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मणिपुर के सभी 16 जिलों में शांति समितियों का गठन, राज्य में शांति बहाली के लिए सरकार की नई पहल

इंफाल, 4 नवंबर 2026: मणिपुर सरकार ने राज्य में शांति और सामुदायिक सद्भाव मजबूत करने के लिए सभी 16 जिलों में जिला स्तरीय शांति समितियों के गठन का आदेश जारी किया है। इन समितियों का उद्देश्य विभिन्न समुदायों के बीच बातचीत बढ़ाना, आपसी विश्वास बहाल करना और तनावपूर्ण परिस्थितियों का शांतिपूर्ण समाधान निकालना है। जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में काम करेंगी समितियां राज्य के गृह विभाग द्वारा 30 अक्टूबर को जारी आदेश के अनुसार प्रत्येक जिले की शांति समिति की अध्यक्षता संबंधित जिलाधिकारी करेंगे। समिति में पुलिस अधीक्षक, प्रशासनिक अधिकारी, विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, गैर-सरकारी संस्थाएं, पत्रकार, शिक्षक, चिकित्सक और सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी शामिल होंगे। हर 15 दिन में होगी बैठक सरकारी आदेश के अनुसार शांति समितियां कम से कम प्रत्येक पखवाड़े में एक बार बैठक करेंगी। इन बैठकों में स्थानीय समस्याओं, सामुदायिक तनाव, अफवाहों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर चर्चा की जाएगी। जरूरत पड़ने पर समितियां अधिक बैठकें भी आयोजित कर सकेंगी। समुदायों के बीच संवाद बढ़ाने पर जोर समितियों को पड़ोसी जिलों और अलग-अलग समुदायों के बीच बातचीत को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा विस्थापित लोगों की सुरक्षित आवाजाही, आवश्यक सेवाओं की बहाली और सामान्य आर्थिक गतिविधियां शुरू कराने के उपाय भी सुझाए जा सकेंगे। 2023 से जातीय हिंसा से प्रभावित है मणिपुर मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय संघर्ष के कारण लंबे समय तक तनाव की स्थिति बनी रही है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े और कई क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। सरकार का कहना है कि नई समितियां समुदायों के बीच विश्वास बहाल करने में सहयोग करेंगी। क्या शांति समितियों को विशेष अधिकार मिलेंगे? सरकारी आदेश के अनुसार ये समितियां केवल परामर्श और समन्वय का काम करेंगी। इन्हें पुलिस या जिला प्रशासन के कानूनी अधिकार नहीं दिए गए हैं। समितियां अपनी सिफारिशें जिलाधिकारी के माध्यम से राज्य के गृह विभाग को भेजेंगी। सरकार की इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विभिन्न समुदाय बातचीत में कितनी भागीदारी करते हैं और उनकी समस्याओं का समाधान किस तरह किया जाता है। स्रोत: मणिपुर गृह विभाग, पीटीआई, द प्रिंट, द संगाई एक्सप्रेस। जय राष्ट्र न्यूज़

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