नई दिल्ली: कैंसर के इलाज को सस्ता करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण यानी NPPA ने कैंसर की 543 ब्रांड और पैक आकार वाली दवाओं के संशोधित अधिकतम खुदरा मूल्य जारी किए हैं। नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। कुछ दवाओं में बहुत बड़ी कटौती हुई है, जिनमें थायोटेपा सबसे प्रमुख है।
थायोटेपा की कीमत में करीब 91% की कटौती
कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली थायोटेपा की 100 मिलीग्राम शीशी की कीमत ₹80,071 से घटाकर ₹7,150 कर दी गई है। यानी इसकी कीमत में करीब 91% की कमी आई है। यह संशोधित सूची में दर्ज सबसे बड़ी कटौतियों में से एक है।
137 कैंसर रोधी दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन सीमित
सरकार ने 137 गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य के 30% तक सीमित किया है। इसका उद्देश्य वितरण और खुदरा स्तर पर अत्यधिक मार्जिन को रोकना और मरीजों तक दवाएं कम कीमत में पहुंचाना है।
543 ब्रांड की नई कीमतें जारी
NPPA ने दवा कंपनियों द्वारा 27 अक्टूबर तक जमा किए गए आंकड़ों के आधार पर 543 ब्रांड और पैक आकार की नई अधिकतम खुदरा कीमतें जारी की हैं। यह सूची आगे भी कंपनियों से नई जानकारी मिलने पर अपडेट की जाएगी।
कई दूसरी दवाओं के दाम भी काफी घटे
सरकारी सूची के मुताबिक कई प्रमुख कैंसर दवाओं की कीमतों में उल्लेखनीय कमी की गई है। उदाहरण के लिए Azacitidine की एक दवा ₹6,337 से घटकर करीब ₹1,495, जबकि Bevacizumab की एक ब्रांडेड शीशी ₹21,767.70 से घटकर करीब ₹5,930 कर दी गई है।
Pertuzumab की कीमत भी घटी
स्तन कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली Pertuzumab की एक ब्रांड की 30 मिलीग्राम शीशी की कीमत ₹94,951 से घटकर ₹30,593 हुई है। यह करीब 68% की कमी है।
सभी महंगी दवाओं के दाम नहीं घटे
हालांकि राहत सभी दवाओं पर समान नहीं है। कुछ पेटेंट या लाइसेंस सुरक्षा वाली महंगी दवाओं, जैसे pembrolizumab और ribociclib की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ। रिपोर्ट के अनुसार 543 formulations में से 146 की कीमतें जस की तस रहीं, जबकि 21 में ₹100 से भी कम की कटौती हुई।
9 नवंबर से अस्पतालों और दुकानों पर लागू होंगे नए दाम
सरकार ने दवा कंपनियों, खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों को संशोधित कीमतें लागू करने के निर्देश दिए हैं। 9 नवंबर 2026 से मरीजों से नई तय कीमत से अधिक शुल्क नहीं लिया जा सकेगा। अस्पतालों और फार्मेसियों को संशोधित मूल्य सूची प्रदर्शित करनी होगी।
मरीजों को सालाना ₹2,500 करोड़ की बचत का अनुमान
केंद्र सरकार का अनुमान है कि कैंसर दवाओं पर इस तरह के मूल्य नियंत्रण से मरीजों और उनके परिवारों को हर साल करीब ₹2,500 करोड़ की बचत हो सकती है। सरकार ने कहा है कि इससे महंगे कैंसर उपचार तक पहुंच बेहतर होगी।
स्रोत – राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण, प्रेस सूचना ब्यूरो, इंडियन एक्सप्रेस, बिजनेस स्टैंडर्ड
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