Hospitals में Syringes के भारी Margins पर Maharashtra FDA सख्त, 747% तक का अंतर मिला; Price Control का Proposal

मुंबई, 7 सितंबर 2026: महाराष्ट्र Food and Drug Administration (FDA) ने hospitals में इस्तेमाल होने वाली syringes, IV sets, nebuliser masks और दूसरे medical consumables की कीमतों में भारी अंतर को लेकर चिंता जताई है। FDA Commissioner Tukaram Mundhe ने बताया कि विभाग की जांच में कई products की hospital purchase price और Maximum Retail Price (MRP) के बीच सैकड़ों से लेकर हजारों प्रतिशत तक का अंतर मिला है। ₹6.75 की Syringe, MRP ₹57.20 FDA की study में 10 ml Lifelong Meditech syringe की purchase price ₹6.75 पाई गई, जबकि उस पर MRP ₹57.20 दर्ज थी। यानी purchase price और MRP के बीच करीब 747% का अंतर था। IV Set में 2,841% तक Margin एक Medifusion IV set की खरीद कीमत ₹11.05 बताई गई, जबकि उसका MRP ₹325 था। FDA Commissioner के मुताबिक यह करीब 2,841% का margin बनता है। इसी तरह एक autofusion set की purchase price ₹70 और MRP ₹393 मिली, जो लगभग 461% का अंतर है। Oxygen और Nebuliser Masks में भी बड़ा अंतर जांच में nebuliser और oxygen masks की purchase price करीब ₹40–₹45 पाई गई, जबकि उनकी MRP ₹650 से ₹715 तक थी। इस हिसाब से price gap लगभग 1,300% से 1,600% तक पहुंच रहा था। NPPA को भेजा Price Regulation Proposal Maharashtra FDA ने इस समस्या को लेकर National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) को policy proposal भेजा है। FDA चाहता है कि hospitals में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख devices और consumables को Drug Price Control Order, 2013 की Section 4 के तहत price regulation के दायरे में लाया जाए। Affordable Healthcare पर FDA का जोर Tukaram Mundhe ने कहा कि medicines और medical consumables की affordability public health का बड़ा मुद्दा है। उनके मुताबिक कई essential products ऐसे हैं जिन पर केवल MRP declaration की requirement है, लेकिन effective price control नहीं है। इससे patient और hospital के बीच information asymmetry पैदा होती है। Pharma Sector में पहले से तेज कार्रवाई FDA ने पिछले तीन महीनों में pharmaceutical manufacturers, blood centres, storage facilities और laboratories की 2,485 inspections की हैं। इनमें 230 establishments के licences suspend और 38 licences cancel किए गए। इसके अलावा medical shops और pharmacies की 11,780 inspections हुईं, जिनमें 2,075 licences suspend और 394 cancel किए गए। अभी Final Price Cap नहीं Patients के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि syringes या दूसरे hospital consumables पर अभी कोई नया final price cap लागू नहीं हुआ है। FDA ने फिलहाल NPPA के सामने regulatory proposal रखा है। आगे price control लागू होगा या नहीं, इसका फैसला केंद्रीय pricing authority की प्रक्रिया के बाद होगा। source – The Indian Express / Maharashtra FDAजय राष्ट्र न्यूज़

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रघुवीर घाट में भूस्खलन, 15–20 गांवों का संपर्क प्रभावित; सड़क पर गिरीं विशाल चट्टानें

रत्नागिरी, महाराष्ट्र: रत्नागिरी और सातारा जिलों को जोड़ने वाले रघुवीर घाट में भारी भूस्खलन के कारण यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। 3 सितंबर की रात पहाड़ी से मिट्टी, पत्थर और बड़ी-बड़ी चट्टानें सड़क पर गिर गईं, जिसके बाद दोनों तरफ से वाहनों की आवाजाही रुक गई। इस घटना से घाट क्षेत्र के करीब 15 से 20 गांवों का रत्नागिरी से संपर्क प्रभावित हुआ है। रत्नागिरी-सातारा के बीच महत्वपूर्ण स्थानीय मार्ग रघुवीर घाट रत्नागिरी जिले के खेड क्षेत्र को सातारा की कंदाटी घाटी से जोड़ता है। आसपास के कई गांवों के लोग शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, बाजार और अन्य जरूरी कामों के लिए इसी रास्ते से खेड आते-जाते हैं। सड़क बंद होने से स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही पर बड़ा असर पड़ा है। स्कूली छात्रों की बस भी नहीं जा सकी आगे भूस्खलन का पता उस समय चला जब स्थानीय State Transport बस के चालक और परिचालक ने सुबह रास्ते पर बड़ी चट्टानें और मलबा देखा। यह बस आसपास के 15–20 गांवों से करीब 40–50 विद्यार्थियों को खेड लेकर जाती है। रास्ता पूरी तरह बंद होने के कारण बस को वापस लौटना पड़ा। बड़ी चट्टानों ने बढ़ाई प्रशासन की मुश्किल घटना की जानकारी मिलने के बाद Ratnagiri PWD, पुलिस और संबंधित प्रशासनिक टीमें मौके पर पहुंचीं। सड़क से मलबा हटाने के लिए भारी मशीनों और breakers का इस्तेमाल किया गया, लेकिन कई विशाल चट्टानों को हटाना आसान नहीं था। अधिकारियों ने जरूरत पड़ने पर blasting के जरिए चट्टानों को हटाने की योजना बनाई। छात्रों और ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ीं रास्ता बंद होने से स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ इलाज, नौकरी, खरीदारी और अन्य जरूरी कामों के लिए खेड आने वाले ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रघुवीर घाट स्थानीय गांवों के लिए महत्वपूर्ण connectivity route है। मानसून में पहले भी हो चुके हैं Landslides रघुवीर घाट में बारिश के मौसम के दौरान पहले भी भूस्खलन और चट्टानें गिरने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ताजा घटना के बाद स्थानीय लोगों ने संवेदनशील इलाकों का सर्वे कर स्थायी सुरक्षा उपाय करने की मांग फिर उठाई है। प्रशासन ने लोगों से रास्ता पूरी तरह सुरक्षित और यातायात के लिए बहाल होने तक सावधानी बरतने की अपील की है। source – Times of India / Loksattaजय राष्ट्र न्यूज़

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Devendra Fadnavis ने Samay Raina को किया सम्मानित; Maharashtra Cyber के मंच पर ‘Latent’ विवाद पर खुद ही ली चुटकी, अब Sunil Pal ने उठाए सवाल

मुंबई: Stand-up comedian Samay Raina एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई विवादित comedy show नहीं बल्कि Maharashtra Cyber का cyber-awareness campaign है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में Samay Raina को cybercrime awareness initiative में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया। यह कार्यक्रम 26 अगस्त 2026 को आयोजित हुआ था। इस कार्यक्रम में Maharashtra Cyber ने cyber fraud को लेकर awareness बढ़ाने के उद्देश्य से short film ‘Digital Arrest’ और ‘1930 Maharashtra Cyber Anthem’ लॉन्च किया। Samay Raina समेत entertainment industry के कई कलाकार इस initiative से जुड़े थे और उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया गया। अब 28 अगस्त 2026 को इस सम्मान पर comedian Sunil Pal की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद मामला फिर social media पर चर्चा में है। Sunil Pal ने Samay Raina को सम्मानित किए जाने पर सवाल उठाते हुए इसे गलत संदेश देने वाला बताया है। आखिर Samay Raina को क्यों किया गया सम्मानित? Samay Raina को उनकी comedy career या किसी particular show के लिए यह सम्मान नहीं दिया गया। Reports के मुताबिक उन्हें Maharashtra Cyber द्वारा चलाए जा रहे cybercrime awareness campaign में योगदान के लिए felicitate किया गया। इस campaign में ‘Digital Arrest’ नाम की awareness short film और 1930 cyber helpline को promote करने वाला Maharashtra Cyber Anthem शामिल है। Digital arrest scams पिछले कुछ वर्षों में cybercrime का बड़ा तरीका बनकर सामने आए हैं। इसमें fraudsters खुद को police, CBI, customs या दूसरी investigating agency का अधिकारी बताकर victim को डराते हैं और video call या phone के जरिए पैसे transfer करने का दबाव बनाते हैं। इसी तरह के scams को लेकर public awareness बढ़ाने के लिए Maharashtra Cyber ने celebrities को campaign में शामिल किया। मंच पर Samay Raina ने खुद Cyber Cell पर किया Joke सम्मान लेने के बाद Samay Raina ने अपने पुराने Maharashtra Cyber experience को लेकर मजाक किया, जिससे कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis और दूसरे celebrities हंस पड़े। Raina ने कहा कि Maharashtra Cyber के साथ उनका “पुराना रिश्ता” है और 1930 उनके लिए जाना-पहचाना number है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि Maharashtra Cyber इतनी active है कि कोई व्यक्ति India में हो या America में, agency उसे ढूंढ लेगी। उन्होंने अपने पिछले summons का जिक्र करते हुए यह भी मजाक किया कि इस बार Cyber Cell का officer उन्हें लेकर आया और परिणाम interrogation नहीं बल्कि felicitation निकला। इस comment पर CM Fadnavis समेत मंच पर मौजूद कई लोगों की हंसी छूट गई। CM Fadnavis से मांग लिया Biscuit कार्यक्रम का एक और clip social media पर तेजी से viral हुआ। सम्मान लेने के दौरान Samay Raina ने मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis से मजाकिया अंदाज में पास रखा biscuit लेने की अनुमति मांगी। उनके अचानक किए गए सवाल से मंच पर मौजूद लोग हंसने लगे और formal cyber-awareness programme कुछ देर के लिए stand-up comedy जैसे माहौल में बदल गया। Raina ने बाद में कार्यक्रम का video अपने social media account पर भी साझा किया। कार्यक्रम में Pankaj Tripathi समेत कई Celebrities Maharashtra Cyber के इस programme में Samay Raina अकेले entertainment personality नहीं थे। Reports के मुताबिक कार्यक्रम में: समेत कई जाने-माने कलाकार मौजूद थे। इन personalities को cyber-awareness film और anthem के जरिए लोगों तक cyber safety का message पहुंचाने में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। Fadnavis ने Cybercrime Awareness पर दिया जोर CM Devendra Fadnavis ने कार्यक्रम में cybercrime के बढ़ते खतरे को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि actors, singers और दूसरे लोकप्रिय चेहरे awareness messages को आम लोगों तक ज्यादा प्रभावी तरीके से पहुंचा सकते हैं। सरकार और cyber authorities का focus खास तौर पर digital arrest जैसे scams से लोगों को बचाना है। Cyber fraud की स्थिति में national cybercrime helpline 1930 पर शिकायत की जा सकती है। क्यों चर्चा में है Samay Raina और Maharashtra Cyber का ‘पुराना रिश्ता’? इस felicitation को लेकर social media पर सबसे ज्यादा चर्चा इसलिए हुई क्योंकि लगभग डेढ़ साल पहले Samay Raina का Maharashtra Cyber के साथ रिश्ता बिल्कुल अलग परिस्थिति में सामने आया था। February 2025 में उनके comedy show ‘India’s Got Latent’ के एक episode में YouTuber और podcaster Ranveer Allahbadia की एक sexually explicit टिप्पणी पर बड़ा विवाद हुआ था। उसके बाद अलग-अलग जगह complaints और FIRs दर्ज हुईं और Samay Raina समेत show से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की गई। Maharashtra Cyber ने भेजे थे Summons India’s Got Latent controversy के दौरान Maharashtra Cyber ने Samay Raina को questioning के लिए बुलाया था। उस समय Raina विदेश में थे और उन्होंने video conferencing के जरिए अपना statement दर्ज कराने की अनुमति मांगी थी, लेकिन Maharashtra Cyber ने personal appearance पर जोर दिया। बाद में Samay Raina मुंबई में agency के सामने पेश हुए थे। इसी background के कारण अब उसी Maharashtra Cyber के awareness programme में उन्हें सम्मानित किए जाने को social media users “full circle moment” बता रहे हैं। आज Sunil Pal ने क्यों किया विरोध? 28 अगस्त की fresh development में comedian Sunil Pal ने Samay Raina की felicitation को लेकर नाराजगी जताई है। Sunil Pal ने अपने video की शुरुआत “घोर कलयुग आ गया है” कहते हुए की और सवाल उठाया कि past controversies से जुड़े entertainer को government-linked मंच पर सम्मानित करना युवा comedians को क्या message देगा। Pal का तर्क था कि controversial या abusive content के बाद publicity हासिल करने और फिर public recognition मिलने से गलत precedent बन सकता है। यह Sunil Pal की व्यक्तिगत राय और आलोचना है; इसे Maharashtra government या किसी authority की official assessment नहीं माना जाना चाहिए। Sunil Pal ने नए Comedians को लेकर जताई चिंता Sunil Pal ने कहा कि उनके हिसाब से young performers को ऐसा impression नहीं मिलना चाहिए कि controversy और police cases popularity या recognition पाने का रास्ता हैं। उन्होंने Samay Raina और India’s Got Latent के past content को लेकर भी अपनी असहमति दोहराई। खबर लिखे जाने तक Samay Raina की ओर से Sunil Pal की इस fresh criticism पर कोई verified detailed response सामने नहीं…

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जलगांव में कांवड़ यात्रा के दौरान दर्दनाक हादसा; ट्रक की चपेट में आए बच्चे की मौत, गुस्साई भीड़ ने वाहन फूंका

जलगांव: महाराष्ट्र के जलगांव में कांवड़ यात्रा के दौरान एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक मासूम बच्चे की मौत हो गई। घटना 24 अगस्त 2026 की शाम ममुराबाद रोड इलाके में हुई। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक बच्चा मंदिर से दर्शन कर लौट रहा था, तभी तेज रफ्तार ट्रक ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया और गुस्साई भीड़ ने ट्रक में आग लगा दी। घटना के बाद पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। भीड़ ने सड़क पर प्रदर्शन किया, जिससे ममुराबाद रोड पर यातायात भी प्रभावित हुआ। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया। मंदिर से लौट रहा था बच्चा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बच्चा कांवड़ यात्रा के दौरान ममुराबाद रोड स्थित एक मंदिर में पूजा-अर्चना करने गया था। मंदिर से बाहर निकलने के बाद वह सड़क की ओर आया, तभी कथित तौर पर तेज रफ्तार और अनियंत्रित ट्रक ने उसे टक्कर मार दी। टक्कर इतनी गंभीर थी कि बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद आसपास मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। बच्चे की उम्र को लेकर अलग-अलग जानकारी हादसे की शुरुआती रिपोर्टों में बच्चे की उम्र को लेकर अंतर सामने आया है। NDTV और कुछ अन्य रिपोर्ट्स में बच्चे की उम्र 8 वर्ष बताई गई है, जबकि एक स्थानीय रिपोर्ट में उसे 10 वर्षीय प्रबल राजू गवली बताया गया है। इसलिए आधिकारिक पुलिस पुष्टि आने तक बच्चे की उम्र को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है। गुस्साई भीड़ ने ट्रक में लगाई आग बच्चे की मौत की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जमा हो गए। गुस्साई भीड़ ने दुर्घटना में शामिल ट्रक को रोक लिया और बाद में उसमें आग लगा दी। कुछ रिपोर्ट्स में चालक के साथ मारपीट किए जाने की बात भी सामने आई है। ट्रक देखते ही देखते आग की लपटों में घिर गया। दमकल विभाग को बुलाया गया, लेकिन तनावपूर्ण माहौल के कारण राहत और नियंत्रण की कार्रवाई में भी मुश्किलें आईं। सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन हादसे से नाराज लोगों ने बच्चे का शव सड़क पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शन की वजह से जलगांव-ममुराबाद रोड पर करीब दो घंटे तक यातायात बाधित रहा। दोनों तरफ वाहनों की कतारें लग गईं। प्रदर्शनकारी चालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे थे। Driver भी हुआ घायल घटना के बाद ट्रक चालक भी घायल हुआ। NDTV की रिपोर्ट में चालक को मामूली चोट लगने और इलाज के लिए अस्पताल ले जाए जाने की बात कही गई है। वहीं कुछ स्थानीय रिपोर्ट्स में भीड़ की पिटाई से उसके गंभीर रूप से घायल होने का दावा किया गया है। चालक की स्थिति को लेकर रिपोर्ट्स में अंतर है, इसलिए उसकी medical condition पर पुलिस या अस्पताल की आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस ने संभाला मोर्चा हादसे और उसके बाद हुई आगजनी की खबर मिलते ही पुलिस की बड़ी टीम मौके पर पहुंची। भीड़ को शांत करने और यातायात सामान्य करने की कोशिश शुरू की गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया। TV9 की 25 अगस्त की सुबह की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी शांत हुए और मामले की जांच शुरू कर दी गई। पुलिस के सामने दो अलग घटनाओं की जांच इस मामले में अब पुलिस के सामने केवल सड़क दुर्घटना ही नहीं, बल्कि दुर्घटना के बाद हुई हिंसा और आगजनी की जांच भी अहम होगी। एक ओर यह पता लगाया जाएगा कि ट्रक की रफ्तार कितनी थी, चालक की लापरवाही थी या नहीं और हादसा किन परिस्थितियों में हुआ। दूसरी ओर ट्रक में आग लगाने और चालक से कथित मारपीट में शामिल लोगों की पहचान भी जांच का हिस्सा बन सकती है। किस व्यक्ति के खिलाफ कौन-सी कानूनी धाराएं लगाई गई हैं, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी शुरुआती रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं है। कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा पर सवाल हादसे ने धार्मिक यात्राओं के दौरान traffic management को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। कांवड़ यात्रा जैसे आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल या समूहों में सड़कों से गुजरते हैं। ऐसे में भारी वाहनों की movement, speed control, barricading और police deployment बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। जलगांव की घटना में भी यह जांच का विषय हो सकता है कि जिस route पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे, वहां भारी वाहन किस व्यवस्था के तहत चल रहे थे। 24 अगस्त की घटना, 25 अगस्त को भी चर्चा में यह हादसा सोमवार, 24 अगस्त 2026 की शाम हुआ था। 25 अगस्त की सुबह भी घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया तथा समाचार माध्यमों में चर्चा में हैं। फिलहाल सबसे बड़ा तथ्य यह है कि कांवड़ यात्रा के दौरान एक मासूम बच्चे की जान चली गई। इसके बाद भड़के आक्रोश ने हिंसक रूप ले लिया और दुर्घटना में शामिल ट्रक को आग के हवाले कर दिया गया। पुलिस अब दुर्घटना और उसके बाद हुई घटनाओं की जांच कर रही है। नोट: बच्चे की उम्र और ट्रक चालक की चोट की गंभीरता को लेकर शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में अलग-अलग जानकारी है। आधिकारिक पुलिस विवरण आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। स्रोत – एनडीटीवी, टीवी9 भारतवर्ष, दैनिक भास्कर हिंदी जय राष्ट्र न्यूज़

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मराठी भाषा नियम के विरोध में मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों की 3 दिन की हड़ताल, यात्रियों की बढ़ी परेशानी

मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और app-based cab drivers के लिए कामचलाऊ मराठी का ज्ञान अनिवार्य किए जाने के विरोध में मुंबई के कुछ हिस्सों में ऑटो-टैक्सी चालकों ने तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल 24 अगस्त 2026 से शुरू हुई और 25 अगस्त को भी इसका असर कई इलाकों में देखने को मिला। यात्रियों को ऑटो और टैक्सी मिलने में दिक्कत हुई और कई जगह 40 से 50 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। प्रदर्शनकारी चालकों का कहना है कि उन्हें मराठी सीखने से आपत्ति नहीं है, बल्कि उनकी नाराजगी language test के तरीके, कम समय और कथित रूप से training से बाहर पूछे जा रहे सवालों को लेकर है। दूसरी तरफ महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि drivers को मराठी का expert नहीं बनना है, बल्कि काम के दौरान यात्रियों से बातचीत करने लायक basic Marathi आनी चाहिए। कांदिवली में सड़क पर उतरे चालक हड़ताल का सबसे ज्यादा असर मुंबई के Kandivali क्षेत्र में देखने को मिला। सोमवार सुबह Laljipada के पास Kandivali Link Road पर दर्जनों drivers ने रास्ता-रोको प्रदर्शन किया। कुछ समय के लिए traffic भी प्रभावित हुआ और मौके पर पुलिस बल तैनात करना पड़ा। Kandivali के अलावा Malad West, Santacruz, Dahisar और Andheri समेत कुछ अन्य इलाकों में भी demonstrations की खबरें सामने आईं। कई चालकों ने काम बंद करके दूसरे drivers से भी protest में शामिल होने की अपील की। क्यों हो रहा है विरोध? महाराष्ट्र Transport Department ने passenger vehicles चलाने वाले drivers के लिए working knowledge of Marathi की शर्त को सख्ती से लागू करना शुरू किया है। RTO अधिकारी drivers से बातचीत कर यह जांच रहे हैं कि वे दैनिक कामकाज के लिए जरूरी मराठी समझ और बोल सकते हैं या नहीं। Assessment process को video-record भी किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह शर्त नई नहीं है। Transport Minister Pratap Sarnaik के मुताबिक practical Marathi knowledge से जुड़ी requirement महाराष्ट्र में 1989 से मौजूद है, लेकिन अब इसे ज्यादा सख्ती से लागू किया जा रहा है। Drivers बोले- Marathi सीखने से आपत्ति नहीं प्रदर्शनकारी drivers का कहना है कि उनका विरोध मराठी भाषा से नहीं है। उनका आरोप है कि RTO assessment में ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं जो उन्हें दी गई training का हिस्सा नहीं थे। कई drivers ने यह भी कहा कि वे मराठी समझते हैं और टूटी-फूटी भाषा में बातचीत कर सकते हैं, लेकिन fluency हासिल करने के लिए उन्हें ज्यादा समय चाहिए। कुछ drivers ने यह भी कहा कि वे रोज की कमाई पर निर्भर हैं और language classes के लिए काम छोड़ना उनके लिए आर्थिक नुकसान का कारण बनता है। पहले Notice, फिर हो सकती है कार्रवाई सरकार के नियम के मुताबिक किसी driver में पर्याप्त working knowledge नहीं मिलने पर तत्काल licence cancel नहीं किया जाएगा। पहले उसे एक महीने का notice दिया जाएगा ताकि वह मराठी सीख सके। अगर एक महीने के बाद भी वह requirement पूरी नहीं करता, तो उसका badge तीन महीने के लिए suspend किया जा सकता है। इसके बाद भी जानबूझकर भाषा नहीं सीखने की स्थिति में badge और permit cancellation जैसी कार्रवाई हो सकती है। यानी किसी driver के language test में कमजोर पाए जाने भर से तुरंत permanent licence cancellation का नियम नहीं है। ₹5,000 से ₹25,000 Fine की खबरों पर सरकार की सफाई प्रदर्शन के दौरान drivers में यह डर भी फैला कि मराठी नहीं आने पर ₹5,000 से ₹20,000 या उससे ज्यादा का fine लगाया जा रहा है। Borivali RTO के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक ऐसी भारी penalty को लेकर misinformation फैलने की बात सामने आई है। Transport Minister Pratap Sarnaik ने कहा कि एक महीने की notice period पूरी होने से पहले अगर कोई RTO अधिकारी गलत तरीके से fine लगाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य drivers को परेशान करना नहीं है, बल्कि उन्हें practical Marathi सीखने का मौका देना है। Fadnavis बोले- Marathi Expert बनाना मकसद नहीं मामला बढ़ने के बाद Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis ने भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि सरकार किसी हिंदीभाषी या गैर-मराठी driver को Marathi language expert नहीं बनाना चाहती। उनके मुताबिक driver को केवल इतनी मराठी आनी चाहिए कि वह अपने काम से जुड़े सामान्य सवाल और यात्रियों से basic बातचीत कर सके। फडणवीस ने यह भी कहा कि drivers को भाषा सीखने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है और अभी तक किसी licence को केवल इस आधार पर cancel नहीं किया गया है। पहले दिन 8,217 Drivers की हुई जांच Transport Department के आंकड़ों के मुताबिक शुरुआती verification drive में पूरे महाराष्ट्र में 8,217 auto-rickshaw और taxi drivers की जांच की गई। इनमें 1,268 drivers को notice जारी किया गया। Mumbai Metropolitan Region में 3,995 drivers की जांच की गई, जिनमें 604 drivers working Marathi requirement पूरी नहीं कर पाए। बाकी जिलों में 4,222 drivers की जांच हुई और 664 को notice मिला। महाराष्ट्र में कुल करीब 9.65 लाख auto-rickshaw और taxi permits/badges बताए गए हैं। 1.65 लाख से ज्यादा Drivers ने ली Marathi Training सरकार के मुताबिक करीब 1.65 लाख non-Marathi auto और taxi drivers अब तक Marathi language classes में शामिल हो चुके हैं और कई को certificates भी दिए गए हैं। सरकार का तर्क है कि training programme drivers को basic conversation सीखने के लिए पर्याप्त अवसर देता है। वहीं विरोध कर रहे चालकों का कहना है कि इतनी बड़ी workforce के लिए training और assessment process को ज्यादा practical और flexible बनाने की जरूरत है। Bombay High Court पहुंचा मामला इस विवाद में 25 अगस्त को एक नया कानूनी मोड़ भी सामने आया। चार app-based cab drivers की ओर से Bombay High Court में PIL दायर किए जाने की प्रक्रिया सामने आई है, जिसमें Maharashtra government के 12 August notification को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि Marathi language requirement Articles 14, 19 और 21 के तहत उनके fundamental rights को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने यह भी तर्क दिया है कि Motor Vehicles Act, 1988 में driving licence रखने के लिए किसी खास भाषा की…

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महाराष्ट्र के अमरावती सरकारी अस्पताल में Ventilator Blast के बाद आग, 3 नवजात बच्चों की मौत; वार्ड में थे 39 बच्चे

अमरावती: महाराष्ट्र के अमरावती में सोमवार, 24 अगस्त 2026 की तड़के एक सरकारी महिला अस्पताल में बड़ा हादसा हो गया। अस्पताल की Neonatal Intensive Care Unit (NICU) में आग लगने से तीन नवजात बच्चों की मौत हो गई। घटना के समय वार्ड में कुल 39 नवजात बच्चे भर्ती थे। छह बच्चों को इलाज और निगरानी के लिए दूसरे Super Speciality Hospital में शिफ्ट किया गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित NICU में एक ventilator में कथित विस्फोट के बाद आग भड़की। हालांकि आग के वास्तविक तकनीकी कारण की आधिकारिक जांच अभी बाकी है। तड़के करीब 3:30 बजे लगी आग मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हादसा सोमवार सुबह करीब 3:30 बजे अमरावती के जिला महिला अस्पताल में हुआ। अस्पताल की तीसरी मंजिल पर नवजात बच्चों के लिए बनाए गए intensive care unit में अचानक आग और धुआं फैलने लगा। शुरुआती रिपोर्ट में एक ventilator में विस्फोट को आग की संभावित वजह बताया गया है। घटना होते ही अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारी तुरंत बच्चों को NICU से बाहर निकालने में जुट गए। NICU में भर्ती थे 39 नवजात हादसे के समय neonatal ward में कुल 39 नवजात बच्चों का इलाज चल रहा था। अस्पताल कर्मचारियों ने तेजी से evacuation शुरू किया और ज्यादातर बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बावजूद तीन नवजात बच्चों को नहीं बचाया जा सका। आग और धुएं से प्रभावित छह नवजात बच्चों को पास के Super Speciality Hospital में शिफ्ट किया गया है, जहां उनका इलाज और मेडिकल निगरानी की जा रही है। तीन बच्चों की मौत इस दर्दनाक हादसे में तीन नवजातों की जान चली गई। अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में बच्चों की मौत के पीछे आग से गंभीर रूप से प्रभावित होने और धुएं के कारण दम घुटने जैसी स्थितियों का जिक्र किया गया है। पोस्टमार्टम या विस्तृत आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद मौत के सटीक कारण की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। घटना ने अस्पताल में भर्ती नवजात बच्चों के परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। Doctors और Nurses ने तुरंत शुरू किया Rescue आग लगने के बाद ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और अस्पताल कर्मचारियों ने बच्चों को सुरक्षित निकालने का अभियान शुरू कर दिया। Medical equipment हटाकर नवजात बच्चों को तेजी से वार्ड से बाहर ले जाया गया। इसी वजह से वार्ड में मौजूद बाकी बच्चों को बड़े खतरे से बचाया जा सका। कुछ ही देर में दमकल विभाग को भी घटना की जानकारी दी गई और आग पर काबू पाने का काम शुरू हुआ। NICU के Beds और Medical Equipment को नुकसान आग के कारण NICU में मौजूद कई medical equipment और अन्य सामान को नुकसान पहुंचा है। सामने आई तस्वीरों और शुरुआती रिपोर्टों में वार्ड के अंदर आग से जले उपकरण और बिस्तर दिखाई देने की बात कही गई है। राहत की बात यह रही कि आग को अस्पताल के दूसरे हिस्सों तक फैलने से पहले नियंत्रित कर लिया गया। क्या Ventilator Blast ही आग की वजह था? शुरुआती जानकारी में ventilator में blast या explosion के बाद आग लगने की बात सामने आई है। लेकिन किसी बड़े हादसे के बाद वास्तविक कारण जानने के लिए electrical system, medical equipment, wiring, maintenance record और fire-safety arrangements की technical जांच जरूरी होती है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ventilator में विस्फोट ही आग का अंतिम रूप से प्रमाणित कारण था। घटना की जांच के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकेगी। Hospital की Fire Safety पर उठे सवाल NICU जैसे संवेदनशील वार्ड में आग लगने के बाद hospital fire safety को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे wards में ऐसे नवजात बच्चे भर्ती होते हैं जिन्हें oxygen support, ventilators, warmers और लगातार medical monitoring की जरूरत होती है। किसी emergency की स्थिति में उन्हें तत्काल दूसरी जगह ले जाना सामान्य मरीजों की तुलना में कहीं अधिक मुश्किल होता है। अब जांच में यह भी देखा जा सकता है कि अस्पताल में fire alarm, extinguishers, emergency exit और electrical safety की व्यवस्था निर्धारित standards के अनुसार थी या नहीं। छह बच्चे दूसरे अस्पताल में शिफ्ट हादसे में प्रभावित छह बच्चों को तत्काल नजदीकी Super Speciality Hospital भेजा गया है। डॉक्टर उनकी स्थिति पर नजर रख रहे हैं। फिलहाल सुबह तक सामने आई प्रमुख रिपोर्टों में तीन नवजातों की मौत की पुष्टि की गई है। इस breaking घटना में बच्चों की स्थिति और प्रशासनिक जांच को लेकर आगे और अपडेट आने की संभावना है। Chhindwara में भी हाल में हुआ था NICU हादसा अमरावती का हादसा इसलिए भी गंभीर चिंता पैदा करता है क्योंकि हाल में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के NICU में भी medical warmer में आग लगने की घटना हुई थी। उस हादसे में तीन बच्चे झुलसे थे और बाद में एक नवजात की मौत हुई थी। लगातार सामने आ रही इस तरह की घटनाएं सरकारी अस्पतालों में neonatal units की equipment maintenance और fire safety व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत को रेखांकित करती हैं। जांच के बाद साफ होगा हादसे का कारण फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि NICU में आग आखिर कैसे लगी और क्या इसे पहले रोका जा सकता था। शुरुआती जानकारी ventilator में विस्फोट की ओर इशारा कर रही है, लेकिन जांच में electrical fault, equipment malfunction और maintenance जैसे पहलुओं को भी देखे जाने की संभावना है। अमरावती जिला महिला अस्पताल की इस घटना में तीन परिवारों ने अपने नवजात बच्चों को खो दिया है। वहीं समय पर किए गए rescue operation के कारण वार्ड में मौजूद बड़ी संख्या में दूसरे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। नोट: यह एक developing story है। आग लगने की वजह के तौर पर ventilator blast की जानकारी शुरुआती रिपोर्टों पर आधारित है। जांच पूरी होने के बाद हादसे का वास्तविक कारण स्पष्ट होगा। स्रोत – एनडीटीवी, आईएएनएस, अमर उजाला, लाइव हिन्दुस्तान जय राष्ट्र न्यूज़

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मुंबई 3.0 की तैयारी! 124 गांवों को मिलाकर बनेगी ‘थर्ड मुंबई’, सिंगापुर-हांगकांग जैसी हाईटेक सिटी!

मुंबई: मुंबई महानगर क्षेत्र में एक नए शहरी केंद्र को विकसित करने की योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। ‘थर्ड मुंबई’ या Karnala-Sai-Chirner (KSC) New Town के नाम से प्रस्तावित यह शहर रायगढ़ जिले के 124 गांवों और करीब 323.44 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मुंबई और नवी मुंबई पर बढ़ते शहरी दबाव को कम करना और एक आधुनिक आर्थिक एवं लॉजिस्टिक्स हब तैयार करना है। 124 गांवों में बनेगा नया शहरी केंद्र थर्ड मुंबई में उरण, पनवेल और पेण तहसीलों के 124 गांव शामिल हैं। महाराष्ट्र सरकार ने अक्टूबर 2024 में इस क्षेत्र को KSC New Town के रूप में अधिसूचित किया था और MMRDA को New Town Development Authority बनाया गया है। यह इलाका अटल सेतु, नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट जैसे प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के बेहद करीब है। यही कनेक्टिविटी इस नए शहर को भविष्य के बड़े आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना का आधार है। सिंगापुर की कंपनी तैयार करेगी मास्टर प्लान महाराष्ट्र सरकार ने थर्ड मुंबई के मास्टर प्लान के लिए सिंगापुर की Surbana Jurong को कंसल्टेंट के तौर पर मंजूरी दी है। योजना में आधुनिक शहरी नियोजन, लॉजिस्टिक्स, बिजनेस डिस्ट्रिक्ट, आवासीय क्षेत्र और बेहतर परिवहन कनेक्टिविटी पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सिंगापुर या हांगकांग जैसी हाईटेक सिटी बनना अभी एक विजन/लक्ष्य के रूप में देखा जा रहा है, न कि पूरी तरह तैयार योजना के रूप में। विस्तृत मास्टर प्लान अभी विकास प्रक्रिया में है। ₹4,000 करोड़ का बड़ा बजट MMRDA के 2026-27 बजट में KSC New Town के लिए करीब ₹4,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। परियोजना का फोकस बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर है, ताकि नए शहरी क्षेत्र को मुंबई और नवी मुंबई के मौजूदा नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके। प्रस्तावित शहर में लॉजिस्टिक्स, डेटा सेंटर, IT/ITeS, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए जगह विकसित करने की योजना बताई गई है। जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों की चिंता परियोजना को लेकर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। MMRDA ने 124 गांवों के जमीन मालिकों से सहमति और संबंधित दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया शुरू की है। वहीं, कुछ स्थानीय किसान और सामाजिक कार्यकर्ता परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि विकास के नाम पर किसानों की जमीन और स्थानीय हितों की पर्याप्त सुरक्षा होनी चाहिए। मुंबई के भविष्य की नई तस्वीर? थर्ड मुंबई का लक्ष्य मौजूदा मुंबई और नवी मुंबई पर बढ़ते दबाव को कम करना है। एयरपोर्ट, पोर्ट और अटल सेतु से कनेक्टिविटी के कारण यह क्षेत्र भविष्य में कारोबार, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। फिलहाल परियोजना अभी निर्माण और नियोजन के चरण में है। आने वाले समय में मास्टर प्लान, जमीन अधिग्रहण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की प्रगति तय करेगी कि ‘मुंबई 3.0’ वास्तव में देश के सबसे आधुनिक नए शहरों में अपनी जगह बना पाती है या नहीं। स्रोत: MMRDA, Indian Express, NDTV, Times of India Jai Rashtra News

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नन्हे कदम, बड़ा सवाल! सड़क की मांग लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे बच्चे

सोलापुर: महाराष्ट्र के सोलापुर में सड़क की खराब स्थिति को लेकर कुछ स्कूली बच्चों का जिला प्रशासन के कार्यालय पहुंचना चर्चा का विषय बन गया। बच्चों ने अधिकारियों के सामने अपने इलाके की सड़क से जुड़ी समस्या रखी और बेहतर सड़क निर्माण की मांग की। बच्चों के इस कदम ने स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ लोगों का भी ध्यान खींचा है। सड़क की समस्या लेकर बच्चों ने उठाई आवाज जानकारी के मुताबिक, बच्चों का कहना था कि उनके इलाके में सड़क की स्थिति खराब होने के कारण उन्हें स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है। बारिश के दौरान समस्या और बढ़ जाती है, जिससे रास्ते पर कीचड़ और पानी जमा होने से आवाजाही मुश्किल हो जाती है। बच्चों ने इसी समस्या को लेकर प्रशासन के सामने अपनी बात रखने का फैसला किया। जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे बच्चे बच्चे अपनी मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। उनका उद्देश्य अधिकारियों तक यह संदेश पहुंचाना था कि सड़क की समस्या का जल्द समाधान किया जाए। बच्चों के इस कदम को देखकर कार्यालय में मौजूद लोगों का भी ध्यान उनकी ओर गया। इतनी कम उम्र में अपनी बुनियादी जरूरत के लिए प्रशासन के सामने आवाज उठाने की तस्वीरें और वीडियो चर्चा में हैं। बारिश में बढ़ जाती है परेशानी स्थानीय लोगों के अनुसार, खराब सड़क की समस्या बारिश के दौरान और गंभीर हो जाती है। पानी जमा होने और सड़क पर कीचड़ होने के कारण पैदल चलने वाले बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए रोजाना इस रास्ते से गुजरना मजबूरी है। ऐसे में सड़क की स्थिति में सुधार की मांग लंबे समय से उठती रही है। बच्चों ने प्रशासन के सामने रखा सवाल बच्चों का जिला प्रशासन तक पहुंचना सिर्फ सड़क निर्माण की मांग नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं को लेकर एक बड़ा सवाल भी माना जा रहा है। जब स्कूली बच्चों को खुद अपनी समस्या लेकर सरकारी कार्यालय पहुंचना पड़े, तो यह स्थानीय स्तर पर सड़क और नागरिक सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों को कार्रवाई की उम्मीद बच्चों की शिकायत सामने आने के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन सड़क की स्थिति का निरीक्षण कराकर जल्द जरूरी कदम उठाएगा। लोगों का कहना है कि सड़क की मरम्मत या निर्माण होने से बच्चों के साथ-साथ आसपास रहने वाले सभी लोगों को राहत मिलेगी। बच्चों की पहल बनी चर्चा का विषय अपनी समस्या को लेकर सीधे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचने वाले बच्चों की पहल ने यह संदेश दिया है कि अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए आवाज उठाने की कोई उम्र नहीं होती। बच्चों की मांग अब प्रशासन के सामने है और लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग सड़क की समस्या के समाधान के लिए कब तक कार्रवाई करता है। निष्कर्ष सोलापुर में सड़क की समस्या को लेकर बच्चों का जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचना चर्चा में है। बच्चों ने प्रशासन के सामने खराब सड़क और स्कूल आने-जाने में होने वाली परेशानी को रखा और सड़क सुधार की मांग की। अब उम्मीद है कि प्रशासन इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण करेगा और सड़क की समस्या का स्थायी समाधान निकालेगा। Source: स्थानीय रिपोर्ट्स / जिला प्रशासन से संबंधित जानकारी जय राष्ट्र न्यूज़

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सोलापुर में जिला परिषद स्कूल का स्लैब गिरा, 13 छात्र और 2 शिक्षक घायल

सोलापुर: महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के अक्कलकोट तालुका के बबलाद गांव में जिला परिषद स्कूल के पोर्च का स्लैब अचानक गिर गया। हादसे में 13 छात्र घायल हो गए। कुछ रिपोर्टों में 2 शिक्षकों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और घायल बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। अचानक गिरा स्लैब, बच्चों में मची अफरा-तफरी जानकारी के अनुसार, हादसा 10 अगस्त 2026 को दोपहर के समय हुआ। स्कूल के पोर्च की छत की एक परत अचानक नीचे गिर गई और मलबा छात्रों के ऊपर जा गिरा। मलबा गिरते ही स्कूल में चीख-पुकार मच गई। मौजूद शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने तुरंत बच्चों को मलबे से बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। 13 छात्र घायल, 2 शिक्षकों के घायल होने की भी खबर हादसे में कुल 13 छात्रों के घायल होने की पुष्टि कई रिपोर्टों में हुई है। वहीं, कुछ रिपोर्टों और वीडियो रिपोर्ट में 2 शिक्षकों के भी घायल होने की जानकारी दी गई है। घायल छात्रों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक किसी भी बच्चे को गंभीर चोट नहीं आई और उपचार के बाद घायल छात्रों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई गई है। करीब 25 साल पुरानी है स्कूल की इमारत बताया जा रहा है कि यह स्कूल भवन करीब 25 साल पुराना है। यह सोलापुर जिला परिषद द्वारा संचालित कन्नड़ माध्यम का स्कूल है, जिसमें पहली से सातवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है। स्कूल में करीब 250 छात्र पढ़ते हैं। ऐसे में स्कूल भवन के एक हिस्से का अचानक गिरना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर संभाला मोर्चा घटना की जानकारी मिलते ही एंबुलेंस के साथ जिला परिषद के अधिकारी मौके पर पहुंचे। घायल बच्चों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। प्रशासन की ओर से स्कूल भवन की स्थिति का जायजा लेने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि स्लैब गिरने की वास्तविक वजह क्या थी। जर्जर स्कूल भवन को लेकर उठे सवाल हादसे के बाद स्थानीय स्तर पर स्कूल की पुरानी इमारत को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पुरानी इमारत को गिराकर नई स्कूल बिल्डिंग बनाने की मांग उठाई है। सवाल यह भी है कि यदि भवन पहले से कमजोर था तो वहां बच्चों की कक्षाएं क्यों संचालित की जा रही थीं। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों के पुराने सरकारी स्कूल भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान खींचा है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता स्कूल में बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे में भवन के किसी हिस्से का गिरना गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय है। अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता अब यह है कि स्कूल की इमारत की पूरी तरह जांच कराई जाए और जब तक भवन सुरक्षित घोषित न हो, तब तक बच्चों की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। प्रशासन के सामने अब बड़ी चुनौती हादसे के बाद प्रशासन के सामने स्कूल भवन की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की चुनौती है। यदि भवन के अन्य हिस्से भी कमजोर पाए जाते हैं, तो उनकी मरम्मत या पुनर्निर्माण की जरूरत पड़ सकती है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुराने स्कूल भवनों का नियमित निरीक्षण भी जरूरी माना जा रहा है। निष्कर्ष सोलापुर के बबलाद गांव में जिला परिषद स्कूल के पोर्च का स्लैब गिरने से 13 छात्र घायल हो गए। कुछ रिपोर्टों में 2 शिक्षकों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। राहत की बात यह है कि किसी गंभीर जनहानि की सूचना नहीं है और घायल छात्रों की स्थिति स्थिर बताई गई है। लेकिन इस हादसे ने करीब 25 साल पुराने स्कूल भवन की सुरक्षा और सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब प्रशासन की जांच और स्कूल भवन की आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी। Source: ABP News / TV9 Bharatvarsh / स्थानीय प्रशासन से संबंधित रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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मुंबई में भारी बारिश के बीच बड़ा हादसा, लैंडस्लाइड में 2 लोगों की मौत; कई लोगों के दबे होने की आशंका

मुंबई: मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच एक बड़ा हादसा सामने आया है। बारिश के कारण हुए लैंडस्लाइड में कम से कम दो लोगों की मौत की खबर है, जबकि मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। हादसे के बाद मौके पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया है। भारी बारिश के बीच हुआ हादसा मुंबई और आसपास के इलाकों में लगातार बारिश के कारण कई जगह जलभराव और यातायात प्रभावित हुआ है। इसी बीच पहाड़ी/ढलान वाले इलाके में मिट्टी और मलबा खिसकने से यह हादसा हुआ। लैंडस्लाइड के बाद आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचे। मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका हादसे के बाद सबसे बड़ी चिंता मलबे के नीचे फंसे लोगों को लेकर है। राहत एवं बचाव दल मलबा हटाकर संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। अंधेरा, लगातार बारिश और गीली मिट्टी के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें भी सामने आ सकती हैं। बचावकर्मी सावधानी से मलबा हटाने में जुटे हैं ताकि किसी जीवित व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे। दो लोगों की मौत की खबर प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हादसे में दो लोगों की मौत हुई है। हालांकि, मलबे में और लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ सकती है। प्रशासन की ओर से घटनास्थल की स्थिति का आकलन किया जा रहा है और बचाव अभियान जारी है। मुंबई में बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें मुंबई में मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण हर साल निचले इलाकों में जलभराव, पेड़ गिरने और सड़क यातायात प्रभावित होने जैसी घटनाएं सामने आती हैं। इस बार भी लगातार बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लैंडस्लाइड की घटना ने बारिश के दौरान संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। राहत-बचाव अभियान जारी घटना के बाद स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा राहत दल मौके पर मौजूद हैं। मलबा हटाने के लिए आवश्यक मशीनरी और बचाव उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों की प्राथमिकता मलबे में फंसे संभावित लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकालना और घायलों को अस्पताल पहुंचाना है। बारिश के बीच लोगों से सावधानी बरतने की अपील मुंबई में भारी बारिश को देखते हुए प्रशासन की ओर से लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की अपील की जा रही है। खासकर पहाड़ी ढलानों, निचले इलाकों और जलभराव वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। लैंडस्लाइड वाले इलाकों में बढ़ी चिंता लगातार बारिश के कारण जमीन में नमी बढ़ने से ढलान वाले इलाकों में मिट्टी खिसकने का खतरा बढ़ जाता है। मुंबई और आसपास के कुछ हिस्सों में ऐसी घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। मौजूदा हादसे के बाद प्रशासन के सामने संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती है। निष्कर्ष मुंबई में भारी बारिश के बीच हुए लैंडस्लाइड ने बड़ा हादसा खड़ा कर दिया है। हादसे में दो लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका के चलते राहत और बचाव अभियान जारी है। लगातार बारिश के बीच प्रशासन की चुनौती अब मलबे में फंसे संभावित लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित इलाके में आगे किसी दुर्घटना को रोकने की है। मामले में मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर आधिकारिक अपडेट का इंतजार है। Source: स्थानीय प्रशासन / पुलिस एवं आपदा प्रबंधन से संबंधित रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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