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SpaceX का बड़ा ऐलान: Louisiana में $100 Billion का दूसरा ‘Starbase’; 3,000+ Jobs, 2029 में पहला Starship Launch

लुइसियाना/वॉशिंगटन: Elon Musk की aerospace company SpaceX ने अमेरिका के Louisiana में अपना अब तक का सबसे बड़ा rocket launch complex बनाने की योजना का ऐलान किया है। “Starbase Louisiana” नाम के इस mega project में कंपनी कम से कम $100 billion निवेश करने और 3,000 से ज्यादा नई नौकरियां पैदा करने का दावा कर रही है। यह facility SpaceX के Starship rockets, Starlink expansion और भविष्य की orbital AI satellite missions के लिए अहम base बन सकती है। यह घोषणा अमेरिका में 25 अगस्त को की गई और भारत में 26 अगस्त 2026 की प्रमुख technology और international business stories में शामिल है। Construction 2027 में शुरू करने और यहां से पहला Starship 2029 में launch करने का लक्ष्य रखा गया है। कहां बनेगा Starbase Louisiana? नई facility दक्षिणी Louisiana के Vermilion Parish में Pecan Island पर बनाई जाएगी। Reuters के मुताबिक पूरा proposed site करीब 125,000 acres, यानी लगभग 50,585 hectares में फैला होगा। यह New Orleans से करीब 200 miles पश्चिम में Louisiana के Gulf Coast क्षेत्र में स्थित है। इतना बड़ा land parcel इसे SpaceX के मौजूदा Texas Starbase की तुलना में कहीं बड़े scale पर develop करने की संभावना देता है। दूसरा Starbase, लेकिन चौथा Launch Site इस project की terminology को समझना जरूरी है। SpaceX इसे अपना दूसरा “Starbase” campus बता रही है। पहला Starbase South Texas के Boca Chica क्षेत्र में है, जहां Starship की development, testing और launches होती हैं। लेकिन अगर SpaceX के सभी U.S. launch locations को गिना जाए, तो Louisiana facility कंपनी का चौथा और सबसे बड़ा launch site होगी। SpaceX के California, Texas और Florida से जुड़े launch operations पहले से मौजूद या development में हैं। इसलिए इसे केवल “SpaceX का दूसरा spaceport” कहना पूरी तरह accurate नहीं होगा। कम से कम $100 Billion का Investment SpaceX ने कहा है कि वह Starbase Louisiana में कम से कम $100 billion invest करने के लिए committed है। यह रकम मौजूदा exchange rate के आसपास भारतीय मुद्रा में लगभग ₹8.5 लाख करोड़ से ज्यादा के बराबर बैठ सकती है, हालांकि actual rupee value exchange rate के साथ बदलती रहेगी। इतने बड़े investment figure के कारण इसे Louisiana के इतिहास के सबसे ambitious private industrial projects में से एक के तौर पर पेश किया जा रहा है। हालांकि यह पूरा $100 billion तत्काल खर्च नहीं होगा। Project कई वर्षों और अलग-अलग development phases में आगे बढ़ने की उम्मीद है। 3,000 से ज्यादा Jobs का दावा SpaceX का कहना है कि project से region में 3,000 से ज्यादा direct jobs पैदा होंगी। Louisiana authorities के मुताबिक इन jobs की average annual salary करीब $92,600 हो सकती है, जो Vermilion Parish की average wage से लगभग 192% ज्यादा बताई गई है। Associated Press के मुताबिक ये करीब 3,000 jobs अगले एक दशक के दौरान create होने का अनुमान है। इसके अलावा construction, logistics, suppliers, hospitality और local services में indirect employment भी पैदा हो सकता है, हालांकि उसका कोई final verified figure अभी सामने नहीं आया है। 2027 में Construction, 2029 में पहला Launch SpaceX की current timeline के मुताबिक Starbase Louisiana का construction 2027 में शुरू होगा। Company ने पहला Starship launch 2029 के लिए target किया है। यह timeline engineering progress, environmental permissions, Federal Aviation Administration approvals और दूसरे regulatory clearances पर निर्भर करेगी। इसलिए 2029 को अभी guaranteed launch date के बजाय target माना जाना चाहिए। साल में हजारों Starship Launches का लक्ष्य SpaceX President और COO Gwynne Shotwell ने कहा कि Louisiana campus को आखिरकार इतनी capacity तक ले जाने की योजना है कि यहां से हर साल thousands of Starship flights संचालित की जा सकें। यह मौजूदा global space-launch industry के मुकाबले बेहद aggressive target है। इसे हासिल करने के लिए SpaceX को Starship की rapid reusability, launch turnaround, regulatory approval और safety जैसे कई बड़े engineering challenges हल करने होंगे। Reuters ने भी स्पष्ट किया है कि यह high launch cadence technical और regulatory hurdles को सफलतापूर्वक पार करने पर निर्भर करेगी। Self-Sustaining Spaceport बनाने की योजना Starbase Louisiana सिर्फ launch pads का समूह नहीं होगा। SpaceX इसे एक तरह का self-sustaining spaceport ecosystem बनाना चाहता है। Gwynne Shotwell के मुताबिक proposed facilities में शामिल हो सकते हैं: Deep-water access के जरिए Starships और दूसरे बड़े components को Texas से Louisiana तक समुद्री रास्ते से transport किया जा सकता है। यहां Starship बनाने की Factory नहीं होगी एक महत्वपूर्ण difference Texas और Louisiana Starbase के बीच होगा। Reuters के मुताबिक Louisiana site पर फिलहाल rocket production facilities बनाने की योजना नहीं है। Starship और Super Heavy manufacturing का बड़ा हिस्सा Texas से जुड़ा रहेगा। Louisiana site मुख्य रूप से launches, vehicle processing, fuel, energy और logistics infrastructure पर focused होगा। Pecan Island ही क्यों चुना? Pecan Island की geographical location SpaceX के लिए strategic मानी जा रही है। यह Gulf Coast पर है, इसलिए rockets को populated land के ऊपर उड़ाने के बजाय Gulf waters की दिशा में launch trajectories मिल सकती हैं। Reuters के मुताबिक यह location sun-synchronous orbit तक पहुंचने के लिए भी useful है। इस तरह की orbit solar-powered satellites और Earth-observation systems के लिए काफी उपयोगी होती है। Louisiana authorities ने abundant natural gas availability को भी site के advantage के रूप में बताया है। AI Satellites के लिए भी अहम होगा Starbase SpaceX की ambitions अब केवल rockets और Starlink internet तक सीमित नहीं हैं। Elon Musk future में large-scale AI computing satellites orbit में भेजने की योजना पर भी काम कर रहे हैं। Reuters के मुताबिक Musk की long-term vision में up to one million AI data-processing satellites deploy करने जैसी बेहद ambitious योजना शामिल है। अगर orbital AI infrastructure वास्तव में बड़े scale पर बनाया जाता है, तो उसके लिए लगातार heavy payload launches की जरूरत होगी। Starbase Louisiana इसी future launch demand को support करने वाला major hub बन सकता है। NASA Artemis Mission से भी जुड़ा Starship Starship केवल SpaceX का commercial rocket नहीं है। NASA ने Artemis programme में Moon पर astronauts उतारने के लिए Starship के modified version को Human Landing System के रूप में…

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SpaceX और Nvidia AI Computing को Space में ले जाने की तैयारी में; Starmind AI1 का पहला Launch 2027 के Q4 में संभव

वॉशिंगटन: Elon Musk की SpaceX और chip giant NVIDIA artificial intelligence computing को पृथ्वी के traditional data centers से आगे सीधे space में ले जाने की तैयारी कर रही हैं। दोनों कंपनियां Starmind AI1 नाम के first-generation orbital AI satellite पर काम कर रही हैं, जिसमें NVIDIA के Vera Rubin NVL72 architecture पर आधारित space-optimized computing system इस्तेमाल किया जाएगा। Elon Musk ने कहा है कि इस orbital AI system को 2027 की चौथी तिमाही यानी Q4 में orbit में भेजने की योजना है, जबकि 2028 में project को बड़े scale पर expand करने का लक्ष्य है। क्या है Starmind AI1? Starmind SpaceX की proposed orbital computing platform है। इसका उद्देश्य satellite को केवल data transmit करने वाले system के बजाय ऐसा AI-powered computer in orbit बनाना है जो data को space में ही process कर सके। SpaceX की official information के मुताबिक AI1 satellite में localized computing होगी। यह space में उपलब्ध solar energy से power लेगा और processed data को high-bandwidth laser links के जरिए Starlink network तक भेजेगा। कंपनी का दावा है कि इस model से बड़ी मात्रा में raw data को हर बार पृथ्वी पर भेजने की जरूरत कम हो सकती है। Nvidia का Vera Rubin System करेगा AI Processing NVIDIA ने पुष्टि की है कि SpaceX के Starmind AI1 का compute payload Vera Rubin NVL72 technology पर आधारित होगा। NVIDIA इसे data-center-class AI computing को orbit तक ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम बता रही है। Vera Rubin platform को बड़े AI models, agentic AI applications और high-performance processing के लिए design किया गया है। SpaceXAI की योजना Earth-based Grok infrastructure में भी NVIDIA Vera Rubin platform का इस्तेमाल बढ़ाने की है। Elon Musk बोले- Traditional Rack से हल्का और सस्ता होगा Design Elon Musk के मुताबिक SpaceX और NVIDIA ने orbital environment के लिए traditional AI server rack की तुलना में ज्यादा compact system design किया है। उन्होंने कहा कि नया design पारंपरिक rack के मुकाबले simpler, lighter, denser और lower-cost हो सकता है। इसका उद्देश्य space launch में weight और power requirements को कम करना है। Space-based computing में वजन बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि हर अतिरिक्त kilogram को orbit तक पहुंचाने की लागत और launch complexity बढ़ती है। 2027 के Q4 में पहला Launch Musk ने अपने latest update में कहा कि space-optimized Vera Rubin NVL72 system को Q4 2027 में orbit में launch करने की योजना है। इसके बाद 2028 में deployment को काफी तेजी से बढ़ाया जा सकता है। SpaceX की official Starmind website भी बताती है कि कंपनी Bastrop, Texas में Gigasat Factory तैयार कर रही है, जहां 2027 के अंत से हजारों AI satellites के बड़े पैमाने पर production और deployment की योजना है। हालांकि launch schedule aerospace projects में testing, regulatory approvals और Starship readiness के कारण बदल भी सकता है। AI को Space में ले जाने की जरूरत क्यों? आज AI industry के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में power consumption, cooling और data-center capacity शामिल हैं। Large AI models को train और run करने के लिए हजारों GPUs और enormous electricity की जरूरत होती है। इसके अलावा data centers में cooling के लिए भी काफी power और water infrastructure चाहिए। SpaceX का तर्क है कि orbital data centers को लगातार solar energy मिल सकती है और उन्हें terrestrial grid constraints से काफी हद तक अलग रखा जा सकता है। Space में Cooling कैसे होगी? SpaceX का कहना है कि उसकी AI satellites heat को radiators के जरिए vacuum में dissipate करेंगी। Company के मुताबिक इससे traditional terrestrial data centers में इस्तेमाल होने वाले cooling towers, chillers और fans पर निर्भरता कम हो सकती है। हालांकि space में thermal management आसान नहीं होता। Vacuum में convection नहीं होती, इसलिए excess heat को effectively radiate करना एक major engineering challenge रहेगा। Solar Power बनेगा सबसे बड़ा Advantage? AI1 design में बड़े solar panels का इस्तेमाल किया जाएगा। SpaceX के मुताबिक sun-synchronous orbit में satellites लंबे समय तक direct solar energy हासिल कर सकती हैं। AI1 satellite के लिए कंपनी ने करीब 150 kW peak और 120 kW average compute payload power का specification दिखाया है। अगर future में हजारों satellites deploy किए जाते हैं तो theoretical तौर पर orbital computing capacity को gigawatt scale तक बढ़ाया जा सकता है। Starlink से जुड़ेंगे AI Satellites Starmind AI1 standalone satellite नहीं होगा। SpaceX की योजना इसे अपने existing Starlink laser network से जोड़ने की है। Processed AI results high-speed optical links के जरिए Starlink constellation तक भेजे जा सकेंगे और वहां से Earth users तक पहुंचाए जा सकते हैं। इससे satellite-generated data को पहले ground station पर भेजकर process करने की जरूरत कम हो सकती है। Earth Observation में बड़ा फायदा Orbital AI का एक बड़ा use case Earth observation हो सकता है। आज satellites बड़ी मात्रा में imagery और sensor data collect करते हैं, लेकिन हर raw image को Earth तक downlink करना bandwidth-intensive होता है। NVIDIA के मुताबिक on-orbit AI wildfire detection, climate monitoring, infrastructure analysis, radar processing और geospatial intelligence जैसे काम satellite पर ही perform कर सकता है। इससे केवल relevant information Earth पर भेजी जा सकेगी। AI Models Space में ही चल सकेंगे NVIDIA का कहना है कि उसका Space-1 Vera Rubin Module frontier और foundation AI models को सीधे orbital systems पर run करने के लिए बनाया गया है। Company के मुताबिक यह space-based inference में H100 GPU की तुलना में per-GPU AI compute को काफी बढ़ा सकता है और massive sensor streams को real-time process करने में मदद कर सकता है। यह technology autonomous satellites और spacecraft decision-making में भी इस्तेमाल हो सकती है। Grok से भी जुड़ा है Project SpaceXAI का orbital compute project Elon Musk के AI ecosystem से भी जुड़ा हुआ है। SpaceX के regulatory prospectus के मुताबिक xAI अब SpaceX के integrated business का हिस्सा है और company Earth पर Grok के लिए AI infrastructure build करने के साथ भविष्य में उसे space तक extend करना चाहती है। इसका मतलब future में Grok जैसे AI systems के workloads का एक हिस्सा orbital infrastructure पर run करने…

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National Space Day पर PM Modi ने Space Startups के CEOs से संवाद किया साझा, मजबूत ecosystem बनाने पर जोर

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 23 अगस्त 2026 को National Space Day के मौके पर देशवासियों और वैज्ञानिकों को शुभकामनाएं देते हुए भारत के तेजी से बढ़ते अंतरिक्ष क्षेत्र को भविष्य की अर्थव्यवस्था और विकसित भारत के लिए महत्वपूर्ण बताया। प्रधानमंत्री ने Space Startups के CEOs और founders के साथ अपने हालिया संवाद को भी साझा किया और देश में ऐसा मजबूत space ecosystem तैयार करने पर जोर दिया, जो दुनिया भर की प्रतिभा, कंपनियों और निवेश को भारत की ओर आकर्षित कर सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास कम लागत में काम करने की क्षमता, गुणवत्तापूर्ण talent और जोखिम लेने की मजबूत क्षमता का ऐसा संयोजन है जो देश को वैश्विक space sector में तेजी से अग्रणी स्थान दिला सकता है। 21 अगस्त को 20 Space Startups के साथ हुई थी बैठक प्रधानमंत्री मोदी ने Space Startup CEOs और founders के साथ यह बैठक 21 अगस्त 2026 को Seva Teerth में की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक बैठक में देश के 20 space startups के CEOs और founders शामिल हुए थे। ये कंपनियां rockets, reusable launch vehicles, satellites, advanced propulsion systems, space intelligence, space debris removal, weather और climate intelligence जैसी अलग-अलग technologies पर काम कर रही हैं। National Space Day पर इस interaction को फिर सामने लाते हुए प्रधानमंत्री ने भारत की private space industry की ambition और innovation की तारीफ की। PM Modi बोले—दुनिया Space के लिए भारत की ओर देखे Space Startup leaders के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश को ऐसा ecosystem बनाना चाहिए कि जब दुनिया अंतरिक्ष क्षेत्र के बारे में सोचे तो उसकी नजर भारत की ओर जाए। उन्होंने startups से अपने प्रयासों में consistency बनाए रखने की अपील की और कहा कि सरकार की policies में निरंतरता होने से entrepreneurs को जोखिम लेने का भरोसा मिलता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ऐसा environment तैयार कर सकता है जहां दुनिया भर के talented professionals अपने career और भविष्य के लिए Indian space sector को पसंद करें। Global Talent और Investment को आकर्षित करने पर जोर PM Modi ने कहा कि भारत के space sector में global talent, companies और investment को आकर्षित करने की क्षमता है। उनके मुताबिक भारत cost के मामले में highly competitive है और यहां quality talent के साथ risk-taking क्षमता भी मौजूद है। यही combination भारत को international space market में तेजी से मजबूत स्थिति दिला सकता है। Private companies के लिए space sector खोलने के बाद पिछले कुछ वर्षों में भारतीय startups की संख्या और गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। कई कंपनियां satellite manufacturing से लेकर launch systems और earth observation तक अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं। Agriculture से Environment तक Space Technology का इस्तेमाल प्रधानमंत्री ने startups से space technology को केवल rockets और satellites तक सीमित न रखने की बात कही। उन्होंने कंपनियों से विचार करने को कहा कि उनकी technology का इस्तेमाल: में कैसे किया जा सकता है। PM Modi ने उदाहरण दिया कि agriculture से जुड़ी space technology कंपनियां agricultural universities और departments के साथ मिलकर किसानों को बेहतर data और decision-making tools उपलब्ध करा सकती हैं। Atal Tinkering Labs से जुड़ने की सलाह प्रधानमंत्री ने Space Startups को Atal Tinkering Labs के साथ अधिक सहयोग करने की सलाह भी दी। उनका कहना है कि इससे school level पर ही बच्चों में space science, technology और innovation को लेकर curiosity पैदा की जा सकती है। प्रधानमंत्री ने युवा पीढ़ी को भारत के भविष्य के space missions और technologies से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। इससे आने वाले वर्षों में scientists, engineers, designers और entrepreneurs की नई पीढ़ी तैयार करने में मदद मिल सकती है। National Space Day पर PM Modi का संदेश 23 अगस्त को National Space Day के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए देशवासियों और वैज्ञानिक समुदाय को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत नई global व्यवस्था में लगातार अपने space sector का विस्तार कर रहा है और नई पीढ़ी के engineers, designers, coders और scientists नई technologies विकसित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प लिया है और इस लक्ष्य को हासिल करने में space sector की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने देश से अंतरिक्ष क्षेत्र में और बड़े सपने देखने, अधिक innovation करने और नई सीमाओं को पार करने का आह्वान किया। 23 अगस्त को ही क्यों मनाया जाता है National Space Day? भारत में हर साल 23 अगस्त को National Space Day मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 2023 में Chandrayaan-3 के Vikram Lander ने चंद्रमा की सतह पर सफल soft landing की थी। इसके बाद Pragyan Rover को चंद्रमा पर deploy किया गया था। भारत इस उपलब्धि के साथ चंद्रमा पर सफल soft landing करने वाला चौथा देश बना और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास उतरने वाला पहला देश बना। Chandrayaan-3 की सफलता के बाद 23 अगस्त को National Space Day के रूप में मनाने की घोषणा की गई थी। Private Space Sector में तेजी से बढ़ रहा भारत भारत सरकार ने वर्ष 2020 के बाद space sector को private participation के लिए बड़े स्तर पर खोलना शुरू किया। इसके बाद Skyroot Aerospace, Agnikul Cosmos, Pixxel, Dhruva Space, Bellatrix Aerospace, Digantara और कई अन्य startups ने launch vehicles, satellites और space technologies में तेजी से काम शुरू किया। 21 अगस्त की बैठक में इन कंपनियों समेत कुल 20 startups के representatives शामिल हुए थे। Startups ने प्रधानमंत्री को बताया कि Indian technologies को अपनाने में international companies की दिलचस्पी भी बढ़ रही है। Space में Pharmaceuticals Manufacturing तक की तैयारी प्रधानमंत्री के साथ interaction के दौरान कुछ startups ने अपनी futuristic technologies की जानकारी भी साझा की। एक startup representative ने ऐसी satellites विकसित करने की योजना का जिक्र किया जो space में जाकर pharmaceutical products manufacture कर सकें और उन्हें वापस पृथ्वी पर लाया जा सके। एक अन्य startup ने बताया कि उसे हालिया launch के बाद केवल एक महीने में आठ launch contracts मिले, जिनमें ज्यादातर international contracts हैं। ये developments दिखाती हैं कि Indian private space companies traditional satellite…

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Online Banking Scam पर बड़ा Action: भारत ने Google को सैकड़ों Firebase Accounts हटाने का निर्देश दिया

नई दिल्ली: ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड और फर्जी मोबाइल ऐप के जरिए लोगों की वित्तीय जानकारी चुराने वाले साइबर अपराधियों पर भारत सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। भारतीय अधिकारियों ने Google को उसके Firebase प्लेटफॉर्म से सैकड़ों संदिग्ध अकाउंट हटाने का निर्देश दिया है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर बैंक और सरकारी योजनाओं की नकल कर लोगों को ठगने के लिए किया जा रहा था। मामले का खुलासा Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) की जांच में हुआ। अधिकारियों ने पाया कि साइबर अपराधी Firebase की सेवाओं का इस्तेमाल phishing websites, fake banking applications और malicious software को होस्ट करने के लिए कर रहे थे। SBI, ICICI और Axis Bank जैसे नामों की नकल रिपोर्ट के मुताबिक साइबर अपराधियों ने देश के बड़े बैंकों के नाम और डिजाइन की नकल करते हुए फर्जी वेबसाइट और ऐप बनाए। इनमें State Bank of India (SBI), ICICI Bank और Axis Bank जैसी संस्थाओं के नाम का इस्तेमाल किया गया। पहली नजर में ये पेज असली बैंकिंग वेबसाइट की तरह दिखाई देते थे, जिससे आम ग्राहक आसानी से इनके जाल में फंस सकते थे। ऐसे फर्जी पेज पर बैंक खाते की जानकारी, लॉगिन क्रेडेंशियल, मोबाइल नंबर और दूसरी संवेदनशील जानकारी दर्ज करने के बाद डेटा सीधे साइबर अपराधियों तक पहुंच सकता था। PM-KISAN के नाम से भी बनाए गए फर्जी Apps बैंकिंग सेवाओं के अलावा अपराधियों ने सरकारी योजनाओं का नाम भी इस्तेमाल किया। I4C को ऐसे fraudulent applications मिले जो PM-KISAN योजना से जुड़े होने का दावा कर रहे थे। ऐसे ऐप लोगों को सरकारी लाभ, KYC अपडेट या भुगतान से जुड़ी जानकारी देने के नाम पर डाउनलोड करवाए जा सकते थे। ऐप इंस्टॉल होने के बाद उपयोगकर्ता के फोन से संवेदनशील जानकारी चुराने या डिवाइस पर अनधिकृत नियंत्रण हासिल करने का खतरा बढ़ जाता है। अगस्त में कम से कम 57 Firebase Links पर Action Reuters की रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2026 में ही I4C ने कम से कम 57 Firebase-hosted websites और databases को हटाने के लिए notices जारी किए। व्यापक कार्रवाई में सैकड़ों Firebase accounts को निशाना बनाया गया है, जिनका कथित तौर पर अलग-अलग cyber fraud campaigns में इस्तेमाल किया जा रहा था। Firebase Google का cloud-based development platform है, जिसका इस्तेमाल वैध developers भी websites, databases और mobile applications तैयार करने के लिए करते हैं। सरकार की कार्रवाई Firebase सेवा के खिलाफ नहीं, बल्कि इसका दुरुपयोग करने वाले संदिग्ध accounts और content पर केंद्रित है। ‘Android God Mode’ Malware का इस्तेमाल जांच में एक खतरनाक malware का भी जिक्र सामने आया है, जिसे रिपोर्ट में “Android God Mode” कहा गया है। इसके जरिए साइबर अपराधी Android फोन तक व्यापक पहुंच हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। मालवेयर उपयोगकर्ता के फोन में मौजूद संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने और financial fraud को अंजाम देने में मदद कर सकता है। इसी वजह से अनजान WhatsApp message, SMS या social media link से APK फाइल डाउनलोड करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। Google को तेजी से हटाना होगा संदिग्ध Content Reuters के मुताबिक भारतीय व्यवस्था के तहत takedown notice मिलने के बाद Google को ऐसे चिन्हित content पर तीन घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होती है। Google ने कहा है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर abuse के खिलाफ कड़े नियम लागू करता है और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग करता है। इस मामले में Google को खुद fraud के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। कार्रवाई उन अपराधियों के खिलाफ है जो कंपनी की तकनीकी सेवाओं का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। Cyber Criminals को Firebase क्यों पसंद आ रहा? Firebase developers को hosting, database और दूसरी cloud सुविधाएं उपलब्ध कराता है। इनमें कई सुविधाएं शुरुआती स्तर पर मुफ्त या आसानी से उपलब्ध होती हैं। इसी सुविधा का फायदा उठाकर cybercriminals तेजी से fake pages या fraudulent apps तैयार कर सकते हैं और किसी भरोसेमंद technology platform के infrastructure का इस्तेमाल करके पीड़ितों का विश्वास हासिल करने की कोशिश करते हैं। इस तरह के scams में अक्सर website का डिजाइन बिल्कुल वास्तविक बैंक या सरकारी पोर्टल जैसा बनाया जाता है। भारत में Digital Transactions बढ़ने के साथ Cyber Fraud भी चुनौती भारत दुनिया के सबसे बड़े digital payment markets में से एक बन चुका है। Reuters के मुताबिक पिछले साल देश में करीब 242 अरब digital transactions process किए गए। UPI और mobile banking के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ cybercriminals के लिए भी संभावित targets की संख्या बढ़ी है। यही कारण है कि सरकार और cyber security agencies phishing, fake apps और banking fraud के खिलाफ निगरानी बढ़ा रही हैं। Fake Banking App से कैसे बचें? CERT-In की cyber safety guidance के अनुसार ग्राहकों को किसी unknown source या third-party platform से banking APK file डाउनलोड नहीं करनी चाहिए। बैंक आमतौर पर WhatsApp या social media के जरिए APK file भेजकर ग्राहकों को ऐप install करने के लिए नहीं कहते। उपयोगकर्ताओं को OTP, banking password और अन्य credentials भी किसी के साथ साझा नहीं करने चाहिए। अगर किसी suspicious link पर क्लिक करने के बाद बैंक खाते में असामान्य गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत संबंधित बैंक को इसकी जानकारी देनी चाहिए। भारत सरकार की यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि online banking fraud में इस्तेमाल होने वाले digital infrastructure पर अब ज्यादा तेजी से कार्रवाई की जा रही है। हालांकि आम उपयोगकर्ताओं के लिए भी जरूरी है कि वे किसी भी बैंकिंग या सरकारी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके आधिकारिक source की पुष्टि जरूर करें। स्रोत – रॉयटर्स, CERT-In जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत में नई Telecom पाबंदी की तैयारी! 9 से ज्यादा SIM रखने वालों को नहीं मिलेगा नया कनेक्शन

नई दिल्ली: भारत में मोबाइल कनेक्शनों को लेकर सरकार ने नियमों के पालन को और सख्त करने की तैयारी कर ली है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि 24 अगस्त 2026 से उन ग्राहकों को नया SIM कनेक्शन जारी न किया जाए, जिनके नाम पर पहले से 9 मोबाइल कनेक्शन दर्ज हैं। यह कदम फर्जी SIM, डिजिटल फ्रॉड और मोबाइल कनेक्शनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया जा रहा है। 9 SIM की सीमा होगी लागू DoT के निर्देश के मुताबिक सामान्य तौर पर एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन की सीमा है। यदि किसी ग्राहक के नाम पर पहले से 9 SIM हैं और वह 10वां कनेक्शन लेने की कोशिश करता है, तो टेलीकॉम कंपनी को नया कनेक्शन देने से इनकार करना होगा। यह सीमा अलग-अलग कंपनियों के लिए अलग-अलग नहीं है। यानी Jio, Airtel, Vi या BSNL जैसे अलग-अलग ऑपरेटरों के कनेक्शन भी ग्राहक की कुल सीमा में शामिल होंगे। J&K और North-East में सिर्फ 6 SIM जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर के कुछ लाइसेंस्ड सर्विस एरिया में यह सीमा और कम है। वहां एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 6 मोबाइल कनेक्शन की अनुमति है। इन क्षेत्रों में अतिरिक्त मोबाइल कनेक्शनों को लेकर सुरक्षा कारणों से पहले से ज्यादा सख्त व्यवस्था लागू है। 24 अगस्त से टेलीकॉम कंपनियां करेंगी सख्ती DoT के 17 अगस्त के सर्कुलर के अनुसार, 24 अगस्त से टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को तकनीकी और संगठनात्मक उपाय लागू करने होंगे, ताकि 9 कनेक्शन की सीमा पूरी कर चुके ग्राहकों की पहचान की जा सके और उन्हें नया नंबर लेने से रोका जा सके। ग्राहक को यह भी बताया जाएगा कि उसके नाम पर पहले ही अधिकतम अनुमत मोबाइल कनेक्शन दर्ज हैं। Digital Intelligence Platform से होगी पहचान इस नियम को लागू करने के लिए DoT के Digital Intelligence Platform (DIP) का इस्तेमाल किया जाएगा। टेलीकॉम कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए गए subscriber data के आधार पर प्लेटफॉर्म उन लोगों की पहचान करने में मदद करेगा, जिनके नाम पर निर्धारित सीमा तक SIM पहले से मौजूद हैं। 23 अगस्त से निर्धारित सीमा तक पहुंच चुके ग्राहकों की representative photograph भी DIP पर उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था है, ताकि उनकी पहचान में मदद मिल सके। अगर आपके नाम पर 9 से ज्यादा SIM हैं तो? जिन लोगों के नाम पर पहले से निर्धारित सीमा से अधिक मोबाइल कनेक्शन हैं, उनके लिए भी व्यवस्था सख्त की जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार अतिरिक्त कनेक्शनों में बाद में लिए गए नंबरों को पहले बंद करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इसलिए लोगों के लिए जरूरी है कि वे समय रहते जांच करें कि उनके नाम पर कितने मोबाइल नंबर सक्रिय हैं। सरकार का मकसद क्या है? DoT की यह कार्रवाई मुख्य रूप से फर्जी पहचान, SIM के दुरुपयोग, साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड को रोकने की दिशा में है। सरकार चाहती है कि एक पहचान पर बड़ी संख्या में मोबाइल कनेक्शन लेकर उनका इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों के लिए न किया जा सके। नई व्यवस्था से अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों में मौजूद कनेक्शनों को एक साथ ट्रैक करना भी आसान होगा। आम मोबाइल यूजर्स को घबराने की जरूरत नहीं ज्यादातर सामान्य मोबाइल यूजर्स के लिए इस नियम का सीधा असर नहीं पड़ेगा। समस्या मुख्य रूप से उन ग्राहकों के सामने आएगी जिनके नाम पर पहले से 9 या उससे अधिक मोबाइल कनेक्शन दर्ज हैं। अगर किसी व्यक्ति ने पुराने या इस्तेमाल में न आने वाले नंबर बंद नहीं कराए हैं, तो अपने नाम पर सक्रिय कनेक्शनों की जानकारी जांचना उपयोगी रहेगा। 30 नवंबर तक सिस्टम को मजबूत करने का लक्ष्य DoT ने टेलीकॉम कंपनियों को इस व्यवस्था से जुड़े सिस्टम और प्रक्रियाओं को 30 नवंबर 2026 तक व्यवस्थित करने का समय दिया है। इस दौरान DIP के जरिए पहचान और verification व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। इस नए कदम से भारत में SIM कार्ड की निगरानी और subscriber verification व्यवस्था पहले के मुकाबले ज्यादा सख्त होने जा रही है। स्रोत: Department of Telecommunications, PTI, NDTV, India Today, ThePrint Jai Rashtra News

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Samsung का बड़ा ऐलान! 27 अगस्त को Galaxy Event, Galaxy S26 FE से उठ सकता है पर्दा

नई दिल्ली: Samsung ने अपने अगले Galaxy Event की तारीख का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। कंपनी 27 अगस्त 2026 को एक ऑनलाइन लॉन्च इवेंट आयोजित करेगी, जिसमें Galaxy S26 सीरीज के “नए सदस्य” को पेश करने की घोषणा की गई है। Samsung ने अभी डिवाइस का नाम स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन मौजूदा रिपोर्ट्स और लीक्स के आधार पर Galaxy S26 FE के लॉन्च की सबसे ज्यादा उम्मीद है। 27 अगस्त को होगा बड़ा Galaxy Event Samsung का यह इवेंट 27 अगस्त को शाम 5:30 बजे IST से लाइव होगा। कंपनी इसे अपनी आधिकारिक वेबसाइट और YouTube चैनल पर स्ट्रीम करेगी। Samsung ने अपने निमंत्रण में कहा है कि नया डिवाइस Galaxy S26 के कैमरा और AI अनुभवों को ज्यादा यूजर्स तक पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है। Samsung की आधिकारिक Galaxy Event जानकारी Galaxy S26 FE पर क्यों है सबसे ज्यादा चर्चा? Samsung ने आधिकारिक तौर पर Galaxy S26 FE का नाम नहीं लिया है। हालांकि, पिछले कई महीनों से सामने आ रहे लीक्स और अब Galaxy S26 परिवार में नए मॉडल की घोषणा को देखते हुए S26 FE को इस इवेंट का सबसे संभावित डिवाइस माना जा रहा है। FE यानी Fan Edition सीरीज का मकसद आमतौर पर फ्लैगशिप Galaxy S सीरीज के प्रमुख फीचर्स को अपेक्षाकृत कम कीमत वाले फोन में उपलब्ध कराना होता है। 6.7-इंच डिस्प्ले और 120Hz स्क्रीन की उम्मीद लीक्स के मुताबिक Galaxy S26 FE में 6.7-इंच FHD+ AMOLED डिस्प्ले और 120Hz रिफ्रेश रेट मिल सकता है। फोन में एल्युमिनियम फ्रेम और IP68 रेटिंग भी मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, ये सभी स्पेसिफिकेशन अभी लीक्स और रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। Samsung ने लॉन्च से पहले इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। Exynos 2500 और 4,900mAh बैटरी की चर्चा रिपोर्ट्स के अनुसार Galaxy S26 FE में Samsung का Exynos 2500 प्रोसेसर दिया जा सकता है। फोन में 4,900mAh बैटरी और 45W वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट की भी उम्मीद है। सॉफ्टवेयर के मामले में फोन के Android 17 आधारित One UI 9 के साथ आने और लंबे समय तक सॉफ्टवेयर अपडेट मिलने की संभावना है। कैमरा सेटअप भी हो सकता है दमदार लीक्स के मुताबिक Galaxy S26 FE में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिल सकता है। इसमें: शामिल होने की उम्मीद है। टेलीफोटो कैमरे में 3x ऑप्टिकल जूम और OIS मिलने की भी रिपोर्ट है। कीमत पर भी बढ़ी उत्सुकता Galaxy S26 FE की भारतीय कीमत अभी Samsung ने घोषित नहीं की है। कुछ रिपोर्ट्स में अमेरिकी बाजार के लिए करीब $799 की शुरुआती कीमत का अनुमान लगाया गया है, लेकिन इसे भारतीय कीमत मानना सही नहीं होगा। स्थानीय टैक्स, लॉन्च ऑफर और Samsung की भारत-विशिष्ट कीमत के कारण वास्तविक कीमत अलग हो सकती है। अगर कीमत उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो S26 FE को प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। 27 अगस्त को साफ होगी पूरी तस्वीर फिलहाल Samsung ने सिर्फ इतना आधिकारिक रूप से बताया है कि Galaxy S26 परिवार में एक नया सदस्य 27 अगस्त को पेश किया जाएगा। Galaxy S26 FE का नाम और उसके स्पेसिफिकेशन अभी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आए हैं। अब भारतीय टेक यूजर्स की नजर 27 अगस्त, शाम 5:30 बजे होने वाले Galaxy Event पर है। अगर लीक्स सही साबित होते हैं, तो यह Samsung Galaxy S26 FE की आधिकारिक एंट्री हो सकती है। स्रोत: Samsung Newsroom, India Today, Samsung-focused reports Jai Rashtra News

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AI और टेक सेक्टर में बड़ा बदलाव, भारतीय IT कंपनियों के AI निवेश और रणनीति पर बाजार की नजर

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच भारतीय टेक और IT सेक्टर में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि भारतीय कंपनियां AI, डेटा सेंटर, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में कितना निवेश कर रही हैं और इन निवेशों से भविष्य में कमाई कितनी बढ़ सकती है। AI अब IT कंपनियों की रणनीति का अहम हिस्सा भारतीय IT कंपनियां पारंपरिक IT सेवाओं से आगे बढ़कर AI आधारित समाधान, ऑटोमेशन और नए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोर दे रही हैं। बाजार में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि AI कंपनियों के काम करने के तरीके और कर्मचारियों की जरूरतों को बदल रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में कंपनियों के प्रदर्शन को केवल कर्मचारियों की संख्या या बिल योग्य घंटों से मापना पर्याप्त नहीं होगा। AI से होने वाली आय, AI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल और recurring revenue जैसे नए संकेतक ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकते हैं। TCS, Infosys और HCLTech पर खास नजर देश की प्रमुख IT कंपनियों TCS, Infosys और HCLTech की AI रणनीति निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इन कंपनियों में bench strength कम करने और कर्मचारियों को अधिक specialised तथा AI-केंद्रित कामों में लगाने की दिशा में बदलाव देखने को मिल रहा है। इसका संकेत यह है कि IT कंपनियां अब केवल ज्यादा कर्मचारियों के सहारे विकास करने के बजाय AI और automation के जरिए productivity बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। AI Data Centre बन रहे हैं अगला बड़ा निवेश क्षेत्र AI के विस्तार के साथ data centre infrastructure की मांग भी बढ़ रही है। भारतीय कंपनियां AI workloads को संभालने के लिए बड़े स्तर पर computing और data-centre क्षमता विकसित करने पर ध्यान दे रही हैं। इसी दिशा में Yotta Data Services ने AI infrastructure expansion को बढ़ावा देने के लिए करीब ₹8,000 करोड़ तक के IPO की योजना बनाई है। कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल AI infrastructure को मजबूत करने के लिए करना चाहती है। वहीं HCLTech की ओर से भी AI data-centre capacity में निवेश की योजनाओं ने इस क्षेत्र को बाजार की निगाह में ला दिया है। भारत में AI Infrastructure की दौड़ तेज भारत में global technology कंपनियां भी AI infrastructure पर बड़ा फोकस कर रही हैं। Microsoft ने हाल ही में भारत में अपना नया data-centre region शुरू किया है, जिससे देश में cloud और AI workloads के लिए infrastructure capacity बढ़ी है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए AI applications, cloud services और enterprise solutions के क्षेत्र में नए अवसर बनने की उम्मीद है। निवेशकों के लिए AI Opportunity और Risk दोनों AI सेक्टर में बढ़ते निवेश के बावजूद बाजार के सामने चुनौतियां भी हैं। AI से productivity बढ़ने की संभावना है, लेकिन इससे traditional IT services के पुराने business models पर दबाव भी पड़ सकता है। Reuters की हालिया analysis के मुताबिक, AI के दौर में IT कंपनियों के लिए headcount और billable hours जैसे पुराने valuation metrics की अहमियत कम हो रही है, जबकि AI revenue और software-like recurring revenue जैसे नए मॉडल महत्वपूर्ण बन रहे हैं। भारतीय IT सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव AI के कारण भारतीय IT industry अब केवल outsourcing और manpower-based services तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनियां AI platforms, automation, cloud, cybersecurity और enterprise AI solutions की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। बाजार की नजर अब इस बात पर होगी कि कौन-सी कंपनी AI को सिर्फ technology investment के रूप में इस्तेमाल करती है और कौन उसे सीधे revenue और profit growth में बदलने में सफल होती है। निष्कर्ष भारत में AI और टेक सेक्टर का अगला दौर investment, infrastructure और innovation पर केंद्रित दिखाई दे रहा है। TCS, Infosys और HCLTech जैसी IT कंपनियों की AI रणनीति से लेकर Yotta जैसी कंपनियों के data-centre expansion तक, AI अब भारतीय technology ecosystem में बड़ा business driver बनता जा रहा है। Source: Reuters, India Today, Moneycontrol, Microsoft, Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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DeepSeek ने V4 Pro AI Model लॉन्च किया

बीजिंग: चीनी AI कंपनी DeepSeek ने अपने नए फ्लैगशिप मॉडल DeepSeek V4 Pro का आधिकारिक वर्जन लॉन्च कर दिया है। कंपनी का दावा है कि नया मॉडल खास तौर पर AI agents, software engineering, coding और advanced reasoning जैसे कामों में बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार किया गया है। यह मॉडल DeepSeek के ऐप, वेब प्लेटफॉर्म और API के जरिए उपलब्ध कराया गया है। V4 Pro में क्या खास है? नया DeepSeek-V4-Pro-0813 मॉडल अप्रैल में पेश किए गए V4 Pro Preview का upgraded production version है। DeepSeek ने इसमें agentic AI और software-engineering capabilities को बेहतर बनाने पर खास ध्यान दिया है। AI agents ऐसे सिस्टम होते हैं जो केवल सवालों के जवाब देने के बजाय कई चरणों वाले tasks को समझकर tools का इस्तेमाल कर सकते हैं और काम को पूरा करने की कोशिश करते हैं। इसी वजह से V4 Pro को developers और enterprise users के लिए महत्वपूर्ण upgrade माना जा रहा है। 1.6 ट्रिलियन Parameters वाला मॉडल DeepSeek V4 Pro architecture में करीब 1.6 trillion total parameters और लगभग 49 billion active parameters का इस्तेमाल करता है। मॉडल में 1 million-token context window भी है, जिससे यह लंबे documents और बड़े codebases के साथ काम करने के लिए बनाया गया है। इतने बड़े context window का फायदा खास तौर पर software development, research और लंबे documents के analysis में मिल सकता है। Coding और AI Agents पर बड़ा फोकस V4 Pro को DeepSeek ने सिर्फ सामान्य chatbot के रूप में position नहीं किया है। कंपनी का बड़ा फोकस coding और agentic workflows पर है। नए मॉडल में software-engineering tasks, tool use और complex reasoning को बेहतर बनाने की कोशिश की गई है। Independent Artificial Analysis benchmark में V4 Pro 0813 ने 53 Intelligence Index score हासिल किया, जो अप्रैल वाले V4 Pro के मुकाबले बेहतर था। V4 Flash से कितनी अलग है कीमत? V4 Pro को DeepSeek ने अपने comparatively lightweight V4 Flash से काफी महंगा रखा है। नई pricing के अनुसार: Reuters के अनुसार output pricing V4 Flash की तुलना में लगभग 14 गुना ज्यादा है, जबकि input pricing लगभग 9 गुना ज्यादा है। यह संकेत देता है कि DeepSeek V4 Pro को अब low-cost model के बजाय ज्यादा capable premium flagship AI model के रूप में position कर रहा है। API के जरिए Developers को मिलेगा Access V4 Pro को DeepSeek के API, web interface और app के जरिए इस्तेमाल किया जा सकता है। Developers इसे अपने applications और AI-powered products में integrate कर सकते हैं। यह DeepSeek के लिए महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि कंपनी अब केवल consumer chatbot market तक सीमित नहीं रहना चाहती। Open-Weight Strategy भी जारी DeepSeek की सबसे बड़ी खासियतों में से एक उसका relatively open approach रहा है। V4 Pro family के model weights को MIT license के तहत जारी किया गया है, जिससे developers और researchers को model को लेकर ज्यादा flexibility मिलती है। यह strategy DeepSeek को proprietary AI systems से अलग पहचान देती है। Global AI Race में DeepSeek की वापसी DeepSeek ने 2025 में अपने R1 reasoning model के बाद global AI industry में बड़ा प्रभाव डाला था। इसके बाद OpenAI, Google, Anthropic और कई Chinese AI companies के बीच competition लगातार बढ़ा है। इस बार DeepSeek को Moonshot AI, Zhipu AI, MiniMax, Alibaba और ByteDance जैसी कंपनियों से भी कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। V4 Pro का launch इसी बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच हुआ है। API Pricing में भी बड़ा बदलाव DeepSeek ने V4 models के API pricing structure में भी बदलाव की घोषणा की है। कंपनी peak और off-peak pricing शुरू करने जा रही है। Reuters के अनुसार नई pricing में अलग-अलग models और token types के आधार पर कीमतों में 50% से लेकर 1,100% तक की वृद्धि हो सकती है। इससे साफ है कि DeepSeek अब AI inference की बढ़ती मांग और operational costs को ध्यान में रखते हुए अपने commercial model को बदल रहा है। AI Industry पर क्या असर होगा? DeepSeek V4 Pro का launch AI industry में कई कारणों से महत्वपूर्ण है। पहला, यह दिखाता है कि Chinese AI companies frontier-level AI capabilities की race में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। दूसरा, DeepSeek का open-weight approach developers को proprietary models के विकल्प देता है। तीसरा, agentic AI और coding पर बढ़ता focus बताता है कि आने वाले समय में AI competition केवल chatbot quality पर नहीं बल्कि AI agents की वास्तविक काम करने की क्षमता पर भी होगी। निष्कर्ष DeepSeek V4 Pro का official launch कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण upgrade है। नया मॉडल 1.6 trillion parameters, 1 million-token context window, बेहतर agentic capabilities और software-engineering focus के साथ पेश किया गया है। हालांकि V4 Pro की कीमत V4 Flash से काफी ज्यादा है, लेकिन DeepSeek इसे ज्यादा powerful flagship model के रूप में position कर रहा है। अब इसकी असली चुनौती यह होगी कि बेहतर benchmark performance को developers और businesses के बड़े पैमाने पर adoption में कैसे बदला जाए। Source: DeepSeek के model release details, Reuters और independent AI benchmarking reports. Original Report: DeepSeek ने V4 Pro का official production version जारी किया है, जिसमें AI agents और software engineering capabilities पर विशेष ध्यान दिया गया है। Jai Rashtra News

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Paramount Skydance के कैलिफोर्निया छोड़ने के संकेत, Warner Bros. डील को लेकर बढ़ा विवाद

लॉस एंजिलिस: हॉलीवुड की दिग्गज कंपनी Paramount Skydance ने कैलिफोर्निया से अपना मुख्यालय या कारोबार बाहर ले जाने की संभावना को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है। कंपनी के मुख्य कानूनी अधिकारी Makan Delrahim ने कहा कि CEO David Ellison की प्राथमिकता कैलिफोर्निया में बने रहने की है, लेकिन कंपनी को अपने शेयरधारकों के हितों और कारोबारी माहौल को भी ध्यान में रखना होगा। Warner Bros. डील बनी विवाद की वजह Paramount Skydance की संभावित relocation की चर्चा उसकी Warner Bros. Discovery को खरीदने की करीब $110 अरब की प्रस्तावित डील से जुड़ी है। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल Rob Bonta समेत कई राज्यों ने इस सौदे के खिलाफ antitrust मुकदमा दायर किया है। उनका आरोप है कि यह विलय मीडिया और फिल्म उद्योग में प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचा सकता है। Paramount का पक्ष है कि यह सौदा प्रतिस्पर्धा को मजबूत कर सकता है और कंपनी को Disney तथा Netflix जैसी बड़ी कंपनियों के मुकाबले बेहतर स्थिति में ला सकता है। अक्टूबर से बाहर निकलने की योजना की चर्चा मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कंपनी के CEO David Ellison ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संभावित relocation की योजना पर चर्चा की है। रिपोर्टों में कहा गया है कि अगर कैलिफोर्निया के साथ कानूनी विवाद पर समाधान नहीं निकलता, तो अक्टूबर 2026 से California से बाहर जाने की प्रक्रिया शुरू करने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, इसे अभी तत्काल कैलिफोर्निया छोड़ने का अंतिम फैसला नहीं माना जा रहा है। कंपनी के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि कैलिफोर्निया में बने रहना अभी भी पसंदीदा विकल्प है। कहां जा सकती है कंपनी? रिपोर्टों में Tennessee, Texas और Georgia जैसे राज्यों को संभावित विकल्पों के तौर पर बताया गया है। इनमें Texas और Tennessee को खासतौर पर संभावित विकल्प माना जा रहा है। अगर Paramount वास्तव में कैलिफोर्निया से बाहर जाती है, तो इसका असर हॉलीवुड के रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। कैलिफोर्निया सरकार का पलटवार कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल Rob Bonta ने Paramount की relocation की धमकी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे राज्य पर दबाव बनाने की रणनीति बताया और कहा कि उनकी प्राथमिकता प्रतिस्पर्धा और कैलिफोर्निया की अर्थव्यवस्था की रक्षा करना है। हॉलीवुड के लिए क्यों बड़ा मामला? Paramount का हॉलीवुड से रिश्ता दशकों पुराना है। कंपनी का कैलिफोर्निया से बाहर जाना केवल एक कॉरपोरेट relocation नहीं होगा, बल्कि यह हॉलीवुड के बदलते कारोबारी नक्शे का बड़ा संकेत माना जा सकता है। पहले भी कई मनोरंजन कंपनियां प्रोडक्शन और कारोबार के लिए दूसरे अमेरिकी राज्यों का रुख कर चुकी हैं। Paramount के संभावित कदम से यह बहस और तेज हो सकती है कि क्या हॉलीवुड का पारंपरिक केंद्र धीरे-धीरे California से बाहर फैल रहा है। निष्कर्ष Paramount Skydance ने कैलिफोर्निया छोड़ने की संभावना को पहली बार इतनी स्पष्टता से स्वीकार किया है। हालांकि कंपनी अभी California में रहना चाहती है, लेकिन Warner Bros. डील को लेकर चल रहे antitrust विवाद और कारोबारी दबाव के बीच relocation का विकल्प खुला रखा गया है। Source: Reuters, Axios, Los Angeles Times, The Hill जय राष्ट्र न्यूज़

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Google Pixel 11 सीरीज लॉन्च, नए AI फीचर्स और Magic Capture ने खींचा ध्यान

नई दिल्ली: Google ने अपनी नई Pixel 11 सीरीज को लॉन्च कर दिया है। 12 अगस्त को हुए Made by Google इवेंट में कंपनी ने Pixel 11, Pixel 11 Pro, Pixel 11 Pro XL और Pixel 11 Pro Fold पेश किए। इस बार Google ने हार्डवेयर अपग्रेड के साथ-साथ AI और कैमरा फीचर्स पर खास जोर दिया है। Magic Capture बना सबसे खास फीचर Pixel 11 सीरीज के प्रमुख नए फीचर्स में Magic Capture शामिल है। यह फीचर खास तौर पर तेज मूवमेंट वाले पलों की तस्वीरें लेने में मदद करता है। Google के मुताबिक, एक टैप में फोन फोटो और वीडियो दोनों कैप्चर कर सकता है। इसके बाद AI महत्वपूर्ण पलों को चुनकर बेहतर तस्वीरों का कलेक्शन तैयार करता है। जरूरत पड़ने पर तस्वीरों को अपने आप क्रॉप और अनब्लर भी किया जा सकता है। इसका फायदा खासतौर पर बच्चों, पालतू जानवरों, खेल या किसी तेज गतिविधि की तस्वीर लेते समय मिल सकता है। Tensor G6 चिप के साथ AI पर बड़ा फोकस Pixel 11 सीरीज में Google का नया Tensor G6 प्रोसेसर दिया गया है। कंपनी ने इस चिप को खास तौर पर AI आधारित अनुभवों के लिए तैयार किया है। Tensor G6 और नए Gemini मॉडल के साथ Pixel 11 में कई AI कार्यों को पहले से तेज और ज्यादा ऊर्जा-कुशल बनाने पर जोर दिया गया है। Gemini Intelligence बनेगा फोन का अहम हिस्सा Google ने Pixel 11 में Gemini Intelligence को ज्यादा गहराई से जोड़ा है। कंपनी का लक्ष्य AI को केवल सवालों के जवाब देने वाले असिस्टेंट तक सीमित रखने के बजाय रोजमर्रा के कामों में सक्रिय मददगार बनाना है। फोन यूजर की जरूरत और संदर्भ के आधार पर सुझाव देने और अलग-अलग कामों में सहायता करने में सक्षम होगा। कैमरा में भी बड़े बदलाव Pixel 11 सीरीज में कैमरा सिस्टम को भी अपग्रेड किया गया है। Pixel 11 में नया कैमरा सेंसर और बेहतर जूम क्षमता दी गई है, जबकि Pro मॉडल में ज्यादा एडवांस कैमरा सिस्टम मिलता है। Pixel 11 Pro सीरीज में बेहतर लो-लाइट फोटोग्राफी और ज्यादा जूम क्षमता पर विशेष ध्यान दिया गया है। Pro मॉडल में जूम 120x तक पहुंचता है। वीडियो बनाने वालों के लिए भी नए फीचर्स Google ने वीडियो क्रिएटर्स के लिए भी नए फीचर्स जोड़े हैं। Pixel 11 सीरीज में 8K Pro Stable Video और नए Creator फीचर्स शामिल किए गए हैं। इसके अलावा 4K Portrait Video भी सीरीज के नए कैमरा अनुभव का हिस्सा है। Pixel 11 की कीमत और उपलब्धता Pixel 11 का अमेरिकी बाजार में शुरुआती मूल्य 899 डॉलर रखा गया है। Pixel 11 Pro की शुरुआती कीमत 1,099 डॉलर और Pixel 11 Pro XL की 1,299 डॉलर है। Google ने सीरीज के लिए प्री-ऑर्डर शुरू कर दिए हैं और बिक्री 20 अगस्त से शुरू होने की जानकारी दी गई है। भारत में Google ने Pixel 11 सीरीज के लिए अपनी आधिकारिक बिक्री पेशकश भी जारी की है। सिर्फ AI नहीं, सुरक्षा पर भी जोर Pixel 11 सीरीज में Titan M3 सुरक्षा चिप दी गई है। Google ने इसे हार्डवेयर आधारित सुरक्षा को मजबूत करने और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए इस्तेमाल किया है। Pixel 11 क्यों चर्चा में है? Pixel 11 सीरीज में इस बार Google ने केवल कैमरा या प्रोसेसर अपग्रेड पर निर्भर रहने के बजाय AI को फोन के अनुभव का मुख्य हिस्सा बनाने की कोशिश की है। खासकर Magic Capture, Gemini Intelligence, AI कैमरा प्रोसेसिंग और नए वीडियो फीचर्स इसे पिछले Pixel मॉडल की तुलना में ज्यादा AI-केंद्रित बनाते हैं। निष्कर्ष Google Pixel 11 सीरीज अब आधिकारिक तौर पर लॉन्च हो चुकी है और इस बार कंपनी ने AI और कैमरा तकनीक को सबसे ज्यादा महत्व दिया है। Magic Capture तेज पलों को बेहतर तरीके से कैप्चर करने का दावा करता है, जबकि Tensor G6 और Gemini Intelligence फोन में AI क्षमताओं को और गहराई देते हैं। नई Pixel सीरीज की असली परीक्षा अब इसकी बिक्री और वास्तविक उपयोग में AI फीचर्स के प्रदर्शन से होगी। Source: Google, Indian Express, Reuters/TechCrunch रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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