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PM Modi roars in Gujarat: गुजरात में गरजे पीएम मोदी, कहा- “अभी, मैंने कुछ नहीं किया है और लोग पाकिस्तान में पसीना बहा रहे हैं”

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद पहली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के दो दिवसीय दौरे पर हैं। आज उन्होंने गुजरात शहरी विकास की 20वीं वर्षगांठ के समारोह में हिस्सा लिया और गांधीनगर में विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इस दौरान पीएम मोदी ने गांधीनगर में रोड शो किया। रोड शो में लोगों ने पुष्प वर्षा की। इस रोड शो में केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल और सीएम भूपेंद्र पटेल भी मौजूद रहे। इस बीच विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि “अगर आप 1960 की सिंधु जल संधि का अध्ययन करेंगे, तो आपको झटका लगेगा। यह तय हुआ था कि जम्मू-कश्मीर की नदियों पर बने बांधों की सफाई नहीं की जाएगी। गाद निकालने का काम नहीं किया (PM Modi roars in Gujarat) जाएगा। तलछट साफ करने के लिए नीचे के गेट बंद रहेंगे। 60 साल तक ये गेट कभी नहीं खोले गए। जिन जलाशयों को 100 प्रतिशत क्षमता तक भरना था, वे अब केवल 2 प्रतिशत या 3 प्रतिशत तक ही सीमित रह गए हैं। अभी, मैंने कुछ नहीं किया है और लोग वहां पसीना बहा रहे हैं। हमने बांधों की सफाई के लिए छोटे-छोटे गेट खोले हैं, और वहां पहले से ही बाढ़ आ गई है।”  शरीर कितना ही स्वस्थ क्यों ना हो लेकिन अगर एक कांटा चुभता (PM Modi roars in Gujarat) है तो पूरा शरीर परेशान रहता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “शरीर कितना ही स्वस्थ क्यों ना हो लेकिन अगर एक कांटा चुभता (PM Modi roars in Gujarat) है तो पूरा शरीर परेशान रहता है। हमने तय कर लिया है उस कांटे को निकाल कर रहेंगे। उन्होंने पूरे जोश भरते हुए कहा कि “मैं 2 दिनों से गुजरात में हूं। कल मैं वडोदरा, दाहोद, भुज, अहमदाबाद गया और आज गांधीनगर, मैं जहां-जहां गया ऐसा लग रहा है देश भक्ति का ज्वार है। गर्जना करता सिंदुरिया सागर और लहराता तिरंगा जन मन के हृदय में मातृभूमि के प्रति अपार प्रेम ऐसा नजारा था ऐसा दृश्य था। ये सिर्फ गुजरात में ही नहीं हिंदुस्तान के कोने-कोने में है।” इसके आगे पीएम मोदी ने कहा कि “1947 में मां भारती के टुकड़े हुए थे। उस समय कटनी चाहिए थी जंजीरें लेकिन काट दी गईं (PM Modi roars in Gujarat) भुजाएं। देश के तीन टुकड़े कर दिए गए और उसी रात पहला आतंकी हमला कश्मीर की धरती पर हुआ। मां भारती का एक हिस्सा आतंकवादियों के बलबूते पर, मुजाहिदीनों के नाम पर पाकिस्तान ने हड़प लिया। अगर उसी दिन इन मुजाहिदीनों को मौत के घाट उतार दिया गया होता और सरदार पटेल की बात मान ली गई होती, तो 75 साल से चला आ रहा ये सिलसिला देखने को नहीं मिलता।” हमारे भारतीय सशस्त्र बलों-हमारे बहादुरों-ने पाकिस्तान को इस तरह से हराया कि (PM Modi roars in Gujarat) वे कभी नहीं भूल पाएंगे पाकिस्तान की कलई खोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि “6 मई की रात जो लोग मारे गए, पाकिस्तान में उन जनाजों को स्टेट ऑनर दिया (PM Modi roars in Gujarat) गया। उनके ताबूतों पर पाकिस्तान के झंडे लगाए गए, वहां की सेना ने उनको सैल्यूट किया।” भारतीय जवानों की बहादुरी का गुणगान करते हुए पीएम ने कहा कि “जब भी भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ, हमारे भारतीय सशस्त्र बलों-हमारे बहादुरों-ने उन्हें इस तरह से हराया कि वे कभी नहीं भूल पाएंगे। यह महसूस करते हुए कि वे भारत के खिलाफ सीधे युद्ध में कभी नहीं जीत सकते, उन्होंने छोटे युद्ध का सहारा लिया, इसके बजाय आतंकवादियों को सैन्य प्रशिक्षण और सहायता प्रदान की। हम इसे छोटा युद्ध नहीं कह सकते हैं।”  इसे भी पढ़ें:- राहुल गांधी ने क्यों ट्वीट किया ‘Not Found Suitable’ और BJP पर क्या लगाया आरोप?  हम 11 नंबर की अर्थव्यवस्था से दुनिया की 4 नंबर की अर्थव्यवस्था (PM Modi roars in Gujarat) बन गए हैं पीएम मोदी ने कहा कि “11 साल के समय में हमने कोरोना देखा, पड़ोसियों के साथ की परिस्थितियों के साथ-साथ प्राकृतिक आपदा को भी (PM Modi roars in Gujarat) झेला, लेकिन इन सबके बावजूद भी हम 11 नंबर की अर्थव्यवस्था से दुनिया की 4 नंबर की अर्थव्यवस्था बन गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि “हमारा लक्ष्य है हम विकास चाहते हैं प्रगति चाहते हैं। इस मिट्टी ने मुझे बड़ा किया है। यहां से मुझे जो शिक्षा और दीक्षा मिली है। जो सपने आपने मुझमें संजोए उसे वास्तविकता में पूरा करने की कोशिश कर रहा हूं।” उन्होंने गुजरात सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि “गुजरात ने नमक से हीरे तक का सफर तय किया है। गुजरात सरकार ने 20 साल के शहरी विकास के लिए जो रोड मैप बनाया है उसे गुजरात के लोगों के लिए सामने रखा है।   साल “2047 तक हिंदुस्तान विकसित ही (PM Modi roars in Gujarat) होना चाहिए पीएम मोदी यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे कहा कि साल “2047 तक हिंदुस्तान विकसित ही (PM Modi roars in Gujarat) होना चाहिए। आजादी के 100 साल ऐसे ही नहीं मनाएंगे। आप कल्पना की कीजिए वीर सावरकर, नेताजी, सरदार पटेल ने आजादी से पहले जो भाव पैदा किया था। इन सबमें आजादी के लिए इच्छा शक्ति नहीं होती तो आज हम आजाद नहीं होते।” पीएम मोदी ने पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए कहा कि “ये प्रॉक्सी वार नहीं आप वार ही कर रहे थे। उन्होंने आतंकियों का राजकीय सम्मान किया। पीएम मोदी ने कहा कि मैं नई पीढ़ी को कहना चाहता हूं कि कैसे देश को बर्बाद किया गया है।”  Latest News in Hindi Today Hindi news PM Modi roars in Gujarat #PMModi #GujaratSpeech #ModiInGujarat #PakistanReaction #ModiRally2025 #ModiSpeechToday #IndianPolitics

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Not Found Suitable

राहुल गांधी ने क्यों ट्वीट किया ‘Not Found Suitable’ और BJP पर क्या लगाया आरोप? 

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने केंद्र सरकार पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाया है कि सरकार पिछड़े वर्गों (SC-ST-OBC) के योग्य उम्मीदवारों को शिक्षा के अवसरों से जानबूझकर दूर कर रही है। उन्होंने नॉट फाउंड सूटेबल (Not Found Suitable) को एक नए प्रकार का मनुवाद करार देते हुए इसे सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों पर हमला बताया है। राहुल गांधी ने यह बयान दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में आरक्षित वर्गों के खाली पदों के मुद्दे पर दिया। उन्होंने दावा किया कि DU में 60% से ज्यादा प्रोफेसर और 30% से अधिक एसोसिएट प्रोफेसर के आरक्षित पद नॉट फाउंड सूटेबल (Not Found Suitable) के बहाने खाली रखे गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि योग्य उम्मीदवारों को ‘उपयुक्त नहीं’ बताकर उन्हें शैक्षणिक और नेतृत्व की मुख्यधारा से दूर रखने की साजिश रची जा रही है। ‘नॉट फाउंड सूटेबल’ बन गया मनुवाद  राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने ट्वीट करते हुए लिखा कि नॉट फाउंड सूटेबल (Not Found Suitable) अब नया मनुवाद है। SC-ST-OBC के योग्य युवाओं को अयोग्य बताकर शिक्षा और नेतृत्व से दूर रखा जा रहा है। यह सामाजिक न्याय का अपमान है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने शिक्षा को समानता का सबसे बड़ा हथियार बताया था और मौजूदा सरकार उसी हथियार को कुंद करने में लगी है। उन्होंने न सिर्फ दिल्ली यूनिवर्सिटी बल्कि IITs, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में भी यही पैटर्न दोहराए जाने का आरोप लगाया। उनके अनुसार यह केवल नौकरी या शिक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह सम्मान, प्रतिनिधित्व और बराबरी की लड़ाई है। राहुल गांधी का DU दौरा और छात्रों से संवाद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस पहुंचे और DUSU (दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन) के छात्रों से बातचीत की। यह मीटिंग DUSU अध्यक्ष के कार्यालय में आयोजित की गई थी, जिसमें उन्होंने आरक्षण, प्रतिनिधित्व और शैक्षणिक न्याय के मुद्दों पर चर्चा की। राहुल ने कहा कि उन्होंने छात्रों से फीडबैक लिया है और अब वे मिलकर BJP-RSS के आरक्षण विरोधी एजेंडे का मुकाबला संविधान की ताकत से करेंगे। इसे भी पढ़ें:- एमपी-हरियाणा में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति, ऑब्जर्वरों की टीम तैनात यूनिवर्सिटी प्रशासन और ABVP का विरोध राहुल गांधी के इस दौरे पर दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आपत्ति जताई है। विश्वविद्यालय के अनुसार राहुल का दौरा संस्थानिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन था। DU ने अपने बयान में कहा कि वह इस घटना की निंदा करता है और आशा करता है कि भविष्य में ऐसा न हो। राहुल गांधी जितनी देर तक  विश्वविद्यालय परिसर में थें तबतक वहां की सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी, जिससे एक प्रमुख छात्र संगठन का कामकाज भी प्रभावित हुआ। इसके विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने डीयू में छात्र सम्मान मार्च निकाला और DUSU कार्यालय के बाहर राहुल गांधी का पुतला दहन किया। राजनीतिक विवाद या सामाजिक विमर्श? राहुल गांधी की यह पहल एक तरफ जहां राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है, वहीं यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक विमर्श को भी जन्म देती है – क्या योग्य उम्मीदवारों को सिर्फ जातिगत पूर्वग्रह के कारण अवसरों से वंचित किया जा रहा है? क्या Not Found Suitable जैसी प्रक्रिया का दुरुपयोग करके आरक्षित वर्गों के खिलाफ संस्थागत भेदभाव हो रहा है? इन सवालों का जवाब देना न सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी है, बल्कि समाज के हर जागरूक नागरिक का भी कर्तव्य है। क्योंकि यह सिर्फ शिक्षा की नहीं, समान अवसर, भागीदारी और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई है। राहुल गांधी ने Not Found Suitable को नया मनुवाद बताते हुए सामाजिक न्याय की लड़ाई को फिर से मुख्यधारा में लाने की कोशिश की है। चाहे उनके बयानों को राजनीति कहें या सच की आवाज, यह तय है कि आरक्षण, प्रतिनिधित्व और समानता का मुद्दा फिर से राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन चुका है। और यह बहस तब तक जरूरी है, जब तक हर योग्य नागरिक को उसका हक न मिल जाए। Latest News in Hindi Today Hindi news Not Found Suitable #RahulGandhi #NotFoundSuitable #BJP #IndianPolitics #Congress

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Modi Pakistan speech

PM Modi sends stern warning to Pakistan: पीएम मोदी की पाकिस्तान को सीधी चेतावनी, कहा “जो सिंदूर मिटाएगा उसका खुद का मिटना तय”

ऑपरेशन सिन्दूर की सफलता के बाद सोमवार यानी 26 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के दाहोद में कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि “आज देश निराशा से निकलकर विश्वास के उजाले में तिरंगा फहरा (PM Modi sends stern warning to Pakistan) रहा है।” इसके साथ ही उन्होंने आतंकवादियों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि “जो हमारी माताओं बहनों का सिंदूर मिटाने की कोशिश करेगा, उसका मिटना तय है।” पीएम मोदी ने कहा कि “जरा सोचिए, जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने जो कुछ किया, क्या भारत चुप बैठ सकता है? क्या मोदी चुप बैठ सकता है? अगर कोई हमारी बहनों के सिंदूर को मिटाएगा तो उसका भी मिटना तय हो जाता है। इसलिए ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं है बल्कि ये हम भारतीयों के संस्कारों और हमारी भावनाओं की अभिव्यक्ति है।” पीएम ने हुंकार भरते हुए कहा कि “आतंकवादियों ने 140 करोड़ भारतीयों को चुनौती दी थी, इसलिए मोदी ने वही किया, जिसके लिए देशवासियों ने मुझे प्रधान सेवक की जिम्मेदारी दी है।” आतंक फैलाने वालों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि मोदी से मुकाबला करना इतना मुश्किल हो सकता (PM Modi sends stern warning to Pakistan) है जनसभा से रूबरू होते हुए पीएम मोदी ने आगे कहा कि “आतंक फैलाने वालों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि मोदी से मुकाबला करना इतना मुश्किल हो सकता (PM Modi sends stern warning to Pakistan) है। आतंकियों को ढूंढ़ निकाला। 22 तारीख को उन्होंने जो खेल खेला था, हमने उनको मिट्टी में मिला दिया। हमारी सेना ने पाकिस्तानी फौज को धूल चटा दी। हम देश की सेना के शौर्य को नमन करते हैं। पाकिस्तान का एकमात्र काम भारत से दुश्मनी करना है।” वो यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि “देश की तरक्की के लिए जो कुछ भी चाहिए, वो हम भारत में ही बनाएं, ये आज के समय की मांग है।” उन्होंने आगे कहा कि “आज हम खिलौने से लेकर सेना के अस्त्र शस्त्र दुनिया के देशों में निर्यात कर रहे हैं। आज भारत रेल, मेट्रो और इसके लिए जरूरी टेक्नोलॉजी खुद बनाता भी है और दुनिया में एक्सपोर्ट भी करता है। थोड़ी देर पहले यहां हजारों करोड़ रुपए की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है।” विरोधियों पर कटाक्ष करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि “कुछ लोगों को आदत हो गई है गालियां देने की। वे कहते थे कि चुनाव आया मोदी जी ने शिलान्यास किया, कुछ बनने वाला नहीं है। आज तीन साल बाद इस फैक्ट्री में पहला इलेक्ट्रिक लोकोमॉटिव बनकर तैयार हो गया, आज उसे हरी झंडी दिखाई।” इसे भी पढ़ें:- एमपी-हरियाणा में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति, ऑब्जर्वरों की टीम तैनात 26 मई 2014 में आज के ही दिन पहली बार मैंने प्रधानमंत्री के तौर पर ली (PM Modi sends stern warning to Pakistan) थी शपथ- पीएम मोदी  देश की तरक्की की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “आज 26 मई का दिन है। साल 2014 में आज के ही दिन पहली बार मैंने प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली (PM Modi sends stern warning to Pakistan) थी। गुजरात के आप सभी लोगों ने मुझे भरपूर आशीर्वाद दिया है। आपके आशीर्वाद से हम देशवासियों की सेवा में लगे रहे हैं। आपके कारण हमने देश में कई बड़े फैसले लिए हैं। देश हर एक सेक्टर में आगे बढ़ा है। आज गुजरात को एक और उपलब्धि हासिल हुई है। गुजरात के शत-प्रतिशत रेलवे नेटवर्क का विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। इसके लिए मैं आप सभी को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।” Latest News in Hindi Today Hindi news PM Modi sends stern warning to Pakistan #PMModi #PakistanWarning #SindoorStatement #IndiaPakistan #ModiSpeech #BoldStatement #IndianPolitics

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Lalu Yadav expels son

Lalu Expels Son from Party: इस वजह से लालू ने अपने बड़े बेटे को निकाला पार्टी से, तेजस्वी यादव ने कही यह बात

अक्सर अपने बड़बोलेपन की वजह से अक्सर विवादों में रहने वाले राष्ट्रिय जनता दल के मुखिया लालू प्रसाद यादव के बड़े लाल इन दिनों सुर्ख़ियों में बने हुए हैं।  राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पार्टी और परिवार दोनों से दूर करने की घोषणा की (Lalu Expels Son from Party) है। दरअसल, एक दिन पहले शनिवार को तेज प्रताप यादव के सोशल मीडिया अकाउंट का कथित पोस्ट वायरल हुआ था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस पोस्ट में दावा किया गया था कि यह पोस्ट तेज प्रताप यादव ने किया हैं। उक्त पोस्ट में उन्हें एक युवती के साथ देखा गया था। इसमें लिखा गया था, “मैं तेज प्रताप यादव और मेरे साथ इस तस्वीर में जो दिख रही हैं, उनका नाम अनुष्का यादव है। हम दोनों पिछले 12 सालों से एक-दूसरे को जानते हैं और प्यार भी करते हैं। हम लोग पिछले 12 साल से एक रिलेशनशिप में रह रहे हैं।” हालांकि, इस पोस्ट से जुड़े स्क्रीनशॉट के वायरल होने के कुछ घंटे बाद तेज प्रताप यादव की तरफ से सफाई भी आई। उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि “मेरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को हैक एवं मेरे तस्वीरों को गलत तरीके से एडिट कर मुझे और मेरे परिवार वालों को परेशान और बदनाम किया जा रहा है, मैं अपने शुभचिंतकों और फॉलोअर्स से अपील करता हूं कि वे सतर्क रहें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें।” हम ऐसी चीजों को पसंद नहीं करते हैं और न बर्दाश्त हम कर सकते (Lalu Expels Son from Party) हैं- तेजस्वी यादव खैर, इस बीच तेज प्रताप यादव के पार्टी से निष्कासित करने को लेकर जब तेजस्वी यादव से पूछा गया (Lalu Expels Son from Party) तो जवाब में उन्होंने कहा कि “ऐसी चीजें को वो अनदेखा नहीं कर सकते हैं। बर्दास्त भी नहीं कर सकते हैं।” तेजस्वी यादव ने अपनी बात रखते हुए कहा कि “एक बात स्पष्ट है, जहां तक मेरी बात है, हमें ये सब चीजें न तो अच्छा लगती हैं, न बर्दाश्त करते हैं। दूसरी बात हम अपना काम कर रहे हैं, बिहार के प्रति समर्पित हैं और जनता के दुख-सुख में भाग ले रहे हैं। जनता के मुद्दे को उठा रहे हैं। हम नेता विरोधी दल हैं। जहां तक मेरे बड़े भाई की बात है। राजनीतिक जीवन में, निजी जीवन भी अलग होता है, तो निजी जीवन के फैसले और निर्णय, क्योंकि वो बालिग हैं, बड़े हैं, उनको अधिकार है। वो अपना निर्णय, क्या उनका सही होगा, क्या नुकसान होगा, ये अपना निर्णय वो खुद लें और राष्ट्रीय अध्यक्ष जी दल के नेता हैं, उन्होंने अपने ट्वीट के माध्यम से स्पष्ट कर दिया है, जो उनकी भावनाएं थीं। हम ऐसी चीजों को पसंद नहीं करते हैं और न बर्दाश्त हम कर सकते हैं।” तेजप्रताप यादव को गैरजिम्मेदाराना (Lalu Expels Son from Party) व्यवहार के कारण छह साल के लिए पार्टी से किया निष्कासित  तो वहीं लालू प्रसाद ने रविवार को अपने बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को गैरजिम्मेदाराना (Lalu Expels Son from Party) व्यवहार के कारण छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। यही नहीं, उनके साथ सभी पारिवारिक संबंध भी तोड़ दिए हैं। अपने फैसले पर लालू प्रसाद ने कहा कि “ज्येष्ठ पुत्र की गतिविधि, लोक आचरण तथा गैर जिम्मेदाराना व्यवहार हमारे पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों के अनुरूप नहीं है। उपरोक्त परिस्थितियों के चलते उसे पार्टी और परिवार से दूर करता हूं। अब से पार्टी और परिवार में उसकी किसी भी प्रकार की कोई भूमिका नहीं रहेगी। उसे पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किया जाता है। अपने निजी जीवन का भला-बुरा और गुण-दोष देखने में तेजप्रताप स्वयं सक्षम हैं। उससे जो भी लोग संबंध रखेंगे वो स्वविवेक से निर्णय लें। लोकजीवन में लोकलाज का सदैव हिमायती रहा हूं। परिवार के आज्ञाकारी सदस्यों ने सावर्जनिक जीवन में इसी विचार को अंगीकार कर अनुसरण किया है।” इसे भी पढ़ें:-लालू की पार्टी आरजेडी के नेता शंभू गुप्ता 2 करोड़ रुपये की अफीम के साथ गिरफ्तार तेज प्रताप यादव और अनुष्का यादव की तस्वीरें सोशल मीडिया पर (Lalu Expels Son from Party) हो रही हैं वायरल  बता दें कि तेज प्रताप यादव, लालू यादव के बड़े बेटे हैं। हाल के दिनों में वो अपनी दूसरी (Lalu Expels Son from Party) शादी और प्रेम संबंधों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। अभी एक दिन पहले ही तेज प्रताप यादव के फेसबुक पेज से नए रिश्ते के बारे में जानकारी दी गई थी। हालांकि तेज प्रताप ने इससे साफ़ इनकार कर दिया है। यह तो ठीक, लेकिन जिस तरह से तेज प्रताप यादव और अनुष्का यादव की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, उससे तो ऐसा लगता है कि लालू परिवार सकते में आ गया है। कारण यही जो, लालू यादव ने पार्टी और परिवार दोनों से अपने बड़े बेटे को दूर कर दिया।  Latest News in Hindi Today Hindi news Lalu Expels Son from Party #LaluYadav #TejashwiYadav #TejPratapYadav #RJD #BiharPolitics #LaluExpelsSon #PoliticalDrama

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Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum

Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum: ताजा सर्वे में नितीश को लगा झटका, बीजेपी और तेजस्वी की बल्ले-बल्ले 

इस साल बिहार में चुनाव होना है। फ़िलहाल भारतीय चुनाव आयोग चुनावी तैयारियों की समीक्षा कर रहा है। अभी तक चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की है। अक्टूबर-नवंबर होने वाले बिहार चुनाव में भाजपा-जदयू (एनडीए गठबंधन) का मुकाबला राजद-कांग्रेस के महागठबंधन से होगा। खैर, चुनाव होने में अभी तो महीनो बाकी है। इस बीच इंकइनसाइट द्वारा मई के शुरू में जारी एक नए ओपिनियन पोल ने नेताओं की नींद हराम कर दी है। सर्वे के मुताबिक सूबे की महिलाएं राज्य में सरकार बनाने के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन को अपनी पहली पसंद बता (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) रही हैं। दरअसल, सर्वे में शामिल 45 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि वे नीतीश को फिर से सूबे के मुखिया के तौर पर देखना चाहती हैं। यही नहीं, सर्वे के मुताबिक बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन, राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन से अधिक लोकप्रिय है। इस सर्वे में 60.4 प्रतिशत महिलाओं ने दावा किया है कि वो सत्तारूढ़ गठबंधन को वोट देना पसंद करेंगी, जबकि 28.4 प्रतिशत ने महागठबंधन का समर्थन किया है।  18-29 आयु वर्ग के 42 प्रतिशत लोगों ने अगले सीएम के तौर पर तेजस्वी यादव को किया (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) पसंद   एक तरफ जहाँ नितीश कुमार बतौर महिलाओं की पहली पसंद बने हुए हैं तो वहीं आरजेडी नेता तेजस्वी यादव युवाओं के बीच पहली पसंद बनकर उभरे हैं।  इंकइनसाइट के सर्वे में शामिल 18-29 आयु वर्ग के 42 प्रतिशत लोगों ने अगले सीएम के तौर पर नीतीश की जगह उन्हें पसंद किया (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) है। हालांकि, एनडीए अभी भी युवाओं के बीच पहली पसंद बनी हुई है। 18-29 आयु वर्ग के 44.6 प्रतिशत लोगों ने कहा कि “वो एनडीए को वोट देंगे, वहीं 39.5 प्रतिशत ने कहा कि वे महागठबंधन को सत्ता में देखना पसंद करेंगे।” सिर्फ 0.76 प्रतिशत ने कहा कि “वो प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को वोट देंगे।” इस ओपिनियन पोल में शामिल 39 प्रतिशत लोगों ने कहा कि “वो तेजस्वी यादव को बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) हैं तो वहीं 34 प्रतिशत लोगों ने कहा कि “वो इस पद पर नीतीश कुमार को पसंद करेंगे।” बता दें कि ये दूसरा ओपिनियन पोल है जिसमें आरजेडी के तेजस्वी यादव को सीएम पद की पहली पसंद बताया गया है। गौरतलब हो कि “सी-वोटर के पहले के प्री-पोल सर्वे में तेजस्वी यादव को सीएम पद के लिए शीर्ष पसंद बताया गया था। उसमें प्रशांत किशोर दूसरे स्थान पर थे और उसके बाद नीतीश कुमार तीसरे स्थान पर थे।  इसे भी पढ़ें:-लालू की पार्टी आरजेडी के नेता शंभू गुप्ता 2 करोड़ रुपये की अफीम के साथ गिरफ्तार तेजस्वी यादव सीएम के रूप में शीर्ष बने हुए (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) हैं पसंद  गौर करने वाली बड़ी बात यह कि “सर्वे के मुताबिक, 30-39 वर्ष आयु वर्ग और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों के बीच तेजस्वी यादव सीएम के रूप में शीर्ष पसंद बने हुए (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) हैं। दूसरी ओर, 40-49 वर्ष और 50-59 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं के बीच नीतीश कुमार शीर्ष पसंद हैं। दिलचस्प बात ये है कि अधिकांश 45.8 प्रतिशत पुरुषों ने कहा कि “वो तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री के रूप में पसंद करेंगे।” कुल-मिलाकर इस सर्वे के मुताबिक महिलाओं के बीच, राज्य में एक और कार्यकाल के लिए सरकार बनाने हेतु एनडीए शीर्ष विकल्प बना हुआ है। इस सर्वे में 60.4 प्रतिशत ने दावा किया है कि वो सत्तारूढ़ गठबंधन को वोट देना पसंद करेंगी, तो वहीं 28.4 प्रतिशत ने महागठबंधन का समर्थन किया है। Latest News in Hindi Today Hindi news Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum #NitishKumar #BiharPolitics #BJPVictory #TejashwiYadav #ElectionSurvey #PoliticalTwist #BJPvsJDU #IndiaElections #BiharUpdates #VoterMood

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Jharkhand Encounter: 15 Lakh Rewarded Pappu Lohra Killed: झारखंड के इचाबार सलैया जंगल में भीषण एनकाउंटर, मारा गया 15 लाख का इनामी कुख्यात पप्पू लोहरा

झारखंड के लातेहार जिले के इचाबार सलैया जंगल में शनिवार सुबह सुरक्षाबलों और उग्रवादियों के बीच एक भीषण मुठभेड़ हुई। इस एनकाउंटर में सुरक्षा बलों ने झारखंड जन मुक्ति परिषद (JJMP) के कुख्यात सरगना पप्पू लोहरा (Pappu Lohra) और उसके एक साथी को मार (Jharkhand Encounter: 15 Lakh Rewarded Pappu Lohra Killed) गिराया। यह वही पप्पू लोहरा था, जिसके सिर पर सरकार ने 15 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। यह मुठभेड़ लातेहार के उस इचाबार सलैया के जंगल में हुई जो कुछ साल पहले तक नक्सलियों का बड़ा गढ़ माना जाता था।  झारखंड पुलिस (Jharkhand Police) ने इस मुठभेड़ की जानकारी देते हुए बताया कि हमें खुफिया इनपुट मिला था कि पप्पू लोहरा (Pappu Lohra) अपने साथियों के साथ जंगल में छिपा हुआ है। इसके बाद झारखंड पुलिस (Jharkhand Police) के जवानों ने अर्ध सैनिक बलों के साथ मिलकर इचाबार सलैया जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सुरक्षा बलों ने रात से ही इलाके की घेराबंदी शुरू की दी और सुबह होते ही दोनों तरफ से गोलीबारी शुरू हो गई। कई घंटे तक चली मुठभेड़ के बाद जब फायरिंग थमी, तो सुरक्षा बलों को जमीन पर दो शव पड़े मिले। इनकी पहचान पप्पू लोहरा (Pappu Lohra) और उसके साथी के रूप में की गई। पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए यह एक बड़ी सफलता है।  पहले नक्सली था पप्पू लोहरा, फिर बना लिया अपना गैंग  पप्पू लोहरा का नाम झारखंड के नक्सल प्रभावित जिलों में आतंक का पर्याय बन चुका था। इसने एक आम नक्सली के तौर पर शुरुआत की की, लेकिन जब सुरक्षा बलों ने बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र में मौजूद नक्सलियों को वहां से खदेड़ दिया तो इसने नक्सलियों से अलग होकर अपना एक नया संगठन जेजेएमपी (JJMP) बना लिया। इसके बाद यह क्षेत्र में अवैध वसूली, लूटपाट, धमकी और सरकारी प्रोजेक्ट्स को निशाना बनाने जैसे काम करना शुरू कर दिया। पुलिस के मुताबिक, लोहरा का गिरोह क्षेत्र में ठेकेदारों, व्यापारियों और ग्रामीणों को धमका कर उनसे वसूली करता था। इसने कई बार सुरक्षा बलों पर भी हमला किया। जिसकी वजह से ही सुरक्षा बल लंबे समय से इसकी तलाश कर रही थी।  एनकाउंटर के बाद जब सुरक्षा बलों को पता चला कि मारा गया उग्रवादी पप्पू लोहरा है, तो मौके पर मौजूद जवानों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। इस ऑपरेशन को झारखंड पुलिस और राज्य सरकार नक्सल विरोधी मुहिम में एक निर्णायक सफलता मान रही है। क्योंकि यह सिर्फ एक आतंकी के अंत की कहानी नहीं है, बल्कि लाखों नागरिकों को उस भय और दबाव से छुटकारा दिलाने की थी, जो पप्पू लोहरा ने बना रखा था।  इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तानी जासूस ज्योति के समर्थन में उतरी पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर हीरा बतूल, जानें क्या है रिश्ता  छत्तीसगढ़ में भी नक्सलियों की कमर टूट रही है बता दें कि सुरक्षा बलों ने इस समय नक्सलवाद के खिलाफ जबरदस्त अभियान चला रखा है। पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों ने पिछले कुछ सप्ताह के अंदर ही 100 से ज्यादा नक्सलियों को मार गिराया है। इसमें करोड़ों रुपये इनामी कई टॉप कमांडर भी शामिल हैं। इसके अलावा हजारों ने नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के सामने हथियारों के साथ सरेंडर भी किया है। कहा जा रहा है कि देश में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई निर्णायक मोड़ में पहुंच गई है। भारत सरकार ने मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह से खत्म कर देने का वादा किया है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Jharkhand Encounter: 15 Lakh Rewarded Pappu Lohra Killed #PappuLohra #JharkhandEncounter #NaxalNews #CRPFSuccess #SalaiyaJungle #15LakhReward #MaoistKilled #BreakingNews #LawAndOrder #IndianSecurityForces

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Asaduddin Owaisi

असदुद्दीन ओवैसी ने क्यों कहा “मेरा हाल तो ऐसा हो गया है, जैसे गरीब की जोरू, सबकी भाभी बन गई है”

पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब करने के लिए भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor)  के अंतर्गत भारतीय प्रतिनिधिमंडलों को दुनियाभर के देशों में भेजा जा रहा है। यह मिशन न केवल पाकिस्तान की नापाक इरादे को उजागर कर रहा है बल्कि भारत की सैन्य और कूटनीतिक ताकत को भी मजबूती दे रहा है। और अब इसी संदर्भ में एक राजनीतिक विवाद सुर्ख़ियों में है। दरअसल ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की द्वारा कही बात सुर्ख़ियों में है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने लिखा था पत्र  भोपाल के कांग्रेस नेता और विधायक आरिफ मसूद (Congress Leader Arif Masood) ने कुछ दिन पहले चिट्ठी लिखी थी, जिसमें यह लिखा गया था कि ओवैसी के विदेश दौरे पर जा रहे सांसदों को कहा कि वे केंद्र सरकार से साफ करें कि मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में दिए गए विवादित बयान पर यदि विदेशों में सवाल उठे तो उसका जवाब क्या दिया जाए। उनका तर्क था कि विदेशों में भारत की छवि पर असर न पड़े, इसलिए पहले से स्पष्टीकरण होना चाहिए। असदुद्दीन ओवैसी का तीखा पलटवार अब इसी विषय पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और ओवैसी ने अपने ही अंदाज़ में कहा कि  “दुनिया में कोई ऐसा माई का लाल पैदा  नहीं हुआ, जिसके सवाल का जवाब अल्लाह और उसके रसूल के सदके में ओवैसी न दे सके।” ओवैसी ने आरिफ मसूद को ‘छोटा भाई’ कहकर संबोधित किया और कहा कि वह पूरी बेबाकी से हर मंच पर जवाब देने को तैयार हैं।  असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा उन्हें प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया जाना इस बात का संकेत है कि सरकार भी उनकी बेबाकी की कद्र करती है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर भी तंज कसते हुए कहा कि “मेरा हाल तो ऐसा हो गया है, जैसे गरीब की जोरू, सबकी भाभी बन गई है।” उनका इशारा था कि हर दल उनके निर्णयों पर टिप्पणी कर रहा है, मानो वे किसी के अपने नहीं। इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तानी जासूस ज्योति के समर्थन में उतरी पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर हीरा बतूल, जानें क्या है रिश्ता  AIMIM और असदुद्दीन ओवैसी की राजनीति  असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) भारतीय राजनीति में एक प्रखर और मुखर नेता के रूप में जाने जाते हैं। AIMIM की स्थापना उनके दादा अब्दुल वहीद ओवैसी ने की थी, लेकिन इसे राष्ट्रीय पहचान असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व में मिली। वे हमेशा से मुस्लिम समाज से जुड़े मुद्दों को संसद और अन्य मंचों पर मजबूती से उठाते रहे हैं। उनकी पार्टी AIMIM ने हैदराबाद के बाहर भी उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और झारखंड जैसे राज्यों में अपनी पैठ बनाने की कोशिश की है। हालांकि उन पर यह आरोप भी लगते रहे हैं कि उनकी राजनीति ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती है, लेकिन ओवैसी हमेशा यह कहते आए हैं कि वे सिर्फ संविधान और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात करते हैं। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दे पर जब राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो जाती है, तब असली फोकस छूटने लगता है। आरिफ मसूद की चिंता अपनी जगह वाजिब हो सकती है, लेकिन असदुद्दीन ओवैसी ने जिस तरह से आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया, वह दिखाता है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का पक्ष मजबूती से रखने को तैयार हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भारतीय राजनीति में  असदुद्दीन ओवैसी  (Asaduddin Owaisi) एक ऐसे नेता हैं, जो किसी भी कठिन परिस्थिति में अपने विचारों को स्पष्ट और निर्भीकता से रखने से नहीं चूकते। उनकी यही शैली उन्हें बाकी नेताओं से अलग बनाती है – चाहे वह संसद हो या फिर कोई अंतरराष्ट्रीय मंच। Latest News in Hindi Today Hindi news Asaduddin Owaisi  #AsaduddinOwaisi #Congress #ArifMasood #OperationSindoor

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ED report Sonia, Rahul Gandhi crime money

ED report Sonia, Rahul Gandhi crime money: नेशनल हेराल्ड केस में ईडी का बड़ा दावा, सोनिया-राहुल गांधी ने अपराध से कमाए इतने करोड़ रूपये

ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने बुधवार को राउज एवेन्यू कोर्ट को बताया कि “कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कथित तौर पर तक़रीबन 142 करोड़ रुपये की आपराधिक आय से लाभ (ED report Sonia, Rahul Gandhi crime money) उठाया है।” गौरतलब हो कि इस मामले में कोर्ट ने राहुल और सोनिया गांधी सहित सैम पित्रोदा और अन्य को नोटिस जारी किया है। ईडी के विशेष वकील जोहेब हुसैन ने तर्क दिया कि आपराधिक गतिविधि के माध्यम से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त की गई कोई भी संपत्ति अपराध की आय के रूप में योग्य है। इसमें न सिर्फ अनुसूचित अपराधों से संपत्तियां शामिल हैं, बल्कि उन संपत्तियों से जुड़ी आय भी शामिल है।  सोनिया, राहुल और कई अन्य लोगों पर 988 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का लगाया (ED report Sonia, Rahul Gandhi crime money) था आरोप  ईडी के स्पेशल वकील जोहेब हुसैन ने दावा किया कि आरोपियों द्वारा प्राप्त 142 करोड़ रुपये की किराये की आय को अपराध की आय के रूप में माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि “सोनिया और राहुल गांधी, जिनके पास सामूहिक रूप से यंग इंडियन में 76% हिस्सेदारी है, ब्रीच ऑफ ट्रस्ट में शामिल थे। ईडी के अनुसार, यंग इंडियन ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) से सिर्फ 50 लाख रुपये में 90.25 करोड़ रुपये की संपत्ति हासिल की।” जानकारी के मुताबिक पिछले महीने दाखिल की गई अपनी चार्जशीट में ईडी ने सोनिया, राहुल और कई अन्य लोगों पर 988 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया (ED report Sonia, Rahul Gandhi crime money) था। जानकारी के मुताबिक यह चार्जशीट दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की सुसंगत धाराओं के तहत दाखिल की गई थी। चार्जशीट में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को आरोपी नंबर 1 और उनके बेटे राहुल गांधी को आरोपी नंबर 2 बनाया गया है। साल 1938 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने नेशनल हेराल्ड की थी अखबार की स्थापना  अपनी चार्जशीट में केंद्रीय एजेंसी ने अपने आरोपों को पुख्ता करने के लिए आयकर विभाग के 2017 के मूल्यांकन आदेश का सहारा लिया है। इस चार्जशीट में में दावा किया गया है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रमुख सदस्यों ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) और यंग इंडियन के प्रमुख अधिकारियों के साथ मिलकर एजेएल की संपत्तियों पर नियंत्रण पाने हेतु आपराधिक साजिश रची। इसकी अनुमानित कीमत करीब 2,000 करोड़ (ED report Sonia, Rahul Gandhi crime money) रुपये है। ध्यान देने वाली बात यह कि एजेएल एक गैर-सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनी है, जो ऐतिहासिक रूप से नेशनल हेराल्ड अखबार के प्रकाशन से जुड़ी हुई है। बात करें नेशनल हेराल्ड अखबार की तो, साल 1938 में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने नेशनल हेराल्ड अखबार की स्थापना की थी। यह अखबार स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कांग्रेस पार्टी का मुखपत्र हुआ करता था। इसे एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड यानी कि एजेएल प्रकाशित करती थी। जिसकी स्थापना 1937 में हुई थी। एजेएल के पास दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और अन्य शहरों में कई महंगी प्रॉपर्टी थीं। ये सभी प्रॉपर्टी उन्हें सरकारी रियायतों पर मिली थीं।  इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तानी जासूस ज्योति के समर्थन में उतरी पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर हीरा बतूल, जानें क्या है रिश्ता  इसका मकसद सिर्फ 2000 करोड़ रुपये (ED report Sonia, Rahul Gandhi crime money) की प्रॉपर्टी पर करना था कब्जा  इस बीच लगातार हो रहे घाटे की वजह से साल 2008 में नेशनल हेराल्ड अखबार बंद हो गया। गौर करनेवाली बात यह कि उस समय एजेएल पर कांग्रेस पार्टी का 90 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज था। खैर, बीजेपी के वरिष्ठ नेता और वकील सुब्रमण्यम स्वामी ने दिल्ली की एक कोर्ट में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज की। अपनी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि “गांधी परिवार ने यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईपीएल) नाम की कंपनी के जरिए एजेएल की संपत्तियों को धोखे से हासिल किया था। सुब्रमण्यम स्वामी के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया अवैध थी। और इसका मकसद सिर्फ 2000 करोड़ रुपये (ED report Sonia, Rahul Gandhi crime money) की प्रॉपर्टी पर कब्जा करना था। Latest News in Hindi Today Hindi news ED report Sonia, Rahul Gandhi crime money #EDReport #SoniaGandhi #RahulGandhi #NationalHeraldCase #CrimeMoney #IndianPolitics #CongressScam #MoneyLaundering #PoliticalNews #BreakingNews

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Did Rajiv Gandhi know about his assassination

Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?: क्या सच में हो गया था पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को अपनी मौत का आभास?

आज ही के दिन 34 वर्ष पूर्व लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम के आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की मौत हो गई (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) थी। हैरत की बात यह कि इस घटना से कुछ घंटे पहले ही नीना गोपाल ने राजीव गांधी का इंटरव्यू लिया था। इस दौरान उन्होंने राजीव से पूछा कि “क्या उन्हें लगता है कि उनकी जिंदगी खतरे में है?” इस सवाल के जवाब पर राजीव गांधी ने उल्टा पूछा कि “क्या आपने कभी गौर किया है कि दक्षिण एशिया में जब भी कोई महत्वपूर्ण नेता सत्ता पर काबिज होता है या अपने देश के लिए कुछ हासिल करने के करीब होता है, तब उसे कैसे नीचे गिराया जाता है, उस पर हमला किया जाता है, उसे मार दिया जाता है, श्रीमती इंदिरा गांधी को देखिए, शेख मुजीब, जुल्फिकार अली भुट्टो, भंडारनायके को देखिए।” नीना के मुताबिक इस इंटरव्यू के कुछ देर बाद राजीव गाँधी की हत्या कर दी गई थी।  रजीव गाँधी को भी अपनी हत्या का हो गया (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) था आभास? ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या जिस तरह इंदिरा गांधी ने अपनी हत्या की आशंका जता दी थी ठीक उसी तरह क्या रजीव गाँधी को भी अपनी हत्या का आभास हो गया (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) था? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लिट्‌टे के इंटरसेप्ट किए गए कई मैसजों में राजीव गांधी को खत्म करने की बात कही गई थी। ये खुफिया इनपुट अप्रैल 1990 से मई 1991 के बीच इंटरसेप्ट किए गए थे। बता दें कि नीना गोपाल ने कर्नल हरिहरन के हवाले से अपनी किताब में लिखा है कि जब उनकी टीम ने राजीव गांधी की हत्या की साजिश रचने का संकेत देने वाला लिट्‌टे का एक कैसेट उन्हें सुनाया, तो वे सन्न रह गए थे। यहाँ ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि अनहोनी होने की आशंका के बावजूद पूर्व प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर भयावह लापरवाही बरती गई।  लिट्टे के खिलाफ सशस्त्र बलों को भेजना राजीव गाँधी को पड़ा (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) भारी दरअसल, श्रीलंका में फैले उग्रवादी विद्रोह को समाप्त करने हेतु राजीव गाँधी ने भारतीय सशस्त्र बलों को भेजा था। उनका यही कदम उनके जान की आफत (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) बना। जानकारी के मुताबिक यह कदम उठाने की सलाह कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग, सैन्य कमांडरों और खुफिया एजेंसियों ने दी थी। खैर, इस दौरान कई भारतीय सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इन सब के बावजूद लिट्टे पर काबू नहीं पाया जा सका। इसके बाद भारतीय सैनिकों को वापस बुला लिया गया। भले ही सैनिकों को वापस बुला लिया लेकिन तब तक राजीव गांधी लिट्टे का सबसे बड़ा दुश्मन बन चुके थे।  नहीं थे, सुरक्षा के पुख्ता (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) इंतजाम  गौरतलब हो कि साल 1991 में केंद्र में चंद्रशेखर सरकार के पतन के बाद मध्यावधि चुनावों की घोषणा कर दी गई (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) थी। चुनाव प्रचार जोरों पर थे। उन दिनों राजीव गांधी तमिलनाडु के चुनावी दौर पर थे। इस बीच 21 मई की रात चेन्नई से तकरीबन 40 किमी दूर श्रीपेरंबुदुर पहुंचे। हैरत की बात यह कि सुरक्षा के इन्तेजामत उस  तरह के नहीं थे जिस तरह के होने चाहिए थे। खैर, उन्हें पहुँचते-पहुँचते 10 बज गए थे। रात काफी हो चुकी थी, सो वो तेजी से कदम बढ़ाते हुए रेड कार्पेट से होते हुए स्टेज की तरफ बढ़ रहे थे। इस दौरान वो सभी से फूलमालाएं स्वीकार करते जा रहे थे। तभी उनकी नजर एक छोटी-सी लड़की कोकिला पर गई, जो कविता सुना रही थी। उसे देख वो रुक गए तभी आत्मघाती दस्ते में शामिल धनु हाथ में चंदन की माला लेकर आगे बढ़ी।  इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तानी जासूस ज्योति के समर्थन में उतरी पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर हीरा बतूल, जानें क्या है रिश्ता  धमाके के बाद उनकी पहचान उनके जूते से हो हुई (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) थी खैर, इस बीच उन्होंने कांस्टेबल अनुसूया को भीड़ को नियंत्रित करने का इशारा किया, लेकिन तब तक धनु राजीव के चरण स्पर्श करने का बहाना करते हुए झुकी और तभी उसने अपने शरीर से लिपटे आरडीएक्स विस्फोट से लदे डिवाइस के बटन को दबा दिया। धमाका इतना तीव्र था कि राजीव गाँधी के चिथड़े उड़  (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) गए। धमाके की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि उनकी पहचान उनके जूते से हो हुई थी। कहते हैं बम विस्फोट में 46 साल के राजीव का शव इस कदर क्षत-विक्षत हो गया था कि डॉक्टरों ने बमुश्किल उसे रुई और पट्टियों की मदद से आकार दिया था।  Latest News in Hindi Today Hindi news Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death? #RajivGandhi #DeathMystery #IndianPolitics #RajivAssassination #LTTE #IndiaHistory #PoliticalTruth #GandhiFamily #RajivLegacy #HistoricalFacts

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One Nation One Election

One Nation One Election: इतना भी आसान नहीं है वन नेशन-वन इलेक्शन करवाना, कुल इतने हजार करोड़ होंगे खर्च

देश में हर साल कहीं न कहीं, कोई न कोई चुनाव होता ही रहता है। कभी इस राज्य में चुनाव तो कभी उस राज्य में। इस बीच बीते वर्षों में वन नेशन वन इलेक्शन (One Nation One Election) की चर्चा जोरों पर है। कुछ राजनीतिक पार्टियां हैं जो इसके पक्ष में हैं, तो कुछ विपक्ष में। खैर, ऐसे में बड़ा सवाल कि क्या देश में वन नेशन वन इलेक्शन यानी एक साथ लोकसभा और विधानसभ चुनाव संपन्न करा पाना आसान है? और उससे भी बड़ा सवाल यह कि इसे कराने में आखिर खर्च कितना आएगा? कहने की जरूरत नहीं इसे कराने में कई हजार करोड़ खर्च होंगे। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यदि साल 2029 में सरकार वन नेशन वन इलेक्शन कराती है तो चुनाव आयोग को काम से काम 1 करोड़ ईवीएम मशीन, 34 लाख वीवीपैट मशीन, 48 लाख बैलेटिंग यूनिट और 35 लाख कंट्रोल यूनिट की जरूरत होगी। इसे खरीदने में कुल 5,300 करोड़ रुपये से भी अधिक खर्च होगा।  ज्वाइंट पार्लियामेंटरी कमेटी वन नेशन-वन इलेक्शन (One Nation One Election) के मुद्दे पर कर रही है विचार  दरअसल, इकोनॉमिक्स टाइम्स की मानें तो इस पर चुनाव आयोग ने एक असिसमेंट किया है, जिसमें एक साथ चुनाव कराने में 5,300 करोड़ रुपये से ज्यादा आने आने का अनुमान लगाया गया है। फिलहाल अभी वन नेशन वन इलेक्शन (One Nation One Election) बिल ज्वाइंट पार्लियामेंटरी कमेटी के पास है, जिस पर सुझाव लिए जा रहे हैं। इस बीच चुनाव आयोग संसदीय समिति के सवालों का जवाब तैयार कर रहा है। यह समिति वन नेशन-वन इलेक्शन (एक देश, एक चुनाव) के मुद्दे पर विचार कर रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक समिति ने चुनाव आयोग से पूछा है कि “एक साथ चुनाव कराने में कितना खर्च आएगा और क्या इससे खर्च कम हो सकता है? जाहिर सी बात है, चुनाव आयोग का जवाब ईवीएम और वीवीपैट मशीनों पर ही आधारित होगा।  एक साथ चुनाव कराने हेतु चुनाव (One Nation One Election) आयोग को लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कई चुनौतियों का भी करना पड़ेगा सामना  वर्तमान में चुनाव आयोग के पास 30 लाख से अधिक बीयू, 22 लाख सीएयू (बीयू और सीयू मिलकर ईवीएम बनाते हैं) और लगभग 24 लाख वीवीपैट हैं। यह तो ठीक, लेकिन ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि साल इनमें कई मशीने 15 साल पुरानी हैं। कई मशीनें 2013-14 में खरीदी गई थीं। जाहिर सी बात है ऐसे में साल 2029 में होने वाले इलेक्शन के लिए तकरीबन 20 लाख बीयू, 13.6 लाख सीयू और 10 लाख से ज्यादा वीवीपैट की कमी हो सकती है। यही नहीं, एक साथ चुनाव कराने हेतु चुनाव (One Nation One Election) आयोग को लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ेगा। वजह यह कि चुनाव आयोग को ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को रखने के लिए अधिक से अधिक गोदामों की ज़रूरत होगी। आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम जैसे राज्यों के पास अपने खुद के गोदाम ही नहीं हैं। इसे भी पढ़ें:- लालू की पार्टी आरजेडी के नेता शंभू गुप्ता 2 करोड़ रुपये की अफीम के साथ गिरफ्तार वन नेशन-वन इलेक्शन (One Nation One Election) के लिए बड़ी तादात में कर्मचारियों को तैयार करना और उन्हें ट्रेनिंग देना नहीं है आसान  इसके अलावा एक साथ चुनाव कराने (One Nation One Election) के लिए बड़ी तादात में कर्मचारियों को तैयार करना और उन्हें ट्रेनिंग देना आसान नहीं है। यही नहीं, इसके अलावा मशीनों की जांच के लिए मैन्युफैक्चरर के इंजीनियरों को बुलाना होगा। गौरतलब हो कि यह काम लोकसभा चुनाव से छह महीने पहले और विधानसभा चुनाव से चार महीने पहले शुरू हो जाता है। 12 लाख से ज़्यादा पोलिंग स्टेशनों और गोदामों की सुरक्षा के लिए भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की ज़रूरत होगी। ऐसा इसलिए कि साल 2024 के लोकसभा इलेक्शन में 10.53 लाख पोलिंग स्टेशन थे। चुनाव आयोग का अनुमान है कि साल 2029 में पोलिंग स्टेशन्स की संख्या में  15% इजाफा हो सकता है। 15% इजाफा होने का अर्थ है वन नेशन वन इलेक्शन के लिए 12.1 लाख से ज्यादा पोलिंग स्टेशन्स की आवश्यकता होगी। बता दें कि हर पोलिंग स्टेशन पर दो सेट ईवीएम की ज़रूरत होती है। पोलिंग स्टेशन्स की संख्या बढ़ने का अर्थ है ईवीएम के साथ सब की संख्या बढ़ जाएगी।  Latest News in Hindi Today Hindi news One Nation One Election #OneNationOneElection #ElectionReformIndia #SimultaneousPolls #ModiGovernment #IndianPolitics #LokSabha2024 #ElectionCost #OnePollIndia #LawCommission #DemocracyIndia

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