोग जैसे डायबिटीज और लिपिड डिसऑर्डर कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकते हैं।  यह रिपोर्ट एक चिंता का विषय है। महिलाएं अक्सर खुद से अपने परिवार के स्वास्थ्य को अधिक महत्व देती हैं। वो अपने स्वास्थ्य के बारे में इतनी चिंता नहीं करती, लेकिन नियमित जांच और जीवनशैली में सही बदलाव से कॉम्प्लीकेशन्स कम होने में मदद मिल सकती है। इसलिए महिलाएं नियमित जांच कराएं और जीवनशैली में सही बदलाव करें। यह तो थी जानकारी एनीमिया के बारे में लैब रिपोर्ट (Lab report regarding anemia) के बारे में। अब जानिए एनीमिया (Anemia) से कैसे बचा जा सकता है? इसे भी पढ़ें: अगर आप बीयर पीने के शौकीन हैं, तो हो जाएं सतर्क एनीमिया से कैसे बचें? कई प्रकार के एनीमिया (Anemia) से बचाव संभव नहीं लेकिन हेल्दी डायट खाने से आयरन डेफिशिएंसी एनीमिया और विटामिन डेफिशिएंसी एनीमिया (Anemia) से बचाव हो सकता है। हेल्दी डायट में यह सब शामिल किया जा सकता है: अगर आपको लग रहा है कि आपको खाने से पर्याप्त विटामिन या मिनरल्स नहीं मिल रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह लें। डॉक्टर रोगी को मल्टीविटामिन्स भी दे सकते हैं। एनीमिया (Anemia) का कोई भी लक्षण नजर आने पर तुरंत मेडिकल हेल्प लेना आवश्यक है। ध्यान रखें इस समस्या को नजरअंदाज करना भविष्य में खतरनाक साबित हो सकता है। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi Anemia #Anemia #Labreportregardinganemia #Thyroid #Lifestyledisorders

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