श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा का वरिष्ठ कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा मारा गया। भारतीय सेना के अनुसार यह ऑपरेशन खांसाहिब-यूसमर्ग क्षेत्र में चलाया गया और मुठभेड़ के बाद उसका शव हथियारों तथा अन्य सामग्री के साथ बरामद किया गया। सुरक्षा एजेंसियां उसे जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों में हुए कई बड़े आतंकी हमलों से जोड़ती रही हैं।
खांसाहिब इलाके में हुआ एनकाउंटर
सेना के अनुसार विशेष खुफिया जानकारी मिलने के बाद बडगाम के ऊंचाई वाले इलाके में संयुक्त अभियान शुरू किया गया।
ऑपरेशन के दौरान आतंकियों की ओर से गोलीबारी हुई, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की। मुठभेड़ में हाशिम मूसा मारा गया और इलाके में तलाशी अभियान चलाया गया।
कौन था हाशिम मूसा?
हाशिम मूसा का वास्तविक नाम मोहम्मद आसिफ बताया गया है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा एक वरिष्ठ पाकिस्तानी आतंकी था।
कुछ आधिकारिक सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वह पाकिस्तान की Special Services Group यानी SSG में रह चुका था। इन दावों की स्वतंत्र सार्वजनिक पुष्टि सीमित है, लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने उसे अत्यधिक प्रशिक्षित आतंकी बताया है।
कई आतंकी हमलों से जोड़ती रही हैं एजेंसियां
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार हाशिम मूसा उस चार सदस्यीय लश्कर समूह का हिस्सा था जो 2022 के बाद जम्मू-कश्मीर में कई बड़े हमलों में कथित तौर पर शामिल रहा।
इस समूह को कुलगाम के हलान, पुंछ के देहरा की गली, रियासी में शिव खोरी तीर्थयात्रियों की बस पर हमले, गगनगीर और अन्य घटनाओं से जोड़ा गया है।
पहलगाम हमले से भी जुड़ा था नाम
सुरक्षा एजेंसियों ने मूसा का नाम 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की जांच में भी संदिग्ध के तौर पर जोड़ा था।
उस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार मूसा, सुलेमान शाह का करीबी सहयोगी था, जिसे एजेंसियां पहलगाम हमले की साजिश से जोड़ती रही हैं।
चार सदस्यीय समूह का आखिरी सक्रिय सदस्य था
सेना के अनुसार हाशिम मूसा उस चार सदस्यीय LeT समूह का आखिरी सक्रिय सदस्य था।
इस समूह के अन्य सदस्य जुनैद भट, सुलेमान शाह और यासिर अलग-अलग सुरक्षा अभियानों में पहले ही मारे जा चुके थे। सेना का कहना है कि मूसा के मारे जाने के बाद यह पूरा समूह निष्क्रिय हो गया है।
Operation Sheruwali के तहत महीनों से चल रही थी तलाश
रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा बल मई 2026 से हाशिम मूसा की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।
इसी लंबे intelligence-led अभियान को Operation Sheruwali नाम दिया गया था। तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी के आधार पर उसकी गतिविधियों को ट्रैक किया गया और अंततः बडगाम में ऑपरेशन चलाया गया।
घटनास्थल से हथियार और सैन्य सामग्री बरामद
मुठभेड़ के बाद सेना ने मूसा का शव बरामद किया।
साथ ही घटनास्थल से हथियार और ऐसी सामग्री भी मिली जिसे सेना ने “war-like stores” बताया है। इसके बाद आसपास के जंगल और ऊंचाई वाले इलाकों में तलाशी अभियान जारी रखा गया।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी कार्रवाई
भारतीय सेना का कहना है कि हाशिम मूसा के मारे जाने से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय लश्कर नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
हालांकि उसके खिलाफ लगाए गए विभिन्न आतंकी मामलों और भूमिकाओं से जुड़े आरोप सुरक्षा एजेंसियों के दावों पर आधारित हैं। संबंधित मामलों में अंतिम कानूनी निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करते हैं।
source – Indian Army / The Indian Express / Hindustan Times / The Times of India / NDTV
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