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Rahul Gandhi birthday 2025

Rahul Gandhi’s Entry Into Politics: जन्मदिन विशेष: इस तरह हुई थी राहुल गाँधी की सियासत में इंट्री

आज यानी 19 जून को,कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) अपना 55वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ साथ अन्य दलों के लोग भी उन्हें जन्मदिन की बधाइयाँ दे रहे (Rahul Gandhi’s Entry Into Politics) हैं। खैर, रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को यूपी में इंडिया गठबंधन के सहयोगी और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने खास अंदाज में जन्मदिन की बधाई दी है। अखिलेश ने उन्हें समावेशी राजनीतिक सक्रियता के लिए शुभकामनाएं दी हैं। दरअसल, अखिलेश ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई दी और कहा श्री राहुल गांधी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई व सौहार्दपूर्ण, समावेशी, समायोजनकारी समग्र सामाजिक-राजनीतिक सक्रियता के लिए शुभकामनाएँ!  नई दिल्ली के होली फैमिली अस्पताल में हुआ (Rahul Gandhi’s Entry Into Politics) था राहुल गांधी का जन्म  राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का जन्म 19 जून 1970 को नई दिल्ली के होली फैमिली अस्पताल में हुआ (Rahul Gandhi’s Entry Into Politics) था। भारत के कद्दावर राजनीतिक परिवार में जन्में राहुल गाँधी के परिवार की बात करें तो उनके परदादा यानी पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले और सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे हैं, तो वहीं उनकी दादी इंदिरा गांधी, भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं। इतना ही नहीं उनके पिता राजीव गांधी भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री रह चुके हैं। बात करें राहुल गांधी की शिक्षा की तो उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के सेंट कोलंबस स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद देहरादून के प्रतिष्ठित द दून स्कूल से शिक्षा ली। यही नहीं, राहुल गांधी ने प्रतिष्ठित हार्वर्ड विश्वविद्यालय के फ्लोरिडा के रोलिंस कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद कांग्रेस नेता ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज से एम.फिल की डिग्री हासिल की। सुरक्षा कारणों से राहुल गांधी को अपना नाम बदलकर उच्च शिक्षा करनी (Rahul Gandhi’s Entry Into Politics) पड़ी पूरी  राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का जन्म भले ही सबसे कद्दावर राजनीतिक परिवार में हुआ हो लेकिन उन्होंने छोटी उम्र में ही अपनी दादी की मौत (Rahul Gandhi’s Entry Into Politics) देखी। बात साल 1983 की है। जब पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई थी। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर राहुल को घर पर ही रहकर पढ़ाई करनी पड़ी। इसके बाद प्रधानमंत्री बने राहुल के पिता राजीव गांधी की भी हत्या कर दी गई। इसलिए सुरक्षा कारणों से राहुल गांधी को अपना नाम बदलकर उच्च शिक्षा पूरी करनी पड़ी। बता दें कि ग्रेजुएशन के बाद राहुल ने तकरीबन तीन साल तक लंदन के मॉनिटर ग्रुप में काम किया। यह कंपनी मैनेजमेंट गुरु माइकल पोर्टर की कंसल्टिंग फर्म थी। गौर करने वाली बात यह कि यही वो समय था, जब राहुल गांधी की जान को भी खतरा माना जा रहा था। वजह यही जो यहाँ उन्हें राउल विंसी के नाम से काम करना पड़ा। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र सरकार का तुगलकी फरमान, स्कूलों में हिन्दी की अनिवार्यता की खत्म, अब होगी तीसरी भाषा साल 2004 में राहुल गांधी ने भारतीय राजनीति में (Rahul Gandhi’s Entry Into Politics) रखा कदम  खैर, इस बीच साल 2004 में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने भारतीय राजनीति में कदम (Rahul Gandhi’s Entry Into Politics) रखा। उन्होंने अपने पिता राजीव गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी से चुनाव लड़ा। और शानदार जीत हासिल की। ​​इस चुनाव में राहुल एक लाख से ज्यादा वोटों से जीते थे। इसके बाद साल 2017 में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें बीजेपी की स्मृति ईरानी से करारी हार का सामना करना पड़ा। यह हार सिर्फ राहुल गांधी की नहीं थी बल्कि उनके नेतृत्व में पूरे देश में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। कांग्रेस के ख़राब प्रदर्शन से दुखी राहुल गांधी ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। Latest News in Hindi Today Hindi news Rahul Gandhi #RahulGandhi #BirthdaySpecial #IndianPolitics #CongressParty #PoliticalJourney

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India Iran evacuation

India Evacuates Citizens from Iran Under Operation Sindhu:ऑपरेशन सिंधु के तहत भारत सरकार ने ईरान में फंसे भारतीयों को निकालना शुरू किया, वापस लौटे लोगों ने बयां किए ईरान के हालात

गुजरते वक़्त के साथ-साथ ईरान और इजरायल के बीच हालात खराब होते जा रहे हैं। रोज दोनों देश एक दूसरे पर मिसाइल अटैक कर रहे हैं। युद्ध जैसे हालात के इस बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऑपरेशन सिंधु के तहत सरकार ने ईरान में फंसे भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालना शुरू कर दिया (India Evacuates Citizens from Iran Under Operation Sindhu) है। इस कड़ी में भारत सरकार की तरफ से 110 भारतीय छात्रों को ईरान से निकालकर पहले आर्मेनिया पहुंचाया गया फिर वहां से गुरुवार की सुबह ये छात्र दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पहुंचे। दिल्ली पहुंचने के बाद सभी छात्र काफी खुश नजर आये। ईरान से आए अधिकतर छात्रों ने बताया की ईरान की राजधानी तेहरान में हालात बहुत नाजुक हैं। हमारे हॉस्टल के ऊपर से मिसाइलें गुजरती थीं। हम मिसाइल देखकर डर जाते थे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि तेहरान में भारतीय दूतावास ने उत्तरी ईरान से 110 भारतीय छात्रों को निकाला है। देश के कई राज्यों के छात्रों को ईरान से दिल्ली लाया गया है। अब वो यहां से अपने-अपने राज्य के लिए जा रहे हैं।  भारत सरकार ने सब कुछ अच्छी तरह से (India Evacuates Citizens from Iran Under Operation Sindhu) किया प्रबंधित  ईरान से निकाले गए एक छात्र ने बताया कि वहां की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। तेहरान में तो स्थिति बेहद ही खराब है। वहां से सभी भारतीय छात्रों को निकाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय अधिकारी अच्छा काम कर रहे हैं। सभी छात्रों को निकाला जा रहा है और सुरक्षित जगह पर पहुंचाया जा रहा है। छात्रों ने बताया कि पहले हमें हमारी यूनिवर्सिटी से निकाला गया और आर्मेनिया ले जाया (India Evacuates Citizens from Iran Under Operation Sindhu) गया। जिसके बाद हमें कतर ले जाया गया। इस तरह हम कतर से भारत पहुंचे हैं। छात्र के अलावा ईरान से वापस आए छात्रों के माता-पिता का खुशी का ठिकाना नहीं हैं। ईरान से वापस आई एक छात्रा की मां कहती हैं कि मुझे बहुत खुशी है कि मेरी बेटी घर लौट आई है। उन्होंने कहा कि मैं चाहती हूं कि सभी के बच्चे अपने घर वापस लौट आएं। उन्होंने भारत सरकार का आभार जताते हुए कहा कि भारत सरकार ने सब कुछ इतनी अच्छी तरह से प्रबंधित किया है कि हमारे बच्चों को कहीं भी कोई परेशानी नहीं हुई।  भारत सरकार ने बहुत अच्छे प्रयास किए (India Evacuates Citizens from Iran Under Operation Sindhu) हैं यही नहीं एक अन्य छात्र के पिता ने बताया कि मेरा बेटा भारत से भेजे गए विशेष विमान से अर्मेनिया के रास्ते वापस आ रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि मेरा बेटा घर वापस आ रहा है। कहने की जरूरत नहीं भारत सरकार ने बहुत अच्छे प्रयास किए (India Evacuates Citizens from Iran Under Operation Sindhu) हैं। उन्होंने भारत सरकार से आग्रह करते हुए कहा कि तेहरान में फंसे छात्रों की भी मदद करे। उन्होंने कहा कि तेहरान सहित देश के अंदरूनी इलाकों में फंसे लोग अभी तक बाहर नहीं निकल पाए हैं। मैं तेहरान में भारतीय दूतावास को उनके प्रयासों के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। मेरा बेटा जल्द ही यहां पहुँचने वाला है।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र सरकार का तुगलकी फरमान, स्कूलों में हिन्दी की अनिवार्यता की खत्म, अब होगी तीसरी भाषा कुछ छात्र जम्मू कश्मीर की सरकार से (India Evacuates Citizens from Iran Under Operation Sindhu) हुए नाराज  एक तरफ जहाँ ईरान से लौटे छात्र भारत सरकार की तारीफ करते नहीं तक रहे हैं तो वहीं कुछ छात्र जम्मू कश्मीर की सरकार से नाराज (India Evacuates Citizens from Iran Under Operation Sindhu) हैं। छात्रों का कहना है कि भारत सरकार ने हमारी पूरी मदद की, हर सहूलियत दी, लेकिन जम्मू कश्मीर सरकार ने हमसे कहा था कि दिल्ली से कश्मीर तक का वो इंतजाम करेंगे। लेकिन आप देख सकते हैं किस तरह की बस जम्मू सरकार ने हमारे लिए दी है। जम्मू कश्मीर सरकार की तरफ से उपलब्ध करवाए गए बस से कश्मीर के छात्र नाराज हैं। उनका कहना है कि वो इतनी लंबी यात्रा कर के आए हैं और अब फिर 20 घंटे की यात्रा कर पाना वो भी इस बस हमारे लिए बेहद मुश्किल होने वाला है। छात्रों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर सरकार ने दिल्ली से कश्मीर तक की यात्रा के लिए बेहतर इंतजाम करने का आश्वासन दिया था, लेकिन मौके पर दी गई बसें न केवल पुरानी हैं, बल्कि लंबी यात्रा के लिए असुविधाजनक भी हैं।  कहने की जरूरत नहीं, इस स्थिति ने न सिर्फ छात्रों, बल्कि विदेश मंत्रालय को भी निराश किया है। जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा किया गया यह इंतजाम अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा है। Latest News in Hindi Today Hindi news India Evacuates Citizens from Iran Under Operation Sindhu #OperationSindhu #IndiaIran #EvacuationMission #IndianCitizensRescued #MEAIndia #IranCrisis2025 #GlobalNews

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Congress demands explanation

Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump: मोदी सरकार पर हमलावर कांग्रेस, कहा- पीएम बताएं कि ट्रंप से क्या हुई बात

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत को लेकर कांग्रेस ने पीएम मोदी और सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने बुधवार को मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीन देशों की यात्रा से लौटने के बाद तुरंत सर्वदलीय बैठक की बुलानी चाहिए। ताकि नेताओं को बताया जा सके कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से टेलीफोन पर बातचीत में क्या (Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump) कहा? पीटीआई से बात करते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री को संसद में ट्रंप के उन दावों का खंडन करना चाहिए, जिसमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम के लिए व्यापार को एक साधन के रूप में इस्तेमाल करने का दावा किया है। ध्यान देने वाली बात यह कि रमेश की यह टिप्पणी मोदी द्वारा राष्ट्रपति ट्रंप से बात करने के बाद आई है, जिसमें पीएम ने स्पष्ट किया कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान पर हमले इस्लामाबाद के अनुरोध पर रोके थे, न कि अमेरिका की मध्यस्थता या व्यापार समझौते की पेशकश के कारण। राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मुनीर का विशेष आमने-सामने लंच के लिए आमंत्रित किया जाना बहुत बड़ा (Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump) झटका है  खैर, विदेश सचिव विक्रम मिस्री के के मुताबिक, मंगलवार को ट्रंप के साथ 35 मिनट की फोन कॉल में पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति को पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों के खिलाफ भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी दी और यह साफ किया कि भारत ने कभी किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया है और भविष्य में भी इसे स्वीकार नहीं करेगा। इस बीच ट्रंप के जनरल मुनीर के साथ लंच करने की खबरों पर जयराम रमेश ने कहा, यह भारतीय कूटनीति के लिए तिहरा झटका है। आज फील्ड मार्शल मुनीर, जिनके भड़काऊ, भड़काऊ और अस्वीकार्य बयानों ने पहलगाम आतंकी हमले की पृष्ठभूमि बनाई, राष्ट्रपति ट्रंप के साथ लंच करने वाले (Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump) हैं। ऐसा सैन्यकर्मी जो सरकार का मुखिया नहीं है, उसे राष्ट्रपति ट्रंप के साथ विशेष आमने-सामने लंच के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। यह बहुत बड़ा झटका है।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र सरकार का तुगलकी फरमान, स्कूलों में हिन्दी की अनिवार्यता की खत्म, अब होगी तीसरी भाषा प्रधानमंत्री देश को विश्वास में लें और वे सारी बातें कहें जो उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप से कहनी (Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump) चाहिए सरकार को घेरते हुए जयराम रमेश ने आगे कहा कि तीसरा झटका राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 14 बार ऑपरेशन सिंदूर को रोकने और भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने का श्रेय लेना था। मोदी-ट्रंप की टेलीफोन पर बातचीत पर रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ट्रंप से कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के संबंध में व्यापार पर चर्चा नहीं हुई और मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं है। रमेश ने आगे कहा, वह सर्वदलीय बैठक में यह बात क्यों नहीं (Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump) कहते? इसलिए हम संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं ताकि प्रधानमंत्री देश को विश्वास में लें और वे सारी बातें कहें जो उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप से कहनी चाहिए। खैर, कांग्रेस पार्टी ने उन रिपोर्ट्स को भी बड़ा झटका बताया, जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ट्रंप के साथ दोपहर का भोजन करेंगे। पार्टी ने कहा कि प्रधानमंत्री को टेलीफोन पर बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति को इस पर भारत की नाराजगी के बारे में बताना चाहिए था। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ट्रंप ने कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान की बराबरी करते हुए व्यापार को एक साधन के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने यह बात 14 बार कही और प्रधानमंत्री ने 10 मई के बाद से कुछ नहीं कहा। इसलिए यह तिहरा झटका है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump #Modi #Trump #Congress #IndiaUSRelations #PoliticalNews #BreakingNews #PMModi

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Sharad Pawar Slams Ajit

सुलह की अटकलों पर विराम लगाते हुए शरद पवार ने अजित पवार को घेरा, बोले- ‘बीजेपी से हाथ मिलाने वालों को प्रोत्साहन नहीं’

महाराष्ट्र की राजनीति में चाचा-भतीजे के पुनर्मिलन की अटकलों के बीच अब शरद पवार (Sharad Pawar) ने एक ऐसा बयान दिया है, जो साफ इशारा करता है कि वे एनसीपी के बागी गुट के साथ सुलह के पक्ष में नहीं हैं। पिंपरी चिंचवाड़ में आयोजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की एक कार्यकर्ता सभा को संबोधित करते हुए शरद पवार (Sharad Pawar) ने अजित पवार (Ajit Pawar) का नाम बिना लिए उन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग भाजपा के साथ हाथ मिलाकर अवसरवादी राजनीति करते हैं, उन्हें कभी भी प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता। शरद पवार (Sharad Pawar) का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उनके और अजित पवार (Ajit Pawar) के बीच हालिया मुलाकातों ने दोनों गुटों के विलय की अटकलें तेज कर दी थी। कहा जा रहा था कि महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव (Maharashtra local body elections) से पहले दोनों गुट फिर से एक हो सकते हैं। लेकिन शरद पवार के इस बयान के बाद ऐसा लग रहा है कि दोनों गुटों के बीच चल रही समझौते की बातचीत पटरी से उतर गई है।  गांधी, नेहरू, फुले, आंबेडकर की विचारधारा वालों को ही लेंगे साथ- शरद पवार  शरद पवार ने अपने संबोधन में कहा, ” पार्टी के कुछ लोगों का कहना है कि सबको साथ लेकर चलना चाहिए, लेकिन मैं इससे असहमत नहीं हूं। मेरे लिए यह देखना जरूरी है कि ये ‘सब’ कौन हैं? मैं सिर्फ उन लोगों को साथ ले सकता हूं जो महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, महात्मा फुले और डॉ. भीमराव आंबेडकर की विचारधारा में विश्वास रखते हैं।” उन्होंने अजित पवार (Ajit Pawar) का बिना नाम लिए कहा कि यदि कोई सत्ता की लालसा में भाजपा के साथ जुड़ता है, तो वह न तो एनसीपी की मूल विचारधारा से मेल खाता है और न ही ऐसी राजनीति को बढ़ावा दिया जा सकता है। ऐसे लोगों के लिए मेरी पार्टी में कोई जगह नहीं है। शरद पवार ने आगे कहा कि एनसीपी की बुनियाद सेक्युलर सोच पर रखी गई है और यह कांग्रेस की विचारधारा के समानांतर है। अगर कोई नेता भाजपा के साथ गठबंधन करता है, तो यह हमारी आत्मा के खिलाफ है। कोई भी किसी के साथ जुड़ सकता है, परंतु एनसीपी जैसी पार्टी के लिए भाजपा के साथ जाना संभव नहीं। शरद पवार का यह बयान सीधे तौर पर अजित पवार गुट पर निशाना माना जा रहा है, जिन्होंने जुलाई 2023 में एनसीपी से अलग होकर भाजपा और शिंदे गुट के साथ मिलकर सरकार बनाई। पवार ने अपने संबोधन से स्पष्ट संकेत दिया है कि राजनीतिक सिद्धांतों के साथ समझौता कर केवल सत्ता पाने की कोशिश करने वालों को वह अपनी पार्टी में वापस नहीं लेंगे। ‘पार्टी छोड़ चुके नेताओं की चिंता न करें’ शरद पवार (Sharad Pawar) ने कार्यकर्ताओं से यह भी कहा कि उन्हें उन नेताओं की चिंता नहीं करनी चाहिए जो पार्टी छोड़कर चले गए हैं। बल्कि, अब जरूरत इस बात की है कि पार्टी पूरी ताकत के साथ आगामी स्थानीय निकाय चुनावों (Maharashtra local body elections) की तैयारी में जुट जाए। कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी की असली ताकत कार्यकर्ता हैं और जब तक जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत रहेगा, तब तक कोई भी राजनीतिक चुनौती बड़ी नहीं होगी। इसलिए पूरे जोर-शोर से निकाय चुनाव की तैयारी करो।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र सरकार का तुगलकी फरमान, स्कूलों में हिन्दी की अनिवार्यता की खत्म, अब होगी तीसरी भाषा चाचा-भतीजे की मुलाकातों से उठी थी सियासी सरगर्मी बता दें कि, हाल ही में शरद पवार और अजित पवार के बीच कुछ अनौपचारिक मुलाकातें हुई थीं, जिनके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई थी कि शायद एनसीपी के दोनों धड़े एक बार फिर एकजुट हो सकते हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि यह मिलन आगामी निकाय चुनाव (Maharashtra local body elections) में एनसीपी के वोटों को एकजुट करने की रणनीति हो सकती है। लेकिन शरद पवार का ताजा बयान इन तमाम अटकलों पर फिलहाल पानी फेरता नजर आ रहा है। उन्होंने साफ तौर पर अवसरवादिता और विचारधारा से समझौते को नकारते हुए अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। इससे यह भी साफ हो गया कि उन्होंने अपने भतीजे अजित पवार और उनके साथियों की वापसी के दरवाजे लगभग बंद कर दिए हैं, कम से कम तब तक के लिए जब तक वे भाजपा के साथ हैं। अब देखना यह होगा कि शरद पवार के इस बयान का अजित पवार किस तरह से जवाब देते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Sharad Pawar #SharadPawar #AjitPawar #BJPAlliance #MaharashtraPolitics #NCP #IndianPolitics

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Hindi language rule

Hindi No Longer Mandatory in Maharashtra Schools: महाराष्ट्र सरकार का तुगलकी फरमान, स्कूलों में हिन्दी की अनिवार्यता की खत्म, अब होगी तीसरी भाषा

बीते दिनों महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी भाषा को लेकर जारी विवाद पर देवेंद्र फडणवीस सरकार ने पूर्ण विराम लगा दिया है। दरअसल, स्कूल में हिंदी भाषा को अनिवार्य रूप से पढ़ाए जाने के फैसले के बाद से राजनीति शुरू हो गई थी। मराठी वोट बैंक खिसकता देख अब सरकार ने फैसला लिया है कि कक्षा 1 से 3 तक हिंदी को अनिवार्य नहीं रखा जाएगा। अब सामान्य रूप से हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा। बता दें कि इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने बाकायदा नया सरकारी आदेश जारी किया है। स्कूल शिक्षा 2024 के लिए राज्य पाठ्यक्रम योजना के अनुसार, मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक के लिए हिंदी अब तीसरी भाषा (Hindi No Longer Mandatory in Maharashtra Schools) होगी।  सभी माध्यम के स्कूलों में मराठी अनिवार्य भाषा (Hindi No Longer Mandatory in Maharashtra Schools) होगी सरकारी फरमान के मुताबिक, कक्षा1 से त्रिभाषा फॉर्मूला अपनाया जाएगा। आदेश के मुताबिक यदि कक्षा में 20 से अधिक छात्र हिंदी के बजाय अन्य भाषा सीखना चाहते हैं, तो शिक्षक इसे उपलब्ध कराएंगे। अथवा भाषा विषय को ऑनलाइन पढ़ाया जाएगा। अगर छात्र हिंदी के बजाय तीसरी भाषा के रूप में किसी अन्य भारतीय भाषाओं में से किसी एक को सीखने की इच्छा रखते हैं, तो उन छात्रों को तीसरी भाषा के रूप में उस भाषा को सीखने की मंजूरी दी जाएगी। बशर्ते, उस कक्षा में कम से कम छात्र 20 होने चाहिए, जो तीसरी भाषा के रूप में हिंदी के बजाय अन्य भाषाएं सीखना चाहते हैं। इस हिसाब से यदि कम से कम 20 छात्र हिंदी के अलावा किसी अन्य तीसरी भाषा को सीखना चाहते हैं, तो उस भाषा को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक उपलब्ध कराया जाएगा, वरना वह भाषा ऑनलाइन पढ़ाई जाएगी। सभी माध्यम के स्कूलों में मराठी अनिवार्य भाषा (Hindi No Longer Mandatory in Maharashtra Schools) होगी।  किसी अन्य भाषा को पढ़ाने के लिए कक्षा में कम से कम 20 छात्र होने (Hindi No Longer Mandatory in Maharashtra Schools) चाहिए नए आदेश के मुताबिक मराठी और इंग्लिश माध्यम के स्कूलों में पहली से पांचवीं तक हिंदी सामान्यतः तीसरी भाषा होगी, लेकिन अगर कोई विद्यार्थी हिंदी के स्थान पर किसी अन्य भारतीय भाषा को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ना चाहता है, तो उसे इसकी अनुमति दी (Hindi No Longer Mandatory in Maharashtra Schools) जाएगी। हालांकि, इसके लिए कम से कम 20 विद्यार्थियों की इच्छा आवश्यक होगी। यानी किसी अन्य भाषा को पढ़ाने के लिए कम से कम 20 छात्रों की इच्छा होनी चाहिए। इस फरमान के बाद सभी माध्यमों के स्कूलों में मराठी भाषा अनिवार्य होगी। बता दें कि इस फैसले पर अमल करने की ज़िम्मेदारी शिक्षा आयुक्त, महाराष्ट्र शासन, पुणे को दी गई है। मराठी और इंग्लिश माध्यम के अलावा अन्य माध्यमों के स्कूलों में भी पहली से पांचवीं तक माध्यम भाषा, मराठी और इंग्लिश ये तीनों भाषाएं पढ़ाई जाएंगी। कक्षा छठी से दसवीं कक्षा तक की भाषा नीति राज्य पाठ्यक्रम ढांचे के अनुसार होगी।  इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक राजनीतिक दलों ने विरोध के चलते सरकार ने पलटा अपना ही (Hindi No Longer Mandatory in Maharashtra Schools) फैसला  गौरतलब हो कि देवेंद्र फडणवीस सरकार ने पहले कक्षा 1 से ही त्रिभाषा फार्मूला लागू करने का फैसला किया था। फैसले के मुताबिक मराठी और इंग्लिश माध्यम के स्कूलों में तीसरी भाषा हिंदी अनिवार्य होगी। यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल के साथ राज्य पाठ्यक्रम ढांचे को लागू करते हुए लिया गया था। ये तो ठीक, लेकिन इस पर कई राजनीतिक दलों ने विरोध करना शुरू कर दिया था। विरोध बढ़ता देख सूबे के शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने घोषणा की कि सरकार यह निर्णय वापस ले (Hindi No Longer Mandatory in Maharashtra Schools) रही है। Latest News in Hindi Today Hindi news Hindi No Longer Mandatory in Maharashtra Schools #MaharashtraEducation #HindiLanguage #ThirdLanguagePolicy #SchoolCurriculum #EducationReform

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Nishant Kumar

Nitish Kumar’s son Nishant may contest from a key Bihar assembly seat: तो क्या इस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार?

बिहार में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। इसी साल बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar assembly Election) होने हैं। चुनावी माहौल के बीच सभी राजनीतिक दल अभी से चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। ऐसे में ये भी चर्चा होने लगी है कि कौन सा नेता किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेगा। इस बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में पदार्पण करने के कयास लगाए जा रहे हैं। बता दें कि निशांत कुमार के आगामी बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही है। पार्टी के नेता निशांत कुमार के चुनाव लड़ने पर जोर दे रहे हैं। वो चुनाव लड़े इसलिए जनता दल यूनाइटेड के कई विधायकों ने उनके लिए अपनी सीट तक छोड़ने के लिए तैयार (Nitish Kumar’s son Nishant may contest from a key Bihar assembly seat) है। यही नहीं, नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाने वाले जेडीयू नेता और सांसद कौशलेंद्र कुमार ने निशांत कुमार को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने न सिर्फ बड़ा बयान दिया है बल्कि यह भी बताया है कि निशांत कुमार किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे।  अगर निशांत चुनाव लड़ते हैं तो नालंदा के लोग उन्हें जरूर (Nitish Kumar’s son Nishant may contest from a key Bihar assembly seat) जिताएंगे बता दें कि सांसद कौशलेंद्र कुमार ने कहा, निशांत कुमार अगर राजनीति में आते हैं तो इससे हमलोग काफी खुश होंगे। निशांत कुमार के इस्लामपुर से चुनाव लड़ने की मांग उठ रही है। अगर निशांत चुनाव लड़ते हैं तो नालंदा के लोग उन्हें जरूर (Nitish Kumar’s son Nishant may contest from a key Bihar assembly seat) जिताएंगे। हालांकि उन्होंने इस हेतु नीतीश कुमार से अपील भी की है। गौरतलब हो कि कौशलेंद्र कुमार ने नीतीश कुमार से आग्रह करते हुए कहा, निशांत कुमार को इस्लामपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का मौका दिया जाए। जीत का दंभ भरते हुए उन्होंने कहा कि जनता जीत का ताज पहनाकर ही भेजेगी। यही नहीं उन्होंने आगे कहा, निशांत में वह क्षमता है।  कम बोलना और केवल बात का जवाब देना उन्हें आता (Nitish Kumar’s son Nishant may contest from a key Bihar assembly seat) है जदयू सांसद ने कहा कि नालंदा के लोग यह कहते हैं कि नीतीश कुमार के पुत्र को राजनीति में लाएं। मैं भी युवाओं को राजनीति में आगे बढ़ाना चाहता हूं। जदयू पार्टी की कमान थामने के सवाल पर सांसद ने कहा कि निशांत में वह क्षमता है। निशांत की तारीफ करते हुए जदयू सांसद ने कहा कि वो लोगों का आदर करना जानते हैं। अमूमन अन्य नेताओं के बच्चों में नहीं होता है, लेकिन वो मैनें निशांत में देखा है। कम बोलना, बड़ों का आदर करना और उन्हें प्रणाम करना निशांत का स्वभाव है। कम बोलना और केवल बात का जवाब देना उन्हें आता (Nitish Kumar’s son Nishant may contest from a key Bihar assembly seat) है। बता दें कि आये दिन निशांत कुमार के चुनाव लड़ने की चर्चाएं होती रहती है। लेकिन निशांत कुमार ने कभी इसपर सहमति अबतक नहीं जतायी है।  इसे भी पढ़ें:- अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट हुई क्रैश, पूर्व मुख्यमंत्री समेत 242 यात्री थे सवार तेजस्वी यादव ने भी निशांत को राजनीति में आने की (Nitish Kumar’s son Nishant may contest from a key Bihar assembly seat) दी है सलाह बड़ी बात यह कि तेजस्वी यादव ने भी निशांत को राजनीति में आने की सलाह (Nitish Kumar’s son Nishant may contest from a key Bihar assembly seat) दी है। खैर, इस बीच राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने सोमवार को एक नये डिजिटल मंच की शुरुआत की और लोगों से ‘एक नया बिहार बनाने’ के लिए एक साथ आने का आग्रह किया। इस बीच तेजस्वी यादव ने कहा, राज्य के लोग बदलाव चाहते हैं। इस सरकार ने लोगों का विश्वास खो दिया है। वे चुनाव में एक नई सरकार चुनना चाहते हैं। हम उनकी आवाज बनेंगे। उन्होंने कहा, लोगों को आगे आना चाहिए और इस डिजिटल मंच के माध्यम से एक नया बिहार बनाने में हमारा साथ देना चाहिए। Latest News in Hindi Today Hindi Nitish Kumar’s son Nishant may contest from a key Bihar assembly seat #NishantKumar #NitishKumar #BiharElections2025 #JDU #BiharPolitics #AssemblyPolls #PoliticalNews

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Maharashtra civic polls spark new alliances.

महाराष्‍ट्र निकाय चुनाव को लेकर बदल रहा सियासी समीकरण, भाजपा, NCP, शिवसेना और MNS क्‍या बना रहे प्‍लान? 

महाराष्‍ट्र स्थानीय निकाय चुनाव (Maharashtra Local Body Elections) इस साल के अंत तक होने के संभावना है, लेकिन इससे पहले ही राज्य की राजनीतिक हलचल अपने चरम पर पहुंच चुकी है। राजनीतिक पार्टियां निकाय चुनाव (Maharashtra Local Body Elections) में जीत हासिल करने के लिए सियासी जोड़तोड़ में जुटी हैं। राज्य की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) के बदले तेवर देख इंडिया ब्लॉक में पहले से ही हलचल मची हुई है। वहीं महाराष्‍ट्र मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) और राज ठाकरे की हुई ह‍ालिया मुलाकात से महागठबंधन को बेचैन कर दिया है।  तीनों पार्टियों स्‍थानीय चुनाव को लेकर जोर-शोर से कर रही हैं अपनी तैयारियां बता दें कि महाविकास अघाड़ी गठबंधन में शामिल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) गुट शामिल हैं। ये तीनों दल पिछला लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव एकजुट होकर लड़ी थी, लेकिन स्‍थानीय निकाय चुनाव एक साथ लड़ने को लेकर उत्‍सुक नजर नहीं आ रही हैं। तीनों पार्टियों स्‍थानीय चुनाव को लेकर अपनी तैयारियां जोर-शोर से कर रही हैं, लेकिन अभी तक तीनों के बीच इस चुनाव को लेकर कोई संयुक्‍त बैठक नहीं हुई है। जिससे साफ पता चलता है कि स्थानीय चुनाव (Maharashtra Local Body Elections) को लेकर महागठबंधन में दरार पड़ चुका है।   शरद पवार की NCP के लिए करो या मरो की लड़ाई! राजनीतिक जानकारों का कहना है कि शरद पवार (Sharad Pawar) की एनसीपी के लिए यह चुनाव लड़ो या मरो वाला है। इसलिए शरद पवार (Sharad Pawar) अपने लिए बेहतर से बेहतर विकल्‍प की तलाश कर रहे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट में तो यहां तक दावा किया जा रहा है कि शरद पवार आगामी स्थानीय चुनाव से पहले भाजपा (BJP) को छोड़कर अन्‍य किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन कर सकते हैं। पवार की सबसे ज्यादा कोशिश अपने भतीजे अजित पवार के साथ गठबंधन करने की है। इसके लिए दोनों गुट के बीच बातचीत भी चल रही है।  पिछले कुछ दिनों से चाचा और भतीजे के बीच दूरियां कम होती भी नजर आ रही है। दोनों अब सार्वजनिक मंचों पर एक साथ नजर आ रहे हैं। हालही में हुई अजित पवार के बेटे की शादी में पूरा पवार परिवार वर्षों बाद एक साथ नजर आया था। जिसके बाद से ही कायस लगाया जा रहा है कि जल्द ही चाचा-भतीजे फिर से एकसाथ आने की घोषणा कर सकते हैं।  इसे भी पढ़ें:- अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट हुई क्रैश, पूर्व मुख्यमंत्री समेत 242 यात्री थे सवार राज का उद्धव से दूरी बना भाजपा के साथ आने की अटकलें!  वहीं दूसरी तरफ शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और चचेरे भाई राज ठाकरे (Raj Thackeray) के बीच भी भरत मिलाप की अटकलें लगाई जा रही थी। दोनों भाईयों के साथ में आने को लेकर मुंबई में कई जगहों पर पोस्टर भी लग गए थे। उद्धव ठाकरे ने भी संकेत दिया था कि “मामूली मुद्दों” को नजरअंदाज कर वे निकाय चुनाव से पहले साथ आ सकते हैं। लेकिन बीते सप्‍ताह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) और मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बीच हुई मुलाकात के बाद कहा जा रहा है कि राज ठाकरे शायद अब भाजपा के साथ आ सकते हैं।  महायुति गठबंधन में पहले से ही भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित गुट) शामिल हैं। ऐसे में राज ठाकरे के आ जाने से यह गुट और भी ज्यादा मजबूत हो जाएगी, लेकिन इससे सीट बंटवारे को लेकर टकराव बढ़ने का भी अंदेशा है।  Latest News in Hindi Today Hindi Devendra Fadnavis #maharashtrapolitics #civicpolls2025 #bjp #ncp #shivsenanews #mnsupdates #politicalstrategy #electionnews #breakingnews

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Tejaswi Yadav

तेजस्वी यादव का नीतीश सरकार पर हमला: बिहार में आयोगों की नियुक्तियों को बताया परिवारवाद

बिहार में महिला आयोग (Bihar Women’s Commission) समेत विभिन्न आयोगों में हुई नियुक्तियों को लेकर नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) पर हमला बोला है। तेजस्वी ने इन नियुक्तियों को पारदर्शिता और योग्यता के विरुद्ध बताते हुए सरकार पर परिवारवाद और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया। तेजस्वी यादव ने उठाई ‘जमाई आयोग’ बनाने की मांग तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) ने तंज कसते हुए कहा कि बिहार सरकार को एक जमाई आयोग का गठन करना चाहिए क्योंकि यहां आयोगों की नियुक्तियां पारिवारिक रिश्तों के आधार पर की जा रही हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) के दामाद, जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) के दामाद और अशोक चौधरी (Ashok Chaudhari) के दामाद को आयोगों में नियुक्त किया गया है। यह स्पष्ट रूप से परिवारवाद को दर्शाता है और इससे योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हो रहा है। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की पत्नी की नियुक्ति पर सवाल तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) ने विशेष रूप से बिहार महिला आयोग (Bihar Women’s Commission) में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार (Deepak Kumar) की पत्नी की नियुक्ति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उन्हें शिक्षाविद् के रूप में नियुक्त किया गया है, लेकिन क्या बिहार में कोई और योग्य शिक्षाविद नहीं था? तेजस्वी ने आरोप लगाया कि दीपक कुमार की पत्नी ने आवेदन में अपने पति का नाम छुपाकर पिता का नाम लिखा है, जो संदेह पैदा करता है। “मुख्यमंत्री अचेत हैं या शामिल?” तेजस्वी ने सवाल किया कि क्या नीतीश कुमार (Nitish Kumar) इन नियुक्तियों से अनजान हैं या वे स्वयं इस प्रक्रिया में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर विषय है और मुख्यमंत्री को इसका जवाब देना चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सचिवालय में दलित और अल्पसंख्यक विरोधी मानसिकता के लोग काबिज हो चुके हैं और बीजेपी के वफादार कार्यकर्ताओं को भी नजरअंदाज किया जा रहा है। इसे भी पढ़ें:- अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट हुई क्रैश, पूर्व मुख्यमंत्री समेत 242 यात्री थे सवार “बिहार में हो रहा है मलाई का बंटवारा” तेजस्वी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के परिवारवाद विरोधी भाषणों को भी खोखला करार दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में गुपचुप तरीके से सरकार की मलाई बांटी जा रही है और मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री दोनों मिलकर स्पेशल अरेंजमेंट कमीशन (Special Arrangement Commision) चला रहे हैं, जहां केवल खास लोगों के बेटा, दामाद और पत्नी को ही मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि यह सिलसिला अगर यूं ही चलता रहा तो बिहार का प्रशासन और सचिवालय दोनों ही बर्बाद हो जाएंगे। तेजस्वी ने सरकार से अपील की कि वह पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखे ताकि योग्य युवाओं को भी अवसर मिल सके। तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) के इस बयान ने एक बार फिर बिहार की राजनीति को गर्म कर दिया है। उन्होंने ना केवल नीतीश सरकार (Nitish Kumar) के निर्णयों पर सवाल उठाए, बल्कि परिवारवाद के खिलाफ व्यापक बहस को भी हवा दी है। आने वाले चुनावी माहौल में यह मुद्दा किस दिशा में जाता है, यह देखना दिलचस्प होगा। Latest News in Hindi Today Hindi Tejaswi Yadav #tejashwiyadav #nitishkumar #biharpolitics #familyism #nepotism #biharnews #indiapolitics #breakingnews #latestupdate #politicalnews

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Indrayani River bridge in Pune collapses,

Pune Bridge Collapses; No Audit Since 1990: पुणे जिले में इंद्रायणी नदी पर बना पुल ढहा, 6 लोगों की मौत कई लापता, 1990 में बने ब्रिज का कभी हुआ ही नहीं ऑडिट

रविवार को महाराष्ट्र के पुणे जिले में इंद्रायणी नदी पर बना पुल ढह जाने से उफनती नदी में गिरने से छह लोगों की मौत हो गई और 25 से 30 लोग बह गए हैं।। मावल में पिछले दो दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिससे इंद्रायणी का जलस्तर बढ़ गया। इसी वजह से यह हादसा हुआ। गौरतलब हो कि कुंदमाला एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जहां मानसून के दौरान काफी संख्या में पर्यटक आते हैं। छुट्टी का दिन होने के कारण पर्यटकों की संख्या अधिक थी। यह पुल इतना संकरा था कि एक समय में सिर्फ एक दोपहिया वाहन और दो व्यक्ति ही उस पर से जा सकते हैं। लेकिन हादसे के समय पुल पर करीब 7 से 8 दोपहिया थीं। इस वजह से पुल पर जाम लग गया और बाहर निकलना संभव नहीं हो (Pune Bridge Collapses; No Audit Since 1990) पाया। लोगों की बढ़ती भीड़ देख गांववालों ने रविवार दोपहर 12 बजे के करीब पुलिस इस बात की जानकारी दी गई। जिसके बाद करीब चार पुलिसकर्मी पुल पर आए थे और उन्होंने वहां घूमने आए लोगों को वापस जाने को कहा था। हादसे के समय पुल पर 100 से अधिक पर्यटक मौजूद थे।  6 लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब 25 से 30 लोग बह गए (Pune Bridge Collapses; No Audit Since 1990) हैं- सुनील शेल्के (स्थानीय विधायक) खैर, पुल खाली करवाने के कुछ देर बाद पुलिस वाले वापस चले गए थे। लेकिन उसके बाद फिर से लोगों का यहां आना शुरू हो गया और कुछ ही घंटों में ये पुल टूट गया। बचावकर्मी के मुताबिक पुल उस समय ढह गया जब लोग इसे पार कर रहे थे। स्थानीय विधायक सुनील शेल्के के मुताबिक 6 लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब 25 से 30 लोग बह गए (Pune Bridge Collapses; No Audit Since 1990) हैं। इस बीच एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम नदी में बहे पर्यटकों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। घायलों को पास के निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक ये पुल 35 साल पहले यानी साल 1990 में बना था। कमाल यह कि उसके बाद से कभी भी इसका स्ट्रक्चरल ऑडिट हुआ ही नहीं।  हादसे के बाद अब महाराष्ट्र सरकार (Pune Bridge Collapses; No Audit Since 1990) हो गई है अलर्ट  बताया तो यह भी जा रहा है कि पांच साल पहले पीडब्लूडी से मांग की गई थी कि इस पुल को बंद कर दिया जाए। यही नहीं गावंवालों ने सार्वजनिक निर्माण विभाग और ग्राम पंचायत को दो साल पहले ही पत्र लिखकर पुल की मरम्मत करने और पर्यटकों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। खैर, इस हादसे के बाद अब महाराष्ट्र सरकार अलर्ट (Pune Bridge Collapses; No Audit Since 1990) हो गई है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस हादसे में मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों को तत्काल उपचार मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पुराने पुलों के स्ट्रक्चरल ऑडिट का आदेश भी दिया। इस हादसे पर सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इस संदर्भ उन्होंने डिविजनल कमिश्नर, तहसीलदार और पुलिस कमिश्नर तत्परता से बचाव कार्य सुनिश्चित करने और नदी में बहे सभी लोगों को सुरक्षित निकालने के आदेश दिए हैं। यही नहीं, मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सरकार पुल हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। इसके अलावा, राज्य सरकार घायलों के इलाज का खर्च भी वहन करेगी। इसे भी पढ़ें:- अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट हुई क्रैश, पूर्व मुख्यमंत्री समेत 242 यात्री थे सवार सरकार विकास की बातें तो करती हैं, लेकिन एक मजबूत पुल तक नहीं बना सकी- उद्धव ठाकरे, (पूर्व मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र)  कहने की जरूरत नहीं, इस हादसे ने न सिर्फ प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि इसे लेकर राजनीति भी गरमा गई है। शिवसेना-यूबीटी के  प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने घटना पर शोक जताते हुए इसे सरकार की आपराधिक लापरवाही करार (Pune Bridge Collapses; No Audit Since 1990) दिया है। सूबे की सरकार को आड़े हाथों लेते हुए उद्धव ने कहा कि सरकार विकास की बातें तो करती हैं, लेकिन एक मजबूत पुल तक नहीं बना सकी। उस पुराने जर्जर पुल से 44 पर्यटक बह गए, यह अत्यंत दुखद और निंदनीय है। ठाकरे ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर सरकार इस तरह की घटनाओं की जिम्मेदारी कब लेगी? इस बीच उन्होंने राजकोट किले में छत्रपती शिवाजी महाराज की प्रतिमा के चबूतरे की जमीन धंसने की घटना को उठाते हुए कहा, पहले प्रधानमंत्री द्वारा स्थापित की गई प्रतिमा गिर चुकी है और अब नई प्रतिमा के चबूतरे की जमीन ही धंस गई है। यह दर्शाता है कि शिवरायों की स्मृति के साथ भी घोर लापरवाही हो रही है। सरकार अब किस मुंह से सफाई देगी?  Latest News in Hindi Today Hindi Pune Bridge Collapses; No Audit Since 1990 #pune #bridgecollapse #indrayaniriver #newsupdate #puneaccident #breakingnews #tragedy #infrastructure #india #disaster

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Assam CM Himanta Biswa Sarma

Assam CM Orders Shoot-at-Sight: एक्शन में असम के CM सरमा, इस वजह से दिया गोली मारने के आदेश, रातोंरात 38 गिरफ्तार

असम धुबरी में गोमांस कांड में बड़े एक्शन के बाद रातोंरात 38 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। दरअसल, धुबरी कस्बे में रविवार को एक मंदिर के पास मांस के टुकड़े मिलने के बाद लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इलाके में सोमवार को निषेधाज्ञा लागू की गई थी, जिसे मंगलवार को हटा लिया गया। असम के मुख्यमंत्री बिस्वा सरमा (CM Himanta Biswa Sarma) ने स्थिति की समीक्षा के लिए शुक्रवार को धुबरी का दौरा किया। उन्होंने कहा, मेरे गुवाहाटी पहुंचते ही देखते ही गोली मारने का आदेश आज जारी कर दिया (Assam CM Orders Shoot-at-Sight) जाएगा तथा रात में बाहर निकलने वाले या पत्थरबाजी की घटना में संलिप्त व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाएगा। मुख्यमंत्री सरमा ने शुक्रवार को कहा कि बांग्लादेश की सीमा से लगे धुबरी जिले में रात में देखते ही गोली मारने के आदेश लागू होंगे, क्योंकि एक सांप्रदायिक समूह अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहा है, जिसे सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी।  पिछले एक सप्ताह से धुबरी में कानून-व्यवस्था की स्थिति चुनौतीपूर्ण (Assam CM Orders Shoot-at-Sight) बनी हुई है मुख्यमंत्री (CM Himanta Biswa Sarma) ने कहा कि जिले में त्वरित कार्रवाई बल और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों को तैनात किया (Assam CM Orders Shoot-at-Sight) जाएगा। धुबरी में सभी अपराधियों को गिरफ्तार किया जाएगा। सरमा ने आगे कहा कि जिन लोगों ने कानून अपने हाथ में लिये हैं, उनके साथ सख्ती से निपटा जाएगा। बता दें कि पिछले एक सप्ताह से धुबरी में कानून-व्यवस्था की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। दरअसल, बकरीद के अगले दिन सात जून को धुबरी जिला मुख्यालय में हनुमान मंदिर के सामने एक गाय का सिर मिला था। फिर क्या था, इसके बाद हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोगों ने शांति और सद्भाव की अपील की थी। तनाव बढ़ता देख इस पूरे मामले पर सरमा ने बताया कि हालांकि अगले दिन फिर से मंदिर के सामने गाय का सिर रखा गया और रात में पत्थरबाजी की गई। जानकारी के मुताबिक बकरीद से एक दिन पहले नबीन बांग्ला नामक संगठन ने भड़काऊ पोस्टर चिपकाए थे, जिनमें धुबरी को बांग्लादेश में शामिल करने की मंशा जाहिर की गई थी।  इसे भी पढ़ें: माई बहन मान योजना बिहार की करोड़ों महिलाओं के लिए अमृत: डॉ मनोज पांडेय जिले में रात में देखते ही गोली मारने के आदेश लागू (Assam CM Orders Shoot-at-Sight) रहेगा इस हरकत पर मुख्यमंत्री (CM Himanta Biswa Sarma) ने कहा कि धुबरी में अशांति फैलाने के लिए एक सांप्रदायिक समूह सक्रिय हो गया है। इसके बारे में पता चलने के बाद मैं धुबरी आया हूं तथा जिले में रात में देखते ही गोली मारने के आदेश लागू (Assam CM Orders Shoot-at-Sight) रहेगा। धुबरी में सभी अपराधियों को गिरफ्तार किया जाएगा और जिन लोगों ने कानून को अपने हाथ में लिया है, उनके साथ सख्ती से निपटा जाएगा। सीएम सरमा ने कहा, पहले बकरीद पर लोगों का एक वर्ग बीफ खाता था, लेकिन इस बार पश्चिम बंगाल से हजारों मवेशी लाए गए हैं और धुबरी में एक नया बीफ माफिया उभरा है। जिसने त्योहार से ठीक पहले हजारों जानवरों की खरीद की है। यह बात मेरी जानकारी में आई है। मैंने इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं। मैंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे उन लोगों को गिरफ्तार करें, जिन्होंने यह मवेशी व्यापार शुरू किया है। अगले साल वह स्वयं ईद के दिन धुबरी जाएंगे और अगले दिन भी वहीं रहेंगे। यही नहीं सरमा ने कहा कि हम समुदाय के एक वर्ग को इस तरह की गड़बड़ी करने की अनुमति नहीं दे सकते। हमारी सरकार इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। और धुबरी को हमारे हाथों से जाने नहीं देगी। यदि आवश्यकता पड़ी, तो वह पूरी रात हनुमान मंदिर की रखवाली करेंगे। Latest News in Hindi Today Hindi CM Himanta Biswa Sarma #assam #cmhimantabiswasarma #shootatsight #assamnews #lawandorder #latestnews #india #breakingnews

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