AMH Test

मां बनने की उम्र का लग सकता है अंदाजा: अब एक टेस्ट से पता चलेगा महिला के शरीर में कितने एग बचे हैं?

आजकल के जमाने के जिंदगी एक दौड़ की तरह हो कर रह गयी है, जिसमें हर कोई पहले नंबर पर आना चाहता है। पहले पढ़ाई, फिर कैरियर उसके बाद नौकरी और इसी में पूरी जिंदगी निकल जाती है। इसी दौड़ में लोग आजकल अधिक उम्र के होने पर शादी के बारे में सोच रहे हैं और इससे उनके परिवार की शुरुआत भी देरी से होती है। इसका सीधा असर होता है महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर।  ऐसे में एक ऐसा टेस्ट है, जिससे यह पता चल सकता है कि महिला के शरीर में कितने एग बचे हैं और वो कितने समय तक हेल्दी रहेंगे? इसके साथ ही अगर उनके अंडाशय में कोई समस्या है, तो उसका पता भी इससे चल सकता है। इस टेस्ट का नाम है एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) या एएमएच टेस्ट (AMH test)। आइए जानें इसके बारे में विस्तार से। क्या है एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test)?  क्लीवलैंड क्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) यानी एएमएच टेस्ट (AMH test) से खून में एंटी मुलेरियन हार्मोन (Anti mullerian hormone) की मात्रा को मापा जाता है। सभी लोगों में इन हॉर्मोन्स का उत्पादन होता है, लेकिन डॉक्टर महिलाओं में इस टेस्ट का उपयोग करते हैं। एंटी मुलेरियन हार्मोन (Anti mullerian hormone) गर्भाशय में भ्रूण के सेक्स ऑर्गन्स के विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह हॉर्मोन लेवल मेल फीटस में अधिक होते हैं, है क्योंकि यह उन्हें महिला प्रजनन अंगों के विकास से रोकता है। फीमेल फिट्स को अपने विकास के लिए कम मात्रा में इन हॉर्मोन्स की जरूरत होती है। एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) को कब कराया जाता है? डॉक्टर यह जानने के लिए एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) की सलाह दे सकते हैं कि ओवेरियन मास कहीं ग्रैनुलोसा सेल ट्यूमर तो नहीं है। इसके साथ ही इसका का उपयोग इन चीजों को जांचने के लिए भी किया जा सकता है: एंटी मुलेरियन टेस्ट से क्या पता चलता है? एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) से पता चलता है कि महिला में कितने एग बचे हैं और यह कब तक हेल्दी रह सकते हैं? इससे पता चल सकता है कि महिला के पास गर्भवती होने के लिए कम समय है या नहीं। इस टेस्ट से यह भी पता चल सकता है कि इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) की तैयारी के लिए ओवरीज को कई अंडों को फर्टिलाइज करने के लिए स्टिमुलेट करने वाले इंजेक्टेबल फर्टिलिटी ड्रग्स के प्रति महिला कितने अच्छे से रिस्पॉन्ड कर सकती है या नहीं। एंटी मुलेरियन टेस्ट से क्या पता नहीं चलता है? एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) यानी एएमएच टेस्ट (AMH test) को एग काउंट से कनेक्ट किया जाता है। इससे फर्टिलिटी (उपचार के साथ या बिना) या मेनोपॉज से गुजरने के समय का पता नहीं लगता है। इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि एंटी मुलेरियन हॉर्मोन (Anti mullerian hormone) लेवल सामान्य सीमा में होनी चाहिए। कुछ अन्य फैक्टर भी गर्भधारण करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं, जैसे: उम्र के अनुसार कितना एंटी मुलेरियन हॉर्मोन लेवल अच्छा है? एंटी मुलेरियन हॉर्मोन (Anti mullerian hormone) लेवल एक उम्र के बाद कम हो सकता है, इसलिए 30, 40 और 50 की उम्र में ओवेरियन रिजर्व क्षमता में कमी आना सामान्य बात है। इन हॉर्मोन्स का लेवल इस प्रकार होना अच्छा माना गया है: इसे भी पढ़ें: सिंगल पेरेंटिंग नहीं है आसान: सिंगल पैरेंट को करना पड़ता है इन 5 चुनौतियों का सामना यह भी ध्यान रखना चाहिएअधिक एंटी मुलेरियन हॉर्मोन (Anti mullerian hormone) लेवल हमेशा अच्छी बात नहीं होती। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) के रोगियों में में यह लेवल अधिक हो सकता है। यह एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) आसानी से घर पर किया जा सकता है। हालांकि, घर पर किए जाने वाले टेस्ट सुविधाजनक होते हैं, लेकिन इसके बाद सलाह के लिए डॉक्टर से बात करें। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi AMH Test #Hormone #AMHtest #AntiMullerianTest, #AntiMullerianHormone

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World Tuberculosis Day

वर्ल्ड ट्यूबरक्लोसिस डे: जानिए क्या हैं टीबी के कारण, लक्षण और किस तरह से करें इससे बचाव?

हर साल 24 मार्च को वर्ल्ड ट्यूबरक्लोसिस डे (World Tuberculosis Day) या वर्ल्ड टीबी डे के रूप में मनाया जाता है। ट्यूबरक्लोसिस (Tuberculosis) सबसे ज्यादा संक्रामक बीमारियों में से एक है। वर्ल्ड ट्यूबरक्लोसिस डे (World Tuberculosis Day) को लोगों को इस रोग के प्रति जागरूक करने के लिए सेलेब्रेट किया जाता है। इस दिन आम लोगों को टीबी (TB) के लक्षणों, कारणों और बचाव के तरीकों के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है। यही नहीं, इस दिन मेडिकल इंस्टीट्यूट्स, डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ आदि कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन भी करते हैं। हर व्यक्यि के लिए इस रोग के बारे में पूरी जानकारी होना जरूरी है। आइए जानें कि यह रोग क्या है और इससे बचाव किस तरह से संभव है। ट्यूबरक्लोसिस यानी टीबी क्या है? मायोक्लिनिक (Mayoclinic) के अनुसार ट्यूबरक्लोसिस (Tuberculosis) एक गंभीर बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। इस बीमारी का कारण बनने वाले जर्म्स एक तरह के बैक्टीरिया है। यह बीमारी संक्रमित व्यक्तियों से अन्य लोगों तक फैल सकती है। छींक, खांसी आदि इसके फैलने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इससे हवा में जर्म्स वाले छोटे ड्रॉपलेट फैल सकते हैं। जब अन्य लोग इन ड्रॉप्लेट्स को सांस के माध्यम से अंदर ले जाते हैं और यह जर्म्स फेफड़ों में जा सकते है। एचआईवी/एड्स से पीड़ित लोगों और कमजोर इम्युनिटी वाले अन्य लोगों में सामान्य इम्युनिटी वाले लोगों की तुलना में ट्यूबरक्लोसिस (Tuberculosis) होने का जोखिम अधिक होता है। इस वर्ल्ड ट्यूबरक्लोसिस डे (World Tuberculosis Day) जानिए क्या हैं इसके कारण। लेकिन, पहले ट्यूबरक्लोसिस के लक्षण (Symptoms of Tuberculosis) क्या हैं, यह जान लेते हैं। ट्यूबरक्लोसिस के लक्षण (Symptoms of Tuberculosis) इनएक्टिव ट्यूबरक्लोसिस से पीड़ित व्यक्ति में इस रोग से सम्बन्धित कोई भी लक्षण देखने को नहीं मिलता है। लेकिन, बिना उपचार के उनमें यह एक्टिव ट्यूबरक्लोसिस (Tuberculosis) की समस्या हो सकती है और वो बीमार हो सकता है। एक्टिव ट्यूबरक्लोसिस के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि शरीर में कहां टीबी (TB) के जर्म्स ग्रो हो रहे हैं। फेफड़ों में टीबी (TB) जर्म्स के विकसित होने पर ट्यूबरक्लोसिस के लक्षण (Symptoms of Tuberculosis) इस प्रकार हो सकते हैं: इसके अलावा एक्टिव टीबी के लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं ट्यूबरक्लोसिस के कारण ट्यूबरक्लोसिस (Tuberculosis)का सबसे सामान्य प्रकार है पल्मोनरी ट्यूबरक्लोसिस, लेकिन बैक्टीरियम शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है। आपने माइलरी ट्यूबरकुलोसिस के बारे में भी सुना होगा, जो हमारे पूरे शरीर में फैल सकता है और इसके कारण हो सकते हैं, जो इस प्रकार हैं” ट्यूबरक्लोसिस का उपचार एक्टिव और इनएक्टिव ट्यूबरक्लोसिस (Tuberculosis) दोनों का खास तरह की एंटीबायोटिक के साथ उपचार किया जाता है। इन दवाईयों के कॉम्बिनेशन से इंफेक्शन से आराम मिल सकता है। इन दवाईयों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेना चाहिए। निम्नलिखित दवाईयों की सलाह रोगी को दी जा सकती है: इसे भी पढ़ें: सिंगल पेरेंटिंग नहीं है आसान: सिंगल पैरेंट को करना पड़ता है इन 5 चुनौतियों का सामना ट्यूबरक्लोसिस से बचाव निम्नलिखित तरीकों से ट्यूबरक्लोसिस (Tuberculosis) के संक्रमण और उसके स्प्रेड होने के रिस्क को कम किया का सक्ता है: इस वर्ल्ड ट्यूबरक्लोसिस डे (World Tuberculosis Day) आप इस रोग के बारे में जानें और अन्य लोगों को भी इसके बारे में जागरूक करें ताकि इससे बचा जा सके। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi  Symptoms of Tuberculosis #SymptomsofTuberculosis #WorldTuberculosisDay #Tuberculosis #TB

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Single parent family

सिंगल पेरेंटिंग नहीं है आसान: सिंगल पैरेंट को करना पड़ता है इन 5 चुनौतियों का सामना

सिंगल पैरेंट फैमिली (Single parent family) का अर्थ उस परिवार से है ,जहां एक पैरेंट बच्चे के पालन-पोषण की अधिकतर जिम्मेदारियां उठाता है। ऐसा विभिन्न परिस्थतियों के कारण हो सकता है जैसे तलाक, मृत्यु या अन्य कोई अनियोजित घटना आदि। सिंगल पैरेंट (Single parent) होना आसान नहीं है बल्कि यह दुनिया की सबसे मुश्किल कामों में से एक है, जहां उन्हें अपने बच्चे की सभी जरूरतों को पूरा करना पड़ता है, और वो भी बिना पार्टनर की मदद के। स‍िंगल पेरेंट‍िंग (Single parenting) के दौरान कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आइए जानें सिंगल पेरेंटिंग (Single parenting) के बारे और इससे जुड़े चैलेंजेज के बारे में भी जानें। सिंगल पेरेंटिंग (Single parenting): पाएं जानकारी अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (American Academy of Pediatrics) के अनुसार सिंगल पैरेंट (Single parent) बनना चाहे आपके लाइफ प्लान का हिस्सा हो या न हो, लेकिन इसमें लोग बहुत सी चुनौतियों का सामना करते हैं। फैमिली की रोजाना की जिमेदारियों को मैनेज करना और सही निर्णय लेना प्रेशर और स्ट्रेस का कारण बन सकता है। इसमें एक ही पार्टनर को परिवार की सभी जिम्मेदारियों को पूरा करना पड़ता है, इसलिए यह बहुत चुनोतुपूर्ण हो सकता है। आइए जानें सिंगल पेरेंटिंग (Single parenting) से जुडी चुनौतियां कौन सी हो सकती हैं? सिंगल पेरेंटिंग (Single parenting) से जुडी चुनौतियां कौन सी हैं? सिंगल पैरेंट (Single parent) को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानें इसके बारे में: फाइनेंश्यिल समस्याएं सिंगल पेरेंट्स के लिए सबसे बड़ी चिंता का कारण हो सकता है फाइनेंस यानी धन। सिंगल पैरेंट (Single parent) को अकेले परिवार का फाइनेंश्यिल बर्डन उठाना पड़ता है। कई लोगों को घर और बच्चों से जुड़े सभी खर्चों को पूरा करने के लिए एक ही आय पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में घर और काम के बीच संतुलन बनाए रखने में और भी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। भावनात्मक परेशानियां सिंगल पेरेंटिंग (Single parenting) में सिर्फ पैसा ही चिंता का कारण नहीं है बल्कि इमोशनल प्रॉब्लम्स भी समस्या का कारण बन सकती है। अकेले सब कुछ मैनेज करने से अकेलेपन, तनाव और थकावट की भावनाएं पैदा हो सकती हैं। इसके साथ ही सामाजिक दबाव और निर्णय इन भावनाओं को और बढ़ा सकते हैं। संतुलन बनाना सिंगल पेरेंट्स के लिए घर, बच्चों और खुद के कामों को खुद ही संतुलित करना पड़ता है। यह संतुलन बनाए रखना बहुत मुश्किल है। कई सिंगल पेरेंट्स इन जिम्मेदारियों के कारण अपने बच्चों के साथ ज्यादा समय नहीं बिता पाते हैं। इसके साथ ही सिंगल पैरेंट फैमिली (Single parent family) में बच्चे भी कई तरह की समस्याओं और स्ट्रेन का अनुभव करते हैं। वो जल्दी बड़े हो जाते हैं, जिम्मेदारियों को समझते हैं और अपने इमोशंस को खुद हैंडल करना सीख जाते हैं। सपोर्ट नेटवर्क सिंगल पेरेंटिंग (Single parenting) में सपोर्ट सिस्टम होना बहुत जरूरी है। दोस्त, कम्युनिटी ग्रुप, फैमिली आदि उन्हें इमोशनल और प्रैक्टिकल सपोर्ट प्रदान कर सकते हैं। बच्चों की देखभाल से लेकर चुनौतीपूर्ण दिन और आपकी बात सुनने तक, ये सपोर्ट नेटवर्क होना आवश्यक हैं। लेकिन, अगर सही स्पोर्ट सिस्टम न हो, तो इससे जीवन मुश्किल और तनावपूर्ण हो सकता है। इसे भी पढ़ें: रात में देर तक जागने वाले लोगों में बढ़ सकता है डिप्रेशन का खतरा: स्टडी रूढ़िवादिता का सामना करना सिंगल पैरेंट फैमिली (Single parent family) को समाज अधूरा मानता है। इस सोच से उस परिवार को नुकसान होता है और उनके लिए ऐसी सोच समस्याभरी हो सकती है। लोग ऐसे परिवारों को गलत नजर से देखते हैं और गलत तरीके से ही जज करते हैं। लेकिन, एक सिंगल पैरेंट फैमिली (Single parent family) किसी भी अन्य परिवार की तरह ही पालन-पोषण करने वाला, प्यार करने वाला और पूर्ण हो सकता है। सिंगल पेरेंटिंग (Single parenting) चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सही इमोशनल और फाइनेंशियल स्ट्रेटेजीज के साथ, यह अच्छा और मैनेजेबल अनुभव है। एक अच्छा सपोर्ट सिस्टम बनाकर, खुद का ध्यान रखकर, और अपने फाइनेन्सीज को मैनेज कर के आप अपने और अपने बच्चे दोनों के लिए एक अच्छा वातावरण बना सकते हैं। याद रखें, यह सब कुछ सही ढंग से करने के बारे में नहीं है, बल्कि उस बैलेंस को खोजने के बारे में है, जिससे आप और आपका परिवार एक सामान्य परिवार की तरह अच्छे से जीवन बिता सके। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अगर आपको इसके बारे में अधिक जानकारी चाहिए तो आप सही वेबसाइट्स पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi  Single parenting #Singleparenting #Singleparentfamily #Singleparent #parent

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Mango

डायबिटीज और हार्ट पेशेंट के लिए आम से जुड़ी जरूरी जानकारी

आम जिसे फलों का राजा कहा जाता है। यह न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में पसंद किया जाता है। इसकी मीठास और स्वाद के कारण इसे विशेष महत्व प्राप्त है और इसके अनेक स्वास्थ्य लाभ भी हैं। आम का सेवन सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि यह हमारे शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी प्रदान करता है। इस लेख में हम आम के लाभ, इसके पोषक तत्वों और खासकर डायबिटीज और हार्ट पेशेंट के लिए इसके लाभों के बारे में चर्चा करेंगे। आम में मौजूद पोषक तत्व आम में कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद हैं। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च सर्विस (USDA) के अनुसार 165 ग्राम आम में निम्नलिखित पोषक तत्व पाए जाते हैं: कैलोरी: 99प्रोटीन: 1.4 ग्रामफैट: 0.6 ग्रामकार्बोहाइड्रेट्स: 25 ग्रामशुगर: 22.5 ग्रामफाइबर: 2.6 ग्रामविटामिन C: 67%कॉपर: 20%फोलेट: 18%विटामिन A: 10%विटामिन E: 10%पोटैशियम: 6%ये सभी तत्व शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक होते हैं। हालांकि, आम का सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए, क्योंकि अधिक सेवन से शारीरिक समस्याएँ हो सकती हैं। गर्मियों में आम के लाभ गर्मियों में आम का सेवन कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार, आम शरीर को ठंडक प्रदान करने में मदद करता है और लू या अत्यधिक गर्मी से बचाव करता है। आम का जूस शरीर को हाइड्रेटेड रखता है और शरीर का तापमान कम करने में मदद करता है। इसके अलावा, अगर बुखार हो, तो कच्चे आम को उबालकर शरीर पर लगाने से तापमान में कमी आ सकती है। आम का सेवन कैसे करें कच्चा आम: गर्मियों में कच्चे आम का सेवन विशेष रूप से किया जाता है। कच्चे आम को भूनकर उसमें नमक और भुने जीरे का पाउडर डालकर शिकंजी बनाया जा सकता है, जो शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है।पका हुआ आम: पके आम का सेवन ताजे रूप में किया जा सकता है, या इसे दूध और ड्राई फ्रूट्स के साथ मिलाकर स्मूदी बनाई जा सकती है। डायबिटीज पेशेंट के लिए आम डायबिटीज (Diabetics) पेशेंट के लिए आम का सेवन एक भ्रमपूर्ण विषय रहा है, क्योंकि आम में शुगर की मात्रा अधिक होती है। लेकिन हार्टलैंड इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ एंड एजुकेशन द्वारा किए गए एक शोध में यह पाया गया कि संतुलित मात्रा में आम का सेवन ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। शोध में यह भी सामने आया कि आम में मौजूद फाइबर और मैंगिफेरिन डायबिटीज के मरीजों के लिए लाभकारी हैं और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, डायबिटीज के मरीजों को आम का सेवन डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए। हार्ट पेशेंट के लिए आम आम में पोटैशियम और मैग्नेशियम जैसे तत्व होते हैं, जो दिल और रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखते हैं। नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार, आम में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स, विशेष रूप से मैंगिफेरिन, हृदय की सेहत के लिए लाभकारी होते हैं। यह रक्तचाप को नियंत्रित करने, कोलेस्ट्रॉल स्तर को संतुलित रखने और हृदय संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद करता है। हालांकि, हार्ट पेशेंट को आम का सेवन करने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है। इसे भी पढ़ें: पाचन को सही बनाए रखने के साथ ही यह हैं बेल के 7 हेल्थ बेनेफिट्स आम से जुड़ी कुछ खास जानकारियाँ आम न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि इसके स्वास्थ्य लाभ भी अद्वितीय हैं। यह हमें विभिन्न पोषक तत्व प्रदान करता है, जो शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक हैं। गर्मी के मौसम में आम का सेवन शरीर को ठंडक प्रदान करता है और लू से बचाता है। डायबिटीज और हार्ट पेशेंट के लिए भी आम का सेवन संतुलित मात्रा में फायदेमंद हो सकता है, लेकिन डॉक्टर की सलाह पर यह सेवन करना जरूरी है। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi  Depression in people who sleep late at night#Mango #Mangobenefits #diabetics #heartpatients

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Depression in people who sleep late at night

रात में देर तक जागने वाले लोगों में बढ़ सकता है डिप्रेशन का खतरा: स्टडी

सुबह जल्दी उठना न केवल हमारे शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद पाया गया है। सुबह जल्दी उठने से हमें पॉजिटिविटी मिलती है और पूरा दिन अच्छे से गुजरता है। यही नहीं जल्दी दिन की शुरुआत करने से काम करने में लिए ज्यादा समय मिलता है। हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार रात को देरी से सोने वाले और सुबह देरी से उठने वाले लोगों में डिप्रेशन (Depression) की संभावना अधिक रहती है। आइए जानें कि रात को देर से सोने वाले लोगों में डिप्रेशन (Depression in people who sleep late at night) के बारे में हुई स्टडी क्या कहती है? यह भी जानें कि रात को देर से सोने वाले लोगों को और क्या समस्याएं हो सकती हैं? रात को देर से सोने वाले लोगों में डिप्रेशन (Depression in people who sleep late at night) : पाएं जानकारी मायोक्लिनिक (Mayoclinic) की मानें तो डिप्रेशन (Depression) एक मूड डिसऑर्डर है जिसके कारण रोगी को लगातार उदासी और किसी चीज में रूचि न होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके कारण रोगी की सोच, व्यवहार और फीलिंग्स में बदलाव हो सकता है, जिससे कई इमोशनल व फिजिकल प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। एक नई स्टडी से यह पता चलता है कि रात को देर से सोने वाले लोगों में डिप्रेशन (Depression in people who sleep late at night)  का खतरा अधिक रहता है।  इसका कारण खराब जीवनशैली (Bad lifestyle) को माना गया है। पाएं इसके बारे में पूरी जानकारी।  रात को देर से सोने वाले लोगों में डिप्रेशन के बारे में क्या कहती है स्टडी? यह स्टडी यूनिवर्सिटी ऑफ सरी रिसर्चर्स द्वारा की गयी है और इसमें 546 यूनिवर्सिटी के छात्रों को शामिल किया गया था। इसमें इन छात्रों की नींद संबंधी आदतों, माइंडफुलनेस,  चिंता, एल्कोहॉल का इस्तेमाल और मेन्टल हेल्थ आदि के बारे में जानकारी इकठ्ठा की गयी। इस स्टडी में यह पाया गया कि रात को देर से सोने वाले लोगों में डिप्रेशन (Depression in people who sleep late at night)  यानी डिप्रेशन की संभावना अधिक रहती है। जबकि, जो लोग रात को जल्दी सोते हैं और सुबह जल्दी उठते हैं, उनमे डिप्रेशन (Depression) और अन्य कई समस्याओं का रिस्क कम रहता है।  इसमें ऐसा पाया गया है रात को जल्दी सोने वाले लोगों में डिप्रेशन (Depression) का कारण नींद की लो क्वालिटी, एल्कोहॉल का सेवन और माइंडफुलनेस की कमी यानी खराब जीवनशैली (Bad lifestyle) हो सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन चीजों पर फोकस करके और हेल्दी लाइफस्टाइल को अपना कर डिप्रेशन (Depression) के रिस्क को कम करने में मदद मिल सकती है खासतौर पर वयस्कों में। यह स्टडी डिप्रेशन के रिस्क को कम करने के लिए नए तरीकों को ढूंढने में मदद कर सकती है।  इसे भी पढ़ें: पाचन को सही बनाए रखने के साथ ही यह हैं बेल के 7 हेल्थ बेनेफिट्स रात को देर से सोने वाले लोगों में और कौन सी हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं? जो लोग रात को देर से सोते हैं उन्हें डिप्रेशन (Depression) ही नहीं बल्कि कई अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं, जो इस प्रकार हैं:  नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi  Depression in people who sleep late at night #Depression #Depressioninpeoplewhosleeplateatnight #badlifestyle #earlybird

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Benefits of Bael

Benefits of Bael: पाचन को सही बनाए रखने के साथ ही यह हैं बेल के 7 हेल्थ बेनेफिट्स

बेल (Bael) एक ऐसा फल है, जो भारत से संबंधित हैं। इसका इस्तेमाल खाना बनाने और मेडिसिनल उद्देश्यों से किया जाता है। इसे बुड एप्पल के नाम से भी जाना जाता है। इसके फल के जूस को इसके गूदे के रस को निकाल कर और पानी और अन्य फ्लेवेर्स को मिला कर बनाया जाता है। इस पेड़ के फल, जड़ों, पत्तों आदि का इस्तेमाल दवाईयों में किया जाता है। बेल (Bael) का प्रयोग कब्ज, डायरिया, डायबिटीज और अन्य कंडीशंस में किया जाता है। लेकिन, इसके इस्तेमाल को लेकर कोई साइंटिफिक एविडेंस मौजूद नहीं है। गर्मी के मौसम में इसे हेल्थ के लिए खासतौर पर फायदेमंद माना गया है। आइए जानें बेल के बेनेफिट्स (Benefits of Bael) के बारे में। बेल के बेनेफिट्स (Benefits of Bael): पाएं जानकारी करंट रिसर्च इन एग्रीकल्चर और फार्मिंग (Current Research in Agriculture and Farming) के अनुसार बेल (Bael) का फल मीठ, खुशबूदार और बहुत स्वादिष्ट होता है। इसके फल से कैंडी, पंजीरी, टॉफी, जैम आदि उत्पाद बनाए जाते हैं। हेल्थ के लिए यह बहुत फायदेमंद हैं और बेल के बेनेफिट्स (Benefits of Bael) इस प्रकार हैं: डाइजेशन को सुधारे बेल (Bael) और बेल जूस (Bael juice) में बहुत अधिक मात्रा में डायट्री फाइबर और पेक्टिन होते हैं, जो बाउल मूवमेंट को रेगुलेट करने और डाइजेस्टिव सिस्टम को हेल्दी बनाए रखने में मदद करते हैं। यह एक नेचुरल लैक्सटिव की तरह काम करता है, जिससे कब्ज से राहत मिलती है और पेट सही रहता है।  एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज बेल (Bael) में एंटी-इंफ्लेमेटरी (Anti-inflammatory) कंपाउंड्स होते हैं जैसे टैनिन्स, फ्लेवोनोइड्स आदि। इससे शरीर को सूजन से राहत पाने में मदद मिलती है। बेल के बेनेफिट्स (Benefits of Bael) और भी कई हैं।  इम्युनिटी बढाए बेल (Bael) विटामिन सी और ए व अन्य एंटीऑक्सीडेंट्स (Antioxidants) से भरपूर होता है। यह न्यूट्रिएंट्स इम्यून सिस्टम को मजबूत रखते हैं और इसके साथ ही इससे ब्लड सेल्स की प्रोडक्शन बढ़ती है। यही नहीं, इससे शरीर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से भी बचाव होता है।  डायबिटीज से बचाव बेल (Bael) में मौजूद कंपाउंड जैसे रूटीन और फेरुलिक एसिड ब्लड शुगर लेवल को रेगुलेट बनाए रखते हैं। यह कंपाउंड इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारते हैं और ब्लड ग्लूकोज लेवल को सही बनाए रखते हैं। यही नहीं, इसकी एंटी-इंफ्लेमेटरी (Anti-inflammatory)और एंटीमाइक्रोबाइल प्रॉपर्टीज रेस्पिरेटरी ट्रेक्ट को आराम पहुंचाने में मददगार हैं और यह कई रेस्पिरेटरी कंडीशंस जैसे अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के लक्षणों को कम करती हैं। स्किन हेल्थ को सुधारे बेल जूस (Bael juice) में मोजूद एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटी-इंफ्लेमेटरी (Anti-inflammatory) गुण, विटामिन्स आदि ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से स्किन को बचाते हैं। यही नहीं इससे कोलेजन के उत्पादन को बढ़ावा मिलता है, स्किन की इलास्टिसिटी सुधरती है और प्रीमेच्योर एजिंग से बचाव होता है। यह फल आयरन का भी अच्छा स्त्रोत है और यह प्राकृतिक रूप से ब्लड को साफ करता है। एनीमिया से पीड़ित लोगों के लिए यह फल बहुत फायदेमंद है। हार्ट हेल्थ को सपोर्ट करे बेल के बेनेफिट्स (Benefits of Bael) हार्ट हेल्थ से भी संबंधित हैं। बेल (Bael) और बेल जूस (Bael juice) में पोटैशियम और अन्य लाभदायक कंपाउंड्स होते हैं, जो ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल लेवल को सही बनाए रखने में हेल्प करते हैं। यह कंपाउंड हार्ट फंक्शन को सुधारते हैं और कार्डियोवैस्कुलर डिजीज के रिस्क को कम करते हैं। इसे भी पढ़ें: ग्रीन टी पीने से होते हैं ये 6 अद्भुत फायदे, जानें कैसे बनाएं अपने दिन को हेल्दी शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकाले  बेल जूस (Bael juice) नेचुरल डेटोक्सिफाइर की तरह काम करता है, जो शरीर से टॉक्सिन्स यानी हानिकारक तत्वों को बाहर निकालता है। इसमें फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिससे डाइजेस्टिव सिस्टम के माध्यम से वेस्ट प्रोडक्ट्स को शरीर से बाहर निकालने में मदद मिलती है। बेल के बेनेफिट्स (Benefits of Bael) यही खत्म नहीं होते। इसमें नेचुरल एंटीमाइक्रोबाइल प्रॉपर्टीज होती है, जिससे हानिकारक बैक्टीरिया और कवक की ग्रोथ कम होती है। गर्मियों में बेल जूस (Bael juice) को नियमित रूप से शामिल करने से प्राकृतिक रूप से स्वास्थ्य को बनाए रखने और बढ़ाने में मदद मिल सकती है। नोट:– यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi  Benefits of Bael #Anti-inflammatory #BenefitsofBael #Bael  #Baeljuice

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Benefits of Green Tea

ग्रीन टी पीने से होते हैं ये 6 अद्भुत फायदे, जानें कैसे बनाएं अपने दिन को हेल्दी

ग्रीन टी (Green Tea) चीन और जापान में हजारों सालों से एक प्रसिद्ध ड्रिंक और इसके साथ ही पारंपरिक औषधि है। आज ग्रीन टी हर देश में बड़ी मात्रा में इस्तेमाल होती है और आसानी से उपलब्ध है। यह कई फ्लेवर्ड और स्वीटेनड किस्मों के साथ-साथ ग्रीन टी पाउडर और लूज लीफ टी के रूप में भी मिलती है। यानी, आप जिस भी रूप में इसका इस्तेमाल करना चाहते हैं, वो बाजार में आपको मिल जाएगी। ऐसा माना जाता है कि ग्रीन टी (Green Tea) कॉग्निशन और वेट मैनेजमेंट के सपोर्ट में मदद करती है और इसके साथ ही यह एनर्जी को भो बूस्ट करने में भी फायदेमंद है। आइए जानें ग्रीन टी के बेनेफिट्स (Benefits of Green Tea) के बारे में विस्तार से। ग्रीन टी के बेनेफिट्स (Benefits of Green Tea): पाएं जानकारी क्लीवलैंडक्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार ग्रीन टी (Green Tea) के कई फायदे हैं, जिनमें एंग्जायटी कम करना, कोलेस्ट्रॉल घटाना, ब्रेन हेल्थ को प्रोटेक्ट करना, हड्डियों को हेल्दी बनाना और सम्पूर्ण रूप से हेल्दी रहने में मदद करना आदि शामिल हैं। ग्रीन टी के बेनेफिट्स (Benefits of Green Tea) इस प्रकार हैं: 1. फोकस बढ़ाए ग्रेन टी में कई नेचुरल स्टिमुलैंट्स होते हैं, जिसमें कैफीन भी शामिल हैं। यह फोकस और एकाग्रता को बढ़ाने में फायदेमंद है। हालांकि, इसमें कैफीन की मात्रा कॉफी के समान ज्यादा नहीं होती। ग्रीन टी (Green Tea) के सेवन से मूड को अच्छा करने वाले केमिकल बढ़ते हैं, जिसमे डोपामाइन और सेरोटोनिन शामिल हैं।इसके साथ ही यह एमिनो एसिड एल-थेनिंग का अच्छा स्त्रोत है, जिसमें रिलेक्सिंग इफेक्ट होते हैं। यानी यह रिलेक्स होने में भी मदद करती है। 2. मेटाबॉलिज्म बूस्ट करे शोध यह बताते हैं कि वजन कम करने में ग्रीन टी (Green Tea) फायदेमंद हो सकती है। यानी, ग्रीन टी के बेनेफिट्स (Benefits of Green Tea) मेटाबॉलिज्म से संबंधित है। ऐसा माना जाता है कि इसका कारण इसमें मौजूद कैटेचिन जैसे प्लांट कंपाउंड्स और नेचुरल थर्मोजेनिक प्रॉपर्टीज हैं। 3. ब्लड शुगर को करे कंट्रोल कुछ स्टडीज यह बताती हैं कि ग्रीन टी (Green Tea) से इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधरती है और इसके कारण ब्लड शुगर (Blood Sugar) मैनेजमेंट पर अच्छा प्रभाव पड़ता है, जिससे डायबिटीज का जोखिम कम हो सकता है। 4. हार्ट डिजीज का लो रिस्क ग्रीन टी के बेनेफिट्स (Benefits of Green Tea) में हार्ट डिजीज के जोखिम को कम करना शामिल है। शोध बताते हैं कि ग्रीन टी से हार्ट डिजीज और इससे जुडी समस्याओं जैसे स्ट्रोक आदि की संभावना को कम करने में मददगार है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसमें प्रोटेक्टिव इफेक्ट्स होते हैं जो आर्टेरियल डैमेज को कम कर सकते हैं। 5. हड्डियों के लिए फायदेमंद ग्रीन टी (Green Tea)  बोन डेंसिटी को मैंटेन करने में मददगार है, जिसके कारण फ्रैक्चर का रिस्क कम हो सकता है। ऐसा माना जाता है कि यह इफेक्ट इस चाय में मौजूद पॉलीफेनॉल (Polyphenol) के कारण होता है। इसे भी पढ़ें: कोलकाता में कोरोनावायरस HKU1 के मामले की पुष्टि: यहां जानें इसके लक्षण और बचाव के उपाय 6. पेट के लिए लाभदायक ग्रीन टी (Green Tea) में पॉलीफेनॉल (Polyphenol) जैसे प्लांट कंपाउंड्स होते हैं, जो एब्जॉर्ब हुए बिना लार्ज इंटेस्टाइन में चले जाते हैं, जहां उन्हें गट बैक्टीरिया द्वारा ब्रेक डाउन कर दिया जाता है। इस तरह वे गट के इस हिस्से में रहने वाले फायदेमंद  बैक्टीरिया के लिए ईंधन का सोर्स प्रदान करते हैं और गट फंक्शन में सुधार करने व इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने मदद मिलती है। ग्रीन टी (Green Tea) पॉलीफेनॉल (Polyphenol) नामक कंपाउंड शरीर को बीमारियों से बचाने के लिए जाने जाते हैं और स्वस्थ, संतुलित आहार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड फलों, सब्जियों और अन्य अनप्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की एक वाइड रेंज में पाए जाते हैं। ग्रीन टी (Green Tea) के कई हेल्थ बेनेफिट्स हैं, जिनमें से अधिकांश का श्रेय इस बात को जाता है कि यह अधिकतर अनप्रोसेस्ड होती है तथा इन प्लांट कंपाउंड्स से भरपूर होती है। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi  Benefits of Green Tea #GreenTea  #BenefitsofGreenTea #Polyphenol

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Human Coronavirus HKU1

कोलकाता में कोरोनावायरस HKU1 के मामले की पुष्टि: यहां जानें इसके लक्षण और बचाव के उपाय

हाल ही में कोलकोता में एक महिला में ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 (Human Coronavirus HKU1) या एचसीओवी-एचकेयू1 (HCoV-HKU1) का निदान हुआ है। यह एक सांस संबंधी वायरस है, जिसके लक्षणों में सर्दी-जुकाम आदि शामिल है। गंभीर मामलों में यह निमोनिया (Pneumonia) का कारण भी बन सकता है। हालांकि, डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस वायरस से किसी को डरने की जरूरत नहीं है लेकिन इसे लेकर सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। डॉक्टर्स की मानें, तो मरीज महिला में सर्दी-जुकाम और खांसी की समस्या पिछले लगभग 15 दिनों से थी लेकिन अभी उसकी कंडीशन ठीक है। बहुत से लोगों को इस वायरस के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन इसके बारे में जानकारी होना आवश्यक है। जानिए ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 (Human Coronavirus HKU1) या एचसीओवी-एचकेयू1 (HCoV-HKU1) के बारे में विस्तार से।  ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 (Human Coronavirus HKU1) क्या है? अल्बामा पब्लिक हेल्थ (Alabama Public Health) के अनुसार सामान्य ह्यूमन कोरोना वायरसिस में टाइप्स 229इ, एनएल63, ओसी43 और एचकेयू1 शामिल हैं। इनके कारण रोगी को माइल्ड से लेकर गंभीर अपर.रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इलनेस बीमारियां महसूस हो सकती हैं जैसे सामान्य सर्दी-जुकाम। अधिकतर लोग अपने जीवन में कभी न कभी इन वायरसिस से संक्रमित हो सकते हैं। यह बीमारियां आमतौर भी कम समय तक ही रहती हैं। अन्य हयूमन कोरोनावायरसिस की तरह ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 (Human Coronavirus HKU1) भी लो रेस्पिरेटरी ट्रेक्ट बीमारियों का कारण बन सकता है जैसे निमोनिया (Pneumonia) और ब्रोंकाइटिस आदि। कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों, छोटे बच्चों, बूढ़ों और कार्डियोपल्मोनरी डिजीज से पीड़ित लोगों में यह रोग अधिक सामान्य है। ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 के लक्षण क्या हैं?  ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 (Human Coronavirus HKU1) के सामान्य लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं: इन लक्षणों के अलावा रोगी को अन्य लक्षण भी नजर आ सकते हैं। जैसा की पहले ही बताया गया है कि गंभीर स्थितियों में यह समस्या निमोनिया (Pneumonia) और ब्रोंकाइटिस की वजह बन सकती हैं। यह लक्षण नजर आने पर सावधानी बरते और जरूरत पड़ने पर मेडिकल हेल्प लेना भी आवश्यक है। ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू 1 का उपचार  ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 या एचसीओवी-एचकेयू1 (HCoV-HKU1) के उपचार या सुरक्षा के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है और न ही इसके कारण होने वाली बीमारियों का कोई उपचार है। इससे पीड़ित अधिकतर लोग खुद ही ठीक हो जाते हैं। लेकिन, इसके लक्षणों से राहत पाने के लिए डॉक्टर निम्नलिखित चीजों की सलाह दे सकते हैं: इसे भी पढ़ें: तुलसी का पानी: जानें क्या हैं रोजाना सुबह इसे पीने के 6 आश्चर्यकारी फायदे ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 से बचाव यह वायरस (Virus) संक्रमित व्यक्ति से दूसरे तक फैल सकता है। यह उनकी खांसी और छींक के माध्यम से फैलता है या क्लोज कांटेक्ट जैसे संक्रमित व्यक्ति को छूने या हाथ मिलाने से भी फैल सकता है। इस वायरस के कारण साल के किसी भी समय लोग संक्रमित हो सकते हैं, लेकिन पतछड़ और सर्दी के मौसम में इसकी संभावना बढ़ जाती है। छोटे बच्च्चों में भी इसकी संभावना अधिक रहती है। आप इन चीजों का ध्यान रख कर ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 (Human Coronavirus HKU1) से बच सकते हैं:  अगर आपके मन में इस बीमारी के बारे में कोई भी सवाल या चिंता है, तो डॉक्टर की सलाह लेना न भूलें। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi  Human Corona virus HKU1 #HumanCoronavirusHKU1 #HCoV-HKU1 #Pneumonia #coronavirus

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Foods To Avoid Empty Stomach

जानिए इन 7 फूड्स के बारे में जिन्हें खाली पेट खाने से करना चाहिए नजरअंदाज

व्यस्त जीवनशैली के कारण हम में से अधिकतर लोग नाश्ते स्किप कर देते हैं, जो पूरी तरह से गलत है। ब्रेकफास्ट हमारे दिन का सबसे महत्वपूर्ण मील है, क्योंकि इसमें हम 10 से 12 घंटे बाद कुछ खाते हैं। जब इतने अंतर के बाद जब हम कुछ खाते हैं, तो सावधानियां बतरनी बहुत जरूरी हैं। दिन की शुरूआत में जो चीज सबसे पहले आपके पेट में जाती है, वही तय करती है कि आपका बाकी दिन कैसा बीतेगा? क्या आप जानते हैं कि जब हम खाली पेट (Empty Stomach) कुछ फूड्स का सेवन करते हैं, तो चाहे वो हेल्दी हों लेकिन पेट और डाइजेस्टिव प्रॉब्लम्स का कारण बन सकती हैं? जबकि कुछ फूड्स खाली पेट खाना सेहत के लिए अच्छा होता है। आइए जानें कौन से हैं वो फूड्स जिन्हें खाली पेट नहीं खाना चाहिए (Foods To Avoid Empty Stomach)? फूड्स जिन्हें खाली पेट नहीं खाना चाहिए (Foods To Avoid Empty Stomach): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार जब बात कई सामान्य नाश्तों की आती है, तो उनमें प्रोटीन और फाइबर की कमी होती है, जिससे आपको खाने के अगले मौके से पहले ही भूख लगने लगती है। वहीं, दूसरी चीजें फैट से भरी होती हैं और पेट को भरा और असहज महसूस करा सकती हैं। ऐसे में इस बात का पता होना चाहिए कि कौन से हैं वो फूड्स जिन्हें खाली पेट नहीं खाना चाहिए (Foods To Avoid Empty Stomach)?  1. खट्टे फल (Citrus fruits) खट्टे फल (Citrus fruits) खाने में स्वादिष्ट होते हैं, लेकिन यह कई बार समस्या के कारण भी बन सकते हैं। खट्टे फल (Citrus fruits) जैसे संतरा, निम्बू, चकोतरा आदि को खाली पेट (Empty Stomach) खाने से बचना चाहिए। इनमें सिट्रिक एसिड बहुत अधिक मात्रा में होते हैं, जिससे पेट में एसिडिटी बढ़ सकती है। सुबह खाली पेट इन्हें खाने से पेट में एसिडिटी बढ़ती है जिससे हार्टबर्न और अन्य कई समस्याएं हो सकती हैं।  2. चाय (Tea) अधिकतर लोग खाली पेट (Empty Stomach) सुबह उठते ही चाय (Tea) पीना पसंद करते हैं। इसी से उनके दिन की शुरुआत होती है। लेकिन, खाली पेट इसे पीना हानिकारक हो सकता है। स्टडीज की मानें तो अधिकतर लोग सुबह खाली पेट (Empty Stomach) चाय (Tea) पीने से परेशानियों का सामना कर सकते हैं। ऐसा भी माना गया है कि खाली पेट इसे पीने से जी मिचलाने और हार्टबर्न जैसे समस्याएं हो सकती हैं। इसका कारण यह है कि इसके टैनिन के कारण पैंक्रियाज ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन रिलीज करता है। इस प्रक्रिया से थकान और भूख बढ़ सकती है। 3. मसालेदार आहार (Spicy food) सुबह खाली पेट (Empty Stomach) मसालेदार आहार का सेवन करने से भी बचना चाहिए। यह मसालेदार आहार पेट की लायनिंग में समस्या का कारण बन सकता है। इससे डायजेशन प्रभावित हो सकता है और इसके साथ ही इससे कुछ अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं। 4. कॉफी (Coffee) कॉफी उन प्रसिद्ध पेय पदार्थों में से एक है, जिसे बहुत से लोग सुबह उठते ही पीना पसंद करते हैं। लेकिन, यह बिलकुल भी हेल्दी नहीं है। कॉफी में कैफीन होता है जिसे इसकी अलर्टनेस को बढ़ाने वाले गुणों के लिए जाना जाता है। लेकिन, जब इसे खाली पेट (Empty Stomach) पिया जाता है, जो इसका प्रभाव उल्टा भी हो सकता है। इसके कारण लोग एंग्जायटी और घबराहट महसूस कर सकते हैं। 5. दही (Yogurt) दही खाने का एक हेल्दी विकल्प है, क्योंकि इसमें प्रोबायोटिक्स और कैल्शियम होता है। लेकिन, जब इसे खाली पेट (Empty Stomach) खाया जाता है तो पेट का एसिडिक एन्वॉयर्नमेंट हेल्दी गट बैक्टीरिया को नष्ट कर सकता है, जिससे उसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू कम हो सकती है। 6. तला हुआ भोजन (Oily food) पूरी, पकोड़े, भटूरे जैसे पसंदीदा नाश्ते को भी खाली पेट (Empty Stomach) खाना नुकसानदायक हो सकता है। तले हुए आहार में फैट कंटेंट अधिक होता है जिससे ब्लोटिंग व अपच जैसी परेशानियां हो सकती है और सुस्ती आ सकती है। इसे भी पढ़ें: तुलसी का पानी: जानें क्या हैं रोजाना सुबह इसे पीने के 6 आश्चर्यकारी फायदे 7. अधिक मीठी चीजें (Sugary food) अगर आपको मीठी चीजें खाना पसंद है और आप अक्सर मिठाईयां, पेस्ट्रीज या मीठे पेय पदार्थों का सेवन करते हैं, तो ध्यान रखें इन्हें नजरअंदाज करना बहुत जरूरी है। खासतौर पर इन्हें खाली पेट (Empty Stomach) नहीं खाना चाहिए। इससे इंसुलिन और ब्लड शुगर लेवल एकदम से बढ़ सकते हैं। इससे बाद में सुस्ती और थकावट का अनुभव हो सकता है। इसके साथ ही इससे डायरिया होने की संभावना भी बढ़ सकती है। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें।  Latest News in Hindi Today Hindi  Foods To Avoid Empty Stomach #FoodsToAvoidEmptyStomach #EmptyStomach #Citrusfruits #Tea

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Health Benefits Of Curd

रोजाना दही खाने के हैं 7 कमाल के फायदे, लेकिन किस समय खाना है सही?

योगर्ट यानी दही (Curd), दूध के लैक्टिक फेरमेंटशन को कहा जाता है। फेरमेंटशन प्रोसेस के दौरान, दूध में बैक्टीरिया लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में बदल देते हैं, जो दूध को गाढ़ा कर देता है। इसे अपनी स्मूदनेस, फ्रेश और मजेदार स्वाद के लिए जाना जाता है। यह स्वास्थ्यवर्धक और सबसे वैल्युबल थेराप्यूटिक खाद्य पदार्थों में से एक है। यह कैल्शियम, विटामिन बी, विटामिन बी-12 पोटैशियम और मैग्नीशियम से भरपूर होता है। रोजाना अपनी डायट में एक कप दही (Curd) को शामिल करने से कई हेल्थ और ब्यूटी बेनेफिट्स हो सकते हैं। दही (Curd) की कंसिस्टेंसी स्मूद या गाढ़ी हो सकती है। जानें रोजाना दही खाने के हेल्थ बेनेफिट्स (Health benefits of eating yogurt daily) के बारे में। यह भी जानें कि इसे दिन के किस समय खाना चाहिए? रोजाना दही खाने के हेल्थ बेनेफिट्स (Health benefits of eating yogurt daily): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार दही (Curd) बहुत न्यूट्रिशियस होता है और इसे रोजाना खाने से हेल्थ के लिए कई तरह से फायदेमंद है, जैसे इसे खाने से हार्ट डिजीज और ऑस्टियोपोरोसिस का रिस्क कम होता है और वजन को सही बनाए रखने में भी मदद मिलती है। रोजाना दही खाने के हेल्थ बेनेफिट्स (Health benefits of eating yogurt daily) इस प्रकार हैं: 1. पेट के लिए बेहतरीन  दही (Curd) में फायदेमंद बैक्टीरिया के लाइव कल्चर्स होते हैं, जिन्हें प्रोबायोटिक्स (Probiotics) कहा जाता है। यह प्रोबायोटिक्स (Probiotics) पेट के लिए फायदेमंद होते हैं। यह पाचन को सही रखते हैं, पोषक तत्वों के एब्जोर्प्शन में मदद करते हैं और बोवेल मूवमेंट को सही बनाए रखने में मदद करते हैं। 2. इम्युनिटी बढ़ाए दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स (Probiotics) इम्यून सेल्स के प्रोडक्शन को और नेचुरल किलर सेल्स की एक्टिविटी को बढ़ाते हैं। इससे इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद मिलती है और कई इंफेक्शंस व बीमारियों से छुटकारा पाने में मदद मिलती है और इम्यून सिस्टम में सुधार होता है। 3. पाचन को सुधारे दही के बेनेफिट्स (Benefits of yogurt) में पाचन में सुधार शामिल है। दही (Curd) में मौजूद लाइव कल्चर लैक्टोज को ब्रेक डाउन करने में मदद करते हैं और इससे लैक्टोज इनटॉलेरेंस वाले लोगों के लिए इसे पचाना आसान होता है। इसके साथ ही प्रोबायोटिक्स (Probiotics) हेल्दी गट बैक्टीरिया की ग्रोथ में भी फायदेमंद है। इससे डाइजेस्टिव डिसऑर्डर्स जैसे डायरिया, कब्ज आदि का जोखिम कम होता है। 4. न्यूट्रिएंट एब्जोर्प्शन में फायदेमंद दही (Curd) में लैक्टिक एसिड होता है। यह दूध में मौजूद प्रोटीन को ब्रेकडाउन में मदद करता है और कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे मिनरल्स के एब्जोर्प्शन को बढ़ाता है। इससे हड्डियों के स्वास्थ्य और शरीर में न्यूट्रिएंट्स के उपयोग में सुधार करने में मदद मिल सकती है।  5. वजन रहे सही दही के बेनेफिट्स (Benefits of yogurt) में वजन को सही बनाए रखना भी जरूरी है। दही (Curd) में कैलोरीज कम और प्रोटीन अधिक मात्रा में होती है। इससे भूख कम होती है और वजन को सही बनाए रखने में मदद मिल सकती है। अधिक प्रोटीन कंटेंट से लीन मसल मास की डेवलपमेंट में भी हेल्प मिलती है। 6. बोन हेल्थ दही (Curd) कैल्शियम का अच्छा स्त्रोत है। हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाए रखने के लिए यह एक जरुरी मिनरल है। दही के बेनेफिट्स (Benefits of yogurt) में ऑस्टियोपोरोसिस जैसी स्थितियों से बचाव और बोन हेल्थ को सही बनाए रखना शामिल है। 7. हार्ट के लिए अच्छा दही (Curd) में बायोएक्टिव पेप्टिड्स होते हैं जो ब्लड प्रेशर को रेगुलेट रखने और हाइपरटेंशन के जोखिम को कम करने में सहायता करते हैं। इसके साथ ही दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स (Probiotics) को कोलेस्ट्रॉल लेवल में सुधार भी जोड़ा जाता है। यानी इसके फायदों में हार्ट डिजीज के रिस्क को कम करना शामिल है। इसे भी पढ़ें: ब्लैक कॉफी पीने के 8 अद्भुत फायदे: इसे पीकर करें सुबह की शुरुआत दही खाने का सही समय दही खाना सबके लिए फायदेमंद है लेकिन इसे सही मात्रा में ही खाना चाहिए। कुछ खास बीमारियों से पीड़ित लोगों को इसे खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे खाने से उनकी स्थिति बदतर हो सकती है। दही खाने का बेहतरीन समय है सुबह या दोपहर। आयुर्वेदा की मानें तो लंच और डिनर के बाद दही (Curd) खाने से डाइजेशन सही रहता है। रात को इसे खाने से स्लीप साइकिल में समस्या हो सकती है और कई पाचन सम्बन्धी समस्याएं हो सकती हैं।  नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi Health benefits of curd #Healthbenefitsofeatingcurddaily #Probiotics #Benefitsofcurd #curd

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