नंदुरबार: महाराष्ट्र के नंदुरबार की जिला कलेक्टर और IAS अधिकारी मिताली सेठी ने अपने तीन साल के जुड़वां बेटों का दाखिला एक सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र में कराया है। उनके इस फैसले ने लोगों का ध्यान खींचा है, क्योंकि आम तौर पर वरिष्ठ अधिकारी और आर्थिक रूप से सक्षम परिवार निजी pre-school को प्राथमिकता देते हैं। मिताली सेठी ने कहा कि उन्होंने यह फैसला किसी प्रतीकात्मक संदेश के लिए नहीं, बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मेहनत और बच्चों की देखभाल के तरीके पर भरोसा करके लिया।
नंदुरबार की जिला कलेक्टर हैं मिताली सेठी
मिताली सेठी महाराष्ट्र कैडर की IAS अधिकारी हैं और वर्तमान में नंदुरबार जिले की कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं।
जब उनके जुड़वां बेटे तीन साल के हुए, तब उन्होंने उन्हें स्थानीय सरकारी आंगनबाड़ी में भेजने का फैसला किया।
निजी स्कूल के बजाय चुनी आंगनबाड़ी
मिताली सेठी के परिवार में शुरुआत में इस फैसले को लेकर कुछ सवाल और आशंकाएं थीं।
लेकिन जिला कलेक्टर के तौर पर अलग-अलग आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करते हुए उन्होंने वहां के कामकाज को करीब से देखा था। इसी अनुभव ने उन्हें अपने बच्चों के लिए भी सरकारी आंगनबाड़ी चुनने का भरोसा दिया।
एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बदली सोच
मिताली सेठी ने बताया कि एक समर्पित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के काम ने उन पर खास प्रभाव डाला।
बच्चों के साथ उसके व्यवहार, creative activities और सीखने के तरीके को देखकर उन्हें लगा कि यहां बच्चों के शुरुआती विकास के लिए अच्छा माहौल उपलब्ध है।
‘किसी को संदेश देने के लिए नहीं लिया फैसला’
IAS अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य इस फैसले के जरिए कोई राजनीतिक या प्रशासनिक संदेश देना नहीं था।
उन्होंने कहा कि यह एक व्यक्तिगत निर्णय था, जो उन्होंने उपलब्ध सुविधा और वहां काम करने वाली टीम पर भरोसा देखकर लिया।
Early Childhood Education में आंगनबाड़ी की बड़ी भूमिका
भारत में आंगनबाड़ी केंद्र केवल पोषण योजनाओं तक सीमित नहीं हैं।
इन केंद्रों के जरिए बच्चों को pre-school education, nutrition, health monitoring और शुरुआती सामाजिक व cognitive development से जुड़ी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
सरकारी व्यवस्था पर भरोसे की बनी मिसाल
एक वरिष्ठ IAS अधिकारी द्वारा अपने बच्चों को सरकारी आंगनबाड़ी में भेजने के फैसले ने सरकारी pre-school system की गुणवत्ता और उसकी संभावनाओं पर नई चर्चा शुरू कर दी है।
यह मामला खास तौर पर इसलिए भी ध्यान खींच रहा है क्योंकि जिन सरकारी सुविधाओं की निगरानी अधिकारी खुद करते हैं, उनमें व्यक्तिगत स्तर पर भरोसा दिखाना अपेक्षाकृत कम देखने को मिलता है।
महाराष्ट्र में आंगनबाड़ी सुधार पर भी जोर
महाराष्ट्र में स्कूल और आंगनबाड़ी infrastructure सुधारने के लिए सरकार अलग-अलग models पर काम कर रही है।
हाल ही में पुणे जिला परिषद के education और anganwadi infrastructure model को राज्य के दूसरे जिलों में भी लागू करने की मंजूरी दी गई है।
सोशल मीडिया पर फैसले की चर्चा
मिताली सेठी का फैसला सोशल मीडिया और public discourse में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
कई लोग इसे सरकारी संस्थानों में विश्वास से जोड़ रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे इस बात की याद दिलाने वाला उदाहरण मान रहे हैं कि सरकारी व्यवस्थाओं की गुणवत्ता काफी हद तक स्थानीय implementation और कर्मचारियों की प्रतिबद्धता पर निर्भर करती है।
आंगनबाड़ी व्यवस्था के लिए सकारात्मक संदेश
इस फैसले से यह भी सामने आता है कि सही resources, trained staff और committed workers मिलने पर सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र early childhood education का मजबूत विकल्प बन सकते हैं।
मिताली सेठी ने अपने अनुभव के आधार पर यही भरोसा अपने बच्चों के लिए भी दिखाया है।
source – The Times of India / Hindustan Times
जय राष्ट्र न्यूज़

