केरल में शिक्षक भर्ती की मांग, 114 दिन से प्रदर्शन जारी; महिला अभ्यर्थी ने मुंडवाया सिर
तिरुवनंतपुरम: केरल में लोअर प्राइमरी स्कूल टीचर यानी एलपीएसटी पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन 114 दिन से जारी है। आंदोलन तेज करते हुए ऑल केरल एलपीएसटी रैंक होल्डर्स एसोसिएशन की सचिव एस. वलारमथी ने सार्वजनिक रूप से अपना सिर मुंडवा लिया और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। 114 दिन से सचिवालय के बाहर प्रदर्शन एलपीएसटी रैंक सूची में शामिल अभ्यर्थी तिरुवनंतपुरम के सचिवालय के बाहर लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि लोक सेवा आयोग की रैंक सूची में नाम होने के बावजूद बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को नियुक्ति नहीं मिली है। 29 अक्टूबर तक आंदोलन 114 दिन पूरे कर चुका था। महिला अभ्यर्थी ने मुंडवाया सिर एसोसिएशन की सचिव एस. वलारमथी ने 26 अक्टूबर को विरोध के प्रतीक के रूप में अपना सिर मुंडवा लिया। इसके बाद उन्होंने नियुक्तियों की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की। क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें? अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में छात्र-शिक्षक अनुपात को 1:30 से घटाकर 1:25 करना, प्रधान शिक्षक के खाली पदों को लोक सेवा आयोग के दायरे में लाना, मौजूदा रैंक सूची की वैधता बढ़ाना और नई भर्ती अधिसूचना को फिलहाल टालना शामिल है। क्यों जरूरी है छात्र-शिक्षक अनुपात में बदलाव? प्रदर्शनकारियों का कहना है कि छात्र-शिक्षक अनुपात को 1:25 किए बिना मौजूदा रैंक सूची से पर्याप्त नियुक्तियां संभव नहीं होंगी। एस. वलारमथी ने कहा कि सरकार के पास नियुक्तियां करने का सबसे व्यावहारिक रास्ता यही है। सरकार पर वादा पूरा न करने का आरोप अभ्यर्थियों के मुताबिक सितंबर के अंत में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने उनकी कई मांगों पर सहमति जताने का आश्वासन दिया था। लेकिन प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लिखित आदेश जारी नहीं किए गए और नियुक्तियों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बारिश में भी जारी रही भूख हड़ताल वलारमथी ने आरोप लगाया कि भूख हड़ताल कर रहे प्रदर्शनकारियों को अस्थायी छत लगाने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे उन्हें बारिश में बैठना पड़ा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लिखित सरकारी आदेश मिलने तक आंदोलन जारी रखेंगे। 5,000 से ज्यादा अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर रिपोर्टों के मुताबिक मौजूदा रैंक सूची से जुड़े 5,000 से अधिक उम्मीदवार नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों को आशंका है कि रैंक सूची की वैधता खत्म होने पर उनकी नौकरी की उम्मीद भी खत्म हो सकती है। सरकार पर बढ़ा दबाव लंबे समय से जारी आंदोलन और महिला अभ्यर्थी के सिर मुंडवाने के बाद यह मामला राज्य की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। अब दबाव सरकार पर है कि वह भर्ती, रैंक सूची की वैधता और खाली पदों को लेकर स्पष्ट समयसीमा जारी करे। स्रोत – द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, पीटीआई, आउटलुक इंडिया, केरल कौमुदी जय राष्ट्र न्यूज़

