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CJP को लेकर कांग्रेस के रुख में बदलाव के संकेत? राहुल गांधी की हाई टी के लिए अभिजीत दिपके को मिला न्योता

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से आयोजित हाई टी बैठक के लिए कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दिपके को आमंत्रित किए जाने से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इसे कांग्रेस और CJP के बीच संवाद बढ़ने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस निमंत्रण से दोनों के बीच किसी औपचारिक राजनीतिक गठबंधन या रणनीतिक समझौते की पुष्टि नहीं होती। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह बैठक विपक्षी गठबंधन INDIA के नेताओं के साथ-साथ नागरिक समाज और छात्र संगठनों से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। राहुल गांधी की हाई टी बैठक का क्या था उद्देश्य? यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इन मुद्दों पर अलग-अलग छात्र संगठनों, नागरिक समूहों और विपक्षी दलों ने अपनी आपत्तियां उठाई हैं। ऐसे में हाई टी बैठक को विभिन्न समूहों के बीच संवाद और संभावित समन्वय बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस और CJP के बीच पहले क्यों थी दूरी? मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस के भीतर CJP को लेकर पहले कुछ आरक्षण थे। पार्टी के एक वर्ग में इस संगठन के आम आदमी पार्टी (AAP) से संभावित संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। हालांकि, हाल के विरोध प्रदर्शनों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के बीच कांग्रेस की ओर से अभिजीत दिपके तक पहुंचने की खबर सामने आई है। यह घटनाक्रम दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावना दिखाता है, लेकिन कांग्रेस की आधिकारिक नीति में व्यापक बदलाव हुआ है या नहीं, यह स्पष्ट होने के लिए पार्टी की ओर से औपचारिक बयान जरूरी होगा। CJP के प्रदर्शनों पर राहुल गांधी का रुख राहुल गांधी हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शन कर रहे युवा नेताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों को भी उठाया है। विपक्षी दलों और विभिन्न नागरिक समूहों की ओर से चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और विरोध प्रदर्शन के अधिकार जैसे मुद्दों पर आवाज उठाई जा रही है। इन घटनाक्रमों के बीच CJP के नेता को आमंत्रित किया जाना विपक्षी नेताओं और स्वतंत्र रूप से सक्रिय युवा समूहों के बीच संपर्क बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। अभिजीत दिपके ने क्या संकेत दिया? रिपोर्टों के अनुसार, अभिजीत दिपके ने कांग्रेस की ओर से संपर्क किए जाने पर आभार जताया। साथ ही, CJP की स्वतंत्र पहचान बनाए रखने पर भी जोर दिया। CJP खुद को किसी राजनीतिक दल के विस्तार के बजाय एक स्वतंत्र दबाव समूह के रूप में पेश करना चाहता है। ऐसे में कांग्रेस के साथ संवाद बढ़ने के बावजूद संगठन की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और भविष्य की रणनीति महत्वपूर्ण बनी रहेगी। विपक्षी एकजुटता के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम? CJP ने हाल के मुख्य निर्वाचन आयुक्त और SIR विरोधी प्रदर्शनों के दौरान युवा कार्यकर्ताओं की भागीदारी के जरिए सार्वजनिक चर्चा में जगह बनाई है। कांग्रेस की ओर से दिपके को आमंत्रित किया जाना इस संभावना की ओर संकेत करता है कि विपक्षी दल पारंपरिक राजनीतिक संगठनों के साथ-साथ छात्र समूहों और नागरिक समाज की आवाजों से भी संवाद बढ़ाना चाहते हैं। हालांकि, किसी बैठक का निमंत्रण अपने आप में साझा राजनीतिक कार्यक्रम, चुनावी गठबंधन या भविष्य के संयुक्त आंदोलन का प्रमाण नहीं है। इसके वास्तविक राजनीतिक महत्व का आकलन आगे होने वाली बातचीत और दोनों पक्षों के आधिकारिक रुख से किया जा सकेगा। आगे क्या होगा? फिलहाल, कांग्रेस और CJP के बीच संपर्क बढ़ने की खबर ने राजनीतिक बहस को नया विषय दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह संवाद केवल एक बैठक तक सीमित रहता है या दोनों पक्ष चुनावी प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आगे भी साथ काम करते हैं। Source – The Indian Express, Jansatta और The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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महिलाओं की आजीविका योजना के फंड पर केंद्र से राज्यों की मांग, BJP शासित राज्य भी हुए शामिल

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026: महिलाओं की आजीविका और शहरी गरीबों से जुड़ी योजनाओं के लिए फंडिंग को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और त्रिपुरा ने दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM) के तहत वित्तीय सहायता और योजना के भविष्य को लेकर स्पष्टता की मांग की है। इन राज्यों में भाजपा, कांग्रेस और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) से जुड़ी सरकारें शामिल हैं। एक करोड़ से अधिक महिलाओं की आजीविका पर चिंता DAY-NULM के तहत पिछले एक दशक में एक करोड़ से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जोड़ा गया और 10 लाख से ज्यादा समूह बनाए गए। राज्यों की चिंता है कि फंडिंग को लेकर अनिश्चितता बनी रहने से इन समूहों की गतिविधियां, बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच और संस्थागत ऋण प्राप्त करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। भाजपा शासित राज्यों ने भी उठाई फंडिंग की मांग महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और त्रिपुरा सहित भाजपा शासित राज्यों ने भी केंद्र से वित्तीय सहायता जारी करने और योजना के भविष्य की रूपरेखा स्पष्ट करने का आग्रह किया है। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार और तमिलनाडु की TVK सरकार ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। इससे स्पष्ट है कि शहरी आजीविका योजनाओं की निरंतरता का मुद्दा अलग-अलग राजनीतिक दलों की राज्य सरकारों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। तमिलनाडु ने मांगे 350 करोड़ रुपये मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तमिलनाडु ने लगभग 350 करोड़ रुपये, जबकि महाराष्ट्र ने करीब 81 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मांगी है। अन्य राज्यों ने भी कर्मचारियों के वेतन, रिवॉल्विंग फंड, ब्याज सब्सिडी और स्वयं सहायता समूहों को सहयोग देने के लिए धन की जरूरत बताई है। NULM 2.0 को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं DAY-NULM वर्ष 2024 में समाप्त हो गया था। इसके बाद उत्तराधिकारी कार्यक्रम के रूप में एक पायलट पहल शुरू की गई, लेकिन पूर्ण स्तर पर NULM 2.0 या नई राष्ट्रीय शहरी आजीविका योजना को लेकर अब तक स्पष्टता नहीं है। राज्यों का कहना है कि नई योजना की समयसीमा और वित्तीय प्रावधानों की जानकारी जरूरी है, ताकि महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों और उनसे जुड़ी आजीविका गतिविधियों को बिना रुकावट जारी रखा जा सके। केंद्र सरकार का क्या कहना है? रिपोर्टों के मुताबिक, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय का कहना है कि उसके पास फंड जारी करने से संबंधित कोई लंबित मांग नहीं है। मंत्रालय ने प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) और अन्य योजनाओं के माध्यम से शहरी गरीबों को मिल रहे सहयोग का भी उल्लेख किया है। हालांकि, राज्यों की चिंता है कि महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के लिए समर्पित आजीविका सहायता और फंडिंग की व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। आने वाले समय में इस मुद्दे पर केंद्र और राज्यों के बीच बातचीत योजना की निरंतरता के लिहाज से अहम होगी। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस, जनसत्ता जय राष्ट्र न्यूज़

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Jantar Mantar को लेकर टकराव जारी, CJP बोली—“Protest site Jantar Mantar ही रहेगा”; police restrictions के बावजूद प्रदर्शन

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026: Delhi के Jantar Mantar को protest site के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर Cockroach Janta Party (CJP) और Delhi Police के बीच टकराव जारी है। Delhi Police द्वारा Jantar Mantar को designated protest venue की सूची से हटाए जाने के बावजूद CJP नेताओं ने साफ कहा है कि उनका protest site Jantar Mantar ही रहेगा। मंगलवार को कई activists ने restrictions के बीच वहां पहुंचने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने कई नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। CJP leaders Jantar Mantar पहुंचे, police ने हिरासत में लिया CJP के वरिष्ठ नेता Ashutosh Ranka, Saurav Das और Ajinkya Shinde मंगलवार को Jantar Mantar परिसर में पहुंचने की कोशिश करते हुए हिरासत में लिए गए। प्रदर्शनकारी Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगा रहे थे। Jantar Mantar का protest-site status हटाया गया Delhi Police ने हाल ही में Jantar Mantar को designated protest venue के तौर पर de-notify कर दिया है। इसके स्थान पर Ramlila Maidan, Burari Ground और CBD Ground को protests के लिए विकल्प के तौर पर चिन्हित किया गया है। यह बदलाव CJP के लगातार Jantar Mantar पर प्रदर्शन करने के प्रयासों के बीच हुआ है। CJP ने कहा—जगह बदलने को तैयार नहीं CJP ने 12 अक्टूबर को Delhi Police को पत्र देकर Jantar Mantar पर protest के लिए तारीख तय करने की मांग की थी। संगठन ने पुलिस को जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय दिया था। CJP leadership का कहना है कि वह प्रशासन द्वारा सुझाए गए दूसरे venues पर अपना आंदोलन shift नहीं करना चाहती। पांच या उससे ज्यादा लोगों के जुटने पर detention की चेतावनी Delhi Police ने New Delhi district में protest-related restrictions जारी रखी हैं। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ संवेदनशील इलाकों में पांच या उससे ज्यादा लोगों के समूह में इकट्ठा होने पर detention की कार्रवाई की जा सकती है। Police का कहना है कि restrictions public order बनाए रखने के लिए जरूरी हैं। 10 अक्टूबर को Jantar Mantar बना था fortress CJP ने इससे पहले 10 अक्टूबर को Jantar Mantar पर बड़े protest का ऐलान किया था, लेकिन heavy barricading, security deployment और mass detentions के कारण प्रदर्शनकारी वहां नहीं पहुंच सके। इसके बाद छोटे समूहों ने Dilli Haat, Connaught Place, Raj Ghat और अन्य इलाकों में flash demonstrations किए थे। CEC के इस्तीफे और voter-roll revision को लेकर विरोध CJP का आंदोलन Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे और electoral rolls की Special Intensive Revision को लेकर है। विपक्षी दलों और activists ने voter deletions पर सवाल उठाए हैं, जबकि Election Commission और BJP ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। source – Reuters, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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Rahul Gandhi-led INDIA bloc protest पर Delhi Police का action, barricade damage के आरोप में दो FIR दर्ज

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026: Rahul Gandhi के नेतृत्व में हुए INDIA bloc के protest march के बाद Delhi Police ने दो FIR दर्ज की हैं। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान Barakhamba Road और Tilak Marg इलाके में barricades को नुकसान पहुंचाया गया और सार्वजनिक संपत्ति पर graffiti की गई। प्रदर्शन Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar को हटाने और electoral rolls की Special Intensive Revision (SIR) के विरोध में आयोजित किया गया था। Barakhamba Road और Tilak Marg थानों में FIR Delhi Police ने एक FIR Barakhamba Road Police Station और दूसरी Tilak Marg Police Station में दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक march के लिए आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी और प्रदर्शन के दौरान लगाए गए security barricades को नुकसान पहुंचा। Truck से barricade damage का आरोप Police के अनुसार एक truck से barricades को कथित तौर पर damage किया गया। इसके अलावा कुछ जगहों पर roads और public property पर graffiti किए जाने का भी आरोप है। इन घटनाओं को लेकर संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। Rahul Gandhi समेत कई बड़े विपक्षी नेता हुए शामिल 12 अक्टूबर को हुए इस protest में Rahul Gandhi के अलावा Congress president Mallikarjun Kharge, Akhilesh Yadav, Mamata Banerjee और अन्य INDIA bloc नेताओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने CEC Gyanesh Kumar को हटाने और SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग की। Supreme Court तक march की थी योजना Opposition leaders का march Central Delhi से Supreme Court की ओर बढ़ा, लेकिन पुलिस ने रास्ते में barricading कर दी। बाद में विपक्ष की ओर से Supreme Court में SIR और Election Commission से जुड़े मुद्दों पर petition भी दाखिल की गई। Police करेगी video footage की जांच Delhi Police अब protest के दौरान सामने आए videos और दूसरे evidence की जांच कर रही है। FIR में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल ये सभी allegations जांच के अधीन हैं। source – The Indian Express, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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CEC और Election Commissioners को मिली immunity पर Supreme Court सख्त, Centre और Election Commission को जारी किया notice

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026: Supreme Court ने Chief Election Commissioner (CEC) और Election Commissioners को कानूनी कार्यवाही से मिली व्यापक immunity को चुनौती देने वाली याचिका पर Centre और Election Commission of India (ECI) को notice जारी किया है। मामला Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023 की Section 16 से जुड़ा है, जो पद पर रहते हुए किए गए आधिकारिक कार्यों को लेकर commissioners को civil और criminal proceedings से protection देता है। ADR ने Section 16 को दी चुनौती यह याचिका Association for Democratic Reforms (ADR) ने दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि Section 16 CEC और Election Commissioners को जरूरत से ज्यादा व्यापक और लंबे समय तक protection देती है, जिससे accountability प्रभावित हो सकती है। Supreme Court ने Centre और ECI से मांगा जवाब Supreme Court ने याचिका पर सुनवाई करते हुए Union Government और Election Commission से जवाब मांगा है। Court ने इस मामले को पहले से लंबित उन petitions के साथ जोड़ दिया है जिनमें इसी provision की constitutional validity को चुनौती दी गई है। मौजूदा और पूर्व Commissioners पर भी लागू होती है protection याचिका में खास तौर पर उस provision पर आपत्ति जताई गई है जिसके तहत official duty के दौरान किए गए acts को लेकर वर्तमान ही नहीं बल्कि पूर्व CEC और Election Commissioners को भी proceedings से protection मिल सकती है। ADR ने Court से इस legal shield की सीमा की समीक्षा करने की मांग की है। इससे पहले भी Supreme Court पहुंच चुका है immunity का मुद्दा CEC और Election Commissioners की immunity को लेकर Supreme Court पहले भी petitions पर सुनवाई कर चुका है। January 2026 में Lok Prahari की याचिका पर भी Centre और ECI को notice जारी किया गया था, हालांकि Court ने उस समय provision पर interim stay लगाने से इनकार कर दिया था। Election Commission की accountability पर बढ़ी बहस यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब Election Commission की powers, उसके फैसलों और CEC की accountability को लेकर कई कानूनी चुनौतियां Supreme Court में लंबित हैं। नई याचिका के बाद अब Court यह जांचेगा कि constitutional authority को दी गई immunity की सीमा कितनी होनी चाहिए और क्या मौजूदा कानून judicial scrutiny की कसौटी पर खरा उतरता है। source – Supreme Court proceedings, India Today, LiveLaw जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल सील, CJP कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन के बीच 13 अक्टूबर को कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के कई कार्यकर्ता भारी बैरिकेडिंग के बावजूद जंतर-मंतर के प्रदर्शन क्षेत्र तक पहुंच गए। दिल्ली पुलिस ने CJP नेताओं सौरव दास, आशुतोष रंका और अजिंक्य शिंदे समेत करीब 20 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की ओर से जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने और वहां प्रवेश पर प्रतिबंध कड़े किए जाने के एक दिन बाद हुई। इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने को लेकर बहस तेज कर दी है। बैरिकेडिंग पार कर प्रदर्शन क्षेत्र में पहुंचे कार्यकर्ता 13 अक्टूबर की सुबह CJP के कुछ कार्यकर्ता बैरिकेडिंग और प्रतिबंधित प्रवेश व्यवस्था के बावजूद जंतर-मंतर के प्रदर्शन क्षेत्र तक पहुंचने में सफल रहे। वहां उन्होंने तिरंगा लहराया और “भारत माता की जय” तथा “इंकलाब जिंदाबाद” जैसे नारे लगाए। इसके बाद पुलिस ने कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। घटना के दौरान इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। सौरव दास और आशुतोष रंका समेत करीब 20 लोग हिरासत में पुलिस ने CJP के प्रमुख नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को हिरासत में लिया। अजिंक्य शिंदे समेत अन्य कार्यकर्ताओं को भी पुलिस वाहनों में ले जाया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, इस कार्रवाई में करीब 20 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब CJP पहले से ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति और स्थल पर लागू प्रतिबंधों का विरोध कर रही थी। हिरासत में पुलिस बस से सौरव दास ने साझा किया वीडियो हिरासत में लिए जाने के बाद सौरव दास ने पुलिस बस के अंदर से एक वीडियो साझा किया। वीडियो में उन्होंने दावा किया कि CJP के कार्यकर्ता पहले जंतर-मंतर के भीतर पहुंचने में सफल हुए और इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। यह विवरण दास के दावे पर आधारित है। घटना के पूरे क्रम की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है। जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को घोषणा की थी कि जंतर-मंतर को अब आधिकारिक रूप से निर्धारित प्रदर्शन स्थल के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसके विकल्प के रूप में रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड जैसे स्थानों का उल्लेख किया गया है। पुलिस की ओर से इस बदलाव को प्रदर्शन प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा कदम बताया गया है। हालांकि, जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण स्थान मानने वाले संगठनों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। CJP का जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल बनाने का ऐलान CJP ने पुलिस के फैसले का विरोध करते हुए जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल के रूप में स्थापित करने की बात कही है। संगठन का तर्क है कि इस ऐतिहासिक स्थान को प्रशासनिक आदेश के जरिए विरोध और असहमति के लिए बंद नहीं किया जाना चाहिए। CJP इसे नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक विरोध से जुड़ा मुद्दा बता रही है। दूसरी ओर, प्रशासन सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत पर जोर दे रहा है। अभिजीत दीपके ने सरकार की कार्रवाई की आलोचना की CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कार्यकर्ताओं की हिरासत और जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार विरोध की आवाज को रोक नहीं सकती और किसी स्थान को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने से असहमति समाप्त नहीं हो जाती। दीपके की प्रतिक्रिया CJP के राजनीतिक रुख को दर्शाती है। इस मामले में पुलिस और संगठन के बीच मुख्य मतभेद प्रदर्शन के लिए स्थान और वहां लागू प्रतिबंधों को लेकर है। भारी सुरक्षा के बीच सीमित रहा प्रवेश जंतर-मंतर और आसपास के इलाके में पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग और निगरानी बढ़ाई गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, मध्य दिल्ली के इस हिस्से में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहने के कारण जंतर-मंतर तक सामान्य पहुंच भी सीमित रही। पुलिस की ओर से उठाए गए कदमों का उद्देश्य प्रतिबंधित क्षेत्र में भीड़ जुटने से रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना बताया गया। 10 अक्टूबर को भी प्रदर्शनकारियों को रोका गया था 10 अक्टूबर को CJP ने जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की योजना बनाई थी, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां पहुंचने से रोक दिया था। इसके बाद कुछ समूहों ने INA और अन्य स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए। 13 अक्टूबर की घटना ने इस विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। CJP का कहना है कि वह अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेगी, जबकि पुलिस निर्धारित नियमों और प्रतिबंधों के पालन पर जोर दे रही है। CJP की मुख्य मांग क्या है? CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े आरोपों की जांच की मांग कर रही है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए। वहीं, निर्वाचन आयोग ने पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि पात्र मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के जरिए अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं। मतदाता सूची से जुड़े आरोप और उनके जवाब इस राजनीतिक विवाद का प्रमुख हिस्सा बने हुए हैं। पुलिस का पक्ष: प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के पीछे प्रमुख आधार यह बताया गया कि जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं है और कार्यकर्ता प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर वहां जुटे थे। पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों को हटाया और कई नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर अलग-अलग पक्षों के तर्क सामने आए हैं। हिरासत में लिए गए सभी लोगों के खिलाफ आगे की कानूनी स्थिति का विवरण उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है। वायरल वीडियो को लेकर भी फैक्ट-चेक आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर जंतर-मंतर पर हजारों लोगों की भीड़ दिखाने वाले कुछ वीडियो भी प्रसारित हुए। फैक्ट-चेक रिपोर्टों के अनुसार, कुछ वीडियो पुराने या असंबंधित घटनाक्रमों से जुड़े थे, जिनमें फिलीपींस के एक उत्सव और 2021 के किसान आंदोलन के दृश्य भी शामिल बताए गए। इसलिए सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे वीडियो को मौजूदा प्रदर्शन…

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CJP को प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं मिली? दिल्ली पुलिस ने बताईं ये वजहें

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में कॉकroach जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने आवेदन खारिज कर दिया। पुलिस के अनुसार, अनुमति नहीं देने के पीछे देर से आवेदन करना, पिछले प्रदर्शनों में निर्देशों का कथित उल्लंघन, सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताएं शामिल थीं। निर्धारित समय से देर से दिया गया आवेदन दिल्ली पुलिस के मुताबिक, CJP ने प्रदर्शन की अनुमति के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत पर्याप्त समय पहले आवेदन नहीं किया था। आवेदन कार्यक्रम की तारीख के काफी करीब जमा किया गया, जिससे आयोजन की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था के आकलन के लिए समय सीमित रह गया। पुलिस ने समय पर आवेदन न मिलने को अनुमति अस्वीकार करने के प्रमुख कारणों में शामिल किया। पिछले प्रदर्शनों में निर्देशों के उल्लंघन का आरोप पुलिस ने CJP के पहले के प्रदर्शनों का रिकॉर्ड भी अपने फैसले का आधार बताया। अधिकारियों के अनुसार, पिछले आयोजनों के दौरान प्रदर्शन के लिए निर्धारित कुछ कानूनी निर्देशों और आयोजकों की ओर से दिए गए आश्वासनों का कथित रूप से पालन नहीं किया गया था। पुलिस ने इस कथित गैर-अनुपालन को भविष्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ी चिंताओं के आकलन में शामिल किया। सार्वजनिक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की चिंता दिल्ली पुलिस ने बड़े स्तर पर लोगों के जुटने से सार्वजनिक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के सामने आने वाली चुनौतियों का भी हवाला दिया। जंतर-मंतर मध्य दिल्ली में स्थित है और महत्वपूर्ण सरकारी तथा सुरक्षा प्रतिष्ठानों के निकट होने के कारण यहां बड़ी सभाओं के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जाती है। अधिकारियों का तर्क था कि संभावित भीड़ को नियंत्रित करने और किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पहले से पर्याप्त इंतजाम जरूरी हैं। यातायात पर पड़ने वाले असर का हवाला पुलिस ने यातायात व्यवस्था को भी अनुमति न देने के कारणों में शामिल किया। अधिकारियों के अनुसार, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के पहुंचने से मध्य दिल्ली की सड़कों, कार्यालयों तक आने-जाने वाले मार्गों और सार्वजनिक परिवहन पर असर पड़ सकता था। पुलिस का कहना था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान आम नागरिकों की आवाजाही और यातायात प्रबंधन को ध्यान में रखना आवश्यक है। गृह मंत्रालय ने भी जताई थी कानून-व्यवस्था की चिंता प्रदर्शन से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी प्रभावों को लेकर सतर्क किया था। रिपोर्टों के अनुसार, मंत्रालय ने बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए दिल्ली पुलिस के साथ वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करने और एहतियाती समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया था। खुफिया सूचनाओं के आधार पर निगरानी अधिकारियों के अनुसार, खुफिया सूचनाओं में बड़ी संख्या में समर्थकों के दिल्ली पहुंचने और प्रतिबंधों के बावजूद जुटान होने की आशंका जताई गई थी। इसके बाद दिल्ली आने वाले प्रमुख मार्गों, परिवहन केंद्रों और अन्य स्थानों पर निगरानी बढ़ाने जैसे एहतियाती कदम उठाए गए। हालांकि, ये चिंताएं प्रशासन की ओर से बताए गए आकलन का हिस्सा थीं; इन्हें किसी संभावित उल्लंघन का स्वतः प्रमाण नहीं माना जा सकता। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की व्यवस्था में बदलाव रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में जारी रखने की व्यवस्था में बदलाव का फैसला किया है। इसके विकल्प के तौर पर रामलीला मैदान, बुराड़ी और CBD ग्राउंड जैसे स्थानों का उल्लेख किया गया है। यह कदम प्रदर्शन स्थलों के निर्धारण और प्रबंधन से जुड़ी समिति की सिफारिशों से संबंधित बताया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य प्रदर्शनों को निर्धारित स्थानों पर आयोजित कराने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी हवाला प्रदर्शन की अनुमति और उसके नियमन के संबंध में अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों तथा प्रक्रियात्मक नियमों का भी हवाला दिया। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन इस पर उचित शर्तें लागू कर सकता है। हालांकि, किसी भी प्रतिबंध की वैधता और उचित सीमा का आकलन उसके आधार, प्रभाव और संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार किया जाना चाहिए। CJP ने फैसले को लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक बताया CJP ने अनुमति नहीं दिए जाने का विरोध करते हुए इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर अनुचित प्रतिबंध बताया। पार्टी नेताओं अभिजीत दीपके और अन्य सदस्यों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की कार्रवाई असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास है। इस तरह मामले में पुलिस का पक्ष सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर केंद्रित है, जबकि CJP इसे लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार से जोड़कर देख रही है। 13 अक्टूबर को फिर हिरासत में लिए गए CJP नेता 13 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका ने जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें फिर हिरासत में ले लिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने कहा कि वहां प्रतिबंध लागू थे और दोनों नेताओं पर हाल में रिहाई के दौरान शांति बनाए रखने से संबंधित शर्तें भी लागू थीं। इस घटनाक्रम ने प्रदर्शन की अनुमति, प्रशासनिक प्रतिबंधों और असहमति जताने के अधिकार को लेकर विवाद को और बढ़ा दिया। मामला न्यायालयों तक पहुंचा प्रदर्शन संबंधी प्रतिबंधों, आवाजाही पर असर और अनुमति नहीं दिए जाने के मुद्दों को लेकर न्यायालयों में भी याचिकाएं पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। इस संदर्भ में मुख्य सवाल यह है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगाए गए प्रतिबंध कितने आवश्यक और आनुपातिक हैं। प्रदर्शन को नियंत्रित करने का अधिकार और शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार—दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना इस विवाद का प्रमुख कानूनी और लोकतांत्रिक पहलू है। CJP को अनुमति नहीं मिलने की मुख्य वजहें दिल्ली पुलिस के अनुसार, CJP के प्रदर्शन को अनुमति नहीं देने के प्रमुख कारण थे—देर से आवेदन, पिछले प्रदर्शनों में निर्देशों के कथित उल्लंघन, सार्वजनिक सुरक्षा संबंधी चिंताएं, यातायात पर संभावित असर और खुफिया सूचनाओं के आधार पर कानून-व्यवस्था का आकलन। दूसरी ओर, CJP इन कारणों को चुनौती देते हुए कार्रवाई को शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर अनुचित रोक बता रही है। मामले में प्रशासनिक सुरक्षा चिंताओं और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर बहस जारी है। Source: The Indian Express…

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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई में ठाकरे परिवार का जोरदार प्रदर्शन, आदित्य-अमित ने संभाला मोर्चा

मुंबई: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और Special Intensive Revision (SIR) के विरोध में मुंबई में प्रदर्शन तेज हो गया है। 11 अक्टूबर को शिवाजी पार्क और दादर इलाके में हुए विरोध प्रदर्शन में आदित्य ठाकरे, तेजस ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता अमित ठाकरे समर्थकों के साथ नजर आए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान करीब 300 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसके बाद ठाकरे परिवार के नेताओं ने आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी। शिवाजी पार्क में बड़ा प्रदर्शन 11 अक्टूबर को शिवाजी पार्क के आसपास CJP समर्थकों और विपक्षी कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया। इस कार्रवाई के बाद विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक रूप ले लिया और ठाकरे परिवार के नेताओं की सक्रियता बढ़ गई। आदित्य और अमित ठाकरे ने संभाला मोर्चा पुलिस की कार्रवाई के बाद शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे और MNS नेता अमित ठाकरे प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। दोनों नेताओं ने समर्थकों के साथ विरोध जताया और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई। उनके प्रदर्शन में शामिल होने के बाद मामला महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया। तेजस ठाकरे भी प्रदर्शन में शामिल आदित्य ठाकरे के भाई तेजस ठाकरे भी विरोध प्रदर्शन में मौजूद रहे। परिवार के अलग-अलग सदस्यों की भागीदारी के कारण सोशल मीडिया पर इसे ‘ठाकरे परिवार का प्रदर्शन’ कहा गया। हालांकि, सभी सदस्यों की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों को एक ही समय की घटना मानने के बजाय संबंधित रिपोर्टों के संदर्भ में देखना जरूरी है। अमित ठाकरे गाड़ी की छत पर चढ़े मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान अमित ठाकरे एक वाहन की छत पर चढ़कर समर्थकों को संबोधित करते दिखाई दिए। उन्होंने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर नाराजगी जताई। इस घटना के दृश्य भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहे। आदित्य ठाकरे ने दी महाराष्ट्र बंद की चेतावनी आदित्य ठाकरे ने पुलिस कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इसी तरह कार्रवाई जारी रही, तो महाराष्ट्र में आंदोलन का दायरा बढ़ाया जा सकता है। रिपोर्टों में उनके हवाले से यह बयान भी सामने आया कि प्रदर्शनकारियों को हाथ लगाया गया तो महाराष्ट्र बंद कराया जा सकता है। करीब 300 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया रिपोर्टों के अनुसार, मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क और आसपास के इलाकों से करीब 300 लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया। बाद में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया गया। पुलिस की कार्रवाई को लेकर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए, जबकि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी का हिस्सा रहा। आदित्य और अमित ठाकरे समेत 25 लोगों पर मामला दर्ज 12 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे समेत 25 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। यह मामला शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के बाहर हुए प्रदर्शन और पुलिस आदेशों के कथित उल्लंघन से संबंधित बताया गया है। आरोप दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी साबित होने का प्रमाण नहीं है। 4 अक्टूबर को राज और उद्धव ठाकरे भी साथ आए थे इस आंदोलन से पहले 4 अक्टूबर को राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने मुंबई में संयुक्त मार्च का नेतृत्व किया था। दोनों नेताओं ने समर्थकों से पार्टी के झंडों के बजाय केवल तिरंगा लेकर आने की अपील की थी। मार्च के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों को उठाया गया। राज ठाकरे ने दिल्ली में पुलिस कार्रवाई की आलोचना की 10 अक्टूबर को राज ठाकरे ने दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को लेकर सवाल उठाए। ये उनके राजनीतिक आरोप और बयान थे। SIR के मुद्दे पर एकजुट दिखे ठाकरे गुट शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य सूची को अधिक सटीक बनाना और मृत, डुप्लिकेट तथा अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है। इसलिए दोनों पक्षों के दावों को राजनीतिक आरोपों और आधिकारिक पक्ष के रूप में अलग-अलग समझना जरूरी है। पार्टी झंडों के बजाय तिरंगा लाने की अपील 4 अक्टूबर के संयुक्त मार्च में राज और उद्धव ठाकरे ने पार्टी के झंडों के बजाय तिरंगा लेकर आने की अपील की थी। उनका कहना था कि यह मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा है। आंदोलन का दायरा बढ़ाने की चेतावनी आदित्य और अमित ठाकरे की सक्रियता तथा प्रदर्शनकारियों की हिरासत के बाद महाराष्ट्र में आंदोलन को और व्यापक बनाने की चेतावनी सामने आई। ठाकरे नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR से जुड़े सवालों पर जवाब मांगे हैं। हालांकि, आगे आंदोलन किस रूप में होगा, यह संबंधित नेताओं की आगामी घोषणाओं पर निर्भर करेगा। आरोपों पर राजनीतिक विवाद जारी विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर पक्षपात के आरोप लगा रहे हैं। चुनाव आयोग इन आरोपों से असहमति जताता है। उपलब्ध विवरणों के आधार पर इन आरोपों को राजनीतिक विवाद के हिस्से के रूप में प्रस्तुत करना उचित है; इन्हें न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। स्रोत: The Indian Express / Reuters / The Times of India / Navbharat Times जय राष्ट्र न्यूज़

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राहुल गांधी बने ‘ढाल’! प्रियंका गांधी और नेहा बोरा के साथ मार्च का वीडियो चर्चा में

नई दिल्ली: Chief Election Commissioner (CEC) ज्ञानेश कुमार और Special Intensive Revision (SIR) के विरोध में 12 अक्टूबर को INDIA bloc के Supreme Court मार्च के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। कुछ मीडिया रिपोर्टों में राहुल गांधी को दोनों महिला नेताओं के आगे और आसपास चलते हुए ‘ढाल’ की तरह पेश किया गया। हालांकि, ‘ढाल’ इस दृश्य की मीडिया और सोशल मीडिया में की गई व्याख्या है, किसी आधिकारिक सुरक्षा आकलन का निष्कर्ष नहीं। Supreme Court की ओर निकला INDIA bloc का मार्च 12 अक्टूबर को INDIA bloc के कई नेताओं और छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में Supreme Court की ओर मार्च किया। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष की आपत्तियों के बीच आयोजित किया गया था। राहुल, प्रियंका और नेहा बोरा एक साथ नजर आए मार्च के दौरान सामने आए वीडियो में राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी वाड्रा और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी दिखाई दीं। नेहा बोरा हालिया CEC और SIR विरोधी प्रदर्शनों में सक्रिय रही हैं और विभिन्न विरोध प्रदर्शनों के दौरान उन्हें हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। क्यों कहा जा रहा है राहुल गांधी को ‘ढाल’? वायरल वीडियो में राहुल गांधी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रियंका गांधी और नेहा बोरा के करीब चलते दिखाई देते हैं। इसी दृश्य को कुछ मीडिया रिपोर्टों ने इस अंदाज में पेश किया कि राहुल गांधी दोनों महिला नेताओं के लिए ‘शील्ड’ यानी ढाल की तरह आगे बढ़ रहे थे। हालांकि, केवल वीडियो के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि उस समय दोनों नेताओं को किसी विशेष शारीरिक खतरे का सामना करना पड़ रहा था। ‘ढाल’ शब्द इस दृश्य की प्रतीकात्मक व्याख्या के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो मार्च के दौरान सामने आए इस दृश्य को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया। राहुल गांधी के समर्थकों ने इसे एकजुटता और साथ खड़े रहने के संकेत के रूप में देखा, जबकि राजनीतिक विरोधियों ने प्रदर्शन को विपक्ष की राजनीतिक लामबंदी से जोड़कर पेश किया। Barricades पर रोका गया मार्च मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, INDIA bloc के मार्च को Supreme Court पहुंचने से पहले भगवान दास रोड के पास लगाए गए बैरिकेड्स पर रोक दिया गया। इसके बाद वकीलों की एक टीम Supreme Court पहुंची और चुनाव से संबंधित आरोपों को लेकर याचिका दाखिल किए जाने की खबर सामने आई। राहुल गांधी ने आंदोलन जारी रखने की बात कही प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने आंदोलन जारी रखने और पीछे नहीं हटने की बात कही। उन्होंने युवाओं से लोकतांत्रिक संस्थाओं और मतदान के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने की अपील भी की। प्रियंका गांधी भी प्रदर्शनों में सक्रिय प्रियंका गांधी वाड्रा हाल के दिनों में CEC और SIR के विरोध में आयोजित प्रदर्शनों में सक्रिय दिखाई दी हैं। 6 अक्टूबर को हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित विपक्षी सांसदों तथा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आई थीं। नेहा बोरा आंदोलन का प्रमुख युवा चेहरा AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा हालिया विरोध प्रदर्शनों में लगातार सक्रिय रही हैं। 11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें विजय चौक के पास हिरासत में लिए जाने की खबर आई थी। इससे पहले RK आश्रम इलाके में उनसे मिलती-जुलती दिखने वाली एक अन्य महिला को पुलिस द्वारा गलती से नेहा बोरा समझे जाने का मामला भी रिपोर्ट किया गया था। मल्लिकार्जुन खरगे भी मार्च में शामिल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी 12 अक्टूबर के मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान उनका Batman मास्क पहने दिखाई देने वाला दृश्य भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा और विरोध प्रदर्शन के प्रतीकात्मक दृश्यों में शामिल हो गया। SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद विपक्ष और कुछ संबंधित समूहों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए और इसका राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को अद्यतन करने का उद्देश्य मृत, डुप्लिकेट और अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है। पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटने की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें दोबारा शामिल कराने का रास्ता उपलब्ध है। BJP ने आरोपों को बताया राजनीतिक भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग को एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था बताया है। BJP का आरोप है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर जनता के बीच अविश्वास पैदा करने की कोशिश कर रहा है। ‘ढाल’ वाला दृश्य बना चर्चा का विषय राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और नेहा बोरा का साथ चलते हुए वीडियो INDIA bloc के प्रदर्शन से जुड़ी प्रमुख चर्चाओं में शामिल हो गया है। हालांकि, इस दृश्य को ‘राहुल गांधी बने ढाल’ कहना मीडिया और सोशल मीडिया की व्याख्या है। वीडियो से अपने आप किसी विशिष्ट खतरे या सुरक्षा घटना की पुष्टि नहीं होती। स्रोत: Reuters / The Economic Times / The Times of India / Navbharat Times / The Indian Express / Loksatta जय राष्ट्र न्यूज़

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शत्रुघ्न सिन्हा का BJP पर बड़ा आरोप, बोले—“चुनाव आयोग और खासकर ज्ञानेश कुमार का पूरा फायदा उठाया गया”

आसनसोल: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग को लेकर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि BJP ने चुनाव आयोग का “पूरा फायदा” उठाया है और खास तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में उसे लाभ मिला। सिन्हा ने कहा कि वह लंबे समय तक BJP में रहे हैं और पार्टी की कार्यशैली से अच्छी तरह परिचित हैं। हालांकि, ये उनके राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। “BJP चुनाव आयोग का पर्याय बन गई” शत्रुघ्न सिन्हा ने आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में BJP और चुनाव आयोग के बीच अंतर कम होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि वह वर्षों तक BJP में रहे हैं और इस दौरान पार्टी के नेताओं तथा उनकी कार्यशैली को करीब से समझा है। ज्ञानेश कुमार का नाम लेकर लगाया आरोप TMC सांसद ने अपने बयान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP ने चुनाव आयोग और खासकर ज्ञानेश कुमार का फायदा उठाया है। हालांकि, सिन्हा ने अपने दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया। 2024 के बाद के चुनावों की वैधता पर उठाए सवाल सिन्हा ने 2024 के बाद हुए चुनावों की वैधता पर भी सवाल उठाए और उन्हें गैर-कानूनी बताया। यह उनका राजनीतिक दावा है। किसी अदालत द्वारा 2024 के बाद हुए सभी चुनावों को अवैध घोषित किए जाने की जानकारी इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। राहुल गांधी और ममता बनर्जी के रुख का समर्थन शत्रुघ्न सिन्हा ने चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष के अन्य नेताओं की चिंताओं का समर्थन किया। उन्होंने राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से चुनावी प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों से सहमति जताई। SIR विवाद से बढ़ा राजनीतिक टकराव यह बयान विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच आया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया से BJP को फायदा हो सकता है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने पक्षपात और हेरफेर के आरोपों से इनकार किया है। आयोग के अनुसार, मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य डुप्लिकेट, मृत और अपात्र मतदाताओं से जुड़ी प्रविष्टियों को दुरुस्त करना है। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग CJP, कांग्रेस, TMC और अन्य विपक्षी समूह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। 12 अक्टूबर को भी विपक्षी नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की खबरें सामने आईं। BJP ने आरोपों को खारिज किया BJP ने चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक बयान में कहा था कि BJP की मदद “ज्ञानेश जी नहीं, गणेश जी” कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर चुनावी हार के बाद चुनाव आयोग को निशाना बनाने का आरोप लगाया। BJP का दावा—संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र BJP का कहना है कि चुनाव आयोग सहित देश की संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र रूप से काम करती हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त से संबंधित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद भी पार्टी ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाएं निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम कर रही हैं। CJP आंदोलन से गरमाया विवाद ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के बाद चुनाव आयोग की निष्पक्षता का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। दिल्ली में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। विपक्ष ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए, जबकि BJP ने प्रदर्शनों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं शत्रुघ्न सिन्हा का यह दावा कि BJP ने चुनाव आयोग और खासकर ज्ञानेश कुमार का “पूरा फायदा” उठाया, एक राजनीतिक आरोप है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्थापित नहीं होता कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने BJP को अनुचित चुनावी लाभ पहुंचाया है। BJP और चुनाव आयोग पक्षपात के आरोपों से इनकार करते रहे हैं। स्रोत: पत्रिका, नवभारत टाइम्स, रॉयटर्स, NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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