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रुपया फिर फिसला! डॉलर के मुकाबले ₹95.67 तक पहुंचा, महंगे कच्चे तेल और ईरान तनाव का दबाव

भारतीय रुपया एक बार फिर दबाव में नजर आया है। मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर ₹95.67 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया। रुपये में इस गिरावट के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है और इससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनता है। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव देखने को मिल रहा है। रुपये की गिरावट को सीमित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से बाजार में हस्तक्षेप किए जाने की भी खबर है। बाजार विशेषज्ञों की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की मजबूती और ईरान से जुड़े घटनाक्रम पर बनी हुई है। रुपये में लगातार कमजोरी का असर भारत के आयात बिल पर पड़ सकता है। खासतौर पर कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। इससे आने वाले समय में महंगाई पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है। हालांकि, कमजोर रुपये से निर्यात करने वाली कुछ कंपनियों को फायदा मिल सकता है, क्योंकि उन्हें विदेशी मुद्रा में होने वाली कमाई को रुपये में बदलने पर अधिक रकम प्राप्त होती है। फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर निर्भर करेगी। अगर तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो रुपये पर आगे भी दबाव देखने को मिल सकता है। स्रोत: Reuters Jai Rashtra News

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