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HCL के सह-संस्थापक का बड़ा खुलासा, सिर्फ ₹1.87 लाख और 6 लोगों से शुरू हुआ था भारत का बड़ा टेक सफर

नई दिल्ली: भारत की दिग्गज टेक कंपनियों में शामिल HCL की शुरुआत कितने छोटे स्तर से हुई थी, इसका दिलचस्प खुलासा कंपनी के सह-संस्थापक अजय चौधरी ने किया है। HCL के 50 साल पूरे होने के मौके पर चौधरी ने 1976 के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि महज 6 लोगों और ₹1.87 लाख की पूंजी से एक ऐसा सपना शुरू हुआ था, जिसने आगे चलकर भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर की तस्वीर बदल दी। छह लोगों ने छोड़ी नौकरी और शुरू किया अपना सफर अजय चौधरी के मुताबिक, साल 1976 में छह युवा इंजीनियरों ने अपनी नौकरियां छोड़कर खुद की कंपनी शुरू करने का फैसला किया। इन छह संस्थापकों में शिव नाडर, अर्जुन मल्होत्रा, योगेश वैद्य, सुभाष अरोड़ा, डीएस पुरी और अजय चौधरी शामिल थे। उस समय भारत में आज की तरह स्टार्टअप संस्कृति, वेंचर कैपिटल या टेक कंपनियों का बड़ा नेटवर्क नहीं था। इसके बावजूद इन लोगों को भरोसा था कि माइक्रोप्रोसेसर और कंप्यूटर आने वाले समय में दुनिया बदल देंगे। ₹1.87 लाख जुटाकर शुरू किया कारोबार चौधरी ने बताया कि छह संस्थापकों ने मिलकर शुरुआती पूंजी के तौर पर ₹1.87 लाख जुटाए थे। इस रकम को बचत, उधार और दूसरे निजी संसाधनों से जुटाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूंजी को इकट्ठा करने के लिए एक संस्थापक ने अपनी कार तक बेच दी थी। आज के हजारों करोड़ रुपये के टेक कारोबार को देखते हुए यह शुरुआती रकम बेहद छोटी लग सकती है, लेकिन उस समय इसी सीमित पूंजी से छह लोगों ने भारत में कंप्यूटर बनाने का सपना देखा था। दिल्ली के छोटे से ऑफिस से शुरू हुआ सपना HCL का शुरुआती सफर दिल्ली के गोल्फ लिंक इलाके में एक छोटे से बरसाती कमरे से शुरू हुआ। उस समय कंपनी का नाम Microcomp रखा गया था। इन छह लोगों का लक्ष्य भारत में अपना कंप्यूटर तैयार करना था। लेकिन शुरुआत में उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां थीं। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि उनके पास कंप्यूटर बनाने के लिए आवश्यक मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस तक नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने अपने प्रयास जारी रखे। उस दौर में कंप्यूटर भारत के लिए नई चीज था 1970 के दशक में कंप्यूटर आज की तरह आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा नहीं था। भारत में कंप्यूटर तकनीक अभी शुरुआती दौर में थी और बहुत कम लोगों को इसकी वास्तविक संभावनाओं का अंदाजा था। छह संस्थापकों ने इसी दौर में यह समझ लिया था कि माइक्रोप्रोसेसर आधारित तकनीक भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकती है। उनका लक्ष्य केवल कंप्यूटर बेचने का नहीं था, बल्कि भारत में कंप्यूटर तकनीक विकसित करने का था। HCL ने आगे चलकर रचा टेक इतिहास छोटी शुरुआत के बाद HCL ने भारतीय कंप्यूटर उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कंपनी के आधिकारिक इतिहास के मुताबिक, 1978 में HCL ने भारत में स्वदेशी कंप्यूटर HCL 8C तैयार किया, जिसे कंपनी अपने शुरुआती तकनीकी मील के पत्थरों में गिनती है। इसके बाद HCL ने कंप्यूटर शिक्षा, UNIX आधारित सिस्टम, डेटाबेस तकनीक और अन्य क्षेत्रों में भी काम किया। धीरे-धीरे कंपनी का कारोबार भारत से निकलकर वैश्विक टेक बाजार तक पहुंचा। 50 साल बाद संस्थापक ने याद की शुरुआत HCL के पांच दशक पूरे होने के मौके पर अजय चौधरी ने अपनी पुरानी यादें साझा कीं। उन्होंने इस सफर की शुरुआत को केवल एक कंपनी बनाने की कहानी नहीं, बल्कि जोखिम उठाने और बड़े सपने देखने की कहानी बताया। उनके मुताबिक, उस समय छह लोगों के पास सीमित संसाधन थे, लेकिन भविष्य को लेकर विश्वास और कुछ नया करने की इच्छा थी। छोटी पूंजी, बड़ा सपना HCL की शुरुआती कहानी इस बात का उदाहरण भी है कि किसी बड़े कारोबार की शुरुआत हमेशा बड़ी पूंजी से नहीं होती। छह लोगों ने सीमित संसाधनों के साथ शुरुआत की और आगे चलकर भारतीय टेक उद्योग में अपनी पहचान बनाई। अजय चौधरी ने अपनी पोस्ट के अंत में युवाओं को बड़े सपने देखने, जोखिम लेने और लगातार आगे बढ़ने का संदेश भी दिया। निष्कर्ष ₹1.87 लाख, छह लोग और एक बड़ा सपना—यही HCL की शुरुआती कहानी थी। 1976 में एक छोटे से दिल्ली ऑफिस से शुरू हुआ यह सफर आज भारत की टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री की महत्वपूर्ण कहानियों में शामिल है। HCL के सह-संस्थापक अजय चौधरी द्वारा साझा की गई पुरानी यादों ने एक बार फिर दिखाया है कि बड़े बदलाव की शुरुआत कभी-कभी बेहद छोटे संसाधनों से होती है। छह संस्थापकों का वह प्रयोग आगे चलकर भारतीय तकनीकी क्षेत्र की एक बड़ी कहानी बन गया। Source: India Today / HCL Group जय राष्ट्र न्यूज़

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UPI लेनदेन पर शुल्क लगेगा? संजय सिंह का मोदी सरकार पर हमला, बिल वापस लेने की मांग

नई दिल्ली: UPI भुगतान को लेकर संसद में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित व्यवस्था से UPI के जरिए होने वाले भुगतान पर कारोबारियों पर टैक्स का बोझ बढ़ सकता है, जिसका असर आगे चलकर आम लोगों पर पड़ सकता है। आम आदमी पार्टी ने सरकार से इस प्रावधान को वापस लेने की मांग की है। संजय सिंह ने संसद में उठाया UPI का मुद्दा राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान संजय सिंह ने UPI लेनदेन से जुड़े प्रस्ताव पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि एक तरफ डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया जा रहा है और दूसरी तरफ ऐसे प्रावधान लाए जा रहे हैं जिनसे छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। संजय सिंह ने इस मुद्दे को आम आदमी और छोटे कारोबारियों से जोड़ते हुए सरकार से बिल वापस लेने की मांग की। “व्यापारियों से टैक्स लिया तो जनता पर पड़ेगा बोझ” AAP की ओर से जारी बयान के मुताबिक संजय सिंह का कहना है कि अगर UPI से होने वाले भुगतान पर कारोबारियों से अतिरिक्त शुल्क या टैक्स लिया जाता है, तो उसका बोझ अंततः ग्राहकों तक पहुंच सकता है। उनका तर्क है कि छोटे दुकानदार और कारोबारी अपनी अतिरिक्त लागत को वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों पर अप्रत्यक्ष रूप से असर पड़ने की आशंका जताई गई है। सरकार का जवाब—आम यूजर से UPI चार्ज नहीं लिया जाएगा हालांकि इस मामले में सरकार की ओर से महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी सामने आया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में कहा कि आम UPI यूजर्स से किसी तरह का UPI चार्ज नहीं लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छोटे व्यापारियों पर MDR (Merchant Discount Rate) लगाने की बात नहीं है। संसद ने Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 को मंजूरी भी दे दी है। तो क्या UPI से पैसे भेजने पर लगेगा चार्ज? इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि आम लोगों के UPI भुगतान पर सीधे कोई नया शुल्क लगाए जाने की घोषणा नहीं हुई है। यानी अगर कोई व्यक्ति दुकान पर QR Code स्कैन करके ₹500 या ₹1,000 का भुगतान करता है, तो सरकार के मौजूदा स्पष्टीकरण के अनुसार ग्राहक से अलग से UPI चार्ज वसूलने की व्यवस्था नहीं है। संजय सिंह का विरोध मुख्य रूप से विधेयक में टैक्स से जुड़े प्रावधानों और उनके संभावित प्रभाव को लेकर है। छोटे कारोबारियों को लेकर AAP की चिंता AAP का कहना है कि छोटे व्यापारियों पर किसी भी अतिरिक्त लागत का प्रभाव व्यापक हो सकता है। पार्टी ने इसे छोटे कारोबारियों और आम जनता के हित से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का दावा है कि डिजिटल इंडिया और कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देने के बाद UPI से जुड़े लेनदेन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना विरोधाभासी होगा। मोदी सरकार पर संजय सिंह का राजनीतिक हमला संजय सिंह ने इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर भी राजनीतिक हमला बोला। AAP के मुताबिक उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का फायदा बड़े और विदेशी निवेशकों को मिल रहा है, जबकि छोटे कारोबारियों पर बोझ बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने सरकार से इस प्रावधान को वापस लेने की मांग की है। Taxation Bill 2026 को संसद की मंजूरी इस पूरे विवाद के बीच Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 संसद से पारित हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार राज्यसभा ने चर्चा के बाद Money Bill को लोकसभा को लौटाया और बाद में विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गई। वित्त मंत्री ने इस दौरान UPI यूजर्स और छोटे व्यापारियों को लेकर आश्वासन दिया कि उन पर सीधे UPI/MDR चार्ज नहीं लगाया जाएगा। UPI भुगतान करने वालों के लिए क्या बदलेगा? फिलहाल आम UPI यूजर्स के लिए सबसे अहम बात यह है कि UPI से पैसे भेजने या QR Code के जरिए भुगतान करने पर कोई नया सीधा शुल्क लागू होने की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि टैक्स व्यवस्था में बदलाव और उसके कारोबारी प्रभाव को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। इसलिए भविष्य में नियमों में कोई बदलाव होता है तो उसके आधिकारिक विवरण को देखना जरूरी होगा। निष्कर्ष UPI को लेकर संसद में जारी बहस के बीच संजय सिंह ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए Taxation Bill 2026 के प्रावधानों का विरोध किया है और इसे वापस लेने की मांग की है। AAP का दावा है कि व्यापारियों पर टैक्स या अतिरिक्त लागत बढ़ने से इसका असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। वहीं, सरकार की ओर से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि आम UPI यूजर्स और छोटे व्यापारियों से नया UPI/MDR चार्ज नहीं लिया जाएगा। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि UPI से भुगतान करने वाले आम लोगों पर नया शुल्क लगा दिया गया है। Source: Aam Aadmi Party / Indian Express / The Statesman / Live Hindustan जय राष्ट्र न्यूज़

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Amazon Great Freedom Sale 2026 में Samsung, OnePlus और Xiaomi समेत कई स्मार्टफोन्स पर बड़े डिस्काउंट

नई दिल्ली: Amazon Great Freedom Sale 2026 के दौरान स्मार्टफोन खरीदारों के लिए कई आकर्षक offers देखने को मिल रहे हैं। Samsung, OnePlus, Xiaomi और अन्य प्रमुख smartphone brands के कई models पर discounts, bank offers और exchange benefits उपलब्ध हैं। Sale के दौरान कुछ smartphones की effective price में बड़ी कमी दिखाई दे रही है, जिससे customers के लिए नए फोन खरीदने का यह एक महत्वपूर्ण shopping opportunity बन गया है। हालांकि, अलग-अलग models पर मिलने वाला discount stock, variant, bank offer और exchange value के आधार पर बदल सकता है। इसलिए किसी भी smartphone की final कीमत खरीदारी के समय Amazon पर check करना जरूरी है। Samsung Smartphones पर Deals Great Freedom Sale में Samsung के कई लोकप्रिय smartphones पर offers चर्चा में हैं। Galaxy series के अलग-अलग models पर discount के साथ bank offers और exchange benefits भी मिल सकते हैं। Samsung के premium और mid-range दोनों segments में customers को offers मिलने की संभावना है। खासतौर पर उन buyers के लिए sale महत्वपूर्ण है जो Galaxy smartphone खरीदने की योजना बना रहे हैं। OnePlus पर भी बड़ी बचत का मौका OnePlus के smartphones भी sale में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। कंपनी के flagship और mid-range devices पर discounts के साथ अतिरिक्त bank और exchange offers उपलब्ध हो सकते हैं। OnePlus के smartphones अपनी performance और fast charging capabilities के कारण भारतीय बाजार में लोकप्रिय हैं। Sale के दौरान इन devices की effective purchase price कम होने से buyers को फायदा मिल सकता है। Xiaomi और Redmi Smartphones पर Offers Xiaomi और Redmi के smartphones पर भी Great Freedom Sale के दौरान कई deals देखने को मिल रही हैं। कंपनी के budget और mid-range smartphones पहले से competitive pricing के लिए जाने जाते हैं। Sale offers के साथ इनकी effective price और कम हो सकती है, जिससे budget-conscious customers को फायदा मिल सकता है। Bank Offers से बढ़ सकती है बचत Amazon sale में smartphone की listed sale price के अलावा bank card discounts और instant offers भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुछ customers को eligible bank cards के जरिए अतिरिक्त discount मिल सकता है। इसके अलावा EMI और no-cost EMI जैसी payment options भी कुछ products पर उपलब्ध हो सकती हैं। इसलिए smartphone खरीदने से पहले केवल product price देखने के बजाय available payment offers को भी check करना जरूरी है। Exchange Offer से पुराना फोन बनेगा काम का अगर customer के पास पहले से smartphone है, तो exchange offer के जरिए final purchase cost और कम हो सकती है। पुराने smartphone की exchange value उसके model, condition और eligibility पर निर्भर करती है। अलग-अलग devices के लिए exchange amount अलग हो सकता है। इस वजह से buyers को sale के दौरान अपने पुराने फोन की exchange value भी check करनी चाहिए। क्या यह Permanent Price Cut है? Sale के दौरान दिखाई देने वाली कम कीमत को हमेशा smartphone का permanent price cut नहीं माना जाना चाहिए। Amazon पर दिखाई देने वाली effective price में sale discount, bank offer, coupon और exchange benefit शामिल हो सकते हैं। Sale समाप्त होने के बाद इनमें से कुछ offers उपलब्ध नहीं रह सकते। इसलिए buyers को product की original price और final payable amount दोनों की तुलना करनी चाहिए। किसके लिए Sale सबसे ज्यादा फायदेमंद? Great Freedom Sale उन customers के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकती है जो अगले कुछ महीनों में smartphone upgrade करने की योजना बना रहे हैं। अगर किसी buyer को Samsung, OnePlus या Xiaomi का कोई specific model पहले से पसंद है, तो sale के दौरान उसके current price, bank offer और exchange value की तुलना करना बेहतर रहेगा। Premium से Budget Segment तक Options Sale में smartphone deals केवल premium segment तक सीमित नहीं हैं। अलग-अलग price categories में customers को options मिल रहे हैं। Premium smartphone खरीदने वाले buyers flagship models पर offers देख सकते हैं, जबकि budget customers Redmi, Samsung Galaxy और अन्य affordable smartphones की deals पर नजर रख सकते हैं। खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान Smartphone खरीदने से पहले customers को कुछ महत्वपूर्ण चीजों की जांच करनी चाहिए: निष्कर्ष Amazon Great Freedom Sale 2026 में Samsung, OnePlus और Xiaomi समेत कई smartphone brands के devices पर discounts और additional offers buyers का ध्यान खींच रहे हैं। Bank offers और exchange benefits को मिलाकर कुछ models की effective purchase price काफी कम हो सकती है। हालांकि, sale के दौरान दिखाई देने वाले discounts को permanent price cuts नहीं माना जाना चाहिए। Smartphone खरीदने से पहले customers को final payable price, bank offer, exchange value और product variant की पूरी जानकारी जांचनी चाहिए। Source: Amazon Great Freedom Sale 2026 / Technology market reports जय राष्ट्र न्यूज़

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राष्ट्रीय | छात्र आंदोलन, NEET और सरकार पर विशाल ददलानी का व्यंग्यात्मक वीडियो; सोशल मीडिया पर तेज़ बहस

मशहूर गायक और संगीतकार विशाल ददलानी का एक व्यंग्यात्मक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने छात्र आंदोलन, NEET पेपर लीक और सरकार की भूमिका पर अपनी टिप्पणी की है। विशाल ददलानी ने कहा कि छात्रों पर कथित लाठीचार्ज, आंसू गैस के इस्तेमाल और कार्रवाई से ज्यादा चर्चा छात्रों द्वारा इस्तेमाल किए गए अपशब्दों पर हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि NEET पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर अधिक गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए, क्योंकि इससे हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। इसके साथ ही उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा, “अहंकार कम कीजिए, पीआर कम कीजिए और खराब रील्स बनाना बंद कीजिए।” इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने छात्रों के मुद्दों पर आवाज़ उठाने क�

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AI और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की समीक्षा बैठकें तेज़, नई निवेश परियोजनाओं पर फोकस

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल गवर्नेंस से जुड़ी नई परियोजनाओं एवं निवेश प्रस्तावों की समीक्षा तेज़ कर दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर AI आधारित डिजिटल सेवाओं, स्मार्ट प्रशासन और तकनीकी अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में कई प्रस्तावों का मूल्यांकन कर रहा है। सरकार का उद्देश्य AI के माध्यम से नागरिक सेवाओं को अधिक तेज़, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। स्वदेशी AI मॉडल और नए निवेश को मिली गति हाल ही में सरकार ने 20 स्वदेशी AI फाउंडेशन मॉडल विकसित करने के प्रस्तावों को समर्थन देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही AI अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 58 Centres of Excellence को भी मंजूरी दी गई है। सरकार ने इन परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध कराने का भी फैसला किया है, ताकि भारतीय स्टार्टअप, शोध संस्थान और उद्योग वैश्विक स्तर की AI तकनीक विकसित कर सकें। डिजिटल गवर्नेंस पर विशेष जोर MeitY के नेतृत्व में विभिन्न मंत्रालयों से प्राप्त 700 से अधिक AI उपयोग मामलों और 760 से अधिक प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जा रहा है। इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, न्याय, परिवहन, शहरी विकास और प्रशासनिक सेवाओं में AI के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार चाहती है कि डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से सरकारी सेवाएँ अधिक नागरिक-केंद्रित और डेटा-आधारित बनें। डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश AI के बढ़ते उपयोग को देखते हुए देश में डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश भी तेज़ हुआ है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार जून तिमाही में संस्थागत निवेश का बड़ा हिस्सा डेटा सेंटर परियोजनाओं में गया, जिससे स्पष्ट है कि AI आधारित डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक अवसंरचना तेजी से विकसित की जा रही है। AI गवर्नेंस और सुरक्षा पर भी ध्यान सरकार केवल तकनीकी निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि जिम्मेदार AI उपयोग के लिए AI Governance Framework और सुरक्षा मानकों पर भी काम कर रही है। विशेषज्ञ समितियाँ AI से जुड़े नैतिक, गोपनीयता और पारदर्शिता संबंधी मुद्दों की समीक्षा कर रही हैं ताकि नई तकनीकों का उपयोग सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से किया जा सके। निष्कर्ष भारत AI और डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश और नीतिगत सुधारों के माध्यम से वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार का मानना है कि स्वदेशी AI मॉडल, मजबूत डिजिटल अवसंरचना और जिम्मेदार AI गवर्नेंस के संयोजन से देश की प्रशासनिक क्षमता और डिजिटल अर्थव्यवस्था दोनों को नई गति मिलेगी। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | IndiaAI Mission जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत सरकार ने Meta की ग्लोबल टीम को तलब किया, PM मोदी की पोस्ट और ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी पर होगी जवाबदेही तय

नई दिल्ली: भारत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी Meta (Facebook और Instagram) की वैश्विक टीम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Facebook पोस्ट के अस्थायी रूप से हटाए जाने और ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी (Child Safety) से जुड़े मामलों पर स्पष्टीकरण देने के लिए नई दिल्ली तलब किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों के साथ होने वाली इस बैठक में कंटेंट मॉडरेशन, बच्चों की सुरक्षा, AI आधारित निगरानी और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। PM मोदी की पोस्ट पर उठा विवाद हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक Facebook पोस्ट कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं रही थी। Meta ने बाद में इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए पोस्ट को बहाल कर दिया और खेद भी व्यक्त किया। हालांकि, सरकार का मानना है कि इस तरह की घटनाएँ सार्वजनिक संवाद और डिजिटल प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता से जुड़ी हैं, इसलिए कंपनी से विस्तृत स्पष्टीकरण लिया जाना आवश्यक है। ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी पर सरकार सख्त बैठक का दूसरा प्रमुख मुद्दा प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा है। सरकार Meta से यह जानना चाहती है कि बच्चों के खिलाफ यौन शोषण संबंधी सामग्री (CSAM), फर्जी अकाउंट, ऑनलाइन ग्रूमिंग और आपत्तिजनक कंटेंट को रोकने के लिए कंपनी कौन-कौन से तकनीकी और प्रशासनिक कदम उठा रही है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय उपयोगकर्ताओं, विशेषकर बच्चों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म सुरक्षित बने रहें। AI और कंटेंट मॉडरेशन पर भी चर्चा सूत्रों के अनुसार बैठक में AI आधारित कंटेंट मॉडरेशन, डीपफेक सामग्री, फर्जी सूचनाओं की रोकथाम और Verified Accounts की सुरक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा होगी। सरकार चाहती है कि Meta भारतीय कानूनों और आईटी नियमों के अनुरूप अपनी नीतियों को और अधिक पारदर्शी बनाए तथा शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करे। डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर जोर भारत सरकार लगातार यह स्पष्ट कर रही है कि देश में कार्यरत सभी डिजिटल प्लेटफॉर्मों को स्थानीय कानूनों का पालन करना होगा। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी केवल कंटेंट होस्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उपयोगकर्ता सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उनकी जिम्मेदारी है। निष्कर्ष Meta की वैश्विक टीम के साथ होने वाली यह बैठक भारत सरकार और बड़ी टेक कंपनियों के बीच डिजिटल सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भारतीय कानूनों के अनुरूप बनाना है, ताकि उपयोगकर्ताओं का भरोसा मजबूत हो सके। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Meta जय राष्ट्र न्यूज़

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Meta की ग्लोबल टीम को भारत सरकार का समन, PM मोदी की Facebook पोस्ट और चाइल्ड सेफ्टी पर होगी जवाबदेही तय

नई दिल्ली: भारत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी Meta (Facebook और Instagram) की वैश्विक टीम को 5 और 6 अगस्त को नई दिल्ली में होने वाली उच्चस्तरीय बैठक के लिए तलब किया है। सरकार इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Facebook पोस्ट को अस्थायी रूप से ब्लॉक किए जाने, प्लेटफॉर्म पर Child Sexual Abuse Material (CSAM) से जुड़े मामलों, AI आधारित कंटेंट मॉडरेशन और सत्यापित (Verified) अकाउंट्स की सुरक्षा व्यवस्था पर जवाब मांगेगी। PM मोदी की पोस्ट पर उठे सवाल सरकार की नाराज़गी उस समय सामने आई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक Facebook पोस्ट कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंधित हो गई थी। Meta ने बाद में इसे तकनीकी त्रुटि (Technical Error) बताते हुए पोस्ट को बहाल कर दिया और खेद भी जताया। हालांकि, सरकार का कहना है कि केवल “तकनीकी गलती” का स्पष्टीकरण पर्याप्त नहीं है और इस मामले में विस्तृत जवाबदेही तय की जाएगी। चाइल्ड सेफ्टी और CSAM पर सख्त रुख बैठक में सरकार Meta से यह भी पूछेगी कि उसके प्लेटफॉर्म पर Child Sexual Exploitative and Abuse Material (CSAM) से जुड़े कंटेंट और विज्ञापनों को रोकने के लिए कौन-सी सुरक्षा व्यवस्थाएँ लागू हैं। हाल ही में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने भी Meta के प्लेटफॉर्म पर कथित CSAM विज्ञापनों को लेकर जांच शुरू की है। सरकार चाहती है कि कंपनी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर अधिक प्रभावी तकनीकी उपाय अपनाए। AI कंटेंट और Verified Accounts पर भी चर्चा सूत्रों के अनुसार बैठक में AI द्वारा तैयार किए गए कंटेंट, डीपफेक सामग्री, Verified Accounts की सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन की पारदर्शिता जैसे मुद्दे भी प्रमुख रहेंगे। सरकार का कहना है कि बड़ी डिजिटल कंपनियों को भारत के कानूनों और उपयोगकर्ता सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करना होगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर सरकार का जोर आईटी मंत्रालय का मानना है कि करोड़ों भारतीय उपयोगकर्ताओं वाले डिजिटल प्लेटफॉर्मों की जिम्मेदारी केवल कंटेंट होस्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें उपयोगकर्ता सुरक्षा, बाल संरक्षण और निष्पक्ष कंटेंट मॉडरेशन भी सुनिश्चित करना होगा। इसी उद्देश्य से Meta के वरिष्ठ वैश्विक अधिकारियों को सीधे नई दिल्ली बुलाकर विस्तृत चर्चा की जा रही है। निष्कर्ष Meta की वैश्विक टीम के साथ होने वाली यह बैठक भारत सरकार और बड़ी टेक कंपनियों के बीच डिजिटल सुरक्षा, कंटेंट मॉडरेशन और जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि भारत में संचालन करने वाले सभी डिजिटल प्लेटफॉर्मों को स्थानीय कानूनों, उपयोगकर्ता सुरक्षा और बच्चों के संरक्षण से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Meta जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत में AI, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर निवेश को नई गति, कई परियोजनाओं पर तेजी से काम

नई दिल्ली: भारत सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई नई परियोजनाओं और निवेश योजनाओं पर तेजी से काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य भारत को हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, चिप डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और AI नवाचार का प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाना है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारें निजी कंपनियों तथा वैश्विक निवेशकों के साथ मिलकर नई उत्पादन इकाइयों और अनुसंधान परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही हैं। AI मिशन को मिल रही नई गति सरकार के IndiaAI Mission के तहत देश में AI कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप्स, अनुसंधान, स्किल डेवलपमेंट और डेटा प्लेटफॉर्म को मजबूत किया जा रहा है। विभिन्न संस्थानों और उद्योगों के सहयोग से स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, रक्षा और प्रशासनिक सेवाओं में AI आधारित समाधान विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश बढ़ा Semicon India Programme के अंतर्गत सेमीकंडक्टर निर्माण, चिप पैकेजिंग और डिस्प्ले निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इन निवेशों से भारत वैश्विक चिप सप्लाई चेन में अपनी भूमिका मजबूत करेगा और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को नई दिशा मिलेगी। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत में नई इकाइयाँ स्थापित करने की प्रक्रिया में हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, सर्वर, डेटा सेंटर उपकरण और अन्य डिजिटल हार्डवेयर के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं और नई नीतियों का विस्तार किया जा रहा है। इससे भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य रखा गया है। रोजगार और स्टार्टअप्स को लाभ विशेषज्ञों के अनुसार इन परियोजनाओं से आने वाले वर्षों में हजारों उच्च कौशल वाले रोजगार सृजित होंगे। साथ ही AI, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन और चिप टेक्नोलॉजी से जुड़े भारतीय स्टार्टअप्स को भी नए अवसर मिलेंगे। सरकार उद्योग, शिक्षा संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। निष्कर्ष AI, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तेजी से बढ़ते निवेश भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे ले जा रहे हैं। सरकार की नई पहलें देश को वैश्विक तकनीकी और विनिर्माण हब बनाने के लक्ष्य को मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | IndiaAI Mission | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डिजिटल टेक्नोलॉजी सेक्टर को मिलेगा बड़ा बढ़ावा, नई सरकारी योजनाओं और निवेश प्रस्तावों पर काम तेज़

नई दिल्ली: भारत सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (Electronics Manufacturing) और डिजिटल टेक्नोलॉजी सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई नई योजनाओं और निवेश प्रस्तावों पर तेजी से काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य भारत को सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, मोबाइल निर्माण और डिजिटल हार्डवेयर के क्षेत्र में वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है। हाल के महीनों में विभिन्न नीतिगत सुधारों और प्रोत्साहन योजनाओं के बाद घरेलू और विदेशी निवेशकों की रुचि इस क्षेत्र में लगातार बढ़ रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अनुसार सरकार सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट निर्माण, चिप डिजाइन, डेटा सेंटर और उन्नत डिजिटल टेक्नोलॉजी से जुड़े कई नए निवेश प्रस्तावों पर राज्यों और उद्योग जगत के साथ मिलकर कार्य कर रही है। इन पहलों का उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और उच्च तकनीक आधारित रोजगार के अवसर पैदा करना है। स्टार्टअप और नवाचार को मिलेगा समर्थन सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF), स्टार्टअप इकोसिस्टम और अनुसंधान एवं विकास (R&D) परियोजनाओं के माध्यम से उभरती तकनीकी कंपनियों को भी प्रोत्साहन दे रही है। इससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), एम्बेडेड सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन और अगली पीढ़ी की डिजिटल तकनीकों पर काम करने वाले स्टार्टअप्स को नई गति मिलने की उम्मीद है। घरेलू विनिर्माण पर विशेष जोर नई योजनाओं के तहत सरकार स्थानीय स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, डिस्प्ले, बैटरी, सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा दे रही है। इससे भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भागीदारी मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मोबाइल, ऑटोमोबाइल, रक्षा और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों को भी लाभ मिलेगा। रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा नई सरकारी योजनाओं और प्रस्तावित निवेशों के माध्यम से आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल टेक्नोलॉजी क्षेत्र में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य भारत को उच्च तकनीक आधारित विनिर्माण अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करना और वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षक निवेश गंतव्य बनाना है। निष्कर्ष इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डिजिटल टेक्नोलॉजी क्षेत्र में नई सरकारी योजनाएँ भारत की औद्योगिक और तकनीकी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। सरकार का मानना है कि इन पहलों से निवेश, रोजगार, निर्यात और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई गति मिलेगी। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली नई परियोजनाओं पर काम तेज़, सरकार की कई निवेश योजनाएँ चर्चा में

नई दिल्ली: भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई नई परियोजनाओं और निवेश योजनाओं पर तेजी से काम शुरू किया है। हाल ही में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) और सेमिकॉन इंडिया 2.0 जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में निवेश का माहौल और मजबूत हुआ है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर हब के रूप में विकसित करना है। केंद्र सरकार के अनुसार नई योजनाओं के माध्यम से घरेलू मूल्य संवर्धन (Value Addition), सप्लाई चेन को मजबूत करने, भारतीय ब्रांड विकसित करने और अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन, निर्यात और रोजगार के नए अवसर बढ़ने की उम्मीद है। इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड से स्टार्टअप्स को मिला बढ़ावा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने जानकारी दी है कि इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) के माध्यम से अब तक 128 कंपनियों और स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा चुका है। यह निवेश आठ वेंचर कैपिटल फंडों के जरिए किया गया है, जिससे डीप-टेक, इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन और उन्नत विनिर्माण क्षेत्र में नवाचार को गति मिली है। मोबाइल और सेमीकंडक्टर सेक्टर पर बड़ा दांव सरकार ने हाल ही में ₹62,500 करोड़ की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) और ₹1,27,500 करोड़ की Semicon India 2.0 योजना को मंजूरी दी है। इन योजनाओं का उद्देश्य भारत में मोबाइल निर्माण, चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करना है। रोजगार और निवेश को मिलेगा लाभ विशेषज्ञों का मानना है कि इन योजनाओं से आने वाले वर्षों में अरबों रुपये का निवेश आकर्षित होगा और हजारों प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सरकार का लक्ष्य इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को अगले कुछ वर्षों में कई गुना बढ़ाना और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करना है। आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा देने वाली ये परियोजनाएँ Make in India, Digital India और Atmanirbhar Bharat अभियान को नई गति देंगी। सरकार का मानना है कि मजबूत घरेलू विनिर्माण क्षमता से आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। निष्कर्ष नई इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल विनिर्माण परियोजनाएँ भारत के तकनीकी और औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। सरकार की निवेश योजनाएँ, स्टार्टअप समर्थन और सेमीकंडक्टर मिशन मिलकर भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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